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  • छत्तीसगढ़ में ई-चालान का भुगतान केवल अधिकृत पोर्टल से,जाने डिटेल…

    छत्तीसगढ़ में ई-चालान का भुगतान केवल अधिकृत पोर्टल से,जाने डिटेल…

    रायपुर। परिवहन विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने वाहन से संबंधित किसी भी आरटीओ ई- चालान का भुगतान केवल परिवहन विभाग की अधिकृत वेबसाइट https://echallan.parivahan.gov.in के माध्यम से ही करें।

    परिवहन विभाग ने बताया है कि हाल ही में कुछ धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं, जिनमें लोगों को नकली संदेश या मेल भेजकर चालान राशि जमा कराने का प्रयास किया गया है। ऐसे प्रकरणों से बचने के लिए नागरिक किसी भी अनधिकृत वेबसाइट या लिंक पर भुगतान न करें।

    अपने वास्तविक चालान की जानकारी प्राप्त करने के लिए वाहन मालिक विभागीय वेबसाइट पर जाकर पे -आन लाइन विकल्प का चयन करें। वाहन नंबर और चेसिस नंबर/इंजन नंबर के अंतिम चार अंक डालने पर चालान से संबंधित संपूर्ण विवरण प्राप्त किया जा सकता है। इसके बाद नागरिक सीधे ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं।

    परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पुलिस एवं परिवहन विभाग द्वारा जारी सभी ई-चालान केवल विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ही अपलोड किए जाते हैं। किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या एप से प्राप्त लिंक पर क्लिक न करें और न ही किसी को ऑनलाइन भुगतान करें।

    यदि किसी प्रकार की शिकायत हो तो नागरिक निकटतम पुलिस थाना या परिवहन विभाग में तत्काल शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

  • देश के 47% मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले, BJP के 136, CM-पीएम का पद छीनने वाले बिल के बीच आई ADR Report ने चौंकाया…

    देश के 47% मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले, BJP के 136, CM-पीएम का पद छीनने वाले बिल के बीच आई ADR Report ने चौंकाया…

    एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताजा रिपोर्ट ने भारतीय राजनीति में आपराधिक मामलों की गंभीर स्थिति को उजागर किया है. देशभर के 643 मंत्रियों में से 302 (47%) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जिनमें 174 पर हत्या, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं. इस रिपोर्ट में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों की स्थिति भी सामने आई है, जो राजनीतिक तंत्र में जवाबदेही और नैतिकता पर सवाल खड़े करती है.

    यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार ने गंभीर अपराधों में हिरासत में रहने वाले पीएम, सीएम और मंत्रियों को पद से हटाने वाले विधेयकों को पेश किया है. इसके अलावा, मंत्रियों की ₹23,929 करोड़ की कुल संपत्ति और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों ने भी सुर्खियां बटोरी हैं.

    47% मंत्रियों पर आपराधिक मामले
    ADR ने 27 राज्य विधानसभाओं, तीन केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के 643 मंत्रियों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया. रिपोर्ट के मुताबिक, 302 मंत्रियों (47%) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जिनमें से 174 (27%) पर हत्या, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर आरोप हैं. केंद्र सरकार के 72 मंत्रियों में से 29 (40%) ने भी आपराधिक मामले होने की बात स्वीकारी है.

    बीजेपी के 136 मंत्रियों पर मामले
    पार्टी-वार आंकड़ों में बीजेपी के 336 मंत्रियों में से 136 (40%) ने आपराधिक मामले घोषित किए, जिनमें 88 (26%) पर गंभीर आरोप हैं. कांग्रेस के 61 मंत्रियों में से 45 (74%) पर आपराधिक मामले हैं, जिनमें 18 (30%) गंभीर हैं. तेलुगु देशम पार्टी (TDP) में 23 में से 22 मंत्रियों (96%) पर मामले हैं, जबकि DMK के 31 में से 27 (87%) और AAP के 16 में से 11 (69%) मंत्रियों पर भी केस दर्ज हैं. TMC के 40 में से 13 मंत्रियों (33%) पर आपराधिक मामले हैं.

    CM-PM पद हटाने वाले बिल पर विवाद
    रिपोर्ट का समय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केंद्र सरकार द्वारा 20 अगस्त को लोकसभा में पेश किए गए तीन विधेयकों के बाद आई है. ये विधेयक गंभीर अपराधों (5 साल या अधिक सजा वाले) में 30 दिनों तक हिरासत में रहने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान करते हैं. विपक्ष ने इसे ‘दमनकारी’ और गैर-बीजेपी शासित राज्यों को अस्थिर करने की कोशिश करार दिया है, जबकि सरकार इसे राजनीति के अपराधीकरण को रोकने का कदम बता रही है. इन बिलों को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया है.

    अरबपतियों से लेकर मामूली संपत्ति तक
    रिपोर्ट में मंत्रियों की संपत्ति का भी खुलासा हुआ है. कुल 23,929 करोड़ रुपये की घोषित संपत्ति के साथ औसतन प्रति मंत्री की संपत्ति 37.21 करोड़ रुपये है. TDP के डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी (गुंटूर सांसद) 5,705 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सबसे अमीर मंत्री हैं, इसके बाद कर्नाटक के कांग्रेस नेता डी.के. शिवकुमार (1,413 करोड़ रुपये) और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू (931 करोड़ रुपये) हैं. दूसरी ओर, त्रिपुरा के सुक्ला चरण नोआटिया ने मात्र 2 लाख रुपये और पश्चिम बंगाल की बीरबाहा हंसदा ने 3 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की है.

    राज्यों में आपराधिक मामलों का वितरण
    11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और पुडुचेरी) में 60% से अधिक मंत्रियों पर आपराधिक मामले हैं. वहीं, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, नगालैंड और उत्तराखंड में कोई भी मंत्री आपराधिक मामले में शामिल नहीं है.

  • DMF महाघोटाला!…कागजों में बने हॉस्टल, जमीन पर घोटाला ! .. 400 करोड़ डकार गए अफसर-ठेकेदार..FIR दर्ज…

    DMF महाघोटाला!…कागजों में बने हॉस्टल, जमीन पर घोटाला ! .. 400 करोड़ डकार गए अफसर-ठेकेदार..FIR दर्ज…

    कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में खनिज न्यास मद (DMF) फंड से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। करीब 400 करोड़ रुपये के हेरफेर के इस मामले में आदिवासी विकास विभाग की पूर्व सहायक आयुक्त माया वारियर, तत्कालीन सहायक अभियंता, उप अभियंता, डाटा एंट्री ऑपरेटर और चार ठेकेदारों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। माया वारियर फिलहाल न्यायिक रिमांड में जेल भेजी जा चुकी हैं, जबकि बाकी आरोपी भी जांच के घेरे में हैं।

    कांग्रेस शासनकाल में हुआ खेल

    जांच रिपोर्ट के मुताबिक यह घोटाला कांग्रेस शासनकाल में हुआ, जब उस समय जिले की कलेक्टर रानू साहू थीं। आरोप है कि उनके संरक्षण में माया वारियर को आदिवासी विकास विभाग में सहायक आयुक्त पद पर पदस्थ किया गया और यहीं से फर्जी कार्य आदेश और भुगतान का खेल शुरू हुआ।

    छात्रावास और आश्रम मरम्मत में गड़बड़ी

    केंद्र  सरकार ने 2021-22 में जर्जर छात्रावासों और आश्रमों की मरम्मत के लिए राशि स्वीकृत की थी। इसके बावजूद उन्हीं कार्यों के लिए DMF फंड से भी समानांतर राशि जारी की गई।

    80 लाख रुपये के कार्यों में से चार कार्यों की शुरुआत तक नहीं हुई लेकिन पूरा भुगतान ठेकेदारों को कर दिया गया। जिन कार्यों को कागजों पर पूरा दिखाया गया, वे बेहद निम्न गुणवत्ता के निकले।अधिकारियों ने बिना भौतिक सत्यापन किए कमीशन लेकर भुगतान जारी कर दिया।

    34 कार्य, 4 ठेकेदार – करोड़ों की बंदरबांट

    जांच में यह खुलासा हुआ कि 34 ठेका कार्यों का आवंटन सिर्फ चार कंपनियों को किया गया ।मेसर्स श्री साई ट्रेडर्स को 9 कार्य का 73.28 लाख का ठेका मिला।।मेसर्स श्री साई कृपा बिल्डर्स को 9 कार्य का 1.14 करोड़, मेसर्स एस.एस.ए. कंस्ट्रक्शन को 6 कार्य का 49 लाख और मेसर्स बालाजी इंफ्रास्ट्रक्चर, कटघोरा को 10 कार्य 1.47 करोड़ का काम दिया गया।

    लेकिन विभागीय कार्यालय में इन निविदाओं और भुगतानों से जुड़े एक भी दस्तावेज मौजूद नहीं मिला। भौतिक सत्यापन में करीब 80 लाख रुपये के कार्य सिर्फ कागजों में पूरे दिखाए गए।

    डाटा एंट्री ऑपरेटर भी शामिल

    ऑनलाइन रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर झूठे प्रमाणपत्र तैयार किए गए। विभागीय इंजीनियरों और डाटा एंट्री ऑपरेटर की मिलीभगत से फर्जी बिल और वाउचर बनाकर भुगतान का रास्ता साफ किया गया।

    पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

    कलेक्टर के निर्देश पर सिविल लाइन रामपुर थाना में सभी दोषियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितता और  सरकारी दस्तावेज गायब करने का केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही और नाम सामने आ सकते हैं।

    राजनीति

    घोटाले को लेकर राजनीति गरमा गई है। विपक्ष का आरोप है कि इतने बड़े पैमाने पर गबन बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव ही नहीं है। वहीं मौजूदा जिला प्रशासन का कहना है कि –“चाहे अधिकारी हो या ठेकेदार, किसी को छोड़ा नहीं जाएगा। हर दोषी पर कठोर कार्रवाई होगी।”

     400 करोड़ से भी ज्यादा का घोटाला

    अब तक जांच में 3.83 करोड़ की अनियमितता दस्तावेजों सहित साबित हो चुकी है। लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि पूरे जिले में करीब 400 करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी सामने आ सकती है। यह छत्तीसगढ़ में DMF फंड से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है।

  •  बृजमोहन के बाद अब विजय बघेल ने की विशेषाधिकार हनन की शिकायत, बोले- अधिकारी फोन तक नहीं उठाते…

     बृजमोहन के बाद अब विजय बघेल ने की विशेषाधिकार हनन की शिकायत, बोले- अधिकारी फोन तक नहीं उठाते…

    रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल के बाद अब दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल ने विशेषाधिकार हनन की शिकायत की है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राज्य के अधिकारी अब जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने लगे हैं? लगातार दूसरा मामला सामने आने से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। दुर्ग सांसद विजय बघेल ने भिलाई नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त राजीव कुमार पांडेय और भिलाई-चरोदा नगर निगम के आयुक्त डीएस राजपूत के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विशेषाधिकार हनन की गंभीर शिकायत दर्ज कराई है।

    Chhattisgarh News: बृजमोहन अग्रवाल प्रकरण से गरमाया मामला

    इससे पहले रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और आईएएस अमित कटारिया का विवाद का मामला सामने आया। बताया जाता है कि सांसद अग्रवाल ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव कटारिया पर फोन पर आपत्तिजनक व्यवहार करने की शिकायत लोकसभा अध्यक्ष से की है। लोकसभा सचिवालय भी इसकी जानकारी ले रहा है। इधर आज दुर्ग सांसद का आरोप सामने आने से राजनीतिक माहौल फिर से गरमा गया है। सांसद बघेल का आरोप है कि अधिकारी न केवल उनके फोन का जवाब नहीं देते थे, बल्कि जनहित से जुड़े मामलों में अपेक्षित सहयोग और जानकारी देने से भी कतराते थे। इस शिकायत पर लोकसभा सचिवालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य शासन और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब कर लिया है।

    Chhattisgarh IAS controversy

    टकराव की ओर बढ़ती अफसरशाही

    जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते अधिकारियों की इस कार्यशैली पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह प्रशासनिक और राजनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा टकराव का रूप ले सकता है। बहरहाल, लोकसभा सचिवालय द्वारा जवाब मांगे जाने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इस पर क्या कार्रवाई करता है।

    पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने बोला हमला

    सांसद और आईएएस विवाद में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ की कमान दिल्ली और नागपुर के हाथ में है। उन्होंने कहा कि चुने हुए जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल संसदीय मर्यादा के खिलाफ है, बल्कि उन मतदाताओं का भी अपमान है उन्होंने उन्हें चुनकर संसद भेजा है।

    बघेल बोले- जनप्रतिनिधि के साथ ऐसा व्यवहार मतदाताओं का अपमान

    बघेल ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि बृजमोहन अग्रवाल से वैचारिक असहमतियां हो सकती हैं. लेकिन वे एक चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं। देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा के सदस्य हैं। रायपुर राजधानी के सांसद हैं। उनके साथ एक प्रशासनिक अधिकारी का इस तरह का बर्ताव दर्शाता है कि प्रदेश की कमान दिल्ली और नागपुर के हाथ में हैं। इसलिए किसी अधिकारी को जनता के काम और जनप्रतिनिधि की मांग से कोई फर्क नहीं पड़ता। वे बस दिल्ली और नागपुर को खुश करके अपनी कुर्सी पर बने हुए हैं।

  • ‘मेरी मौत की खबर बढ़ा-चढ़ाकर बताई’, App स्टोर से कुछ देर तक हटा टेलीग्राम तो कंपनी ने ऐपल पर कसा तंज…

    ‘मेरी मौत की खबर बढ़ा-चढ़ाकर बताई’, App स्टोर से कुछ देर तक हटा टेलीग्राम तो कंपनी ने ऐपल पर कसा तंज…

    Telegram: ऐपल (Apple) के ऐप स्टोर से अचानक गायब होने के कुछ घंटों बाद टेलीग्राम (Telegram) की वापसी हो गई है। टेलीग्राम ने ऐपल पर तंज कसते हुए एलन मस्क के प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया है। इस मामले पर सफाई देते हुए ऐपल ने बताया कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा आपत्तिजनक कंटेंट मिलने के कारण ऐप को हटाया गया था। डेवलपर द्वारा उस कंटेंट को हटाने और जिम्मेदार यूजर को बैन करने के बाद ऐप को फिर से लाइव कर दिया गया है। 

    Telegram

    ​Telegram Vs Apple: लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को कुछ समय के लिए ऐपल ऐप स्टोर से हटा दिया गया था, लेकिन कुछ समय बाद ही इसे वापस फिर से ऐप स्टोर पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध करा दिया गया।ऐपल के ऐप स्टोर पर फिर से वापसी करने के बाद टेलीग्राम ने ऐपल पर तंज कसते हुए एलन मस्क के एक्स अकाउंट पर एक अलग अंदाज में ट्वीट किया। कंपनी ने अपने ट्वीट में Apple पर तंज कसते हुए कहा मेरे मरने की खबरें बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई हैं। पोस्ट में एक सेब (apple) का इमोजी भी थी, जिसका इशारा iPhone बनाने वाली कंपनी की ओर था।

    अब टेलीग्राम ऐपल ऐप स्टोर पर डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध है। इससे पहले, टेलीग्राम के ऐपल ऐप स्टोर पेज पर एक मैसेज दिख रहा था। इस मैसेज में लिखा था कि आप जिस पेज को ढूंढ रहे हैं, वह नहीं मिल रहा है। बाद में टेलीग्राम ने कन्फर्म किया कि ऐप को रिस्टोर कर दिया गया है, लेकिन ऐप के पहले उपलब्ध ना होने की वजह के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।

    ऐपल ने बताया कारण

    ऐपल ने बताया कारण
    • ऐप का इस्तेमाल फिर से चालू होने के लगभग 20 मिनट बाद ऐपल (Apple) की तरफ से आधिकारिक बयान आया।
    • ऐपल ने कहा कि कुछ समय के लिए टेलीग्राम को ऐप स्टोर से हटा दिया था, क्योंकि हमारी समीक्षा में ऐसा कंटेंट मिला जो बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मटीरियल पर लगी हमारी सख्त रोक का उल्लंघन करता था। डेवलपर द्वारा उस कंटेंट को तुरंत हटाने और उसे पोस्ट करने वाले यूजर पर बैन लगाने के बाद, ऐप को वापस उपलब्ध कर दिया गया।
    • बता दें सोमवार शाम तक, कई इलाकों में कुछ यूजर्स के लिए iOS और iPadOS ऐप स्टोर पर टेलीग्राम सर्च करने पर मैसेजिंग ऐप नहीं मिल रहा था।

    टेलीग्राम फाउंडर पर लगा आरोप

    टेलीग्राम फाउंडर पर लगा आरोप
    • यह कुछ समय के लिए गायब होने की घटना तब हुई जब टेलीग्राम और उसके अरबपति फाउंडर और चीफ एग्जीक्यूटिव, पावेल डुरोव रूसी और पश्चिमी अधिकारियों की जांच के दायरे में हैं।

    • डुरोव खुद को फ्री स्पीच का समर्थक बताते रहे हैं, लेकिन इस वजह से वे कई बार क्रेमलिन और पश्चिमी अधिकारियों के साथ मुश्किलों में घिरे हैं।
    • पिछले हफ्ते, रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (FSB) ने डुरोव पर आतंकवादी गतिविधियों में मदद करने का आरोप लगाया और कहा कि वह उनका नाम इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में शामिल कर रही है।

    पहले भी कई बार लग चुका है बैन

    पहले भी कई बार लग चुका है बैन
    • ​इससे पहले भी फरवरी 2018 में, Apple ने ऐप में “अनुचित कंटेंट” पाए जाने के बाद कुछ समय के लिए App Store से हटा दिया था। उस समय, Telegram के फाउंडर पावेल डुरोव ने कहा था कि Apple ने कंपनी को उस कंटेंट के बारे में बताया था, जिसके बाद टेलीग्राम ने ऐप को बहाल करने से पहले अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए।
    • 2023 में, स्कूलों में हिंसा को बढ़ावा देने के आरोपी ग्रुप्स के बारे में अधिकारियों को जानकारी ना देने के कारण ब्राजील में Telegram पर कुछ समय के लिए बैन लगा दिया गया था।
    • इसके अलावा, 2024 में, देश के इंटरनेट रेगुलेटर से आदेश मिलने के बाद Apple ने WhatsApp, Threads और Signal के साथ-साथ Telegram को भी चीनी App Store से हटा दिया था। यह बैन अभी भी लागू है।
  • एनालॉग पनीर पर रोक की जांच अधूरी: छत्तीसगढ़ के 11 जिलों में नहीं हैं फूड सेफ्टी अफसर, सैंपलिंग भी महीनों से बंद…

    एनालॉग पनीर पर रोक की जांच अधूरी: छत्तीसगढ़ के 11 जिलों में नहीं हैं फूड सेफ्टी अफसर, सैंपलिंग भी महीनों से बंद…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने मिलावटी और वनस्पति तेल से बनने वाले एनालॉग पनीर (Analog Paneer) की बिक्री पर सख्ती के निर्देश दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जांच व्यवस्था गंभीर संकट से जूझ रही है। प्रदेश के 11 जिलों में एक भी फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) तैनात नहीं है। ऐसे में बाजार में बिक रहे एनालॉग पनीर की जांच, सैंपलिंग और कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    पड़ताल के अनुसार, जिन जिलों में फूड सेफ्टी ऑफिसर नहीं हैं, वहां पिछले 6 से 7 महीनों से खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग लगभग पूरी तरह बंद है। इन जिलों की जिम्मेदारी दूसरे जिलों के अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार के रूप में दी गई है, लेकिन लंबी दूरी और सीमित संसाधनों के कारण नियमित जांच नहीं हो पा रही है।

    इन 11 जिलों में नहीं है एक भी फूड सेफ्टी ऑफिसर
    सुकमा, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, बीजापुर, नारायणपुर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी), कोरिया, बलरामपुर, सूरजपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और सक्ती।

    सरकार ने क्या कहा?
    खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के संयुक्त आयुक्त दीपक अग्रवाल के अनुसार, रिक्त पदों को जल्द भरा जाएगा और जांच की प्रक्रिया पहले से ही शुरू कर दी गई है। विभाग का कहना है कि बाजार में नकली या एनालॉग पनीर बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    कार्रवाई का प्लान
    सरकार ने एनालॉग पनीर पर नियंत्रण के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें—

    एनालॉग पनीर बनाने वाली 12 लाइसेंसधारी इकाइयों के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे।
    फूड सेफ्टी ऑफिसर होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों में जाकर सैंपल लेकर जांच करेंगे।
    असली पनीर के नाम पर एनालॉग पनीर बेचने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज की जाएगी।
    बाजार में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा।


    रोज 5 करोड़ रुपये का कारोबार
    रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर का रोजाना लगभग 5 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। राज्य में बनी सामग्री की आपूर्ति ओडिशा समेत अन्य राज्यों में भी की जाती है। कम कीमत होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ी है, जिससे मिलावट का खतरा भी बढ़ गया है।

    स्वास्थ्य के लिए क्यों खतरनाक?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, एनालॉग पनीर में दूध की जगह वनस्पति वसा और अन्य कृत्रिम तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है। लगातार सेवन करने से—

    पोषण और प्रोटीन की गुणवत्ता कम मिलती है।
    हृदय रोग और मोटापे का खतरा बढ़ सकता है।
    पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
    बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
    सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं को असली और एनालॉग पनीर के बीच स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। यदि कोई व्यापारी गलत लेबलिंग या असली पनीर बताकर एनालॉग पनीर बेचता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • IPS रतनलाल डांगी मामले में High Court’ पहुंची पीड़िता, IAS अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग…

    IPS रतनलाल डांगी मामले में High Court’ पहुंची पीड़िता, IAS अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग…

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी से जुड़े मामले में नया मोड़ आ गया है। मामले की पीड़िता ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है। याचिका के माध्यम से पीड़िता ने मांग की है कि मामले की जांच वर्तमान में नियुक्त आईपीएस अधिकारियों के बजाय किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से कराई जाए, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके।

    पीड़िता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय ने हाईकोर्ट में यह याचिका प्रस्तुत की है। याचिका में जांच की वैधानिकता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

    जांच के अधिकार पर उठाए सवाल
    रिट याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में जिन आईपीएस अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हें इस मामले की जांच करने का वैधानिक अधिकार नहीं है। ऐसे में उनकी ओर से की जा रही जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।


    पीड़िता का कहना है कि संवेदनशील और चर्चित मामलों में जांच ऐसे अधिकारी से कराई जानी चाहिए, जिस पर किसी प्रकार का हितों का टकराव या प्रशासनिक प्रभाव न हो।

    वरिष्ठ IAS अधिकारी से जांच की मांग
    याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि मामले की जांच किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी या स्वतंत्र सक्षम प्राधिकारी को सौंपी जाए। पीड़िता का तर्क है कि इससे जांच प्रक्रिया पारदर्शी होगी और सभी पक्षों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि निष्पक्ष जांच ही न्यायिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने का सबसे महत्वपूर्ण आधार है।

    हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की अपील
    पीड़िता ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि वह पूरे मामले में हस्तक्षेप करते हुए जांच एजेंसी और जांच अधिकारी को लेकर उचित दिशा-निर्देश जारी करे। याचिका में यह भी मांग की गई है कि जांच ऐसी व्यवस्था के तहत कराई जाए, जिस पर किसी प्रकार का संदेह न हो।

    माना जा रहा है कि हाईकोर्ट प्रारंभिक सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब भी मांग सकता है।

  • जो करना है कर लो’ विवाद पर सियासत तेज: भूपेश बोले- सांसद का नहीं, जनादेश का अपमान; कांग्रेस ने कहा- छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक अराजकता हावी…

    जो करना है कर लो’ विवाद पर सियासत तेज: भूपेश बोले- सांसद का नहीं, जनादेश का अपमान; कांग्रेस ने कहा- छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक अराजकता हावी…

    रायपुर। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के बीच कथित ‘जो करना है कर लो’ टिप्पणी को लेकर छिड़ा विवाद अब और गहरा गया है। कांग्रेस (Congress) और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी चुने हुए जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार केवल सांसद का नहीं, बल्कि उन मतदाताओं का भी अपमान है जिन्होंने उन्हें चुना है। वहीं कांग्रेस ने इसे प्रदेश में “प्रशासनिक अराजकता” का उदाहरण बताते हुए राज्य सरकार पर नौकरशाही पर नियंत्रण खोने का आरोप लगाया है।

    भूपेश बघेल बोले- यह चुने हुए जनप्रतिनिधि का अपमान
    पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि उनकी बृजमोहन अग्रवाल से वैचारिक असहमतियां हो सकती हैं, लेकिन वे जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं और देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा के सदस्य हैं।

    उन्होंने लिखा कि एक प्रशासनिक अधिकारी का इस तरह का व्यवहार यह दर्शाता है कि प्रदेश की कमान दिल्ली और नागपुर के हाथों में है। बघेल ने आरोप लगाया कि अधिकारियों को जनता के काम और जनप्रतिनिधियों की मांग से कोई फर्क नहीं पड़ता, वे केवल अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं।

    उन्होंने इसे उन सभी मतदाताओं का अपमान बताया जिन्होंने अपने प्रतिनिधि को चुनकर संसद भेजा है। साथ ही उन्होंने लिखा कि बृजमोहन अग्रवाल का राजनीतिक अनुभव लंबा है और उन्हें अधिकारियों से कैसे निपटना है, यह अच्छी तरह आता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सांसद अपने मतदाताओं को निराश नहीं करेंगे।

    कांग्रेस ने कहा- प्रदेश में प्रशासनिक अराजकता चरम पर
    भूपेश बघेल की प्रतिक्रिया के बाद प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने भी बयान जारी कर राज्य सरकार पर निशाना साधा।

    उन्होंने कहा कि यदि भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद बृजमोहन अग्रवाल को एक वरिष्ठ अधिकारी ‘जो करना है कर लो’ जैसी भाषा बोल सकता है तो आम जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

    शुक्ला ने कहा कि यह घटना बताती है कि प्रदेश में नौकरशाही पूरी तरह बेलगाम हो चुकी है और सरकार प्रशासन पर नियंत्रण खो चुकी है।

    ननकी राम और रवि भगत का भी जिक्र
    कांग्रेस का आरोप है कि राज्य के एक वरिष्ठ सचिव द्वारा सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ सांसद के साथ कथित तौर पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल सरकार की कमजोरी को उजागर करता है। पार्टी का कहना है कि सरकार में बैठे जनप्रतिनिधि अब अधिकारियों से सामान्य शिष्टाचार तक का पालन नहीं करा पा रहे हैं।

    कांग्रेस ने अपने आरोपों के समर्थन में हाल के कई घटनाक्रमों का उल्लेख किया। पार्टी ने कहा कि बेमेतरा में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्थाएं सामने आईं, जहां पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष को मंच से नाराजगी जाहिर करनी पड़ी। वहीं एक अन्य मामले में विधायक के सामने जनपद सीईओ द्वारा कथित तौर पर कार्यकर्ता को चुनौती देने की घटना का भी जिक्र किया गया।

    कांग्रेस ने यह भी कहा कि सुशासन तिहार के दौरान वरिष्ठ मंत्री द्वारा सरकारी अमले और पुलिस पर शराब बिक्री के आरोप लगाए गए थे, जबकि रायपुर में सांसद बृजमोहन अग्रवाल भी सार्वजनिक मंच से अधिकारियों पर अवैध शराब बिकवाने का आरोप लगा चुके हैं।

    सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा के वरिष्ठ नेता ननकी राम कंवर के धरना और मुख्यमंत्री को लिखे पत्र का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा के अपने नेता भी अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने पूर्व भाजयुमो अध्यक्ष रवि भगत के बयानों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भी बेलगाम नौकरशाही और मंत्रियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।

    कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर पड़ गई है और आम लोगों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

  • महानदी उफान पर: पुसौर और सरिया ब्लॉक के कई गांवों में घुसा पानी, सैकड़ों एकड़ खेत डूबे, सब्जी की खेती चौपट…

    महानदी उफान पर: पुसौर और सरिया ब्लॉक के कई गांवों में घुसा पानी, सैकड़ों एकड़ खेत डूबे, सब्जी की खेती चौपट…

    रायगढ़। प्रदेश में लगातार हो रही बारिश की वजह से महानदी ने भी रौद्र रूप धारण कर लिया है। इस वजह से रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लाक एवं सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के सरिया क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हुए। शुक्रवार को महानदी अपने तटबंध तोड़ते हुए दर्जन भर से अधिक गांवों में प्रवेश कर गई थी जिसकी वजह से सैकड़ों एकड़ खेत जलमग्न हो गये हैं। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट मोड में आते हुए ऐहितायातन तौर पर सतर्कता बरतने तटवर्ती गांव में मुनादी कराई गई।

    वहीं पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीम को सक्रिय किया गया था तथा राहत शिविरों की साफ सफाई कराकर प्रभावित लोगों को रूकने की व्यवस्था की गई थी। हालांकि बढ़ते जल स्तर को देखते हुए ओडि़सा के हीराकुंड डेम के गेट को खोला गया है जिससे रिहायशी इलाकों तक पानी नहीं पहुंच पाया और धीरे-धीरे महानदी का जल स्तर कम हो रहा है। वहीं खेतों के लबालब होने के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, खासकर सब्जी उत्पादक किसान अधिकांश तौर पर प्रभावित हुए है।

    प्रशासन द्वारा फसल नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। विगत तीन-चार दिनों से प्रदेश भर में हो रही बारिश के कारण सभी नदी-नाले उफान पर आ गये हैं। वहीं धमतरी के गंगरेल बांध में अधिक जलभराव होने के कारण डेम के गेट खोले गये हैं जिससे महानदी में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई। वहीं सहायक नदियों का भी भारी मात्रा में जल आने के कारण महानदी का जलस्तर काफी बढ़ गया। शुक्रवार की सुबह से ही जलस्तर बढऩे के कारण रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लाक के सूरजगढ़, पडिग़ांव, सिंघपुरी, चंघोरी, बाराडोली, टिनमिनीक्षेत्र तथा सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के सरिया क्षेत्र में परसामपुर, लिप्ति, रानीडीह, सुरसी, कोर्रा, पोरथ, ठेंगागुड़ी, नदीगांव, रतनपाली, छोटे नावापारा, बोरिदा, खपरापाली, रायपाली इत्यादि गांवों के सैकड़ों एकड़ खेत जलमग्न हो गये तथा नदी का पानी रिहायशी इलाकों में भी घुसने लगा था। पोरथ में नदी किनारे स्थित मंदिर पुरी तरह डुबान में आ गया था तो वहीं रानीडीह गांव में भी आंशिक रूप से रिहायशी क्षेत्र में पानी घुस गया था।

    वहीं सूरजगढ़ में भी महानदी का पानी गांव के कुछ घरों को अपनी चपेट में ले लिया था। नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण ग्रामीण जहां संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए रतजगा करने पर मजबूर हो गये थे, वहीं उनके खेतों में पानी भरने से हाने वाले नुकसान को लेकर भी उनके माथे पर चिंता की लकीर उभर आई थी। बताया जा रहा है कि पुसौर ब्लाक सहित सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के सरिया क्षेत्र में हजारों एकड़ खेत पानी से लबालब हो गये थे। वहीं लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट मोड पर था तथा बाढ़ की स्थिति से निपटने पूर्ण रूप से तैयारी कर ली गई थी।


    वहीं कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी व एसएसपी शशि मोहन सिंह ने भी प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया तथा राहत शिविरों में स्वच्छ पेयजल,भोजन व अन्य आवश्यक सामग्रियों की भरपूर तैयारी रखने के निर्देश अपने नोडल अधिकारियों को दिये। वहीं संभावित बाढ़ के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी अलर्ट रखा गया था।


    खोले गये हीराकुंड के 12 गेट
    महानदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए ओडि़शा सरकार के साथ सामंजस्य बनाते हुए जिला प्रशासन ने हीराकुंड डेम के गेट खोलने का निवेदन किया था। वहीं ओडि़शा सरकार की ओर से पहले हीराकुंड डेम के 10 गेट खोले गये थे परंतु इससे पर्याप्त राहत मिलती नजर नहीं आई जिसके बाद दो और गेट खोल कर उपरी हिस्से में पानी के दबाव को कम करने का प्रयास किया गया।


    इस प्रकार हीराकुंड डेम के कुल 12 गेट खोले गये जिससे काफी राहत मिली और पानी धीरे-धीरे कम होने लगा तब कहीं जाकर ग्रामीणों के साथ ही प्रशासन ने भी राहत की संास ली। वहीं माना जा रहा है कि उपरी कैचमेंट क्षेत्र मे ंइसी प्रकार अत्यधिक बारिश हुई तब हीराकुंड के और गेट खोलने की आवश्यकता पड़ सकती है।

    खेत हुए पानी से लबालब
    महानदी का पानी बढऩे से तटवर्ती गांवों के हजारों एकड़ खेत लबालब हो गये थे। खेतों में पानी भरने के कारण फसल को भारी नुकसान पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। सरिया और पुसौर क्षेत्र में इस बार कई किसान धान की फसल के बजाए गन्ने की खेती किये हैं ऐसे में उनकी खेती खराब होने की संभावना है। वहीं दुसरी ओर इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान साग सब्जी का भी उत्पादन करते हैं लेकिन बाढ़ ने उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई को खत्म कर दिया है।


    अधिकांश किसानों ने हाल ही में धान की फसल लगाई गई थी जिससे पौधे काफी छोटे हैं लिहाजा उन्हे बढऩे के लिए किसानों ने रासायनिक खाद का छिडक़ाव किया था। खेतों में पानी भरने की वजह से खाद भी बह गई लिहाजा जल्द ही बाढ़ का पानी नहीं उतरा तो उन्हे दोहरी मार का सामना करना पड़ सकता है। सरिया क्षेत्र के ग्राम लिप्ती, रानीडीह, नदीगांव इत्यादि गांव अधिक प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि हीराकुंड डेम के गेट खोले जाने के बाद जल स्तर कम हो रहा है, वहीं पुरी तरह से पानी खाली होने के बाद फसल के नुकसानी का आंकलन किया जायेगा।


    बाढ़ राहत के लिए प्रशासन ने की तैयारी
    महानदी में लगातार बढ़ते जल स्तर को देखते हुए संभावित बाढ़ से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने भी अपनी ओर से पूरी तैयारी कर रखी है। बताया जा रहा है कि यदि पानी रिहायशी इलाकोंं में घुसता है तो ग्रामीणों को राहत शिविरों में ठहराने की व्यवस्था प्रशासन द्वारा की गई है जिसमें पुसौर ब्लाक के पडिग़ांव, छोटे हरदी, बुनगा और टिनमिनी में राहत शिविर बनाये गये हैं जहां भोजन सहित अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की गई है।

    स्वास्थ्य टीम को भी रखा गया था अलर्ट
    रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लाक में दर्जन भर महानदी  के तटवर्ती गांव बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में हैं। जल स्तर अधिक बढऩे पर प्रशासन द्वारा यहां कि रहवासियों को सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी। वहीं माटर बोट, गोताखोरों की टीम के अलावा पुलिस, एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीम को सक्रिय किया गया था । इसके साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त कर स्थिति पर नजर रखी गई।

  • बिलासपुर-रतनपुर हाईवे पर पुल बीच से टूटा, बीच में फंसी चलती बस, अमरकंटक-जबलपुर मार्ग बंद, देखें डायवर्जन रूट…

    बिलासपुर-रतनपुर हाईवे पर पुल बीच से टूटा, बीच में फंसी चलती बस, अमरकंटक-जबलपुर मार्ग बंद, देखें डायवर्जन रूट…

    छत्तीसगढ़ में 2 अगस्त को बिलासपुर-रतनपुर-पेंड्रा रोड पर बना पुल अचानक 2 हिस्सों में टूट गया. इस दौरान पुल से गुजर रही एक यात्री बस वहीं फंस गई. घटना रविवार शाम 5 बजे की है. सभी यात्री सुरक्षित हैं. बस का अगला हिस्सा टूटे हुए स्लैब के किनारे अटक गया था, जिससे बस नदी में गिरने से बाल-बाल बच गई.

    बिलासपुर-रतनपुर हाईवे पर पुल बीच से टूटा, बीच में फंसी चलती बस
    जानकारी के मुताबिक, बांसाझाल स्थित यह पुल 35 साल पुराना था और जर्जर हालत में था, बारिश के बाद इसकी स्थिति और खराब हो गई थी. बिलासपुर-जबलपुर निर्माणाधीन नेशनल हाईवे-45 पर बना है. यह सड़क 510 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जा रही है. सड़क पर भी कई जगह दरारें हैं.

    पुल टूटने से पेंड्रा, गौरेला, अमरकंटक के साथ-साथ मध्य प्रदेश के जबलपुर, शहडोल और छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ से सीधा संपर्क टूट गया है. बिलासपुर-रतनपुर हाईवे पर आवागमन बंद करा दिया गया है. प्रशासन ने कई रूट डायवर्ट कर दिए हैं.