सिर्फ हम ही नहीं दुनिया के दो दर्जन देशों में है लॉकडाउन, दुनिया के 2 अरब लोग हैं घरों में कैद तो आप भी घर से मत निकलिये हुजूर…

सिर्फ हम ही नहीं दुनिया के दो दर्जन देशों में है लॉकडाउन, दुनिया के 2 अरब लोग हैं घरों में कैद तो आप भी घर से मत निकलिये हुजूर…
सुनील अग्रवाल
खरसिया । दुनियाभर में कोरोनावायरस का खौफ लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। कई लोगों को सरकार के लॉकडाउन से दिक्कत है लेकिन दुनियाभर के दो दर्जन से ज्यादा देशों ने लॉकडाउन कर रखा है ताकि वो अपने नागरिकों को इस बीमारी के कहर से बचा सकें।
यूरोप और दुनिया के बेहद विकसित देशों में से एक फ्रांस में कोरोनावायरस से सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं। चीन, ईरान, इटली और स्पेन के बाद फ्रांस पांचवां ऐसा देश है, जहां कोरोना वायरस का कहर सबसे अधिक है। फ्रांस ने पूरे देश में 16 मार्च से लॉकडाउन कर रखा है और लोगों के घरों से बाहर निकलने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है।

उधर, कोरोनावायरस के कहर का केंद्र यूरोपीय देश इटली पूरे देश में 10 मार्च से ही लॉकडाउन का ऐलान कर चुका है। इटली में कोरोना वायरस का कहर इस कदर है कि यहां मरने वालों का आंकड़ा दस हजार के पास पहुंच गया है। सरकार ने घर से बाहर निकलने वालों पर तीन हजार यूरो यानि करीब ढाई लाख रुपये जुर्माने का ऐलान किया है। देश मेंं छह करोड़ लोग पंद्रह दिनों से घरों में कैद हैं। कोरोनावायरस के कहर का शिकार यूरोपीय देश स्पेन इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर चुका है और यहां 14 मार्च से लॉकडाउन कड़े प्रतिबंधों के साथ लागू हैं।

दूसरे देशों की तरह अपने देश को कोरोना के कहर से बचाने के लिए दक्षिण अफ्रीका ने भी 26 मार्च से लॉकडाउन की घोषणा कर दी है। सरकार ने लोगों के घरों से बाहर निकलने पर रोक लगा दी है। पुलिस और सेना को सड़कों पर उतार दिया गया है। न्यूजीलैंड में भी बुधवार से एक महीने का लॉकडाउन घोषित किया गया है। ब्रिटेन ने सोमवार से लॉकडाउन कर दिया है। कुवैत, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, पोलैंड, डेनमार्क, कोलंबिया, आयरलैंड, पुर्तगाल, चेक गणराज्य, बेल्जियम, नार्वे, चीन, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, इटली, स्पेन, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी और स्लोवेनिया, जार्डन और इस्राइल में भी लॉकडाउन हैं। दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका ने पूरे देश में तो नहीं बल्कि कई राज्यों में लॉकडाउन कर दिया है।

भारत में १४ अप्रेल तक लॉक डाउन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने २४ मार्च की रत १२ बजे से से आगामी २१ दिन के लिए भारत भर में लॉक डाउन की घोषणा कर दी है जिससे की इस महामारी पर काबू किया जा सके प्रज्ञा छत्तीसगढ़ परिवार आप सभी से अपील करता है की इस मुश्किल घडी में अपने देश का साथ दें , लॉक डाउन के दौरान घरों में ही रहे जिससे इस बीमारी के संक्रमण को फैलने से रोका  सके।

केवल मरीज के लिए नहीं है सोशल डिस्टेंसिंग

यहाँ हम बता दें की  कुछ लोग गलतफहमी में हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग केवल मरीज के लिए है. यह सोच गलत है. सोशल डिस्टेंसिंग हर नागरिक, के लिए जरुरी है. कुछ लोगों की लापरवाही और गलत सोच आपको, आपके बच्चों, माता पिता, परिवार, दोस्तों और पूरे देश को बहुत बड़ी मुश्किल में झोंक देगी. अगर ऐसी लापरवाही जारी रही तो भारत को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है. यह कीमत कितनी होगी इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है.

लॉकडाउन क्या है, यह क्यों किया जाता है..

कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लॉकडाउन है. चूंकि, यह मौका देश के लोगों के सामने पहली बार आया है, इसलिए इसके बारे में आपके लिए जानना बहुत जरूरी है. इसके बारे में सही जानकारी होने से आपको इससे निपटने में काफी मदद मिलेगी. लॉकडाउन होने पर आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर दूसरी सभी सेवा पर रोक लगा दी जाती है

लॉकडाउन के बारे में पहले से ज्यादा जानकारी नहीं होने से कुछ लोग घबरा रहे हैं. खासकर इसकी कर्फ्यू से तुलना करने पर उनमें डर है. लेकिन, इससे आपको घबराने की जरूरत नहीं है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं. क्या होता है लॉकडाउन?

लॉकडाउन का अर्थ है तालाबंदी. लॉकडाउन एक आपातकालीन व्यवस्था है जो किसी आपदा या महामारी के वक्त लागू की जाती है. जिस इलाके में लॉकडाउन किया गया है उस क्षेत्र के लोगों को घरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती है. उन्हें सिर्फ दवा और खाने-पीने जैसी जरूरी चीजों की खरीदारी के लिए ही बाहर आने की इजाजत मिलती है, इस दौरान वे बैंक से पैसे निकालने भी जा सकते हैं. जिस तरह किसी संस्थान या फैक्ट्री को बंद किया जाता है और वहां तालाबंदी हो जाती है उसी तरह लॉक डाउन का अर्थ है कि आप अनावश्यक कार्य के लिए सड़कों पर ना निकलें. अगर लॉकडाउन की वजह से किसी तरह की परेशानी हो तो आप संबंधित पुलिस थाने, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक अथवा अन्य उच्च अधिकारी को फोन कर सकते हैं. लॉकडाउन जनता की सहूलियत और सुरक्षा के लिए किया जाता है. सभी प्राइवेट और कॉन्ट्रेक्ट वाले दफ्तर बंद रहते हैं, सरकारी दफ्तर जो जरूरी श्रेणी में नहीं आते, वो भी बंद रहते हैं।

Sunil Agrawal

Chief Editor - Pragya36garh.in, Mob. - 9425271222

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