Category: स्वास्थ्य

  • कोरोना ने नए वेरिएंट XBB 1.5 के कारण अमेरिका में बिगड़े हालात! भारत में इसकी एंट्री.. गुजरात में इस नए वैरिएंट का पहला मामला.. जानिये विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय

    कोरोना ने नए वेरिएंट XBB 1.5 के कारण अमेरिका में बिगड़े हालात! भारत में इसकी एंट्री.. गुजरात में इस नए वैरिएंट का पहला मामला.. जानिये विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय

    कोरोना के नए वेरिएंट के कारण चीन और जापान में बिगड़े हालात के बीच अमेरिका में ओमिक्रॉन के एक नए सब-वैरिएंट का कहर देखा जा रहा है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) द्वारा शुक्रवार को प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में ओमिक्रॉन के XBB.1.5 वैरिएंट ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अमेरिका में इस समय के 40 फीसदी से अधिक कोरोना के मामलों के लिए इसी सब-वैरिएंट को प्रमुख कारण माना जा रहा है। पिछले हफ्ते की तुलना में इस वैरिएंट के कारण संक्रमण की मामले दो दुना तक बढ़े हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ओमिक्रॉन के अब तक के सभी सब-वैरिएंट्स की तुलना में अधिक समस्याकारक हो सकता है।

    गुजरात में इस नए वैरिएंट का पहला मामला

    इस बीच भारत में भी XBB.1.5 वैरिएंट से संक्रमण के पहले मामले की पुष्टि की गई है। इंडियन सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (इन्साकोग) की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में इस नए वैरिएंट का पहला मामला सामने आया है। जिस तरह से इसके कारण न्यूयॉर्क में हालात बिगड़ते देखे गए हैं, ऐसे खतरे को ध्यान में रखते हुए भारत को भी विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।

    XBB.1.5 वैरिएंट के बारे में जानिए

    अमेरिका का कई हिस्सों, विशेषकर न्यूयॉर्क में XBB.1.5 वैरिएंट से संक्रमण के कारण स्थिति बिगड़ने की खबरें हैं। वैज्ञानिकों ने शुरुआती अध्ययनों में पाया है कि यह XBB सब-वैरिएंट में हुए नए म्यूटेशन से उत्पन्न हुआ है। जिसकी प्रकृति कई मामलों में चिंता बढ़ाने वाली है।

    जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में वायरोलॉजिस्ट एंड्रयू पेकोज बताते हैं XBB.1.5 अपने फैमिली के अन्य के सदस्यों से अलग है क्योंकि इसमें एक अतिरिक्त म्यूटेशन देखा जा रहा है, जो इसे कोशिकाओं से बेहतर ढंग से बाइंड करने में मददगार हो सकता है। ऐसे में यह अधिक संक्रामक होने के साथ शरीर में तेजी से बढ़कर गंभीर रोग विकसित कर सकता है।

    पेकिंग विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक यूनलॉन्ग रिचर्ड काओ यह वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा को चकमा देने में सफल हो सकता है, ऐसे में नए वैरिएंट को गंभीरता से लेने की जरूरत है।

    संक्रमण की स्थिति में गंभीर रोगों का भी खतरा

    वायरोलॉजिस्ट एंड्रयू पेकोज कहते हैं, वायरस के बाइंडिंग की क्षमता इसे लोगों को अधिक आसानी से संक्रमित करने में मदद करती है। न्यूयॉर्क की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि यहां संक्रमितों के अस्पताल में भर्ती होने की दर भी बढ़ी है, जिससे साफ होता है कि यह सब-वैरिएंट अब तक के अन्य वैरिएंट्स की तुलना में न सिर्फ तेजी से लोगों को अपना शिकार बना सकता है साथ ही इससे गंभीर रोग विकसित होने का खतरा भी अधिक है।

    शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि XBB.1.5, अन्य वैरिएंट्स की तुलना में अधिक आसानी से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा देने में भी सफल हो रहा है।

    XBB सब-वैरिएंट में म्यूटेशन को लेकर आगाह करते रहें हैं वैज्ञानिक

    XBB सब-वैरिएंट सबसे पहले भारत में देखा गया था, जो दो अन्य वैरिएंट (BA.2.75 और BA.2.10.1 के पुनः संयोजन) से उत्पन्न हुआ था। इसपर हुए अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने न सिर्फ इसकी गंभीरता और संक्रामिकता को लेकर अलर्ट किया था साथ ही इसमें म्यूटेशन की भी आशंका जताई थी।

    कोलंबिया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस महीने की शुरुआत में जर्नल सेल में प्रकाशित एक अध्ययन में चेतावनी दी थी कि XBB-सब-वैरिएंट में होने वाला उत्परिवर्तन कोविड-19 टीकों की प्रभावकारिता को और कम कर सकता है। यह संक्रमण के साथ-साथ गंभीर रोगों के खतरे को भी बढ़ाने वाला हो सकता है।

    भारत को इससे कितना खतरा?

    कोविड रिपोर्टस के मुताबिक गुजरात में एक मामले के अलावा देश के अन्य किसी भी हिस्से से फिलहाल इस नए सब-वैरिएंट की पुष्टि नहीं है। महाराष्ट्र में कोरोना के मामलों पर नजर रखने वाले अधिकारियों का कहना है कि यहां XBB सब-वैरिएंट के 275 से अधिक मामले रहे हैं, हालांकि अब तक इस नए सबवैरिएंट की पुष्टि नहीं है। जिस तरह से अमेरिका में इससे संक्रमण के कारण हालात बिगड़े हैं इस खतरे को लेकर भारत को भी सावधान रहने की जरूरत है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भारत में इसका असर ज्यादा नहीं होना चाहिए क्योंकि इसी परिवार के XBB वैरिएंट से यहां लोग पहले भी संक्रमित होकर ठीक हो चुके हैं, साथ ही यहां ज्यादातर लोग प्राथमिक और बूस्टर डोज भी ले चुके हैं। हालांकि इसकी प्रकृति को देखते हुए कोविड से बचाव को लेकर सख्ती बरतना बहुत जरूरी है।

    नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।

  • RX की जगह ‘श्री हरि’, हिंदी में दवाइयों के नाम, MP के डॉक्टर की लिखी पर्ची चर्चा में….

    RX की जगह ‘श्री हरि’, हिंदी में दवाइयों के नाम, MP के डॉक्टर की लिखी पर्ची चर्चा में….

    मध्य प्रदेश में अब एमबीबीएस की पढ़ाई हिन्दी में शुरू होने के साथ ही सतना में मेडिकल ऑफिसर डॉ. सर्वेश सिंह ने मरीज का प्रिस्क्रिप्शन हिन्दी में लिखा. डॉ. सर्वेश के मुताबिक, पेट दर्द से पीड़ित रश्मि सिंह पहली पेशेंट थीं जो सोमवार को पीएचसी उपचार के लिए आई थीं. उन्हीं की ओपीडी पर्ची पर हिन्दी में दवाइयां लिखी गईं.

    मध्य प्रदेश में अब एमबीबीएस की पढ़ाई हिन्दी में शुरू होने के साथ ही सतना जिले में मेडिकल ऑफिसर ने मरीज का प्रिस्क्रिप्शन हिन्दी में लिखा. जानकारी के मुताबिक, कोटर के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर डॉ. सर्वेश सिंह ने यह प्रिस्क्रिप्शन लिखा है.

    गौरतलब है कि दो दिन पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने भाषण में कहा था कि पर्ची में दवाइयां हिन्दी में ही लिखी जाएं तो हर्ज ही क्या है? बस, फिर क्या था डॉ. सर्वेश ने इसे अमलीजामा पहना दिया.

    ऐसे आया मन में ख्याल
    डॉ. सर्वेश ने बताया कि रविवार को मैं केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह का लाइव कार्यक्रम देख रहा था. मुख्यमंत्री के भाषण को भी सुना. उन्होंने कहा था कि कोशिश करें कि सरकारी अस्पतालों में दवाइयों के पर्चे हिन्दी में लिखे जाएं. बस इसीलिए विचार आया कि क्यों न आज से ही इसकी शुरुआत की जाए.

    मेडिकल ऑफिसर डॉ. सर्वेश के मुताबिक, पेट दर्द से पीडि़त रश्मि सिंह पहली पेशेंट थीं जो सोमवार को पीएचसी उपचार के लिए आई थीं. उन्हीं की ओपीडी पर्ची पर हिन्दी में दवाइयां लिखी गईं. मेडिकल ऑफिसर ने पूरी केस हिस्ट्री भी हिन्दी में लिखी. साथ ही दवाइयों को लिखने से पहले आरएक्स की जगह श्री हरि का लिखा. इसके बाद दवाइयों को लिखने का सिलसिला शुरू हुआ. डॉक्टर ने प्रिस्क्रिप्शन पर 5 किस्म की दवाइयां लिखीं वो भी सभी हिन्दी में.

    बता दें डॉ. सर्वेश ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से वर्ष 2017 में एमबीबीएस की पढ़ाई की. नवम्बर 2019 में डॉ. सर्वेश की पदस्थापना कोटर के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में की गई. तब से डॉ. सर्वेश कोटर में ही सेवाएं दे रहे हैं.

  • कोरोना ठीक करने वाली गोली हुई लॉन्च….महज 5 दिन का होगा कोर्स.. जानिए कितने रुपए में और कैसे खरीद सकते हैं आप…..

    कोरोना ठीक करने वाली गोली हुई लॉन्च….महज 5 दिन का होगा कोर्स.. जानिए कितने रुपए में और कैसे खरीद सकते हैं आप…..

    कोविड-19 के इलाज में उपयोग की जाने वाली एंटीवायरल गोली मोलनुपिरावीर को भारत में आपातकालीन मंजूरी मिलने के बाद लॉन्च कर दिया गया है। मोलनुपिरावीर के अलावा कोवोवैक्स और कॉर्बेवैक्स को भी केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने मंजूदी दी है।

    क्या है एंटीवायरल गोली मोलनुपिरावीर?

    मोलनुपिरावीर का इस्तेमाल कोविड-19 से संक्रमित मरीजों के इलाज में किया जाता है। ये एक पुनर्निर्माण दवा है, जिसे गोली का आकार दिया गया है। मरीज इसे आसानी से ले सकते है। ये गोली वायरस को शरीर में फैलने से रोकती है और जल्दी रिकवर होने में मदद करती है।संक्रमित मरीज को 12 घंटे के अंदर इसकी 4 गोलियां लेनी होंगी। इलाज के दौरान मोलनुपिरावीर की गोलियों का 5 दिनों तक कोर्स लेना जरुरी है।

    यह दवा कितने रुपए में मिलेगी?

     

    सोमवार को पूरे 5 दिन के कोर्स के साथ मोलनुपिरावीर को 1399 रु. में लॉन्च किया गया। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मैनकाइंड फार्मा के चेयरमैन आरसी जूनेजा ने बताया कि, ये दवा अब तक की सबसे सस्ती एंटीवायरल दवा है, जिसकी एक गोली 35 रुपए की मिलेगी और 5 दिन का कोर्स 1399 रुपए में मिलेगा।

    मोलनुपिरावीर नाम की यह दवा कहां से खरीद सकते हैं?

    माना जा रहा है कि मोलनुपिरावीर की गोलियां बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाएंगी। दरअसल, मेडिकल स्टोर्स पर इसे बेचने की सिफारिश की गई है, लेकिन दुकानदारों को कुछ निर्देश भी दिए जा सकते हैं।इस दवा का इस्तेमाल उन मरीजों के लिए किया जाएगा, जो गंभीर कोरोना के शिकार हैं और अस्पताल में भर्ती हों।

    दवा खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची की जरूरत होगी या नहीं?

     

    आने वाले दिनों में मोलनुपिरावीर के 5 दिन का कोर्स आपको भले ही मेडिकल स्टोर पर मिल जाएं, लेकिन इसे खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची जरूरी है। केंद्र सरकार ने मोलनुपिरावीर के आपातकालीन उपयोग को मंजूरी दी है, जिसका साफ मतलब है कि इसकी नियंत्रित बिक्री की जा सकती है।कोई भी अपने मन से इस दवा को नहीं खरीद सकता है। जब तक डॉक्टर किसी मरीज के लिए इस दवा को पर्ची पर नहीं लिख देता, तब तक इसे नहीं खरीदा जा सकता है।

    यह दवा काम कैसे करती है?

     

    एक्सपर्ट्स का कहना है कि RNA मैकेनिज्म के जरिए कोरोना वायरस हमारे शरीर में दस्तक देता है और संक्रमण फैलने लगता है। जैसे-जैसे वायरस और संक्रमण फैलता है वैसे-वैसे मरीज की हालात गंभीर होते जाती है। मोलनुपिरावीर की गोलियां RNA मैकेनिज्म को ठीक करती हैं और वायरस को शरीर में फैलने से रोकती हैं।जब दवा का असर शुरू होता है और वायरस

    कमजोर पड़ता है तो मरीज की हालात सामान्य हो जाती है। वो गंभीर संक्रमण से बच जाता है।

    यह दवा किस देश में और किसने बनाई है?


    मोलनुपिरावीर को इन्फ्लूएंजा के इलाज के लिए अमेरिका के जॉर्जिया स्थित इमॉरी यूनिवर्सिटी में तैयार किया गया था। जिसे नवंबर 2021 में यूनाइटेड किंगडम ने और दिसंबर 2021 में अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने मान्यता दी थी।भारत में 28 दिसंबर को ड्रग कन्ट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) ने इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मान्यता दे दी। सोमवार को इसे भारत में लॉन्च किया गया।

    भारत में कौन-कौन सी कंपनियां मोलनुपिरावीर दवा बना रही हैं?


    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया के मुताबिक भारत की लगभग 13 दवा निर्माता कंपनियां घरेलू स्तर पर मोलनुपिरावीर बनाएंगी। इन कंपनियों में डॉ रेड्डीज लैबोरेट्रीज, नैटको फार्मा, सिप्ला, स्ट्राइड्स, हेटेरो और ऑप्टिमस फार्मा प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।क्या इस दवा का पहले भी इस्तेमाल किया जा चुका है? मोलनुपिरावीर को सबसे पहले इन्फ्लूएंजा के इलाज में इस्तेमाल किया गया था।

    क्या यह दवा कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ काम करती है?


    जी हां, भारत में दवा बनाने वाली 13 फार्मा कंपनियों में से एक मैनकाइंड की तरफ से बताया गया है कि मोलनुपिरावीर कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ भी कारगर है।

  • कई जरूरी दवाएं जीएसटी मुक्त, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी जानकारी…

    कई जरूरी दवाएं जीएसटी मुक्त, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी जानकारी…

    दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर काउंसिल की आज अहम बैठक हुई. बैठक में पेट्रोल एवं डीजल को जीएसटी में शामिल होने पर विचार मे की गई चर्चा दिल्ली के डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री मनीष सिसौदिया ने बैठक में हुए फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में रखने पर कोई आमराय नहीं बन पाई. इसी तरह राज्यों को जून 2022 के बाद भी मुआवजा देने पर आज फैसला नहीं हो पाया, लेकिन इसके लिए एक ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स द्वारा विचार किया जाएगा. यह समिति दो महीने के भीतर अपनी सिफारिश देगी. अच्छी खबर यह है कि कोरोना की दवा को 31 दिसंबर 2021 तक जीएसटी से छूट मिलती रहेगी. इसमें कुछ और दवाओं को शामिल किया गया. कई महंगी लाइफ सेविंग दवाओं को जीएसटी से मुक्त कर दिया गया है. इनमें दो काफी महंगी दवाएं हैं. बायोडीजल पर जीएसटी घटाकर 12 से 5 फीसदी कर दिया गया है. सभी तरह के पेन पर अब जीएसटी 18 फीसदी रहेगी.

    GST council की बैठक आज यानी शुक्रवार को लखनऊ में हुई. बैठक में ऐसे कई अहम निर्णय हुए जिनका असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है. कई अहम प्रस्तावों पर विचार हुआ. यह मार्च 2020 के बाद (जब कोरोना का कहर शुरू हुआ था) सदस्यों की भौतिक रूप से मौजूदगी वाली पहली बैठक है. इसके पहले कई बैठकें ऑनलाइन आयोजित की गईं. इस साल जून में केरल हाई कोर्ट ने जीएसटी काउंसिल को यह आदेश दिया था कि वह पेट्रोल एवं डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार करे. काउंसिल को इसके लिए 6 माह का समय दिया गया. दिल्ली में पेट्रोल के 101 रुपये कीमत में लोग करीब 60 रुपये टैक्स के रूप में ही दे रहे हैं. लेकिन इस प्रस्ताव का राज्य ही विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनके राजस्व को भी इससे भारी नुकसान पहुंचने वाला है. कोरोना संकट में राजस्व को पहले ही चोट है, इसी वजह से कर्नाटक, केरल और महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही इस प्रस्ताव का विरोध किया है.

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे शुरू होने वाली इस बैठक में 28 राज्यों और 3 केंद्र शासित राज्यों के प्रतिनिध‍ि शामिल हुए. आज की बैठक में असल में 50 से ज्यादा वस्तुओं एवं सेवाओं पर दरों में बदलाव पर विचार हुआ. बैठक में विचार के लिए एक प्रमुख मसला यह भी था कि जीएसटी लागू होने से राज्यों को हो रहे नुकसान की पूरी तरह से भरपाई कैसे हो. असल में 1 जुलाई 2017 को लागू जीएसटी एक्ट में कहा गया था कि जीएसटी लागू होने के बाद यदि राज्यों के जीएसटी में 14 फीसदी से कम ग्रोथ होती है तो उन्हें अगले पांच साल तक इस नुकसान की भरपाई ऑटोमोबिल और टोबैको जैसे कई उत्पादों पर विशेष सेस लगाकर करने की इजाजत होगी.

  • फोन पर बात करते हुए नर्स ने महिला को एक साथ लगा दिए वैक्सीन के दो डोज….

    फोन पर बात करते हुए नर्स ने महिला को एक साथ लगा दिए वैक्सीन के दो डोज….

    भिंड। मध्य प्रदेश में सरकार टीकाकरण में तेजी लाने के लिए तरह तरह के प्रयास कर रही है. इस दौरान वैक्सीनेशन के दौरान स्वास्थकर्मियों की लापरवाही भी सामने आई हैं. जिसका ताजा मामला भिंड से सामने आया है. यहां स्वास्थ्यकर्मी ने महिला को कोरोना वैक्सीन के दो डोज एक साथ लगा दिया. महिला ने नर्स पर मोबाइल में ध्यान होने का आरोप लगाया है. वही स्वास्थ्य विभाग इन आरोप को निराधार बता रहा है।

    दरअसल भिंड के विक्रमपुरा वैक्सीनेशन सेंटर पर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है. यहां टीकाकरण केंद्र पर कोरोना वैक्सीन लगवाने आई एक महिला ने आरोप लगाया है कि नर्स ने लापरवाही पूर्वक उसे एक के बाद एक दो डोज साथ में लगा दिए. इतना ही नहीं बेसुध होकर तीसरा टीका भी लगाने वाली थी. इस पूरे मामले से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया. वहीं स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इस तरह के किसी भी मामले से इंकार कर रहे हैं।


    गलती मानने की जगह बहसबाजी
    वैक्सीन लगवाकर आई प्रियंका देवी ने बताया कि वह 9 जून को अपनी ननद के साथ पहली बार टीकाकरण के लिए गई थी. अपना नम्बर आने पर वे नर्स के पास पहुंची. जहां नर्स फोन पर बातचीत कर रही थी. उन्होंने बताया कि नर्स ने फोन पर बात करते-करते पहले एक इंजेक्शन लगाया जिसके बाद दूसरा इंजेक्शन लगाया, लेकिन जब फोन पर बात करते करते उसने तीसरा इंजेक्शन भी लगाने का प्रयास किया तो प्रियंका ने उसे पूछा कि तीसरा इंजेक्शन क्यों लगा रही हैं, इस बात पर नर्स यह कहते हुए बहस करने लगी की उसने सिर्फ एक ही डोज लगाया है. जबकि महिला के कंधे पर भी तीन बार सिरिंज के निशान हैं।

    मोबाइल पर बात कर रही थी नर्स
    पीड़ित महिला से पूछने पर उसने बताया की उसे इस बात की जानकारी की वैक्सीन के दो डोज लगते हैं. लेकिन अलग-अलग दिन लगते हैं यह नहीं पता था, इसलिए शुरू में लगे दो डोज के इंजेक्शन पर उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. लेकिन जब तीसरा डोज लगाया जाने लगा तो उसे अजीब लगा और उसने नर्स को टोका था. महिला का आरोप है कि फोन पर बात करने की वजह से ही नर्स का ध्यान भटका हुआ था, लेकिन यह गम्भीर गलती है।

    मामूली साइड इफ़ेक्ट के अलावा हालत स्थिर
    दोनो डोज लगने के बाद पीड़ित महिला कुछ देर टीकाकरण केंद्र पर ही रुकी और उसके बाद वापस घर आ गई. महिला का कहना है कि वैसे तो उसकी तबियत ठीक है, लेकिन वैक्सीन के दोनों डोज लगने के बाद से उसे भूख नहीं लग रही है. लगातार चक्कर आ रहे हैं. और आखें भारी रह रही है।

    स्वास्थ्य विभाग ने आरोपों को नकारा
    वहीं पूरे मामले पर जब सीएमएचओ डॉक्टर अजीत मिश्रा से मीडिया ने सवाल किया तो, उन्होंने इस आरोप को निराधार बताया. उन्होंने कहा कि हर टीकाकरण केंद्र पर प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा ही वैक्सिनेशन का काम किया जा रहा है. ऐसे में इतनी बड़ी गलती की गुंजाइश ही नहीं है।

  • कोविड-19 और ब्लैक फंगस की दवाओं में कर राहत…

    कोविड-19 और ब्लैक फंगस की दवाओं में कर राहत…

    दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 44वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में कोविड-19 और ब्लैक फंगस के उपचार से जुड़ी सामग्रियों पर बड़ी कर राहत प्रदान की गई।

    इसके पहले 28 मई को हुई काउंसिल की बैठक में कोविड-19 से जुड़ी सामग्रियों को लेकर कर की दर तय करने के लिए मंत्रियों का समूह गठित किया गया था. काउंसिल ने मंत्रियों के समूह की रिपोर्ट पर विचार किया. बैठक में निर्णय लिया गया कि Remdesivir पर जीएसटी 12 से 5 प्रतिशत किया गया है. Tocilizumab और Amphotericin B पर कोई कर नहीं लिया जाएगा. इसके अलावा कोविड-19 से जुड़ी सामग्रियों पर दी जा रही छूट 30 सितंबर तक जारी रहेगी।

    इसके अलावा इलेक्ट्रिक फर्नेस और तापमान नापने से उपकरणों पर 5 प्रतिशत और एंबुलेंस पर 12 प्रतिशत जीएसटी लिया जाएगा. मंत्रियों के समूह द्वारा की गई सिफारिशों के तहत यह छूट अगस्त की बजाए सितंबर महीने तक प्रदान की जाएगी. वित्त मंत्री ने बताया कि वैक्सीन पर 5 प्रतिशत जीएसटी जारी रहेगा।

    इसके अलावा 75 प्रतिशत केंद्र सरकार खरीदेगी और जीएसटी का भुगतान भी करेगी, लेकिन जीएसटी की 70 प्रतिशत आमदनी राज्यों के साथ साझा किया जाएगा. बैठक में वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

  • पांच हजार में बनवाई एमबीबीएस की डिग्री,कालाबाजारी में पकड़े गए डॉक्टर का हुआ खुलासा…

    पांच हजार में बनवाई एमबीबीएस की डिग्री,कालाबाजारी में पकड़े गए डॉक्टर का हुआ खुलासा…

    • मध्यप्रदेश में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के मामले में लगातार नई परतें खुल रही हैं। इस मामले में शहर के निजी अस्पतालों में जांच करने वाले डॉक्टर ही फर्जी निकले हैं।
    • उन्होंने महज पांच हजार रुपये खर्च करके एमबीबीएस की डिग्री ली थी, जिसके बाद जबलपुर एसटीएफ ने फर्जी डिग्री बनाने वाले मास्टरमाइंड को दमोह से गिरफ्तार कर लिया।
    • आरोपी के कब्जे से दो प्रिंटर, लैपटॉप और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

    ऐसे हुआ था मामले का खुलासा

    जानकारी के मुताबिक, एसटीएफ ने 20 अप्रैल को चार रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ पांच आरोपियों राहुल उर्फ अरुण विश्वकर्मा, राकेश मालवीय, डॉ. जितेंद्र सिंह ठाकुर, डॉ. नीरज साहू और सुधीर सोनी को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा नरेंद्र ठाकुर समेत उसके साथियों को भी कुछ दिन पहले रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में पकड़ा गया। एसटीएफ ने जब मामले की जांच की तो आशीष अस्पताल में कार्यरत आरएमओ डॉ. नीरज साहू की डिग्री संदिग्ध लगी। एमईएच कॉलेज से उसका सत्यापन कराया गया तो वह फर्जी निकली।

    नरेंद्र ठाकुर से बनवाई थी फर्जी डिग्री

    पूछताछ के दौरान नीरज साहू ने बताया कि उसकी फर्जी डिग्री नरेंद्र ठाकुर ने पांच हजार रुपये में बनवाई थी। नरेंद्र से जब इस मामले में पूछताछ की गई तो उसने अपनी और नीरज साहू की फर्जी डिग्री व मार्कशीट अपने दोस्त दमोह निवासी रवि पटेल से बनवाने की बात कबूली। इसके बाद एसटीएफ ने रवि पटेल को भी गिरफ्तार कर लिया। रवि ने बताया कि उसने एक डिग्री बनाने की एवज में पांच हजार रुपये लिए थे। वह फोटोशॉप के माध्यम से फर्जी डिग्री बनाता था। आरोपी की निशानदेही पर एक लैपटॉप, दो प्रिंटर जब्त किए गए।

  • स्व.जगन्नाथ अग्रवाल (जगन सेठ) की स्मृति में हुआ रक्तदान शिविर….

    स्व.जगन्नाथ अग्रवाल (जगन सेठ) की स्मृति में हुआ रक्तदान शिविर….

    54 लोगों ने किया रक्त का दान..

    सुनील अग्रवाल खरसिया। नगर के प्रसिद्ध दंत रोग विशेषज्ञ डॉ विकास अग्रवाल के दादा स्व.जगन्नाथ अग्रवाल जगन (सेठ) झाराडीह वाले की स्मृति में रविवार को सिविल अस्पताल खरसिया में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया जिसमे 54 यूनिट ब्लड का संग्रह किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में युवाओं एवं महिलाओं ने भी रक्तदान किया। शिविरके आयोजन में महिला जागृति शाखा खरसिया तथा नगर की समाजसेवी संस्था हेल्पिंग हैंण्ड़स क्लब का सराहनीय योगदान रहा।


    समाजसेवा में हमेशा अग्रसर रहने वाली स्व.जगन्नाथ अग्रवाल की धर्मपत्नी श्रीमती नर्मदा अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर शिविर का शुभारंभ किया, तत्पश्चात रक्तदान प्रारंभ हुआ, जिसमें नगर के युवाओं, युवतियों सहित वरिष्ठ नागरिकों ने भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और शिविर में अपने रक्त का दान किया। मुख्य अतिथि के रूप में नगर पालिका परिषद खरसिया के अध्यक्ष प्रतिनिधि सुनील शर्मा ने रक्तदान को सबसे बड़ा दान  बताते हुए स्वेच्छिक रक्तदान के लिए युवाओं को प्रोत्साहित किया। ब्लड डोनेट कैंप में क्लब के सदस्यों, आमजन के साथ खरसिया चौंकी प्रभारी उपनिरीक्षक नंद किशोर गौतम द्वारा भी रक्तदान किया गया। खरसिया चौंकी के निरीक्षण के लिये पहुंचे रायगढ़ पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह ने भी अपने मातहतों के साथ कैंप में पहुंचकर युवाओं की हौंसला आफजाई की। आयोजक द्वारा शिविर में पहुंचे अतिथियों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर उनका सम्मान किया। रक्तदान के इस कार्यक्रम में प्रेस क्लब अध्यक्ष रामनारायण सोनी (शंटी), सुनील अग्रवाल, प्रहलाद बंसल, थाना प्रभारी सुम्मत राम साहू, हॉस्पिटल प्रभारी डॉक्टर दिलेश्वर पटेल सहित हेल्पिंग हैंड व मायुम की जागृति शाखा के सदस्य उपस्थित रहे।

  • ब्लैक फंगस के इलाज में 1.5 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी गंवानी पड़ी आंख….

    ब्लैक फंगस के इलाज में 1.5 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी गंवानी पड़ी आंख….

    कोरोना के बाद ब्लैक फंगस भी महामारी का रूप ले चुकी है। देश के 25 राज्यों में फैली इस बीमारी ने भी अब कहर मचाना शुरू कर दिया है। इसी बीच महाराष्ट्र के नागपुर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। नागपुर के एक व्यक्ति को कोरोना होने के कुछ महीने बाद म्यूकरमाइकोसिस बीमारी हो गई और उसके परिवार ने इलाज के लिए डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए। लेकिन, दुर्भाग्य की बात यह है कि इतना पैसा खर्च करने के बाद भी उस व्यक्ति को अपनी एक आंख हमेशा के लिए गंवानी पड़ी।


    नागपुर के नवीन पॉल जीएसटी विभाग में काम करते हैं। कोरोना के बाद उन्हें म्यूकरमाइकोसिस बीमारी हो गई और इसके इलाज के लिए उन्हें लगातार 6 अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती होना पड़ा। जिसके लिए उन्हें 1 करोड़ 48 लाख रुपये खर्च करने पड़े।
    नवीन पॉल को पिछले कुछ महीनों पहले कोरोना हो गया था जिससे वो ठीक भी हो गए लेकिन कुछ दिनों बाद उन्हें आंखों में दिक्कत होने लगी और दांत हिलने लगे। जब उन्होंने नागपुर के एक डॉक्टर से इस बारे में पूछताछ की तो उन्हें आगे के इलाज के लिए हैदराबाद जाने की सलाह दी गई लेकिन हैदराबाद में कोई खास इलाज नहीं हुआ तो वे मुंबई चले गए।


    मुंबई में एक महीने तक उनका इलाज चला। उस इलाज से भी उन्हें कोई खास फायदा नहीं मिला तो पॉल इलाज के लिए नागपुर वापस लौट आए। यहीं पर उनका इलाज किया गया और डॉक्टर ने उनकी एक आंख निकालने का फैसला किया। परिजनों की सहमति के बाद पॉल की एक आंख निकाल दी गई।
    इन सभी अस्पतालों में इलाज के लिए पॉल को 1 करोड़ 48 लाख रुपये का बिल देना पड़ा। नवीन की पत्नी रेलवे में काम करती हैं इसलिए इन सभी उपचारों के लिए रेल विभाग ने उनकी काफी मदद की। नवीन की पत्नी संगीता ने अपने पति को बचाने के लिए बहुत प्रयास किए। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे उनके पति के इलाज के लिए खर्च बढ़ती जा रही थी, उनके रिश्तेदारों ने भी उनकी बहुत मदद की। उनकी जान बचाने के लिए हर कोई मदद के लिए आगे आ रहा था और नागपुर में डॉक्टरों ने भी बहुत प्रयास किया और नवीन की जान बच गई। पॉल का कहना है कि रेलवे एवं उनके दोस्त एवं परिवार ने उनकी बहुत मदद की।

  • सरकारी अस्पतालों में ओपीडी का समय निर्धारण क्यों, मरीजों का बड़ा सवाल…

    सरकारी अस्पतालों में ओपीडी का समय निर्धारण क्यों, मरीजों का बड़ा सवाल…

    रायपुर। लोग समय देखकर बीमार नही होते, परेशानी होने पर ही इलाज कराने पहुंचते है. ऐसे में सरकारी अस्पतालों में ओपीडी का समय निर्धारण क्यों किया जाता है. मरीजों को इस निश्चित समय पर क्यों बुलाते हैं. यह एक गंभीर सवाल है. सरकारी अस्पताल से वापस लौटने वाले लोग कहते हैं कि 12 बजे के बाद ओपीडी बंद हो जाती है. हॉस्पिटल जाने के बाद कहा जाता है कि कल एक बजे के पहले आना. आखिर दिन भर ओपीडी क्यों नहीं होती. यह हाल राज्य के सभी सरकारी हॉस्पिटलों का है. दोपहर के बाद सीनियर डॉक्टर नहीं मिलते.

    मरीजों की गुहा

    जिला अस्पताल से भटक कर निराश वापस लौटने वाली सड्डू निवासी लक्ष्मी साहू ने कहा कि भगवान भरोसे अस्पताल चल रहा है. दोपहर पहुंचे तो डॉक्टर नहीं होते, शाम में तो कोई नहीं रहता. ये कैसी व्यवस्था है. बस दिखाने का बड़ा अस्पताल है।

    वहीं टाटीबंध से इलाज के लिए मेकाहारा पहुंचे जगू यादव ने कहा कि दोपहर के बाद अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं होते. कोई भी रोग हो एक डॉक्टर के पास भेज देते हैं. स्कीन समस्या दिखाने आया था लेकिन कल आने के लिए कहा गया है. मैं तो ठीक कल भी आ जाउंगा लेकिन बीमार लोगों के साथ यही किया जाता है ये खतरनाक है।

    ओपीडी नहीं शाम में एमरजेंसी सेवा

    जिला अस्पताल पंडरी के अधीक्षक आरके गुप्ता ने कहा कि हमारे यहां सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक ओपीडी होता है. सभी डॉक्टर मौजूद रहते हैं. पहले सुबह आठ बजे से दोपहर 2 बजे का होता था जिसे शासन के आदेशानुसार सुबह 9 बजे से 1 बजे किया गया है.

    शासन के आदेश का पालन

    मेकाहारा के अधीक्षक डॉ विनीत जैन ने कहा कि सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक समय निर्धारित है. ओपीडी में लगभग 14 मरीज पहुंच रहे हैं. शाम को कोई ओपीडी सेवा नहीं होता है. एमरजेंसी सेवा चालू रहता है. शासन का आदेश है क्या कर सकते हैं।

    क्या कहते हैं स्वास्थ्य के जानकार

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में लगभग 90 प्रतिशत डॉक्टर बहुत लेट पहुंचते हैं और एक दो घंटा जल्दी निकल जाते हैं. ओपीडी़ का समय शासन द्वारा निर्धारित होता है. इसके समय बढ़ाने की जरूरत है, नहीं तो गरीब मरीज भी प्रायवेट हॉस्पिटल में मोटी रकम देकर इलाज कराने को मजबूर होंगे. ऐसे में घर का जमीन बेचते हैं. घर के सामान जेवर बेचते हैं. जमीन जायदाद नहीं होने पर कर्ज में दब जाते हैं, ये राज्य के लिए गंभीर समस्या है और इसमें गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।