रायपुर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर किरण सिंहदेव को छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया है। यह घोषणा भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित प्रदेश अध्यक्ष निर्वाचन कार्यक्रम के दौरान की।यह नियुक्ति भाजपा के प्रदेश संगठन चुनाव प्रक्रिया के तहत हुई, जिसमें 36 संगठनात्मक जिलों के एक तिहाई जिलों के अध्यक्षों ने भाग लिया। निर्वाचन अधिकारी खूबचंद पारख ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कुल तीन नामांकन दाखिल किए गए, जो सभी किरण सिंहदेव के नाम पर केंद्रित थे।इस मौके पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश प्रभारी नितिन नवीन और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। यह नियुक्ति भाजपा की संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावों की तैयारी को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।भाजपा के सूत्रों का मानना है कि किरण सिंहदेव के नेतृत्व में पार्टी राज्य में नई ऊर्जा और दिशा के साथ काम करेगी। उनके अनुभव और संगठनात्मक कौशल को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला पार्टी की छत्तीसगढ़ में आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। सिंहदेव के दोबारा अध्यक्ष बनने से संगठन में एकजुटता और मजबूती की उम्मीद जताई जा रही है।
Category: राजनीती
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जेठूराम ने सिंहदेव, महंत, बैज, डहरिया व उमेश पटेल का ऑफर ठुकराया…
कांग्रेस को अलविदा कह चुके रायगढ़ नगर निगम के प्रथम महापौर जेठूराम मनहर क्या यू-टर्न लेंगे, या भाजपा में शामिल होंगे, क्या महापौर चुनाव में वे तटस्थ बने रहेंगे। ऐसे कई सवालात हैं-जो सियासी फलक पर तैर रहे हैं। वहीं, जेठूराम की चुप्पी ने इस सियासी मसले को और पेचीदा बना दिया है।
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं ने उनकी नाराजगी दूर करने की भरसक कोशिश की है, लेकिन जेठूराम अपनी जिद पर अड़े हुए हैं। नगर निगम चुनाव में जेठूराम की सिसायी भूमिका को लेकर अनिश्चितता खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। जेठूराम काफी दिनों से कांग्रेस से नाराज चल रहे थे। जेठूराम की नाराजगी वर्ष 2019 में शुरू हुई थी। तत्कालीन नगर निगम चुनाव में जेठूराम वार्ड नंबर 4 से अपनी सुपुत्री को उम्मीदवार बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने कांग्रेस के पावर सेंटरों से काफी मिन्नतें भी की, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने जेठूराम की बातों को एक सिरे से खारिज करते हुए श्रीमती जानकी अमृत काटजू को उम्मीदवार घोषित कर दिया था। उसके बाद जेठूराम कांग्रेस की ‘बी’ टीम के अहम हिस्सा बन गए।
वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जेठूराम को काफी समझाने-बुझाने का प्रयास किया कि वे कांग्रेस प्रत्याशी प्रकाश नायक के पक्ष में खुलकर मोर्चा सम्हालें, लेकिन जेठूराम तो कोप भवन में चले गए थे और भूपेश बघेल के कहने के बावजूद जेठूराम ने कांग्रेस के चुनाव प्रचार-प्रसार से किनारा कर लिया था। कुछ महीनों पहले जेठूराम ने कांग्रेस की प्राथमिकता सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उसके बाद उन्होंने कोई दूसरी पार्टी ज्वाईन नहीं की है, लेकिन कांग्रेस ने फिलहाल जेठूराम की नाराजगी दूर करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. चरण दास महंत और पूर्व मंत्री डॉ. शिव डहरिया ने जेठूराम का मान-मनौव्वल किया। इन सभी नेताओं ने जेठूराम को समझाया कि वे अपना इस्तीफा वापस ले लेवें और उसके बाद कांग्रेस में उन्हें सम्मानजनक स्थान मिलेगा। वहीं रायगढ़ जिला कांग्रेस के पावर फुल नंदेली हाऊस ने भी उन्हें एप्रोच किया था। पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने भी जेठूराम से इस्तीफा वापस लेने को कहा है मगर जेठूराम अपने रूख पर कायम हैं। अब जबकि एक महीने बाद नगर निगम चुनाव संभावित हैं इसलिए लोगों की नजर जेठूराम के किरदार पर टिकी हुई है कि वे क्या फैसला करते हैं ? -

सरकार गठन से पहले NDA का बढ़ा सिरदर्द, चंद्रबाबू नायडू की पार्टी TDP ने मांगे 6 बड़े मंत्रालय…
लोकसभा चुनाव रिजल्ट में टीडीपी और जेडीयू दोनों ही पार्टियां किंगमेकर बनकर उभरी हैं. ऐसे में उनकी तरफ से प्रमुख मंत्रालयों पर दावा ठोका जा रहा है.
नतीजों के बाद चंद्रबाबू नायूडू की टीडीपी और नीतीश कुमार की जेडीयू की अहमियत एनडीए में बहुत ज्यादा हो गई है. यही वजह है कि अब दोनों ही पार्टियों की तरफ से प्रमुख मंत्रालयों की मांग की जा रही है. टीडीपी के सूत्रों ने बताया है कि पार्टी ने एनडीए के आगे छह बड़े मंत्रालयों की मांग रख दी है. टीडीपी लोकसभा स्पीकर का पद भी चाहती है. पार्टी सूत्रों ने बताया है कि टीडीपी का हर बात पर रुख लचीला है. दिल्ली में बुधवार (5 जून) को हुई एनडीए की बैठक में टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू शामिल हुए. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बगल में बैठे हुए उनकी तस्वीरें भी सामने आईं. नायडू के बगल में नीतीश कुमार भी बैठे हुए नजर आए. टीडीपी इस वक्त एनडीए की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है. उसे 16 सीटों पर जीत मिली है. इसके बाद तीसरा नंबर जेडीयू का आता है, जिसके पास 12 सांसद हैं. एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी है, जिसे 240 सीटों पर जीत मिली है.
पार्टी के शीर्ष सूत्रों ने कहा कि नायडू ने साफ कर दिया है कि वह मोदी 3.0 सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहते हैं. बताया गया है कि वह बीजेपी नेतृत्व को अपनी मांगों की एक लिस्ट दे चुके हैं. इसमें लोकसभा अध्यक्ष का पद और कम से कम पांच विभाग शामिल हैं, जिनकी डिमांड उन्होंने की है. टीडीपी ने वित्त मंत्रालय, जलशक्ति मंत्रालय जैसे विभागों को भी अपने हिस्से में लेने की मांग की है.
स्पीकर पद क्यों चाहती है टीडीपी?
दरअसल, टीडीपी स्पीकर का पोस्ट इसलिए चाहती है, क्योंकि लोकसभा में सबसे ज्यादा ताकतवर पद उसके पास होगा. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि त्रिशंकु संसद की स्थिति में स्पीकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. पार्टी के दिवंगत नेता जीएमसी बालयोगी ने 1998 से 2002 तक अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में स्पीकार के रूप में कार्य भी किया था.
टीडीपी के एक सांसद ने कहा कि पार्टी ग्रामीण विकास, आवास एवं शहरी मामले, बंदरगाह एवं शिपिंग, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और जल शक्ति मंत्रालय चाहती है. वह वित्त मंत्रालय में एक जूनियर मंत्री रखने को भी इच्छुक है, क्योंकि आंध्र प्रदेश अभी धन की सख्त जरूरत है. आंध्र प्रदेश में भी टीडीपी को बहुमत मिला है.
नीतीश ने मांगे तीन मंत्रालय
एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि नीतीश कुमार की जेडीयू ने भी तीन मंत्रालयों की मांग एनडीए के सामने रख दी है. साथ ही बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की गई है. जेडीयू ने चार सांसद पर एक मंत्रालय का फॉर्मूला सरकार के सामने रखा है. जेडीयू के 12 सांसद हैं, इसलिए वह 3 मंत्रालय चाहती है. नीतीश कुमार चाहते हैं कि उनके खाते में रेल, कृषि और वित्त मंत्रालय आए. रेल मंत्रालय को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है. -

खरसिया जोगी कांग्रेस के सक्रिय नेताओं ने थामा भाजपा का दामन….
खरसिया। रायगढ़ लोकसभा की संयोजक पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय ने अपने नेतृत्व में खरसिया जोगी कांग्रेस के दिग्गज नेता तरुण सिंह ठाकुर अध्यक्ष जनता कांग्रेस लोकसभा रायगढ़ मोनू केसरी अध्यक्ष विधानसभा खरसिया सतीश शर्मा नगर अध्यक्ष जनता कांग्रेस खरसिया रोशन साहू सहित सैकड़ो को भाजपा प्रवेश करवाया।
तरुण सिंह ठाकुर, मोनू केसरी, सतीश शर्मा, रोशन साहू जोगी कांग्रेस के नेताओं ने जशपुर में भाजपा का दामन पकड़ लिया है जिससे निश्चित तौर पर खरसिया भाजपा सशक्त होगी। -

किसान से सीएम बनने का सफर, जानिए छग के नए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के बारे में….
रायपुर। छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद पार्टी ने मुख्यमंत्री के नाम का एलान कर दिया है. प्रदेश के आदिवास नेता और पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री होंगे. भाजपा विधायक दल की बैठक में इनके नाम का ऐलान किया गया. विष्णुदेव साय प्रदेश के चौथे मुख्यमंत्री होंगे.
विष्णुदेव राय छत्तीसगढ़ की कुनकुरी इलाके के कांसाबेल से लगे बगिया गांव के रहने वाले मूलत: किसान हैं। राज्य में आदिवासी समुराय की आबादी सबसे अधिक है और वे इसी समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी गिनती रमन सिंह के करीबी लोगों में होती है। 1989 में अपने गांव बगिया से पंच पद से राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले विष्णुदेव साय 1990 में निर्विरोध सरपंच निर्वाचित हुए थे। इसके बाद तपकरा से विधायक चुनकर 1990 से 1998 तक वे मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। इसके बाद 1999 में वे 13 वीं लोकसभा के लिए रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए।
इसके बाद भाजपा ने उन्हें 2006 में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 2009 में 15 वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में वे रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से फिर से सांसद बने। इसके बाद 2014 में 16 वीं लोकसभा के लिए वे फिर से रायगढ़ से सांसद बने। इस बार केंद्र में मोदी की सरकार ने उन्हें केंद्रीय राज्यमंत्री, इस्पात खान, श्रम, रोजगार मंत्रालय बनाया। वे 27 मई 2014 से 2019 तक इस पद पर रहे। पार्टी ने 2 दिसंबर 2022 को उन्हें राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य और विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया। इसके बाद विष्णुदेव साय 8 जुलाई 2023 को भाजपा ने राष्ट्रीय कार्यसमिति का सदस्य बनाया। विष्णुदेव साय 2020 में भी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। सांसद और केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं। संघ के करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती है। विष्णुदेव साय की इसी मजबूत प्रोफाइल की वजह से उन्हें पार्टी ने सबसे बड़ा पद दिया है।
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छत्तीसगढ़ में अगला मुख्यमंत्री कौन? ये 7 चेहरें में से किसपर दांव लगाएगी BJP
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जीत दर्ज कर ली है। 54 सीटों पर जीत के साथ बहुमत दर्ज कर ली है। कांग्रेस 35 सीट पर सिमट गई है। अब इसी के साथ छत्तीसगढ़ में प्रारंभ हो गई है कि अब प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन होगा?
बतादें, छत्तीसगढ़ में 2003 से 2018 तक, 15 साल लंबी सरकार का नेतृत्व करने वाले पूर्व CM डॉक्टर रमन सिंह को ही BJP मुख्यमंत्री बनाएगी या किसी नए चेहरे पर दांव लगाएगी? यदि रमन सिंह CM नहीं बनते हैं तो छत्तीसगढ़ में सरकार की कमान संभालने के लिए BJP किसको आगे करेगी? छत्तीसगढ़ में बीजेपी की ओर से सीएम पद के लिए अरुण साव, सरोज पांडेय से लेकर लता उसेंडी तक, कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं. कौन-कौन से हैं वह चेहरे जिनके नाम छत्तीसगढ़ के अगले मुख्यमंत्री के लिए रेस में हैं?
CM डॉक्टर रमन सिंह

छत्तीसगढ़ में 2003 से 2018 तक, 15 साल लंबी सरकार का नेतृत्व करने वाले पूर्व CM डॉक्टर रमन सिंह को ही BJP मुख्यमंत्री बनाएगी या किसी नए चेहरे पर दांव लगाएगी? यदि रमन सिंह CM नहीं बनते हैं तो छत्तीसगढ़ में सरकार की कमान संभालने के लिए BJP किसको आगे करेगी? छत्तीसगढ़ में बीजेपी की ओर से सीएम पद के लिए अरुण साव, सरोज पांडेय से लेकर लता उसेंडी तक, कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं. कौन-कौन से हैं वह चेहरे जिनके नाम छत्तीसगढ़ के अगले मुख्यमंत्री के लिए रेस में हैं?
अरुण साव

छत्तीसगढ़ बीजेपी अरुण साव छत्तीसगढ़ बीजेपी के अध्यक्ष हैं और सूबे में BJP के चुनाव अभियान की अगुवाई की. साल 2003 में जब बीजेपी पहली बार छत्तीसगढ़ की सत्ता पर काबिज हुई थी, तब भी पार्टी बिना सीएम फेस घोषित किए लड़ी थी. तब चुनाव जीतने के बाद बीजेपी ने जब सरकार बनाई, तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंप दी थी. इस बार भी हालात कमोबेश वैसे ही हैं. BJP अगर सरकार बनाती है तो मुख्यमंत्री पद पर प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव का दावा मजबूत माना जा रहा है.
सरोज पांडेय

छत्तीसगढ़ सीएम के लिए सरोज पांडेय का नाम भी रेस में शामिल माना जा रहा है. सरोज पांडेय बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद हैं. सरोज छत्तीसगढ़ में बीजेपी का बड़ा चेहरा मानी जाती हैं. वह दो बार भिलाई की मेयर और विधायक भी रही है. सरोज 2009 के आम चुनाव में बीजेपी के टिकट पर लोकसभा के लिए निर्वाचित हुई थीं. हालांकि, 2014 की मोदी लहर में भी वह इस सीट से चुनाव हार गई थीं. वह बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं
बृजमोहन अग्रवाल

MLA बृजमोहन अग्रवाल रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट से 8 बार के MLA हैं. इस बार वह आठवीं बार विधानसभा पहुंचने के लिए जोर लगा रहे हैं. बृजमोहन अग्रवाल, डॉक्टर रमन सिंह के नेतृत्व वाली बीजेपी की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. बृजमोहन को रायपुर दक्षिण सीट को बीजेपी के अभेद्य किले में तब्दील करने के लिए श्रेय दिया ही जाता है, इनकी गिनती स्वच्छ छवि के सरल-सहज नेताओं में भी होती है.
डॉक्टर रेणुका सिंह

छत्तीसगढ़ आदिवासी बाहुल्य राज्य है और डॉक्टर रेणुका सिंह इसी समाज से आती हैं. केंद्र सरकार में राज्यमंत्री रेणुका 2003 में पहली बार MLA निर्वाचित हुई थीं. बीजेपी ने इस बार रेणुका को भरतपुर सोनहत सीट से चुनाव मैदान में उतारा है और चर्चा है कि पार्टी इन्हें मुख्यमंत्री बना सकती है. रेणुका सिंह जिला पंचायत सदस्य भी रही हैं और छत्तीसगढ़ बीजेपी की महिला मोर्चा में महामंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुकी हैं. उन्हें संगठन में काम करने का भी अनुभव है.
लता उसेंडी

BJP का बड़ा लता उसेंडी छत्तीसगढ़ में आदिवासी चेहरा हैं. लता 2003 के चुनाव में कोंडागांव सीट से पहली बार विधायक निर्वाचित हुई थीं. महज 31 साल की उम्र में लता छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री बन गई थीं. वह दो बार विधायक रही हैं और दो ही बार चुनाव हारीं भी. अभी वह बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. लता भारतीय जनता युवा मोर्चा की भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुकी हैं. छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग भी समय-समय पर उठती रही है. राज्य गठन के बाद पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बाद कोई भी आदिवासी नेता सीएम नहीं बना. लोकसभा चुनाव भी करीब हैं, ऐसे में चर्चा है कि बीजेपी किसी आदिवासी को सीएम बनाने का दांव चल सकती है.
ओपी चौधरी

मुख्यमंत्री पद की रेस में चर्चा पूर्व आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी के नाम की भी है. इसकी वजह है चुनाव प्रचार के दौरान गृह मंत्री अमित शाह का एक बयान. रायगढ़ में अमित शाह ने ओपी चौधरी के समर्थन में चुनावी जनसभा को संबोधित किया था. उन्होंने तब कहा था कि आप ओपी चौधरी को जिता दीजिए, मैं इनको बड़ा आदमी बना दूंगा. अमित शाह के बड़ा आदमी बनाने वाले बयान को लेकर अटकलें हैं कि ये सीएम या डिप्टी सीएम का पद हो सकता है.
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कौन प्रत्याशी कहा से जीता देखिए…
- रायपुर पश्चिम – राजेश मूणत (भाजपा) / विकास उपाध्याय (कांग्रेस) – 41229 वोट से विजयी
- रायपुर उत्तर – पुरंदर मिश्रा (भाजपा) / कुलदीप जुनेजा (कांग्रेस) – भाजपा 23054 वोट से जीती
- रायपुर दक्षिण – बृजमोहन अग्रवाल (भाजपा) / महंत रामसुंदर दास (कांग्रेस) – भाजपा 67851 वोट से विजयी
- रायपुर ग्रामीण – मोतीलाल साहू (भाजपा) / पंकज शर्मा (कांग्रेस) – भाजपा 35500 वोट से विजयी
- धरसींवा – अनुज शर्मा (भाजपा) / छाया वर्मा (कांग्रेस) – भाजपा 44343 वोट विजयी
- आरंग – खुशवंत साहेब (भाजपा) / डॉ. शिव कुमार डहरिया (कांग्रेस) -भाजपा 16638 वोट से जीती
- अभनपुर – इंद्रकुमार साहू (भाजपा) / धनेद्र साहू (कांग्रेस) – 15553 वोट से भाजपा जीती
- भरतपुर-सोनहत – गुलाब सिंह कमरो (कांग्रेस) / रेणुका सिंह (भाजपा ) – भाजपा की जीत
- मनेंद्रगढ़ – रमेश सिंह (कांग्रेस) / श्याम बिहारी (भाजपा ) – भाजपा 11880 वोट से जीती
- बैकुंठपुर – अम्बिका सिंहदेव (कांग्रेस) / भैयालाल रजवाड़े (भाजपा ) – भाजपा 24717 वोटों से जीती
- प्रेमनगर – खेलसाय सिंह (कांग्रेस) / भूलन सिंह मरावी (भाजपा ) – भाजपा 33290 वोट से जीती
- भटगांव – पारसनाथ रजवाड़े (कांग्रेस) / लक्ष्मी रजवाड़े (भाजपा ) – भाजपा 41323 वोटों से विजयी
- प्रतापपुर – राजकुमार मरावी (कांग्रेस) / शकुंतला सिंह (भाजपा ) – 12500 वोटों से भाजपा की जीत
- रामानुजगंज – डॉ. अजय तिर्की (कांग्रेस) / रामविचार नेताम (भाजपा ) – भाजपा 29663 वोट से जीती
- सामरी – विनय पैकरा (कांग्रेस) / उद्देश्वरी पैकरा (भाजपा ) – भाजपा 13965 वोट से जीती
- लुंड्रा – डॉ. प्रीतम राम (कांग्रेस) / प्रबोध मिंज (भाजपा ) – भाजपा 24128 वोट से जीती
- अंबिकापुर – टी एस सिंहदेव (कांग्रेस) / राजेश अग्रवाल (भाजपा ) – 122 वोट से भाजपा की जीत
- सीतापुर – अमरजीत भगत (कांग्रेस) / रामकुमार टोप्पो (भाजपा ) – भाजपा की 21000 हजार वोट से जीत
- जशपुर – विनय कुमार भगत (कांग्रेस) / रायमुनी भगत (भाजपा ) – भाजपा की 17645 हजार वोट से जीत
- कुनकुरी – यूडी मिंज (कांग्रेस) / विष्णुदेव साय (भाजपा ) – 25541 हजार वोट से भाजपा की जीत
- पत्थलगांव – रामपुकार सिंह (कांग्रेस) / गोमती साय (भाजपा ) – भाजपा 255 वोट से जीती
- लैलूंगा – विद्यावती सिदार (कांग्रेस) / सुनीति सत्यानंद राठिया (भाजपा ) – कांग्रेस 5690 वोटों से जीती
- रायगढ़ – प्रकाश नायक (कांग्रेस) / ओपी चौधरी (भाजपा ) – भाजपा 66 हजार वोट से जीती
- सारंगढ़ – उत्तरी जांगडे (कांग्रेस) / शिव कुमारी चौहान (भाजपा ) – कांग्रेस 29695 वोट से जीती
- खरसिया – उमेश पटेल (कांग्रेस) / महेश साहू (भाजपा ) – कांग्रेस 21656 वोटों से जीती
- धर्मजयगढ़ – लालजीत सिंह (कांग्रेस) / हरिश्चंद्र राठिया (भाजपा ) – कांग्रेस 9637 वोट से जीती
- रामपुर – फुल सिंह राठिया (कांग्रेस) / ननकीराम कंवर (भाजपा ) – कांग्रेस 22859 वोट से जीती
- कोरबा – जयसिंह अग्रवाल (कांग्रेस) / लखन लाल देवांगन (भाजपा ) – भाजपा 25629 वोट से जीती
- कटघोरा – पुरुषोत्तम कंवर (कांग्रेस) / प्रेम चंद पटेल (भाजपा ) – भाजपा 16900 वोटों से जीती
- पाली-तानाखार – दुलेश्वरी सिदार (कांग्रेस) / रामदयाल (भाजपा ), तुलेश्वर मरकाम (गोगपा) – गोगपा 516 वोट से विजयी
- मरवाही – डॉ. के के ध्रुव (कांग्रेस) / प्रणव कुमार मरपच्ची (भाजपा ) – भाजपा की जीत तय
- कोटा – अटल श्रीवास्तव (कांग्रेस) / प्रबल प्रताप सिंह जूदेव (भाजपा ) – कांग्रेस 7957 वोटों से विजयी
- लोरमी – थानेश्वर साहू (कांग्रेस) / अरुण साव (भाजपा ) – 45891 मतों से भाजपा की जीत
- मुंगेली – संजीत बनर्जी (कांग्रेस) / पुन्नूलाल मोहले (भाजपा ) – 11734 मतों से भाजपा जीती
- तखतपुर – रश्मि आशीष सिंह (कांग्रेस) / धर्मजीत सिंह (भाजपा ) – भाजपा 14892 से जीती
- बिल्हा – सियाराम कौशिक (कांग्रेस) / धरमलाल कौशिक (भाजपा ) – भाजपा 9090 मतों से जीती
- बिलासपुर – शैलेश पाण्डेय (कांग्रेस) / अमर अग्रवाल (भाजपा ) – भाजपा 28959 से जीती
- बेलतरा – विजय केसरवानी (कांग्रेस) / सुशांत शुक्ला (भाजपा ) – भाजपा 16963 वोट से जीती
- मस्तुरी – दिलीप लहरिया (कांग्रेस) / कृष्ण मूर्ति बांधी (भाजपा ) – कांग्रेस 20141 वोट से जीती
- अकलतरा - राघवेन्द्र सिंह (कांग्रेस) / सौरभ सिंह (भाजपा ) – कांग्रेस 22758 वोट से विजयी
- जाजंगीर – व्यास कश्यप (कांग्रेस) / नारायण चंदेल (भाजपा ) – कांग्रेस 6971 वोट से जीती
- सक्ती – डॉ. चरण दास महंत (कांग्रेस) / डॉ. खिलावन साहू (भाजपा ) – कांग्रेस 12350 वोट से जीती
- चंद्रपुर – राम कुमार यादव (कांग्रेस) / संयोगिता सिंह जूदेव (भाजपा ) – कांग्रेस 15969 वोट से जीती
- जैजैपुर – बालेश्वर साहू (कांग्रेस) / कृष्णकांत चंद्रा (भाजपा ) – कांग्रेस 25835 वोट से विजयी
- पामगढ़ – शेषराज हरबंश (कांग्रेस) / संतोष लहरे (भाजपा ) – कांग्रेस 16174 वोट से जीती
- सराईपाली – चतुरी नंद (कांग्रेस) / सरला कोसरिया (भाजपा ) – कांग्रेस 41610 वोटों से विजयी
- बसना – देवेन्द्र बहादुर सिंह (कांग्रेस) / संपत अग्रवाल (भाजपा ) – भाजपा 36589 वोटों से विजयी
- खल्लारी – द्वारिकाधीश यादव (कांग्रेस) / अलका चंद्राकर (भाजपा ) – कांग्रेस 37450 वोटों से जीती
- महासमुंद – डॉ. रश्मि चंद्राकर (कांग्रेस) / योगेश्वर राजू सिन्हा (भाजपा ) – भाजपा 16101 वोटों से विजयी
- बिलाईगढ़ – कविता प्राण लहरे (कांग्रेस) / डॉ. दिनेश लाल जांगड़े (भाजपा ) – कांग्रेस 17827 वोट से जीती
- कसडोल – संदीप साहू (कांग्रेस) / धनीराम धीवर(भाजपा ) – कांग्रेस 33765 मतों से विजयी
- बलौदाबाजार – शैलेश नितिन त्रिवेदी (कांग्रेस) / टंकराम वर्मा (भाजपा ) – भाजपा 14018 वोटों से जीती
- भाटापारा – इंद्र कुमार साव (कांग्रेस) / शिवरतन शर्मा (भाजपा ) – कांग्रेस 11495 वोटों से जीती
- राजिम – अमितेश शुक्ल (कांग्रेस) / रोहित साहू (भाजपा ) – भाजपा 11911 वोटों से विजयी
- बिंद्रानवागढ़ – जनक लाल ध्रुव (कांग्रेस) / गोवर्धन सिंह मांझी(भाजपा ) – कांग्रेस 817 वोटों से जीती
- सिहावा – अम्बिका मरकाम (कांग्रेस) / श्रवण मरकाम(भाजपा ) – कांग्रेस 13166 वोटों से जीती
- कुरूद – तारिणी चंद्राकर (कांग्रेस) / अजय चंद्राकर (भाजपा ) – भाजपा 8090 वोटों से जीती
- धमतरी – ओंकार साहू (कांग्रेस) / रंजना साहू (भाजपा ) – कांग्रेस 2644 वोट से जीती
- संजारी बालोद – संगीता सिन्हा (कांग्रेस) / राजेश यादव (भाजपा ) – 17046 कांग्रेस की जीत तय
- डौंडीलोहारा – अनिल भेड़िया (कांग्रेस) / देवलाल हलवा ठाकुर (भाजपा ) – कांग्रेस 35688 वोट से जीती
- गुंडरदेही –कुंवर सिंह निषाद (कांग्रेस) / विरेंद्र कुमार साहू (भाजपा ) – कांग्रेस 41807 वोटों से जीती
- पाटन – भूपेश बघेल (कांग्रेस) / विजय बघेल (भाजपा ) – कांग्रेस 19543 वोटों से जीती
- दुर्ग ग्रामीण – ताम्रध्वज साहू (कांग्रेस) / ललित चंद्राकर (भाजपा ) – 16642 वोटों से भाजपा विजयी
- दुर्ग शहर – अरुण वोरा (कांग्रेस) / गजेन्द्र यादव (भाजपा ) – 41960 वोटों से भाजपा की जीत
- भिलाई नगर – देवेन्द्र यादव (कांग्रेस) / प्रेम प्रकाश पाण्डेय (भाजपा ) – कांग्रेस 1615 वोट से जीती
- वैशाली नगर – मुकेश चंद्राकर (कांग्रेस) / रिकेश सेन (भाजपा ) – भाजपा 39756 वोटों से विजयी
- अहिवारा – निर्मल कोसरे (कांग्रेस) / डोमन लाल कोर्सेवाड़ा (भाजपा ) – भाजपा 25263 वोटों से आगे, जीत तय
- साजा – रविंद्र चौबे (कांग्रेस) / ईश्वर साहू (भाजपा ) – भाजपा 6200 वोट से जीती
- बेमेतरा – आशीष कुमार छाबड़ा (कांग्रेस) / दीपेश साहू (भाजपा ) – भाजपा 9134 मतों से विजयी
- नवागढ़ – गुरु रूद्र कुमार (कांग्रेस) / दयाल बघेल (भाजपा ) – 20000 से ज्यादा वोटों से भाजपा की जीत
- पंडरिया – नीलकंठ चंद्रवंशी (कांग्रेस) / भावना बोहरा (भाजपा ) – भाजपा 23639 वोटों से जीती
- कवर्धा – मोहम्मद अकबर (कांग्रेस) / विजय शर्मा (भाजपा ) – भाजपा 39592 वोटों से जीती
- खैरागढ़ – यशोदा वर्मा (कांग्रेस) / विक्रांत सिंह (भाजपा ) – कांग्रेस 5000 वोटों से विजयी
- डोंगरगढ़ – हर्षिता स्वामी बघेल (कांग्रेस) / विनोद खाण्डेकर (भाजपा ) – कांग्रेस 14367 वोट से विजयी
- राजनांदगांव -गिरीश देवांगन (कांग्रेस) / डॉ. रमन सिंह (भाजपा ) – भाजपा 45084 से जीती
- डोंगरगांव – दलेश्वर साहू (कांग्रेस) / भरत लाल वर्मा (भाजपा ) – 2100 वोटों से कांग्रेस की जीत
- खुज्जी –भोलाराम साहू (कांग्रेस) / गीता घासी साहू (भाजपा ) – कांग्रेस 25944 वोट से विजयी
- मोहला-मानपुर – इंद्र शाह मंडावी (कांग्रेस) / संजीव साहा (भाजपा ) – 31 हजार से अधिक मतों से कांग्रेस की जीत
- अंतागढ़ – रूप सिंह पोटाई (कांग्रेस) / विक्रम उसेंडी (भाजपा ) – भाजपा 23710 वोट से विजयी
- भानुप्रतापपुर – सावित्री मंडावी (कांग्रेस) / गौतम उइके (भाजपा ) -कांग्रेस 30932 वोट से जीती
- कांकेर – शंकर ध्रुव (कांग्रेस) / आशाराम नेताम (भाजपा ) – भाजपा 16 वोट से विजयी
- केशकाल – संतराम नेताम (कांग्रेस) / नीलकंठ टेकाम (भाजपा ) – 6143 मतों से भाजपा की जीत
- कोंडागांव – मोहन लाल मरकाम (कांग्रेस) / लता उसेंडी (भाजपा ) – 19000 मतों से भाजपा जीती
- नारायणपुर – चन्दन कश्यप (कांग्रेस) / केदारनाथ कश्यप (भाजपा ) – भाजपा 18930 वोटों से जीती
- बस्तर – लखेश्वर बघेल (कांग्रेस) / मनीराम कश्यप (भाजपा ) – कांग्रेस 6434 वोट से जीती
- जगदलपुर – जितिन जायसवाल (कांग्रेस) / किरण देव (भाजपा ) – भाजपा 29834 वोट से जीती
- चित्रकोट – दीपक बैज (कांग्रेस) / विनायक गोयल (भाजपा ) – भाजपा 8370 वोट से जीती
- दंतेवाड़ा – छविन्द्र कर्मा (कांग्रेस) / चैतराम अटामी (भाजपा ) – 16342 वोटों से भाजपा की जीत
- बीजापुर – विक्रम मंडावी (कांग्रेस) / महेश गागड़ा (भाजपा ) – कांग्रेस 2706 वोट से विजयी
- कोंटा – कवासी लखमा (कांग्रेस) / सोयम मुक्का (भाजपा ) – 1930 वोट से कांग्रेस की जीत
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हिमाचल के 15वें मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू, इन्हें बनाया गया डिप्टी सीएम…
नए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के गांव सेरा में जश्न का माहौल है।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष एवं नादौन विधानसभा क्षेत्र से चौथी बार विधायक चुने गए सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे। हरोली से कांग्रेस विधायक मुकेश अग्निहोत्री उपमुख्यमंत्री होंगे। शनिवार को विधानसभा परिसर शिमला में कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद सीएम पद के लिए सुखविंदर सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री पद के लिए मुकेश अग्निहोत्री के नाम का एलान किया गया।चार भाई-बहनों में सुखविंदर सिंह सुक्खू दूसरे नंबर पर हैं। बड़े भाई राजीव सेना से रिटायर हैं। दो छोटी बहनों की शादी हो चुकी है। 11 जून 1998 को सुखविंदर सिंह सुक्खू की शादी कमलेश ठाकुर से हुई। इनकी दो बेटियां हैं जो दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई कर रही हैं।
सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एनएसयूआई से राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। संजौली कॉलेज में पहले कक्षा के क्लास रिप्रेजेंटेटिव और स्टूडेंट सेंट्रल एसोसिएशन के महासचिव चुने गए। उसके बाद राजकीय महाविद्यालय संजौली में स्टूडेंट सेंट्रल एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए। 1988 से 1995 तक एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष बने। 1995 में युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव बने।
1998 से 2008 तक युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे। नगर निगम शिमला के दो बार चुने हुए पार्षद बने। 2003, 2007, 2017 और अब 2022 में नादौन विधानसभा क्षेत्र से चौथी बार विधायक चुने गए। 2008 में प्रदेश कांग्रेस के महासचिव बने। 8 जनवरी 2013 से 10 जनवरी 2019 तक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। अप्रैल 2022 में हिमाचल प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष एवं टिकट वितरण कमेटी के सदस्य बने। -

फिर बाहर आया ‘पनामा’ जिन्न! बिना नाम लिए CM बघेल ने भाजपा पर साधा निशाना, बोले- भ्रष्टाचार के अंतर्राष्ट्रीय पितामह छत्तीसगढ़ को कर रहे बदनाम…
रायपुर। सीएम भूपेश बघेल ने बिना किसी का नाम लिए भाजपा नेताओं को आड़े हाथ लिया है. उन्होंने एक पोस्ट के जरिए निशाना साधते हुए कहा है कि, भ्रष्टाचार के अंतर्राष्ट्रीय पितामह को लगता है कि मार्गदर्शक मंडल में हुई वाइल्ड कार्ड एंट्री से बाहर आने के लिए छत्तीसगढ़ को बदनाम करेंगे, लेकिन ये नहीं चलेगा।
आगे उन्होंने कहा, कौन किसका एटीएम है, इसका प्रमाण तो देना ही पड़ेगा. वैसे नान की डायरी में नागपुर से लखनऊ तक का जिक्र है. वे किस स्वाइप मशीन से हस्तांतरित हुए थे, प्रदेश की जनता जानना चाह रही है.
सीएम बघेल ने अपने पोस्ट में ये भी कहा, पनामा के खाते में जिनका नाम दर्ज है वह फिर छत्तीसगढ़ को बदनाम करने लगे हैं। -

ED और IT पर आमने-सामने : CM भूपेश ने कहा- जांच एजेंसियों का स्वागत है, लेकिन परेशान करने की नीयत से कार्रवाई ना करें, BJP बोली- डर क्यों रहे हो भाई?
रायपुर। ईडी-आईटी (ED-IT) की कार्रवाई को लेकर सीएम भूपेश बघेल लगातार जांच ऐजेंसियों की कार्यपद्धति पर सवाल खड़ा करते रहे हैं. बीते दिनों उन्होंने कहा था कि भारत की जांच एजेंसियां छत्तीसगढ़ आए स्वागत है. लेकिन किसी को परेशान करने की नीयत से कार्रवाई न करें. व्यापारियों की ओर से ऐसी बातें कही जा रही है. एजेंसियां अपने अधिकारों का दुरुपयोग न करें. उन्होंने कहा था कि सेंट्रल एजेंसियां अपने उद्देश्यों से भटक गई हैं. चिटफंड मामले में ईडी क्यों कार्रवाई नहीं कर रही है? सेंट्रल एजेंसियां रिमोट की तरह काम कर रही हैं।
मुख्यमंत्री के इस बयान पर पूर्व सीएम रमन सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि आज शानदार बयान पेपर में पढ़ने को मिला, आईटी और ईडी को कोई मुख्यमंत्री धमकी भरे शब्द बोल रहा है. इसका मतलब यह है कि डर क्यों रहे हो भाई? रमन ने कहा कि देश के किसी सीएम ने आज तक ऐसा बयान नहीं दिया होगा कि ईडी और आईटी आएंगे तो उनसे निपट लिया जाएगा. यह अपने भय से ग्रसित हैं. छत्तीसगढ़ में कहते हैं ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’.
देश भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहा- साव
वहीं प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने मुख्यमंत्री भूपेश पर निशाना साधते हुए कहा है कि वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राह पर चल रहे हैं और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने के लिए राज्य में केंद्रीय एजेंसियों को धमकाने की कोशिश कर रहे हैं. आखिर किस बात का डर है? पिछले दिनों जहां-जहां इस प्रकार की छापेमारी कार्रवाई हुई बड़ी मात्रा में नोटों के ढेर, अचल संपत्ति, जेवरात बरामद किए गए. देश भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई लड़ रहा है. भूपेश बघेल सदैव क्यों इसमें एक बाधा बनने का प्रयास करते हैं.
संघीय ढांचे का उल्लंघन कर रहे भूपेश- साव
साव ने कहा कि जो गलत नहीं करता वह कभी डरता नहीं है और बार-बार धमकी-चमकी वही देते हैं जिन्होंने कुछ गलत किया होता है और उन्हें अपने किए का पर्दाफाश होने का भय सता रहा हो. कांग्रेस पार्टी भी इसी भय से गुजर रही है और हर दिन ED आएगा, IT आएगा तो कार्रवाई करेंगे ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं. साव ने कहा कि मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि व्यापारियों को डराया धमकाया है इसकी शिकायत मिल रही है. उसे सार्वजनिक करना चाहिए जिससे जनता को समझ में आए कि मुख्यमंत्री किसके लिए बेटिंग कर रहे हैं, किसे बचाना चाहते है? मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का बयान पूरी तरीके से संघीय ढांचे का उल्लंघन है और ये उल्लंघन बार-बार करने पर उन्हें अब इस्तीफा दे देना चाहिए.
