आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो के सम्मान में सुरता महोत्सव आयोजित….

आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो के सम्मान में सुरता महोत्सव आयोजित….



रायपुर। विगत दिनों आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो के सम्मान में नवा रायपुर सेक्टर-27 में पार्क में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ सादगीपूर्ण ढंग से सुरता महोत्सव का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री बाबूलाल साहू एवं अन्य अतिथियों ने आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो की प्रतिमा पर फूल माला अर्पित कर पूजा-अर्चना की तथा इस अवसर पर प्रसाद वितरण किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि बाबूलाल साहू ने बताया कि आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो के बताये मार्ग पर चलने की जरूरत है तथा हम उनके उपदेशों तथा सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार करेंगे। इस अवसर पर अध्यक्षता कर रहे बसंत उपाध्याय ने अपने उद्बोधन में बताया कि महाकवि कालिदास पंडो आदिवासी समाज के थे तथा छत्तीसगढ़ के निवासी थे। उनकी कृति मेघदूत का छत्तीसगढ़ी में अनुवाद हमारे परिवार के श्री पंडित मुकुटधर पाण्डे ने किया है। विश्व के अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। वे छत्तीसगढ़ के मृगाडांड़ के निवासी थे। यह हम छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए गौरव की बात है उन्होंने अपने ग्रंथों में आदिवासी संस्कृति तथा छत्तीसगढ़ की संस्कृति का विस्तृत वर्णन किया है। उन्होंने आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो के भौगोलिक ज्ञान तथा वैज्ञानिक क्षमता को अद्भूत बताया। उन्होंने आगे कहा कि चूंकि वह आदिवासी समाज के थे तथा छत्तीसगढ़ के निवासी थे इसलिए कुछ लोगों ने उनके खिलाफ भ्रम फैलाया है कि वे अनपढ़ थे।

इस अवसर पर डॉ रामविजय शर्मा इतिहासकार एवं पुरातत्वविद्, रायपुर, भारत ने अपने उद्बोधन में बताया कि आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो पर मेरे द्वारा विस्तृत शोध किया गया तथा शोध पत्र कई अंतर्राष्ट्रीय जनरल में प्रकाशित हुआ। आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो का जन्म 15 नवम्बर 350 ई. को तथा निधन 15 मार्च 450 ई. को हुआ था। उनका जन्म छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव पंडो आदिवासी बहुल रामायणकालीन गांव मृगाडांड़ में हुआ था। जो सरगुजा जिले के उदयपुर तहसील के अंतर्गत है। उन्होंने आगे बताया कि आदिवासी महाकवि कालीदास पंडो के विचारों तथा सिद्धांतों का भारत तथा विश्व स्तर पर प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है। उन्होंने आगे बताया कि मेरे नेतृत्व में मेघदूत में वर्णित मेधमार्ग पर मृगाडाड़ से मान सरोवर तक सांस्कृतिक यात्रा का आयोजन किया जाएगा। ताकि आदिवासी संस्कृति तथा छत्तीसगढ़ की संस्कृति का देश-दुनिया में प्रचार-प्रसार हो सके। सांस्कृतिक यात्रा के दौरान मृगाडांड़, रतनपुर, अमरकंटक, विदिशा, उज्जैन, देवगढ़, मदसौर, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार तथा मानसरोवर एवं अलकापुरी में सांस्कृतिक पड़ाव आयोजित किया जाएगा। तथा राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी, स्थानीय आदिवासी नृत्य तथा मेघदूत का संस्कृत में तथा पंडित मुकुटधर पाण्डेय जी द्वारा अनुवादित छत्तीसगढ़ी में मेघदूत का सस्वर पाठ का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर सभी पड़ावों में भण्डारा का भी आयोजन किया जाएगा। इसके बारे में माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी, छत्तीसगढ़ शासन से सहयोग तथा मार्गदर्शन लेकर बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाएगा।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि अनिल कुमार सिंह ने आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो के बारे में प्रचलित किंवदंति के बारे में बताया कि किस तरह कालिदास उसी डाल को काट रहे थे जिस डॉल पर बैठे थे। उन्होंने बताया कि इतना सरल स्वभाव सिर्फ आदिवासी समाज का होता है। इस अवसर पर वरिष्ठ नागरिक विमल कुमार शर्मा ने आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो के बारे में तथा उनके ग्रंथों के बारे में तथा उनके विवाह प्रसंग के बारे में विस्तृत ढंग से बताया। मंच का संचालन राजीव त्रिपाठी, वरिष्ठ सलाहकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया गया। इस अवसर पर श्री त्रिपाठी ने बताया कि आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो पर डॉ. रामविजय शर्मा द्वारा विस्तृत शोध किया गया है जो सराहनीय है तथा आदिवासी समाज तथा छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए गौरवान्वित होने की बात है। उन्होंने उनके जन्म दिवस 15 नवम्बर पर शासकीय अवकाश घोषित करने के लिए शासन से मांग की।

कार्यक्रम के आयोजन में सुधीर यादव, कोषाध्यक्ष अटल नगर फुटबॉल क्लब एवं श्री चंदन कुमार होटल मैनेजमेंट संस्थान का योगदान सराहनीय रहा। अंत में विश्व शांति की कामना करते हुए महोत्सव का समापन किया गया।

Sunil Agrawal

Chief Editor - Pragya36garh.in, Mob. - 9425271222

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