रायपुर, सालों से एक ही टेबल में डटे कर्मचारियों को हटाया जएगा। शासकीय कार्यालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने फिर एक बार अधिकारियों और कर्मचारियों के डेस्क बदलने का नया नियम लागू किया है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार अब सभी विभागों, कलेक्टर कार्यालयों, संभाग आयुक्त कार्यालयों और अधीनस्थ कार्यालयों में हर तीन वर्ष में डेस्क असाइनमेंट का अनिवार्य रूप से परिवर्तन किया जाएगा। विशेष परिस्थितियों में ही सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति से इस नियम में छूट दी जाएगी।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। जारी आदेश में कहा गया है कि लंबे समय तक एक ही कार्य-पटल पर कार्यरत रहने से कर्मचारियों का अनुभव सीमित रह जाता है। समय-समय पर कार्य-पटल बदलने से उन्हें विभिन्न प्रकार के शासकीय कार्यों, नियमों और कार्यालयीन प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, जिससे उनकी कार्यकुशलता और दक्षता में वृद्धि होगी।
विशेष परिस्थिति के लिए अनुमति अनिवार्य
आदेश के अनुसार, कार्य-पटल बदलते समय प्रशासनिक आवश्यकता, कार्य की प्रकृति और कार्यालयीन हितों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी को विशेष परिस्थितियों में उसी डेस्क पर बनाए रखना आवश्यक हो, तो सक्षम प्राधिकारी की लिखित एवं कारणयुक्त अनुमति अनिवार्य होगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों और कार्यालय प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि आदेश का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करें। साथ ही, डेस्क परिवर्तन से संबंधित सभी अभिलेख कार्यालय स्तर पर संधारित किए जाएंगे। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
नए आदेश की प्रमुख बातें
मौजूदा आदेश की व्यवस्था सभी विभागों, कलेक्टर और संभाग आयुक्त कार्यालयों सहित अधीनस्थ कार्यालयों में लागू होगी। हर तीन वर्ष में अधिकारियों और कर्मचारियों का कार्य-पटल बदला जाएगा। विशेष परिस्थितियों में ही सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति से छूट मिलेगी। आदेश का उद्देश्य कार्यकुशलता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू किए गए हैं।
रायपुर। सामान्य प्रशासन विभाग ने कड़ा आदेश जारी किया है। जिसके तहत बार-बार शेयर ट्रेडिंग और खरीद बिक्री को सिविल सेवा आचरण का उल्लंघन माना गया है। यही नहीं शेयर ट्रेडिंग की जानकारी भी सरकार को देना अब अनिवार्य कर दिया गया है। दरअसल जीएडी सेकरेट्री ने सभी विभागों, राजस्व मंडल अध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ को पत्र लिखा है।
सरकार द्वारा 30 जून 2025 को जारी अधिसूचना के तहत अब शेयर, प्रतिभूतियाँ, डिबेंचर्स और म्युचुअल फंड्स को भी “जंगम संपत्ति” की श्रेणी में शामिल किया गया है। यह संशोधन छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 19 में किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत कोई भी शासकीय सेवक यदि स्वयं या अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम से ऐसे निवेश करता है, जिसकी राशि दो माह के मूल वेतन से अधिक है, तो उसे संबंधित प्राधिकृत अधिकारी को रिपोर्ट करना होगा।
इसके अलावा, यदि किसी भी कैलेंडर वर्ष में कुल निवेश (शेयर, सिक्योरिटीज, डिबेंचर्स और म्युचुअल फंड्स) छह माह के मूल वेतन से अधिक हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी को एक निर्धारित प्रोफार्मा में इसकी सूचना देना अनिवार्य कर दिया गया है।
वित्तीय अनुशासन को लेकर सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि शेयरों या अन्य वित्तीय साधनों में बार-बार खरीद-बिक्री (जैसे इंट्रा डे, बीटीएसटी, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) को आचरण नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सभी विभागों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे इन नए नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और शासकीय सेवकों को इस संबंध में जागरूक भी करें।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में एक लड़की बैड में बैठकर मजे से ड्रग्स ले रही है। बताया जा रहा है कि वीडियो रायपुर के गंज थाना क्षेत्र के एक बड़े होटल का है। वीडियो को किसी ने कमरे में लगी खिड़की के बाहर से बनाया है।
2ः19 मिनट के वीडियो में आप देख सकते हैं कि जींस टॉप पहने एक लड़की ने पहले एक छोटी सी पुड़िया निकाली और फिर पर्स से पांच सौ का नोट निकाल कर उसमें ड्रग्स डालकर बनाने लगी। ड्रग्स तैयार होने के बाद लड़की उस ड्रग्स को चाटते हुये भी दिख रही है।
इस संबंध में रायपुर शहर एएसपी लखन पटले ने कहा कि एक वीडियो सामने आया है। लड़की पांच सौ के नोट में कुछ मिलाते हुये दिख रही है। मामले में जांच की जा रही है। साथ युवती की भी तलाश की जा रही है। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
भ्र्ष्टाचार से जुटाई गई सम्पत्ति पर हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
कुर्क की गई संपत्ति और अपराध की आय के बीच कोई संबंध है,
कोल घोटाला, पूर्व सीएम के ओएसडी की माँ, भाई, सहित अन्य 9 आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने के खिलाफ पेश याचिका खारिज
बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व बीडी गुरु की डीबी ने कोल घोटाला के आरोपियों की सम्पति कुर्क करने के खिलाफ पेश याचिका में कहा, धन शोधन के मामले में, चूँकि कार्यप्रणाली में अक्सर घुमावदार और अस्पष्ट वित्तीय लेन-देन शामिल होते हैं, जिससे प्रत्यक्ष साक्ष्य प्राप्त करना स्वाभाविक रूप से कठिन हो जाता है, सत्यापन योग्य वैध आय के अभाव में न्यायालय यह मान सकता है कि कुर्क की जाने वाली संपत्ति और अपराध की आय के बीच कोई संबंध है।प्रवर्तन प्राधिकारी के लिए प्रत्यक्ष साक्ष्य द्वारा यह स्थापित करना आवश्यक नहीं है कि विचाराधीन संपत्ति अपराध की आय है।
संपत्ति अधिग्रहण की समय-सीमा, और सत्यापन योग्य वैध आय का अभाव शामिल है, के आधार पर, यह न्यायालय संतुष्ट है कि संपत्ति और पीओसी के बीच प्रथम दृष्टया संबंध मौजूद है। इसलिए, पीएओ पीएमएलए के तहत वैधानिक योजना के अनुरूप है और इसे बरकरार रखा जा सकता है। एक उचित विश्वास मौजूद है, जो विधिवत दर्ज है और भौतिक
साक्ष्य द्वारा समर्थित है, कि कुर्क की गई संपत्तियां धन शोधन में शामिल हैं और इसके अलावा, अपीलकर्ता पीएमएलए की धारा 24 के तहत वैधानिक अनुमान का खंडन करने में विफल रहे हैं। हमें नहीं लगता कि इन अपीलों में उत्तर देने योग्य कोई कानूनी प्रश्न उठता है।. इस बात को ध्यान में रखते हुए कि…उपरोक्त चर्चा के आधार पर, हम अपीलीय अधिकरण और अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए निष्कर्षों और तर्कों से पूरी तरह सहमत हैं और इस प्रकार, ये अपीलें गुण-दोष से रहित होने के कारण खारिज की जाती हैं।
बहुचर्चित कोयला घोटाले के मामले में आरोपियों की संपत्ति के अस्थायी नियंत्रण के खिलाफ हाईकोर्ट में लगी याचिका पर निर्णय पारित किया है।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सूर्यकांत तिवारी और सौम्या चौरसिया सहित परिवार के लोगों की संपत्ति अटैच किए जाने को हाइकोर्ट में चुनौती दी है। वहीं केजेएसएल कोल पावर और इंद्रमणि मिनरल्स में अपने अधिवक्ता के माध्यम से याचिका लगाई जिस पर लगातार सुनवाई के बाद सभी 10 याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और विभू दत्त गुरु की डबल बेंच में सभी पहलुओं पर लंबी बहस के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था। जिसे आज बुधवार को सार्वजनिक कर दिया गया है। इस याचिका को कोर्ट ने लंबी कानूनी बहस के बाद खारिज कर दिया है। दरअसल ईडी रायपुर ने अवैध कोयला लेवी घोटाले से संबंधित मामले में सूर्यकांत तिवारी और अन्य से संबंधित पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 30/01/2025 को कुल मिलाकर 49.73 करोड़ रुपये मूल्य की 100 से अधिक चल और अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया है, जिसमें बैंक बैलेंस, वाहन, नकदी, आभूषण और जमीन शामिल हैं। इसके सूर्यकांत तिवारी के भाई रजनीकांत तिवारी, कैलाशा तिवारी, दिव्या तिवारी की भी संपति अटैच की गई है। वहीं इसके अलावा सौम्या चौरसिया उनके भाई अनुराग चौरसिया, मां शांति देवी, समीर विश्नोई और अन्य ने अस्थायी नियंत्रण के खिलाफ याचिकाएं लगाई। कोर्ट में संबंधित अपीलकर्ताओं के वकील हर्षवर्धन परगनिहा, निखिल वार्ष्णेय, शशांक मिश्रा, अभ्युदय त्रिपाठी और अन्य को सुना। जिसके बाद प्रतिवादी के वकील डॉ. सौरभ कुमार पांडे को भी सुना गया। संबंधित अपीलकर्ताओं की ओर अधिवक्ताओं और प्रतिवादी की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें पूरी हो गई थी। कोर्ट ने इस मामले में याचिका को खारिज करने का निर्णय सुनाया है।
महिला ने पति और उसके परिवार पर कुल 6 आपराधिक केस किए थे. इनमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (घरेलू हिंसा), 307 (हत्या की कोशिश), 376 (यौन उत्पीड़न) और 406 (विश्वासघात)जैसे गंभीर आरोप शामिल थे.
सुप्रीम कोर्ट ने एक भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी अफसर और उनके माता-पिता को आदेश दिया है कि वे अपने पूर्व पति और उसके परिवार से तीन दिनों के अंदर सार्वजनिक तौर पर माफी मांगें. कोर्ट ने यह फैसला इसलिए दिया क्योंकि महिला ने अपने पति और उसके परिवार के खिलाफ कई गंभीर आपराधिक केस दर्ज कराए थे, जिनकी वजह से पति को 109 दिन और उसके पिता को 103 दिन जेल में रहना पड़ा.
मंगलवार, 22 जुलाई को चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह कोर्ट की बेंच ने IPS पत्नी को अखबार में माफीनामा छपवाने के लिए कहा है. इसके अलावा इस माफी को सोशल मीडिया पर शेयर करने के लिए भी कहा गया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,
“उन्होंने (पीड़ित पति और उनका परिवार) जो कुछ सहा है उसकी भरपाई या क्षतिपूर्ति किसी भी तरह से नहीं की जा सकती. (महिला IPS अधिकारी) और उनके माता-पिता अपने पति और उनके परिवार के सदस्यों से बिना शर्त माफी मांगेंगे, जिसे एक प्रसिद्ध अंग्रेजी और एक हिंदी अखबर के राष्ट्रीय संस्करण में प्रकाशित किया जाएगा. इस तरह की माफी को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य समान प्लेटफॉर्म पर भी पब्लिश और सर्कुलेट किया जाएगा.”
सुप्रीम कोर्ट ने साफतौर पर कहा, “इस तरह की माफी को बोझ मानने के तौर पर नहीं माना जाएगा और इसका कानूनी अधिकारों, दायित्वों या कानून के तहत पैदा होने वाले परिणामों पर कोई असर नहीं होगा. माफी इस आदेश की तारीख से 3 दिनों के भीतर प्रकाशित की जाएगी और बिना किसी फेरबदल के निम्नलिखित रूप में होनी चाहिए.”
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी बताया कि महिला IPS अधिकारी को किस तरह माफी मांगनी है. माफी का फॉर्मेट कोर्ट ने खुद तय किया और कहा कि उसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. इसमें लिखा है,
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“मैं (IPS का नाम और पता), अपने और अपने माता-पिता की ओर से अपने किसी भी शब्द, कार्य या कहानी के लिए माफी मांगती हूं, जिससे (ससुराल) परिवार के सदस्यों (ससुराल के सदस्यों के नाम) की भावनाओं को ठेस पहुंची हो या उन्हें परेशानी हुई हो. मैं समझती हूं कि विभिन्न आरोपों और कानूनी लड़ाइयों ने दुश्मनी का माहौल पैदा कर दिया है और आपकी भलाई को गहराई से प्रभावित किया है. हालांकि कानूनी कार्यवाही अब हमारी शादी की समाप्ति और पक्षों के बीच लंबित मुकदमों को रद्द करने के साथ खत्म हो गई है.
मैं समझती हूं कि भावनात्मक जख्मों को भरने में समय लग सकता है. मुझे पूरी उम्मीद है कि यह माफी हम सभी के लिए शांति और समापन पाने की दिशा में एक कदम हो सकती है. दोनों परिवारों की शांति, अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए, मुझे पूरी उम्मीद है कि (ससुराल) परिवार मेरी इस बिना शर्त माफी को स्वीकार करेगा.
अतीत चाहे कितना भी अंधकारमय क्यों ना हो, वह भविष्य को बंधन में नहीं डाल सकता. मैं इस अवसर पर (ससुराल) परिवार के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करती हूं कि उनके साथ अपने जीवन के अनुभवों से मैं एक अधिक आध्यात्मिक व्यक्ति बनी. एक (धर्म) की धर्मावलंबी होने के नाते मैं (ससुराल) परिवार के हर सदस्य की शांति, सुरक्षा और खुशहाली की सच्चे मन से कामना और प्रार्थना करती हूं. यहां, मैं दोहराती हूं कि (ससुराल) परिवार का विवाह से जन्मी उस बच्ची से मिलने और उसकी खैरियत जानने के लिए हार्दिक स्वागत है, जिसका कोई दोष नहीं है.
आदर और सम्मान के साथ,
‘(महिला IPS अधिकारी का नाम)’”
सुप्रीम कोर्ट ने माफीनामे का फॉर्मेट बताया. (Supreme Court)
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने पति और उसके परिवार पर कुल 6 आपराधिक केस किए थे. इनमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (घरेलू हिंसा), 307 (हत्या की कोशिश), 376 (यौन उत्पीड़न) और 406 (विश्वासघात) जैसे गंभीर आरोप शामिल थे. इसके अलावा तीन केस घरेलू हिंसा कानून के तहत और फैमिली कोर्ट में तलाक, भत्ते जैसे मामले भी दायर किए गए थे.
कोर्ट ने महिला अधिकारी को यह भी चेतावनी दी कि वो अपनी IPS की ताकत या अपने किसी अफसर या जान-पहचान वालों की ताकत का इस्तेमाल पति और उसके परिवार के खिलाफ अब या भविष्य में नहीं करेंगी.
वहीं, कोर्ट ने पति और उसके परिवार को भी चेतावनी दी कि वे इस माफीनामे का इस्तेमाल किसी भी कोर्ट या संस्था में महिला के खिलाफ नहीं करेंगे, वर्ना यह कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी. कोर्ट ने इस फैसले में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए दोनों का तलाक मंजूर कर लिया. साथ ही सभी केसों को खत्म करने का आदेश भी दे दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण का गठन करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए 2 महीने का समय दिया है। ऐसा नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। बता दें कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मामले से जुड़ी जनहित याचिका खारिज कर दी थी।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ निवासी बाबूलाल ने एडवोकेट अभिनव श्रीवास्तव के जरिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका लगाई थी। इसमें बताया कि राज्य में सालों से भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण का गठन नहीं हो सका है। इसके चलते मुआवजा और ब्याज से जुड़ी सैकड़ों अर्जियां अधर में लटकी हुई हैं। इससे प्रभावित किसानों और जमीन मालिकों को लंबे समय से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य सरकार ने कहा- प्राधिकरण के गठन की प्रक्रिया शुरू सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने 28 अप्रैल 2025 के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि प्राधिकरण के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड देखते हुए पाया कि यह प्राधिकरण पिछले कई सालों से पूरी तरह निष्क्रिय पड़ा है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्राधिकरण का गठन और टालने लायक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह काम अगले दो महीनों के अंदर पूरा किया जाए, नहीं तो आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विशेष अनुमति याचिका की सुनवाई के बाद जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव को यह आदेश दिया है।
2018 में एक्ट आया, तब से पेंडिंग है आवेदन एडवोकेट अभिनव श्रीवास्तव ने बताया कि 2018 में नया भूमि अधिग्रहण अधिनियम लागू किया गया था, जिसके तहत अधिनियम के अनुच्छेद-5(a) के अनुसार, अधिसूचना जारी होने के बाद कोई भी व्यक्ति प्रस्तावित भूमि पर मुआवजे और अन्य किसी विवाद के संबंध में आवेदन कर सकता है।
भूमि अधिग्रहण अधिकारी द्वारा मुआवजे और अन्य विवादों से संबंधित सभी मामलों का निपटारा एक साल के अंदर करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर संबंधित व्यक्ति भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण के समक्ष आवेदन कर सकता है। लेकिन, छत्तीसगढ़ में 2018 से प्राधिकरण का गठन नहीं किया गया है। जिसके चलते भूमि अधिग्रहण के मुआवजा और ब्याज को लेकर सैकड़ों की संख्या में लोग प्रभावित हैं। उनका निराकरण नहीं हो पा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश के बावजूद याचिकाकर्ता या अन्य प्रभावित व्यक्ति मुआवजा या ब्याज का दावा करने से वंचित नहीं किए जाएंगे। यानी उनके हक अब भी पूरी तरह सुरक्षित हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2025 को होगी। जिसमें यह देखा जाएगा कि राज्य सरकार ने दिए गए निर्देशों का पालन किया या नहीं।
हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी जनहित याचिका याचिकाकर्ता ने पूर्व में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें बताया कि राज्य बनने के बाद यहां प्राधिकरण का गठन नहीं किया गया है। जिसके कारण भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों और जमीन मालिकों को लंबे समय से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन, हाईकोर्ट ने इसे जनहित का मामला मानने से इनकार करते हुए खारिज कर दी थी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक बाबा के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं. बोरियाखुर्द, नवरंग चौक निवासी प्रमिला बाबुरिक (लोधी क्षत्री) ने कुशालपुर निवासी अमनदत्त ठाकुर उर्फ स्वामी अभिरामदास पर ये गंभीर आरोप लगाए है. महिला ने चेतावनी दी है कि यदि उसके आरोपों पर जांच के बाद उसे न्याय नहीं मिला तो वे परिवार के साथ उक्त बाबा के घर के सामने आत्मदाह करने के लिए बाध्य होगी. ये शिकायत रायपुर एसएसपी से की गई है.
महिला ने संत अमनदत्त ठाकुर उर्फ अभिरामदास पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने उनके छोटे पुत्र प्रशांत कुमार बाबुरिक को धर्म के नाम पर बरगला कर उसे सन्यास के लिए उकसाया. परिवार का कहना है कि उक्त बाबा भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसाकर वृंदावन के आश्रम में ले जाता है, जहां उन्हें नौकरों की तरह काम करने के लिए मजबूर किया जाता है.
प्रमिला ने आरोप लगाए है कि उनका परिवार निम्न वर्ग से है और उन्होंने अपनी हैसियत से अधिक खर्च कर प्रशांत की शिक्षा पूरी कराई थी, ताकि वह परिवार का सहारा बने. लेकिन संत अमनदत्त ठाकुर ने उनके बेटे को भागवत कथा जैसे आयोजनों में शामिल होने के बाद सन्यास के लिए प्रेरित किया. बाबा ने प्रशांत को नया नाम ‘शेष नारायण वैष्णव’ देने और परिवार का त्याग कर उनके साथ वृंदावन जाने के लिए कहा. परिवार के विरोध करने पर बाबा ने धमकी दी कि अगर प्रशांत को सन्यास लेने से रोका गया, तो वह पागल हो जाएगा या किसी दुर्घटना का शिकार हो सकता है.
प्रार्थी प्रमिला ने एसपी से की शिकायत में यहां तक आरोप लगाए है कि ‘यह ढोंगी बाबा तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को डराता-धमकाता है और उन्हें मानसिक रूप से कमजोर कर सन्यास के लिए दबाव बनाता है’. इन आरोपों पर लल्लूराम डॉट कॉम ने उक्त संत से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका.
राजधानी रायपुर में पेट्रोल पंप के मैनेजर को मारने के लिए आरोपियों ने फ्लिपकार्ट से चाकू ऑर्डर किया था। जो ऑनलाइन इलास्ट्रीक रन कोरियर के माध्यम से पहुंचा था। इस मामले में पुलिस ने आधा दर्जन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। मामला मंदिर हसौद थाना क्षेत्र का है।
बता दें कि 16 जुलाई की रात 2 बदमाश बाइक लेकर पेट्रोल पंप पहुंचे थे। जहां उन्होंने 50 रुपए का पेट्रोल डलवाया फिर मैनेजर से पैसे छीनने लगे। जब मैनेजर ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की तो उन्होंने यही चाकू निकाला और उसके गले में मारा, जिससे उसकी मौत हो गई थी। घटना का CCTV भी सामने आया है।
मोबाइल में पुलिस को मिले सबूत
पुलिस के मुताबिक, आरोपी कुनाल तिवारी (24) और समीर टंडन (22) अभनपुर के रहने वाले है। उन्होंने पूछताछ में बताया कि मर्डर के लिए चाकू ऑनलाइन फ्लिपकार्ट से ऑर्डर किया था।
पुलिस का कहना हैं कि इसी चाकू से लूट, हत्या और हत्या का प्रयास जैसी गंभीर घटनाओं को अंजाम दिया गया। आरोपी कुनाल के मोबाइल की जांच पर आरोपी के मोबाइल नंबर से फ्लिप कार्ड ऑनलाइन शॉपिंग साइट से ऑनलाइन चाकू मंगवाने के सबूत मिले। इसके अलावा अन्य 2 चाकू को भी फ्लिपकार्ट के माध्यम से मंगवाना गया था।
पुलिस ने ऑनलाइन कंपनियों को दी थी हिदायत
रायपुर पुलिस ने मीटिंग और पत्राचार के माध्यम से समस्त ऑनलाइन प्लेटफार्म के मैनेजरों एवं डिस्ट्रीब्यूटरों को हिदायत थी कि ऐसा कोई भी घातक चाकू व हथियार डिलीवरी न किया जाए। जिससे मानव जीवन पर संकट उत्पन्न हो,
लेकिन पुलिस ने जांच में पाया कि फ्लिपकार्ट और इलास्ट्रीक रन कोरियर के मैनेजर और कार्य करने वाले डिस्ट्रीब्यूटर व अन्य कर्मचारी ऑनलाइन पार्सल में बारकोड के माध्यम से चाकू होने की जानकारी होते हुए भी ग्राहकों को चाकू डिलवरी किया था।
इस मामले में पुलिस ने धारा 125(बी), 3(5) बी.एन.एस. का अपराध दर्ज किया। इसके बाद दोनों कंपनी के आधे दर्जन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले में और भी लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।
गिरफ्तार आरोपी
गुलरेज अली पिता स्व० गुलेसर अली उम्र 42 वर्ष निवासी सीया रेसीडेंसी पचपेड़ी नाका रायपुर थाना टिकरापारा जिला रायपुर।
मोहित कुमार पिता सतीश चंद उम्र 37 वर्ष निवासी ए-202 डालिलियन प्लाजा मोवा थाना पंडरी जिला रायपुर।
अभिजीत गोस्वामी पिता अर्धेदु गोस्वामी उम्र 37 वर्ष निवासी कृष्णा गेस्ट हाऊस रूम नं. 106 नियर कृष्णा लैंड मार्क कोटा रायपुर।
दिनेश कुमार पिता उत्तम साहू उम्र 32 वर्ष निवासी अमलेश्वर थाना अमलेश्वर जिला दुर्ग।
हरीशंकर साहू पिता बलीराम साहू उम्र 28 वर्ष निवासी बकतरा थाना अभनपुर जिला रायपुर।
आलोक साहू पिता सुखलांबर साहू उम्र 23 वर्ष निवासी लोधीपारा चौक के पास थाना पंडरी जिला रायपुर।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन राज्य सरकार ने जनविश्वास विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे “विकसित भारत-विकसित छत्तीसगढ़” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाए गए भारतीय न्याय संहिता की तर्ज पर यह विधेयक तैयार किया गया है। छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश के बाद इस तरह का विधेयक पारित करने वाला दूसरा राज्य बन गया है।
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में रोजगार और व्यापार को आसान बनाना है। साथ ही गैर-अपराधिक श्रेणी के मामलों में व्यवसायियों और आम नागरिकों को अदालती मुकदमों से राहत देना भी इसका मुख्य उद्देश्य है। यह कानून दंडात्मक कार्रवाई के बजाय सुधारात्मक नीति को बढ़ावा देगा।
छोटे उल्लंघनों पर अब सिर्फ जुर्माना
जनविश्वास विधेयक का सबसे अहम पक्ष यह है कि अब छोटे-मोटे तकनीकी उल्लंघनों को आपराधिक श्रेणी से हटाकर प्रशासकीय जुर्माने की श्रेणी में रखा गया है। इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होगी और अदालती बोझ भी घटेगा।
इस विधेयक के तहत 8 अधिनियमों के 163 प्रावधानों में संशोधन किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
नगरीय प्रशासन विभाग, नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, सोसायटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम, छत्तीसगढ़ औद्योगिक संबंध अधिनियम, सहकारिता सोसायटी अधिनियम, आबकारी अधिनियम में बदलाव
छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 में भी संशोधन किया गया है। अब सार्वजनिक स्थल पर शराब पीने की पहली गलती पर केवल जुर्माना लगेगा। यदि दोबारा उल्लंघन होता है तो जुर्माने के साथ कारावास का प्रावधान भी रहेगा।
किराया और सोसायटी नियमों में राहत:
किराया वृद्धि की सूचना न देने पर अब आपराधिक मामला नहीं बनेगा, बल्कि अधिकतम ₹1,000 का जुर्माना लगेगा।
सोसायटी के वार्षिक प्रतिवेदन में देरी होने पर अब केवल नाममात्र का आर्थिक दंड लगेगा, खासकर महिला समूहों के लिए इसे और भी न्यूनतम रखा गया है।
यदि कोई संस्था ‘सहकारी’ शब्द का प्रयोग गलती से कर लेती है, तो अब उस पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलेगा, बल्कि केवल प्रशासकीय जुर्माना लगेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विधेयक राज्य में व्यावसायिक सुगमता, न्यायिक बोझ में कमी, और नागरिकों में विश्वास बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है।
अब आम नागरिक ‘‘ट्रैफिक प्रहरी’’ बनकर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालको का फोटो वीडियो के साथ ऐप के माध्यम से पुलिस को दे सकेंगे
छत्तीसगढ में रायपुर पुलिस द्वारा इस एप्स को आम नागरिकों के लिए प्रारंभ किया गया
भेजने वाले नागरिकों का नाम पता रखा जाएगा गोपनीय
रायपुर: पुलिस अधीक्षक कार्यालय रायपुर में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायपुर डॉ. संतोष कुमार सिंह, कीर्तन राठौर अति. पुलिस अधीक्षक ग्रामीण , डॉ. अनुराग झा अति. पुलिस अधीक्षक यातायात, सतीश ठाकुर, गुरजीत सिंह एवं सुशांतो बनर्जी उप पुलिस अधीक्षक यातायात रायपुर के द्वारा NIC द्वारा आम नागरिको के लिए एम परिवहन एप का नया वर्जन केरल, उड़ीसा के साथ छत्तीसगढ़ के लिए लागू किया गया है जिसके संबंध में ट्रैफिक प्रहरी (citizen sentinel) पोस्टर बनाकर रायपुर पुलिस द्वारा आम नागरिकों के लिए जारी किया गया।
इस एप के अंतर्गत अब कोई भी आम नागरिक ऐसे वाहन चालकों का जो बिना हेलमेट दो पहिया वाहन चालन, दो पहिया में तीन सवारी, वाहन चलाते समय मोबाईल का उपयोग, आम सड़क एवं नो पार्किंग जोन में वाहन पार्क, वाहन में गलत तरीके से नंबर प्लेट लगाकर वाहन चलाने वालो का फोटो/वीडियो बनाकर एम परिवहन एप के सिटिजन सेन्टिनल (ट्रैफिक पहरी) बनकर ट्राफिक उल्लंघन का रिपोर्ट कर सकते है। जिस पर पुलिस द्वारा उक्त वाहन चालक का ई चालान बनाकर मोबाईल नंबर या वाहन चालक के पते पर भेज कर उचित वैधानिक कार्यवाही की जावेगी.
इस प्रकार अब एक आम नागरिक ट्रैफिक प्रहरी बनकर यातायात नियमों का पालन न करने वाले वाहन चालको का चालान के माध्यम से जागरूक करने का प्रयास कर सकती है इस दौरान भेजने वाले नागरिकों का नाम पता गोपनीय रखा जाएगा, यातायात पुलिस रायपुर सभी आम नागरिको से अपील करती है कि इस एप का अधिक से अधिक प्रयोग कर ऐसे वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन करने हेतु जागरूक करें।