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  • डॉ. राम विजय शर्मा ने हट्टा की बावड़ी पर किया शोध…

    डॉ. राम विजय शर्मा ने हट्टा की बावड़ी पर किया शोध…



    डॉ. राम विजय शर्मा इतिहासकार, पुरातत्ववेता एवं अंतर्राष्ट्रीय शोधकर्ता रायपुर भारत एवं डॉ. वीरेन्द्र सिंह गहरवार राष्ट्रीय अध्यक्ष इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट (मध्यप्रदेश) ने संयुक्त रूप से हट्टा की बावड़ी पर ऐतिहासिक शोध किया। हट्टा गाँव बालाघाट से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हट्टा की बावड़ी 16वीं-17वीं शताब्दी की एक ऐतिहासिक और कलात्मक जलसंरचना है। गोंड राजा हटे सिंह वल्के द्वारा इसका निर्माण किया गया था जिसमे 8 मंजिल है लेकिन 3 तल दिखते है और शेष 5 तल पानी के अन्दर है।

    स्थापत्य कला का यह अद्भुत नमूना है बावड़ी से सुरंग लांजी किला और मंडला किला तक अन्दर अन्दर जाता है। सुरक्षा के कारणों से इसे बंद कर दिया गया है। यह युद्ध के समय जल आपूर्ति के लिए बनायीं गयी थी। इस बावड़ी में जल काहा से आता है इसके स्रोत का आज भी रहस्य बना है। इस बहुमंजिला जलसंरचना पर बेहतरीन नकाशी की गयी है। इस बावड़ी पर 3 राज वंशो प्रभाव रहा है जिनमे हैहय राजवंश, गोंड राजवंश और भोंसले राजवंश प्रमुख है। इसकी वास्तुकला पर इन 3 राजवंशो की शैलियों की झलक मिलती है। राजा हटे सिंह ने इसका निर्माण केवल पानी के लिए ही नही बल्कि सैनिको के छिपने आराम करने तथा पेयजल की सुविधा के लिए किया गया था। यह बावड़ी विशाल चट्टानों को काट कर बनायीं गयी थी। इसके प्रथम तल पर 10 स्तम्भ है। जबकि निचले तल पर 8 अलंकृत स्तंभों पर आधारित बरामदे और कक्ष बने हुए है। बावड़ी के मुख्य द्वार पर 16वीं शताब्दी के चतुर्मुखी शिव और अम्बिकादेवी (हाथ में श्रीफल लिए) की सुन्दर नकाशीदार प्रतिमाये पर्यटकों का स्वागत करती है कुछ लोगो का मानना है की इस बावड़ी की नीव नागपुर शहर को बसाने वाले राजा बुलन्दशाह ने 17वीं शताब्दी में रखी थी बाद में हटे सिंह वल्के ने इसका विस्तार किया जिसके नाम इस गाँव का नाम हट्टा पड़ा ।

    भोंसले राजवंश के शासन के दौरान सामंत अपनी सेनाओ को याहा छिपाते थे। गर्मियों में तापमान कम रखने के लिए और पानी ठंडा रखने के लिए इसे जमीन के अन्दर बहुमंजिला बनाया गया था । इसकी संरचना 22X12 मीटर के घेरे में फैली है स्थानीय आदिवासियों के लिए यह केवल एक स्मारक नही बल्कि आदिवासी विरासत की हिस्सा है इसके निर्माण में पत्थरों को जोड़ने के लिए चुना गुड के घोल और बेल के मिश्रण का उपयोग किया गया था इसी कारण यह संरचना आज तक मजबूती के साथ खड़ी है। भोंसले काल के बाद 1818 ईस्वी में यह बावड़ी लोधी जर्मीदार नागपुरे परिवार के पास आई । जमीनदार परिवार ने 1988 ईस्वी में इसे पुरातत्व विभाग को सौंप दिया। जमीनदार प्रताप सिंह बताते है की आज से 20 25 साल पहले बालाघाट के तहसीलदार इस बावड़ी में पटवारियों की मासिक बैठक लेते थे। शोध कैंप में हट्टा जमीनदार प्रताप सिंह नागपुरे, श्री दिनेश नेमा, श्री राजेंद्र ब्रम्हे (से.नि. ए. एस. आई. नागपुर ) तथा आदिवासी जनता उपस्थित रह कर शोध कैंप को सफल बनाये।

  • छत्तीसगढ़ में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, 42 IAS अफसरों के तबादले, 7 जिलों के कलेक्टर बदले गए, देखें आदेश…

    छत्तीसगढ़ में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, 42 IAS अफसरों के तबादले, 7 जिलों के कलेक्टर बदले गए, देखें आदेश…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की है। एक साथ 42 IAS और 1 IFS अधिकारियों की पोस्टिंग और अतिरिक्त प्रभारों में बड़े बदलाव किए गए हैं। अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव से लेकर कलेक्टर स्तर तक कई महत्वपूर्ण पदों पर नई तैनातियां की गई हैं।

  • साय कैबिनेट का बड़ा फैसला: संजय पिल्लै, मुकेश गुप्ता, आरके विज का भूपेश सरकार में हुआ डिमोशन रद्द…

    साय कैबिनेट का बड़ा फैसला: संजय पिल्लै, मुकेश गुप्ता, आरके विज का भूपेश सरकार में हुआ डिमोशन रद्द…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय, महानदी भवन में बुधवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में अहम प्रशासनिक निर्णय लिया गया।


    मंत्रिपरिषद ने वर्ष 1988 बैच के तीन सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों—संजय पिल्लै, आर.के. विज और मुकेश गुप्ता—की पदावनति से जुड़े पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया है।
    यह पदावनति आदेश 26 सितंबर 2019 को तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में जारी किया गया था। साय कैबिनेट ने इस आदेश का पुनर्विलोकन करते हुए इसे रद्द करने का निर्णय लिया।

    इसके साथ ही, मंत्रिपरिषद ने 24 सितंबर 2019 को लिए गए उस मूल निर्णय को भी अपास्त कर दिया, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई थी। कैबिनेट ने स्पष्ट किया कि उस निर्णय के अनुपालन में जारी सभी आदेशों को बैठक से पूर्व की स्थिति में पुनर्जीवित माना जाएगा।

  • आम जनता से शालीनता से पेश आएं अधिकारी- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय…लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं – मुख्यमंत्री का अधिकारियों को दो टूक निर्देश…

    आम जनता से शालीनता से पेश आएं अधिकारी- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय…लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं – मुख्यमंत्री का अधिकारियों को दो टूक निर्देश…

    रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक व्यवस्था को जनकेंद्रित और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से शासकीय अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं कि वे आमजन के साथ शालीनता, धैर्य और सम्मान के साथ व्यवहार करें। उन्होंने दो टूक कहा कि मुख्यालय और फील्ड स्तर पर शासकीय अधिकारी ही शासन का चेहरा होते हैं, इसलिए उनका आचरण शासन की छवि को प्रभावित करता है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को सुनना प्रशासनिक अधिकारियों का पहला कर्तव्य है। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि वे जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समाधान पर केंद्रित रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवाद तभी सार्थक है, जब उसमें संवेदना और समस्याओं का समाधान करने की नीयत हो।
    उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभागों में जनसमस्याओं के निराकरण को प्रभावी, सरल और भरोसेमंद बनाया जाए। जब कोई आम नागरिक किसी शासकीय कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सकारात्मक अनुभव ही जनता के मन में विश्वास पैदा करता है।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के अनुभव से मापी जाती है। इसलिए अधिकारी फील्ड में सक्रिय रहें, लोगों से सीधे संवाद करें और उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कार्य करें। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता और तत्परता ही प्रशासन की असली ताकत है।
    उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाने की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे बनाए रखने के लिए ईमानदारी के साथ-साथ व्यवहार में शालीनता और विनम्रता भी जरूरी है।
    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहार से स्थापित होता है। यदि अधिकारी जनता के साथ सरल, सहज, सहयोगात्मक और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण का तरीका हर समय अपनाते हैं, तो प्रशासन स्वयमेव अधिक प्रभावी हो जाता है और शिकायतों की संख्या स्वतः कम होने लगती है।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब प्रशासन हर नागरिक के लिए सुलभ, संवेदनशील और सम्मानजनक बने। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे इस भावना को अपने कार्य का मूल मंत्र बनाकर आगे बढ़ें और हर व्यक्ति को यह अहसास दिलाएं कि सरकार उसके साथ खड़ी है।
    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार के दौरान वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों में आकस्मिक निरीक्षण करेंगे और अधिकारियों के कार्य के साथ-साथ उनके व्यवहार पक्ष का भी अवलोकन करेंगे।उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के दौरान अधिकारियों की संवेदनशीलता, शालीनता और जवाबदेही को प्राथमिकता के साथ परखा जाएगा।
    उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन 1 मई से 10 जून तक प्रदेशभर में किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर समाधान शिविर लगाए जाएंगे।इस दौरान पंचायत एवं वार्ड स्तर पर शिविरों में आवेदन स्वीकार कर जनसमस्याओं का निराकरण किया जाएगा। सुशासन तिहार में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रहेगी तथा स्वयं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा औचक निरीक्षण और जनसमस्याओं के निराकरण और शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी।

  • डिप्टी ब्रांच मैनेजर सोना लेकर फरार, बैंक में मचा हड़कंप…

    डिप्टी ब्रांच मैनेजर सोना लेकर फरार, बैंक में मचा हड़कंप…

    बिलासपुर। जिले में आईसीआईसीआई बैंक की मंगला स्थित शाखा में 1.38 करोड़ रुपये की बड़ी हेराफेरी का मामला सामने आया है। इस मामले में बैंक की डिप्टी ब्रांच मैनेजर पर गंभीर आरोप लगे हैं, जिसने अपने पति के साथ मिलकर साजिश रची और उपभोक्ताओं के गोल्ड लोन में गिरवी रखे गए सोने को लेकर फरार हो गई।

    जानकारी के मुताबिक, आरोपियों ने ग्राहकों के एफडी और गोल्ड लोन से जुड़े खातों में गड़बड़ी करते हुए बैंक को भारी नुकसान पहुंचाया है। जब बैंक प्रबंधन ने दस्तावेजों और लॉकर की जांच की तो गोल्ड लोन के पाउच में असली सोने की जगह नकली आभूषण पाए गए, जिससे पूरे मामले का खुलासा हुआ।

    इस घोटाले की जानकारी मिलते ही बैंक के ब्रांच मैनेजर ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का केस दर्ज कर लिया है। घटना सिविल लाइन क्षेत्र के मंगला स्थित आईसीआईसीआई बैंक शाखा की है। फिलहाल सिविल लाइन पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और आरोपियों की तलाश जारी है।

    पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। जांच में यह भी पता चला कि ग्राहकों के फर्जी हस्ताक्षर कर 87.95 लाख रुपए के 14 अवैध ट्रांजेक्शन किए गए। इसी तरह एफडी पर ओवरड्राफ्ट कर एक महिला ग्राहक की 30 लाख की जमा पूंजी में से बिना अनुमति 28.29 लाख रुपए निकाल लिए गए। जांच में यह भी पता चला कि कई ग्राहकों के फिक्स्ड डिपॉजिट और निवेश के वाउचर बैंक रिकॉर्ड से गायब पाए गए।

    पूरे मामले में सभी ने मिलकर अगस्त 2024 से सितंबर 2025 तक 1.38 करोड़ रुपए की हेराफेरी को अंजाम दिया है। थाना प्रभारी एसआर साहू ने अरूप पाल की लिखित शिकायत पर आरोपी डिप्टी ब्रांच मैनेजर, उसके पति और अन्य के खिलाफ गबन और धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

  • डॉ रामविजय शर्मा ने डोंगरगढ़ की विश्व सुंदरी नर्तकी कामकंदला पर किया शोध…

    डॉ रामविजय शर्मा ने डोंगरगढ़ की विश्व सुंदरी नर्तकी कामकंदला पर किया शोध…



    डोंगरगढ़। डॉ राम विजय शर्मा इतिहासकार, पुरातत्ववेता एवं अंतर्राष्ट्रीय शोधकर्ता रायपुर भारत में एक शोध कैंप का आयोजन कर डोंगरगढ़ की विश्व सुंदरी नर्तकी कामकंदला पर विस्तृत ऐतिहासिक शोध किया प्राचीन काल में डोंगरगढ़ को कामावती नगरी के नाम से जाना जाता था। राजा वीरसेन ने डोंगरगढ़ रियासत को बसाया था। उनकी कोई संतान नही थी इसलिए उन्होने शिव पार्वती की उपासना की जिसके फलस्वरूप मदन सेन पुत्र की प्राप्ति हुई। मदन सेन के पुत्र राजा कामसेन थे और उन्होने ही इस नगरी का नाम अपने नाम पर कामावती नगरी रखा था। राजा कामसेन के दरबार में विश्व सुंदरी नर्तकी कामकंदला नृत्य करती थी। उसके नृत्य संगीत को देखने के लिए देश-विदेश से राजा महाराजा आते थे। उस समय नृत्य संगीत का समाज में बहुत अधिक महत्व था क्योकि नृत्य संगीत केवल मनोंरंजन के साधन नही थें बल्कि इसके माध्यम से संस्कृति, इतिहास, एवं पौराणिक गाथाओं की प्रस्तुती की जाती थी। कामकंदला के संरक्षक के रूप में राजा कामसेन थे. उसी दरबार में संगीतज्ञ माधवानल अपनी संगीत की धारा बहाते थे, उसी बिच माधवानल का कामकंदला से प्रेम हुआ। एक बार दरबार में कामकंदला और माधवानल का संगीत कार्यक्रम चल रहा था। देश विदेश के राजा महाराजा संगीत का आनंद ले रहें थे, राजा कामसेन माधवानल के संगीत से खुश होकर एक किमती हीरे का हार माधवानल को पुरस्कार में दिया बाद में यह हार माधवानल में कामकंदला को दे दिया। राजा कामसेन इससे नाराज हो गये और माधवानल को देश से बाहर निकाल दिया। इधर-उधर भटकते हुए माधवानल उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के दरबार में पहुंचें और सारी घटना बताई और न्याय की गुहार लगाई। राजा विक्रमादित्य कामकंदला और माधवानल की प्रेम की परीक्षा लेना उचित समझा और उसके बाद मदद करने की बात बताई। मााधवानल की झूठी मृत्यु की समाचार फैला दी गई यह खबर डोंगरगढ़ में भी पहुंची और मृत्यु की खबर पाकर कामकंदला आत्महत्या कर ली। डोंगरगढ़ में निरासा फैल गई। कामकंदला की मृत्यु का समाचार पाकर माधवानल डोंगरगढ़ आया और उसने भी मृत्यु को गले लगाया। जब राजा विक्रमादित्य को दोनो की मृत्यु का समाचार मिला तो वे बहुत दुखी हुए उन्होने कामावती नगरी पर चढाई की और कामावती नगरी को नष्ट कर दिया। राजा विक्रमादित्य अपना प्राण त्यागने के लिए निश्चय किया । राजा की भक्ती से प्रसन्न होकर देवी बमलेश्वरी प्रकट हुई और माता बमलेश्वरी ने कामकंदला और माधवानल को पुर्नजिवित कर दिया। इसके पश्चात कामावती नगरी का नाम डोंगरगढ़ पड गया। राजा विक्रमादित्य उज्जैन लौट गए और कामकंदला तथा माधवानल पुन डोंगरगढ़ में नृत्य और संगीत की गंगा जमुना की धारा बहाने लगे। डोंगरगढ़ में खुशी की लहर दौड़ गई और बरसो बाद डोंगरगढ़ समृध्द हुआ। आज भी डोंगरगढ़ पहाडी के पास थोडा हटकर कामकंदला के नाम पर कामकंदला सरोवर है। जिसमे राजा रानी और कामकंदला स्नान करती थी। राजा के घोडे भी जल पिते थे, आज भी कामकंदला सरोवर के जल का पवित्र माना जाता है तथा उसे डोगरगढ़ में धार्मिक अनुष्ठान करने की परंपरा है। पहाड़ी पर दुसरी ओर तपसी काल नामक स्थान है जहां कामकंदला निवास करती थी।



    इस शोध कैंप में पटवारी मोहन कोडोपी, संजीव यादव, रमेश यादव, दिपक सिंह, गजेंन्द्र वर्मा, पकलु एवं अन्य ग्ग्रमिण उपस्थित होकर शोध कैंप को सफल बनाया।

  • अब ओवरस्पीड पर सीधे घर पहुंचेगा चालान, छत्तीसगढ़ में पहली बार LiDAR स्पीड कैमरे शुरु…

    अब ओवरस्पीड पर सीधे घर पहुंचेगा चालान, छत्तीसगढ़ में पहली बार LiDAR स्पीड कैमरे शुरु…

    छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग ने पहली बार लेडार आधारित स्पीड कैमरे लगाए हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत 1 करोड़ 90 लाख की लागत से रायपुर समेत 5 जिलों में हाईटेक कैमरे स्थापित किए गए हैं, जो वाहनों की स्पीड रिकॉर्ड कर स्वतः ई-चालान जारी करेंगे।

    सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए पहली बार लेडार आधारित स्पीड कैमरे
    1 करोड़ 90 लाख रुपए की लागत से कैमरे स्थापित किए गए है


    कैमरे रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर और धमतरी के प्रमुख मार्गों पर लगाए गए

    ये कैमरे वाहनों की स्पीड रिकॉर्ड कर स्वतः ई-चालान जनरेट करेंगे

    जल्द ही पूरे सिस्टम को पूरी तरह एक्टिव किया जाएगा

    सड़क हादसों पर लगाम लगाने की नई पहल

    छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को देखते हुए परिवहन विभाग ने पहली बार लेडार (LiDAR) आधारित आधुनिक स्पीड कैमरों का उपयोग शुरु किया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीब 1 करोड़ 90 लाख रुपए की लागत से 7 हाईटेक कैमरे पांच जिलों के प्रमुख मार्गों पर लगाए गए हैं। इन कैमरों का उद्देश्य तेज रफ्तार और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर निगरानी रखते हुए हादसों में कमी लाना है।

    इन शहरों और स्थानों पर लगाए गए कैमरे

    राज्य सरकार के निर्देश पर कैमरे रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर और धमतरी जिले के प्रमुख ट्रैफिक मार्गों पर लगाए गए हैं।

    रायपुर में खास तौर पर इन स्थानों को शामिल किया गया है:

    मरीन ड्राइव

    वीआईपी रोड

    मंदिर हसौद क्षेत्र

    इसके अलावाः

    बिलासपुर बायपास अंबिकापुर का मुख्य मार्ग

    जगदलपुर का मुख्य मार्ग धमतरी जिले का कुरुद तहसील क्षेत्र

    इन स्थानों का चयन ट्रैफिक दबाव और हादसों की अधिक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

    100 मीटर दूरी से रिकॉर्ड होगी स्पीड

    वाई-फाई से लैस ये आधुनिक कैमरे परिवहन विभाग के वाहन सॉफ्टवेयर से सीधे जुड़े हुए हैं। ये 100 मीटर दूरी से वाहन की गति माप सकते हैं, दो लेन की सड़कों पर एक साथ कई वाहनों की निगरानी कर सकते हैं, वाहन की पूरी जानकारी सिस्टम में दर्ज करते हैं। इससे ट्रैफिक नियम उल्लंघन करने वालों पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।

    लेडार तकनीक से स्वतः बनेगा ई-चालान

    लेडार तकनीक (LiDAR Technology) आधारित ये कैमरे प्रकाश किरणों (Light Beams) की मदद से वाहन की गति और दूरी का सटीक आकलन करते हैं। यदि कोई वाहन तय सीमा से अधिक स्पीड में चलता है तो नंबर प्लेट स्कैन होती है, फोटो और वीडियो रिकॉर्ड होता है, स्वतः ई-चालान जनरेट होता है।

    यह चालान वाहन मालिक को व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए भेजा जाएगा।

    रात और खराब मौसम में भी करेंगे निगरानी

    इन हाईटेक कैमरों में नाइट विजन सुविधा, खराब मौसम में भी स्पष्ट रिकॉर्डिंग, मल्टी-व्हीकल ट्रैकिंग क्षमता जैसी विशेषताएं मौजूद हैं, जिससे 24×7 निगरानी संभव होगी।

    अभी टेस्टिंग जारी, जल्द होंगे पूरी तरह सक्रिय

    परिवहन विभाग और पुलिस के समन्वय से फिलहाल कैमरों की टेस्टिंग की जा रही है। विभाग के अनुसार पहले चरण में लोगों को जागरुक किया जाएगा, उसके बाद ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।

    अधिकारियों ने क्या कहा

    अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने बताया कि सड़क हादसों को रोकने और ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पांच जिलों में सात कैमरे लगाए गए हैं। भविष्य में इस योजना का विस्तार अन्य जिलों में भी किया जाएगा।

    LIDAR (Light Detection and Ranging) कैमरे एक साथ कई वाहनों की स्पीड रिकॉर्ड कर सकते हैं।


    नंबर प्लेट पहचान (ANPR)

    तकनीक से वाहन की पहचान स्वतः होती है।

    यह रेडार से ज्यादा सटीक तकनीक है।

    ओवरस्पीड होने पर नंबर प्लेट स्कैन कर ऑटोमैटिक चालान बनाता है।

    100 मीटर + दूरी और रात में भी काम करता है।

    IMP FACTS

    लागतः 1 करोड़ 90 लाख रुपए

    कैमरों की संख्या: 7

    जिले: 5 (रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, धमतरी)

    स्पीड रिकॉर्डिंग दूरी: 100 मीटर

    सुविधाः नाइट विजन + ऑटो ई-चालान

    सिस्टम

    निष्कर्ष

    छत्तीसगढ़ में LIDAR कैमरा सिस्टम की शुरुआत सड़क सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न सिर्फ ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित होगा, बल्कि तेज रफ्तार के कारण होने वाले हादसों में भी कमी आने की उम्मीद है। आने वाले समय में इस तकनीक का विस्तार पूरे प्रदेश में किया जा सकता है।

  • खरसिया में वर्चुअल न्यायालय उद्घाटन एवं आधारशिला कार्यक्रम संपन्न…

    खरसिया में वर्चुअल न्यायालय उद्घाटन एवं आधारशिला कार्यक्रम संपन्न…


    खरसिया। न्यायिक क्षेत्र में अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आज दिनांक 1 अप्रैल 2026 को जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय खरसिया का वर्चुअल उद्घाटन तथा न्यायिक अधिकारियों के आवास एवं डिजिटल कंप्यूटर कक्ष के निर्माण हेतु आधारशिला कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
    कार्यक्रम का वर्चुअल शुभारंभ जस्टिस रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर द्वारा किया गया। वहीं कार्यक्रम में , न्यायमूर्ति उच्च न्यायालय जस्टिस सचिन सिंह राजपूत, छत्तीसगढ़ एवं रायगढ़ जिले के पोर्टफोलियो जज की गरिमामयी उपस्थिति रही।
    इस अवसर पर खरसिया न्यायालय से श्वेता श्रीवास्तव (एडीजे खरसिया), मृणालिनी (प्रथम श्रेणी न्यायाधीश), मीनाक्षी नाग सहित अन्य न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।
    अधिवक्ता संघ खरसिया से भोगीलाल यादव (अध्यक्ष) एवं युगल वैष्णव (सचिव) के साथ समस्त अधिवक्ता गण विशेष रूप से कार्यक्रम में शामिल हुए।
    कार्यक्रम के दौरान न्यायिक सेवाओं को और अधिक सुलभ एवं आधुनिक बनाने की दिशा में डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया। नई व्यवस्थाओं से क्षेत्र के आम नागरिकों को त्वरित एवं पारदर्शी न्याय मिलने की उम्मीद जताई गई।
    इस आयोजन ने खरसिया एवं रायगढ़ जिले में न्यायिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक नई पहल के रूप में महत्वपूर्ण संदेश दिया।

  • वेयर हाउस से बोर का केबल वायर एवं लोहे के एंगल की हुई चोरी…

    वेयर हाउस से बोर का केबल वायर एवं लोहे के एंगल की हुई चोरी…


    खरसिया। खरसिया नगर के मौहापाली रोड स्थित प्रतिष्ठित फर्म जगन्नाथ प्रसाद अरूण कुमार का गौशाला मार्ग में एक वेयर हाउस है, जहां उनके द्वारा बोन खनन कराया गया है एवं वेयर हाउस की सरुक्षा की दृष्टि से परिसर का बाउण्ड्रीवाल कराकर लोहे के एंगल में कटीले तार का फेंसिंग कराया गया है एवं प्रकाश व्यवस्था की गई है। दिनांक 23.03.2026 को रात्रि 9.20 बजे से 9.40 बजे के बीच किसी अज्ञात चोरों द्वारा उक्त वेयर हाउस परिसर में लगे बोर, स्ट्रीट लाईट के केबल तथा सुरक्षा हेतु लगाये गये लोहे के एंगल एवं कटीले तार के फेंसिंग को चोरी कर लिया गया है। जिसकी कुल लागत 20000/- बीस हजार रूपये है। उक्त चोरी की जानकारी परिसर संचालक अंकित अग्रवाल पिता स्व. अरूण अग्रवाल को दिनांक 25.03.2026 को होने पर उनके द्वारा इसकी प्राथमिकी पुलिस चौकी खरसिया में दर्ज कराई गई है, पीडित पक्ष के रिपोर्ट पर खरसिया पुलिस द्वारा बीएनएस की धारा 302 (2) के तहत मामला पंजीबद्ध किया जाकर मामले के विवेचना की जा रही है। पीडित पक्षकार अंकित अग्रवाल ने बताया कि इसके पूर्व भी मेरे वेयर हाउस से केबल तार एवं लोहे का एंगल चोरी हो चुका है।

  • आमा पान के पतरी फेम दिलीप सड़ंगी एवं छम छम नाचे देखो वीर हनुमान के रस गायक नयन नंदवाना उदयपुर का आगमन खरसिया में 2 अप्रैल को…

    आमा पान के पतरी फेम दिलीप सड़ंगी एवं छम छम नाचे देखो वीर हनुमान के रस गायक नयन नंदवाना उदयपुर का आगमन खरसिया में 2 अप्रैल को…


    खरसिया। धर्म की नगरी खरसिया में इस वर्ष भी श्री हनुमान जन्मोत्सव बड़े ही धूम धाम से मनाया जा रहा है। 280 वर्षों से अधिक प्राचीन मनोकामना सिद्ध हनुमान मंदिर जो कि गंज बाजार खरसिया में स्थित है। हनुमान जन्मोत्सव हेतु तैयारियां जोर शोर से प्रारंभ हो चुकी है। इस वर्ष भक्तों को अपने भजनों से रिझाने उदयपुर के नयन नंदवाना खरसिया आ रहे जिनके सैकड़ों भजन विश्व में प्रसिद्ध है नयन जी का आगमन प्रथम बार छत्तीसगढ़ में होने जा रहा है। वही छत्तीसगढ़ी जसगीत के जादूगर कोरी कोरी नारियल चढ़े, आमा पान के पत्तरि , पाताल चटनी जैसे अनेकों प्रसिद्ध भजनों के गायक दिलीप सड़ंगी का भी आगमन धर्म की नगरी खरसिया में होने जा रहा है। वही बता दे आपको की प्रातः 9 बजे मनोकामना निशान यात्रा बाबा के भजनों के साथ बाजों गाजे के साथ गंज बाजार से निकलेगी। एवं दोपहर में रायगढ़ की भजन मंडली द्वारा सुंदरकांड किया जाएगा एवं संध्या में बाबा का जन्मोत्सव मंदिर प्रांगण में मनाया जाएगा। वही रात्रि 6 बजे से भजनों की अमृत वर्षा विश्व प्रसिद्ध गायकों द्वारा की जाएगी, साथ ही फूलों की होली, अलौकिक दरबार, भव्य श्रृंगार, फूल मालों से लाइटिंग से साज सजावट कलकत्ता के कलाकारों द्वारा किया जाएगी । सियाराम सखा मंडल के सभी युवा पूरे जोर शोर से तैयारी में जुटे हुए है। सियाराम सखा मंडल के प्रमुख मनोज गोयल ने बताया कि नगर में हनुमान जन्मोत्सव को लेकर काफी उत्साह है और हम हर वर्ष प्रयास करते है कि बाबा का जन्मोत्सव और धूम धाम से मनाया जाए उसी प्रयास में इस वर्ष भी सभी तैयारियां जोरो शोरों से चल रही है। आगे मनोज गोयल ने सभी अंचल वासियों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में सभी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। वही मंदिर के महाराज बिट्टू शर्मा ने बताया कि बाबा की ज्योत एवं अखंड रामायण पाठ भी होगा ज्योत एवं मनोकामना निशान की रशीद हेतु आप मंदिर से संपर्क कर सकते है । आपको बता दे कि सियाराम सखा मंडल पिछले कई वर्षों से लगातार अनेकों धार्मिक आयोजन करते आ रहा है पिछले वर्ष भगवा रंग की मशहूर गायिका शहनाज अख्तर ने अपने भजनों से भक्तों को रिझाया था। सियाराम सखा मंडल निरंतर ही नए नए भजन सम्राटों को खरसिया निमंत्रण दे रहा है। सियाराम सखा मंडल के मनोज गोयल, अंकित अग्रवाल(हेल्पिंग हैंड्स), रतन अग्रवाल , राजेश अग्रवाल ,विनय कबूलपुरिया, हिमांशु अग्रवाल, राजेंद्र नूतन, संजय दीपक मेडिकल , दीपक अग्रवाल बुधराम, विक्की महाराज, राहुल अग्रवाल लाली, मनोज बाऊ, राजा अग्रवाल, अंबर अग्रवाल, विवेक कबूलपुरिया,अंकित चिंटू, संदेश बंसल, नीरज बोंदा, विनय पीवी,सुमित अग्रवाल, यश गुप्ता, अविचल अग्रवाल , संजय कंकरवाल, शुभम सहित सारे युवा पूरे जी जान से तैयारी में जुटे है। वही सियाराम सखी मंडली महिला मंडल द्वारा भी सुंदरकांड निशान यात्रा की तैयारी की जा रही है। आपको बता दे कि 3 अप्रैल को दोपहर 12 बजे से महा भंडारे का आयोजन किया गया है।