इन चार जिलों के पुलिस कप्तान चुनाव आयोग के राडार पर, आचार संहिता लगते ही होगी छुट्टी
रायपुर।
बिना आईपीएस बने जिला संभाल रहे छत्तीसगढ़ के चार पुलिस कप्तानों की मुश्किलें बढ़ने वाली है। भारत सरकार से इन्हें आईपीएस अवार्ड नहीं हुआ तो इनकी विदाई तय है। इनमें रजनेश सिंह धमतरी, लाल उम्मेद सिंह कवर्धा, प्रशांत ठाकुर जशपुर और कोशिमा बलरामपुर शामिल हैं। इन चारों का आईपीएस अवार्ड अरसे से लटका हुआ हुआ है।चुनाव आयोग ने राज्य निर्वाचन कार्यालय से कलेक्टर, एसपी का डिटेल मंगाया है। पता चला है, आयोग ने नवंबर में विधानसभा चुनाव होने वाले पांचों राज्यों के निर्वाचन अधिकारियों से कहा है कि वे कलेक्टर, एसपी के बारे में पूरी जानकारी भेजें।
जाहिर है, छत्तीसगढ़ में चार जिलों के एसपी नॉन आईपीएस हैं। नियमानुसार नॉन आईएएस, नॉन आईपीएस को कलेक्टर, एसपी नहीं बनाया जा सकता। लेकिन, अफसरों की कमी बताकर कई बार राज्य सरकारें बिना आईपीएस के ही एसपी बना देती है। लेकिन, चुनाव के समय ये संभव नहीं होगा। अगर इन्हें आईपीएस अवार्ड नहीं हुआ तो अक्टूबर में आचार संहिता प्रभावशील होते ही सबसे पहले इन चारों पुलिस अधीक्षकों की छुट्टी होगी
ज्ञातव्य है, सूबे के राज्य पुलिस सेवा के 15 अफसरों का आईपीएस अवार्ड लालफीताशाही की वजह से अटका हुआ है। जबकि, कैडर रिव्यू में 12 पद पहले ही बढ़ गए हैं। तीन पद अफसरों के रिटायरमेंट की वजह से खाली पड़ा है। इन अफसरों को प्रमोशन देने के लिए जनवरी में प्रासेज शुरू हो जाना था। मगर ऐसा हुआ नहीं। फाइल अभी पीएचक्यू और गृह विभाग के बीच झूल रही है। अगर यहां से प्रासेज पूर्ण कर फाइल भारत सरकार को भेज दी गई होती तो अभी तक इन सभी को आईपीएस अवार्ड हो गया होता। बहरहाल, फाइलों की जिस तरह की रफ्तार है, नहीं लगता कि आचार संहिता लगने से पहले इन पुलिस अफसरों को आईपीएस अवार्ड हो जाए। आचार संहिता लगने में अब करीब 80-85 दिन बच गए हैं।