विधायक जी ने एक महीने में जारी किए दो पत्र ! पहले डॉक्टर साहब की शिकायत कर खुद कराया ट्रांसफर..! दोबारा पत्र लिखा, लिखी डॉ साहब की तारीफे, फिर से कराई बहाली.. दोनों लेटर सोशल मीडिया में वायरल, विधायक साहब की हो रही किरकिरी…
जांजगीर। आज हम आपको चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव के उन 2 लेटर के बारे में बताएंगे जिसे देखकर आप भी हैरान हो जाएंगे कहेंगे, विधायक जी तो बड़े पलटीबाज हैं। दरअसल में हमें इसलिए कहना पड रहा है क्योंकि या तो विधायक जी अपने क्षेत्र से वाकिफ नहीं है या तो विधायक जी लेटर जारी करने से पहले कुछ सोचते समझते नहीं हैं। जयचंदो के भरोसे से पूरा उनका कामकाज चल रहा है।
दरअसल मामला यह है कि विधायक महोदय द्वारा 26-02-2020 को सूबे के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव को एक पत्र लिखा जाता है। उस पत्र में जिक्र किया जाता है कि डॉक्टर संतोष पटेल चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मालखरौदा को अन्य जगह पर स्थानांतरित करने हेतु इस लेटर में लिखा जाता है कि
“डॉक्टर संतोष पटेल जो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मालखरौदा में चिकित्सक के रूप में पदस्थ हैं। उनके खिलाफ क्षेत्र के लोग शिकायत कर रहे हैं कि इनका कार्य व्यवहार ठीक नहीं है। इनके द्वारा मरीजों के इलाज के नाम पर अवैध रूप से कैसे लिया जाता है। तथा अपनी निजी गाड़ी को एंबुलेंस के रूप में पैसे लेकर चलाने की भी शिकायत बहुत ज्यादा मिल रही है। इस वजह से क्षेत्र की जनता बहुत परेशान हैं इसीलिए उन्हें अन्य जगह स्थानांतरण किया जाए।”
पहला पत्र
एक माह बाद दूसरा पत्र इसमे ये लिखा जाता है कि डॉक्टर संतोष पटेल का अनावश्यक रूप से संलग्नीकरण किया गया है। मतलब क्या विधायक महोदय का पहला पत्र जिसमें डॉक्टर साहब पर दोष मढ़ा गया था और उनके स्थानांतरण की बात कही गई थी। क्या वह बातें मिथ्या थी ??
दूसरा पत्र
फिर 1 माह बाद विधायक महोदय एक और पत्र मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जांजगीर-चांपा को जाता है। जिसमें खुद के द्वारा अनुशंसा किए गए जिसमें डॉक्टर संतोष पटेल का संलग्नीकरण आदेश को निरस्त कराने का पत्र जारी होता है।
“जिसमें लिखा जाता है कि डॉक्टर संतोष पटेल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मालखरौदा जिला जांजगीर-चांपा में पदस्थ है। जिनका अनावश्यक रूप से संलग्न करण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रांगण में हुआ है जबकि हमारे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मालखरौदा में विश्वव्यापी कोरोनावायरस का संकट बढ़ता जा रहा है। उसको ध्यान में रखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मालखरौदा डॉक्टरों की कमी होते हुए अनुभवी एवं 24 घंटे सेवा देने वाले डॉक्टर संतोष पटेल को यथावत स्वास्थ्य केंद्र मालखरौदा में रखा जाए. आवश्यकता पड़ने पर डॉ कात्यानी सिंह का संलग्न किया जाए क्योंकि कई शिकायतें भी मेरे पास आ चुकी है।”
विधायक महोदय का लेटर है तो डॉ संतोष पटेल को वापस भेज दिया जाता है। यू कहे तो संलग्न कर आदेश निरस्त हो जाता है।
अब सोचिए जिस चिकित्सक के बारे में विधायक महोदय एक माह पहले कहते हैं कि उनका कार्यशैली ठीक नहीं है। मरीजों से पैसा लेते हैं। लेकिन उन्हीं के स्थानांतरण आदेश को पुनः निरस्त करने के लिए कहा जाता है। आखिर इस 1 महीने के बीच ऐसा क्या हुआ कि डॉक्टर संतोष पटेल जिनकी शिकायत कर स्वयं विधायक जी ने की थी। अचानक से वे महान कैसे हो गए। दूसरे पत्र में उनकी तारीफों के कसीदे गढ़े गए और उन्हें वापस बुलाने की अनुशंसा की गई।
डॉ कात्यानी सिंह का हीं संलग्निकरण क्यो??
दूसरे वाले पत्र में डॉक्टर कात्यायनी सिंह का जिक्र इसलिए किया जाता है क्योंकि डॉक्टर कात्यायनी सिंह के साथ बदतमीजी और अभद्रता पूर्ण व्यवहार चंद्रपुर विधायक के करीबी विधायक प्रतिनिधि देवा लहरें द्वारा की जाती है।जिसका ऑडियो सोशल मीडिया में भी वायरल होता है। जिसकी शिकायत डॉक्टर कात्यायनी सिंह द्वारा मालखरौदा थाने में भी की जाती है। इसीलिए चंद्रपुर विधायक डॉक्टर साहिबा के खिलाफ इस तरीके से शिकायत कर रहे हैं।
मालखरौदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बन चुका है राजनीति का अखाड़
दरअसल में इस अस्पताल में खंड चिकित्सा अधिकारी के पद के लिए यहां के चिकित्सक आपस में लड़ भीड़ रहे हैं। कुछ दिन पहले अस्पताल में मरीजों के लिए बाहरी दवाई लिखने पर डॉक्टर संतोष पटेल को डॉक्टर कात्यायनी सिंह ने फटकार लगाई थी। कि मरीजों को बाहरी दवाई ना लिखें अस्पताल की ही दवाई दिया जाए जरूरत पड़ने पर ही बाहर की दवाई मंगाया जाए। इसपर डॉ संतोष पटेल भड़क गए थे और डॉ कात्यायनी सिंह के साथ सीनियारिटी जूनियरटी पर उतर गए थे। बस डॉ कात्यायनी सिंह का बस इतना कसूर था कि सरकारी अस्पताल में आए हुए मरीजों को बाहर से दवाई न लिखने की सलाह दे डाली।
सोशल मीडिया में विधायक को सुनाई जा रही है खरी खोटी
विधायक के एक ही मामले पर दो लेटर जिसे ट्रांसफर कराने के लिए पहले पत्र लिखा जाता है फिर माह भर बाद पुनः आदेश को निरस्त करने के लिए पत्र लिखा जाता है। यह पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो जाता है। जिसके बाद लोगों ने विधायक के कार्यशैली पर ही सवाल उठा दिए सोशल मीडिया पर लोग यह कह रहे हैं कि जिस का लिफाफा भारी उसी ने बाजी मारी। वह विधायक के दो लेटर को लेकर लोग तरह-तरह की बातें कह रहे हैं और बातें होनी भी क्यो न क्योंकि विधायक जैसे जिम्मेदार दायित्व पर होने के बावजूद भी इस तरीके से पत्र जारी करना भी समझ से परे है।