कबूतर जासूस नही, पैरों में लगे टैग के चलते लोगों में बना था कौतूहल का विषय… जानिए पूरा मामला
कोंडागांव। सोमवार को आया कबूतर जासूस नहीं था। उसके पैरों में रिंग लगे होने और उस पर कुछ लिखे होने से उसका इस्तेमाल जासूसी के लिए किए जाने के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन जांच के बाद यह खुलासा हुआ कि यह कबूतर जासूसी के काम में नहीं लगा था बल्कि रेसिंग का प्रतिभागी था जो 8 अप्रैल को तेलंगाना से उड़ान भरा और रास्ता भटकर कर 12 अप्रैल को साढ़े 3 सौ किमी दूर तेलंगाना से यहां आ पहुंचा। खराब मौसम के कारण रास्ता भटकर यहा आना बताया गया है।
दोनो पैरो मे प्लास्टिक गोल जैसा बैंड
कोण्डागाॅव थाना मे लिखित आवेदन के मुताबिक दिनांक 13.04.2021 के सुबह 09.00 बजे वह अपने घर के अन्दर था तभी स्लेटी काले कलर का कबूतर चलता हुआ उसके पास आया जिसके दोनो पैरो मे प्लास्टिक गोल जैसा बैंड बन्धा हुआ था इसकी सूचना पुलिस अधीक्षक कोण्डागांव सिद्धार्थ तिवारी को दी गई, पुलिस अधीक्षक द्वारा तत्काल संज्ञान में लेते हुए उक्त कबूतर के संबंध में जानकारी एकत्र करने हेतु अनुविभागयीग अधिकारी कोण्डागांव के नेतृत्व में थाना कोण्डागांव को निर्देशित किया गया।
कबूतर की प्रजाति रेसिंग होमर
जाॅच के दौरान उक्त कबूतर के संबंध में पशु चिकित्सा अधिकारी कोण्डागाॅव से उक्त कबूतर के संबन्ध मे राय मंागी गई जिस पर उनके द्वारा बताया गया कि कबूतर की प्रजाति रेसिंग होमर (Racing Homer)बताया गया है । पशु चिकित्सक के द्वारा बताये गये जानकारी के आधार पर कबूतर रेस के संबंध में जानकारी एकत्र की गई जिससे पता चला कि यह कबूतर सामान्यतः दक्षिण भारत में खेल (Racing) प्रतियोगिता में उपयोग किया जाता है।
जानिए कबूतर के बारे में
सामान्यतः इस प्रजाति का कबूतर का उपयोग कबूतर खेल हेतु किया जाता है। जाॅच के दौरान पता चला कि उक्त कबूतर के स्वामी का नाम एन0 नागासेल्वम (N. Nagaselvum) पिता का नाम नागार्जन Tiruvallur , Tamilandu का होना पाया गया है । उपरोक्त कबूतर Legand Racing Pigeon Society के रजिस्टर नंबर 305/19 के अंतर्गत पंजीकृत है।
खराब मौसम के कारण रास्ता भटकर यहां पहुंचा
कबूतर स्वामी एन नागासेल्वम द्वारा बताया गया कि दिनांक 08.04.2021 को तमिलनाडू में आयोजित कबूतर रेस में शामिल था जो खराब मौसम के कारण रास्ता भटकर यहा आना बताया गया है ।