जो करना है कर लो’ विवाद पर सियासत तेज: भूपेश बोले- सांसद का नहीं, जनादेश का अपमान; कांग्रेस ने कहा- छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक अराजकता हावी…

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रायपुर। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के बीच कथित ‘जो करना है कर लो’ टिप्पणी को लेकर छिड़ा विवाद अब और गहरा गया है। कांग्रेस (Congress) और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी चुने हुए जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार केवल सांसद का नहीं, बल्कि उन मतदाताओं का भी अपमान है जिन्होंने उन्हें चुना है। वहीं कांग्रेस ने इसे प्रदेश में “प्रशासनिक अराजकता” का उदाहरण बताते हुए राज्य सरकार पर नौकरशाही पर नियंत्रण खोने का आरोप लगाया है।

भूपेश बघेल बोले- यह चुने हुए जनप्रतिनिधि का अपमान
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि उनकी बृजमोहन अग्रवाल से वैचारिक असहमतियां हो सकती हैं, लेकिन वे जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं और देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा के सदस्य हैं।

उन्होंने लिखा कि एक प्रशासनिक अधिकारी का इस तरह का व्यवहार यह दर्शाता है कि प्रदेश की कमान दिल्ली और नागपुर के हाथों में है। बघेल ने आरोप लगाया कि अधिकारियों को जनता के काम और जनप्रतिनिधियों की मांग से कोई फर्क नहीं पड़ता, वे केवल अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं।

उन्होंने इसे उन सभी मतदाताओं का अपमान बताया जिन्होंने अपने प्रतिनिधि को चुनकर संसद भेजा है। साथ ही उन्होंने लिखा कि बृजमोहन अग्रवाल का राजनीतिक अनुभव लंबा है और उन्हें अधिकारियों से कैसे निपटना है, यह अच्छी तरह आता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सांसद अपने मतदाताओं को निराश नहीं करेंगे।

कांग्रेस ने कहा- प्रदेश में प्रशासनिक अराजकता चरम पर
भूपेश बघेल की प्रतिक्रिया के बाद प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने भी बयान जारी कर राज्य सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि यदि भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद बृजमोहन अग्रवाल को एक वरिष्ठ अधिकारी ‘जो करना है कर लो’ जैसी भाषा बोल सकता है तो आम जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

शुक्ला ने कहा कि यह घटना बताती है कि प्रदेश में नौकरशाही पूरी तरह बेलगाम हो चुकी है और सरकार प्रशासन पर नियंत्रण खो चुकी है।

ननकी राम और रवि भगत का भी जिक्र
कांग्रेस का आरोप है कि राज्य के एक वरिष्ठ सचिव द्वारा सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ सांसद के साथ कथित तौर पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल सरकार की कमजोरी को उजागर करता है। पार्टी का कहना है कि सरकार में बैठे जनप्रतिनिधि अब अधिकारियों से सामान्य शिष्टाचार तक का पालन नहीं करा पा रहे हैं।

कांग्रेस ने अपने आरोपों के समर्थन में हाल के कई घटनाक्रमों का उल्लेख किया। पार्टी ने कहा कि बेमेतरा में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्थाएं सामने आईं, जहां पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष को मंच से नाराजगी जाहिर करनी पड़ी। वहीं एक अन्य मामले में विधायक के सामने जनपद सीईओ द्वारा कथित तौर पर कार्यकर्ता को चुनौती देने की घटना का भी जिक्र किया गया।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि सुशासन तिहार के दौरान वरिष्ठ मंत्री द्वारा सरकारी अमले और पुलिस पर शराब बिक्री के आरोप लगाए गए थे, जबकि रायपुर में सांसद बृजमोहन अग्रवाल भी सार्वजनिक मंच से अधिकारियों पर अवैध शराब बिकवाने का आरोप लगा चुके हैं।

सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा के वरिष्ठ नेता ननकी राम कंवर के धरना और मुख्यमंत्री को लिखे पत्र का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा के अपने नेता भी अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने पूर्व भाजयुमो अध्यक्ष रवि भगत के बयानों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भी बेलगाम नौकरशाही और मंत्रियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।

कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर पड़ गई है और आम लोगों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

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