कलेक्टर ने जिलेभर के सरपंचों को पत्र लिखकर मवेशियों के लिए किसानों से पैरा दान कराने की अपील की है। गौठान में बेसहारा व बीमार पशुओं को न रखने की हिदायत भी दी है।
कलेक्टर की पाती में सरपंचों से कहा है कि खरीफ फसल पककर तैयार है। अब धान कटाई का कार्य शुरू होगा। इस दौरान पशुओं के चारा के लिए गांवों में मुनादी कराकर पैरा दान कराने किसानों से आग्रह करें। इसके साथ ही धान कटाई के बाद बचे हुए फसल अवशेष को जलाने से किसानों को रोका जाए।
कुछ जगहों पर असामाजिक तत्वों द्वारा बीमार और बेसहारा पशुओं को गौठानों में जानबूझकर रख दिया जाता है। जिस पर निगरानी रखना भी आपके दायित्व का एक हिस्सा है। हमको भरोसा है कि संवेदनशील जनप्रतिनिधि होने के नाते पूरी दक्षता और जिम्मेदारी के साथ जिला प्रशासन को सहयोग प्रदान करेंगे। गौठान समिति को चारा इकट्ठा करने के लिए पंचायत निधि से जरूरत के हिसाब से राशि प्रदान कर पशुओं की देखभाल के लिए मुस्तैद रखें और उन्हें सक्षम नेतृत्व प्रदान करें। इसके साथ-साथ धान कटाई के बाद के फसल अवशेष को जलाने की जगह उसे खाद बनाने के लिए कृषि विभाग द्वारा संचालित योजना से किसानों को अवगत कराएं और उसका लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें।
कानूनी पहलुओं का हवाला देते हुए कहा है कि पैरा को जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है। ऐसा करने पर छत्तीसगढ़ ग्राम पंचायत स्वच्छता सफाई एवं न्यूसेंस का निराकरण तथा उपसमन नियम 1999 के तहत कार्यवाई की जा सकती है।