WhatsApp अपने यूजर्स के लिए एक ऐसा फीचल लाने की तैयारी कर रहा है, जिसका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था. अगर आपने स्टेटस पर फोटोवीडियो डालते समय कैप्शन में कोई गलती कर दी या बाद में उसे बदलना चाहा तो अब इसके लिए स्टेटस डिलीट करके दोबारा पोस्ट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कंपनी जल्द ऐसा फीचर ला रही है, जिससे स्टेटस पोस्ट करने के बाद भी उसका कैप्शन एडिट किया जा सकेगा.
ऐसे कर सकेंगे एडिट
WABetaInfo की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नया फीचर फिलहाल WhatsApp Beta for Android 2.26.30.1 वर्जन इस्तेमाल करने वाले कुछ बीटा टेस्टर्स के लिए जारी किया गया है. इस फीचर की मदद से यूजर स्टेटस पोस्ट करने के बाद 15 मिनट के अंदर उसके कैप्शन में बदलाव कर सकेंगे. इधर 15 मिनट के बाद कैप्शन एडिट नहीं किया जा सकेगा.
WhatsApp इस फीचर के साथ कैप्शन बदलने के दो ऑप्शन देने वाला है. पहला तरीका ये कि यूजर अपने शेयर किए गए स्टेटस की लिस्ट में जाकर Status Menu से सीधे Edit Caption ऑप्शन सकेंगे. इससे स्टेटस खोले बिना ही कैप्श बदला जा सकेगा.
दूसरा तरीका है स्टेटस के कैप्शन के पास एक पेंसिल आइकन दिखाई देगा. इस आइकन पर टैप करके यूजर तत्काल अपने कैप्श को एडिट कर पाएंगे. इससे टाइपिंग की गलती सुधारना या पूरा कैप्शन बदलना पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगा.
दूसरे यूजर को नहीं चलेगा पता
WhatsApp में जब किसी मैसेज को एडिट करते हैं तो उसके साथ Edited के लेबल दिखाई देता है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक स्टेटस के कैप्शन में बदलाव करने पर ऐसा कोई लेबल नहीं दिखेगा.
फिलहाल बीटा यूजर्स के लिए उपलब्ध
WhatsApp अभी ये फीचर सिर्फ कुछ बीटा यूजर्स के लिए उपलब्ध हुआ है, जिन्होंने Google Play Store से WhatsApp का लेटेस्ट बीटा वर्जन इंस्टॉल किया है. कंपनी इसे धीरे-धीरे सभई एड्रॉयड यूजर्स के लिए रोल आउट करेगी
लालटंकी की रेड में संचालिका महिला लक्ष्मी शर्मा और ग्राहक ऋषभ शर्मा गिरफ्तार
मिट्ठूमुड़ा दुर्गा चौक रेड में संचालिका महिला सुनीता मेहर और ग्राहक अभय सिंह पर कार्रवाई
रायगढ़। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी के मार्गदर्शन में प्रभारी नगर पुलिस अधीक्षक एवं साइबर डीएसपी श्रीमती उन्नति ठाकुर के नेतृत्व में थाना साइबर, कोतवाली एवं जूटमिल पुलिस की संयुक्त टीम ने शहर के दो अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमार कार्रवाई कर अनैतिक देह व्यापार के दो अड्डों का भंडाफोड़ किया। कार्रवाई के दौरान दो महिलाओं सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि दो नाबालिग बालिकाओं को संरक्षण में लेकर काउंसलिंग के बाद उनके परिजनों को सुपुर्द किया गया। दोनों मामलों में अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 एवं पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।
पहली कार्रवाई : लालटंकी दानीपारा में चल रहे देह व्यापार का भंडाफोड़
कोतवाली पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि लालटंकी दानीपारा स्थित लक्ष्मी शर्मा के मकान में लड़कियों को बुलाकर देह व्यापार कराया जा रहा है। सूचना के सत्यापन के लिए पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से एक पाइंटर ग्राहक को 1,500 रुपये देकर मकान भेजा। पूर्व निर्धारित संकेत मिलते ही प्रभारी सीएसपी एवं साइबर डीएसपी श्रीमती उन्नति ठाकुर के नेतृत्व में थाना प्रभारी साइबर विजय चेलक, उप निरीक्षक संजय नाग, ऐनु देवांगन, विजय एक्का एवं संयुक्त पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी।
छापेमारी के दौरान मकान में संचालिका लक्ष्मी शर्मा (46 वर्ष) पति मौजूद मिली। उसके कब्जे से पाइंटर को दिए गए 500-500 रुपये के तीन नोट (कुल 1,500 रुपये) एवं एक सैमसंग मोबाइल बरामद किया गया। तलाशी के दौरान मकान के एक कमरे में एक नाबालिग बालिका के साथ ऋषभ शर्मा (24 वर्ष) तथा दूसरे कमरे में एक अन्य नाबालिग बालिका मिली। मकान से आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई। पूछताछ में लक्ष्मी शर्मा ने स्वीकार किया कि वह पिछले एक-दो वर्षों से लड़कियों को बुलाकर अपने मकान में देह व्यापार करा रही थी तथा ग्राहकों से प्राप्त राशि में से लड़कियों को प्रतिदिन भुगतान करती थी।
जांच में आरोपियों द्वारा अवैध रूप से देह व्यापार कराकर आर्थिक लाभ अर्जित करना पाया गया। थाना कोतवाली में आरोपिया (1) लक्ष्मी शर्मा पति साजीव वर्गीस उम्र 46 वर्ष निवासी लाल टंकी दानीपारा वार्ड नम्बर 12 रायगढ़ (2) ऋषभ शर्मा पिता राजेश शर्मा उम्र 24 वर्ष निवासी लाल टंकी दानीपारा वार्ड नम्बर 12 रायगढ़ के विरूद्ध अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 की धारा 3, 4 एवं 5 तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 की धारा 14 के तहत कार्रवाई की गई है । रेस्क्यु करायी गई दोनों नाबालिगों का कॉउंसलिंग कराया जा रहा है ।
दूसरी कार्रवाई : मिट्ठूमुड़ा दुर्गा चौक में भी चल रहा था देह व्यापार
इसी दौरान थाना साइबर एवं थाना जूटमिल की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर मिट्ठूमुड़ा दुर्गा चौक स्थित सुनीता मेहर के मकान पर भी योजनाबद्ध कार्रवाई की। यहां भी पुलिस ने पहले पाइंटर ग्राहक भेजा और संकेत मिलते ही टीम ने मकान में दबिश दी। छापेमारी के दौरान सुनीता मेहर मौके पर मिली। मकान के एक कमरे में एक महिला तथा अभय सिंह (42 वर्ष) निवासी मूलतः जिला सिवान (बिहार), वर्तमान निवासी चिराईपानी लेबर कॉलोनी, पूंजीपथरा, संदिग्ध अवस्था में मिले। पूछताछ में दोनों ने अनैतिक कार्य के उद्देश्य से कमरे में होना स्वीकार किया।
तलाशी में आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई। मकान में मौजूद दो अन्य महिलाओं ने भी बताया कि वे सुनीता मेहर के बुलावे पर देह व्यापार के लिए वहां आई थीं। आरोपिया 1- सुनीता मेहर पति बिहारी लाल उर्फ राकेश मेहर उम्र 48 साल निवासी छातामुडा वर्तमान पता बाझीनपाली थाना जूटमिल रायगढ़ 2- अभय सिंह (42 वर्ष) निवासी मूलतः जिला सिवान (बिहार), वर्तमान निवासी चिराईपानी लेबर कॉलोनी, पूंजीपथरा पर थाना जूटमिल में अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 की धारा 3, 4 एवं 5 के तहत कार्रवाई की गई है। रायगढ़ पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में अनैतिक गतिविधियों, महिलाओं एवं बच्चों के शोषण तथा संगठित अपराधों के विरुद्ध इसी प्रकार की सघन कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।
एसएसपी शशि मोहन सिंह का संदेश
“महिलाओं और बच्चों के शोषण से जुड़े अपराधों के विरुद्ध रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। अनैतिक देह व्यापार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति या गिरोह को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। नागरिकों से अपील है कि ऐसे मामलों की सूचना तत्काल पुलिस को दें, उनकी पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।”
रायगढ़। शहर की सड़कों पर नाबालिगों और स्कूली छात्रों द्वारा दोपहिया वाहन चलाने के बढ़ते मामलों पर रायगढ़ ट्रैफिक पुलिस ने सख्ती शुरू कर दी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह के निर्देशन में यातायात पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर ऐसे 16 अभिभावकों के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की, जिन्होंने अपने नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति दी थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ट्रैफिक पुलिस ने शहर के प्रमुख मार्गों और स्कूलों के आसपास विशेष चेकिंग अभियान चलाया।
इस दौरान कई स्कूली छात्र और नाबालिग बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के दोपहिया वाहन चलाते मिले। पुलिस ने नाबालिग चालकों के साथ उनके अभिभावकों को भी मौके पर बुलाकर आवश्यक कार्रवाई की। चेकिंग के दौरान पकड़े गए 16 नाबालिग वाहन चालकों के अभिभावकों के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। इस दौरान ट्रैफिक पुलिस ने उन्हें स्पष्ट रूप से बताया कि नाबालिग को वाहन चलाने देना कानून का उल्लंघन होने के साथ-साथ दंडनीय अपराध भी है।
अधिकारियों ने मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों, आर्थिक दंड और इससे जुड़े अन्य कानूनी परिणामों की जानकारी देते हुए भविष्य में बच्चों को वाहन नहीं सौंपने की सख्त हिदायत दी। यातायात पुलिस का कहना है कि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना केवल यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि उनकी अपनी और सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की जान के लिए भी गंभीर खतरा है। इसे देखते हुए शहर में आगे भी ऐसे विशेष अभियान लगातार चलाए जाएंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
यातायात पुलिस ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की जिद या सुविधा के कारण उन्हें वाहन चलाने की अनुमति न दें। जिम्मेदार अभिभावक की भूमिका निभाते हुए सड़क सुरक्षा के प्रति सजग रहें और सुरक्षित एवं अनुशासित यातायात व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करें।
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में केंद्रीय जेल में दोहरे हत्याकांड का सजायाफ्ता एक कैदी ने आत्महत्या कर ली। कैदी गैसीफायर प्लांट की भट्ठी में कूद गया जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद जेल प्रशासन ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं। पिछले डेढ़ महीने के दौरान केंद्रीय जेल में किसी कैदी की मौत का पांचवां मामला है।
मामले की जानकारी देते हुए जेल के एक अधिकारी ने बताया कि जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह निवासी राहुल कंवर उम्रकैद की सजा काट रहा था। उसे 2016 से दोहरे हत्याकांड के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
बुधवार शाम की है घटना
एक अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम को केंद्रीय जेल की रसोई से जुड़ा लकड़ी और बायोमास-आधारित गैसीफायर प्लांट चालू था, तभी राहुल कंवर अचानक उस जगह की ओर भागा और भट्टी में कूद गया। उन्होंने बताया कि जब तक जेलकर्मी और अन्य कैदी उसे बाहर निकाल पाते, तब तक वह गंभीर रूप से झुलस चुका था और उसकी मौत हो गई।
उन्होंने बताया कि घटना के बाद बिलासपुर के जिलाधिकारी संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह और जेल के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल केंद्रीय जेल पहुंचे। पुलिस टीम और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने मौके का निरीक्षण कर साक्ष्य एकत्र किए।
आत्महत्या का मामला
उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है। हालांकि, मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका सटीक पता लगाने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट से जांच कराने के आदेश दिए गए हैं। पुलिस और जेल प्रशासन इस घटना की विस्तृत जांच कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, पिछले डेढ़ महीने में बिलासपुर केंद्रीय जेल के भीतर किसी कैदी की मौत का यह पांचवां मामला है।
बिलासपुर केंद्रीय जेल में कैदी ने की आत्महत्या
जलती हुई भट्टी में कूद गया कैदी
दोहरे हत्याकांड में काट रहा था उम्र कैद की सजा
जेल प्रशासन ने न्यायिक जांच के दिए आदेश
23 जून को भी एक कैदी ने की थी आत्महत्या
अधिकारियों ने बताया कि 23 जून को एक सजायाफ्ता कैदी ने जेल के भीतर एक अन्य कैदी की हत्या कर दी थी। इसके बाद तीन अन्य कैदियों की अलग-अलग घटनाओं में बीमारी और दुर्घटनावश लगी चोटों के कारण मौत हो गई थी।
रायपुर। उत्तरप्रदेश के ललितपुर में हुए सड़क हादसे में घायल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव को बेहतर इलाज के लिए आज सुबह झांसी से दिल्ली रेफर किया गया। उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती किया गया है, जहां इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक किरण सिंह देव की हालत खतरे से बाहर है। उनके पैर और कमर में चोट आई है। भौगोलिकसंदर्भ
बता दें कि छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और जगदलपुर विधायक किरण देव बुधवार को उत्तरप्रदेश में सड़क हादसे के शिकार हुए थे। हादसा झांसी-ललितपुर हाईवे पर उस समय हुआ था, जब वह परिवार के साथ बागेश्वर धाम से दर्शन कर लौट रहे थे। उन्हें तत्काल झांसी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरु पूर्णिमा के अवसर पर किरण देव अपने परिवार के साथ बागेश्वर धाम गए थे। वापसी के दौरान झांसी-ललितपुर मार्ग पर सामने से आ रहे एक वाहन को बचाने की कोशिश में उनके चालक ने अचानक ब्रेक लगाया। इससे कार का संतुलन बिगड़ गया और कार ट्रक में घुस गई।
हादसे के वक्त किरण देव के साथ उनकी सुरक्षा में तैनात पीएसओ भी वाहन में मौजूद थे, जबकि परिवार के अन्य सदस्य दूसरी कार में सफर कर रहे थे। दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से उन्हें तुरंत झांसी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। इस हादसे में किरण सिंह देव का चालक भी घायल हुआ है।
रायगढ़। जिले में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान “ऑपरेशन क्लीन हंट” के तहत खरसिया पुलिस को एक और सफलता मिली है। मौहापाली मेन रोड पर शराब के लिए पैसे मांगकर गैरेज संचालक एवं उसके साथियों से मारपीट करने वाले फरार आरोपी फैज खान उर्फ फैजान अहमद (25 वर्ष) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। आरोपी के मेमोरेंडम पर मारपीट में प्रयुक्त लोहे का कड़ा भी जब्त किया गया है, जबकि उसके दो अन्य फरार साथियों की तलाश जारी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम छोटे मुड़पार निवासी विनोद रायल (32 वर्ष) ने पुलिस चौकी खरसिया में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 24 जनवरी 2026 की रात करीब 11 बजे वह अपने मित्र रोहन जांगड़े को कार से उसके घर मौहापाली छोड़ने गया था। वापस लौटते समय दो मोटरसाइकिलों पर सवार आरोपी फैज खान, अमनप्रीत, करतार और फरीद वहां पहुंचे। फैज खान ने कार रुकवाकर शराब पीने के लिए पैसों की मांग की। पैसे नहीं होने की बात कहने पर उसने अपने साथियों को बुला लिया और तीनों ने शराब के नशे में गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी तथा हाथ-मुक्कों, लात-घूंसों से हमला कर दिया। इस दौरान फैज खान ने अपने पास रखे लोहे के कड़े जैसे कठोर औजार से विनोद रायल के सिर पर वार किया, जिससे उसके सिर और आंख के पास गंभीर चोटें आईं और काफी रक्तस्राव हुआ। घटना में प्रार्थी के साथ रोहन जांगड़े और कुंज किशोर पटेल को भी चोटें आईं, जिनका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया।
प्रकरण में पुलिस चौकी खरसिया द्वारा अपराध क्रमांक 34/2026 के तहत धारा 296, 351(2), 115(2), 119(1) एवं 3(5) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के अंतर्गत अपराध दर्ज किया गया। घटना के बाद तीनों मुख्य आरोपी फरार हो गए थे। चौकी प्रभारी निरीक्षक त्रिनाथ त्रिपाठी के निर्देशन में आरोपियों की लगातार तलाश की जा रही थी। मुखबिर से सूचना मिलने पर 28 जुलाई 2026 को आरोपी फैज खान उर्फ फैजान अहमद के घर आने की जानकारी मिली। एएसआई मनोज पटेल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तत्काल दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर घटना को अंजाम देना स्वीकार किया। उसके मेमोरेंडम के आधार पर मारपीट में प्रयुक्त लोहे का कड़ा भी बरामद कर जब्त किया गया।
गैर-जमानती धाराओं के तहत गिरफ्तार आरोपी फैजान अहमद उर्फ फैज खान, पिता मुस्ताक अहमद, उम्र 25 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 05, हनुमान चौक, पुरानी बस्ती, खरसिया को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। वहीं घटना में शामिल फरार आरोपी करतार और फरीद की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम लगातार दबिश दे रही है।
रायगढ़। छत्तीसगढ़ शासन ने रायगढ़ स्थित छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का नाम पुनः “सेठ किरोड़ीमल छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रायगढ़” करने का आदेश जारी कर दिया है। लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद शासन के इस फैसले का अग्र समाज ने स्वागत करते हुए इसे जनभावनाओं के अनुरूप लिया गया निर्णय बताया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दानवीर सेठ किरोड़ीमल शिक्षा, समाजसेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए जाने जाते हैं। उनके सम्मान में रायगढ़ के इस तकनीकी संस्थान का नाम रखा गया था।
बाद में नाम परिवर्तन किए जाने के बाद अग्र समाज की ओर से इसे पूर्ववत करने की मांग लगातार उठाई जाती रही। इस संबंध में समाज के प्रतिनिधियों ने विभिन्न स्तरों पर शासन, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखी थी। 28 जुलाई को जारी आदेश में राज्य शासन ने संस्थान का नाम पुनः “सेठ किरोड़ीमल छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रायगढ़” करने की स्वीकृति प्रदान की है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि नाम परिवर्तन के लिए सामान्य प्रशासन विभाग की सहमति प्राप्त हो चुकी है। आदेश जारी होने के साथ ही संस्थान का नाम आधिकारिक रूप से पुनर्स्थापित हो गया है। शासन के फैसले के बाद अग्र समाज के पदाधिकारियों एवं वरिष्ठजनों ने प्रसन्नता व्यक्त की।
समाज का कहना है कि यह निर्णय उठाई जा रही मांग के पूरा होने के साथ-साथ शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में दानवीर सेठ किरोड़ीमल के योगदान को सम्मान देने वाला कदम है। उनका मानना है कि इससे नई पीढ़ी को भी उनके व्यक्तित्व और समाज के प्रति किए गए कार्यों की जानकारी मिलेगी। अग्र समाज ने इस निर्णय के लिए छत्तीसगढ़ शासन, संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों तथा इस विषय को शासन स्तर तक पहुंचाने वाले सभी जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। समाज ने विशेष रूप से प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विभिन्न स्तरों पर हुए सकारात्मक प्रयासों के परिणामस्वरूप यह निर्णय संभव हो सका।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि सेठ किरोड़ीमल का योगदान केवल किसी एक समाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, समाजसेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में उनके कार्य पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि संस्थान के नाम की पुनर्स्थापना से उनकी विरासत और योगदान आने वाली पीढ़ियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।
रायगढ़। राजनीति में कोई हमेशा दोस्त नहीं होता, और हमेशा दुश्मन भी नहीं होता। यह बात रायगढ़ नगर निगम महापौर के बारे में सार्थक होती है। जनवरी में जिस काम में मीनमेख निकालकर कार्रवाई के लिए आयुक्त से शिकायत की थी, उसी में ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने पर बचा लिया गया। बिना अधिकार के आयुक्त के आदेश को ओवरलैप करते हुए बहाली का प्रस्ताव पास कर दिया। ऐसा अनोखा मामला बेहद कम देखने में आता है। यह मामला जनवरी 2026 का है। वार्ड 44 में नाली निर्माण में गुणवत्ताहीन कार्य कराया जा रहा था। इसकी शिकायत वार्ड 44 के पार्षद ने महापौर जानकी काटजू से की।
महापौर ने निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इसके बाद आयुक्त नगर निगम को पत्र लिखा। 22 जनवरी 2026 को लिखे पत्र में महापौर ने लिखा नाली के दोनों तरफ ढाले जा रहे रिटेनिंग वॉल का निर्माण घटिया स्तर का पाया गया जिसे छिपाने के लिए प्लास्टर किया गया था। ओवर साइज का बोल्डर उपयोग किया गया, जिससे गुणवत्ता प्रभावित हुई। नाली का ढलान मेंटेन नहीं किया गया, जिससे जल भराव होगा। इस संबंध में उन्होंने आयुक्त को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था।
आयुक्त ने निर्माण का निरीक्षण करने के बाद ठेकेदार एमएस कंस्ट्रक्शन संचालक यथार्थ षड़ंगी को नोटिस दिया।
दरअसल नाली का निर्माण पुराने नाले के लेबल में न करके ऊपर कर दिया जिससे पानी रुक रहा था। सुधार करने का निर्देश मिलने के बावजूद ठेकेदार ने ध्यान नहीं दिया। वार्ड पार्षद और महापौर की शिकायत पर आयुक्त ने चार बार नोटिस दिया लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। आयुक्त ने एमएस कंस्ट्रक्शन को ब्लैक लिस्ट कर दिया। इसके बाद महापौर का एक्शन शुरू हुआ। उन्होंने अपने चेम्बर में ही एक प्रस्ताव टाइप करवाकर ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट से वापस बहाल कर दिया।
हास्यास्पद स्थिति का जिम्मेदार कौन
महापौर ने अपील समिति के जरिए प्रस्ताव एमआईसी में ले आए। वहां से प्रस्ताव पारित करवाकर ब्लैक लिस्ट से बहाल भी कर दिया। नियम के मुताबिक आयुक्त के आदेश को इस तरह नहीं पलटा जा सकता। महापौर के प्रस्तावित आदेश की वैधता ही नहीं है। इस तरह के प्रस्तावों को मंजूरी देना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। एक तरह से उन्होंने आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में प्रवेश कर लिया जो गलत है। इस घटना पर पूरे नगर निगम में चटखारे लेकर चर्चा की जा रही है। सवाल यह है कि जिस घटिया निर्माण की शिकायत खुद महापौर ने की, उसमें कार्रवाई होने पर पलटी क्यों मारी?
अमेरिका (United States of America) की मल्टीनेशनल कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन (Johnson & Johnson) ने करीब 76 हज़ार मुकदमों को निपटाने के लिए 5.5 बिलियन डॉलर (लगभग 52 हजार करोड़ रुपए) तक देने की पेशकश की है। इन मुकदमों में आरोप लगाया गया है कि कंपनी के बेबी पाउडर और टैल्कम वाले दूसरे उत्पादों से ओवेरियन कैंसर (अंडाशय का कैंसर) होता है। हालांकि कंपनी ने इन आरोपों से इनकार किया है। साथ ही कंपनी ने अपने मशहूर बेबी पाउडर का फॉर्मूला भी बदल दिया है।
पिछले कई सालों से कानून के पचड़ों में फंसी हुई है कंपनी
अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन पिछले कई साल से कानूनी पचड़ों में फंसी है। कंपनी के लिटिगेशन मामलों के वाइस प्रेसिडेंट एरिक हास ने कहा कि जॉनसन एंड जॉनसन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और कंपनी मुकदमेबाजी को हमेशा के लिए सुलझाने के मकसद से समझौता करने को तैयार है।
कब से शुरू हुए थे मुकदमे?
जॉनसन एंड जॉनसन के खिलाफ 2009 से ही मुकदमे शुरू हो गए थे। करीब 17 साल से कंपनी इन मुकदमों का सामना कर रही है। कंपनी के मुआवजे से पाउडर से जुड़े ज़्यादातर दावें कवर हो जाएंगे। कंपनी के मुआवजे से पाउडर से जुड़े ज़्यादातर दावें कवर हो जाएंगे जिससे जॉनसन एंड जॉनसन को कुछ राहत मिल सकती है।
अब क्या है उम्मीद?
कंपनी ने कहा कि प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले उसे उन कानूनी फर्मों की मंजूरी मिलनी चाहिए जो ओवेरियन कैंसर के 95% दावों का प्रतिनिधित्व कर रही है। हास ने उम्मीद जताई कि इस समाधान के बाद कंपनी जीवन रक्षक दवाएं और उपकरण विकसित करने के मिशन पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जॉनसन एंड जॉनसन दवाओं, स्वास्थ्य से जुड़ी दूसरी चीज़ें और बच्चों के अन्य प्रोडक्ट्स भी बनाती है।
क्या है टैल्क?
टैल्क मैग्नीशियम, सिलिकॉन, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन से बना होता है। यह साबुन जैसा लगता है और एस्बेस्टस की खानों के पास मिलता है। एस्बेस्टस के कारण कैंसर का खतरा रहता है। टैल्क का बेबी पाउडर में इस्तेमाल किया जाता है। ग्राहकों का कहना है कि एस्बेस्टस की मिलावट के कारण कंपनी के टैल्क प्रोडक्ट से कैंसर हुआ था। इसी वजह से कंपनी को मुकदमे झेलने पड़ रहे हैं।
जांजगीर-चांपा। विद्युत वितरण व्यवस्था को आधुनिक व पारदर्शी बनाने जिले में भी घरों में स्मार्ट मीटर लगाए गए है। स्मार्ट मीटर में लगातार उपभोक्ताओं द्वारा की गई तेज चलने की शिकायत पर विभाग ने शहर में 18 लोगों के घरों में टेस्ट मीटर लगाए। टेस्ट के दौरान सभी में स्मार्ट मीटर सही निकले। इससे स्पष्ट है कि स्मार्ट मीटर की तेज चलने की बात केवल अफवाह है।
विद्युत विभाग को भी लगातार हाइटेक व उपभोक्ता हितैषी बनाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिले में भी पिछले साल भर से स्मार्ट मीटर लगाने का काम किया जा रहा है। शहर में लगभग सभी घरों में स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। इसमें लोगों की लगातार शिकायतें मिल रही है कि स्मार्ट मीटर तेज चल रही है। इससे बिजली का बिल ज्यादा आ रहे हैं।
शहर में स्मार्ट मीटर के तेज चलने और अधिक बिल आने की शिकायतों के बीच बिजली विभाग की जांच में राहत देने वाली तस्वीर सामने आई है। विभाग ने शहर के 18 उपभोक्ताओं के घरों में टेस्ट मीटर लगाकर स्मार्ट मीटर की सटीकता की जांच कराई। जांच में सभी मीटरों की रीडिंग मानक के अनुरूप सही पाई गई।
इससे स्मार्ट मीटर के तेज चलने के आरोपों को विभाग ने निराधार बताया है। बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद प्रत्येक स्थान पर स्मार्ट मीटर के साथ टेस्ट मीटर लगाकर दोनों की रीडिंग का मिलान किया गया। जांच के दौरान किसी भी मीटर में निर्धारित सीमा से अधिक अंतर नहीं मिला।
आप भी कर सकते हैं आसानी से टेस्ट
स्मार्ट मीटर तेज चलने की शिकायत आप भी कर सकते हैं। टेस्ट मीटर लगाने के लिए आपको कुछ शुल्क देना पड़ेगा। इसमें सिंगल फेज का 300 रुपए तो थ्री फेज का 450 रुपए देना होगा। इसके बाद आपके घरों में भी स्मार्ट मीटर के पास अलग से टेस्ट मीटर लगाए जाएंगे। इससे स्पष्ट हो जाएगा कि आपके घरों में स्मार्ट व सामान्य मीटर में कितना अंतर आ रहा है।