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दो से अधिक संतान, तथा एक से अधिक पत्नी रखने वाले कर्मचारियों की नौकरी खतरे में

रायगढ़ जिले में शिक्षाकर्मी भर्ती तथा अन्य शासकीय सेवा में सेवारत कर्मचारियों के भर्ती के समय नियामानुसार सिविल सेवा, सामान्य सेवा एवं शर्तों के तहत आज भी सभी नियम व शर्तें लागू हैं। किंतु छत्तीसगढ़ शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की घोर लापरवाही के कारण आज भी कई शासकीय सेवा में कार्यरत शिक्षक व शासकीय सेवक हैं, जो कि भारत सरकार के परिवार नियोजन नीति की सारी हदों को पार करते हुए, नियम व कायदे को ताक पर रखते हुए 26 जनवरी 2001 के बाद दो से अधिक जीवित संतान पैदाकर जानकारी छुपाते हुए नौकरी कर रहे हैं। तथा शासन को यह भी जानकारी गया है, कि एक से अधिक पत्नी रखने वाले कर्मचारियों के विरूद्ध बहुत जल्द कठोर से कठोर कार्यवाही हो सकती है।

जिले मैं सैकड़ों ऐसे कर्मचारी हैं, जिनके द्वारा शासकीय सेवा में जानकारी को छुपाया गया है। कई तो ऐसे भी हैं, जो कि नियुक्ति के समय ही बाकायदा नॉटरी के समक्ष शपथ पत्र भर कर दिया गया है। कि मैं दो से अधिक संतान जन्म नहीं दूंगा /दूंगी क्योंकि। यदि मेरे द्वारा ऐसे गलती की जाती है। तो मैं उसके लिए स्वयं जबाबदार रहूंगा/रहूंगी। तथा कई ऐसे भी शासकीय सेवक हैं, जिनके द्वारा गोपनीय ढंग से एक से अधिक पत्नी रखा गया है। उनके विरुद्ध भी इसी तरह के कड़े कार्यवाही होने कि पूरी संभावना है। भारत को परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू करने वाले विकासशील देशों में पहला देश होने का गौरव प्राप्त है। जो – जो राज्य प्रायोजित था, जबकि यह कार्यक्रम 1952 में शुरू किया गया था। और इसे राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम कहा जाता था। सबसे पहले, कार्यक्रम गर्भनिरोधक उपायों जैसे कि जन्म नियंत्रण पर केंद्रित था।

हालांकि, समय बीतने के साथ, कार्यक्रम में पोषण, परिवार कल्याण और माता और बाल स्वास्थ्य जैसे परिवार के स्वास्थ्य के अन्य पहलुओं को शामिल किया गया है। आखिरकार, नीति में इस उन्नति का प्रदर्शन करने के लिए परिवार नियोजन, परिवार कल्याण विभाग का कार्य बहुत ही सराहनीय रहा है। परिवार नियोजन की वर्तमान स्थिति पर दशकों से राज्य और केंद्र दोनों सरकारों ने समाज के विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रम को लागू करने के लिए बहुत कुछ काम किया है। इसमें सार्वजनिक सेवा घोषणाओं और डोर-टू-डोर अभियानों के माध्यम से जागरूकता फैलाना, मौद्रिक प्रोत्साहन के माध्यम से दो-बच्चे के मानदंड को प्रोत्साहित करना, लड़कों और लड़कियों के लिए शिक्षा पर जोर देना और ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत सारे प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करने के तरीके शामिल हैं। यह परिवार नियोजन के उपाय निश्चित रूप से सफल रहे हैं, क्योंकि जनसंख्या वृद्धि दर में कमी प्रदर्शित होती है।

हालाँकि, गरीबी जैसे कारक, बेटी से बेटों की पसंद और पारंपरिक सोच पूरी सफलता के लिए प्रमुख बाधाएँ हैं।

Sunil Agrawal
Sunil Agrawal
Chief Editor - Pragya36garh.in, Mob. - 9425271222
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