पहले महापौर ने शिकायत की, कार्रवाई हुई तो उसी ठेकेदार को बचाया, पलटी मारने के मामले में तोड़ा रिकॉर्ड…

पहले महापौर ने शिकायत की, कार्रवाई हुई तो उसी ठेकेदार को बचाया, पलटी मारने के मामले में तोड़ा रिकॉर्ड…

रायगढ़। राजनीति में कोई हमेशा दोस्त नहीं होता, और हमेशा दुश्मन भी नहीं होता। यह बात रायगढ़ नगर निगम महापौर के बारे में सार्थक होती है। जनवरी में जिस काम में मीनमेख निकालकर कार्रवाई के लिए आयुक्त से शिकायत की थी, उसी में ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने पर बचा लिया गया। बिना अधिकार के आयुक्त के आदेश को ओवरलैप करते हुए बहाली का प्रस्ताव पास कर दिया। ऐसा अनोखा मामला बेहद कम देखने में आता है। यह मामला जनवरी 2026 का है। वार्ड 44 में नाली निर्माण में गुणवत्ताहीन कार्य कराया जा रहा था। इसकी शिकायत वार्ड 44 के पार्षद ने महापौर जानकी काटजू से की।

महापौर ने निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इसके बाद आयुक्त नगर निगम को पत्र लिखा। 22 जनवरी 2026 को लिखे पत्र में महापौर ने लिखा नाली के दोनों तरफ ढाले जा रहे रिटेनिंग वॉल का निर्माण घटिया स्तर का पाया गया जिसे छिपाने के लिए प्लास्टर किया गया था। ओवर साइज का बोल्डर उपयोग किया गया, जिससे गुणवत्ता प्रभावित हुई। नाली का ढलान मेंटेन नहीं किया गया, जिससे जल भराव होगा। इस संबंध में उन्होंने आयुक्त को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था।
आयुक्त ने निर्माण का निरीक्षण करने के बाद ठेकेदार एमएस कंस्ट्रक्शन संचालक यथार्थ षड़ंगी को नोटिस दिया।

दरअसल नाली का निर्माण पुराने नाले के लेबल में न करके ऊपर कर दिया जिससे पानी रुक रहा था। सुधार करने का निर्देश मिलने के बावजूद ठेकेदार ने ध्यान नहीं दिया। वार्ड पार्षद और महापौर की शिकायत पर आयुक्त ने चार बार नोटिस दिया लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। आयुक्त ने एमएस कंस्ट्रक्शन को ब्लैक लिस्ट कर दिया। इसके बाद महापौर का एक्शन शुरू हुआ। उन्होंने अपने चेम्बर में ही एक प्रस्ताव टाइप करवाकर ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट से वापस बहाल कर दिया।

हास्यास्पद स्थिति का जिम्मेदार कौन
महापौर ने अपील समिति के जरिए प्रस्ताव एमआईसी में ले आए। वहां से प्रस्ताव पारित करवाकर ब्लैक लिस्ट से बहाल भी कर दिया। नियम के मुताबिक आयुक्त के आदेश को इस तरह नहीं पलटा जा सकता। महापौर के प्रस्तावित आदेश की वैधता ही नहीं है। इस तरह के प्रस्तावों को मंजूरी देना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। एक तरह से उन्होंने आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में प्रवेश कर लिया जो गलत है। इस घटना पर पूरे नगर निगम में चटखारे लेकर चर्चा की जा रही है। सवाल यह है कि जिस घटिया निर्माण की शिकायत खुद महापौर ने की, उसमें कार्रवाई होने पर पलटी क्यों मारी?

Sunil Agrawal

Chief Editor - Pragya36garh.in, Mob. - 9425271222

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