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भ्र्ष्टाचार से जुटाई गई सम्पत्ति पर हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय कुर्क की गई संपत्ति और अपराध की आय के बीच कोई संबंध है, कोल घोटाला, पूर्व सीएम के ओएसडी की माँ, भाई, सहित अन्य 9 आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने के खिलाफ पेश याचिका खारिज…

भ्र्ष्टाचार से जुटाई गई सम्पत्ति पर हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

कुर्क की गई संपत्ति और अपराध की आय के बीच कोई संबंध है,

कोल घोटाला, पूर्व सीएम के ओएसडी की माँ, भाई, सहित अन्य 9 आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने के खिलाफ पेश याचिका खारिज

बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व बीडी गुरु की डीबी ने कोल घोटाला के आरोपियों की सम्पति कुर्क करने के खिलाफ पेश याचिका में कहा, धन शोधन के मामले में, चूँकि कार्यप्रणाली में अक्सर घुमावदार और अस्पष्ट वित्तीय लेन-देन शामिल होते हैं, जिससे प्रत्यक्ष साक्ष्य प्राप्त करना स्वाभाविक रूप से कठिन हो जाता है, सत्यापन योग्य वैध आय के अभाव में न्यायालय यह मान सकता है कि कुर्क की जाने वाली संपत्ति और अपराध की आय के बीच कोई संबंध है।प्रवर्तन प्राधिकारी के लिए प्रत्यक्ष साक्ष्य द्वारा यह स्थापित करना आवश्यक नहीं है कि विचाराधीन संपत्ति अपराध की आय है।

संपत्ति अधिग्रहण की समय-सीमा, और सत्यापन योग्य वैध आय का अभाव शामिल है, के आधार पर, यह न्यायालय संतुष्ट है कि संपत्ति और पीओसी के बीच प्रथम दृष्टया संबंध मौजूद है। इसलिए, पीएओ पीएमएलए के तहत वैधानिक योजना के अनुरूप है और इसे बरकरार रखा जा सकता है। एक उचित विश्वास मौजूद है, जो विधिवत दर्ज है और भौतिक

साक्ष्य द्वारा समर्थित है, कि कुर्क की गई संपत्तियां धन शोधन में शामिल हैं और इसके अलावा, अपीलकर्ता पीएमएलए की धारा 24 के तहत वैधानिक अनुमान का खंडन करने में विफल रहे हैं। हमें नहीं लगता कि इन अपीलों में उत्तर देने योग्य कोई कानूनी प्रश्न उठता है।. इस बात को ध्यान में रखते हुए कि…उपरोक्त चर्चा के आधार पर, हम अपीलीय अधिकरण और अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए निष्कर्षों और तर्कों से पूरी तरह सहमत हैं और इस प्रकार, ये अपीलें गुण-दोष से रहित होने के कारण खारिज की जाती हैं।

बहुचर्चित कोयला घोटाले के मामले में आरोपियों की संपत्ति के अस्थायी नियंत्रण के खिलाफ हाईकोर्ट में लगी याचिका पर निर्णय पारित किया है।

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सूर्यकांत तिवारी और सौम्या चौरसिया सहित परिवार के लोगों की संपत्ति अटैच किए जाने को हाइकोर्ट में चुनौती दी है। वहीं केजेएसएल कोल पावर और इंद्रमणि मिनरल्स में अपने अधिवक्ता के माध्यम से याचिका लगाई जिस पर लगातार सुनवाई के बाद सभी 10 याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और विभू दत्त गुरु की डबल बेंच में सभी पहलुओं पर लंबी बहस के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था। जिसे आज बुधवार को सार्वजनिक कर दिया गया है। इस याचिका को कोर्ट ने लंबी कानूनी बहस के बाद खारिज कर दिया है। दरअसल ईडी रायपुर ने अवैध कोयला लेवी घोटाले से संबंधित मामले में सूर्यकांत तिवारी और अन्य से संबंधित पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 30/01/2025 को कुल मिलाकर 49.73 करोड़ रुपये मूल्य की 100 से अधिक चल और अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया है, जिसमें बैंक बैलेंस, वाहन, नकदी, आभूषण और जमीन शामिल हैं। इसके सूर्यकांत तिवारी के भाई रजनीकांत तिवारी, कैलाशा तिवारी, दिव्या तिवारी की भी संपति अटैच की गई है। वहीं इसके अलावा सौम्या चौरसिया उनके भाई अनुराग चौरसिया, मां शांति देवी, समीर विश्नोई और अन्य ने अस्थायी नियंत्रण के खिलाफ याचिकाएं लगाई। कोर्ट में संबंधित अपीलकर्ताओं के वकील हर्षवर्धन परगनिहा, निखिल वार्ष्णेय, शशांक मिश्रा, अभ्युदय त्रिपाठी और अन्य को सुना। जिसके बाद प्रतिवादी के वकील डॉ. सौरभ कुमार पांडे को भी सुना गया। संबंधित अपीलकर्ताओं की ओर अधिवक्ताओं और प्रतिवादी की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें पूरी हो गई थी। कोर्ट ने इस मामले में याचिका को खारिज करने का निर्णय सुनाया है।

Sunil Agrawal
Sunil Agrawal
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