Category: व्यापार

  • लॉकडाउन खत्म के साथ समय की पाबंदी भी हो खत्म -नितिन अग्रवाल

    लॉकडाउन खत्म के साथ समय की पाबंदी भी हो खत्म -नितिन अग्रवाल

    व्यापारियों को व्यापार के संचालन समय में मिले पूरी छूट

    खरसियारायगढ़ जिले में लॉकडाउन दिनाँक 30 सितम्बर 2020 तक प्रभावी है एवं 1 अक्टूबर से सम्भवतः बाजारों में लेनदेन पुनः प्रारंभ होगा।कोरोना महामारी में जनता कर्फ्यू के बाद से क्रमशः लगे लॉकडाउन के प्रभाव से जिला भी अछूता नहीं रहा है।लॉकडाउन ने सभी उच्च,मध्यम एवं अल्प सभी आय वर्गों के लोगों की कमर तोड़कर रख दी है।किंतु इससे सबसे ज्यादा वे लोग प्रभावित हुए हैं जो दैनिक रोजगार से अपने परिवार का लालन पालन करते हैं एवं ऐसे लोगों का व्यापार लगभग समाप्त ही हो चुका है जिनका व्यापार ठेले चौपाटी आदि से जुड़ा था।खरसिया के युवा व्यवसायी एवं सामाजिक कार्यकर्ता नितिन अग्रवाल ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जिलाधीश महोदय का ध्यानाकर्षण करते हुए कहा है कि 30 सितम्बर की रात पूर्ण हो रहे लॉकडाउन के साथ समय की पाबंदी भी हटाया जाना सभी लोगों के लिए हितकर है।संचालन की समय सीमा का कम होना दुकानों में भीड़ का कारण बनता है एवं साथ ही साथ इससे कमजोर वर्ग की दैनिक रोजीरोटी पर बुरा प्रभाव भी पड़ता है।समय के संचालन में पूरी तरह छूट जिले की बिगड़ी अर्थव्यवस्था को सहारा देगा साथ ही साथ कमजोर वर्गों के लिए दो वक्त की रोटी का जरिया बनेगा।युवा व्यवसायी नितिन अग्रवाल ने इस सम्बंध में माननीय जिलाधीश से मार्मिक अपील करते हुए कहा है कि इस सम्बंध में भावनात्मक रूप से विचार किया जाना जरूरी है एवं समय सीमा के दायरे में छूट के साथ यदि व्यापार संचालन का अवसर दिया जाए तो यह सभी के लिए हितकर होगा।

  • मुकेश अंबानी का हो गया बिग बाजार, रिलायंस रिटेल ने 24,713 करोड़ रुपए में खरीदा फ्यूचर समूह का कारोबार

    मुकेश अंबानी का हो गया बिग बाजार, रिलायंस रिटेल ने 24,713 करोड़ रुपए में खरीदा फ्यूचर समूह का कारोबार

    मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (आरआरवीएल) ने फ्यूचर ग्रुप का रिटेल, होलसेल लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउस बिजनेस 24713 करोड़ रुपए में खरीद लिया है। इस मेगा डील से कंपनी की रिटेल कारोबार में स्थिति और भी मजबूत हो जाएगी। कंपनी ने शनिवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी दी।
    कंपनी द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, “रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) की सहायक कंपनी रिलायंस रिटेल वेंचर लिमिटेड (आरआरवीएल) ने आज फ्यूचर समूह के खुदरा और थोक कारोबार तथा लॉजिस्टिक्स और भंडारण कारोबार के एकमुश्त 24,713 करोड़ रुपये के दाम में अधिग्रहण की घोषणा की।”

    भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में अमेजन जैसी दिग्गज कंपनियों को टक्कर देने के लिए रिलायंस रिटेल अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

    डील के तहत फ्यूचर ग्रुप कुछ कंपनियों को फ्यूचर एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एफईएल) में मर्ज कर रहा है। इस योजना के अंतर्गत रिटेल और होलसेल उपक्रम को रिलायंस रिटेल एंड फैशन लाइफस्टाइल लिमिटेड में स्थानांतरित किया जा रहा है।

    यह आरआरवीएल की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है; लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग अंडरटेकिंग को आरआरवीएल को हस्तांतरित किया जा रहा है।

    रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड की निदेशक ईशा अंबानी ने कहा, फ्यूचर ग्रुप के प्रसिद्ध ब्रांडों के साथ-साथ उसके व्यावसायिक ईको सिस्टम को संरक्षित करने में हमें प्रसन्नता होगी। भारत में आधुनिक रिटेल के विकास में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हमें आशा है कि छोटे व्यापारियों, किराना स्टोर्स और बड़े उपभोक्ता ब्रांडों की सहभागिता के दम पर रिटेल सेक्टर में विकास की गति बनी रहेगी, हम देश भर में अपने उपभोक्ताओं को बेहतर मूल्य प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी ने रिटेल बिजनेस में तीन करोड़ किराना मालिकों और 12 करोड़ किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा था। फ्यूचर समूह के खुदरा व्यापार, थोक और सप्लाई चेन व्यवसाय के अधिग्रहण से रिलायंस अपनी स्थिती मजबूत कर रहा है।

    आरआरवीएल ने कहा कि इस अधिग्रहण योजना के तहत फ्यूचर समूह अपनी कुछ कंपनियों का विलय फ्यूचर एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एफईएल) में कर रहा है। कंपनी ने बताया कि इस योजना के तहत फ्यूचर समूह के खुदरा और थोक कारोबार को आरआरवीएल की सहायक कंपनी रिलायंस रिटेल एंड फैशन लाइफस्टाइल लिमिटेड (आरआरएफएलएल) को हस्तांतरित किया जाएगा। वह 1200 करोड़ प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए निवेश करेगी और फ्यूचर एंटरप्राइजेज लिमिटेड में 6.09 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी।

  • होटल व्यवसायी ने उठाया सवाल, सोशल मीडिया में किया वायरल, कहा सबकुछ बंद तो टैक्स चालू क्यों ? हम सहयोग को तैयार लेकिन………

    होटल व्यवसायी ने उठाया सवाल, सोशल मीडिया में किया वायरल, कहा सबकुछ बंद तो टैक्स चालू क्यों ? हम सहयोग को तैयार लेकिन………

    रायगढ़ के ट्रिनिटी होटल संचालक शरणदीप सिंह ने सरकार का ध्यान व्यापारियों की समस्यायों की ओर खींचते हुए सरकार से सवाल किए हैं। उनका कहना था कि जबकि हमारा व्यापार बंद है हमें राहत पैकेज क्यों नहीं। टैक्स से हमें छूट क्यों नहीं। 

    ये है वायरल मैसेज-

    सभी व्यापारियों से निवेदन

    मान्यवर प्रधानमंत्रीजी एवं मुख्यमंत्रीजी,

    आपने 14 अप्रैल तक पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा की और सभी से ऑफिस, दुकान, कारखाने बन्द रखने का आग्रह किया।

    हम जानना चाहते हैं कि आप मालिकों के बारे में क्या सोचते हैं:? जिस व्यापारी वर्ग से आप त्याग चाहते हैं, उन्हें सहयोग की आपकी क्या योजना है:? क्योंकि बन्द की घोषणा हो गई है,और व्यापार ठप्प हैं, व्यापारी कैसे गुजारा करेंगे?

    वेतन – चालू:
    बिजली बिल – चालू
    टैक्स – चालू
    बैंक का ब्याज – चालू
    GST – चालू
    PF – चालू
    ESIC – चालू
    संपत्ति कर – चालू

    हमारे लिए कोई राहत नहीं, हमें 30 अप्रैल तक घर में रहकर सहयोग करने में भी कोई आपत्ति नहीं, यदि सरकार यह बोझ हटा दे; सरकार समझौता करे, और राहत को सभी व्यापारों तक बढ़ाये।

    – सभी औद्योगिक, कमर्शियल, बिजली बिल अगले 6 महीने के लिए आधे कर दिये जाएँ।

    – अगले 3 महीने तक GST का 50% कंपनी अपने पास ही रखे।

    – अगले 3 महीने तक ब्याज न देने की छूट दी जाय।

    – सभी बैंकों और NBFC (गैर बैंकिंग वित्तीय निगम) को दी जाने वाली मासिक किश्त अगले 3 महीने के लिए स्थगित की जाय, विलम्ब पर किसी प्रकार का चार्ज न लगाया जाय।

    – अगले 3 महीने तक कर्मचारियों का P.F. (भविष्य निधि) कम्पनी नहीं, सरकार वहन करे।

    – अगले 3 महीने तक कर्मचारियों का ESIC (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) का हिस्सा कम्पनी नहीं, सरकार वहन करे।

    – वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए सभी व्यापारिक संपत्तियों पर संपत्ति कर आधा कर दिया जाय।

    जिस प्रकार आप किसानों को अकाल में ब्याज से मुक्ति देते हैं, यह समय हम व्यापारियों के लिए भी व्यापार नहीं होने से अकाल ही है।

  • क्या सरकार ने नया वित्तीय वर्ष जुलाई से कर दिया? जानिए सच्चाई

    क्या सरकार ने नया वित्तीय वर्ष जुलाई से कर दिया? जानिए सच्चाई

    सोशल मीडिया ग्रुप्स में ये बात जंगल में आग की तरह फैल गई कि 1 अप्रैल 2020 से शुरू होने वाला नया वित्तीय वर्ष बदल गया है,  इससे पहले कि आप आगे पढ़ें हम पहले ही बता दें कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं होने जा रहा

    नई दिल्ली. सोशल मीडिया ग्रुप्स में ये बात जंगल में आग की तरह फैल गई कि 1 अप्रैल 2020 से शुरू होने वाला नया वित्तीय वर्ष बदल गया है. इससे पहले कि आप आगे पढ़ें हम पहले ही बता दें हैं कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं होने जा रहा. यानी वित्तीय वर्ष जो फिलहाल 1 अप्रैल से 31 मार्च तक है, वो ही जारी रहेगा. वित्त मंत्रालय ने भी इस बात को स्पष्ट किया है।

    तो फिर कंफ्यूजन कहां से आया?

    दरअसल सरकार ने पिछले साल स्टांप ड्यूटी एक्ट में बदलाव किया है. इसके तहत स्टॉक मार्केट में क्लीयरिंग एजेंसीज और डिपॉजिटरीज के लिए सरकार पूरे देश में एक समान स्टांप ड्यूटी सिस्टम लाना चाहती थी। इस समय किसी भी शेयर या डिबेंचर की खरीद बिक्री होती है तो उस पर किसी एक राज्य में स्टांप ड्यूटी ज्यादा है तो किसी दूसरे राज्य में कम है. एक ही चीज़ कैलकुलेशन करने में अलग अलग राज्य के हिसाब से होने की वजह से बहुत असुविधा होती है,  इसके अलावा इसमें स्टांप ड्यूटी चोरी का स्कोप भी है। सरकार इसे रोकना चाहती है और ऐसा यूनिफॉर्म सिस्टम लाना चाहती है जिसमें पूरे देश में शेयर डिबेंचर आदि स्टॉक मार्केट प्रोडक्ट पर एक-समान रूप से स्टांप ड्यूटी लगे. इसका हिसाब किताब ऐसा हो कि ये सेंटर के पास जमा हो और उसका हिस्सा राज्य को दिया जाए। सरकार ने इस बदलाव को लागू करने के लिए पहले 9 जनवरी 2020 की तारीख रखी थी,  बाद में इसे बढ़ाकर 1 अप्रैल 2020 कर दी और अब कोरोना (Coronavirus) की वजह से इसे टालकर 1 जुलाई 2020 कर दिया।

    सारी गफलत कुछ खास लोगों की वजह से हुई जो कई दिन से मांग कर रहे हैं कि वित्त वर्ष (Financial Year) कोरोना के नुकसान की वजह से बढ़ा दिया जाए, इसलिए वो हर नोटिफिकेशन में इसी तरह की कुछ बात ढूंढ रहे हैं। कुछ दिन पहले RBI के वित्त वर्ष के बारे में भी ऐसी ही गलत खबर चली और अब सोशल मीडिया पर ये लिखकर चलाया गया  कि ये फाइनेंशियल ईयर में बदलाव है। जबकि सच तो ये है कि ये स्टांप ड्यूटी के नये नियम लागू करने की तारीख का टलना भर है, जंगल में आग की तरह सोशल मीडिया ग्रुप्स में ये बात फैल गई कि वित्तीय वर्ष बदल गया है,  फिर तुरंत हरकत में आए वित्त मंत्रालय ने साफ किया कि ऐसा कुछ भी नहीं है,  ये केवल स्टांप ड्यूटी के नये नियम लागू करने का मामला है।

  • मुकेश अंबानी का बड़ा धमाका, अमेजन, फ्लिपकार्ट को टक्कर देने के लिए लांच किया जियो मार्ट

    मुकेश अंबानी का बड़ा धमाका, अमेजन, फ्लिपकार्ट को टक्कर देने के लिए लांच किया जियो मार्ट

    दिल्ली। देश के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी ने एक बार फिर से धमाका किया है। अब उनकी नजर आनलाइन रिटेल बिजनेस पर है। भारत में ऑनलाइन खरीदारी का चलन बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में अमेजन और फ्लिपकार्ट की बादशाहत कायम है। लोग इनसे जमकर सामान खरीद रहे हैं। लेकिन इन ई-कॉमर्स कंपनियों को अब तगड़ी चुनौती मिलने जा रही है। भारत के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की रिलायंस रिटेल लिमिटेड ने ‘जियो मार्ट’ की शुरुआत कर दी है।जियो मार्ट में रजिस्ट्रेशन के लिए कंपनी ने जियो टेलीकॉम यूजर्स को आमंत्रण भी भेजना शुरू कर दिया है। जियो मार्ट को कंपनी ने ‘देश की नई दुकान’ कहा है। इसकी शुरुआत मुंबई के नवी मुंबई, ठाणे और कल्याण से होगी। रिलायंस रिटेल ने आधिकारिक रूप से इसकी लॉन्चिंग की घोषणा कर दी है। और कहा है कि आने वाले समय में इसका विस्तार किया जाएगा। कंपनी ने कहा कि व़ो जल्द ही जियो मार्ट एप भी लॉन्च करेेगी।
  • चीनी ई-कॉमर्स कंपनी क्लब फैक्ट्री ने बेचा नकली सामान, एफआईआर दर्ज

    चीनी ई-कॉमर्स कंपनी क्लब फैक्ट्री ने बेचा नकली सामान, एफआईआर दर्ज

    दिल्ली. चीनी ई-कॉमर्स कंपनी क्लब फैक्ट्री, उसके निदेशकों जियालुन ली, गर्वित अग्रवाल और सीएफओ अश्विनी रस्तोगी पर प्रसिद्ध ब्रांड्स के नकली सामान बेचने पर आईपीसी की धारा 420 और 406 के तहत धोखाधड़ी करने को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है। यह शिकायत लखनऊ निवासी आलोक कक्कड़ ने वजीराबाद पुलिस थाने में दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने कहा है कि क्लब फैक्ट्री ने लोकप्रिय ब्रांडों पर भारी छूट का विज्ञापन देकर एक आपराधिक षड्यंत्र के तहत ग्राहकों को नकली उत्पाद दिए हैं।25 नवंबर को मिला था ऑर्डरशिकायतकर्ता ने क्लब फैक्ट्री से टाइटन घड़ी खरीदी थी, जिस पर 86 प्रतिशत की छूट थी, और रे-बन के दो सनग्लासेज ऑर्डर किए थे, जिस पर 90 प्रतिशत की छूट दी गई थी। उन्हें 25 नवंबर को ऑर्डर मिला, जिसे खोलने पर उन्हें पता चला कि ऑर्डर किए गए दोनों उत्पाद नकली हैं। इसके बाद उन्होंने कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए टोलफ्री नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की। हालांकि इस पर उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। वहीं, क्लब फैक्ट्री की वेबसाइट पर सेलर का नाम महाकाल एंटरप्राइज और परफेक्ट टाइम्स दिया गया था। शिकायतकर्ता ने कंपनी को इन्वॉइस की एक प्रति के लिए ईमेल किया था, लेकिन उन्हें इन्वॉइस की वह प्रति नहीं दी गई।

    पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मामले की आगे की जांच की जा रही है

    क्लब फैक्ट्री से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर शिकायतकर्ता ने टाइटन और रे-बन के कस्टमर केयर से संपर्क साधा। इसके बाद उन्हें पता चला कि दोनों कंपनियों का क्लब फैक्ट्री से कोई संबंध नहीं है और न ही वे अपने उत्पादों को क्लब फैक्ट्री के जरिए बेचते हैं। वहीं कक्कड़ ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि क्लब फैक्ट्री के टोलफ्री नंबर पर दोबारा बात करने पर उनके प्रतिनिधियों ने समस्या का समाधान करने के बजाय उन्हें धमकी दे दी। शिकायतकर्ता को कंपनी से मिली आपराधिक धमकी से संबंधित आईपीसी की धारा 506 के तहत भी कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। एफआईआर में कंपनी के दो निदेशकों, जियालुन ली और गर्वित अग्रवाल, कंपनी के सीएफओ अश्विनी रस्तोगी और क्लब फैक्ट्री के शिकायत अधिकारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 406, 506 और 120 बी के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और आपराधिक धमकी देने को लेकर मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मामले की आगे की जांच की जा रही है।
  • बिना हॉल मार्क नहीं बिक सकेंगे सोने के आभूषण, 15 जनवरी को जारी होगी अधिसूचना

    बिना हॉल मार्क नहीं बिक सकेंगे सोने के आभूषण, 15 जनवरी को जारी होगी अधिसूचना

    दिल्ली। देशभर में अब सोने के आभूषण बिना हॉलमार्क के नहीं बिक सकेंगे. सरकार ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की. उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने शुक्रवार को कहा कि सरकार गुणवत्ता सुनिश्चित करने के इरादे से स्वर्ण आभूषणों और कला कृतियों के लिये हॉलमार्क (गुणवत्ता की मुहर) की व्यवस्था 15 जनवरी से अनिवार्य करेगी. उन्होंने कहा कि स्वर्ण आभूषणों और कला कृतियों पर हॉलमार्क अनिवार्य करने को लेकर उपभोक्ता मामलों का विभाग 15 जनवरी 2020 को इस बारे में अधिसूचना जारी करेगा।

    हालांकि जौहरियों को बिना हॉलमार्क वाले अपने पुराने सोने को बेचने के लिए एक साल की मोहलत दी जाएगी. देशभर के ज्वैलर्स को हॉलमार्क लेने के लिए 1 साल का वक्त दिया जाएगा. इसी दौरान ज्वैलर्स को पुराने सोने के स्टॉक को खत्म भी करना होगा।

    भारतीय मानक ब्‍यूरो के 234 जिलों में 877 केंद्र खोले गए हैं. देशभर में अब तक केवल 26,019 ज्‍वैलर्स ने ही हॉल मार्क ले रखा है. देशभर में छोटे बड़े करीब 6 लाख ज्वैलर्स हैं.

  • 8 सालों से 100 करोड़ नही देने वाले NTPC से, ब्याज सहित वसूले सरकार ! रायगढ़ को चारागाह बनाने में तुली एनटीपीसी.. लारा संघर्ष के युवाओं ने फिर भरी हुंकार..!!

    8 सालों से 100 करोड़ नही देने वाले NTPC से, ब्याज सहित वसूले सरकार ! रायगढ़ को चारागाह बनाने में तुली एनटीपीसी.. लारा संघर्ष के युवाओं ने फिर भरी हुंकार..!!

    8 सालों से 100 करोड़ नही देने वाले NTPC से ब्याज सहित वसूले सरकार

    एनटीपीसी के कारण 8वर्षों में सामाजिक-आर्थिक-शेक्षणीक नुकसान की समीक्षा हो?

    गलतफहमी न पाले एनटीपीसी की अब रमन-अमन की सरकार है?

    लारा-संघर्ष का प्रतिनिधि मंडल जल्द ही भुपेश बघेल से मिलेगा

    रायगढ़। लारा संघर्ष के युवाओं ने छत्तीसगढ़ सरकार सहित भु-विस्थापितों को गुमराह करने का आरोप एनटीपीसी पर लगाते हुए कहा है कि सन 2011-12 के प्रशासनिक अनुबंध के अनुसार 100 करोड़ रुपये मेडिकल कॉलेज के निर्माण में देने हेतु कहा गया था जो कि छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा शासकीय मेडिकल कॉलेज रायगढ़ में खोलने के लिये अनुदान के रूप में था। जिसमें प्रभावितों ओर भु-विस्थापितों के परिवारजनों के मुफ्त में इलाज के उद्देश्य से था।लारा-संघर्ष ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आग्रह किया कि छत्तीसगढ़ सरकार को एनटीपीसी ने वर्ष 2011-12 में यह अनुदान के रूप में रायगढ़ में मेडिकल कॉलेज को 100 करोड़ रुपये देगी जो कि अब तक 8 वर्ष बीत जाने के बाद भी एनटीपीसी ने नही दिया। जिसकी भरपाई को इस उद्योगिक कम्पनी से बैंक ब्याज दर से ब्याज सहित वसूलना चाहिए।

    एनटीपीसी रायगढ़ को चारागाह बनाने पर तुली हुई है न तो किसान हित में काम कर रही है और न ही जनहित में ऐसी कंपनियों को रायगढ़ जिले का दोहन करने के मामले में समेकित रूप से जांच होनी चाहिए। जिसमें शासकीय, सामाजिक और कृषि समीक्षकों जैसे प्रतिनिधियो की नियुक्ति कर पूर्ण समीक्षा करवाना चाहिए। जिसमें योजना प्रभावितों के परिजनों का कार्ड भी नही बनवाना की जांच होनी चाहिए तदोपरांत एनटीपीसी कम्पनी पर न्यायिक और दण्डात्मक कार्यवाही होनी चाहिए।एनटीपीसी प्रबंधन न तो भुविस्थापितों को उनका मुआवजा दे रही है और न ही भूमिहीन और तेंदूपत्ता संग्रहनकर्ताओं को उनका पुनर्वास राशि दिया जा रहा है और साथ ही साथ रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए दी जाने वाली राशि के संबंध में भी सरकार को एनटीपीसी के अधिकारियों द्वारा गुमराह किया जा रहा है।

    देना था 100 करोड़ 25 करोड़ देकर निपटाया

    लारा संघर्ष के द्वारा प्रेस जारी कर बताया गया कि विगत दिनों एनटीपीसी के उच्च अधिकारियों द्वारा माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को मेडिकल कॉलेज रायगढ़ के निर्माण के लिए 25 करोड़ की राशि दिए जाने की बात कह कर गुमराह करने की कोशिश की गई जबकि एनटीपीसी द्वारा लारा परियोजना हेतु भूमि अर्जन की प्रगति के आधार पर रायगढ़ में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज को 100 करोड़ का अनुदान दिए जाने की बात भूमि अधिग्रहण से पहले कही गई थी।आज जब एनटीपीसी के लिए जमीन अधिग्रहण की कार्यवाही पूरी हो चुकी है, प्रथम फेस का काम पूरा होकर विद्युत उत्पादन शुरू हो चुका है। इस स्थिति में रायगढ़ मेडिकल कॉलेज को पूरा 100 करोड़ मिल जाना चाहिए था। वहाँ मात्र 25 करोड़ की राशि देकर एनटीपीसी के अधिकारी वाहवाही लूटने की कोशिश कर रहे हैं। इस संबंध में लारा-संघर्ष जल्द ही माननीय मुख्यमंत्री जी से मिलकर जांच कराने एवम दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही करने की मांग करेगा

  • भैय्या इस बैंक में पैसा जमा है तो तुरंत निकालें, दिवालिया होने की कगार पर खड़ी है बैंक

    भैय्या इस बैंक में पैसा जमा है तो तुरंत निकालें, दिवालिया होने की कगार पर खड़ी है बैंक

    दिल्ली। देश में बैंकिंग सेक्टर के बुरे दिन आ गए हैं. ऐसा लगता है. एक के बाद एक बैंक दिवालिया होते जा रहे हैं और लोगों की मेहनत का पैसा डूबता जा रहा है।

    सूत्रों के मुताबिक सरकार वित्तीय अनियमितताओं के चलते संकट में फंसी दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन यानि कि डीएचएफएल के खिलाफ गंभीर धोखाधड़ी की जांच का आदेश दे सकती है. यदि ऐसा हुआ तो डीएचएफएल में एक लाख लोगों की जमा एफडी फंस सकती हैं।

    कंपनी पर कुल 83,873 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है. डीएचएफएल ने 25 ऐसी कंपनियों को 14 हजार करोड़ रुपये का कर्ज बांटा है जिनका मुनाफा महज लाख रुपये था।

  • रायगढ़ के ट्रांसपोर्टर और गोदावरी का ठेका, इसमें मिला है राजनीति का तड़का, खुलकर हो रहा 2 नंबर का धंधा

    रायगढ़ के ट्रांसपोर्टर और गोदावरी का ठेका, इसमें मिला है राजनीति का तड़का, खुलकर हो रहा 2 नंबर का धंधा

    एनटीपीसी के अधिकारी और सरकार के कुछ सपूत , सपोलों से करवा रहे करोड़ों के कोयले की हेरा फेरीअधिकारियों और ठेकेदार पर मिलीभगत कर कोयले में चार कोल और मिट्टी मिक्सिंग का आरोपसरकारी साइडिंग छोड़ प्राइवेट साइडिंग पर आ रही कोयले की रेक

    रायगढ़। सरकार और प्रशासन के नाक के नीचे यह कोल तस्कर अपने मंसूबों पर कैसे कामयाब हो सकते हैं। यह तभी संभव है जब पूरा तंत्र इनकी सांठगांठ का हिस्सा हो और रायगढ़ में तो कुछ ऐसा ही हो रहा है। यहां सरकार के नुमाइंदों की बात करें या प्रशासन के अधिकारियों की सब एक से बढ़कर एक करामाती हैं । और तो और महारत्न कंपनी जिसका नाम और गुणगान पूरे देश भर में है, जिसका नाम एनटीपीसी है, उसके अधिकारी भी इस मिलीभगत का हिस्सा बन रहे हैं और ठेकेदार की ओर से करोड़ों की कोयला अफरातफरी के गुनाहगार एक दो नहीं बल्कि पूरा का पूरा सिस्टम है । अब इस गड़बड़ी को पकड़े तो पकड़े कौन, जब रेवड़ी ऊपर से लेकर नीचे तक बंट रही हो तो फिर सरकार की कंपनी को चूना लगे तो लगे, इससे किसी का कोई व्यक्तिगत नुकसान तो हो नहीं रहा है। सरकार की कंपनी है घाटा लगेगा तो लगता रहे । वैसे भी छत्तीसगढ़ सरकार को केंद्र सरकार से ज्यादा लेना देना नहीं है ऐसे में यहां की कोई जांच एजेंसी भी इतने करोड़ों के घोटालों को पकड़ने से रही बात रही सेंट्रल की तो सीबीआई को तो इस प्रदेश में घुसने की इजाजत भी नहीं है। फिर यहां जितने भी महारत्न हैं मसलन ठेकेदार ट्रांसपोर्टर और अधिकारी कर्मचारी वे सभी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए हैं और भ्रष्टाचार की जो रेवड़ी यह बना रहे हैं उसमें इतनी ताकत है कि सब कुछ खुली आंखों से दिखाई देने के बावजूद कहीं कोई रोक टोक नहीं है।देश की महारत्न कंपनी एनटीपीसी के लारा एनटीपीसी के अधिकारियों पर मिलीभगत कर कोयले में अफरा-तफरी करने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि स्टेशन के पास चार कोल डम्पिंग स्थल से इस मिक्सिंग के कारनामें को अंजाम दिया जा रहा है। यहां तक कि सरकारी कोल साइडिंग होने के बाद भी लारा एनटीपीसी के अधिकारियों ने देखा कि यहां से मिक्सिंग की बात उजागर हो रही है और शिकायत सामने आ गयी है तो आनन फानन में सरकारी साइडिंग की जगह प्राइवेट साइडिंग में रेक लाया जाने लगा। जिसमें निजी रेलवे साइडिंग को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी रेलवे साइडिंग पर रेक मंगवाना बंद कर दिया गया है। ताकि निजी रेलवे साइडिंग से एनटीपीसी लारा के लिए आये उच्चगुणवत्ता के कोयला की अफरा-तफरी की जा सके। बताया जा रहा है कि यह गोरखधंधा राजनैतिक रसूखदारों व एनटीपीसी के अधिकारियों के सरंक्षण में फल-फूल रहा है।

    यह भी बताया जा रहा है कि लारा स्थित एनटीपीसी के लिए भूपदेवपुर सरकारी रेलवे साइडिंग से कोल परिवहन का ठेका कोलकाता की गोदावरी कंपनी को मिला है। परिवहन ठेका होने के बाद भूपदेवपुर रेलवे साइडिंग पर एनटीपीसी की लगभग ११ रेक आयी और ठेकेदार के ईशारे पर साइडिंग पर रेक खाली होती रही। जिसके बाद ट्रेलरों में कोयला लोडकर साइडिंग से करीब १० किलोमीटर दूर काटा कराने के बाद उसे लारा एनटीपीसी ले जाया गया। इस दौरान मिलावट और अफरा-तफरी की बात सामने आ रही है। जिसकी शिकायत भी एनटीपीसी के अधिकारियों को की गयी है। लेकिन शिकायत के बाद दोषियों पर कार्यवाही न कर एनटीपीसी के अधिकारियों ने मिलीभगत कर योजनाबद्ध तरीके से साइडिंग ही बदल दी गयी।योजनाबद्ध तरीके से किये गये साइडिंग के फेरबदल का कारण यह बताया जा रहा है कि सरकारी साइडिंग से परिवहन करने के दौरान रास्ते में निजी जमीन के मालिक द्वारा रोका जा रहा है। जबकि निजी जमीन के मालिक का कहना है कि उसने अपनी जमीन पर निर्माण कार्य करने के लिए रोका था। परिवहन के लिए उसने कभी नहीं रोका है यहां तक सरकारी साइडिंग पर अभी भी निजी कंपनियों की रेक आ रही है। जिसका परिवहन उसकी जमीन से आज भी हो रहा है। इस भ्रष्टाचार के खेल को अंजाम देने के लिए जो कारण बताया गया है, वह लोगों के गले नहीं उतर रहा है। साइडिंग को बदल कर एनटीपीसी के अधिकारियों ने ठेकेदार से मिलीभगत कर स्व लाभ लेते हुए भारत सरकार की कंपनी एनटीपीसी को करोड़ों का चूना लगाने का काम कर रहे हैं। चर्चा यह है कि निजी साइडिंग पर लोडिंग/ अनलोडिंग के दौरान एनटीपीसी का कोई अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित नहीं रहता है और साइडिंग से कोयला ट्रेलर में मिक्सकर एनटीपीसी काटा ग्राउंड में खाली करने के बजाय सीधे हापर (बकट) में डाला जाता है। जिससे मिक्स कोयला का पता न चल सके और यह अफरा तफरी चलती रहे।

    चारकोल तो चारकोल मिट्टी पत्थर भी मिलाया जा रहा है

    जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक यह कॉल तस्कर ट्रांसपोर्टरों ठेकेदार सहित अधिकारियों की मिलीभगत का खेल ऐसा है कि एक कोयले में चारकोल तो मिलाते ही हैं बल्कि इसमें मिट्टी और पत्थर भी मिलाने का बड़ा खेल चल रहा है पूरे ट्रक में मिट्टी पत्थर चारकोल और ऊपर से कुछ टन कोयला इतना बड़ा कोयले का घोटाला जिले में कई सालों बाद देखने को मिल रहा है पूर्व में रायगढ़ स्थित एक कंपनी पर कोयले की अफरा-तफरी करने के बड़े आरोप लगते रहे लेकिन उसके बाद यह दूसरा मामला है जब खुलेआम यह सब कुछ हो रहा है शिकायतें भी हो रही हैं लेकिन कार्यवाही सिफर है।