अब ओवरस्पीड पर सीधे घर पहुंचेगा चालान, छत्तीसगढ़ में पहली बार LiDAR स्पीड कैमरे शुरु…

अब ओवरस्पीड पर सीधे घर पहुंचेगा चालान, छत्तीसगढ़ में पहली बार LiDAR स्पीड कैमरे शुरु…

छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग ने पहली बार लेडार आधारित स्पीड कैमरे लगाए हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत 1 करोड़ 90 लाख की लागत से रायपुर समेत 5 जिलों में हाईटेक कैमरे स्थापित किए गए हैं, जो वाहनों की स्पीड रिकॉर्ड कर स्वतः ई-चालान जारी करेंगे।

सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए पहली बार लेडार आधारित स्पीड कैमरे
1 करोड़ 90 लाख रुपए की लागत से कैमरे स्थापित किए गए है


कैमरे रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर और धमतरी के प्रमुख मार्गों पर लगाए गए

ये कैमरे वाहनों की स्पीड रिकॉर्ड कर स्वतः ई-चालान जनरेट करेंगे

जल्द ही पूरे सिस्टम को पूरी तरह एक्टिव किया जाएगा

सड़क हादसों पर लगाम लगाने की नई पहल

छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को देखते हुए परिवहन विभाग ने पहली बार लेडार (LiDAR) आधारित आधुनिक स्पीड कैमरों का उपयोग शुरु किया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीब 1 करोड़ 90 लाख रुपए की लागत से 7 हाईटेक कैमरे पांच जिलों के प्रमुख मार्गों पर लगाए गए हैं। इन कैमरों का उद्देश्य तेज रफ्तार और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर निगरानी रखते हुए हादसों में कमी लाना है।

इन शहरों और स्थानों पर लगाए गए कैमरे

राज्य सरकार के निर्देश पर कैमरे रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर और धमतरी जिले के प्रमुख ट्रैफिक मार्गों पर लगाए गए हैं।

रायपुर में खास तौर पर इन स्थानों को शामिल किया गया है:

मरीन ड्राइव

वीआईपी रोड

मंदिर हसौद क्षेत्र

इसके अलावाः

बिलासपुर बायपास अंबिकापुर का मुख्य मार्ग

जगदलपुर का मुख्य मार्ग धमतरी जिले का कुरुद तहसील क्षेत्र

इन स्थानों का चयन ट्रैफिक दबाव और हादसों की अधिक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

100 मीटर दूरी से रिकॉर्ड होगी स्पीड

वाई-फाई से लैस ये आधुनिक कैमरे परिवहन विभाग के वाहन सॉफ्टवेयर से सीधे जुड़े हुए हैं। ये 100 मीटर दूरी से वाहन की गति माप सकते हैं, दो लेन की सड़कों पर एक साथ कई वाहनों की निगरानी कर सकते हैं, वाहन की पूरी जानकारी सिस्टम में दर्ज करते हैं। इससे ट्रैफिक नियम उल्लंघन करने वालों पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।

लेडार तकनीक से स्वतः बनेगा ई-चालान

लेडार तकनीक (LiDAR Technology) आधारित ये कैमरे प्रकाश किरणों (Light Beams) की मदद से वाहन की गति और दूरी का सटीक आकलन करते हैं। यदि कोई वाहन तय सीमा से अधिक स्पीड में चलता है तो नंबर प्लेट स्कैन होती है, फोटो और वीडियो रिकॉर्ड होता है, स्वतः ई-चालान जनरेट होता है।

यह चालान वाहन मालिक को व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए भेजा जाएगा।

रात और खराब मौसम में भी करेंगे निगरानी

इन हाईटेक कैमरों में नाइट विजन सुविधा, खराब मौसम में भी स्पष्ट रिकॉर्डिंग, मल्टी-व्हीकल ट्रैकिंग क्षमता जैसी विशेषताएं मौजूद हैं, जिससे 24×7 निगरानी संभव होगी।

अभी टेस्टिंग जारी, जल्द होंगे पूरी तरह सक्रिय

परिवहन विभाग और पुलिस के समन्वय से फिलहाल कैमरों की टेस्टिंग की जा रही है। विभाग के अनुसार पहले चरण में लोगों को जागरुक किया जाएगा, उसके बाद ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।

अधिकारियों ने क्या कहा

अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने बताया कि सड़क हादसों को रोकने और ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पांच जिलों में सात कैमरे लगाए गए हैं। भविष्य में इस योजना का विस्तार अन्य जिलों में भी किया जाएगा।

LIDAR (Light Detection and Ranging) कैमरे एक साथ कई वाहनों की स्पीड रिकॉर्ड कर सकते हैं।


नंबर प्लेट पहचान (ANPR)

तकनीक से वाहन की पहचान स्वतः होती है।

यह रेडार से ज्यादा सटीक तकनीक है।

ओवरस्पीड होने पर नंबर प्लेट स्कैन कर ऑटोमैटिक चालान बनाता है।

100 मीटर + दूरी और रात में भी काम करता है।

IMP FACTS

लागतः 1 करोड़ 90 लाख रुपए

कैमरों की संख्या: 7

जिले: 5 (रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, धमतरी)

स्पीड रिकॉर्डिंग दूरी: 100 मीटर

सुविधाः नाइट विजन + ऑटो ई-चालान

सिस्टम

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में LIDAR कैमरा सिस्टम की शुरुआत सड़क सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न सिर्फ ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित होगा, बल्कि तेज रफ्तार के कारण होने वाले हादसों में भी कमी आने की उम्मीद है। आने वाले समय में इस तकनीक का विस्तार पूरे प्रदेश में किया जा सकता है।

Sunil Agrawal

Chief Editor - Pragya36garh.in, Mob. - 9425271222

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