देखिये ट्रांसफर हुए अधिकारियों की पुरी सूची…








दिल्ली। देश में बैंकिंग सेक्टर के बुरे दिन आ गए हैं. ऐसा लगता है. एक के बाद एक बैंक दिवालिया होते जा रहे हैं और लोगों की मेहनत का पैसा डूबता जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक सरकार वित्तीय अनियमितताओं के चलते संकट में फंसी दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन यानि कि डीएचएफएल के खिलाफ गंभीर धोखाधड़ी की जांच का आदेश दे सकती है. यदि ऐसा हुआ तो डीएचएफएल में एक लाख लोगों की जमा एफडी फंस सकती हैं।
कंपनी पर कुल 83,873 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है. डीएचएफएल ने 25 ऐसी कंपनियों को 14 हजार करोड़ रुपये का कर्ज बांटा है जिनका मुनाफा महज लाख रुपये था।

रायपुर। निलंबित SP रजनेश सिंह के विरुद्ध चल रही जाँच पर कैट ने स्टे दे दिया है। कैट ने विभागीय जांच पर कड़ी टिप्पणी करते हुए आदेश में लिखा है…
“प्रथम दृष्टया ही यह कार्यवाही नियम और प्राकृतिक न्याय के ख़िलाफ़ प्रतीत होती है”
कैट के रमेश सिंह ठाकुर की एकल सदस्यीय बेंच ने कार्यवाही पर स्थगन देते हुए प्रकरण की अगली तिथी 20 नवंबर घोषित की है।कैट ने विभागीय जाँच की प्रक्रिया को नियम विरुद्ध माना है और आरोप पत्र के साथ संबंधित अभिलेख नहीं दिए जाने के संबंधित कई अन्य ख़ामियों को गंभीर माना है।

दिल्ली। आजकल लोग आनलाइन शापिंग पर खूब भरोसा कर रहे हैं. इतना ही नहीं इनके चक्कर में लोगों को चूना भी लग रहा है. इसका ताजा शिकार भाजपा के सांसद की बीवी बन गई हैं।
दरअसल पश्चिम बंगाल के मालदा से बीजेपी सांसद खगेन मुरमू की बीवी ऑनलाइन ठगी का शिकार हो गई हैं. खगेन मुरमू ने अपनी बीवी के लिए दीपावली के मौके पर अमेजन से सैमसंग मोबाइल फोन का ऑर्डर दिया था।
जब बीजेपी सांसद की बीवी ने मोबाइल फोन की डिलीवरी ली तो देखा कि कंपनी ने उन्हें सैमसंग मोबाइल फोन के बजाय रैडमी के डिब्बे में दो पत्थर भेज दिए हैं. भाजपा सांसद ने इस ठगी के मामले को लेकर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया है।




तस्वीर जशपुर जिले के लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह की है ।
बताया जा रहा हैं कि यह तस्वीर बहुत पुरानी नही किसी रसूखदार के द्वारा इस विश्राम गृह के वीआईपी रूम जिसे “मैनी” के नाम से जाना जाता है वहाँ काफी देर तक शराबबाजी होती रही थी, इसी बीच किसी ने इस नजारे की तस्वीरे अपने कैमरे में कैद कर लिया। धीरे धीरे इस दृश्य की एक एक तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल होने लगी।

सबसे खास बात ये है कि जिस कमरे से शराबखोरी के बाद की तस्वीरे कैमरे में कैद हुई उसी कमरे के बगल में पत्थलगाँव एसडीएम भी वर्तमान में निवासरत थे, याने कहा जाय तो प्रशासनिक अधिकारी के होने का भी कोई खौफ नही और बेखौफ तौर पर यहाँ ये सब चलता रहा।वैसे जब बात रसूख की हो तो रसूख से बड़ा कुछ नही रह जाता।वैसे इस दृश्य को देखकर ज्यादा कुछ लिखने या बोलने की जरूरत नही है और न ही इस मामले में कोई भी जिम्मेदार कुछ बोलना चाहेंगे।
पत्थल गाँव तहसील ऑफिस के रीडर रवानी ने एक स्थानीय वीआईपी के लिए एक नम्बर कमरा खुलवाने के लिए मौखिक तौर पर कहा था ।उनके कहने पर जब रेस्ट हाउस के कर्मचारियों ने एक नम्बर कमरा खोला तो कमरा देखकर वीआईपी भड़क गए, और कर्मचारियों के साथ गाली ग्लौज करने लगे। इसके बाद कर्मचारियों ने उनके लिए भयवश 4 नम्बर वीआईपी कमरा खोल दिया।यह वीआईपी कमरा है यह कमरा बगैर बड़े वीआईपी के आगमन के नही खुलता लेकिन रेस्ट हाउस प्रभारी छुट्टी में घर गए थे, और छोटे कर्मचारी समझ नही पाए ।
रेस्ट हाउस में बियर की बोतल
इस मामले में जब एसडीएम पत्थलगाँव से बात की गई तो उन्होंने इस मामले में अनभिज्ञता जाहिर की और कहा कि वो तुरन्त पूरे मामले की जानकारी लेंगे।

एन एस भगत डिप्टी कलेक्टर जशपुर के विरुद्ध धारा 20 (2)के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही करने हेतु कमिश्नर सरगुजा को किया निर्देशित, सूचना के अधिकार अधिनियम का पालन नहीं किया गया।
राज्य सूचना आयोग के समक्ष डी० के० सोनी अधिवक्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा सूचना के अधिकार के तहत जिला अध्यक्ष कार्यालय अंबिकापुर के तत्कालीन जन सूचना अधिकारी श्री एन एस भगत के द्वारा जानकारी प्रदान नहीं करने के कारण तथा सूचना के अधिकार अधिनियम के नियमों का पालन नहीं करने के कारण राज्य सूचना आयोग के समक्ष शिकायत प्रस्तुत किया गया था जिस पर राज्य सूचना आयोग द्वारा शिकायत प्रकरण 482/ 2015 पंजीबद्ध किया गया था जिसमें माननीय राज्य सूचना आयोग द्वारा सभी पक्षों को सुनवाई करने के उपरांत दिनांक 19/07/2019 को अंतिम आदेश पारित किया गया है , जिसमें जन सूचना अधिकारी श्री एन एस भगत वर्तमान डिप्टी कलेक्टर जशपुर को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया तथा दोषी पाए जाने के उपरांत सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 के तहत श्री एन एस भगत से स्पष्टीकरण प्राप्त कर अनुशासनात्मक कार्यवाही की अनुशंसा संभागायुक्त सरगुजा से की गई है तथा माननीय कमिश्नर महोदय सरगुजा संभाग को उक्त आदेश के तहत कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया है। तथा जिस पर डी के सोनी द्वारा संभागायुक्त को दिनांक 2/09/ 2019 को पत्र लिखकर राज्य सूचना आयोग के आदेश का पालन कराए जाने का निवेदन किया गया है।




