खरसिया । दिनांक 29 अगस्त दिन सोमवार को बड़ा भैणिया परिवार द्वारा कराई जा रही पितृ मोक्षार्थ भागवत कथा के द्वितीय दिवस की कथा दोपहर 3 बजे शुरू हुई। कथा में व्यास पीठ से देवी चित्रलेखा ने कहा कि कथा इसलिए नहीं है क़ि जीवन परिवर्तित हो जाए, ये कथा सिर्फ प्रभु के आनंद को जीने के लिए है। आ जाओ कथा में और जब बैठो तब छोड़ दो प्रभु पर सब कुछ । चिंता इतनी करो की काम हो जाए,पर इतनी नही की जिंदगी तमाम हो। मस्त रहिये, हरिनाम में व्यस्त रहिये।
भगवान की आरती के साथ शुरू हुई श्रीमद भागवत कथा
द्वितीय दिवस की कथा में उमड़ने लगा जनसैलाब

श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन की कथा में भगवान के २४ अवतारों आदि परषु, चार सनतकुमार, वराह, नारद, नर-नारायण, कपिल, दत्तात्रेय, याज्ञ, ऋषभ, पृथु, मतस्य, कच्छप, धनवंतरी, मोहिनी, नृसिंह, हयग्रीव, वामन, परशुराम, व्यास, राम, बलराम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि का वर्णन किया गया। कलियुग के आरंभ में पांडवकुल भूषण राजा परीक्षित के तपस्यारत शमीक ऋषि के गले में सर्प डालने तथा ऋषि पुत्र के राजा को नाग द्वारा डसने संबंधी श्राप दिए जाने की कथा भी सुनाई। वहीं ऋषियों के परीक्षित को श्राप से मुक्ति दिलाने का उपाय का वर्णन करते हुए श्रीमद्भागवत कथा श्रवण को मुक्ति का सरल उपाय बताया। कथा के दौरान देवी चित्रलेखा जी ने लोगो को गौ माता की रक्षा करने का मूल मंत्र दिया युवाओ को प्रेणा देते हुए उन्हें गौ माता की रक्षा करने के लिए आगे आने को कहा साथ-साथ किसानो को भी खेती में विषैले उर्वरको की जगह गौ माता का स्वनिर्मित गोबर से बने खाद का उपयोग करने को कहा ताकि खेतो में अच्छी फसल के साथ प्राकृतिक हो जिससे खाद्य पर्दार्थ मानव शरीर को रोग मुक्त कर सके देवी जी ने कथा के दौरान गौ माता की दयनीय दशा की और ध्यान आकर्षित करते हुए लोगो को गौ माता को पलने के लिए प्रेणा दी गौ माता बचेगी तो देश बचेगा,लोगो को भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए प्रेरित किया। विदित हो कि बड़ा भेड़िया परिवार के द्वारा स्थानीय टाउन हॉल मैदान में श्रीमद भागवत कथा का आयोजन दिनांक 28 अगस्त से कराया जा रहा है जिसमे भागवत कथा का वचन प्रख्यात वक्ता एवम भागवत मर्मज्ञ देवी चित्रलेखा जी के द्वारा किया जा रहा है।

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