जिंदल पावर का जनसुनवाई आवेदन वापस लेने का ऐलान: मगर अब भी है संशय की स्थिति.. क्या ऐसा संभव है..?

जिंदल पावर का जनसुनवाई आवेदन वापस लेने का ऐलान: मगर अब भी है संशय की स्थिति.. क्या ऐसा संभव है..?

रायगढ़।

जिले के तमनार में जिंदल पावर की प्रस्तावित कोल माइंस की हुई जनसुनवाई अब प्रशासन के गले का फांस बन गई है। रायगढ़ जिला प्रशासन की 16 दिन से धरने पर बैठे ग्रामीणों को मनाने की कोशिशें और बैठके हो रही है। इसी बीच मामले में एक बड़ी खबर निकल कर आ रही है। जिंदल पावर प्रबंधन ने जनसुनवाई का आवेदन वापस लेने की बात कही है। इस संबंध में उनके द्वारा प्रेस रिलीज भी जारी की गई है।

इस प्रेस रिलीज में 27 दिसंबर की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने ग्रामीणों पर पुलिस और उनके लोगों पर जानलेवा हमला और संपत्ति को नुकसान करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा बताया है कि परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने जनसुनवाई का आवेदन वापस लेने का फैसला लिया है।

नीचे तस्वीर में देखिए इस प्रेस विज्ञप्ति में क्या लिखा है..

अब भी है संशय की स्थिति
जिंदल प्रबंधन के ऐलान के बाद भी इस पूरे मामले में संशय की स्थिति है। कही ये सब जारी आंदोलन और धरने को समाप्त करने के लिए कोई छलावा तो नहीं किया जा रहा..?

28 दिसम्बर को रायगढ़ कलेक्टर के द्वारा राज्य पर्यावरण संरक्षण मंडल को पत्र भेजा गया है। जिसमें इस जनसुनवाई की पूरी रिपोर्ट और वस्तु स्थिति से अवगत कराया गया है और जनसुनवाई की प्रक्रिया को होल्ड करने की बात कही गई है। लेकिन जिंदल पावर द्वारा प्रेस रिलीज में बताया गया है कि कलेक्टर रायगढ़ के द्वारा दिनांक 28 दिसंबर 2025 को उक्त जनसुनवाई को निरस्त करने बाबत पत्र लिखा गया..?

यदि हम रायगढ़ जिला कलेक्टर के पत्र को गौर से पढ़े तो पता चलता है कि उन्होंने 8 दिसंबर को हुई जनसुनवाई और उसके बाद प्रेषित प्रक्रिया के बारे में बताया है। इस पत्र में 27 दिसंबर की आक्रमक घटना और धरने पर बैठे ग्रामीणों की जनसुनवाई को निरस्त करने के मांग का भी जिक्र किया है। देखा जाए तो अपने पत्र में अंतिम में उन्होंने जन सुनवाई की प्रक्रिया की अग्रिम कार्रवाई नहीं किए का निवेदन किया है। इसको निरस्त किए जाने का नहीं!

इस बारे में क्या कहते हैं एक्सपर्ट
इस बारे में पर्यावरण विशेषज्ञ और गोल्डन ग्रीन मैन अवार्ड से सम्मानित रमेश अग्रवाल बताते हैं कि पर्यावरण जन सुनवाई संपन्न होने के बाद यदि आगे की कार्यवाही के लिए राज्य या केंद्रीय पर्यावरण मंडल के पास चली जाती है। तब जनसुनवाई को निरस्त करना काफी जटिल है। इसका निरस्तीकरण केंद्रीय वन पर्यावरण मंडल भी नहीं कर सकती, जब तक कि कोई ठोस कारण या फिर यह इललीगल ना हो। और रायगढ़ कलेक्टर के द्वारा लिखे पत्र में ऐसी कोई ठोस कारण या बात दिखाई नहीं देती।

उन्होंने बताया कि जन सुनवाई की प्रक्रिया हो जाने के बाद कंपनी के द्वारा जनसुनवाई का आवेदन वापिस लेने ऐसा कोई भी प्रावधान EIA नोटिफिकेशन में नहीं है। जब जनसुनवाई प्रक्रिया ही संपन्न हो गई है तो फिर आवेदन किसका का वापस लिया जाएगा..??

Sunil Agrawal

Chief Editor - Pragya36garh.in, Mob. - 9425271222

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