विला के अंदर चल रहा था सट्टे का साम्राज्य रायगढ़ पुलिस ने गोवा जाकर पकड़ा करोड़ों का सट्टा…

विला के अंदर चल रहा था सट्टे का साम्राज्य रायगढ़ पुलिस ने गोवा जाकर पकड़ा करोड़ों का सट्टा…

रायगढ़ पुलिस ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के कुशल एवं आक्रामक नेतृत्व में मध्य भारत के अब तक के सबसे बड़े ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा और हवाला नेटवर्क को ध्वस्त करने में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। पुलिस की विशेष टीम ने कुख्यात ‘मन्नू नथानी’ गैंग के आर्थिक साम्राज्य पर सीधा प्रहार करते हुए गोवा के कैंडोलिम बीच क्षेत्र में स्थित एक आलीशान किराए के विला में संगठित छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया। इस हाई-प्रोफाइल रेड के दौरान पुलिस ने सट्टा सिंडिकेट के छह मुख्य संचालकों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठकर करोड़ों रुपये का सट्टा बाजार चला रहे थे। पकड़े गए सटोरियों के पास से मौके पर 10 नग मोबाइल फोन, हिसाब-किताब के दस्तावेज और भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। इस रैकेट के तार रायगढ़, रायपुर, सक्ती, खरसिया और नागपुर से होते हुए सीधे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुबई से जुड़े हुए थे, जहां से महादेव सट्टा ऐप की तर्ज पर पूरा आर्थिक चैनल संचालित हो रहा था।

पुरानी गिरफ्तारियों की कड़ियों से खुला अंतर्राज्यीय हवाला लिंक
इस व्यापक नेटवर्क के भंडाफोड़ की कहानी हाल ही में रायगढ़ के थाना कोतवाली में दर्ज अपराध क्रमांक 217/2026 एवं 218/2026 के साथ शुरू हुई। पुलिस ने इन मामलों में छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4 और 7 के तहत आरोपी करन चौधरी उर्फ करन अग्रवाल, पुष्कर अग्रवाल तथा सुनील अग्रवाल को हिरासत में लिया था। इन आरोपियों से पुलिसिया अंदाज में की गई कड़ाई से पूछताछ के दौरान पहली बार खरसिया निवासी अमित मित्तल के सट्टा सिंडिकेट और करोड़ों रुपये के हवाला लेनदेन के पुख्ता सुराग मिले। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर साइबर थाना और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने तकनीकी निगरानी का एक जाल बुना। इस सर्विलांस के जरिए तकनीकी इनपुट मिले कि पुलिस से बचने के लिए इस गैंग के मुख्य खाईवाल छत्तीसगढ़ से हैदराबाद और मुंबई होते हुए गोवा भाग गए हैं और वहीं से पूरा सट्टा साम्राज्य ऑपरेट कर रहे हैं।

सबूत नष्ट करने की फिराक में थे आरोपी, गोवा के विला घेरकर दबोचा
आरोपियों की सटीक लोकेशन मिलते ही एसएसपी शशि मोहन सिंह के कड़े निर्देशन तथा नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) मयंक मिश्रा और डीएसपी उत्तम प्रताप सिंह के जमीनी नेतृत्व में साइबर थाना रायगढ़ की एक विशेष टीम को तुरंत गोवा रवाना किया गया। पुलिस टीम ने कैंडोलिम बीच इलाके के उस विला की घेराबंदी की जहां सट्टा चल रहा था। पुलिस की दबिश के दौरान वहां सट्टे का पूरा सेटअप खुला हुआ था। जैसे ही सटोरियों को पुलिस के आने की भनक लगी, विला के भीतर हड़कंप मच गया। आरोपी आनन-फानन में अपने कॉलिंग फोन, लैपटॉप, हिसाब-किताब की डायरियां और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेजों को नष्ट कर फरार होने की फिराक में थे। लेकिन पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें मौका ही नहीं दिया और मौके से खरसिया के अमित मित्तल सहित रायपुर के मोहित सोमानी, प्रकाश वाधवानी, आकाश मोटवानी, राहुल खंडेलवाल उर्फ बाबू और सुलभ खंडेलवाल उर्फ छोटा बाबू को रंगे हाथों दबोच लिया।

हाइटेक सट्टेबाजी का खुलासा, समय का एडवांटेज लेने के तीन शातिर तरीके
पकड़े गए खाईवालों के मोबाइल डेटा और तकनीकी विश्लेषण से यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह सिंडिकेट क्रिकेट जगत में सट्टेबाजी के लिए बेहद परिष्कृत और हाइटेक तरीकों का इस्तेमाल कर रहा था। पूछताछ में सट्टा चलाने के तीन प्रमुख तरीके सामने आए। पहले तरीके के तहत सटोरिए ‘अभिनंदन बुक या लाइन’ के माध्यम से सीधे रायपुर से क्रिकेट सेशन का भाव लेते थे, जिसके बाद वे एपीके (APK) आधारित जूम ऐप पर जुड़कर अपने नीचे काम करने वाले छोटे बुकीज और प्लेयर्स तक भाव डिस्ट्रीब्यूट करते थे। दूसरे तरीके में, ये शातिर अपराधी मैच के सीधे प्रसारण में मिलने वाले समय का बेजा फायदा उठाते थे। इन्होंने अपने फोन में एपीके फाइल के जरिए ‘प्रगति टीवी ऐप’ और ‘स्टार लाइव’ जैसे प्रतिबंधित ऐप्स डाउनलोड कर रखे थे, जिन पर सामान्य टीवी प्रसारण की तुलना में लगभग 7 सेकंड पहले मैच लाइव दिखता था। इस 7 सेकंड के एडवांटेज का लाभ लेकर वे कॉलिंग वर्चुअल ऐप पर पहले से जुड़े नीचे के खाईवालों को तुरंत भाव बताकर ठगी करते थे। तीसरे तरीके के रूप में, वे महादेव ऐप की ही तरह ‘ऑल पैनल एक्सचेंज’, ‘ताज 777’ और ‘डायमंड एक्सचेंज’ जैसे बड़े ऑनलाइन बेटिंग ऐप्स की आईडी ग्राहकों को उपलब्ध कराते थे, जिस पर उन्हें सीधे 10 प्रतिशत तक का मोटा कमीशन मिलता था।

सीरियल नंबर वाले नोटों का खेल और मन्नू नथानी गैंग का अप-लिंक
जांच में यह बात भी पुख्ता हुई है कि इस अवैध सट्टा व्यापार को सहारा देने के लिए एक समानांतर हवाला नेटवर्क काम कर रहा था। आरोपियों के मोबाइल से मिले चैट और साक्ष्यों से साफ हुआ है कि ये सटोरिए रुपयों के भौतिक लेनदेन से बचने के लिए नोटों के सीरियल नंबर एक-दूसरे से साझा करते थे और केवल इसी भरोसे के आधार पर करोड़ों की रकम इधर से उधर ट्रांसफर हो जाती थी। इस नेटवर्क की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मामले में जुड़े अन्य आरोपियों से पूर्व में ही एक करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम नकदी जब्त की जा चुकी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गिरफ्तार सभी छह आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास है।

गिरोह का मुख्य लीडर मोहित सोमानी है, जिस पर रायपुर के कई थानों में सट्टे के मामले दर्ज हैं और उसके संबंध खाईवाल करन चौधरी से भी रहे हैं। वहीं अमित मित्तल पर भी खरसिया कोतवाली, चक्रधरनगर और घरघोड़ा थानों में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के केस दर्ज हैं। ये सभी आरोपी पहले मन्नू नथानी गिरोह से एजेंट के तौर पर जुड़े थे, जो धीरे-धीरे खुद बड़े सट्टा केबल के मालिक बन बैठे। इन्हें दुबई से बड़े खाईवालों के जरिए सट्टा आईडी मिलती थी, जिसे ये मध्य भारत के नागपुर और रायपुर जैसे बड़े शहरों में खपाते थे।


कप्तान की दोटूक: संगठित अपराधों और माफियाओं का होगा समूल नाश
इस बेहद कामयाब और साहसिक ऑपरेशन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने जिले के अपराधियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि रायगढ़ पुलिस संगठित अपराध, ऑनलाइन सट्टा माफिया और हवाला सिंडिकेट के खिलाफ पूरी तरह से आक्रामक रुख अपनाए हुए है। समाज में अवैध कारोबार के जरिए आर्थिक ताना-बाना बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। तकनीक के जरिए अपराध करने वाले अपराधियों से पुलिस और भी ज्यादा आधुनिक होकर निपट रही है और यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक ऑनलाइन सट्टा माफिया के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म नहीं कर दिया जाता।

इन जांबाज अधिकारियों और जवानों की टीम ने गोवा में गाड़े सफलता के झंडे
इस जटिल और चुनौतीपूर्ण अंतर्राज्यीय ऑपरेशन को एडिशनल एसपी अनिल सोनी, सीएसपी मयंक मिश्रा, साइबर डीएसपी उन्नति ठाकुर तथा डीएसपी उत्तम प्रताप सिंह के कुशल मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। गोवा के विला में घुसकर आरोपियों को दबोचने वाली जमीनी टीम में प्रभारी साइबर पुलिस थाना निरीक्षक विजय चेलक, सहायक उप निरीक्षक नन्द कुमार सारथी, प्रधान आरक्षक दुर्गेश सिंह राणा, बृजलाल गुर्जर, करुणेश राय तथा रूप राम पटेल की मुख्य भूमिका रही। इसके साथ ही पूरी मुस्तैदी से इस केस को सुलझाने में आरक्षक प्रशांत पंडा, महेश पंडा, धनंजय कश्यप, पुष्पेंद्र जाटवर, जगमोहन ओगर, विकास प्रधान, रविन्द्र कुमार गुप्ता, नवीन शुक्ला, मनोज पटनायक, गोविंद पटेल, रोशन एक्का, महिला आरक्षक मेनका चौहान तथा नव आरक्षक उमेश सिदार ने अपनी सराहनीय और अहम भूमिका निभाई है।

कानून के शिकंजे में आए सटोरियों का पूरा ब्योरा
रायगढ़ पुलिस ने शिकंजा कसते हुए सभी छह सटोरियों को कोतवाली थाना के अपराधों में विधिवत गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से जुड़े पकड़े गए आरोपियों की विस्तृत सूची इस प्रकार है:

अमित मित्तल, पिता अनूप मित्तल, उम्र 30 साल, निवासी स्टेशन रोड खरसिया।
मोहित सोमानी (गिरोह का मुख्य लीडर), पिता मुरलीधर सोमानी, उम्र 38 साल, निवासी समता कॉलोनी आजाद चौक रायपुर।
प्रकाश वाधवानी, पिता जगदीश वाधवानी, उम्र 28 साल, निवासी चौबे कॉलोनी आजाद चौक रायपुर।
आकाश मोटवानी, पिता दीपक मोटवानी, उम्र 31 साल, निवासी कचहरी चौक थाना मौदहापारा जिला रायपुर।
राहुल खंडेलवाल उर्फ बाबू, पिता स्वर्गीय विनोद खंडेलवाल, उम्र 36 साल, निवासी मेग्नेटो सिग्नेचर होम, तेलीबांधा रायपुर।
सुलभ खंडेलवाल उर्फ छोटा बाबू, पिता सुनील खंडेलवाल, उम्र 33 साल, निवासी राम सागर पारा आजाद चौक रायपुर।
बैंक खातों और मोबाइल इनपुट पर पुलिस की पैनी नजर
रायगढ़ और साइबर पुलिस की संयुक्त टीम अब इन सभी छह शातिर आरोपियों के सीज किए गए बैंक खातों, जब्त 10 मोबाइल फोनों के कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) और तकनीकी इनपुट्स को खंगाल रही है। पुलिस का दावा है कि इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस पूरे नेटवर्क से जुड़े मध्य भारत के अन्य छोटे एजेंटों, सट्टा खेलने वाले स्थानीय प्लेयर्स और इन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने वाले मददगारों की पहचान की जा रही है, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें सरगर्मी से जुटी हुई हैं।

Sunil Agrawal

Chief Editor - Pragya36garh.in, Mob. - 9425271222

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