रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने मिलावटी और वनस्पति तेल से बनने वाले एनालॉग पनीर (Analog Paneer) की बिक्री पर सख्ती के निर्देश दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जांच व्यवस्था गंभीर संकट से जूझ रही है। प्रदेश के 11 जिलों में एक भी फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) तैनात नहीं है। ऐसे में बाजार में बिक रहे एनालॉग पनीर की जांच, सैंपलिंग और कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पड़ताल के अनुसार, जिन जिलों में फूड सेफ्टी ऑफिसर नहीं हैं, वहां पिछले 6 से 7 महीनों से खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग लगभग पूरी तरह बंद है। इन जिलों की जिम्मेदारी दूसरे जिलों के अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार के रूप में दी गई है, लेकिन लंबी दूरी और सीमित संसाधनों के कारण नियमित जांच नहीं हो पा रही है।
इन 11 जिलों में नहीं है एक भी फूड सेफ्टी ऑफिसर सुकमा, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, बीजापुर, नारायणपुर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी), कोरिया, बलरामपुर, सूरजपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और सक्ती।
सरकार ने क्या कहा? खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के संयुक्त आयुक्त दीपक अग्रवाल के अनुसार, रिक्त पदों को जल्द भरा जाएगा और जांच की प्रक्रिया पहले से ही शुरू कर दी गई है। विभाग का कहना है कि बाजार में नकली या एनालॉग पनीर बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई का प्लान सरकार ने एनालॉग पनीर पर नियंत्रण के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें—
एनालॉग पनीर बनाने वाली 12 लाइसेंसधारी इकाइयों के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे। फूड सेफ्टी ऑफिसर होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों में जाकर सैंपल लेकर जांच करेंगे। असली पनीर के नाम पर एनालॉग पनीर बेचने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज की जाएगी। बाजार में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा।
रोज 5 करोड़ रुपये का कारोबार रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर का रोजाना लगभग 5 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। राज्य में बनी सामग्री की आपूर्ति ओडिशा समेत अन्य राज्यों में भी की जाती है। कम कीमत होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ी है, जिससे मिलावट का खतरा भी बढ़ गया है।
स्वास्थ्य के लिए क्यों खतरनाक? विशेषज्ञों के मुताबिक, एनालॉग पनीर में दूध की जगह वनस्पति वसा और अन्य कृत्रिम तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है। लगातार सेवन करने से—
पोषण और प्रोटीन की गुणवत्ता कम मिलती है। हृदय रोग और मोटापे का खतरा बढ़ सकता है। पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं को असली और एनालॉग पनीर के बीच स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। यदि कोई व्यापारी गलत लेबलिंग या असली पनीर बताकर एनालॉग पनीर बेचता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी से जुड़े मामले में नया मोड़ आ गया है। मामले की पीड़िता ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है। याचिका के माध्यम से पीड़िता ने मांग की है कि मामले की जांच वर्तमान में नियुक्त आईपीएस अधिकारियों के बजाय किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से कराई जाए, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके।
पीड़िता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय ने हाईकोर्ट में यह याचिका प्रस्तुत की है। याचिका में जांच की वैधानिकता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
जांच के अधिकार पर उठाए सवाल रिट याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में जिन आईपीएस अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हें इस मामले की जांच करने का वैधानिक अधिकार नहीं है। ऐसे में उनकी ओर से की जा रही जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
पीड़िता का कहना है कि संवेदनशील और चर्चित मामलों में जांच ऐसे अधिकारी से कराई जानी चाहिए, जिस पर किसी प्रकार का हितों का टकराव या प्रशासनिक प्रभाव न हो।
वरिष्ठ IAS अधिकारी से जांच की मांग याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि मामले की जांच किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी या स्वतंत्र सक्षम प्राधिकारी को सौंपी जाए। पीड़िता का तर्क है कि इससे जांच प्रक्रिया पारदर्शी होगी और सभी पक्षों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जा सकेगा।
याचिका में यह भी कहा गया है कि निष्पक्ष जांच ही न्यायिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने का सबसे महत्वपूर्ण आधार है।
हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की अपील पीड़िता ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि वह पूरे मामले में हस्तक्षेप करते हुए जांच एजेंसी और जांच अधिकारी को लेकर उचित दिशा-निर्देश जारी करे। याचिका में यह भी मांग की गई है कि जांच ऐसी व्यवस्था के तहत कराई जाए, जिस पर किसी प्रकार का संदेह न हो।
माना जा रहा है कि हाईकोर्ट प्रारंभिक सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब भी मांग सकता है।
रायपुर। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के बीच कथित ‘जो करना है कर लो’ टिप्पणी को लेकर छिड़ा विवाद अब और गहरा गया है। कांग्रेस (Congress) और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी चुने हुए जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार केवल सांसद का नहीं, बल्कि उन मतदाताओं का भी अपमान है जिन्होंने उन्हें चुना है। वहीं कांग्रेस ने इसे प्रदेश में “प्रशासनिक अराजकता” का उदाहरण बताते हुए राज्य सरकार पर नौकरशाही पर नियंत्रण खोने का आरोप लगाया है।
भूपेश बघेल बोले- यह चुने हुए जनप्रतिनिधि का अपमान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि उनकी बृजमोहन अग्रवाल से वैचारिक असहमतियां हो सकती हैं, लेकिन वे जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं और देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा के सदस्य हैं।
उन्होंने लिखा कि एक प्रशासनिक अधिकारी का इस तरह का व्यवहार यह दर्शाता है कि प्रदेश की कमान दिल्ली और नागपुर के हाथों में है। बघेल ने आरोप लगाया कि अधिकारियों को जनता के काम और जनप्रतिनिधियों की मांग से कोई फर्क नहीं पड़ता, वे केवल अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं।
उन्होंने इसे उन सभी मतदाताओं का अपमान बताया जिन्होंने अपने प्रतिनिधि को चुनकर संसद भेजा है। साथ ही उन्होंने लिखा कि बृजमोहन अग्रवाल का राजनीतिक अनुभव लंबा है और उन्हें अधिकारियों से कैसे निपटना है, यह अच्छी तरह आता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सांसद अपने मतदाताओं को निराश नहीं करेंगे।
कांग्रेस ने कहा- प्रदेश में प्रशासनिक अराजकता चरम पर भूपेश बघेल की प्रतिक्रिया के बाद प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने भी बयान जारी कर राज्य सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि यदि भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद बृजमोहन अग्रवाल को एक वरिष्ठ अधिकारी ‘जो करना है कर लो’ जैसी भाषा बोल सकता है तो आम जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
शुक्ला ने कहा कि यह घटना बताती है कि प्रदेश में नौकरशाही पूरी तरह बेलगाम हो चुकी है और सरकार प्रशासन पर नियंत्रण खो चुकी है।
ननकी राम और रवि भगत का भी जिक्र कांग्रेस का आरोप है कि राज्य के एक वरिष्ठ सचिव द्वारा सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ सांसद के साथ कथित तौर पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल सरकार की कमजोरी को उजागर करता है। पार्टी का कहना है कि सरकार में बैठे जनप्रतिनिधि अब अधिकारियों से सामान्य शिष्टाचार तक का पालन नहीं करा पा रहे हैं।
कांग्रेस ने अपने आरोपों के समर्थन में हाल के कई घटनाक्रमों का उल्लेख किया। पार्टी ने कहा कि बेमेतरा में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्थाएं सामने आईं, जहां पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष को मंच से नाराजगी जाहिर करनी पड़ी। वहीं एक अन्य मामले में विधायक के सामने जनपद सीईओ द्वारा कथित तौर पर कार्यकर्ता को चुनौती देने की घटना का भी जिक्र किया गया।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि सुशासन तिहार के दौरान वरिष्ठ मंत्री द्वारा सरकारी अमले और पुलिस पर शराब बिक्री के आरोप लगाए गए थे, जबकि रायपुर में सांसद बृजमोहन अग्रवाल भी सार्वजनिक मंच से अधिकारियों पर अवैध शराब बिकवाने का आरोप लगा चुके हैं।
सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा के वरिष्ठ नेता ननकी राम कंवर के धरना और मुख्यमंत्री को लिखे पत्र का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा के अपने नेता भी अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने पूर्व भाजयुमो अध्यक्ष रवि भगत के बयानों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भी बेलगाम नौकरशाही और मंत्रियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर पड़ गई है और आम लोगों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
रायगढ़। प्रदेश में लगातार हो रही बारिश की वजह से महानदी ने भी रौद्र रूप धारण कर लिया है। इस वजह से रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लाक एवं सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के सरिया क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हुए। शुक्रवार को महानदी अपने तटबंध तोड़ते हुए दर्जन भर से अधिक गांवों में प्रवेश कर गई थी जिसकी वजह से सैकड़ों एकड़ खेत जलमग्न हो गये हैं। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट मोड में आते हुए ऐहितायातन तौर पर सतर्कता बरतने तटवर्ती गांव में मुनादी कराई गई।
वहीं पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीम को सक्रिय किया गया था तथा राहत शिविरों की साफ सफाई कराकर प्रभावित लोगों को रूकने की व्यवस्था की गई थी। हालांकि बढ़ते जल स्तर को देखते हुए ओडि़सा के हीराकुंड डेम के गेट को खोला गया है जिससे रिहायशी इलाकों तक पानी नहीं पहुंच पाया और धीरे-धीरे महानदी का जल स्तर कम हो रहा है। वहीं खेतों के लबालब होने के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, खासकर सब्जी उत्पादक किसान अधिकांश तौर पर प्रभावित हुए है।
प्रशासन द्वारा फसल नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। विगत तीन-चार दिनों से प्रदेश भर में हो रही बारिश के कारण सभी नदी-नाले उफान पर आ गये हैं। वहीं धमतरी के गंगरेल बांध में अधिक जलभराव होने के कारण डेम के गेट खोले गये हैं जिससे महानदी में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई। वहीं सहायक नदियों का भी भारी मात्रा में जल आने के कारण महानदी का जलस्तर काफी बढ़ गया। शुक्रवार की सुबह से ही जलस्तर बढऩे के कारण रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लाक के सूरजगढ़, पडिग़ांव, सिंघपुरी, चंघोरी, बाराडोली, टिनमिनीक्षेत्र तथा सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के सरिया क्षेत्र में परसामपुर, लिप्ति, रानीडीह, सुरसी, कोर्रा, पोरथ, ठेंगागुड़ी, नदीगांव, रतनपाली, छोटे नावापारा, बोरिदा, खपरापाली, रायपाली इत्यादि गांवों के सैकड़ों एकड़ खेत जलमग्न हो गये तथा नदी का पानी रिहायशी इलाकों में भी घुसने लगा था। पोरथ में नदी किनारे स्थित मंदिर पुरी तरह डुबान में आ गया था तो वहीं रानीडीह गांव में भी आंशिक रूप से रिहायशी क्षेत्र में पानी घुस गया था।
वहीं सूरजगढ़ में भी महानदी का पानी गांव के कुछ घरों को अपनी चपेट में ले लिया था। नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण ग्रामीण जहां संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए रतजगा करने पर मजबूर हो गये थे, वहीं उनके खेतों में पानी भरने से हाने वाले नुकसान को लेकर भी उनके माथे पर चिंता की लकीर उभर आई थी। बताया जा रहा है कि पुसौर ब्लाक सहित सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के सरिया क्षेत्र में हजारों एकड़ खेत पानी से लबालब हो गये थे। वहीं लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट मोड पर था तथा बाढ़ की स्थिति से निपटने पूर्ण रूप से तैयारी कर ली गई थी।
वहीं कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी व एसएसपी शशि मोहन सिंह ने भी प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया तथा राहत शिविरों में स्वच्छ पेयजल,भोजन व अन्य आवश्यक सामग्रियों की भरपूर तैयारी रखने के निर्देश अपने नोडल अधिकारियों को दिये। वहीं संभावित बाढ़ के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी अलर्ट रखा गया था।
खोले गये हीराकुंड के 12 गेट महानदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए ओडि़शा सरकार के साथ सामंजस्य बनाते हुए जिला प्रशासन ने हीराकुंड डेम के गेट खोलने का निवेदन किया था। वहीं ओडि़शा सरकार की ओर से पहले हीराकुंड डेम के 10 गेट खोले गये थे परंतु इससे पर्याप्त राहत मिलती नजर नहीं आई जिसके बाद दो और गेट खोल कर उपरी हिस्से में पानी के दबाव को कम करने का प्रयास किया गया।
इस प्रकार हीराकुंड डेम के कुल 12 गेट खोले गये जिससे काफी राहत मिली और पानी धीरे-धीरे कम होने लगा तब कहीं जाकर ग्रामीणों के साथ ही प्रशासन ने भी राहत की संास ली। वहीं माना जा रहा है कि उपरी कैचमेंट क्षेत्र मे ंइसी प्रकार अत्यधिक बारिश हुई तब हीराकुंड के और गेट खोलने की आवश्यकता पड़ सकती है।
खेत हुए पानी से लबालब महानदी का पानी बढऩे से तटवर्ती गांवों के हजारों एकड़ खेत लबालब हो गये थे। खेतों में पानी भरने के कारण फसल को भारी नुकसान पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। सरिया और पुसौर क्षेत्र में इस बार कई किसान धान की फसल के बजाए गन्ने की खेती किये हैं ऐसे में उनकी खेती खराब होने की संभावना है। वहीं दुसरी ओर इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान साग सब्जी का भी उत्पादन करते हैं लेकिन बाढ़ ने उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई को खत्म कर दिया है।
अधिकांश किसानों ने हाल ही में धान की फसल लगाई गई थी जिससे पौधे काफी छोटे हैं लिहाजा उन्हे बढऩे के लिए किसानों ने रासायनिक खाद का छिडक़ाव किया था। खेतों में पानी भरने की वजह से खाद भी बह गई लिहाजा जल्द ही बाढ़ का पानी नहीं उतरा तो उन्हे दोहरी मार का सामना करना पड़ सकता है। सरिया क्षेत्र के ग्राम लिप्ती, रानीडीह, नदीगांव इत्यादि गांव अधिक प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि हीराकुंड डेम के गेट खोले जाने के बाद जल स्तर कम हो रहा है, वहीं पुरी तरह से पानी खाली होने के बाद फसल के नुकसानी का आंकलन किया जायेगा।
बाढ़ राहत के लिए प्रशासन ने की तैयारी महानदी में लगातार बढ़ते जल स्तर को देखते हुए संभावित बाढ़ से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने भी अपनी ओर से पूरी तैयारी कर रखी है। बताया जा रहा है कि यदि पानी रिहायशी इलाकोंं में घुसता है तो ग्रामीणों को राहत शिविरों में ठहराने की व्यवस्था प्रशासन द्वारा की गई है जिसमें पुसौर ब्लाक के पडिग़ांव, छोटे हरदी, बुनगा और टिनमिनी में राहत शिविर बनाये गये हैं जहां भोजन सहित अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की गई है।
स्वास्थ्य टीम को भी रखा गया था अलर्ट रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लाक में दर्जन भर महानदी के तटवर्ती गांव बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में हैं। जल स्तर अधिक बढऩे पर प्रशासन द्वारा यहां कि रहवासियों को सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी। वहीं माटर बोट, गोताखोरों की टीम के अलावा पुलिस, एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीम को सक्रिय किया गया था । इसके साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त कर स्थिति पर नजर रखी गई।
छत्तीसगढ़ में 2 अगस्त को बिलासपुर-रतनपुर-पेंड्रा रोड पर बना पुल अचानक 2 हिस्सों में टूट गया. इस दौरान पुल से गुजर रही एक यात्री बस वहीं फंस गई. घटना रविवार शाम 5 बजे की है. सभी यात्री सुरक्षित हैं. बस का अगला हिस्सा टूटे हुए स्लैब के किनारे अटक गया था, जिससे बस नदी में गिरने से बाल-बाल बच गई.
बिलासपुर-रतनपुर हाईवे पर पुल बीच से टूटा, बीच में फंसी चलती बस जानकारी के मुताबिक, बांसाझाल स्थित यह पुल 35 साल पुराना था और जर्जर हालत में था, बारिश के बाद इसकी स्थिति और खराब हो गई थी. बिलासपुर-जबलपुर निर्माणाधीन नेशनल हाईवे-45 पर बना है. यह सड़क 510 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जा रही है. सड़क पर भी कई जगह दरारें हैं.
पुल टूटने से पेंड्रा, गौरेला, अमरकंटक के साथ-साथ मध्य प्रदेश के जबलपुर, शहडोल और छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ से सीधा संपर्क टूट गया है. बिलासपुर-रतनपुर हाईवे पर आवागमन बंद करा दिया गया है. प्रशासन ने कई रूट डायवर्ट कर दिए हैं.
बिहार। बिहार के छपरा इंजीनियरिंग कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्ट और वीडियो में एक कर्मचारी पर छात्राओं के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार, उत्पीड़न और धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं। वायरल वीडियो में एक छात्रा सार्वजनिक रूप से अपनी शिकायत और परेशानियों को सामने रखते हुए दिखाई दे रही है। वीडियो के आधार पर छात्राओं ने हॉस्टल में सुरक्षा और सम्मानजनक माहौल को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
मामले को लेकर छात्राओं की ओर से लगाए गए आरोपों को गंभीर माना जा रहा है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। शिक्षण संस्थानों में छात्रों के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, शिकायतों की सुनवाई और उचित कार्रवाई जरूरी होती है, ताकि छात्राओं का भरोसा कायम रह सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज प्रशासन से प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था मजबूत करने और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि हॉस्टल और कैंपस में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जहां छात्राएं बिना डर के अपनी समस्याएं सामने रख सकें। फिलहाल पूरे मामले में जांच और आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। प्रशासन की ओर से आने वाले बयान के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
सक्ती। छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम द्वारा जिला शक्ति में लगभग चार करोड़ की लागत से गोदाम एवं सी.सी. रोड का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, किंतु अधिकारी और ठेकेदार की चांड़ाल चैकड़ी ने मिलकर जनता के खून पसीने की कमाई को भ्रष्ट्राचार की भेट चढ़ा दिया है। उक्त मामले की शिकायत छ.ग. शासन के खाद्य मंत्री दयालदास बघेल से करते हुये दोषी अधिकारी और ठेकेदार पर कार्यवाही की मांग की गयी है।
विदित हो कि नवनिर्मित जिला सक्ती के नंदेलीभांठा में छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम द्वारा लगभग चार करोड़ की लागत से गोदाम तथा सीसी रोड़ का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, उक्त कार्य का कार्यादेश मेसर्स मोहन पोद्दार को दिनांक 18.05.2022 को जारी किया गया था, उक्त कार्य को 1 वर्ष अर्थात 18.05.2023 तक पूर्ण किया जाना था, किंन्तु जहां कार्यादेश जारी होने के चार वर्ष के बाद भी उक्त कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है, वहीं जो कार्य किया गया है वह बहुत ही निम्न स्तर का है। मुख्य ठेकेदार के द्वारा उक्त कार्य को पेटी में दूसरे ठेकेदार को दे दिया गया है, निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। निर्माणाधीन गोदाम का कार्य अत्यंत निम्न गुणवत्ता का किया जा रहा है। भवन के अनेक कॉलम एवं अन्य संरचनात्मक भागों की स्थिति देखकर स्पष्ट प्रतीत होता है कि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों एवं गुणवत्ता के अनुरूप नहीं किया गया है। ईंटों की जोड़ाई एवं अन्य निर्माण कार्य भी अत्यंत निम्न स्तर के हैं, गोदाम के शेड कई स्थानों पर हवा में झूल रहे हैं, उनके आधार स्थल की काॅलम तक पूरी नहीं उठाई गयी हैं, वहीं अनेक स्थानों पर जहां ढ़लाई की गयी है वहीं छड़ दिखाई दे रही है, गोदाम में अनेक जगह पानी का सीपेज दिखाई दे रहा है, वहीं जहां छत की ढ़लाई की गयी है वहां से भी पानी टपक रहा है। गोदाम के बगल में ही बनाए गये सी.सी. रोड की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। रोड पर अभी तक नियमित रूप से भारी वाहनों का आवागमन भी प्रारंभ नहीं हुआ है, इसके बावजूद रोड अनेक स्थानों पर पूरी तरह क्षतिग्रस्त एवं टूट चुकी है, सड़क अभी पूरी तरह से बनी भी नहीं है और अनेक स्थानों पर दब गयी है, जिससे स्पष्ट है कि उक्त कार्य में जमकर भ्रष्ट्राचार किया गया है, और शासन के करोड़ों रूपयों का बंदरबाट किया गया है। उपरोक्त मामले के संबंध में छ.ग. शासन के खाद्य मंत्री दयालदास बघेल को शिकायत करते हुये दोषी अधिकारी और ठेकेदार पर कार्यवाही की मांग की गयी है, अब देखना यह है कि संबंधितों पर कोई कार्यवाही होती है या फिर अन्य कई मामलों की तरह इस मामले को भी ठंड़े बस्ते में ड़ाल दिया जायेगा।
निर्धारित समयावधि में कार्य अपूर्ण
जारी किये गये कार्यादेश के अनुसार उक्त कार्य को आज से लगभग तीन वर्ष पहले ही पूर्ण कर लिया जाना था किंतु लापरवाही, भ्रष्ट्राचार तथा ढुलमुल रवैये की वजह से एक वर्ष में पूर्ण हाने वाला कार्य चार वर्षों में भी पूर्ण नहीं हो पाया है, किंतु विभाग के द्वारा ठेकेदार पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी है जिससे ठेकेदार के द्वारा अपनी मनमर्जी करते हुये उक्त कार्य को पेटी में दूसरे अनुभवहीन अयोग्य व्यक्ति को दे दिया गया है जिसके द्वारा शासन के करोड़ों रूपयों का बंदरबाट किया जा रहा है। नियमतः टेण्ड़र प्रक्रिया के दौरान विभाग के द्वारा एैसी शर्तें तथा नियम लगाये जाते है कि अनुभवी तथा जिम्मेदार ठेकेदार के द्वारा ही निविदा में भाग लिया जाये किंतु मुख्य ठेकेदार मेसर्स मोहन पोद्दार के द्वारा कार्यादेश जारी करवा कर शासन के नियमों के विरूद्व श्रीकांत हाड़ा नामक ठेकेदार सेे पेटी में उक्त कार्य कराया जा रहा है जिससे कार्य की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है, मजे की बात यह है कि श्रीकांत हाड़ा के द्वारा भी उपरोक्त कार्य को किसी अन्य ठेकेदार से कराया जा रहा है, जिससे उक्त कार्य किस स्तर का होगा इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
साईट में नहीं है सूचना पटल
गोदाम निर्माण का कार्य जिस स्थल में कराया जा रहा है वहीं किसी भी प्रकार का कोई सूचना बोर्ड़ ठेकेदार के द्वारा नहीं लगाया गया है, निविदा नियमों के अनुसार साईट में ठेकेदार को सूचना पटल लगाया अनिवार्य होता है जिसमें कार्य से संबंधित जानकारी जैसे कार्यादेश क्रमांक, कार्य की राशि, ठेकेदार का नाम सहित अधिकारियों के नाम तथा संपर्क नंबर दर्ज करना होता है कितु उपरोक्त कार्य स्थल में ठेकेदार के द्वारा एैसा कोई बोर्ड़ तक नहीं लगाया गया है।
अधिकारीयों की भूमिका संदिग्ध
उक्त गोदाम के मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है जिससे करोड़ो के भ्रष्ट्राचार के इस मामले में अधिकारीयों की मिलीभगत स्पष्ट दिखाई दे रही है। गुणवत्ताविहीन निर्माण कार्य को अनेकों बार चलित देयक का भुगतान किया जा चुका है, क्या निर्माण कार्य को अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किये बिना ही भुगतान कर दिया गया, और अगर निरीक्षण किया गया है तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता के स्तर को आज तक सुधारा क्यों नहीं गया है। बहरहाल अब यह मामले में विभागीय मंत्री तक शिकायत की जा चुकी है, यह देखना दिलचस्प होगा कि करोड़ों के इस भ्रष्ट्राचार के मामले मे क्या कार्यवाही होती है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने कोरबा जिले के कटघोरा नगर पालिका क्षेत्र स्थित अटल परिसर में स्थापित भारतरत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की कांस्य प्रतिमा के निर्माण में अनियमितता पाए जाने पर बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस संबंध में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालनालय ने शुक्रवार को निलंबन आदेश जारी किया।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कटघोरा स्थित अटल परिसर में स्थापित प्रतिमा को लेकर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि प्रतिमा निर्माण निर्धारित गुणवत्ता और स्वीकृत मानकों के अनुरूप नहीं किया गया है। इन शिकायतों के आधार पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक द्वारा विस्तृत जांच कराई गई। जांच पूरी होने के बाद प्रस्तुत प्रतिवेदन में निर्माण कार्य में कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि प्रतिमा का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन (एस्टीमेट) के प्रावधानों के विपरीत किया गया। साथ ही प्रतिमा के विभिन्न हिस्सों से परत उखड़ने, लगातार क्षतिग्रस्त होने तथा कांस्य प्रतिमा के निर्धारित तकनीकी मानकों पर खरी नहीं उतरने जैसी गंभीर कमियां पाई गईं। जांच में यह भी माना गया कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण और तकनीकी पर्यवेक्षण में लापरवाही बरती गई।
विभाग ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल को इन अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार माना है। आदेश में कहा गया है कि उनके द्वारा अपने पदीय दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किया गया, जिससे शासन की छवि प्रभावित हुई और सार्वजनिक धन से निर्मित कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा। इसी आधार पर उनके विरुद्ध तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबन आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल का मुख्यालय संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास, दुर्ग निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) प्रदान किया जाएगा।
गौरतलब है कि सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित राष्ट्रीय नेताओं की प्रतिमाओं के निर्माण में गुणवत्ता, टिकाऊपन और तकनीकी मानकों का विशेष ध्यान रखा जाता है। ऐसे कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मानकों से समझौता होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाती है। कटघोरा में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा से जुड़ी शिकायतों के बाद विभाग की यह कार्रवाई इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी यदि किसी परियोजना में निर्धारित मानकों के विपरीत कार्य पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सुनील सिंह को पदोन्नति के बाद अपर संचालक (Additional Director) नियुक्त किया गया है। वर्तमान में नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सूचना केंद्र में पदस्थ सुनील सिंह की पदोन्नति को राष्ट्रीय राजधानी में राज्य की जनसंपर्क गतिविधियों, मीडिया समन्वय और छत्तीसगढ़ की विकासोन्मुख छवि को और अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सुनील सिंह को पदोन्नति के उपरांत अपर संचालक (Additional Director) बनाया गया है। वर्तमान में वे नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सूचना केंद्र में पदस्थ हैं। उनकी पदोन्नति को राष्ट्रीय राजधानी में राज्य की जनसंपर्क गतिविधियों और मीडिया समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
सुनील सिंह लंबे समय से छत्तीसगढ़ सूचना केंद्र, नई दिल्ली के माध्यम से राज्य सरकार की नीतियों, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में सूचना केंद्र ने राष्ट्रीय मीडिया, केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत और विभिन्न संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए छत्तीसगढ़ की सकारात्मक और विकासोन्मुख छवि को व्यापक पहचान दिलाने का सतत प्रयास किया है।
राष्ट्रीय राजधानी में कार्यरत विभिन्न मीडिया संस्थानों के वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि अन्य राज्यों के सूचना केंद्रों की तुलना में छत्तीसगढ़ सूचना केंद्र ने हाल के वर्षों में अपनी सक्रियता, त्वरित संवाद व्यवस्था और मीडिया समन्वय के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बनाई है। उनका कहना है कि सुनील सिंह के नेतृत्व में सूचना केंद्र लगातार बेहतर से बेहतरीन कार्यशैली की ओर अग्रसर रहा है, जिससे राज्य से जुड़ी विकासपरक सूचनाओं को राष्ट्रीय मीडिया में प्रभावी स्थान मिला है।
छत्तीसगढ़ सूचना केंद्र लंबे समय से राज्य और केंद्र के बीच एक महत्वपूर्ण संवाद सेतु के रूप में कार्य कर रहा है। यह केंद्र न केवल राष्ट्रीय मीडिया के साथ समन्वय स्थापित करता है, बल्कि विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, नीति-निर्माताओं, निवेशकों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों तक राज्य की उपलब्धियों एवं संभावनाओं को भी प्रभावी ढंग से पहुंचाने का कार्य करता है।
सुनील सिंह की पदोन्नति से यह अपेक्षा व्यक्त की जा रही है कि छत्तीसगढ़ सरकार की विकासोन्मुख नीतियों, निवेश संभावनाओं, सांस्कृतिक विरासत और जनकल्याणकारी योजनाओं का राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रभावी प्रचार-प्रसार होगा। साथ ही, दिल्ली स्थित सूचना केंद्र की मीडिया आउटरीच और संस्थागत समन्वय को भी नई गति मिलेगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC घोटाला मामले में सीजीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी को ईडी रिमांड खत्म होने पर आज ED की विशेष कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने टामन सोनवानी को 14 दिनों की न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा।
बता दें कि टामन सिंह सोनवानी को सीजीपीएससी भर्ती घोटाले में सीबीआई ने दो साल पहले गिरफ्तार किया था। उनके साथ बजरंग पावर एंड स्टील लिमिटेड के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल को भी गिरफ्तार किया था। आरोप है कि सीजीपीएससी भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई थीं। प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत अन्य पदों पर चयनित कराने के लिए कथित तौर पर अवैध लेन-देन किया गया था। अब ईडी टामन सोनवानी को गिरफ्तार कर इस मामले की गहन जांच कर रही है।
CBI की जांच में क्या सामने आया ?
CBI के मुताबिक, टामन ने परीक्षा के पर्चे अपने घर पर साहिल, नीतेश, उसकी पत्नी निशा कोसले और दीपा आडिल को दिए। इसके बाद उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने लीक हुआ पेपर बजरंग पावर एंड इस्पात कंपनी के डायरेक्टर श्रवण गोयल को सौंपा। श्रवण गोयल के बेटे शशांक और बहू भूमिका ने इसी लीक पेपर से तैयारी की। परिणामस्वरूप दोनों डिप्टी कलेक्टर बन गए।
जानिए क्या है CGPSC घोटाला
CGPSC ने 2021 में 171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। प्री-एग्जाम 13 फरवरी 2022 को कराया गया। इसमें 2 हजार 565 पास हुए थे। इसके बाद 26, 27, 28 और 29 मई 2022 को हुई मेंस परीक्षा में 509 अभ्यर्थी पास हुए। इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की सिलेक्शन लिस्ट जारी हुई थी। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया।
इस दौरान योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने नजदीकी लोगों को पद दिलवाने का खेल हुआ। प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी। जांच एजेंसी ने छापेमारी में कई दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए हैं।अब ईडी भी इस मामले में जांच करेगी।