Category: स्वास्थ्य

  • जरूरी नहीं कि हर सर्दी-जुकाम कोरोना हो, संक्रमण के 14 लक्षण होने पर भी आप हो सकते हैं नेगेटिव

    जरूरी नहीं कि हर सर्दी-जुकाम कोरोना हो, संक्रमण के 14 लक्षण होने पर भी आप हो सकते हैं नेगेटिव

    रायपुर। राजधानी में कोरोना तीन महीने पुराना हो गया और पहली बार ऐसा मौसम आया है जिसमें सर्दी-जुकाम होना आम है। कोरोना के लक्षण में भी सर्दी-जुकाम और बुखार प्रमुख हैं। इस वजह से सर्दी होने पर लोग बेचैन भी हो सकते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का साफतौर पर कहना है कि सर्दी-जुकाम हो तो जरूरी नहीं कि कोरोना ही हो गया। इसके लिए आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक 14 प्रकार के लक्षण जारी किए गए हैं। इनमें से दो-तीन लक्षण हों तो कोरोना टेस्ट करवाया जा सकता है। प्रदेश की कोरोना कोर टीम से जुड़े विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अगर दो-तीन लक्षण दिख रहे हैं, तब भी यह जरूरी नहीं है कि संक्रमण कोरोना का ही हो। यह सर्दी-जुकाम के वायरस का संक्रमण भी हो सकता है। दूसरा, छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमितों में से ज्यादातर बिना लक्षण वाले हैं, इसलिए घबराने के बजाय इस मौसम में सतर्कता की जरूरत है।


    विशेषज्ञों ने कोरोना के 14 लक्षणों को दो भागों में बांटा है। पहला भाग उन लक्षणों का है, जिन्हें सामान्य तौर पर कोरोना का लक्षण भी माना जाता है। इनमें लगातार सूखी खांसी-सर्दी, बुखार और थकावट शामिल हैं। इसके अलावा दूसरे 11 लक्षणों में गंध और स्वाद महसूस न होना, गले में खराश, नाक बहना, उलटी, डायरिया, त्वचा में रूखापन, सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ होना, बदन और सिर में दर्द, पेट में दर्द और सीने में दर्द हैं। इनमें से अलग-अलग लोगों में अलग तरह के लक्षण मिल सकते हैं। 
    एक से ज्यादा लक्षण पर जांच


    अगर किसी व्यक्ति में उक्त 14 लक्षणों में से एक से ज्यादा हैं, तो कोरोना जांच करवाई जा सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रारंभिक स्टेज में अगर बीमारी की पहचान हो जाए तो कोरोना मरीज के ठीक होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। प्रदेश में अब तक दो हजार से ज्यादा मरीज इसलिए भी ठीक हुए हैं। विशेषज्ञों का यही कहना है कि ऐसे लक्षणों पर सावधानीपूर्वक खुद को आइसोलेट कर देना चाहिए, क्योंकि सर्दी-जुकाम में आमतौर पर लोग अपने परिवार के बाकी सदस्यों से दूरी बना लेते रहे हैं क्योंकि इसका संक्रमण भी कोरोना जैसा ही है।  


    कोरोना के 14 लक्षण :

    सूखी खांसी

    जुकाम बुखार

    गले में खराश

    उल्टी

    डायरिया (दस्त)

    नाक बहना

    त्वचा में रूखापन

    सांस फूलना या तकलीफ

    बदन-सिर में दर्द

    पेट में दर्द

    सीने में दर्द

    थकावट

    गंध न आना

    स्वाद न आना

  • कोरोना की दवा रेमडेसिवीर के 5 दिन के पूरे कोर्स की कीमत 1,75,500 रुपये

    कोरोना की दवा रेमडेसिवीर के 5 दिन के पूरे कोर्स की कीमत 1,75,500 रुपये

    कोरोना की दवा रेमडेसिवीर की एक शीशी की कीमत 390 डॉलर है। इस हिसाब से इलाज के लिए 5 दिन के पूरे कोर्स की कुल कीमत 2,340 डॉलर (करीब 1,75,500 रुपये) होगी। एक मरीज के 5 दिन के कोर्स में रेमडेसिवीर की 6 शीशी का इस्तेमाल किया जाता है।  कुछ मामलों में यह 10 दिन या 11 शीशी का भी इस्तेमाल करना होता हैसोमवार को गिलीड साइंसेज ने कहा है कि वो अमेरिकी सरकार और अन्य विकसित देशों से कोरोना वायरस ड्रग रेमडेसिवीर की एक शीशी के लिए 390 डॉलर चार्ज करेगी। गिलीड ने इस बारे में सोमवार को एक बयान जारी कर जानकारी दी।
    गिलीड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेनियल ओ’डे ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘हम चाहते हैं कि मरीजों तक इस दवा के पहुंचने में कोई बाधा न आए. इस दाम से सुनिश्चित हो सकेगा कि दुनियाभर में सभी देशों के मरीजों तक दवा पहुंच सके।’ सभी सरकारी ईकाईयों के लिए 390 डॉलर प्रति शीशी का दाम होगा। जब एक बार सप्लाई पर दबाव कम होगा तब इस दवा की बिक्री सामान्य डिस्ट्रीब्युशन चैनल के जरिए की जाएगी। वहीं अन्य प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों व कॉमर्शियल प्लेयर्स के लिए यह भाव 520 डॉलर प्रति शीशी यानी 5 दिन के पूरे कोर्स के लिए 3,120 डॉलर होगा।

    गिलीड ने कहा था कि जून के महीने में वो रेमडेसिवीर का डोनेशन करेगी।  गिलीड साइंसेज द्वारा इस दवा के तय दाम पर इसलिए भी सभी की नजर है, क्योंकि भविष्य में लॉन्च होने वाली कोविड-19 की अन्य दवाईयों के दाम भी इसी आधार पर तय किये जाएंगे।कंपनी ने कहा कि इस दवा की वैल्यू की आधार पर वह अधिक चार्ज कर सकती थी,  लेकिन कंपनी ने इसकी कीमत कम दर पर इसलिए रखी ताकि अन्य सभी विकसित देश इसे खरीद सकें।

    बता दें कि कोविड-19 के इलाज के लिए रेमडेसिवीर का इस्तेमाल शुरू हो गया है। बड़े स्तर पर ट्रायल के बाद नतीजों से पता चला कि रेमडेसिवीर के इस्तेमाल से मरीजों की रिकवरी तेजी से रही है। नतीजों के आधार पर अमेरिकी ड्रग रेग्युलेटर ने रेमडेसिवीर के इस्तेमाल के लिए मई में मंजूरी दी थी। अब तक दुनियाभर में 1 करोड़ से भी अधिक लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं और करीब 5 लाख लोगों की मौत हो चुकी है।

  • कोरोना काल मे बचाव के लिए जरूरी है आयुर्वेद औषधि – ड़ाॅ आकाश अग्रवाल

    कोरोना काल मे बचाव के लिए जरूरी है आयुर्वेद औषधि – ड़ाॅ आकाश अग्रवाल



    खरसिया। दुनिया भर में फैली कोरोना वायरस की महामारी भारत व दुनिया के लिए किसी भी चुनौती से कम नहीं है, देश व दुनिया में हर एक व्यक्ति कोरोना महामारी से परेशान है। एक ओर शासन-प्रशासन हरेक सरकार चाहे राज्य हो या केन्द्र, जनता की सेवा में कोई कोर कसर नही रहने दे रहे हैं, वहीं दुसरी ओर चिकित्सक, नर्स कम्पाउंडर, सफाई कर्मचारी, समाज सेवी संस्था भी दिन रात एक कर इस मुश्किल समय में आम जनता के साथ खडा नजर आ रहा है। अधिकांश घरों में कोरोना से बचाव के लिए अनेक घरेलु उपाय व नुस्खें भी आजमाए जा रहें है जो कि बहुत कुछ कारगर भी साबित होते दिख रहे है। इसके साथ ही आयुर्वेद औषधी भी लोगो की प्रतिरोधक क्षमता बढाने व कोरोना से बचाने में अहम भूमिका निभा रही है। डाक्टरों के द्वारा भी आयुर्वेद औशधियों के प्रयोंग की सलाह दी जा रही है जिससे की शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत की जा सकती है।
    कोरोना के संबंध में चर्चा करते हुये नगर के आयुर्वेंद चिकित्सक डाॅ. आकाश अग्रवाल ने बताया की जहा एक ओर भारत आयुर्वेद के जनक के रूप मे जाना जाता है वही इस भीषण कोरोना काल में कोरोना से बचाव व प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी आयुर्वेद का लोहा माना है। आयुर्वेदिक औषधियाॅ कोरोना वायरस से बचाव करने काफी हद तक कारगर साबित हो रही है। डाॅ. आकाश अग्रवाल ने बताया की पूरे विश्व में वर्तमान में कोरोना वायरस की कोई प्रभावी दवा अभी तक तैयार नहीं की जा सकी है परन्तु आयुश मंत्रालय भारत सरकार द्वारा अनुसंधान कर आयुर्वेद औषधियों के उपयोग को बढावा देने की बात कही है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी माना है।
    कोरोना वायरस के लक्षणों के संबंध में चर्चा करते हुये डाॅ. आकाश अग्रवाल ने बताया की इस वायरस के मरीजों के प्रमुख लक्षणो में बुखार व शरीर में दर्द, सुखी खांसी, थकान, गले में खरास, दस्त लगना, सर दर्द, सुंघने एवं स्वाद की प्रतीती ना होना, शरीर की त्वचा का बदरंग होना, सांस लेने में तकलीफ होना, सीने में दर्द एवं बोलने और चलने फिरने में तकलीफ होना आदि के अलावा वर्तमान में भारत में बिना लक्षणों वाले भी रोगी बहुत मात्रा में मिल रहे है, जिसके लिए सावधानी बहुत ही आवश्यक है। यह रोग एक संक्रामक रोग है, अर्थात एक व्यक्ति से दुसरे में फैलने वाला रोग है। इस रोग से बचाव के संबंध में डाॅ. आकाश अग्रवाल ने बताया की अनवश्यक घर से ना निकले, उचित दुरी बना कर रखे, हाथों को समय समय पर साबुन एवं पानी या एल्कोहल युक्त सेनेटाइजर से धोते रहे, मास्क का उपयोग करे, बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा का उपयोग ना करे, साथ ही कोरोना से संबंधित कोई भी लक्षण होने पर तत्काल नजदीकी चिकित्सालय जावें या हेल्पलाइन न. 1075 पर संपर्क करे।
    डाॅ. आकाश अग्रवाल ने आगे बताया की अभी तक इस रोग का कोई प्रमाणिक इलाज खोजा नहीं जा सका है ना ही इसकी कोई वैक्सीन ही बन पाई है फिर भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढाकर काफी हद तक रोग से बचा जा सकता है। प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिये नियमित रूप से दिनभर गर्म पानी का सेवन करे, नित्य व्यायाम एवं योग करे, पर्याप्त नींद ले, आयुवेद के गिलोय का काढा, त्रिकटु चूर्ण, तालीसादि चूर्ण, अष्वगंधा चूर्ण, आंवला चूर्ण का सेवन किया जा सकता है, साथ ही विटामिन सी एवं ज़िक सेवन करें एवं खान-पान का विषेश ध्यान रखें इन उपायों से कोरोना महामारी से काफी हद तक बचाव हो सकता है।

  • आईसीएमआर ने वापस मांगी आबंटित की गई रैपिड टेस्ट किट, नये किट से कटघोरा के निगेटिव आए लोगों की फिर होगी जांच…

    आईसीएमआर ने वापस मांगी आबंटित की गई रैपिड टेस्ट किट, नये किट से कटघोरा के निगेटिव आए लोगों की फिर होगी जांच…

    रायपुर। आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) ने अपने आबंटित की गई रैपिड टेस्ट किट वापस मांगी है. इस आशय का पत्र छत्तीसगढ़ को जारी किया गया है. पत्र के बाद सरकार ने किट वापसी की तैयारी शुरू कर दी है. बता दें कि आसीएमआर ने छत्तीसगढ़ को 48 सौ रैपिड टेस्ट भेजा था. इस किट का इस्तेमाल सिर्फ कोरबा जिला में हुआ था. जिले में लगभग एक हजार किट का इस्तेमाल किया गया था

     

    गौरतलब है कि कोरोना हॉटस्पॉट कटघोरा में ही रैपिड किट से टेस्ट किया गया था. अब नये किट आने के बाद फिर से कटघोरा के निगेटिव आए लोगों की जांच की जाएगी, क्योंकि किट से सही रिजल्ट नहीं मिलने की जानकारी मिली है. इस पर कई राज्यों ने आपत्ति जताई है

    राज्य कोरोना कंट्रोल एवं डिमांड टीम के पीआरओ अखिलेश त्रिपाठी ने इस बात की पुष्टि की है. यथाशीघ्र किट को वापस किया जाएगा. किट की गुणवत्ता विश्वसनीयता शोध में बहुत कम पाए जाने पर यह फ़ैसला लिया गया है

  • कोरोना वैक्सीन का सेफ्टी ट्रायल पूरा… ठीक हुए कोरोना मरीज….

    कोरोना वैक्सीन का सेफ्टी ट्रायल पूरा… ठीक हुए कोरोना मरीज….

    दिल्ली। पूरे देश में जब कोरोना की दवाई को लेकर रिसर्च चल रहा है, इसी बीच भारतीय डॉक्टरों ने कमाल कर दिया है. कोरोना के इलाज के लिए पीजीआई के डॉक्टरों को सफलता मिली है और उन्होंने कोरोना वायरस के वैक्सीन का सेफ्टी ट्रायल कर कोरोना मरीजों को स्वस्थ्य कर दिया है।

    डॉक्टरों की टीम ने कुष्ठ रोग के इलाज में दी जाने वाली दवा एमडब्ल्यू का ट्रायल किया. ये ट्रायल उन कोरोना पेशेंट पर किया गया  जिन्हें ट्रीटमेंट के दौरान ऑक्सीजन की जरूरत थी. डॉक्टरों के मुताबिक चारों पेशेंट्स को एमडब्ल्यू वैक्सीन की 0.3एमएल दवा का इंजेक्शन लगातर 3 दिनों तक दिया गया और पया कि पेशैट्स पर वैक्सीन का इस्तेमाल बिल्कुल सुरक्षित है।

    डाक्टरों के मुताबिक इस दवा का इस्तेमाल पहले कुष्ठ, तपेदिक और निमोनिया ग्रस्त पेशैट्स पर भी किया गया था और उनमें भी दवा के इस्तेमाल को सुरक्षित पाया गया था. अब कोरोन के पेशंट्स पर भी दवा सुरक्षित पाई गई है।

  • दो साल से कम उम्र के बच्चों को मास्क पहनाना खतरनाक है, बड़े बच्चे सार्वजनिक जगहों पर मास्क जरूर पहनें….

    दो साल से कम उम्र के बच्चों को मास्क पहनाना खतरनाक है, बड़े बच्चे सार्वजनिक जगहों पर मास्क जरूर पहनें….

    एक्सपर्ट्स के मुताबिक बच्चों के लिए कपड़े के मास्क ही बेहतर हैं।

    बच्चों में नहीं दिख रहे कोरोना के पूरे लक्षण इसलिए मास्क जरूरी है।

    सीडीसी के अनुसार 25% केस ऐसे हैं, जिनमें कोविड 19 के लक्षण नहीं दिखे।

    कोरोनावायरस बहुत आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। अमेरिका और कुछ अन्य देशों ने अपने सभी नागरिकों को मास्क पहनने का निर्देश दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या छोटे बच्चों को भी मास्क लगाने की जरूरत है? अमेरिकी हेल्थ एजेंसी सीडीसी ने यह साफ कहा है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए भी मास्क खतरनाक है, क्योंकि इससे दम घुटने की आशंका बनी रहती है। वहीं, दो या दो साल से ज्यादा उम्र के बच्चों के लिए मास्क लगाना सुरक्षित है। बशर्ते, उन्हें कोई सांस संबंधी परेशानी न हो।
    6 अप्रैल को जारी सीडीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में 18 साल से कम उम्र के बच्चों में कोरोना संक्रमण के 2572 केस आए थे। ये बच्चे बाकी बड़ी उम्र के लोगों की तरह गंभीर रूप से बीमार भी नहीं थे। कोरोना से संक्रमित इन बच्चों में या तो बेहद मामूली लक्षण दिख रहे हैं या बिल्कुल नहीं। इसके कारण परिवार और समुदाय में वायरस फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
    दूसरों को संक्रमण से बचाने के लिए लगाएं मास्क
    पिडियाट्रिक इंफेक्शियस डिसीज स्पेशलिस्ट डॉक्टर मार्क स्वायर के मुताबिक अपने बच्चे को कपड़े का मास्क पहनाने से आप दूसरों को संक्रमित होने से बचा सकते हैं। क्योंकि कोरोना छींकने, खांसने जैसी आम बीमारियों से फैल रहा है। सीडीसी के एक अनुमान के मुताबिक 25 प्रतिशत कोरोना के केस ऐसे हैं, जहां मरीज में कोई भी लक्षण नहीं दिखे। इतने बड़े पैमाने पर इस वायरस का फैलने का एक यह कारण भी है।
    दूरी बनी हुई है तो बच्चे को मास्क न पहनाएं
    मास्क की मुख्य तौर पर जरूरत सार्वजनिक जगहों पर होती है। अगर आप ऐसी जगह पर हैं, जहां दूसरों से कम से कम 6 फुट की दूरी बना सकते हैं, तो बच्चों को मास्क पहनाने की जरूरत नहीं है। साथ ही अगर बच्चे को कोई बीमारी है या बीमार होने की आशंका है तो उसे बाहर जाने से रोकें।
    छोटे बच्चों को मास्क पहनने के लिए कैसे मनाएं?
    छोटे बच्चों को मास्क पहनाना भी एक जिम्मेदारी का काम है। लेकिन यह जरूरी भी है। ऐसे में आप डॉक्टर्स की सलाह मानकर बच्चों को मास्क के लिए तैयार कर सकते हैं।

    समझाएं – अपने बच्चों को मास्क की उपयोगिता को गंभीरता से समझाएं। उन्हें यह बताएं कि दूसरे लोग मास्क क्यों पहने हुए हैं। इसके फायदे क्या हैं।

    इनाम दें – डॉक्टर मेग फिशर के अनुसार आप बच्चे को मास्क पहनने पर इनाम भी दे सकते हैं। अगर बच्चे ने मास्क पहन लिया तो उसे हेल्दी इनाम दें।

    बच्चों को कौन से मास्क पहनाएं?
    सीडीसी बच्चों को कपड़े का मास्क पहनने की सलाह देते हैं। क्योंकि सर्जिकल और N-95 मास्क की सप्लाई बेहद कम है। जो स्टॉक में हैं वे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए हैं। आप मास्क घर पर भी बना सकते हैं, सीडीसी ने इसका एक ट्यूटोरियल वीडियो भी शेयर किया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक बच्चों के लिए कपड़े के मास्क ही बेहतर हैं।

  • कोरोना से कितना बचाएगी मास्क, क्या कहता है मास्क पर विज्ञान ?

    कोरोना से कितना बचाएगी मास्क, क्या कहता है मास्क पर विज्ञान ?

    जैसा कि आप जानते हैं कि सरकार ने सभी लोगों को राष्ट्रीय आपदा अधिनियम के तहत मास्क, गमछा या कुछ कपड़ा पहनने का आदेश दिया है। सवाल यह है कि यह कितना वैज्ञानिक है ? आइए जांच करते हैं, भारत या दुनिया में अनुसंधान का कोई वैज्ञानिक डेटा नहीं है जो यह साबित करता है कि किसी भी विधि में किसी भी चीज को पहनने से संक्रमण दर कम हो सकती है।

    डॉक्टर बिप्लव बंधोपाध्याय से जानते हैं कितना कारगर है मास्क…

    पहला- हम मानते हैं कि सभी मास्क समान हैं ?

    नहीं. सरकार द्वारा सुझाया गया तीन स्तर का मास्क कुछ बैक्टीरिया को कुछ हद तक रोक सकती है. लेकिन वायरस को नहीं। यदि हम इसे ठीक से नहीं पहनते हैं तो हवा लीक हो सकती है और अधिकांश लोग इसे सही तरीके से नहीं पहन रहे हैं।

    दूसरा- एक तीन स्तरित मास्क एक रूमाल या गमछा के बराबर है?

    नहीं. क्योंकि तीन स्तरित मास्क में बैक्टीरिया और कुछ बूंदों के खिलाफ अधिक सुरक्षात्मक शक्ति होती है. आम जनता में इसे लेकर कोई समझ नहीं है न ही उन्हें प्रशिक्षित किया गया है कि कैसे इसका उपयोग करें।

    तीसरा- लोग भ्रमित हो सकते हैं कि वे जिस तरह से भी कपड़ा बंधेंगे, उससे उनकी और दूसरों की रक्षा होगी, ये भ्रामक सोच इस संक्रमण में अधिक खतरनाक है.

    चौथा- इस बात का खतरा ज़्यादा है कि लोग कपड़े बांधकर अन्य प्रभावी तरीकों के पालन में लापरवाही करे। क्योंकि वे सोच रहे होंगे कि कपड़ा बंधने के बाद अब कुछ कुछ नहीं होगा। इसलिए इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि वे केवल अपने चेहरे पर एक कपड़ा पहनकर, ठीक से हाथ न धोएं और एक मीटर की दूरी रखना बंद कर दें। कपड़े पहनकर सर्वथा सुरक्षित मानने की भावना सोशल डिस्टेंसिंग और हाथ धोने के तरीके के अनुपालन न करने को प्रेरित कर सकती है जो घातक है।

    चूंकि यह सरकार का आदेश है इसलिए आपको राष्ट्रीय आपदा अधिनियम के तहत इस आदेश का पालन करना है। लेकिन आपको खुद से और अधिकारियों से ये सवाल पूछने चाहिए। ताकि हम अपने लोकतंत्र को प्रोत्साहित और समृद्ध कर सकें।

  • जानिये कुछ आसान टिप्स लॉक डाउन में अपनी आँखों का ख्याल रखने हेतु…..

    जानिये कुछ आसान टिप्स लॉक डाउन में अपनी आँखों का ख्याल रखने हेतु…..

    हाल ही में अमिताभ बच्चन ने अपनी आंखों और विजन प्रॉब्लम को ब्लॉग पर शेयर किया है । उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा ‘ये आंखें धुंधली तस्वारें देख रही है। आंखों से दो चीजें नजर आ रही हैं और कुछ दिनों से मुझे महसूस हो रहा है कि अंधापन आने वाला है। पहले से शरीर में इतनी मेडिकल दिक्कतों के साथ एक समस्या शुरू होने वाली है।’
    बाद में उन्होंने खुलासा किया कि डॉक्टर ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वो ब्लाइंड नहीं होने वाले। यह स्क्रीन ज्यादा देखने की वजह से हो रहा है, जिसका असर आंखों पर पड़ रहा है।उन्होंने हर घंटे आंखों में डालने के लिए आई ड्रॉप दिया है। कम्प्यूटर पर बहुत समय देने की वजह से ऐसा हुआ। आंखें थक गई और कुछ नहीं।

    अमिताभ की तरह इन दिनों आंखों में बढ़ती परेशानियों को कई लोग झेल रहे हैं। इसका सीधा-सा कारण मोबाइल और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल करना है। ऐसे में हमें समय रहते कुछ बातों को अपने रूटीन में शामिल कर लेना चाहिए।

    ऐसे पहचानें आंखों पर बढ़ते तनाव को
    यह जानने के लिए कि आपके स्क्रीन को देखते हुए आंखों में होने वाली सेंसेशन को पहचानना है। जैसे, खुजली, जलन, थकी हुई या सूखी आँखें इसकी शुरुआत हो सकती है। इसके अलावा सिरदर्द, गर्दन और पीठ में दर्द के भी लक्षण हैं। आपको अगर स्क्रीन देते हुए फोकस या लाइट से सेंसेशन होती है, तो आपको समझ जाना चाहिए कि आपकी आँखें बहुत अधिक ‘ब्लू लाइट’ (मोबाइल, लैपटॉप, कम्यूटर, टैब से निकलने वाली लाइट) के संपर्क में हैं।

    ऐसे रखें आंखों का ख्याल
    -लॉकडाउन के समय में ज्यादातर लोग वर्क फ्रॉम होम और समय काटने के लिए मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल कर रहे हैं, ऐसे में खुद को स्क्रीन दूर रख पाना आसान नहीं है लेकिन इस दौरान अपनी आंखों की देखभाल के लिए आप इन टिप्स को फॉलो कर सकते हैं।

    ⭕अध्ययन के अनुसार, हम एक मिनट में 15 बार झपकाते हैं। हालाँकि, हम केवल स्क्रीन को देखते समय 5-7 बार पलक झपकाते हैं। ब्लिंकिंग आंख की नमी को फिर से भरने का एक तरीका है, जो आपकी आंखों के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि आप स्क्रीन पर देखते समय पलक झपकना याद रखें।

    ⭕आप अपनी आँखों को ताजा करने के लिए कृत्रिम आँसू और आँखों की बूंदों का उपयोग कर सकते हैं यदि आपको लगता है कि वे बहुत बार सूख रहे हैं। अपनी आंखों को हाइड्रेट रखना और सतह को सूखने से बचाना जरूरी है।

    ⭕20-20-20 नियम का प्रयोग करें। नियम प्रत्येक 20 मिनट में दृष्टि को कम से कम 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु पर ट्र्रा्ंसफर करें।

    ⭕आप स्क्रीन देखते हुए प्रिस्क्रिप्शन चश्मे का उपयोग करने की कोशिश करें, जो कंप्यूटर स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करने में आपकी मदद करते हैं। इससे आपकी आंखों में खिंचाव कम हो जाएगा।

    ⭕स्क्रीन चमक को कम करने के लिए एक मैट स्क्रीन फिल्टर का उपयोग करने का प्रयास करें ।

    ⭕याद रखें कंप्यूटर स्क्रीन आपकी आँखों से लगभग 25 इंच की दूरी पर है, जो लगभग एक हाथ की लंबाई की दूरी पर है। स्क्रीन को इस तरह से रखा जाना चाहिए कि आपकी आँखें थोड़ा नीचे की ओर टिकी रहें और सीधे आगे न हों।

  • इस दवा की खुली बिक्री पर गवर्नमेन्ट को लगानी पड़ी रोक…..लगातार स्टॉक की जानकारी हो रही अपडेट….

    इस दवा की खुली बिक्री पर गवर्नमेन्ट को लगानी पड़ी रोक…..लगातार स्टॉक की जानकारी हो रही अपडेट….

    पूरे प्रदेश में मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन की दवा खुला बेचने पर रोक लगा दी गई है। सरकार के निर्देश के अनुसार इस दवा को अब बिना बिना डॉक्टर के पर्ची के देना मना कर दिया गया है।

    कोरोना संक्रमण के दौरान अचानक सुर्खियों में आई मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन की खुली बिक्री पर लगी रोक।

    अब बगैर चिकित्सक की सलाह पर यह दवा नहीं मिल पाएगी। सरकार द्वारा जिले के दवा निरीक्षकों को दिए गए निर्देश के बाद इसके लिए औषधि विक्रेताओं को निर्देश जारी कर दिए गए है। विभाग इसके लिए सभी दवा दुकानों से इसके स्टॉक की लगातार जानकारी अपडेट कर रहा है।

    कोरोना संक्रमण के दौरान देश में प्रचलित मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन को कोरोना संक्रमण के लिए एक कारगर दवा के तौर पर दावा किया जा रहा था, इसी दौरान यह उस समय अचानक सुर्खियों में आई जब अमेरिका सहित अन्य कई देशों ने भारत सरकार से इसकी आपूर्ति की मांग रखी। अन्य देशों से इसकी मांग को देखते हुए जिले के कई हिस्सों में भी इसके बगैर जरूरत को देखते हुए खरीदने की जानकारी सामने आने लगी। जिसको देखते हुए एहतियातन खाद्य एवं औषधि नियंत्रण बोर्ड ने इसकी खुली बिक्री पर लगाम लगाने की तैयारी कर ली। इसी निर्देश अब जिला औषधि निरीक्षकों ने अपने-अपने क्षेत्र के दवा दुकान में इसकी खुली बिक्री पर रोक लगा दी है और इसके स्टॉक को लगातार अपडेट कर रहा है। प्रतापपुर क्षेत्र के औषधि निरीक्षक अमरेश तिर्की ने बताया कि इसकी खुली बिक्री के पीछे रोक का कारण यह है कि कोरोना संक्रमण को लेकर किये जा रहे दावे के बीच नागरिक इसका दुरुपयोग न करे व बगैर चिकित्सीय सलाह के इसका उपयोग न करे। इसलिए अब जरूरत पड़ने पर एमबीबीएस चिकित्सक इस दवा की जरूरत पर मरीजों को यह दवा लिख सकेंगे, जो किसी भी दवा दुकान में उपलब्ध हो जाएगी। उन्होनें बताया कि इसके लिए सभी दवा विक्रेताओं से उनके स्टॉक की जानकारी ले ली गई है, और इसकी बिक्री को लेकर लगातार अपडेट ली जा रही है। इधर प्रतापपुर नगर में संचालित 7 दवा दुकानों में इसके स्टॉक की जानकारी लिए जाने के साथ गंभीरता से निर्देश का पालन कराया जा रहा है।

  • जिला अस्पताल में नदारद रहे डॉक्टर, परेशान हुए मरीज और उनके परिजन, CMHO ने दी सफाई, कहा- सभी डॉक्टर ड्यूटी पर थे…

    जिला अस्पताल में नदारद रहे डॉक्टर, परेशान हुए मरीज और उनके परिजन, CMHO ने दी सफाई, कहा- सभी डॉक्टर ड्यूटी पर थे…

    रायपुर। राजधानी के पंडरी स्थित जिला अस्पताल में आज मरीज और उनके परिजन इलाज के लिए भटकते नजर आए. जिला अस्पताल में दोपहर 12 बजे तक कोई डॉक्टर मौजूद नहीं थे। जब इसकी जानकारी जिला चिकित्सा अधिकारी को दी गई तो वे सफाई देने लगे. उन्होंने कहा कि डॉक्टर कही न कही ड्यूटी पर रहे होंगे इस वजह से वे अस्पताल नहीं पहुंच पाए।

    परिजनों ने बताया कि किसी को रिपोर्ट दिखाना था, तो कई इलाज कराने पहुंचे थे. सुबह 9 बजे डॉक्टर और उनकी टीम को बैठना था और हमें रिपोर्ट दिखाने के लिए सुबह ही बुलाए थे. लेकिन 12 बजे के बाद ही डॉक्टर आई. उन्होंने बताया कि एक नंबर कमरा में पीला कार्ड में दवा औऱ इलाज फ्री मिलता है।

    सीएमएचओ मीरा बघेल ने कहा कि अभी मेडिकल स्टॉप का कई जगहों पर ड्यूटी लगाई गई है, जिसके कारण डॉक्टर हॉस्पिटल नहीं पहुंच पा रहे हैं. वहीं शहर में पीलिया को लेकर भी कैंप लगाए गए हैं वहां डाक्टरों की ड्यूटी लगी है. कोरोना जांच में भी ड्यूटी लगाई गई है।

    हॉस्पिटल अधीक्षक रवि तिवारी ने बताया कि ऑन लाईन ट्रेनिंग में गए थे, कही ना कही चूक हुई है, नहीं तो उनकी जगह किसी औऱ की ड्यूटी लगाई जाती, इसमें जानकारी लेता हूं, ताकि आगे ऐसा ना हो और मरीजों को इलाज मिले।

    सवाल उठता है कि ऐसी कौन सी ड्यूटी है, जो दोपहर 12 बजे के पहले तक लगी, फिर इसके बाद डॉक्टर हॉस्पिटल पहुंच गई, इसका जवाब सीएमएचो के पास भी नहीं है।