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ओरेवा ग्रुप ने कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें तोड़ीं, 12 में होनी थी मरम्मत, 7 महीने में ही कर डाली…

जनवरी 2020 में मोरबी कलेक्टर के ऑफिस में एक मीटिंग हुई. इस मीटिंग में अजंता कंपनी (ओरेवा ग्रुप) और मोरबी नगर पालिका के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट तैयार होता है. ये कॉन्ट्रैक्ट था मच्छु नदी पर बने केबल ब्रिज को लेकर. अब आता है 30 अक्टूबर 2022 का दिन. इस दिन मोरबी में केबल ब्रिज टूटने (Morbi Bridge Collapse) से भयानक हादसा हुआ. हादसे में 140 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई.
अब हादसे के बाद ओरेवा ग्रुप पर कई सवाल उठ रहे हैं. ओरेवा ग्रुप के पास ही मोरबी के केबल ब्रिज के देखभाल की जिम्मेदारी थी. ब्रिज मरम्मत के लिए लगभग 7 महीने से बंद था. इसके बाद हाल ही में 26 अक्टूबर को इसे आम लोगों के लिए खोला गया था. लेकिन हादसे के बाद मोरबी नगर पालिका ने बताया कि कंपनी ने ब्रिज खोलने से पहले प्रशासन से फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं लिया था.
अब मोरबी पुलिस ने मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार किया है, इनमें 2 ओरेवा ग्रुप के मैनेजर भी शामिल हैं. प्रशासन ने हादसे के बाद बताया कि ओरेवा ग्रुप को ब्रिज की मरम्मत के लिए 8 से 12 महीने का समय लेना था, लेकिन जल्दबाजी में ब्रिज 7 महीने में ही खोल दिया गया. ब्रिज की मरम्मत के लिए ओरेवा ग्रुप और प्रशासन के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट भी हुआ था.

कॉन्ट्रैक्ट क्या था?

गुजरात की राजधानी गांधीनगर से 300 किलोमीटर दूर मोरबी में मच्छु नदी पर बना ये केबल ब्रिज 143 साल पुराना था. इस ग्रुप की मरम्मत की जानी थी, इसका जिम्मा मार्च 2022 में अजंता मैनुफैक्चरिंग को मिला था. ये कंपनी घड़ियां, एलईडी लाइट, सीएफएल बल्ब, ई-बाइक बनाती है. अहमदाबाद में अजंता कंपनी का हेडक्वार्टर है, जिसे ‘ओरेवा हाउस’ कहा जाता है.
जनवरी 2020 में तैयार नगर पालिका और अजंता कंपनी के बीच तैयार ये कॉन्ट्रेक्ट इसी साल मार्च 2022 में साइन हुआ. मोरबी नगरपालिका के चीफ ऑफिसर संदीप सिंह ने आजतक को बताया कि मार्च में हुए कॉन्ट्रैक्ट में अजंता कंपनी को 15 साल के लिए पुल के रखरखाव और मरम्मत का ठेका दिया गया था. इसके तहत, ओरेवा ग्रुप 2037 तक इस केबल ब्रिज का कामकाज और रखरखाव का जिम्मा संभालेगी.


कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से सफाई, रखरखाव और टिकट कलेक्शन का काम भी प्राइवेट कंपनी को ही करना था. इसके साथ ही टिकट की कीमत का जिक्र भी कॉन्ट्रैक्ट में था. इसके मुताबिक टिकट की कीमत हर साल 2 रूपये बढ़नी थी. उदाहरण के लिए, पहले साल में टिकट की कीमत 15 रूपये, दूसरे साल 17 रूपये और तीसरे साल 19 रूपये.
हादसे के बाद टिकट की भी कई तस्वीरें सामने आईं, जिसमें टिकट की कीमत कॉन्ट्रैक्ट से ज्यादा दिखी. कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से टिकट की कीमत 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए 10 रूपये और बड़ों के लिए 15 रूपये होनी चाहिए थी, लेकिन ये बच्चों के लिए 12 रूपये और बड़ों के लिए 17 रूपये थी.

हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब ओरेवा ग्रुप को इस ब्रिज का कॉन्ट्रैक्ट मिला हो. इससे पहले साल 2008 में पुल का कॉन्ट्रैक्ट भी इसी कंपनी को दिया गया था. ये कॉन्ट्रैक्ट 10 साल यानी 2018 तक था. 2018 के बाद इस पुल का कॉन्ट्रैक्ट किसी को नहीं दिया गया. फिर इसी साल मार्च में दोबारा ओरेवा ग्रुप को कॉन्ट्रैक्ट मिला. 

Sunil Agrawal
Sunil Agrawal
Chief Editor - Pragya36garh.in, Mob. - 9425271222
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