पुलिस चौकी में SP के प्रवेश पर रोक, कारण जानकर हो जाएंगे हैरान…
महासमुंद। जिले के दूरस्थ अंचल के पुलिस चौकी बुंदेली में SP के प्रवेश पर रोक है। चौकिए नहीं जनाब ! दरअसल पुलिस चौकी में SP (पुलिस अधीक्षक) के प्रवेश पर रोक नहीं है। यहां एसपी (सरपंच पति) (SP ban into these police station) के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। क्यों ऐसा किया गया है, जानते हैं पुलिस के जाबांज से। लंबे अर्से तक क्राइम स्क्वायड का हिस्सा रहे एएसआई विकास शर्मा इस पुलिस चौकी के प्रभारी हैं। वे जब से इस दूरस्थ अंचल के पुलिस चौकी में पदस्थ हुए हैं, नित नए-नए प्रयोग से सुर्खियों में हैं। कभी ग्रामीणों को महुआ बेचने-खरीदने के लिए रजिस्टर रखने की समझाइश देते हैं।

तो कभी मछुआरा बनकर शराब की तस्करी रोकने छापामारी करते हैं। बच्चों को गुटखा का लत छुड़ाने के लिए कॉपी-किताब बांटते हैं। इस बीच पता चला कि ग्रामीणों की समस्या लेकर महिला सरपंच पुलिस के पास नहीं आते हैं। उनकी जगह सरपंच पति (SP ban into these police station) खुद को एसपी (सरपंच पति) का रौब दिखाते हुए पुलिस चौकी आते हैं। पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को इससे झटका लग रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए विकास शर्मा ने नोटिस चस्पा करवा दिया है।
महिला सशक्तिकरण के लिए
विकास का कहना है कि महिलाओं को वोट देकर ग्रामीण अपना जनप्रतिनिधि चुनते हैं। लेकिन, बाद में पूरे काम-काज का जिम्मा या तो उनके पति देखते हैं या फिर उनका देवर या ससुर। ऐसे में जिस मकसद से महिलाओ की भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो पाती है। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने उन्होंने एक नया प्रयोग किया है।
एसपी के प्रवेश पर इसलिए रोक
महासमुंद जिले के बुंदेली चौकी प्रभारी विकाश शर्मा ने अनूठा पहल करते हुए चौकी में एक नोटिस चस्पा किया है। जिसमें लिखा है “कृपया सरपंच पति बताकर चौकी में प्रवेश न करें। लोगों की समस्या के लिए चुने हुए जनप्रतिनिधि ही प्रवेश करें।” इस नोटिस से आस-पास के उन पंचायतों में हलचल मच गई है। जहां पर अधिकांश पंचायतों में महिला सरपंच हैं। और क्षेत्र में एसपी (सरपंच पति) का दबदबा है।
आगे आएं महिलाएं
चौकी प्रभारी विकास शर्मा का कहना है कि बहुत बार ऐसे अवसर आए जब लोग चौकी पहुंच कर खुद को एसपी बताते हैं। और एसपी का अर्थ पूछने पर सरपंच पति कहते हैं। यह चुने हुए महिलाओं के अधिकार का हनन है। उन्हें प्रशासनिक कामकाज में आगे आने का मौका ही नहीं मिल पाता है। इसलिए ऐसा किया गया है कि महिलाओं में जागरूकता आए। उन्होंने निवेदन किया कि लोगों की समस्याओं के लिए चुने हुए जनप्रतिनिधि ही खुद आगे आएं। अपने पति को न भेजें।