गिरफ्तारी पर नहीं चलेगी पुलिस की मनमानी! सुप्रीम कोर्ट बोला-लिखित कारण बताना जरूरी है…
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस ए. जी. मसीह की बेंच ने 2024 वर्ली BMW हादसा केस से जुड़ी याचिकाओं पर आदेश सुनाया. इन याचिकाओं में सवाल उठाया गया था कि क्या बिना लिखित कारण बताए गिरफ्तारी करना संविधान का उल्लंघन है. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर सहमति जताई है.
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 6 नवंबर को अपने एक आदेश में कहा कि पुलिस और जांच एजेंसियों को हर गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य है. कोर्ट ने कहा कि यह कारण लिखित में होना चाहिए और जल्द से जल्द बताया जाना चाहिए. अदालत ने साफ किया कि गिरफ्तारी भले ही किसी भी कानून जैसे BNS, IPC या फिर मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत की गई हो, गिरफ्तार किए गए शख्स को लिखित कारण बताना जरूरी है
इस केस में दिया आदेश
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस ए. जी. मसीह की बेंच ने 2024 वर्ली BMW हादसा केस से जुड़ी याचिकाओं पर आदेश सुनाया. इन याचिकाओं में सवाल उठाया गया था कि क्या बिना लिखित कारण बताए गिरफ्तारी करना संविधान का उल्लंघन है. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर सहमति जताई है.
आदेश की बड़ी बातें
– संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत हर व्यक्ति को यह मौलिक अधिकार है कि उसे उसकी गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी दी जाए.
– यह अधिकार हर अपराध और हर कानून (चाहे वह पुराना IPC हो या नया भारतीय न्याय संहिता BNS-2023) पर लागू होता है.
– यह आर्टिकल-21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक अभिन्न अंग है. इसका पालन किए बगैर गिरफ्तारी असंवैधानिक है.