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  • अधिकारी और ठेकेदारे ने मिलकर करोड़ों के गोदाम को चढ़ा दिया भ्रष्ट्राचार की भेंट…मामले की शिकायत खाद्य मंत्री से..

    अधिकारी और ठेकेदारे ने मिलकर करोड़ों के गोदाम को चढ़ा दिया भ्रष्ट्राचार की भेंट…मामले की शिकायत खाद्य मंत्री से..


    सक्ती। छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम द्वारा जिला शक्ति में लगभग चार करोड़ की लागत से गोदाम एवं सी.सी. रोड का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, किंतु अधिकारी और ठेकेदार की चांड़ाल चैकड़ी ने मिलकर जनता के खून पसीने की कमाई को भ्रष्ट्राचार की भेट चढ़ा दिया है। उक्त मामले की शिकायत छ.ग. शासन के खाद्य मंत्री दयालदास बघेल से करते हुये दोषी अधिकारी और ठेकेदार पर कार्यवाही की मांग की गयी है।

    विदित हो कि नवनिर्मित जिला सक्ती के नंदेलीभांठा में छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम द्वारा लगभग चार करोड़ की लागत से गोदाम तथा सीसी रोड़ का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, उक्त कार्य का कार्यादेश मेसर्स मोहन पोद्दार को दिनांक 18.05.2022 को जारी किया गया था, उक्त कार्य को 1 वर्ष अर्थात 18.05.2023 तक पूर्ण किया जाना था, किंन्तु जहां कार्यादेश जारी होने के चार वर्ष के बाद भी उक्त कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है, वहीं जो कार्य किया गया है वह बहुत ही निम्न स्तर का है। मुख्य ठेकेदार के द्वारा उक्त कार्य को पेटी में दूसरे ठेकेदार को दे दिया गया है, निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। निर्माणाधीन गोदाम का कार्य अत्यंत निम्न गुणवत्ता का किया जा रहा है। भवन के अनेक कॉलम एवं अन्य संरचनात्मक भागों की स्थिति देखकर स्पष्ट प्रतीत होता है कि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों एवं गुणवत्ता के अनुरूप नहीं किया गया है। ईंटों की जोड़ाई एवं अन्य निर्माण कार्य भी अत्यंत निम्न स्तर के हैं, गोदाम के शेड कई स्थानों पर हवा में झूल रहे हैं, उनके आधार स्थल की काॅलम तक पूरी नहीं उठाई गयी हैं, वहीं अनेक स्थानों पर जहां ढ़लाई की गयी है वहीं छड़ दिखाई दे रही है, गोदाम में अनेक जगह पानी का सीपेज दिखाई दे रहा है, वहीं जहां छत की ढ़लाई की गयी है वहां से भी पानी टपक रहा है। गोदाम के बगल में ही बनाए गये सी.सी. रोड की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। रोड पर अभी तक नियमित रूप से भारी वाहनों का आवागमन भी प्रारंभ नहीं हुआ है, इसके बावजूद रोड अनेक स्थानों पर पूरी तरह क्षतिग्रस्त एवं टूट चुकी है, सड़क अभी पूरी तरह से बनी भी नहीं है और अनेक स्थानों पर दब गयी है, जिससे स्पष्ट है कि उक्त कार्य में जमकर भ्रष्ट्राचार किया गया है, और शासन के करोड़ों रूपयों का बंदरबाट किया गया है। उपरोक्त मामले के संबंध में छ.ग. शासन के खाद्य मंत्री दयालदास बघेल को शिकायत करते हुये दोषी अधिकारी और ठेकेदार पर कार्यवाही की मांग की गयी है, अब देखना यह है कि संबंधितों पर कोई कार्यवाही होती है या फिर अन्य कई मामलों की तरह इस मामले को भी ठंड़े बस्ते में ड़ाल दिया जायेगा।



    निर्धारित समयावधि में कार्य अपूर्ण

    जारी किये गये कार्यादेश के अनुसार उक्त कार्य को आज से लगभग तीन वर्ष पहले ही पूर्ण कर लिया जाना था किंतु लापरवाही, भ्रष्ट्राचार तथा ढुलमुल रवैये की वजह से एक वर्ष में पूर्ण हाने वाला कार्य चार वर्षों में भी पूर्ण नहीं हो पाया है, किंतु विभाग के द्वारा ठेकेदार पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी है जिससे ठेकेदार के द्वारा अपनी मनमर्जी करते हुये उक्त कार्य को पेटी में दूसरे अनुभवहीन अयोग्य व्यक्ति को दे दिया गया है जिसके द्वारा शासन के करोड़ों रूपयों का बंदरबाट किया जा रहा है। नियमतः टेण्ड़र प्रक्रिया के दौरान विभाग के द्वारा एैसी शर्तें तथा नियम लगाये जाते है कि अनुभवी तथा जिम्मेदार ठेकेदार के द्वारा ही निविदा में भाग लिया जाये किंतु मुख्य ठेकेदार मेसर्स मोहन पोद्दार के द्वारा कार्यादेश जारी करवा कर शासन के नियमों के विरूद्व श्रीकांत हाड़ा नामक ठेकेदार सेे पेटी में उक्त कार्य कराया जा रहा है जिससे कार्य की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है, मजे की बात यह है कि श्रीकांत हाड़ा के द्वारा भी उपरोक्त कार्य को किसी अन्य ठेकेदार से कराया जा रहा है, जिससे उक्त कार्य किस स्तर का होगा इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

    साईट में नहीं है सूचना पटल

    गोदाम निर्माण का कार्य जिस स्थल में कराया जा रहा है वहीं किसी भी प्रकार का कोई सूचना बोर्ड़ ठेकेदार के द्वारा नहीं लगाया गया है, निविदा नियमों के अनुसार साईट में ठेकेदार को सूचना पटल लगाया अनिवार्य होता है जिसमें कार्य से संबंधित जानकारी जैसे कार्यादेश क्रमांक, कार्य की राशि, ठेकेदार का नाम सहित अधिकारियों के नाम तथा संपर्क नंबर दर्ज करना होता है कितु उपरोक्त कार्य स्थल में ठेकेदार के द्वारा एैसा कोई बोर्ड़ तक नहीं लगाया गया है।



    अधिकारीयों की भूमिका संदिग्ध

    उक्त गोदाम के मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है जिससे करोड़ो के भ्रष्ट्राचार  के इस मामले में अधिकारीयों की मिलीभगत स्पष्ट दिखाई दे रही है। गुणवत्ताविहीन निर्माण कार्य को अनेकों बार चलित देयक का भुगतान किया जा चुका है, क्या निर्माण कार्य को अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किये बिना ही भुगतान कर दिया गया, और अगर निरीक्षण किया गया है तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता के स्तर को आज तक सुधारा क्यों नहीं गया है। बहरहाल अब यह मामले में विभागीय मंत्री तक शिकायत की जा चुकी है, यह देखना दिलचस्प होगा कि करोड़ों के इस भ्रष्ट्राचार के मामले मे क्या कार्यवाही होती है।

  • कांस्य प्रतिमा मानकों पर खरी नहीं उतरी, इंजीनियर तत्काल निलंबित…

    कांस्य प्रतिमा मानकों पर खरी नहीं उतरी, इंजीनियर तत्काल निलंबित…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने कोरबा जिले के कटघोरा नगर पालिका क्षेत्र स्थित अटल परिसर में स्थापित भारतरत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की कांस्य प्रतिमा के निर्माण में अनियमितता पाए जाने पर बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस संबंध में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालनालय ने शुक्रवार को निलंबन आदेश जारी किया।

    विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कटघोरा स्थित अटल परिसर में स्थापित प्रतिमा को लेकर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि प्रतिमा निर्माण निर्धारित गुणवत्ता और स्वीकृत मानकों के अनुरूप नहीं किया गया है। इन शिकायतों के आधार पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक द्वारा विस्तृत जांच कराई गई। जांच पूरी होने के बाद प्रस्तुत प्रतिवेदन में निर्माण कार्य में कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि प्रतिमा का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन (एस्टीमेट) के प्रावधानों के विपरीत किया गया। साथ ही प्रतिमा के विभिन्न हिस्सों से परत उखड़ने, लगातार क्षतिग्रस्त होने तथा कांस्य प्रतिमा के निर्धारित तकनीकी मानकों पर खरी नहीं उतरने जैसी गंभीर कमियां पाई गईं। जांच में यह भी माना गया कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण और तकनीकी पर्यवेक्षण में लापरवाही बरती गई।

    विभाग ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल को इन अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार माना है। आदेश में कहा गया है कि उनके द्वारा अपने पदीय दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किया गया, जिससे शासन की छवि प्रभावित हुई और सार्वजनिक धन से निर्मित कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा। इसी आधार पर उनके विरुद्ध तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबन आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल का मुख्यालय संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास, दुर्ग निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) प्रदान किया जाएगा।

    गौरतलब है कि सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित राष्ट्रीय नेताओं की प्रतिमाओं के निर्माण में गुणवत्ता, टिकाऊपन और तकनीकी मानकों का विशेष ध्यान रखा जाता है। ऐसे कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मानकों से समझौता होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाती है। कटघोरा में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा से जुड़ी शिकायतों के बाद विभाग की यह कार्रवाई इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी यदि किसी परियोजना में निर्धारित मानकों के विपरीत कार्य पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

  • सुनील सिंह बने छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक, दिल्ली में राज्य की जनसंपर्क गतिविधियों को मिलेगी नई मजबूती…

    सुनील सिंह बने छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक, दिल्ली में राज्य की जनसंपर्क गतिविधियों को मिलेगी नई मजबूती…

    छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सुनील सिंह को पदोन्नति के बाद अपर संचालक (Additional Director) नियुक्त किया गया है। वर्तमान में नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सूचना केंद्र में पदस्थ सुनील सिंह की पदोन्नति को राष्ट्रीय राजधानी में राज्य की जनसंपर्क गतिविधियों, मीडिया समन्वय और छत्तीसगढ़ की विकासोन्मुख छवि को और अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
    नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सुनील सिंह को पदोन्नति के उपरांत अपर संचालक (Additional Director) बनाया गया है। वर्तमान में वे नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सूचना केंद्र में पदस्थ हैं। उनकी पदोन्नति को राष्ट्रीय राजधानी में राज्य की जनसंपर्क गतिविधियों और मीडिया समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    सुनील सिंह लंबे समय से छत्तीसगढ़ सूचना केंद्र, नई दिल्ली के माध्यम से राज्य सरकार की नीतियों, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में सूचना केंद्र ने राष्ट्रीय मीडिया, केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत और विभिन्न संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए छत्तीसगढ़ की सकारात्मक और विकासोन्मुख छवि को व्यापक पहचान दिलाने का सतत प्रयास किया है।

    राष्ट्रीय राजधानी में कार्यरत विभिन्न मीडिया संस्थानों के वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि अन्य राज्यों के सूचना केंद्रों की तुलना में छत्तीसगढ़ सूचना केंद्र ने हाल के वर्षों में अपनी सक्रियता, त्वरित संवाद व्यवस्था और मीडिया समन्वय के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बनाई है। उनका कहना है कि सुनील सिंह के नेतृत्व में सूचना केंद्र लगातार बेहतर से बेहतरीन कार्यशैली की ओर अग्रसर रहा है, जिससे राज्य से जुड़ी विकासपरक सूचनाओं को राष्ट्रीय मीडिया में प्रभावी स्थान मिला है।

    छत्तीसगढ़ सूचना केंद्र लंबे समय से राज्य और केंद्र के बीच एक महत्वपूर्ण संवाद सेतु के रूप में कार्य कर रहा है। यह केंद्र न केवल राष्ट्रीय मीडिया के साथ समन्वय स्थापित करता है, बल्कि विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, नीति-निर्माताओं, निवेशकों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों तक राज्य की उपलब्धियों एवं संभावनाओं को भी प्रभावी ढंग से पहुंचाने का कार्य करता है।

    सुनील सिंह की पदोन्नति से यह अपेक्षा व्यक्त की जा रही है कि छत्तीसगढ़ सरकार की विकासोन्मुख नीतियों, निवेश संभावनाओं, सांस्कृतिक विरासत और जनकल्याणकारी योजनाओं का राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रभावी प्रचार-प्रसार होगा। साथ ही, दिल्ली स्थित सूचना केंद्र की मीडिया आउटरीच और संस्थागत समन्वय को भी नई गति मिलेगी।

  • भर्ती घोटाला: पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल, ED की जांच तेज….

    भर्ती घोटाला: पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल, ED की जांच तेज….

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC घोटाला मामले में सीजीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी को ईडी रिमांड खत्म होने पर आज ED की विशेष कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने टामन सोनवानी को 14 दिनों की न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा।

    बता दें कि टामन सिंह सोनवानी को सीजीपीएससी भर्ती घोटाले में सीबीआई ने दो साल पहले गिरफ्तार किया था। उनके साथ बजरंग पावर एंड स्टील लिमिटेड के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल को भी गिरफ्तार किया था। आरोप है कि सीजीपीएससी भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई थीं। प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत अन्य पदों पर चयनित कराने के लिए कथित तौर पर अवैध लेन-देन किया गया था। अब ईडी टामन सोनवानी को गिरफ्तार कर इस मामले की गहन जांच कर रही है।

    CBI की जांच में क्या सामने आया ?

    CBI के मुताबिक, टामन ने परीक्षा के पर्चे अपने घर पर साहिल, नीतेश, उसकी पत्नी निशा कोसले और दीपा आडिल को दिए। इसके बाद उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने लीक हुआ पेपर बजरंग पावर एंड इस्पात कंपनी के डायरेक्टर श्रवण गोयल को सौंपा। श्रवण गोयल के बेटे शशांक और बहू भूमिका ने इसी लीक पेपर से तैयारी की। परिणामस्वरूप दोनों डिप्टी कलेक्टर बन गए।

    जानिए क्या है CGPSC घोटाला

    CGPSC ने 2021 में 171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। प्री-एग्जाम 13 फरवरी 2022 को कराया गया। इसमें 2 हजार 565 पास हुए थे। इसके बाद 26, 27, 28 और 29 मई 2022 को हुई मेंस परीक्षा में 509 अभ्यर्थी पास हुए। इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की सिलेक्शन लिस्ट जारी हुई थी। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया।

    इस दौरान योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने नजदीकी लोगों को पद दिलवाने का खेल हुआ। प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी। जांच एजेंसी ने छापेमारी में कई दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए हैं। अब ईडी भी इस मामले में जांच करेगी।

  • साहिल शर्मा बने जन भागीदारी समिति के अध्यक्ष…

    साहिल शर्मा बने जन भागीदारी समिति के अध्यक्ष…

    प्रभारी मंत्री के निर्देश पर रायगढ़ जिले के 11 शासकीय महाविद्यालयों में जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष मनोनीत

    खरसिया। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी रायगढ़ ने प्रभारी मंत्री श्री रामविचार नेताम की अनुशंसा पर पर जिले के 11 शासकीय महाविद्यालयों की जनभागीदारी समिति के अध्यक्षों का मनोनयन किया है। इस संबंध में कलेक्टर कार्यालय से आदेश जारी कर संबंधित महाविद्यालयों में अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है, इसी तारतम्य में खरसिया नगर पालिका परिषद के वार्ड क्रमांक 15 के पार्षद साहिल शर्मा चीनू को शासकीय महात्मा गांधी स्नाताकोत्तर महाविद्यालय खरसिया में जन भागीदारी समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। साहिल शर्मा को जन भागीदारी समिति का अध्यक्ष बनाये जाने पर उन्हें बधाइयाँ देने वालों का तांता लगा हुआ है, वही इस संबंध में पार्षद साहिल शर्मा ने बताया कि जो जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई है मैं उसका यथा शक्ति पालन करूंगा साथ ही जनभागीदारी समिति महाविद्यालय के विकास, जनसहभागिता बढ़ाने तथा विभिन्न शैक्षणिक एवं आधारभूत गतिविधियों में सहयोग की भूमिका निभाएंगी।

  • ED की रिमांड में भूपेश बघेल के करीबी केके श्रीवास्तव:300 करोड़ के ट्रांजेक्शन, शेल कंपनियों, हवाला नेटवर्क की जांच; 8 दिनों तक पूछताछ होगी….

    ED की रिमांड में भूपेश बघेल के करीबी केके श्रीवास्तव:300 करोड़ के ट्रांजेक्शन, शेल कंपनियों, हवाला नेटवर्क की जांच; 8 दिनों तक पूछताछ होगी….

    बिलासपुर के कथित तांत्रिक और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी माने जाने वाले कृष्ण कुमार उर्फ केके श्रीवास्तव को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 15 करोड़ रुपए की कथित कमीशनखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है।

    कोर्ट ने उन्हें 7 अगस्त तक ईडी की रिमांड पर भेज दिया है। इस दौरान अधिकारी उनसे कथित मनी ट्रेल, हवाला नेटवर्क और शैल कंपनियों के जरिए करीब 300 करोड़ रुपए के वित्तीय लेन-देन समेत मामले के अन्य पहलुओं को लेकर पूछताछ करेंगे।

    केके श्रीवास्तव के घर की तलाशी में ईओडब्ल्यू को ट्रांजेक्शन का ब्योरा भी मिला था।
    केके श्रीवास्तव के घर की तलाशी में ईओडब्ल्यू को ट्रांजेक्शन का ब्योरा भी मिला था।

    हवाला के जरिए विदेश भेजी गई रकम

    ईडी के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि कथित कमीशन की रकम हवाला के जरिए अमेरिका समेत कई देशों में भेजी गई। वहां शैल कंपनियों के जरिए धन को वैध दिखाया गया।

    इसके बाद भारत में केके श्रीवास्तव से जुड़े कथित नेटवर्क के जरिए जमीन, कंपनियों और अन्य कारोबार में निवेश किया गया। एजेंसी अब इस पूरे वित्तीय नेटवर्क और धन के लेन-देन की कड़ियों की जांच कर रही है।

    केके श्रीवास्तव के खिलाफ 15 करोड़ की कथित ठगी के मामले में EOW पहले ही कार्रवाई कर चुकी है।
    केके श्रीवास्तव के खिलाफ 15 करोड़ की कथित ठगी के मामले में EOW पहले ही कार्रवाई कर चुकी है।

    विधानसभा थाने में भी दर्ज हुआ मामला

    ED की कार्रवाई से पहले विधानसभा थाना पुलिस ने भी एक नया मामला दर्ज किया था। शिकायतकर्ता संदीप सेठ ने आरोप लगाया है कि उन्हें एक निजी कंपनी में डायरेक्टर बनाकर उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया।

    इन दस्तावेजों के आधार पर मुंबई के अलग-अलग बैंकों में खाते खोले गए। पुलिस को आशंका है कि इन्हीं बैंक खातों के जरिए विदेश से धन का लेन-देन किया गया और उनका इस्तेमाल केके श्रीवास्तव से जुड़े वित्तीय लेन-देन में किया गया।

    कारोबारी अशोक रावत, जिन्होंने केके श्रीवास्तव पर ठगी का आरोप लगाया है।
    कारोबारी अशोक रावत, जिन्होंने केके श्रीवास्तव पर ठगी का आरोप लगाया है।

    कारोबारी अशोक रावत की शिकायत से शुरू हुई जांच

    पूरा मामला दिल्ली के कारोबारी अशोक रावत की शिकायत से जुड़ा है। आरोप है कि स्मार्ट सिटी और एनआरडीए के करीब 500 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट दिलाने के नाम पर केके श्रीवास्तव ने उनसे 15 करोड़ रुपए लिए थे।

    ठेका नहीं मिलने पर रकम लौटाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद शिकायत के आधार पर तेलीबांधा थाने में एफआईआर दर्ज की गई।

    ईडी को आधा दर्जन से ज्यादा शैल कंपनियों की जानकारी

    बताया जा रहा है कि जांच के दौरान ईडी को केके श्रीवास्तव और उनके रिश्तेदारों से जुड़ी आधा दर्जन से अधिक शैल कंपनियों की जानकारी मिली है। इन कंपनियों के बैंक खातों में करीब 300 करोड़ रुपए के लेन-देन की जांच की जा रही है।

    मामले में ईडी, ईओडब्ल्यू और पुलिस जांच कर रही हैं।

  • मोबाइल चोरी कर आरक्षक के खाते से उड़ाए ₹4.87 लाख, साथी आरक्षक ही निकला साइबर ठग, आरोपी गिरफ्तार….

    मोबाइल चोरी कर आरक्षक के खाते से उड़ाए ₹4.87 लाख, साथी आरक्षक ही निकला साइबर ठग, आरोपी गिरफ्तार….

    जांजगीर-चांपा : जांजगीर-चांपा में साइबर थाना पुलिस ने ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए 11वीं बटालियन में पदस्थ एक आरक्षक को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने अपने ही साथी पुलिसकर्मी का मोबाइल चोरी कर उसके बैंक खाते से करीब 4 लाख 87 हजार 911 रुपए ऑनलाइन निकाल लिए। पुलिस के मुताबिक आरोपी ऑनलाइन गेम खेलने का आदी था और चोरी की रकम गेम में खर्च कर दी।

    मामला 11वीं बटालियन में पदस्थ आरक्षक सुधीर कुमार सिंह से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, 23 अप्रैल 2026 की रात उन्होंने अपना वीवो वाई-21 मोबाइल बैरक में चार्जिंग पर लगाया था, लेकिन ड्यूटी पर जाने से पहले मोबाइल गायब मिला। कुछ दिनों बाद बैंक पहुंचने पर पता चला कि उनके खाते से 24 अप्रैल से 3 मई के बीच विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों से ₹4 लाख 87 हजार 911 की अनाधिकृत निकासी हो चुकी है।

    शिकायत मिलने पर साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। जांच के दौरान संदेह 11वीं बटालियन में पदस्थ आरक्षक सुनील कुमार यादव पर गया, जो घटना के बाद से बटालियन परिसर से भी गायब था। पूछताछ में आरोपी ने मोबाइल चोरी करने और मोबाइल में मौजूद आधार नंबर की मदद से यूपीआई आईडी बनाकर खाते से रकम निकालने की बात स्वीकार कर ली।

    पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66-सी और 66-डी के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार करते हुए न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। साइबर थाना पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी है।

  • नाम सामने, फिर भी सिंडिकेट के आगे बेबस अफसरशाह! ‘बीजनिगम बरमकेला धान घोटाले’ में कार्रवाई से क्यों कांप रहे जिम्मेदारों के हाथ-पांव?

    नाम सामने, फिर भी सिंडिकेट के आगे बेबस अफसरशाह! ‘बीजनिगम बरमकेला धान घोटाले’ में कार्रवाई से क्यों कांप रहे जिम्मेदारों के हाथ-पांव?

    सारंगढ़-बिलाईगढ़। ‘सांच को आंच क्या’… यह कहावत शायद सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के प्रशासनिक गलियारों में आकर उल्टी पड़ जाती है। जिले के बहुचर्चित ‘बीजनिगम धान घोटाले’ में जब कागजी सबूत, खसरा नंबर और 18 रसूखदार नाम उजागर होकर टेबल पर रखे जा चुके हैं, तब भी कार्रवाई के नाम पर प्रशासनिक सन्नाटा पसरा हुआ है। सबूत सामने होने के बावजूद भ्रष्ट सिंडिकेट पर हाथ डालने में जिम्मेदार अधिकारियों के ‘हाथ-पांव फूल रहे हैं’।

    सवाल उठना लाजमी है कि आखिर वह कौन सी अनदेखी ताकत या राजनीतिक आका का हाथ इन आरोपियों के सिर पर है, जिसके दबाव में नियम-कानूनों का चाबुक चलाने वाले अफसर अचानक लाचार और बेबस नजर आने लगे हैं?

    सबूत पक्के, फिर भी ‘तारीख पर तारीख’ का खेल!

    एक ही जमीन के रकबे और खसरा नंबर का इस्तेमाल कर बीजनिगम (बरमकेला) और प्राथमिक सहकारी समितियों से दोहरा भुगतान उठाना कोई मामूली चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘डिजिटल डकैती’ है।

    कागजों पर 18 नाम उजागर: 18 संदिग्धों की सूची और उनके बैंक ट्रांजैक्शन की कड़ियां साफ-साफ घोटाले की गवाही दे रही हैं।
    सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग: बिना ऑपरेटरों और प्रबंधकों के पासवर्ड/क्रेडेंशियल के यह दोहरा खेल संभव ही नहीं था।
    कार्रवाई के नाम पर लीपापोती: जांच के नाम पर सिर्फ फाइलें इधर से उधर खिसकाई जा रही हैं, जबकि कायदे से अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज हो जानी चाहिए थी।

    अधिकारियों की ‘सांप सूंघने’ जैसी खामोशी पर उबल रहे किसान

    जब एक आम गरीब किसान का एक कट्टा धान ज्यादा हो जाता है, तो उस पर जब्ती की तुरंत कार्रवाई करने वाला प्रशासन, इतने बड़े संगठित फर्जीवाड़े पर मौनव्रत धारण किए बैठा है। जिले के ईमानदार किसानों और ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है।

    सीधा सवाल: क्या अधिकारियों को डर है कि अगर इन 18 नामों पर शिकंजा कसा गया, तो वे उन ‘बड़े चेहरों’ के नाम उगल देंगे जो परदे के पीछे बैठकर इस सिंडिकेट को चला रहे थे? क्या यही डर अफसरों के कदम रोक रहा है?

    जनता मांग रही जवाब: अब जांच नहीं, जेल और रिकवरी चाहिए!

    प्रशासनिक सुस्ती को देखते हुए मांगें अब जांच के आश्वसनों तक सीमित नहीं हैं:

    1.तत्काल FIR: 18 संदिग्धों समेत फर्जीवाड़े में शामिल कंप्यूटर ऑपरेटरों और समिति प्रबंधकों पर तुरंत आपराधिक मामला दर्ज हो।

    3.संरक्षणदाताओं का पर्दाफाश: उन आला अधिकारियों और राजनीतिक चेहरों के नाम सार्वजनिक किए जाएं जो इस पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने का दबाव बना रहे हैं।

    यदि जिला प्रशासन ने जल्द ही इन ‘रसूखदारों’ पर सख्त कानूनी डंडा नहीं चलाया, तो यह साफ हो जाएगा कि यह घोटाला सिर्फ बिचौलियों का नहीं, बल्कि व्यवस्था की मौन सहमति से हुआ महा-फर्जीवाड़ा था!

  • सोनू बनकर रायपुर के सुफरान ने हिन्दू लड़की से शादी की, लव जिहाद का मामला…

    सोनू बनकर रायपुर के सुफरान ने हिन्दू लड़की से शादी की, लव जिहाद का मामला…

    रायपुर। राजधानी रायपुर में एक लव जिहाद का मामला सामने आया है, जहां एक युवती ने मुस्लिम युवक पर नाम बदलकर दोस्ती करने और शादी करने का आरोप लगाया है। यह पूरा मामला पंडरी थाना क्षेत्र का है। मिली जानकारी के अनुसार, पीड़िता पंडरी थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि 6 साल पहले आरोपी सुफरान शेख ने अपना नाम सोनू बताया और शादी कर एक साल अपने पंडरी स्थित घर में नानी और बहनों के साथ रखा। इस दौरान पीड़िता ने गर्भवती होने के बाद एक बेटे को भी जन्म दिया। इस बीच आरोपी सुफरान शेख हत्या के प्रयास के मामले में जेल चला गया और एक साल से अधिक समय तक जेल में रहा। पीड़िता का आरोप है कि जेल से वापस आने के बाद सुफरान शेख उसे उसका बच्चा नहीं दे रहा था, जिसकी शिकायत करने वह आज पहुंची है।

     

    वहीं आरोपी युवक के परिजनों का कहना है कि युवती को हम लोगों ने स्वीकार करते हुए अपने साथ रखा और वहीं भाई के जेल जाने के बाद आधार सेंटर जाकर खुद अपना नाम बदलवाया। जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता पंडरी थाने पहुंचे और युवती की शिकायत पर FIR दर्ज कर आरोपी युवक को गिरफ्तार करने की मांग की। वहीं पंडरी थाना पुलिस इस पूरे मामले की जांच की बात कह रही है। इस पूरे मामले पर पुलिस आरोपी की जल्द गिरफ्तारी का दावा कर रही है।

  • बदसलूकी से परेशान किसान ने बैंक मैनेजर को जड़ा तमाचा, FIR दर्ज….

    बदसलूकी से परेशान किसान ने बैंक मैनेजर को जड़ा तमाचा, FIR दर्ज….

    महाराष्ट्र। बुलढाणा में एक बैंक मैनेजर को स्वाभिमानी किसान संगठन के जिलाध्यक्ष ने उनके ही केबिन में जाकर थप्पड़ जड़ दिए. बैंक कर्मियों के विरोध के बाद पुलिस ने किसान नेता के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. ये मामला 30 जुलाई का बताया जा रहा है. खामगांव शहर के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मैनेजर शिवाजी कड़ अपने केबिन में काम कर रहे थे. उसी दौरान स्वाभिमानी किसान संगठन के जिलाध्यक्ष अमोल पाटिल वहां पहुंचे और मैनेजर को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया.

     

    आरोपी किसान का आरोप है कि बैंक मैनेजर किसानों के साथ बदसलूकी करता था. हालांकि, बैंक मैनेजर ने किसान नेता के सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है. केबिन में मौजूद दूसरे कर्मचारियों ने जब बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो आरोपी ने उनके साथ भी हाथापाई की.

    इस मामले को लेकर बैंक कर्मचारी भड़क गए और उन्होंने देर रात खामगांव पुलिस स्टेशन में धरना दे दिया. कर्मचारियों ने थाने में आरोपी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की. वहीं, बैंक मैनेजर के साथ मारपीट करने को लेकर आरोपी अमोल पाटिल ने सफाई दी. पाटिल ने कहा, ‘कर्ज माफी के बारे में जानकारी हासिल करने गए किसान को मैनेजर कहते हैं कि, तुम्हारे बाप का बैंक है क्या? कितनी बार कर्ज लोगे, कितनी बार तुम्हें कर्ज में सहूलत दी जाए? इस तरह बैंक मैनेजर किसानों को बोलते हैं. इसी वजह से उनको पीटा. अगर मैनेजर की भाषा नहीं सुधरी तो और सबक सिखाएंगे.’ खामगांव शहर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है. थानेदार सूर्यकांत अहिरकर ने बताया, ‘बैंक मैनेजर की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है. आरोपी की तलाश में टीमें बनाई गई हैं. आरोपी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. बैंक कर्मचारियों को भी आश्वस्त किया गया है, आगे की जांच चल रही है.’