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जाति प्रमाण पत्र हाईकोर्ट : परिवार में वैध प्रमाण पत्र होने पर 1950 के दस्तावेज जरूरी नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम आदेश….

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी परिवार के सदस्य के पास पहले से वैध जाति प्रमाण पत्र मौजूद है, तो केवल वर्ष 1950 के दस्तावेजों के अभाव में उसी परिवार के अन्य पात्र सदस्यों को जाति प्रमाण पत्र देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण निर्देश

जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि परिवार के किसी सदस्य का वैध जाति प्रमाण पत्र उपलब्ध है और ग्राम सभा या ग्राम स्तरीय समिति यह प्रमाणित करती है कि आवेदक उसी परिवार और उसी जाति से संबंधित है, तो संबंधित अधिकारी विधि अनुसार त्वरित कार्रवाई करते हुए जाति प्रमाण पत्र जारी करें।

1950 के दस्तावेजों की अनिवार्यता पर राहत

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डॉ. प्राची दीवान ने न्यायालय को बताया कि प्रदेश में कई भूमिहीन और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के पास वर्ष 1950 के राजस्व या अन्य अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उनके बच्चों को शिक्षा, छात्रवृत्ति, प्रवेश और रोजगार के लिए आवश्यक जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

60 दिनों के भीतर जारी करें प्रमाण पत्र

हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवेदन के साथ प्रस्तुत आवश्यक दस्तावेजों की समयबद्ध जांच कर निर्धारित प्रक्रिया पूरी की जाए और 60 दिनों के भीतर जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि पात्र आवेदकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगवाए जाएं।

कई परिवारों को मिलेगा लाभ

इस आदेश से उन हजारों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके परिवार के किसी सदस्य के पास पहले से वैध जाति प्रमाण पत्र है, लेकिन अन्य सदस्यों को 1950 के दस्तावेजों के अभाव में प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा था।

Sunil Agrawal
Sunil Agrawal
Chief Editor - Pragya36garh.in, Mob. - 9425271222
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