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एनालॉग पनीर पर रोक की जांच अधूरी: छत्तीसगढ़ के 11 जिलों में नहीं हैं फूड सेफ्टी अफसर, सैंपलिंग भी महीनों से बंद…

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने मिलावटी और वनस्पति तेल से बनने वाले एनालॉग पनीर (Analog Paneer) की बिक्री पर सख्ती के निर्देश दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जांच व्यवस्था गंभीर संकट से जूझ रही है। प्रदेश के 11 जिलों में एक भी फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) तैनात नहीं है। ऐसे में बाजार में बिक रहे एनालॉग पनीर की जांच, सैंपलिंग और कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।

पड़ताल के अनुसार, जिन जिलों में फूड सेफ्टी ऑफिसर नहीं हैं, वहां पिछले 6 से 7 महीनों से खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग लगभग पूरी तरह बंद है। इन जिलों की जिम्मेदारी दूसरे जिलों के अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार के रूप में दी गई है, लेकिन लंबी दूरी और सीमित संसाधनों के कारण नियमित जांच नहीं हो पा रही है।

इन 11 जिलों में नहीं है एक भी फूड सेफ्टी ऑफिसर
सुकमा, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, बीजापुर, नारायणपुर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी), कोरिया, बलरामपुर, सूरजपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और सक्ती।

सरकार ने क्या कहा?
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के संयुक्त आयुक्त दीपक अग्रवाल के अनुसार, रिक्त पदों को जल्द भरा जाएगा और जांच की प्रक्रिया पहले से ही शुरू कर दी गई है। विभाग का कहना है कि बाजार में नकली या एनालॉग पनीर बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कार्रवाई का प्लान
सरकार ने एनालॉग पनीर पर नियंत्रण के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें—

एनालॉग पनीर बनाने वाली 12 लाइसेंसधारी इकाइयों के लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे।
फूड सेफ्टी ऑफिसर होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों में जाकर सैंपल लेकर जांच करेंगे।
असली पनीर के नाम पर एनालॉग पनीर बेचने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज की जाएगी।
बाजार में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा।


रोज 5 करोड़ रुपये का कारोबार
रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर का रोजाना लगभग 5 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। राज्य में बनी सामग्री की आपूर्ति ओडिशा समेत अन्य राज्यों में भी की जाती है। कम कीमत होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ी है, जिससे मिलावट का खतरा भी बढ़ गया है।

स्वास्थ्य के लिए क्यों खतरनाक?
विशेषज्ञों के मुताबिक, एनालॉग पनीर में दूध की जगह वनस्पति वसा और अन्य कृत्रिम तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है। लगातार सेवन करने से—

पोषण और प्रोटीन की गुणवत्ता कम मिलती है।
हृदय रोग और मोटापे का खतरा बढ़ सकता है।
पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं को असली और एनालॉग पनीर के बीच स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। यदि कोई व्यापारी गलत लेबलिंग या असली पनीर बताकर एनालॉग पनीर बेचता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Sunil Agrawal
Sunil Agrawal
Chief Editor - Pragya36garh.in, Mob. - 9425271222
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