पुलिस के समझाने से ख़ुदकुशी करने निकली किशोरी लौटी घर….

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19 जनवरी की दोपहर ट्यूशन जाने के नाम पर घर से दो पहिया गाड़ी पर निकली 11वीं की छात्रा जब देर शाम तक घर नहीं लौटी और पता तलाश करने पर भी नहीं मिली तो 20 जनवरी की सुबह मामला बिलासपुर पुलिस के पास आया। परिजनों को लड़की के कमरे से अंग्रेज़ी में लिखा सोसायडल पत्र मिला था।गुमशुदगी की कायमी कर पता तलाश शुरु की गई और आख़िरकार ढाई घंटे में किशोरी को दस्तयाब कर परिजनों को सौंप दिया गया।
पुलिस ने पता तलाशी के लिए सबसे पहले रेल्वे स्टेशन के पार्किंग पर उस दो पहिया वाहन की तलाश की जहां पर जिस गाड़ी से किशोरी घर से निकली थी उसे बरामद कर लिया गया। पुलिस ने उसके बाद उसके एक मित्र से पूछताछ की तो उसने एक नंबर के बारे में बताया जो कि किशोरी इस्तमाल करती थी पर परिजनों को भी उस नंबर के बारे में नहीं पता था। पुलिस ने उसके किशोरी के मित्र से उसे फ़ोन लगवाया और स्टेशन की सीढ़ियों के पास किशोरी मिल गई।
अपने घर वालों से बुरी तरह नाराज़ किशोरी को पुलिस ने बेहद मनुहार और मनौव्वल के साथ मनाया। पुलिस ने उस किशोरी की बात सूनी जिसमें उसने कहा –
“मम्मी पापा हर बात पे डाँटते हैं, कुछ सूनते समझते नही.. इसलिए जा रही थी.. नहीं जाउंगी घर”
पुलिस देर तक किशोरी से संवाद करती रही और आख़िरकार वो मान गई। क़रीब ढाई घंटे तक पुलिस लगातार संवाद करती रही। पुलिस ने किशोरी के पिता को भी समझाईश दी और अंतत: किशोरी घर लौटी लेकिन इस आश्वासन के साथ कि, अगली बार उसे कोई कुछ बोलेगा तो वो सबसे पहले फ़ोन पुलिस को लगाएगी।
टीआई परिवेश ने NPG से कहा –
“उस बच्ची को मैंने अपना पर्सनल नंबर दिया और आश्वस्त किया कि, तकलीफ़ होने पर तुम तुरंत फ़ोन करना, हम लोग आएँगे, हम लोगों ने बहुत देर तक उससे बातें की और उसकी बातें सुनी.. दरअसल उसकी बात सूनी जानी चाहिए थी .. ऐसा हो नहीं रहा था ,पर नंबर वाले आश्वासन के बाद मान गई और घर लौट गई है”

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