रायगढ़। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद बड़े शहर तो बढ़े, लेकिन छोटे कस्बे भी तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ते गए हैं। शहरी निकायों की संख्या भी बढ़ती गई। लेकिन सरकार इन संस्थाओं को हमेशा दोयम दर्जे का ही मानती आई। यही कारण है कि आधे से अधिक नगर पंचायतों में मातहतों को सीएमओ जैसा पद दिया। रायगढ़ ऐसे तीन नगर पंचायत हैं। शहरी निकायों के नाम पर केवल प्रदेश में केवल नगर निगमों को ही गिना जाता है। बाकी को सरकार बैसाखी का सहारा देकर चला रही है। प्रदेश में कुल 194 नगरीय निकाय हैं। इनमें कुल 14 नगर निगम, 59 नगर पालिका और 121 नगर पंचायत हैं।
इनमें से 82 में मातहत कर्मचारियों को सीएमओ का प्रभार दिया गया है। 17 नगर पालिका परिषद और 65 नगर पंचायत ऐसे हैं जहां सहायक ग्रेड-2 को भी सीएमओ बनाया गया है। विवादों में रहने वाली पोस्टिंग पर सरकार भी कोई सख्त फैसला नहीं कर पा रही है। कई बार तो ऐसा हो गया है कि जिस निकाय में भ्रष्टाचार के कारण अधिकारी निलंबित हुआ था, कुछ समय बाद उसकी पोस्टिंग वहीं हो गई। वर्तमान में रायगढ़ जिले के नपं किरोड़ीमल नगर में देवेंद्र सिंह सीएमओ हैं जो सहायक राजस्व निरीक्षक हैं।
इसी तरह नपं धरमजयगढ़ में प्रभाकर शुक्ला को सीएमओ बनाया गया है जो राजस्व उप निरीक्षक हैं। इन निकायों में विकास कार्यों को लेकर विवाद और भ्रष्टाचार इसीलिए होता है क्योंकि काम पर इनका नियंत्रण ही नहीं होता। इस तरह की पदस्थापना के पीछे तगड़ी लॉबिंग होती है।