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हाइकोर्ट के आदेश और विधि मंत्री के विधानसभा में दिए बयान के विपरीत,चिंतामणि ने ली बैठक.. FIR को लेकर भी कर गए टिप्पणी.. 

रायपुर। विधानसभा में 21 दिसंबर 2020 को संसदीय सचिवों के कार्य अधिकार को लेकर विपक्ष के सवालों और व्यवस्था के प्रश्न को लेकर विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने हाईकोर्ट के निर्देशों को पढ़ा, इस निर्देश में यह स्पष्ट था कि संसदीय सचिव को कोई भी अधिकार हासिल नहीं है। वे विधानसभा में मंत्री की ओर से जवाब तक नहीं दे सकते, और ना ही कोई विभागीय बैठक ले सकते हैं। इस विस्तृत जवाब के बाद संसदीय सचिव के कार्य अधिकार को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई लेकिन सामरी से विधायक चिंतामणि इस मसले पर ऐसी कारआमद कर गुजरे हैं कि विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं।
दरअसल बीते 24 जून सामरी के विधायक और संसदीय सचिव पद से नवाज़े गए चिंतामणि महाराज ने जशपुर ज़िले के बगीचा में बैठक ले ली जिसमें पुलिस विभाग के साथ साथ ज़िला प्रशासन की मौजुदगी रखी गई। इस बैठक को लेकर यह खबरें आईं कि चिंतामणि महाराज ने इलाक़े में फ़र्ज़ी FIR किए जाने को लेकर चिंता जताई और इस पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। 24 जून को ही इस बैठक को लेकर जारी जनसंपर्क विभाग की प्रेस रिलीज़ में उल्लेखित जानकारी इस निर्देश की पुष्टि करती है।
विधानसभा में विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने जो जानकारी दी और संदर्भ के रुप में उच्च न्यायालय के जो आदेश पढ़ें उसके अनुसार चिंतामणि यह बैठक नहीं ले सकते थे, वहीं FIR को लेकर जो उन्होंने निर्देश दिए वह अलग बवाल का सबब बन गया है।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने ललिता कुमारी प्रकरण में यह व्यवस्था दी कि यदि संज्ञेय अपराध की सूचना दी जाती है तो तत्काल FIR करना होगा। पुलिस विवेचना के दौरान यदि सूचना ग़लत पाती है तो खात्मा खारिजी का अधिकार रखती है।
इस मसले को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने विधानसभा में दी गई जानकारी का हवाला देते हुए बैठक को प्रश्नांकित किया है। वहीं भाजपा प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने इस बैठक और बैठक में दिए FIR से संबंधित निर्देश को लेकर कहा है
“यह बैठक संसदीय सचिव चिंतामणि महाराज ने आहूत की, जिसकी उन्हें अधिकारिता नहीं है, और FIR को लेकर दिए निर्देश जिसमें यह कहा गया कि झूठी शिकायत कराते हैं पुलिस पहले तस्दीक़ करें तो यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की अवमानना है, पुलिस पहले ही आरोपों के घेरे में है कि वह राजनैतिक प्रभाव में अपराध तक दर्ज नहीं करती, वहीं यह भी व्यवस्था है कि FIR ग़लत हो तो खात्मा या खारिजी करे, सीधे कैसे निर्देश दिया जा सकता है, जबकि विधानसभा में विधि मंत्री जानकारी दे चुके हैं और हाईकोर्ट ने इसे लेकर व्यवस्था और दिशा निर्देश जारी किए हैं..यह गंभीर मसला है”

Sunil Agrawal
Sunil Agrawal
Chief Editor - Pragya36garh.in, Mob. - 9425271222
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