













खरसिया । खरसिया नगरी की धन्य धरा पर आयोजित श्रीमद भगवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास पूज्य श्री अतुल कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने बताया कि जन्म लेना और मृत्यु होना मृत मनुष्य के जीवन में 2 सबसे बड़े दुख हैं मनुष्य का जन्म बड़े दुखों के साथ होता है और मृत्यु भी दुखी करती है तो फिर भी मनुष्य यह जानते हुए संसार में सुख और आनंद की तलाश करते हैं वास्तव में उसने अपने जीवन का लक्ष्य कभी परमात्मा को बनाया ही नहीं कथा श्रवण कर यदि मनुष्य आत्म चिंतन कर उस पर अमल करें तो जीवन का अर्थ ही बदल जाएगा । श्रीमद् भागवत कथा में पूज्य कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने श्रद्धालुओं को कथा पान कराते हुए बताया कि आज मनुष्य अपने लक्ष्य से भटक गया है मनुष्य का लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति होना चाहिए।

मृत्यु होने पर शरीर संसार में ही नष्ट हो जाता है शरीर के रिश्ते केवल संसार तक ही सीमित है और आत्मा को परमात्मा अपने साथ ले जाते हैं जीवन का लक्ष्य केवल परमात्मा की प्राप्ति का होना चाहिए और संसार में रहते हुए शरीर से जो भी कार्य हो रहे हो वह परमात्मा का मानकर करते रहना चाहिए श्री अतुल कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने बताया कि कलियुग में भगवान को पाने का सबसे अच्छा तरीका है भगवान की भक्ति। भगवान की भक्ति से ही परमात्मा को पाया जा सकता है और यह भक्ति बिना राधा रानी के प्राप्त होने वाली नहीं है जो निस्वार्थ भाव से भगवान की भक्ति करता है उसे राधा कृष्ण राधा रानी की कृपा प्राप्त होती है। विदित हो की खरसिया में गर्ग परिवार के द्वारा श्रीमद भागवत कथा का आयोजन २८ अगस्त से कन्या विवाह भवन में कराया जा रहा है ।

खरसिया। पवित्र सावन महीना प्रारंभ हो चुका है शिवालयों में हर-हर महादेव के नारे गूंजने लगे हैं गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जा रहा है। इसके साथ ही केसरिया कपड़े पहने शिवभक्तों के जत्थे गंगा का पवित्र जल शिवलिंग पर चढ़ाने निकल पड़े हैं। खरसिया नगर के होनहार युवक दीपक गर्ग ने 31 जुलाई को दोपहर 3 बजे के लगभग सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए बिना रुके 01 अगस्त को बाबा बैजनाथ धाम पहुँचकर सुबह 10 बजे के लगभग अपनी डाक कांवड़ से लाये गंगाजल को शिवलिंग पर अर्पित कर अपने परिवार और नगरवासियों की खुशहाली के लिए भोलेबाबा से प्रार्थना की। विदित हो की दीपक गर्ग नगर के प्रतिष्ठित व्यापारी रामचरण अग्रवाल के पुत्र हैं ।
बाबा बैजनाथ की यह पैदल कांवर यात्रा ऐसी आलौकिक यात्रा है कि जो बाबा को निस्वार्थ भाव से कावड़ चढ़ाता है उसकी सभी मनोरथ बाबा पूर्ण करते हैं एवं उसके पश्चात उनके मन में जो अनुभूति होती है उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। दीपक गर्ग ने सभी से निवेदन करते हुए कहा है अपने जीवन में एक बार बाबा बैजनाथ एवं बाबा बासुकीनाथ की कांवड़ अवश्य चढ़ाएं।

खरसिया। सावन महिने के पावन अवसर पर खरसिया में स्थित नगर के प्रसिद्ध शिव मंदिर भगत तालाब में शिवरात्रि का पर्व शिव परिवार द्वारा बडे ही धूमधाम एवं भव्यवतापूर्वक मनाया गया। इस दौरान शिव परिवार द्वारा शिवरात्रि के पावन पर्व पर देवो के देव भगवान महादेव का विशेष रूप से श्रृंगार किया गया। शाम को भजन संध्या के पश्चात् भगवान भोलेनाथ की महाआरती की गयी तथा भक्तों का प्रसाद का वितरण किया गया।
विदित हो कि श्रावण मास भगवान शिव को अत्यधिक प्रिय है, प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी खरसिया के विभिन्न शिव मंदिरों में सावन शिवरात्रि के अवसर पर बडी संख्या में भगवान भोले शंकर के भक्तों द्वारा विशेष पूजा अर्चना की गई। इसी कडी में खरसिया के प्रसिद्ध भगत तालाब जो कि अपनी रंगीन मछ़लियों की वजह से पूरे छत्तीसगढ में मछली तालाब के नाम से प्रसिद्ध है वहां स्थित शिव मंदिर में शिव परिवार द्वारा सावन मास के शिवरात्रि के अवसर पर पूरे मंदिर को विशेष तौर पर फुलों एवं रंगीन झालरों से सजाया गया था। शिवरात्रि के पावन आवसर पर शिव मंदिर भगत तालाब में भगवान शिव के भक्तों का दिन भर तांता लगा रहा। वहीं शिव परिवार द्वारा शिव मंदिर में शिवरात्री का पर्व बडे ही धूमधाम से मनाते हुए भोले भंडारी का विषेश रूप से श्रृगांर किया गया।

शिव मंदिर भगत तालाब में रात्रि 7 बजे से बाबा के भक्तों द्वारा भोले शंकर एवं मॉं पार्वती के भजनों से बाबा को भाव विभोर किया गया। इस दौरान बाबा भोलेनाथ के भक्त बाबा के भजनों पर मस्ती के साथ थिरकते दिखे वहीं रात्रि में शिव परिवार द्वारा देवों के देव महादेव की आरती के पश्चात प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान शिवमण्ड़ल के विजय अग्रवाल, पवन अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, दिनदयाल अग्रवाल, मुन्ना अग्रवाल, नारायण चक्रधारी, मुकेश अग्रवाल, विकास कबुलपुरिया, विनोद अग्रवाल, कन्हैया राठौर, शेरू शर्मा, राधे अग्रवाल, आकाश शर्मा, महिला मण्ड़ल की शकुन्तला देवी अग्रवाल, मनीषा अग्रवाल, रेखा अग्रवाल, आशा अग्रवाल, नंदिनी गोयल सहित नगर के अन्य शिवभक्त उपस्थित थे।


खरसिया । धर्म नगरी खरसिया की धन्य धरा पर नगर के विभिन्न मोहल्ले में समितियां बनाकर मां दुर्गा को विराजमान कर जगत जननी मां जगदंबे की पूजा अर्चना में समूचा नगर मां की भक्ति में डूबा हुआ है दुर्गा पूजा मेला के दौरान खरसिया ही नहीं खरसिया नगर के आसपास के ग्रामीण अंचलों से हजारों की संख्या में माता के भक्तों द्वारा नगर में 2 दर्जन से अधिक पंडालों के माध्यम से माताओं के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण कर आशीर्वाद लेने के लिए खरसिया नगर में आते हैं।



इस वर्ष भी खरसिया नगर में दुर्गा उत्सव नव दुर्गा उत्सव समिति गंज बाजार, गजिया पंडा दुर्गा उत्सव समिति पीपल गली, अग्रवाल दुर्गा उत्सव समिति पोस्ट ऑफिस के पास, नव दुर्गा उत्सव समिति मोहापाली रोड, जय दुर्गा उत्सव समिति गोपीराम गर्ग गली, गंज पीछे सर्वोत्तम दुर्गा उत्सव समिति माधव प्रिया होटल के पीछे, नव दुर्गा उत्सव समिति अजय विजय गली के पास, नव दुर्गा उत्सव समिति हमालपारा, नवदुर्गा उत्सव समिति पुराना सब्जी मार्केट, अग्रसेन दुर्गा उत्सव समिति अग्रसेन चौक के पास नव दुर्गा उत्सव समिति गुरुद्वारा के पास, नव दुर्गा उत्सव समिति शनि मंदिर रोड, नव दुर्गा उत्सव समिति स्टेट बैंक के सामने, शिव दुर्गा उत्सव समिति, रानी सती दादी दुर्गा उत्सव समिति छपरी गंज, नव दुर्गा उत्सव समिति रामनाथ गली, हनुमान चौक दुर्गा उत्सव समिति, पुरानी बस्ती, संजय नगर, ठाकुरदिया, रायगढ़ चौक, पुरानी बस्ती के अंदर आदि अनेक स्थानों पर जगत जननी मां दुर्गा की पूजा अर्चना नगर के मोहल्ला समितियों द्वारा विशाल पंडाल एवं साज-सज्जा कर की जा रही है।

संपूर्ण खरसिया नगर रंग बिरंगी झालरों से पटा हुआ है, भक्तों द्वारा प्रत्येक समितियों के माध्यम से प्रतिदिन प्रत्येक पंडालों में अनेक प्रकार की सवामणी प्रसाद माता को अर्पण कर भक्तों के बीच प्रसाद वितरण किया जाता है खरसिया का दुर्गा मेला देखने एवं माता का आशीर्वाद लेने के लिए चंद्रपुर सरिया बरमकेला सारंगढ़ रायगढ़ शक्ति बाराद्वार डभरा धर्मजयगढ़ पत्थलगांव आदि कई स्थानों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में खरसिया नगर पहुंचते हैं माता के दरबार में प्रतिदिन लगता है सब्जी पूरी का भंडारा नगर में नवरात्र मेला के दौरान जगत जननी मां जगदंबे के दरबार में समितियों द्वारा आए हुए श्रद्धालुओं के लिए सवामणि प्रसाद के अलावा पूरी सब्जी का भी भंडारा विशाल रूप से लगाया जाता है भक्तों द्वारा सब्जी पूड़ी का भंडारा को विशेष रूप से ग्रहण कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं नगर का प्रमुख नवरात्र मेला खरसिया नगर में दुर्गा उत्सव का मेला देशभर में खास पहचान बना चुका है यहां का दुर्गा उत्सव का मेला छत्तीसगढ़ गण की शान है यही वजह है कि यहां स्थापित माताओं की प्रतिमा का दर्शन करने के लिए अनेक स्थानों से दूर-दूर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
कोरोना के संबंध में प्रशासन द्वारा जारी किये गये गाईड़ लाईन का पालन करते हुये इस वर्ष नगर में मां दुर्गा का पूजन किया जा रहा है, समितियों में पानी और सैनेटाईजर की व्यवस्था भी की गयी है जिससे कि कोराना का संक्रमण न फैल सके।

शहर में शारदीय नवरात्र पर्व को धूमधाम से मनाया जा रहा है और मॉ जगत जननी के विविध रूपों की पूर्ण भक्तिभाव से पूरे नौ दिनों तक पूजा अर्चना की जा रही है। नगरवासियों द्वारा नगर के अनेक स्थानों पर भव्य पंडाल बनाकर मॉ जगत जननी की जींवत प्रतिमा की स्थापना पूर्ण विधि विधान से करते हुए सुबह शाम माता की अराधना की जा रही है, जिससे पूरा शहर माता के भक्ति में रमा हुआ है। वही इस पूरे नौ दिनों में खरसिया नगर का वातावरण पूर्ण रूपेण माता के रंगो में रंगा हुआ है।


पूरे प्रदेश में खरसिया का नवरात्र पर्व प्रसिद्ध है और इस प्रसिद्धी को निरंतर बनाये रखने में नगरवासियों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। जगह जगह भव्य एवं विशाल पंडाल बनाये गये है जहां मनमोहक झांकियॉं बनाई गई वहीं रंग बिरंगी झालरों से पूरे नगर को सजाया गया है।

जांजगीर-चांपा। कलेक्टर यशवंत कुमार को चंद्रपुर के पूर्व विधायक एवं संसदीय सचिव रह चुके युद्धवीर सिंह जूदेव ने पत्र लिख कर नवरात्रि पर्व पर मंदिरों में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को लेकर नाराजगी जाहिर की है।
पत्र में उन्होंने लिखा है कि पूरे छत्तीसगढ़ में किसी भी जिले में मंदिरों में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक नहीं लगाई है सिर्फ जांजगीर चांपा जिले में नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं के प्रवेश पर करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह अत्यंत खेद का विषय है कि पूरे छत्तीसगढ़ में मदिरा की दुकानें खुली हुई है और जाँजगीर चांपा जिले का मंदिर बंद है।
आदिशक्ति अंबे भवानी मां दुर्गा के प्रति हम हिंदुओं की असीम आस्था और विश्वास जुड़ा हुआ है। हमारी माताएं और बहनें 9 दिनों तक उपवास रखकर माता रानी के दर्शन हेतु लालायित रहती हैं और नवरात्रि के समय माता रानी का दर्शन ना कर पाना अत्यंत ही दुर्भाग्य और खेद का विषय है। हम हिंदुओं के प्रति आस्था से खिलवाड़ किया जाना मैं और मेरे हिंदू भाई कतई बर्दाश्त नहीं कर सकेंगे चाहे सरकार किसी की भी हो।
कलेक्टर से अनुरोध करते हुए जूदेव ने कहा है कि हिंदुओं के आस्था को ध्यान में रखते हुए 24 एवं 25 अक्टूबर अष्टमी नवमीं को श्रद्धालुओं को मंदिरों में प्रवेश करने की अनुमति प्रसारित करें।

रायपुर। लगभग पिछले तीन महीने से राजधानी रायपुर समेत देश-प्रदेश के मंदिरों का पट कोरोना महामारी के कारण बंद है। जो अब तक मंदिर के द्वार भक्तों के दर्शन के लिए नहीं खोले गए हैं, जबकि एक सप्ताह बाद ही हिंदू संस्कृति के महत्वपूर्ण पर्वों का सिलसिला शुरू हो रहा है। इनमें 1 जुलाई को देवशयनी एकादशी, 5 जुलाई को गुरु पूर्णिमा और 6 जुलाई से सावन माह का शुभारंभ होगा। इस बार लंबे अर्से बाद पांच सोमवार वाले सावन माह का आगमन हो रहा है, जो भक्तों के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है। सावन 2020 में इस बार सोमवार का अद्भुत संयोग बन रहा है। छह जुलाई से शुरू हो रही सावन की शुरुआत के पहले दिन ही सोमवार है।
वहीं इस बार सावन में पांच सोमवार पड़ेंगे। यह माह 06 जुलाई से शुरू होकर 03 अगस्त तक चलेगा, वहीं सावन माह के आखिरी दिन यानि 03 अगस्त को भी सोमवार का दिन रहेगा। यानि इस बार सावन की शुरुआत सोमवार से होकर इसका समापन भी सोमवार को ही होगा। पंडित रितेश शर्मा के अनुसार 06 जुलाई को सावन की शुरुआत सोमवार को होने के बाद दूसरा सोमवार 13, तीसरा 20, चौथा 27 व पांचवा सोमवार सावन के समापन के दिन 03 अगस्त को पड़ेगा।
तीन अगस्त को यानि सावन के समापन के दिन ही पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाएगा।
25 नवंबर तक मांगलिक कार्य नहीं होंगे: देवशयनी एकादशी पर सभी देवी-देवता योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस मान्यता के कारण लगभग चार माह देवउठनी एकादशी (25 नवंबर) तक सभी मांगलिक कार्य नहीं होंगे, लेकिन जप, तप, दान, व्रत, हवन आदि जारी रहेंगे।
5 जुलाई को गुरूपूर्णिमा: गुरुपूर्णिमा का पर्व 5 जुलाई को मनाया जाएगा। सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना संक्रमण से बचाव के कारण इस बार गुरु-शिष्यों के मिलन पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। इस स्थिति में शिष्यों को अपने गुरु के चित्र पूजन, मानसिक नमस्कार एवं संचार साधनों की मदद लेना होगी। गुरु पूर्णिमा के साथ ही चातुर्मासिक अनुष्ठानों का सिलसिला विभिन्न समाजों में शुरू हो जाएगा। हालांकि इस बार अब असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

दिल्ली। उड़ीसा के पुरी में होने वाली इस साल की भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी. कोर्ट ने कहा है कि लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है. कोर्ट ने रथ यात्रा से जुड़ी सभी गतिविधियों को रोकने का आदेश दिया है.
बीमारी फैलने का अंदेशा
ओडिशा विकास परिषद नाम की संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि हर साल होने वाली भगवान जगन्नाथ यात्रा में लाखों लोगों की भीड़ जुटती है. पिछले साल 10 लाख से ज्यादा लोग पुरी की सड़कों पर जमा हुए थे. इस साल कोरोना की महामारी फैली है. लेकिन अभी तक ओडिशा सरकार ने रथयात्रा को रोकने के कोई संकेत नहीं दिए हैं. हाई कोर्ट ने भी फैसला राज्य सरकार के ऊपर छोड़ दिया है. इसलिए, सुप्रीम कोर्ट को मामले में दखल देना चाहिए.
‘आज ही देंगे आदेश’
सुप्रीम कोर्ट में मामला चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और ए एस बोपन्ना की कोर्ट में सुनवाई के लिए लगा. बेंच की अध्यक्षता कर रहे हैं चीफ जस्टिस ने इसे एक गंभीर मसला बताया. केंद्र की तरफ से कोर्ट में मौजूद सॉलिसिटर जनरल ने सुनवाई कल तक के लिए टालने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि इस मसले पर सरकार भी विचार करके अपनी बात कोर्ट के सामने रखना चाहती है. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, “रथ यात्रा जैसे-जैसे नजदीक आती जाएगी, इसके बारे में फैसला कठिन हो जाएगा. कल हमारी अदालत नहीं बैठेगी. इसलिए, मसले पर आज ही कोई आदेश दिया जाएगा.“
बिना भीड़ गतिविधियों की मांग भी नामंज़ूर
याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने इससे सहमति जताते हुए कहा, “यात्रा से जुड़ी गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं. करीब 15 दिन तक यह चलती रहेंगी. इस मसले पर कोर्ट की तरफ से तुरंत आदेश दिया जाना जरूरी है.“ इस पर सॉलीसीटर जनरल समेत कुछ वकीलों ने निवेदन किया कि कोर्ट को बिना भीड़ इकट्ठा किए रथ यात्रा से जुड़ी गतिविधियों को चलाने की इजाजत देने पर विचार करना चाहिए.
कोर्ट ने ओडिशा सरकार की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे से जब इस पर टिप्पणी करने के लिए कहा तो उनका जवाब था, “अगर धार्मिक गतिविधियों की अनुमति दी गई तो भीड़ खुद-ब-खुद आ जाएगी. उसे रोक पाना मुश्किल होगा. कोर्ट को इस स्थिति पर विचार करते हुए ही आदेश देना चाहिए.“ इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, “हमारा भी अनुभव यही कहता है अगर किसी तरह की गतिविधि की अनुमति दी जाती है तो भीड़ वहां जमा हो ही जाती है.“
‘भगवान जगन्नाथ हमें माफ करेंगे’
इसके बाद चीफ जस्टिस ने रथ यात्रा और उससे जुड़ी गतिविधियों पर रोक का आदेश दे दिया. उन्होंने कहा, “लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा के लिए यह आदेश देना जरूरी है. ओडिशा सरकार इस साल राज्य में कहीं भी रथयात्रा जैसी गतिविधि की अनुमति न दे. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की, “हम लोगों के जीवन की रक्षा के लिए इस तरह का आदेश दे रहे हैं. भगवान जगन्नाथ हमें इसके लिए माफ कर देंगे.”
चीफ जस्टिस ने अंग्रेजी के शब्द ‘जगरनॉट’ का भी इस्तेमाल किया. अत्यंत प्रभावशाली शक्ति के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘जगरनॉट’ शब्द के बारे में उन्होंने कहा, “यह शब्द जगन्नाथ से ही निकला है. भगवान जगन्नाथ का काम कभी नहीं रुकता है.”

खरसिया। महाशिवरात्रि का पावन पर्व 21 फरवरी को खरसिया क्षेत्र में अत्यंत ही धार्मिक वातावरण में धूमधाम के साथ मनाया गया। इस दौरान शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई, देवो के देव कहे जाने वाले महादेव की उपासना का पर्व महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रो के शिवालयों में अल सुबह से शिवभक्तों का भारी भीड़ देखने को मिली। वहीं नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रो में शिव मंदिरों को लोगों द्वारा महाशिवरात्रि पर्व के पहले विषेश साज सज्जा की गई थी। जहां मंदिरों के गर्भगृह को फुलमालाओं से सजाया गया था वहीं दीवारों में रंगीन झालरों की सजावट की गई थी। महाशिवरात्रि के अवसर पर दिन भर मंदिरों में शिवभक्तों का तांता लगा रहा। विदित हो कि प्रतिवर्ष फागुन मास के कृष्ण पक्ष को चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। शिव भक्तों को इस दिन का विषेश रूप से इंतजार रहता है। इस बार यह पर्व 21 फरवरी को मनाया गया। इस पावन पर्व पर शिव मंदिरों में अल सुबह से ही भक्तों की भीड उमडना प्रारंभ हो गई था जो दोपहर तक जारी रहा। शहर के मौहापाली रोड स्थित निकले हुए महादेव मंदिर, भगत तालाब स्थित शिव मंदिर, स्टेशन चौक स्थित शिव मंदिर, सुखरू तालाब स्थित शिव मंदिर, गोशाला तालाब स्थित शिवालयों में श्रद्धालुओं द्वारा चंदन लगाकर शिवलिंग की पूजा अर्चना की गई। महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव को जलाभिषेक करने के लिए शहर व ग्रामीण क्षेत्र के शिवालय में भरी भीड़ देखने को मिली। पूरे क्षेत्र में महाशिवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया गया। शिव मंदिरों में गूंजे मंत्र और भजनों की ध्वनि भक्तों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। इस महा पुण्यदाई पर्व पर हर कोई अपनी अभिलाषाएं महादेव से पूर्ण करवाने की लालसा रखते हैं। कोई बिल्वपत्र तो कोई अक्षत-चावल लेकर, कोई कच्चा दूध लेकर तो कोई मनचाही मिठाई लेकर भोलेनाथ को समर्पित किये। वर्षों से अपनी अपूर्ण अभिलाषाओं की पूर्ति का वरदान पाकर लौटे। इस अवसर पर कुंवारी कन्याएं अपने भावी जीवन के लिए मनचाहा वरदान पाने हेतु 108 बिल्व पत्रों पर ओम नमः शिवाय लिखकर शिव को अर्पित कर रहे किये। तो कोई भक्त उपवास रखकर अपने इष्ट को रिझाने का प्रयत्न किये। शिव मंदिरों में कहीं अखंड रामायण का पाठ चल रहा था तो कहीं शिव संकीर्तन और शिव पुराण का पाठ चल रहा था। क्षेत्र के सभी मंदिर में शिव भजनों से गुंजायमान रहे। पुराणों में कहा जाता है आज के दिन भोलेनाथ का विवाह माँ पार्वती से हुआ था। अतः आज वे अपने भक्तों को मनचाहा वरदान प्रसन्नता से देते हैं। श्रद्धा के साथ यथासंभव कुछ भी शिव को अर्पित करें या फिर भावना पूर्वक उनके चरणों में शीश नवाएं तो वह असंभव को भी सुलभ कर देते हैं।

भगत तालाब में हुयी विशेष पूजा, देर रात तक चलता रहा भजनों का दौर
अंचल ही नही वरन प्रदेश भर में मछली तालाब के नाम से प्रसिद्व भगत तालाब स्थित शिवमन्दिर में शिव मण्ड़ल के द्वारा महाशिवरात्रि का पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया गया, पुरषोत्तम अग्रवाल, विजय अग्रवाल, पवन अग्रवाल, दिनदयाल अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, मुकेश अंगनूराम, श्याम सुन्दर अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, दिलीप शर्मा, आकाश शर्मा सहित शिव परिवार के सदस्यों के द्वारा इस अवसर पर भगवान भोलेनाथ का श्रृंगार किया गया तथा उनका दुध से अभिषेक किया गया, इस दौरान देर रात तक शिव मन्दिर में भक्तों के द्वारा भजन तथा कीर्तन किया गया, रात्रि लगभग 9 बजे बाबा की आरती कर सैंकड़ों भक्तों को बाबा भालेनाथ का प्रसाद वितरण किया गया।

अदालत ने एसडीएस के आदेश में विशेष न्यायिक क्षेत्राधिकार का उपयोग करते हुए हस्तक्षेप करने से यह कहते हुए इनकार किया कि ऐसा करने पर सामाजिक असंतुलन खड़ा हो सकता है।
एसडीएम ने दो समुदायों के बीच विवाद को रोकने के लिए किसी भी धार्मिक स्थल पर इन उपकरण को न लगाने का आदेश दिया था।
याचिका करने वालों की दलील थी कि वे मस्जिदों में रोजाना पांच बार दो मिनट के लिए इन उपकरणों के प्रयोग की अनुमति चाहते हैं।
दावा था कि इससे प्रदूषण या शांति व्यवस्था को खतरा नहीं है। यह उनके धार्मिक कार्यों का हिस्सा है, बढ़ती आबादी की वजह से लोगों को लाउडस्पीकर के जरिए नमाज के लिए बुलाना जरूरी हो जाता है।
इसे नकारते हुए जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस विपिन चंद्र दीक्षित ने कहा कि निश्चित रूप से संविधान का अनुच्छेद 25 (1) सभी नागरिकों को अपने धर्म को मानने और उसका प्रचार करने की अनुमति देता है।
दूसरी ओर यह बुनियादी मूल्य है कि हाईकोर्ट को सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए उचित ढंग से अपने विशेष न्यायिक क्षेत्राधिकार का उपयोग करना चाहिए। मौजूदा मामले में यह साफ है कि ऐसा कराने की जरूरत नहीं है। इससे सामाजिक असंतुलन पैदा हो सकता है।
‘एक संगठित समाज में कोई भी अधिकार निरंकुश नहीं होता। एक पक्ष का आनंद दूसरे पक्ष के आनंद से सुसंगत होना चाहिए। जब सामाजिक शक्तियों को मिले खुलेपन से समाज में सौहार्द नहीं बन पाए और हित आपस में टकराएं तो सरकार को असंतुलन खत्म करने के लिए कदम उठाना होता है। व्यक्ति के मूल अधिकार दूसरों के मूल अधिकारों के सामंजस्य में होते हैं, इन पर सरकार की विवेकपूर्ण व उचित शक्ति भी लागू होती है।’
धर्म नहीं कहता लाउड स्पीकर बजाने के लिए – चर्च ऑफ गॉड मामला, सुप्रीम कोर्ट
‘धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार नागरिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य से जुड़े हैं। कोई भी मजहब नहीं सिखाता कि प्रार्थना के लिए लाउडस्पीकर व एम्प्लीफायर लगाएं या ढोल बजाए जाएं। अगर ऐसा किया भी जाए तो इससे दूसरों के अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए।’
‘धर्म का पालन करना मूल अधिकार है, लेकिन इसे निजता के अधिकार के साथ माना जाना चाहिए। किसी को भी अपने धर्म का पालन इस प्रकार करने का अधिकार नहीं है कि वह दूसरे की निजता का उल्लंघन करने लगे।
ऐसे में लोग धार्मिक कामों जैसे अखंड रामायण, कीर्तन आदि में लाउडस्पीकर से दूर रहें, इससे लोगों को तकलीफ होती है।’
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि ‘एक ओर अमेरिका, इंग्लैंड और अन्य विकसित देशों में लोग ध्वनि प्रदूषण से बचने के लिए कार का हॉर्न भी बजाने से बचते हैं, इसे खराब व्यवहार मान रहे हैं। वहीं भारत में लोग अब भी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि शोर भी प्रदूषण है।
इससे सेहत को नुकसान होता है।’ हाईकोर्ट ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण से बहरापन, हाई बीपी, अवसाद, थकान, और लोगों में चिड़चिड़ापन हो सकता है। अधिक शोर हृदय व दिमाग को नुकसान करता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम में ध्वनि प्रदूषण (रोकथाम व नियंत्रण) नियमावली 2000 में बनाई थी। इनके अनुसार हॉर्न, तेज ध्वनि पैदा करने वाले उपकरण, लाउड स्पीकर, आदि पर जगहों के अनुसार प्रतिबंध लगाए गए हैं।
ऐसे में बिना पूर्व अनुमति के इनका इस्तेमाल नहीं किया सकता। इस अनुमति के लिए केंद्र या प्रदेश सरकार डीएम, पुलिस आयुक्त या कम से कम डीएसपी स्तर के अधिकारी को नामित कर सकती है।