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  • WhatsApp ने लॉन्च किया बड़ा प्राइवेसी फीचर, अब बिना नंबर बताए कर पाएंगे मैसेज और कॉल

    WhatsApp ने लॉन्च किया बड़ा प्राइवेसी फीचर, अब बिना नंबर बताए कर पाएंगे मैसेज और कॉल

    WhatsApp यूजर्स अब बिना  मोबाइल नंबर रिवील किए चैटिंग और कॉलिंग का आनंद ले सकेंगे। मेटा के इंस्टैंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के लिए यह नया प्राइवेसी फीचर रोल आउट किया जा रहा है। इस यूजरनेम फीचर में यूजर्स अपने मोबाइल नंबर को हाइड कर सकेंगे और अपनी पहचान के लिए यूजरनेम का इस्तेमाल कर सकेंगे, जैसा कि अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में होता है। मोबाइल नंबर रिवील नहीं होने की वजह से साइबर क्राइम की घटनाओं में कमी आ सकती है।

    वॉट्सऐप ने अपने आधिकारिक X हैंडल से इस फीचर के रोल आउट करने की घोषणा की है। इस फीचर को जल्द ही ऑफिशियली लॉन्च किया जाएगा। फिलहाल यूजर्स अपने यूजरनेम को रिजर्व कर सकेंगे। यूजरनेम रिजर्व होने के बाद यूजर का मोबाइल नंबर छिप जाएगा और वो केवल यूजरनेम से ही पहचाने जाएंगे।

    वॉट्सऐप ने अपने पोस्ट में बताया कि “आपका फोन नंबर निजी है और कभी-कभी आप बिना इसे बताए लोगों के साथ कनेक्ट होना चाहते हैं। यही कारण है कि हम वॉट्सऐप में यूजरनेम फीचर ला रहे हैं।”

  • फ्रॉड कॉल्स पर लगेगी लगाम: अब फोन उठाते ही दिखेगा कॉलर का असली नाम, जानिए क्या है CNAP

    फ्रॉड कॉल्स पर लगेगी लगाम: अब फोन उठाते ही दिखेगा कॉलर का असली नाम, जानिए क्या है CNAP

    बढ़ते फ्रॉड को लेकर भारत सरकार मोबाइल कालिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव करने जा रही है. इससे आने वाले दिनों में कॉल रिसीव करने का तरीका बदल सकता है, क्योंकि CNAP यानि Calling Name Presentation का नया आएगा. इसकी टेस्टिंग भी शुरू हो चुकी है और इसे टेलिकॉम कंपनियों के साथ मिलकर डेवलप किया जा रहा है.

    अब तक हम जब भी किसी अनजान (Unknow) नंबर से कॉल उठाते थे, तोह स्क्रीन पर श्रीफ कॉल करने वाले का नंबर दिखाई देता था. ऐसे में लोग दुसरे Thrid-Party Apps जजेसे TrueCaller का इस्तेमाल करना पड़ता था. लेकर CNAP के आने के बाद ऐसे थर्ड-पार्टी अप्प्स की जरुरत खत्म हो जाएगी

    CNAP क्या करेगा?
    सरकार के इस नए सिस्टम के लागू होने के बाद जब भी किसी नंबर से कॉल आएगी, तो उस कॉलर का वास्तविक नाम आपकी स्क्रीन पर दिखाई देगा. यह वही नाम होगा जो व्यक्ति ने सिम लेते समय अपने दस्तावेजों में दर्ज करवाया था.

    यानि-

    फोन स्क्रीन पर दिखने वाला नाम पूरी तरह टेलीकॉम कंपनी के ऑफिशियल रिकॉर्ड पर आधारित होगा.
    फर्जी नाम या गलत जानकारी देकर कॉल करने की संभावना बेहद कम हो जाएगी.
    ठगी, स्पैम और अनजान कॉल्स से होने वाली धोखाधड़ी पर भी रोक लगेगी, क्योंकि कॉलर की पहचान पहले ही साफ हो जाएगी.
    सरकार का उद्देश्य है कि हर यूजर को कॉल आते ही पता चल जाए कि कॉल करने वाला वास्तव में कौन है. इससे फ्रॉड कॉल्स में काफी कमी आ सकती है.

    कुछ लोगों को दो नाम क्यों दिख रहे हैं?

    टेस्टिंग के दौरान कई यूजर्स ने बताया कि उनकी स्क्रीन पर एक कॉलर के दो नाम दिखाई दे रहे हैं.

    ऐसा इसलिए हो रहा है:

    • सबसे पहले नेटवर्क CNAP के ज़रिए सरकारी रिकॉर्ड वाला नाम भेजता है
    • उसके कुछ सेकंड बाद फोन आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव किया हुआ नाम दिखा देता है

    यह सिर्फ टेस्टिंग फेज के दौरान की समस्या है. CNAP के पूरी तरह लागू होने के बाद ऐसा कन्फ्यूजन शायद खत्म हो जाएगा.

    CNAP आने के बाद क्या बदलेगा?

    • अनजान कॉल्स की पहचान पहले से आसान होगी
    • स्पैम और फ्रॉड कॉल्स में कमी आएगी
    • किसी थर्ड-पार्टी ऐप की जरूरत नहीं पड़ेगी
    • यूज़र सीधे सरकारी प्रमाणित नाम देख सकेंगे
    • कॉलिंग सिस्टम और मोबाइल सुरक्षा दोनों मजबूत होंगे
  • AI चैटबॉट का गजब ‘Kill Bill, अस्पताल का 1.72 करोड़ का बिल 30 लाख का कर दिया!

    AI चैटबॉट का गजब ‘Kill Bill, अस्पताल का 1.72 करोड़ का बिल 30 लाख का कर दिया!

    Claude नाम के AI Chatbot ने अस्पताल के बिल को बारीकी से देखा और उसमें कई विसंगतियों को पकड़ लिया. नतीजतन, एक करोड़ 72 लाख रुपये का बिल घटकर 30 लाख रुपये का हो गया. कहानी ‘आर्टिफिशियल’ लग सकती है लेकिन Claude की ‘इंटेलिजेंस’ के लिए पढ़ना बनता है.

    AI Chatbot से जुड़े अच्छे और बुरे किस्से आपने जरूर पढ़े और सुने होंगे. आज बारी एक और अच्छे किस्से की है. जानकर आपको एक बार तो भरोसा भी नहीं होगा. ज्यादा भूमिका नहीं, सीधा खबर पर आते हैं. दावा है कि AI Chatbot की मदद से एक शख्स ने अस्पताल का एक करोड़ 72 लाख रुपये का बिल सीधा 30 लाख का करवा लिया. यानी एक करोड़ 42 लाख रुपये से भी ज्यादा बचा लिए. जानें कैसे एक AI Chatbot ने अस्पताल के बिल में खामियां पकड़ीं.

    Claude नाम के AI Chatbot ने अस्पताल के बिल को बारीकी से देखा और उसमें कई विसंगतियों को पकड़ लिया. नतीजतन, एक करोड़ 72 लाख रुपये का बिल घटकर 30 लाख रुपये का हो गया. कहानी ‘आर्टिफिशियल’ लग सकती है लेकिन Claude की ‘इंटेलिजेंस’ के लिए पढ़ना बनता है.

    AI Chatbot ने बिल को ‘किल’ कर दिया
    घटना अमेरिका की है. Tom’s Hardware की रिपोर्ट के मुताबिक थ्रेड्स (इंस्टाग्राम का ट्विटर) पर मैट रोजनबर्ग नाम के यूजर ने इस पूरी घटना को साझा किया है. पोस्ट के मुताबिक उनके साले को हार्ट अटैक आया था. उसका मेडिकल बीमा दो महीने पहले ही खत्म हो गया था. ऐसे में इलाज का पूरा खर्च परिवार पर आया. हालांकि मरीज को बचाया नहीं जा सका. एक करीबी रिश्तेदार को खोने के बाद परिवार को एक और झटका मिलने वाला था.

    दरअसल, अस्पताल ने मरीज को सिर्फ चार घंटे ICU में रखा था. लेकिन इसके लिए बिल बनाया गया 1.72 करोड़ रुपये का. पोस्ट के मुताबिक बिल में कई सारे चार्जेज ऐसे थे जिनका कोई तुक नहीं था. गड़बड़ महसूस होने पर मैट ने क्लाउड चैट बॉट को बिल का तिया-पांचा समझने के लिए कहा.

    चैट बॉट ने अपना काम बखूबी किया. उसने पाया कि अस्पताल ने एक ही प्रक्रिया के लिए दो बार वसूली की थी. एक बार मेन ऑपरेशन के लिए. और फिर हर छोटे हिस्से के लिए. अकेले इस वजह से बिल लगभग 88 लाख रुपये बढ़ गया था. चैट बॉट ने गलत बिलिंग कोड भी पकड़े, जैसे कि मामले को ‘आपातकालीन’ के बजाय ‘अस्पताल में भर्ती’ के रूप में दिखाया. वेंटिलेटर सेवाओं का खर्चा भी बिल में जुड़ा हुआ था.

    विसंगतियों की पूरी लिस्ट चैट बॉट ने साझा की जिसके बाद यूजर ने अस्पताल को सबूत के साथ एक सख्त चिट्ठी लिखी. अस्पताल ने बिल में झोल को माना और बिल को एक लाख 95 हजार डॉलर (एक करोड़ 72 लाख रुपये) से घटाकर 33 हजार डॉलर (करीब 30 लाख रुपये) कर दिया.

    मैट रोजनबर्ग के मुताबिक चैट बॉट ने बिल में कमियां तो निकाली ही, साथ में एक बढ़िया पत्र लिखने में भी मदद की. 1800 रुपये महीना प्रीमियम वाले चैटबॉट ने यूजर के करोड़ों बचा दिए.

  • PNB बैंक के नए नियम 2025: 1 अप्रैल से लागू होंगे 5 बड़े बदलाव, जानें आपके लिए क्या है जरूरी

    PNB बैंक के नए नियम 2025: 1 अप्रैल से लागू होंगे 5 बड़े बदलाव, जानें आपके लिए क्या है जरूरी

    1. बचत खाते में न्यूनतम बैलेंस की बढ़ी शर्तें
    PNB ने अपने बचत खातों में न्यूनतम बैलेंस के नियम में बदलाव किया है। अब आपको अपने अकाउंट में पहले से ज्यादा राशि रखनी होगी। बैंक ने 1 अप्रैल से इस बदलाव को लागू करने की घोषणा की है। पहले जो न्यूनतम बैलेंस की शर्त कम थी, अब आपको उसमें वृद्धि करनी होगी, ताकि आपको शुल्क न देना पड़े। यदि आपने नया बैलेंस जमा नहीं किया, तो आपको अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ेगा, जो कि पहले से कहीं अधिक होगा।

    नए न्यूनतम बैलेंस के हिसाब से:

    शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम बैलेंस ₹1000 से बढ़ाकर ₹2000 किया जाएगा।

    ग्रामीण क्षेत्रों में यह ₹500 से ₹1000 तक हो सकता है।

    इसलिए, यदि आपका बचत खाता PNB में है, तो 1 अप्रैल से अपने खाते में उचित बैलेंस रखना सुनिश्चित करें, वरना अधिक शुल्क आपको देना पड़ सकता है।

    2. चार्ज में बढ़ोतरी पर ध्यान दें
    PNB ने अपनी कई बैंकिंग सेवाओं के लिए शुल्क में वृद्धि की है। 1 अप्रैल से लागू होने वाले इन नए नियमों के तहत, यदि आप बैंक की सेवाओं का उपयोग करते हैं, जैसे कि डिमांड ड्राफ्ट, चेक बुक, या फिर अन्य सुविधाओं का लाभ उठाते हैं, तो आपको अधिक शुल्क का भुगतान करना पड़ सकता है। बैंक ने कहा है कि यह वृद्धि आम बैंकिंग शुल्क पर होगी, जिनका उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है।

    इसके अलावा, पेनल्टी चार्जेज़ भी बढ़ाए गए हैं, जैसे कि अकाउंट के न्यूनतम बैलेंस के उल्लंघन पर मिलने वाले शुल्क। इसलिए, इस बदलाव से पहले अपनी बैंकिंग जरूरतों को ठीक से समझ लें।

    3. लॉकर सेवाओं में बदलाव
    PNB ने अपनी लॉकर सेवाओं में भी बदलाव किया है। यदि आप बैंक के लॉकर का उपयोग करते हैं, तो 1 अप्रैल से आपको अधिक शुल्क देना होगा। लॉकर की सुविधाएं महंगी हो सकती हैं, इसलिए पहले से ही अपनी योजना पर विचार कर लें। लॉकर के प्रकार के हिसाब से शुल्क में विभिन्नता हो सकती है, जैसे छोटे, मध्यम और बड़े आकार के लॉकर पर अलग-अलग चार्ज लागू होंगे।

    4. डिमांड ड्राफ्ट की फीस बढ़ी
    PNB ने डिमांड ड्राफ्ट (DD) की फीस भी बढ़ा दी है। अब आपको पहले से ज्यादा राशि का भुगतान करना पड़ेगा यदि आप DD प्राप्त करते हैं या फिर जारी करते हैं। यह बदलाव विशेष रूप से उन लोगों के लिए है, जो नियमित रूप से इस सेवा का उपयोग करते हैं। यदि आप डिमांड ड्राफ्ट की सुविधा का लाभ लेते हैं, तो आपके लिए यह महत्वपूर्ण है कि आप नए शुल्कों से अवगत रहें और अपने बैंकिंग खर्चों का हिसाब किताब ठीक से रखें।

    5. करंट अकाउंट पर शुल्क वृद्धि
    PNB ने करंट अकाउंट पर भी शुल्क बढ़ा दिए हैं। विशेष रूप से व्यवसायिक उपयोग के लिए करंट अकाउंट रखने वालों को 1 अप्रैल से अधिक शुल्क का भुगतान करना पड़ सकता है। यह शुल्क अकाउंट के संचालन से संबंधित सेवाओं, जैसे चेक बुक, चेक क्लीयरिंग, आदि, पर लागू होंगे। व्यवसायियों को यह बदलाव अपने खर्चों में जोड़कर चलना होगा।

    PNB के नए नियमों का असर:
    इन नए नियमों का असर उन सभी PNB ग्राहकों पर पड़ेगा, जिनका खाता इस बैंक में है। 1 अप्रैल से लागू होने वाले इन बदलावों से बैंकिंग शुल्क में वृद्धि होने से ग्राहकों के लिए अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ सकता है। इसलिए, PNB के सभी ग्राहकों को इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए अपने खातों और सेवाओं को उचित तरीके से प्रबंधित करना चाहिए।

    किसे चाहिए इन बदलावों से बचने की सलाह?
    बचत खाता रखने वाले – यदि आपका खाता PNB में है, तो आपके लिए महत्वपूर्ण है कि आप अपने खाता में सही मात्रा में बैलेंस रखें, ताकि शुल्क से बच सकें।

    लॉकर ग्राहक – अगर आप बैंक के लॉकर सेवाओं का उपयोग करते हैं, तो आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपको नया शुल्क समझ में आ जाए और आपका लॉकर आवंटन और शुल्क राशि स्पष्ट हो।

    व्यवसायिक खाते वाले – अगर आप करंट अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको शुल्क वृद्धि के असर को समझना और अपने व्यवसायिक खर्चे में इसे शामिल करना होगा।

    निष्कर्ष
    PNB ने 2025 में अपनी कई बैंकिंग सेवाओं के नियमों और शुल्कों में बदलाव किया है। इन नए नियमों का असर 1 अप्रैल से देखने को मिलेगा, और यह बदलाव खासकर उन ग्राहकों पर असर डालेंगे जो बचत खाता, लॉकर्स, डिमांड ड्राफ्ट, और करंट अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए, PNB ग्राहकों को इन बदलावों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए ताकि वे आगामी शुल्क वृद्धि से बच सकें और अपनी बैंकिंग सुविधाओं का सही तरीके से लाभ उठा सकें।

    यह जरूरी है कि आप PNB के नए नियमों को समय रहते समझें और अपनी बैंकिंग गतिविधियों की योजना उसी अनुसार बनाएं।

  • ट्विटर बनाने वाले जैक डॉर्सी ‘Bluesky’ ऐप ले आए, फीचर्स से एलन मस्क का सिरदर्द पक्का

    ट्विटर बनाने वाले जैक डॉर्सी ‘Bluesky’ ऐप ले आए, फीचर्स से एलन मस्क का सिरदर्द पक्का

    कहां एक तरफ तो इन महानुभाव के ट्विटर (Twitter) का नया CEO बनने की बात चल रही थी, और कहां ये खुद का ऐप लेकर आ गए. हम ट्विटर के सहसंस्थापक जैक डॉर्सी की बात कर रहे हैं. उन्होंने एक नया सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म ‘Bluesky’ लॉन्च कर दिया है. मतलब एलन मस्क के लिए नई मुसीबत आ गई है. फिलहाल ये ऐप ऐप्पल स्टोर पर ही उपलब्ध है वो भी कुछ चुनिंदा बेटा टेस्टर के लिए. हालांकि जल्द ही इसके आम यूजर्स तक पहुंचने की उम्मीद की जा रही है. जानते हैं कि आखिर जैक का ये ‘जैक’ कितना वजन उठाएगा.

    क्या है ब्लूस्काई ऐप?

    iOS पर ब्लूस्काई ऐप को 17 फरवरी 2023 को लिस्ट किया गया था. ऐप इंटेलिजेंस फर्म data.ai के मुताबिक, टेस्टिंग फेज में इसे करीब दो हजार बार इंस्टॉल किया गया है. ऐप पर आप 256 अक्षरों का एक पोस्ट बनाने के लिए प्लस बटन पर क्लिक कर सकते हैं, जिसमें फोटो भी शामिल हो सकती है. 

    data.ai के मुताबिक ऐप का यूजर इंटरफेस इस्तेमाल में बेहद आसान है. हालांकि पहली नजर में ब्लूस्काई काफी हद तक ट्विटर जैसा ही नजर आता है. ट्विटर की तरह इसमें भी यूजर्स अकाउंट्स को ब्लॉक, शेयर और म्यूट कर सकते हैं. एक अन्य टैब में आप नोटिफिकेशन चेक कर सकते हैं, जिसमें लाइक, रीपोस्ट, फॉलो और रिप्लाई शामिल हैं. ट्विटर जहां आपको “What’s happening?”  बोलता है तो ब्लूस्काई  “What’s up?” वैसे अभी ऐप अपने डेवलपर फेज में है तो इसमें बदलाव होने की उम्मीद है.

    बात करें दूसरे फीचर्स की तो ब्लूस्काई में ऐप के नेविगेशन में डिस्कवर टैब काफी उपयोगी है. आपको ‘किसे फॉलो करें’ जैसे सुझाव और हाल ही में पोस्ट किए गए ब्लूस्काई अपडेट की एक फीड भी मिल जाएगी. रिपोर्ट के अनुसार, “ऐप में एक अन्य टैब आपको अपने नोटिफिकेशन की जांच करने देता है, जिसमें लाइक, रीपोस्ट, फॉलो और रिप्लाई शामिल हैं. यह भी ट्विटर की तरह ही है. इसमें कोई डीएम (डायरेक्ट मेसेज) नहीं हैं.”

    प्रोजेक्ट पुराना है

    ब्लूस्काई का ट्विटर के हालिया डेवलपमेंट से कोई सीधा लेना-देना नहीं है. इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2019 में Twitter के साथ ही हुई थी. लेकिन जैक के ट्विटर छोड़ने के बाद ये प्रोजेक्ट भी उनकी संस्थापित कंपनी से अलग हो गया. पिछले साल अक्टूबर में डॉर्सी ने ट्विटर पर एक पोस्ट की थी. इसमें उन्होंने कहा था कि ब्लूस्काई प्रोजेक्ट का मकसद उन कंपनियों का प्रतियोगी बनना है जो सोशल मीडिया यूजर्स के ‘डेटा का मालिक’ बनने की कोशिश कर रही हैं.

    रिपोर्टों के मुताबिक जैक डॉर्सी की नई कंपनी को अब तक 107 करोड़ रुपये से ज्यादा की फंडिंग भी मिल चुकी है. जैक डॉर्सी को टेक की दुनिया में ‘कैप्टन जैक स्पैरो’ के नाम से भी जाना जाता है. मतलब उनका खेल कभी खत्म नहीं होता और वो वापसी करते हैं. देखना होगा ब्लूस्काई के साथ ये बात कितनी सच साबित होगी.

  • अब iPhone यूजर्स नहीं कर पाएंगे भारत सरकार की इन Indian Apps का इस्तेमाल….

    अब iPhone यूजर्स नहीं कर पाएंगे भारत सरकार की इन Indian Apps का इस्तेमाल….

    आजकल रेल या प्लेन का टिकट बुक करना हो या फिर बैंकिंग का कोई काम हो, मोबाइल ऐप से तुरंत ये सभी काम हो जाते हैं. यूजर्स अपनी जरूरत के मुताबिक इनका इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि, कुछ सकारी ऐप ऐसी हैं, जिनका इस्तेमाल iPhone यूजर्स नहीं कर सकते, क्योंकि ये ऐप Google Play Store पर मौजूद हैं. सिर्फ एंड्रॉयड यूजर्स ही इनका इस्तेमाल कर सकते हैं।

    MYGRIEVANCE: इस ऐप को नेशनल इंफोर्मेटिक्स सेंटर ने डिपार्टपेंट ऑफ एडमिनिस्ट्रैटिव रिफॉर्म्स एंड पब्लिक ग्रिवांस के सहयोग से तैयार किया है. MYGRIEVENCE App यूजर्स को केंद्र और राज्य सरकार से जुड़े किसी भी विभाग की शिकायत करने की सुविधा प्रदान करती है. यहां आप आसानी से किसी भी सरकारी महकमे के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते हैं. इसके अलावा यूजर्स ऐप पर अपनी शिकायत का स्टेटस भी ट्रैक कर सकते हैं।

    MYCGHS: यह ऐप केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए है. सरकारी कर्मचारी यहां से डॉक्टर और वेलनेस सेंटर की अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं. इसके अलावा यहां से अपॉइंटमेंट कैंसिल भी की जा सकती है. यूजर्स इस ऐप से स्कीम के तहत ..पैनल में शामिल हॉस्पिटल और लैब की जानकारी की भी हासिल कर सकते हैं।

    JeevanPramaan Life Certificate: यह ऐप पेंशनभोगियों के काफी काम आती है. इस ऐप से यूजर्स आधार बायोमैट्रिक के जरिए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट यानी जीवन प्रमाण पत्र बनवा सकते हैं. यूजर्स ID की मदद से जीवन प्रमाण पत्र की सर्टिफाइड PDF कॉपी डाउनलोड कर सकते हैं।

    DND: अगर आप प्रोमोशन वाली कॉल से बेहाल हो चुके हैं, तो DND ऐप आपकी मदद करेगी. सरकारी टेलीकॉम रेगुलेटर बॉडी TRAI ने इस DND ऐप को तैयार किया है. इस ऐप पर मोबाइल नंबर रिजसर्ड कराने के बाद अनसोलिसिट कमर्शियल कम्यूनिकेशन (UCC)/ टेलीमार्केटिंग कॉल और SMS से छुटकारा मिलेगा।

    PMO India: यह भारतीय प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक ऐप है. इस ऐप पर प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ी सभी लेटेस्ट जानकारी, न्यूज अपडेट्स मिलती हैं. देश के अलग-अलग इलाकों में रहने वाले लोगों की सहूलियत के लिए ये ऐप 13 भाषाओं को सपोर्ट करती है।

     Indian Apps: Kisan Suvidha: किसान सुविधा ऐप को इसलिए डेवलप किया गया है, ताकि वे अपनी उपज को अच्छे दाम पर बेच पाएं. इस ऐप पर किसान किसी भी बाजार में हो रही उपज की निलामी को लाइव चेक कर सकते हैं. वहीं, आढ़ती भी इसकी मदद से उपज की खरीद-फरोख्त पर नजर रख सकते हैं।

  • जम्‍मू-कश्‍मीर के एक मैथ टीचर ने बना डाली सोलर कार, आनंद महिंद्रा भी देखकर रह गए दंग….

    जम्‍मू-कश्‍मीर के एक मैथ टीचर ने बना डाली सोलर कार, आनंद महिंद्रा भी देखकर रह गए दंग….

    भारत में धुरंधरों की कमी नहीं है, यहां आए दिन आप कुछ न कुछ ऐसा देखते या सुनते होंगे, जिसका भरोसा कर पाना नामुमकीन सा लगता है। ठीक ऐसा ही जम्मू-कश्मीर के एक मैथ टीचर ने किया, जिसको देख महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा भी खुद को रोक नहीं पाये। आनंद महिंद्रा ने जितना हो सकता था उतनी उस मैथ टीचर की तारीफ की। आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला।

    इसलिए आनंद महिंद्रा ने की तारीफ

    दरअसल, जम्‍मू-कश्‍मीर के एक मैथ टीचर ने सोलर से चलने वाली कार को बनाया है, जो धूप से चार्ज होता है और बिना ईंधन के चलता है। दिखने स्टाइलिश लगने वाली इस कार का वीडियो सोशल मीडिया पर तब वायरल हुआ जब आनंद महिंद्रा ने गाड़ी का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते मैथ टीचर की तारीफ की।

    धूप से चलती है ये सोलर कार

    जम्मू और कश्मीर के बिलाल अहमद ने एक इलेक्ट्रिक कार का आविष्कार किया है, जो एक किफायती विकल्प हो सकता है। अहमद की इलेक्ट्रिक कार, जो 11 साल के शोध और कड़ी मेहनत का नतीजा है, वह सौर ऊर्जा से चलती है। जहां परिवहन के हरित तरीकों को अपनाने की बात आती है तो उनके नवाचार को सही दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है

    आनंद महिंद्रा ने बढ़ाया बिलाल का हौसला

    मैं बिलाल के अकेले ही इस प्रोटोटाइप को विकसित करने की सराहना करता हूं। इस डिजाइन को अमल में लाने की जरूरत है और ऐसे कारों का उत्पादन होना चाहिए।

    उद्योगपति आनंद महिंद्रा प्रौद्योगिकी और नवाचार में गहरी रुचि रखने के लिए जाने जाते हैं। वो आए दिए अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से लोगों को मोटिवेट करते रहते हैं। उन्होंने बिलाल अहमद के इस अविष्कार की  सराहना की। 67 वर्षीय अरबपति ने कहा कि अहमद का जुनून काफी सराहनीय है। 

  • 10 साल पुराना हो गया है आधार कार्ड तो करवा लें अपडेट, UIDAI ने कहा- सिंपल है प्रोसेस….

    10 साल पुराना हो गया है आधार कार्ड तो करवा लें अपडेट, UIDAI ने कहा- सिंपल है प्रोसेस….

    आज के समय में किसी भी व्यक्ति के लिए आधार कार्ड सबसे जरूरी डॉक्यूमेंट बन चुका है. बैंक में अकाउंट खुलवाने से लेकर एक सिम कार्ड तक लेने में आधार कार्ड का इस्तेमाल हर जगह होता है. लगभग सभी सारी सरकारी सब्सिडी और सेवाओं का फायदा लेने के लिए भी आधार कार्ड दिखाना होता है. ऐसे में आपका आधार कार्ड आपके लिए बहुत ही जरूरी है. लेकिन अगर आपका आधार कार्ड 10 साल से अधिक पुराना हो चुका है तो आपको इसे अपडेट करा लेना चाहिए. UIDAI ने लोगों को हर 10 साल में अपना आधार कार्ड अपडेट कराने को कहा है. UIDAI का कहना है कि इससे फर्जी आधार पर लगाम लगेगी और लोगों का डाटा भी पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा।

    एक प्रेस रिलीज में UIDAI ने कहा है कि पिछले 10 में, आधार नंबर व्यक्ति की पहचान के प्रमाण के रूप में उभरा है. आधार नंबर का उपयोग विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ उठाने के लिए किया जा रहा है. इन योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ उठाने के लिए, सर्वसाधारण को व्यक्तिगत नवीनतम विवरण से आधार डाटा को अपडेट रखना है ताकि आधार प्रमाणीकरण / सत्यापन में असुविधा न हो।

    UIDAI ने आगे कहा कि ऐसे व्यक्ति जिन्होंने 10 साल पहले आधार बनवाया था और इसके बाद उसमें कभी कोई अपडेट नहीं कराया, उन्हें अपना आधार अपडेट करा लेना चाहिए. आधार अपडेट कराने का यह प्रोसेस पूरी तरह से निशुल्क है. जिसके लिए आप My Aadhaar Portal (https://myaadhaar.uidai.gov.in/) पर जा सकते हैं।

    आधार सेंटर से भी करा सकते हैं अपडेट

    अगर आपको भी अपना आधार कार्ड अपडेट करवाना है तो आप नजदीकी आधार केंद्र पर जाकर करा सकते हैं. इसके अलावा आधार के दुरुपयोग को रोकने के लिए UIDAI उसे लॉक करने की सलाह देता है. ये एक तरह का खास फीचर है जिसमें अस्थायी तौर पर आधार नंबर को लॉक और अनलॉक किया जाता है. इससे कार्ड होल्डर का सारा डाटा सुरक्षित रहता है और गोपनीयता बनी रहती है।

    93% से ज्यादा युवाओं का बन चुका है आधार

    सरकारी आंकड़ों की बात करें तो देश में 0-5 साल के वित्तीय वर्ष अप्रैल से जुलाई के बीच 79 लाख एनरोल किए हैं. इसके अलावा 5 साल से ज्यादा उम्र के 2.64 करोड़ बच्चों के पास 31 मार्च 2022 तक बाल आधार था. हालांकि ये आंकड़ा जुलाई में बढ़कर 3.43 करोड़ हो गया. इसके अलावा देश में अभी तक 93.41 फीसदी 18 साल से ज्यादा आयु के लोगों का आधार कार्ड बनाया जा चुका है।

  • सोशल मीडिया के अनसोशल नशे में कहीं आप भी तो नहीं फंसते जा रहे हैं…. जानिए कैसे

    सोशल मीडिया के अनसोशल नशे में कहीं आप भी तो नहीं फंसते जा रहे हैं…. जानिए कैसे

    दिल्ली। दुनियाभर में सबसे अधिक आबादी वाले देशों की फेहरिस्त में भारत नंबर 2 पर है, लेकिन सोशल मीडिया के मामले में सबसे आगे है. अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक के ही अकेले यहां पर 40 करोड़ अकाउंट हैं, वहीं वाट्सऐप के तो तकरीबन 53 करोड़ यूजर हैं.

    बात नब्बे के दशक के शुरुआत की है, जब लेखक को भारतीय पुलिस सेवा के एक अधिकारी से इंटरनेट और सर्च इंजन (Internet And Search Engine) जैसी किसी चीज़ के बारे में पता चला. इसका इस्तेमाल विदेशों में वहां की पुलिस कर रही थी, जिससे पुलिस को कई तरीके से मदद मिल रही थी. ये दिलचस्प जानकारी थी और साथ ही उन दिनों इसे दिल्ली पुलिस (Delhi Police) भी इस्तेमाल करने पर विचार कर रही थी. तभी पता चला कि ये कोई ऐसी तकनीक है, जिसमें कंप्यूटर के एक क्लिक से ज्ञान का भंडार खुल जाता है. जो चाहो जानकारी झट से पा लो और फटाफट किसी को भी टाइप करके भेज दो.

    सूचना (Information Technology) लेने देने के लिए तब तक की सबसे आधुनिक तकनीक मॉडेम थी जिसका इस्तेमाल कंप्यूटर के नेटवर्क के ज़रिए ही होता था. इसके अलावा , चलते फिरते कहीं भी संदेश पाने के लिए पेजर तक चुनिंदा पेशेवर लोगों की पहुंच हो चुकी थी. इससे कुछ साल पहले ही यानि 80 के दशक में रंगीन टेलीविज़न, कंप्यूटर और फैक्स का आगमन भारत में हो चुका था, ये भारत में सूचना क्रांति से कम नहीं था. लेकिन ऐसे में इंटरनेट तो एक कदम क्या, कितने ही कदम आगे की चीज़ थी

    थोड़े बहुत इल्म के साथ इस बारे में लेखक ने बतौर रिपोर्टर एक खबर लिखी, जो अखबार में प्रकाशित हुई. लिखने से लेकर, इसके छपने और छपकर घरों तक पहुंच जाने की प्रक्रिया में जिस-जिस की नज़र से ये जानकारी गुजरी, किसी को भी इस सच्चाई पर आसानी से यकीन नहीं हो रहा था कि ‘इंटरनेट’ और ‘सर्च इंजन’ जैसी कोई बला हो सकती है. वैसे भी उस ज़माने की जनता को इसका यकीं होता भी कैसे जब उसे घर में लैंड लाइन फोन लगवाने के लिए सालों इंतज़ार करने की आदत पड़ी हुई हो. तब फोन तो बहुत बड़े अधिकारियों या मंत्रियों को भी आसानी से नहीं मिलते थे.

    तब किसने सोचा था कि जिंदगी को रफ्तार देने वाले ‘इंटरनेट’ और ‘सूचना प्रौद्योगिकी’ सोशल नेटवर्किंग सर्विस के नाम पर ऐसे उत्पाद बना देंगे जो अच्छे खासे आदमी और संस्थाओं की चाल और चरित्र दोनों ही बदल देंगे. जब तक स्मार्ट फोन नहीं थे, तक तक तो काफी हद तक उन कम्प्यूटरों की स्क्रीन के ज़रिए सोशल मीडिया बहुत हद तक दुनिया भर के समाज को सकारात्मकता के साथ जोड़ता रहा जो स्क्रीन इस्तेमाल करने वाले के बगल में बैठे शख्स को भी नज़र आती थी. ज़्यादातर डेस्कटॉप कम्प्यूटर थे. इन कम्पूटरों के साथ समस्या यह थी कि अक्सर एक आदमी के इस्तेमाल करने के बाद कंप्यूटर इस्तेमाल करने वाले को भी पहले वाली गतिविधियां पता चल जाती थीं.

    पासवर्ड हर एक के पास नहीं होता था और तब जायज़ वजह से भी पासवर्ड क्रिएट करना या पूछना भी संदेह का कारण बन जाता था. लेकिन जब से स्मार्ट फोन की आसानी से उपलब्धता हुई और सोशल मीडिया प्लेटफार्म छोटी सी स्क्रीन पर भी छा गए तब से सोशल मीडिया ने ज्यादा खुद को अन सोशल बना लिया. छोटी स्क्रीन होने के कारण, दूसरों की नज़र उस पर नहीं पड़ती यानि आसानी से छिपाकर कोई नभी गतिविधि की जा सकती है. इसके साथ ही आधुनिक दौर में समाज में ‘प्राइवेसी’ नाम के शब्द ने ऐसी जगह बना ली कि ये लोकतांत्रिक व्यवस्था में मिले मौलिक अधिकार से भी ज़्यादा ‘पवित्र’ विचार बन गया. कारोबार वाली जगह से लेकर परिवार में भी इस विचार ने ऐसी पैठ बनाई कि एक ही बेडरूम शेयर करने वाले पति पत्नी भी मोबाइल फोन के इस्तेमाल के मामले में ‘प्राइवेसी’ के कारण तुनक मिजाज़ होने लगे.

    वैसे तो ये लोकतांत्रिक देश में मिले स्वतंत्रता से जीने और अभिव्यक्ति के अधिकार जैसे तोहफों का मामला है, लेकिन प्राइवेसी के नाम पर ऐसे-ऐसे टेक्स्ट और ऑडियो, वीडियो शेयर होने लगे जिनको सार्वजनिक रूप से या ज़िम्मेदारी लेकर साझा नहीं किया जा सकता. उस पर सोशल मीडिया पर नकली आईडी बना कर ‘कुछ भी और कभी भी’ साझा करने के बढ़े चलन ने तो हालात और खतरनाक बनाए. खैर जब तक ये कंटेंट व्यक्ति तक या छोटे से गुट तक सीमित रहे तो इसका इतना प्रभाव नहीं पड़ता लेकिन जब ये काफी लोगों तक पहुंच जाएं तो इसका असर कई गुना बढ़ जाता है.

    सोशल मीडिया के इस असर को सबसे ज्यादा और पहले भुनाया प्रचार प्रसार के काम के ज़रिये रोज़ी रोटी चलाने वालों ने. कंटेंट लिखने से लेकर विज्ञापन बनाने वालों ने अपनी विधा से इसका इस्तेमाल उत्पादों को बेचने, बिकवाने के लिए किया. अपनी बात झट से पहुंचाने और फट से फैलाने वाले गुणों वाले सोशल मीडिया प्लेटफार्म (भारत के सन्दर्भ में फेसबुक, ट्वीटर, व्हाट्सएप, यू-ट्यूब और इन्स्टाग्राम ख़ास हैं) कितने ही लोगों के लिए मददगार भी साबित हुए और एक बड़ी ज़रूरत बना लिए गए. वहीं , जहां तक मनोरंजन की बात है तो भी इसका इस्तेमाल कुछ हद तक समझ आता है, लेकिन जब कोई चीज़ जीवन के हरेक पहलू को प्रभावित करने लगे तो वो मानवीय चरित्र को भी बदलने लगती है.

    भारतीय समाज पर इसके लक्षण अब बहुत साफ़-साफ़ दिखाई देने लगे हैं. इसमें कोई शक नहीं कि कोरोना महामारी के दौरान दुनिया भर में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म कई व्यवस्थाओं के शानदार विकल्प बनके सामने आए. इस दौरान जबरदस्त तरीके से बढ़े इंटरनेट, आईटी, मोबाइल फोन के चलन के साथ सोशल मीडिया ईलाज करने और करवाने से लेकर, समाज सेवा, स्कूल कॉलेज की पढ़ाई तक में मददगार बना. एप्स के तौर पर कई नए उत्पाद आए, जिनके जरिए सरकारी बैठकों से लेकर, वेबिनार, कांफ्रेंस और यहां तक की दुख सुख को साझा करने के कार्यक्रम भी किये गए.

    इन सब में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म की भी अहम भूमिका रही, चाहे आपसी बातचीत का ऑडियो-वीडियो प्रसारित करना हो या उसकी पूर्व सूचना या रिकार्डेड संस्करण बाद में लोगों तक पहुंचाना हो. कोई शक नहीं कि मानव जाति के लिए खड़े हुए कोरोना के संकटकाल में सोशल मीडिया एक अवतार की तरह भी सामने आया और इसकी लोकप्रियता भी बड़ी. इस दौरान ऐसे बहुत से लोगों को सोशल मीडिया की खूबियां पता चलीं, जिन्होंने पहले इसका इस्तेमाल नहीं किया. यानि साथ ही इसके उपभोक्ताओं की तादाद भी ज़बरदस्त तरीके से बढ़ी. लेकिन इन तमाम खूबियों के कारण ही सोशल मीडिया तरह-तरह के खतरे भी बढ़ाता गया. भारतीय पर्यावरण में तो ये परिलक्षित हो गया है.

    दुनियाभर के देशों में भारत सबसे ज्यादा विविधता और विभिन्नताओं वाला देश है. अलग-अलग तरह के खान पान, रहन सहन, पहनावे, परम्पराएं, भाषाएं, बोलियां तो हैं ही, हर तरह की भौगोलिक परिस्थितियों में भी यहां की आबादी रहती है. ऐसे में सबकी ज़रूरतें भी अलग-अलग होना स्वाभाविक है. उस पर सैंकड़ों साल की गुलामी का असर, पूजा पाठ के अलग अलग तौर तरीके, विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े दलों का होना विचारों में टकराव और मत भेद तो पैदा करेगा ही. अभिव्यक्ति समेत विभिन्न प्रकार की आजादी के मौलिक अधिकारों का मिलना अक्सर इस टकराव को बढ़ावा भी देता है. लोग और विभिन्न संस्थाएं इसका बेजा इस्तेमाल भी करती हैं.

     

    सोशल मीडिया के ज़रिए कही जाने वाली कई बातें और उनकी प्रतिक्रिया ‘अपराध’ के तत्व से भरपूर भी होती हैं, लिहाज़ा ऐसे मामलों में पुलिस या कानून का पालन कराने वाली विभिन्न एजेंसियों की भूमिका सामने आती है. सोशल मीडिया के कंटेंट को लेकर आए दिन पुलिस में केस दर्ज होते हैं. यही नहीं इसमें भी पुलिस एजेंसियों पर पक्षपात या भेदभाव वाला रवैया अख्तियार करने को लेकर विवाद होने लगे हैं. ये सब सामाजिक सद्भाव, भाई चारे और आज़ाद लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. कई अपरिपक्व टीवी चैनलों ने उत्तेजना फैलाकर हालात और बिगाड़े हैं. इसी साल पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव और उसके बाद धार्मिक अवसरों पर हुई घटानाओं की जानकारी समाज में बड़ी कड़वाहट का एक बड़ा कारण सोशल मीडिया ही है. कर्नाटक, यूपी, पंजाब से लेकर राजधानी दिल्ली समेत कई स्थानों पर इस सिलसिले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है. ये सिलसिला अब भी चल रहा है. इन हालात ने पुलिस और अदालतों पर भी काम का बोझ बढ़ाया है.

    दुनियाभर में सबसे अधिक आबादी वाले देशों की फेहरिस्त में भारत नंबर 2 पर है, लेकिन सोशल मीडिया के मामले में सबसे आगे है. अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक के ही अकेले यहां पर 40 करोड़ अकाउंट हैं, वहीं वाट्सऐप के तो तकरीबन 53 करोड़ खाते हैं, जबकि एक अन्य ऐप ट्वीटर के भारत में तकरीबन 23 करोड़ से ज्यादा अकाउंट हैं. भारत से खूब धन कमा रही इन ऐप्स की विश्वसनियता और अन्य गड़बड़ियों के कारण विवाद भी होते रहते हैं. कई देशों ने तो अपने यहां विभिन्न कारणों से ऐसी ऐप्स पर रोक भी लगा रखी है. गूगल की 2004 में लांच हुई ऑरकुट को लेकर कई केस और विवाद हुए. इस सोशल नेटवर्किंग सर्विस को खुद गूगल ने 10 साल में बंद कर दिया था. भारत समेत कई देशों ने भी बीच-बीच में इन पर रोक लगाई और हटाई है.

    ये तो व्यवस्था पर प्रभाव की बात है, लेकिन सोशल मीडिया का असर और भी खतरनाक हालात पैदा कर रहा है. हर उम्र , तबके और पेशे से जुड़ा आम व्यक्ति प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सोशल मीडिया के असर में इस कदर आ रहा है कि इसने उसके रहन सहन, खान पान के तरीके से लेकर दूसरों के प्रति सोच तो बदली ही, अपने प्रति भी अजीब तरीके सोचने लगा है. अकेले होने पर ही किसी भी सार्वजनिक स्थल पर भी पहली फुर्सत में हर शख्स अपने मोबाइल फोन की स्क्रीन पर उंगलियां चलाते हुए दिखाई दे जाएगा. नहीं तो ईयर फोन या हेड फोन लगाए मोबाइल की स्क्रीन पर वीडियो में आंखें गड़ाए देखा जा सकता है. ये ज़्यादातर सोशल मीडिया पर चैट करते हुए, टेक्स्ट पढ़ रहे या वीडियो देख रहे मिलेंगे. रिश्तेदारों, दोस्तों के साथ सुख दुख साझा करने के लिए सामूहिक तौर पर भी मिलेंगे तो वहां भी नज़रें और उंगलियां मोबाइल स्क्रीन पर होंगी.

    शादी, समारोह, मेले या कहीं सैर सपाटे पर जाना हो तो ज़्यादातर की पहली प्राथमिकता मोबाइल से तस्वीरें, सेल्फी खींचना होती है. ताकि इस स्थान पर अपनी उपस्थिति को सोशल मीडिया पर दर्ज करा सकें. सोशल मीडिया पर अपनी तरफ ध्यान खींचने की इस कवायद में उस शख्स का उस स्थान पर आने का महत्व ही खत्म हो जाता है. इसका उसे अहसास भी नहीं होता. कुछ तो कार्यक्रमों में आते ही वीआईपी के साथ फोटो या सेल्फी लेने की फिराक में ही रहते हैं. और तो और धार्मिक स्थलों में पूजा पाठ से लेकर अंतिम संस्कार जैसे मौकों पर भी लोग बाग सोशल मीडिया के मोहपाश से अलग नहीं हो पाते. कुल मिलाकर ये आदत एक गंभीर खतरनाक नशा बन चुकी है. मां बाप अपने उस उम्र के नाबालिग बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट खोल कर देने लगे हैं, जिनमें अच्छे-बुरे की तो क्या, अपने बारे में भी ठीक से सोच पाने की ज़हनी ताकत पैदा नहीं हुई है. सोशल मीडिया पर आने वाला खराब कंटेंट इन बच्चों में स्वाभाविक रूप से उनकी संवेदनाओं को प्रभावित करके विकार भी बढ़ा रहा है.

     

    कुल मिलाकर ये भी कहा जा सकता है कि शो ऑफ़ यानि दिखावे की संस्कृति को बढ़ावा देने वाले सोशल मीडिया का असर ऐसे नशे में तब्दील हो रहा है, जिसकी चपेट में फंसते लोगों की तादाद लगातार बढ़ रही है. इस नशे का मज़ा लेने वाला शख्स इसे उन लोगों तक भी पहुंचा देता है, जिनको भले ही उसकी ज़रूरत न हो. कंटेंट शेयर करने वाला ये भी नहीं सोचता कि जो टेक्स्ट या वीडियो वो औरों के साथ साझा कर रहा है, वो सही भी है या नहीं. न ही ज्यादातर लोग उसके पीछे के तर्क का आंकलन कर पाते हैं. लोगों की इसी प्रवृत्ति का फायदा न सिर्फ विज्ञापन बनाने वाले उठाते हैं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक विचारधारा और पूजा पद्धति के विभिन्न तरीकों को धर्म मानने वाले लोग भी उठाते हैं. अब तो अपनी सोच को ही सही और सर्वश्रेष्ठ समझने वाले ऐसे लोगों के समूह अपने हिसाब से कंटेंट बनाने और बनवाने लगे हैं. इसके लिए बाकायदा उन्होंने टीमें बना रखी हैं. अपनी सोच दूसरों के जहन में ठूंसने के लिए लोगों को वेतन और भारी भरकम फीस देकर सेवा में रखा जाता है. यानि लोगों की सोचने समझने की ताकत को प्रदूषित और क्षीण करना ही नहीं इनका मकसद है ताकि अपने हित साधने में वो इसका इस्तेमाल कर सकें.

  • माइक्रो रोबोट दिमाग में पहुंचकर मिर्गी, स्ट्रोक जैसे बिमारी का करेगा इलाज…

    माइक्रो रोबोट दिमाग में पहुंचकर मिर्गी, स्ट्रोक जैसे बिमारी का करेगा इलाज…

    कैलिफोर्निया. कैलिफोर्निया के स्टार्टअप बायोनॉट लैब्स ने स्वास्थ्य परीक्षण के लिए एक माइक्रो रोबोट बनाया है, जो मानव मस्तिष्क में पहुंच कर दुर्लभ बीमारी का इलाज कर सकेगा. इस परीक्षण का ट्रायल अभी चल रहा है यदि सफल रहा तो चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया अविष्कार साबित होगा.

    माइक्रो रोबोट कैसे पहुंचेगा दिमाग में?

    बायोनॉट लैब्स के अनुसार, इंजेक्शन के माध्यम से माइक्रो रोबोट को मानव शरीर में पहुंचाया जाएगा. इस रोबोट को जर्मनी के प्रतिष्ठित मैक्स प्लैंक अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की मदद से नियंत्रित किया जाएगा. मस्तिष्क के बाहर रखी एक चुंबकीय कॉइल व कम्प्यूटर मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से में रोबोट को संचालित करेंगे. बता दें कि रोबोट को उपचार के लिए शरीर में प्रवेश कराने का विचार नया नहीं है.

    बायोनॉट लैब्स के सह-संस्थापक और सीईओ माइकल शापिगेलमाकर के मुताबिक इसहाक असिमोव की एक किताब और फैंटास्टिक वॉयज नामक फिल्म में वैज्ञानिकों का एक दल रक्त के थक्के का इलाज करने के लिए मस्तिष्क में छोटे से अंतरिक्ष यान को भेजते हैं.

    Searching for micro Robot s, it will now be easier to deliver medicines to special places of the body.

    कई बीमारियों पर परीक्षण की अनुमति

    यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने बच्चों में पाई जाने वाली दुर्लभ बीमारी डैंडी-वाकर सिंड्रोम के उपचार के लिए परीक्षण को अनुमति दे दी है. इस बीमारी में गोल्फ की गेंद के आकार के सिस्ट का अनुभव कर सकते हैं. इससे मस्तिष्क पर दबाव बढ़ता है और न्यूरो की कई समस्याएं पैदा होती हैं, इसके साथ ही ग्लिओमास, ब्रेन ट्यूमर के उपचार के लिए परीक्षण को स्वीकृति दे दी है. इसके साथ ही मिर्गी, स्ट्रोक जैसी बीमारियों में भी यह प्रयोग मदद कर सकता है.

    जानवरों पर ट्रायल सफल

    सीईओ शापिगेलमाकर कहते हैं कि हम रोबोट का परीक्षण भेड़ और सूअर पर कर चुके हैं, यह परीक्षण पूरी तरह सुरक्षित पाए गए हैं, उन्होंने कहा कि अभी तक मस्तिष्क शल्य चिकित्सा सीधी रेखाओं तक सीमित है, इस प्रयोग के बाद आप मस्तिष्क में हर जगह पहुंचने में कामयाब होंगे.