अधिकारी और ठेकेदारे ने मिलकर करोड़ों के गोदाम को चढ़ा दिया भ्रष्ट्राचार की भेंट…मामले की शिकायत खाद्य मंत्री से..

अधिकारी और ठेकेदारे ने मिलकर करोड़ों के गोदाम को चढ़ा दिया भ्रष्ट्राचार की भेंट…मामले की शिकायत खाद्य मंत्री से..


सक्ती।

छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम द्वारा जिला शक्ति में लगभग चार करोड़ की लागत से गोदाम एवं सी.सी. रोड का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, किंतु अधिकारी और ठेकेदार की चांड़ाल चैकड़ी ने मिलकर जनता के खून पसीने की कमाई को भ्रष्ट्राचार की भेट चढ़ा दिया है। उक्त मामले की शिकायत छ.ग. शासन के खाद्य मंत्री दयालदास बघेल से करते हुये दोषी अधिकारी और ठेकेदार पर कार्यवाही की मांग की गयी है।

विदित हो कि नवनिर्मित जिला सक्ती के नंदेलीभांठा में छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम द्वारा लगभग चार करोड़ की लागत से गोदाम तथा सीसी रोड़ का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, उक्त कार्य का कार्यादेश मेसर्स मोहन पोद्दार को दिनांक 18.05.2022 को जारी किया गया था, उक्त कार्य को 1 वर्ष अर्थात 18.05.2023 तक पूर्ण किया जाना था, किंन्तु जहां कार्यादेश जारी होने के चार वर्ष के बाद भी उक्त कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है, वहीं जो कार्य किया गया है वह बहुत ही निम्न स्तर का है। मुख्य ठेकेदार के द्वारा उक्त कार्य को पेटी में दूसरे ठेकेदार को दे दिया गया है, निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। निर्माणाधीन गोदाम का कार्य अत्यंत निम्न गुणवत्ता का किया जा रहा है। भवन के अनेक कॉलम एवं अन्य संरचनात्मक भागों की स्थिति देखकर स्पष्ट प्रतीत होता है कि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों एवं गुणवत्ता के अनुरूप नहीं किया गया है। ईंटों की जोड़ाई एवं अन्य निर्माण कार्य भी अत्यंत निम्न स्तर के हैं, गोदाम के शेड कई स्थानों पर हवा में झूल रहे हैं, उनके आधार स्थल की काॅलम तक पूरी नहीं उठाई गयी हैं, वहीं अनेक स्थानों पर जहां ढ़लाई की गयी है वहीं छड़ दिखाई दे रही है, गोदाम में अनेक जगह पानी का सीपेज दिखाई दे रहा है, वहीं जहां छत की ढ़लाई की गयी है वहां से भी पानी टपक रहा है। गोदाम के बगल में ही बनाए गये सी.सी. रोड की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। रोड पर अभी तक नियमित रूप से भारी वाहनों का आवागमन भी प्रारंभ नहीं हुआ है, इसके बावजूद रोड अनेक स्थानों पर पूरी तरह क्षतिग्रस्त एवं टूट चुकी है, सड़क अभी पूरी तरह से बनी भी नहीं है और अनेक स्थानों पर दब गयी है, जिससे स्पष्ट है कि उक्त कार्य में जमकर भ्रष्ट्राचार किया गया है, और शासन के करोड़ों रूपयों का बंदरबाट किया गया है। उपरोक्त मामले के संबंध में छ.ग. शासन के खाद्य मंत्री दयालदास बघेल को शिकायत करते हुये दोषी अधिकारी और ठेकेदार पर कार्यवाही की मांग की गयी है, अब देखना यह है कि संबंधितों पर कोई कार्यवाही होती है या फिर अन्य कई मामलों की तरह इस मामले को भी ठंड़े बस्ते में ड़ाल दिया जायेगा।



निर्धारित समयावधि में कार्य अपूर्ण

जारी किये गये कार्यादेश के अनुसार उक्त कार्य को आज से लगभग तीन वर्ष पहले ही पूर्ण कर लिया जाना था किंतु लापरवाही, भ्रष्ट्राचार तथा ढुलमुल रवैये की वजह से एक वर्ष में पूर्ण हाने वाला कार्य चार वर्षों में भी पूर्ण नहीं हो पाया है, किंतु विभाग के द्वारा ठेकेदार पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी है जिससे ठेकेदार के द्वारा अपनी मनमर्जी करते हुये उक्त कार्य को पेटी में दूसरे अनुभवहीन अयोग्य व्यक्ति को दे दिया गया है जिसके द्वारा शासन के करोड़ों रूपयों का बंदरबाट किया जा रहा है। नियमतः टेण्ड़र प्रक्रिया के दौरान विभाग के द्वारा एैसी शर्तें तथा नियम लगाये जाते है कि अनुभवी तथा जिम्मेदार ठेकेदार के द्वारा ही निविदा में भाग लिया जाये किंतु मुख्य ठेकेदार मेसर्स मोहन पोद्दार के द्वारा कार्यादेश जारी करवा कर शासन के नियमों के विरूद्व श्रीकांत हाड़ा नामक ठेकेदार सेे पेटी में उक्त कार्य कराया जा रहा है जिससे कार्य की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है, मजे की बात यह है कि श्रीकांत हाड़ा के द्वारा भी उपरोक्त कार्य को किसी अन्य ठेकेदार से कराया जा रहा है, जिससे उक्त कार्य किस स्तर का होगा इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

साईट में नहीं है सूचना पटल

गोदाम निर्माण का कार्य जिस स्थल में कराया जा रहा है वहीं किसी भी प्रकार का कोई सूचना बोर्ड़ ठेकेदार के द्वारा नहीं लगाया गया है, निविदा नियमों के अनुसार साईट में ठेकेदार को सूचना पटल लगाया अनिवार्य होता है जिसमें कार्य से संबंधित जानकारी जैसे कार्यादेश क्रमांक, कार्य की राशि, ठेकेदार का नाम सहित अधिकारियों के नाम तथा संपर्क नंबर दर्ज करना होता है कितु उपरोक्त कार्य स्थल में ठेकेदार के द्वारा एैसा कोई बोर्ड़ तक नहीं लगाया गया है।



अधिकारीयों की भूमिका संदिग्ध

उक्त गोदाम के मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है जिससे करोड़ो के भ्रष्ट्राचार  के इस मामले में अधिकारीयों की मिलीभगत स्पष्ट दिखाई दे रही है। गुणवत्ताविहीन निर्माण कार्य को अनेकों बार चलित देयक का भुगतान किया जा चुका है, क्या निर्माण कार्य को अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किये बिना ही भुगतान कर दिया गया, और अगर निरीक्षण किया गया है तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता के स्तर को आज तक सुधारा क्यों नहीं गया है। बहरहाल अब यह मामले में विभागीय मंत्री तक शिकायत की जा चुकी है, यह देखना दिलचस्प होगा कि करोड़ों के इस भ्रष्ट्राचार के मामले मे क्या कार्यवाही होती है।

Sunil Agrawal

Chief Editor - Pragya36garh.in, Mob. - 9425271222

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