रायपुर। लाउडस्पीकर, डीजे और दूसरे ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर अब वॉल्यूम लिमिट उपकरण (ध्वनि नियंत्रक) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। वॉल्यूम लिमिट यंत्र के बिना किसी भी तरह के ध्वनि विस्तारक यंत्र न बेचे जा सकेंगे और न ही किराए पर दिए जा सकेंगे। इसके लिए प्रदेश सरकार के पर्यावरण विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है।
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 के अंतर्गत ध्वनि प्रदूषण के प्रभावी नियंत्रण के लिए सभी ध्वनि प्रणाली या लोक संबोधन प्रणाली में ध्वनि सीमक का उपयोग तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इस नियम का पालन ध्वनि विस्तारक यंत्र बनाने वाली कंपनियों, बेचने वाली एजेंसियों और दुकानदारों को करना है। उन्हें ध्वनि सीमक उपकरण का उपयोग किए बिना किसी भी तरह के ध्वनि विस्तारक यंत्र को बेचना, खरीदना, किराए पर देना या खुद उपयोग में नहीं लाना है। ध्वनि सीमक को लगाने से ध्वनि विस्तारक यंत्रों की आवाज एक निर्धारित डेसिबल में बंध जाएगी। उससे ज्यादा ध्वनि नहीं बढ़ाई जा सकेगी।
सरकारी एजेंसियों को मिली जिम्मेदारीध्वनि विस्तारक यंत्रों में ध्वनि सीमक उपकरणों का उपयोग सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पुलिस प्राधिकारी, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और पंचायतों को जिम्मेदारी दी गई है। इन्हें यह भी सुनिश्चित करना है कि सरकारी और गैर सरकारी कार्यक्रमों में बिना ध्वनि सीमक उपकरण लगे ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग न हो पाए।
90 डेसिबल से ज्यादा नुकसानदायक
मानव जाति के लिए 90 डेसिबल से ज्यादा ध्वनि नुकसानदायक होती है। आठ घंटे से ज्यादा इतनी ध्वनि पर भी शोर सुनना घातक होता है।
ज्यादा ध्वनि से पड़ता है प्रतिकूल प्रभाव
कई शोधों से पता चला है कि ध्वनि प्रदूषण के कारण श्रवण क्षमता कम हो रही है। इसके अलावा अनिंद्रा, उच्च रक्तचाप, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव की शिकायतें भी बढ़ी हैं।
दिल्ली। राम मंदिर निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अब इसके स्थापत्य को लेकर उत्सुकता जागी हैं।
इसकी तैयारियां 90 के दशक यानी करीब 30 साल पहले से ही आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई ने शुरू कर दी थी। उन्होंने ऐसा विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंघल के साथ किया उनका दावा है कि, निर्माण के लिए अगर दो हजार कारीगर लगाए जाते हैं तो इसे ढाई साल में पूरा बनाया जा सकता है। निर्माण के लिए करीब 100 करोड रुपए के खर्च का आकलन किया गया है। गुजरात के रहने वाले चंद्रकांत सोमपुरा का परिवार पीढ़ियों से मंदिर ड्राइंग कर रहा है, उन्हीं के परिवार ने सोमनाथ मंदिर डिजाइन किया था, वहीं लंदन में स्वामीनारायण मंदिर केवल 2 साल में तैयार करवाया था। चंद्रकांत के मुताबिक उन्होंने 6 महीने में 6 किस्म के डिजाइन पर काम करते हुए राम मंदिर का नागर शैली मॉडल तैयार किया था। भारत में नागर, द्रविड़ और बेसर शैली में मंदिर का निर्माण होता है। उत्तर भारत में नागर शैली प्रसिद्ध है। मंदिर के लिए 50 फीसदी काम पूरा हो चुका है,इसके गुंबद को अभी डिजाइन किया जा रहा है।
निर्माण में नहीं होगा लोहे का इस्तेमाल
राम मंदिर के निर्माण में लोहे का इस्तेमाल नहीं होगा इसकी वजह स्थापत्य को पत्थरों के जरिए मंदिरों को मजबूती देना बताई जाती है। वही भगवान राम की प्रतिमा और राम दरबार का निर्माण होगा मुख्य मंदिर में सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और भगवान गणेश की प्रतिमाएं भी उनके इर्द-गिर्द होंगी।
स्थापत्य की खासियत कुछ ऐसी होंगी
इसे डेढ़ सौ फुट चौड़ा, 270 फुट लंबा, और 270 फुट, ऊंचा गुंबद आकार में रचा जाएगा
इसमें सिंहद्वार नृत्य मंडप रंग मंडप कोली गर्भगृह के सुंदर प्रवेश द्वार होंगे
फर्श पर संगमरमर का इस्तेमाल होगा बाकी निर्माण पत्थर भरतपुर से लाए जाएंगे
मंदिर आधार से शिखर तक चार कोण का, और गर्भगृह आठ कोण का होगा,परिक्रमा वृत्ताकार होगी।
मॉडल दो मंजिला है, भूतल पर मंदिर और ऊपरी मंजिल पर राम दरबार होगा।
मंदिर में 221 स्तम्भ होंगे हर एक पर देवी-देवताओं की बारह आकृतियां बनी होंगी।
मंदिर में ही संत निवास, शोध केंद्र, कर्मचारी आवास, भोजनालय, आदि भी होगा।
एक लेटेस्ट रिपोर्ट की मानें तो सुशांत सिंह राजपूत अपनी अगली फिल्म में एक्स-गर्लफ्रेंड कृति सेनन की बहन नूपुर सेनन के साथ नजर आने वाले हैं। ऐसा कहा जा रहा है सुशांत सिंह राजपूत और नूपुर सेनन ने एक फिल्म पर चर्चा करने के लिए साजिद नाडियावाला से मुलाकात की है। अगर सबकुछ सही रहा तो जल्द फिल्ममेकर दोनों को लेकर एक लव स्टोरी पर बेस्ड फिल्म बनाएंगे। हालांकि फिल्म से जुड़ी जानकारी शुरुआती स्टेज पर है लेकिन इन दोनों ऐक्टर्स फिल्म में एक साथ आना तय है।जहां एक तरफ सुशांत सिंह राजपूत अपनी दमदार ऐक्टिंग से लोगों को प्रभावित किया है, वहीं दूसरी तरफ नूपुर सेनन फिल्मी दुनिया में नई हैं। नूपुर सेनन अक्षय कुमार के साथ एक म्यूजिक विडियो में नजर आएंगी। बता दें कि फिल्म राब्ता की शूटिंग के दौरान सुशांत सिंह राजपूत और कृति सेनन एक दूसरे के साथ सीरियस रिलेशनशिप में रहे हैं। हालांकि जल्द ही कुछ मतभेदों के कारण उनका ब्रेकअप हो गया था।दोनों ऐक्टर्स के वर्कफ्रंट की बात करें तो सुशांत सिंह राजपूत आखिरी बार श्रद्धा कपूर के साथ फिल्म छिछोरे में नजर आए थे। वहीं, कृति सेनन मल्टीस्टारर फिल्म हाऊसफुल 4 में दिखाई दी थीं।
दिल्ली। मोबाइल नंबर पोर्टिबिलिटी (एमएनपी) के संशोधित नियम फिलहाल 11 नवंबर से प्रभावी होने नहीं जा रहे हैं। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने तकनीकी दिक्कतों के चलते इस समयसीमा को आगे के लिए टाल दिया है। ट्राई ने कहा कि नयी तारीख जल्द अधिसूचित की जाएगी। ऐसे में मोबाइल नंबर पोर्टिबिलिटी अभी मौजूदा नियमों के अनुसार ही होगी। साथ ही इसमें चार से 10 नवंबर के दौरान कोई व्यवधान भी नहीं होगा। ट्राई ने कहा कि नयी प्रक्रिया को इस्तेमाल में लाने से पहले ठीक तरह से पड़ताल करना अपरिहार्य है ताकि ग्राहकों को बाद में प्रक्रिया से जुड़ी कोई दिक्कत नहीं हो। एमएनपी के नियम संशोधित करने का मकसद पूरी प्रक्रिया को आसान और तेज करना है। नए नियमों के तहत एक ही सर्किल में नंबर एमएनपी कराने के लिए दो दिन की समयसीमा तय की गयी है। पहले यह समय सीमा सात दिन थी।
नियामक ने मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी नियमनों में इन ताजा बदलावों को दिसंबर 2018 में जारी किया था। इन नियमनों और उसके बाद जारी अधिसूचनाओं के मुताबिक एमएनपी की संशोधित प्रक्रिया को 11 नवंबर से अमल में आना था।बहरहाल, ट्राई ने कहा, ‘यह महसूस किया गया कि जो समयसीमा बताई गई है दूरसंचार आपरेटरों और एमएनपी सेवा प्रदाताओं के स्तर पर कुछ तकनीकी मुद्दों को देखते हुये उसका पालन नहीं किया जा सकता है।’ इस लिहाज से दूरसंचार मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (सातवां संशोधन) नियमन 2018 के क्रियान्वयन को आगे के लिए टालने की जरूरत है।
घरघोड़ा। जिलेभर में हो रही नशीली प्रतिबंधित दवाइयों के सौदागरो के ऊपर कार्यवाही से जहां एक ओर पुलिस शहरी क्षेत्र में नशीली दवाओं पर कार्यवाही कर अपनी पीठ थपथपाने में लगी है वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में नशे के सौदागरों में भय व्याप्त होने के बजाय वह ज्यादा से ज्यादा नशीली दवाएं बेच कर लाभ कमाने की जुगत में लगे हुए हैं । जैसा की सर्वविदित है की घरघोड़ा एवं आसपास के क्षेत्र में नशीली दवाओं के जकड़ में कुछ युवा पीढ़ी हैं इसलिए शहरी क्षेत्रों में नशीली दवाओं के सौदागरों पर कार्यवाही के बाद शहरी क्षेत्रों में अवैध नशीली दवाइयों की उपलब्धता समाप्त होने से इन ग्रामीण क्षेत्रों में नशीली दवाओं के कारोबार को और बल मिल गया है।
सूत्रों से पता चला है कि कोटरी माल ग्राम के आसपास क्षेत्रों में नशीली सिरप एवं दवाइयों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है बताया जाता है कि नशे वाली कोडीनयुक्त सिरप ₹800 से ₹1000 तक में बिक रही है इससे समझा जा सकता है कि नशे के मकड़जाल में उलझे लोगों से किस कदर मोटी कमाई का नया रास्ता लोगों ने निकाल लिया है बहरहाल शहरी क्षेत्रों में कार्यवाही कर अपनी पीठ थपथपा रही पुलिस को इन ग्रामीण क्षेत्रों कि और भी अपनी नजरें इनायत करनी चाहिए ताकि नशे के कारोबार के समूल को नष्ट किया जा सके ।
नशा देता है अपराध को जन्म
यह सोचने वाली बात है प्रतिबंधित सिरप यदि 800 से ₹1000 तक में बिक रही है तो इसके सेवन के आदी बेरोजगार युवाओं में अपराध की प्रवृत्ति पनपने का यह सुअवसर होगा ।
निश्चित तौर पर हजार रुपए तक के महंगे नशे को करने के लिए शॉर्टकट रास्ते के चक्कर में अपराध की ओर नशे के आदी लोगो के बढ़ने की संभावना बलवती हो जाती है । जरूरत है कि कानून शहर से ग्रामीण क्षेत्रों तक फैले इस नशे के मकड़जाल को पूरी तरह ध्वस्त करें ताकि क्षेत्र के वर्तमान और भविष्य में नशे का बदनुमा दाग ना लगे।
गूगल प्ले स्टोर में जाकर मोर बिजली लिखकर डाउनलोड करना होगा ऐप…रायगढ़। अब लोगों को मोर बिजली मोबाइल ऐप के माध्यम से एक क्लिक में बिजली से जुड़ी समस्त सेवाओं की जानकारी मिल सकेगी। इस ऐप के माध्यम से नवीनतम बिजली बिल बिजली बिल का भुगतान बिजली बंद की शिकायत खपत का पैटर्न और बिजली बिल में कितनी छूट मिली इन सभी महत्वपूर्ण बातों की जानकारी मिलेगी, इसके लिए उपभोक्ता गूगल प्ले स्टोर में जाकर और बिजली लिखकर ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। इसके माध्यम से अगर उपभोक्ता का मोबाइल नंबर लिंक नहीं है तो वह स्वयं इस ऐप के माध्यम से अपना बीपी नंबर को मोबाइल नंबर से ओटीपी द्वारा लिंक कर सकता है। अगर उपभोक्ता का मोबाइल नंबर बीपी नंबर लिंक है तो उपभोक्ता अपने रजिस्टर्ड नंबर से इस ऐप को लागू कर सकते हैं, इसके माध्यम से मासिक बिजली बिल देखने भुगतान करने और रसीद प्राप्त करने की सुविधा है, इसी तरह पिछले छह माह खपत का पैटर्न देखने बिजली बिल का भुगतान का विवरण देखने और बिजली बिल हाफ योजना के प्राप्त छूट का विवरण देखने की सुविधा है। इसके माध्यम से बिजली आपूर्ति संबंधी शिकायत करने की भी सुविधा है ऐप का लाभ जिले के उपभोक्ता उठा सकते हैं।
लापरवाही पर होगी कार्यवाही
वर्तमान समय में जिले के लोग बिजली की समस्या को लेकर कंपनी के दफ्तर में फोन लगाते हैं, फोन पर ही शिकायत दर्ज कराई जाती है इसके बाद विभाग द्वारा संबंधित व्यक्ति की समस्या का निराकरण करने टीम भेजी जाती है। कई लोगों को पता नहीं चलता कि कंपनी द्वारा उनके आवेदन को लेकर क्या किया जा रहा है, लेकिन इस ऐप में शिकायत दर्ज कराने के बाद ऐप के माध्यम से ऑनलाइन मॉनिटरिंग भी की जाएगी। ऑनलाइन शिकायत के बाद निराकरण नहीं होने से कर्मचारियों पर सीधे कार्यवाही होगी इसकी मॉनिटरिंग जिला स्तर पर कार्यपालन अभियंता करेंगे।
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा राज्य सरकार की नीति के अनुरूप ‘गढ़वा नया छत्तीसगढ़ बिजली बरही जम्मो घर’ को साकार करने के लिए मोर बिजली एप का शुभारंभ किया गया है यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर मुफ्त उपलब्ध है जिसे मोर बिजली लिखकर सर्च करके आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है इसके अंतर्गत उपभोक्ता बिना बिजली बिल ऑफिस जाए ऑनलाइन विद्युत संबंधी कार्यों को घर बैठे ही कर सकते हैं पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं को मोबाइल फोन पर अपने बिजली संबंधी सभी जानकारी अपडेट रखने के लिए मोर बिजली एप का निर्माण किया गया है।
राजनांदगांव। शुक्ला मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल में डॉक्टरों की लापरवाही से हुई 23 वर्षीय पुलकेश साहू की मौत के मामले में आखिरकार एफआइआर हो ही गया। बसंतपुर पुलिस ने जांच रिपोर्ट और परिजनों की शिकायत पर हास्पिटल प्रबंधन व डॉक्टरों पर 420, 304 ए और 34 के तहत मामला पंजीबद्ध किया है। हालांकि मामले में प्रबंधन व डॉक्टरों की गिरफ्तारी नहीं की गई है। पुलिस ने एफआइआर कर मामले को विवेचना में लिया है। वहीं परिजनों को आश्वस्त भी किया है कि कार्रवाई में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। इसके लिए परिजनों ने आइजी हिमांशु गुप्ता से भी फोन पर न्याय की मांग रखी। आइजी ने भी परिजनों को कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। बड़ी बात यह है कि यह पहला ऐसा मामला है, जिसमें हास्पिटल प्रबंधन के साथ डॉक्टरों के खिलाफ भी एफआइआर दर्ज हुआ है। इधर एफआइआर की खबर शहर में लगते ही निजी हास्पिटल के संचालकों में हड़कंप मच गया है। वहीं डॉक्टर भी सकते में आ गए हैं।
परिजनों ने दर्ज कराई रिपोर्ट
डोंगरगढ़ से लगे ग्राम बेलगांव के 23 वर्षीय पुलकेश पिता कृष्णकुमार साहू बीते 26 सितंबर को बालोद जिले के देवरी-जेवरतला गांव के पास सड़क हादसे में घायल हो गया था। इलाज के लिए उसे मेडिकल अस्पताल के बाद शुक्ला मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल में दाखिल कराया गया। भर्ती के दिन ही शाम को पुलकेश के पूरे शरीर का एक्स-रे किया गया, लेकिन डॉक्टरों ने रिपोर्ट नार्मल मानकर इलाज में गंभीरता नहीं दिखाई। जबकि रिपोर्ट में पुलकेश के सिर पर अंदरूनी चोंट का निशान था। कान से ब्लड भी आ रहे थे। दूसरे दिन 27 सितंबर की सुबह जब डॉक्टरों को पुलकेश के गंभीर होने की खबर लगी, तो प्रबंधन भी हड़बड़ा गया। आखिर में इलाज के दौरान पुलकेश की मौत हो गई। जिसके बाद परिजनों ने हास्पिटल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हास्पिटल प्रबंधन के साथ डॉक्टरों को भी घेरा। हालांकि पुलिस की हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ था। इसके दूसरे ही दिन 28 सितंबर को परिजनों ने बसंतपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
बुधवार को पुलकेश के परिजन जिला कार्यालय के सामने एकजुट हो गए इसमें पुलकेश के कई एमआर दोस्त भी थे। सभी एकजुट होकर बसंतपुर थाना पहुंचे, यहां कांग्रेस के युवा नेता निखिल द्विवेदी व भाजयुमो के युवा नेता मोनू बहादुर सिंह के साथ परिजनों ने थाना प्रभारी से घटना की शिकायत की। परिजनों की शिकायत और प्रशासनिक जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने तत्काल हास्पिटल प्रबंधन व उनके दो डॉक्टर प्रतीक कौशिक और डा. चमन निषाद पर मामला दर्ज किया। इससे पहले परिजनों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निज सचिव से मोबाइल फोन पर थाना प्रभारी की बात भी कराई। जिसमें सीएम के निज सचिव ने निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया।
डॉक्टरों की लापरवाही से 23 वर्षीय बेटे को खोने के बाद भी पुलकेश के पिता कृष्णकुमार साहू कमजोर नहीं हुए। मामले में पुलकेश के दोस्तों ने भी साथ दिया, जिसके कारण परिजनों ने जिला प्रशासन के साथ मामले की शिकायत मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भी की। सीएम कार्यालय में की गई शिकायत पर मुख्यमंत्री के निज सचिव ने कलेक्टर को जांच के लिए निर्देशित किया। जिसमें कलेक्टर ने एसडीएम की अध्यक्षता में टीम गठित कर मामले की जांच कराई और रिपोर्ट सीएम के निज सचिव को भेजा। इसके बाद पुलकेश के परिजन जांच प्रतिवेदन लेकर सीएम के निज सचिव से मिले। सीएम कार्यालय के आश्वासन के बाद ही परिजनों ने बुधवार को बसंतपुर थाने में एफआइआर दर्ज कराने पहुंचे।
परिजन आज पुलिस को सौंपेंगे कई दस्तावेज
पुलकेश के परिजन गुरुवार को कई ऐसे दस्तावेज पुलिस को सौंपेगी, जिसमें हास्पिटल प्रबंधन व डॉक्टरों पर कई और धाराएं जुड़ सकती है। पुलकेश के चाचा प्रेम साहू ने बताया कि हास्पिटल प्रबंधन ने सीसीटीवी फूटेज के साथ दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर साक्ष्य छुपाने की कोशिश की है। लेकिन उनके पास कई ऐसे दस्तावेज है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रबंधन व डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही की है। पुलकेश के चाचा ने बताया कि सीएम से शिकायत के बाद प्रबंधन के डॉक्टरों ने केस वापस लेने उन पर दबाव बनाने की कोशिश भी की है, जिसका आडियो पुलिस को सौंपेंगे। साथ ही घटनाक्रम से जुड़ी 27 सितंबर को दोपहर एक बजे तक की सीसीटीवी फूटेज है, उसकी वीडियो फूटेज भी पेन ड्राइव के माध्यम से पुलिस को दी जाएगी।
सरकार ने कराई निष्पक्ष जांच
पुलकेश के परिजनों को लेकर बसंतपुर थाने पहुंचे एनएसयूआई के राष्ट्रीय महासचिव व कांग्रेस के युवा नेता निखिल द्विवेदी ने कहा कि पहली बार किसी सरकार ने ऐसे मामले में निष्पक्ष जांच की। निखिल ने कहा कि पहले भी कई निजी व शासकीय हास्पिटल में डॉक्टरों की लापरवाही से मरीजों की मौत का मामला सामने आया, लेकिन कभी निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई नहीं की गई। यह पहला ऐसा मामला है, जिसकी शिकायत के बाद सीएम कार्यालय ने निष्पक्ष जांच कराकर हास्पिटल प्रबंधन व डॉक्टरों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। इससे डॉक्टरों में गंभीरता जरूर जाएगी।
पदमेश साहू, पुलकेश का बड़ा भाई ने कहा
इलाज में लापरवाही कर जिस तरह परिजन व प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की गई है। ऐसे मामले में तो हास्पिटल प्रबंधन व डॉक्टरों पर गैर जमानती धारा के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। ताकि मरीजों के इलाज के दौरान डॉक्टर गंभीर रहे। डॉक्टरों को सजा मिलने के बाद ही हमें न्याय मिलेगा।
नासिर बाठी, थाना प्रभारी बसंतपुर
शुक्ला मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल के प्रबंधन और दो डॉक्टर के खिलाफ एफआइआर किया गया है। परिजनों की शिकायत और जांच रिपोर्ट के आधार पर धारा 420, 304 ए और 34 के तहत मामला पंजीबद्ध हुआ है। मामले को जांच में लिया गया है। हास्पिटल की जांच कर प्रबंधन का बयान भी लेंगे। इसके बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई होगी।
दिल्ली। कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू का पाकिस्तान प्रेम पूरी दुनिया को पता है. वो इस कदर पाकिस्तान जाने को उतावले हैं कि सरकार को तीन तीन बार चिट्ठी लिख चुके हैं.सरकार ने सिद्धू को तीन तीन चिट्ठी लिखने के बाद औऱ पाकिस्तान जाने की उनकी मंशा को देखते हुए आखिरकार सिद्धू को पाकिस्तान जाने की इजाजत दे दी है।
सिद्धू ने तीसरी बार विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखा है.उन्होंने इस पत्र में करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में जाने की इजाजत सरकार से मांगी है. सिद्धू ने कहा है कि उन्हें साफ साफ बताया जाए कि सरकार चाहती क्या है।
वह इस समारोह में भाग लेने के लिए 9 नवंबर को सुबह साढ़े नौ बजे डेरा बाबा नानक की साइड बने कॉरिडोर से पाकिस्तान जाना चाहते हैं, ताकि वह साढ़े 11 बजे शुरू होने वाले उद्घाटन समारोह में पहुंच सकें. आखिरकार सरकार ने सिद्धू की मांग मानते हुए उनको पाकिस्तान जाने की इजाजत दे दी है।
दिल्ली। सरकारी कर्मचारी अपनी आराम तलबी और काम न करने के लिए कुख्यात हैं. अब सरकार इनके काम के घंटे बढ़ाने वाली है. इस बारे में सरकार ने प्लान बना लिया है।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों को अब आठ के बजाय नौ घंटे तक काम करना पड़ेगा. इसके लिए सरकार जल्द ही नियम बदलने जा रही है. केंद्र सरकार ने नए नियम का मसौदा भी तैयार कर लिया है।
इसमें सरकारी कर्मचारियों के काम करने के समय को एक घंटा बढ़ाने की सिफारिश की गई है. फिलहाल सरकारी कर्मचारी दिन में आठ घंटे की कार्यावधि के नियम के तहत 26 दिन काम करते हैं. जिस पर उनका वेतन तय किया जाता है. दिसंबर में नियम को अंतिम रूप दिया जाएगा।
दिल्ली। सेना सबके लिए सम्मान का सबब है. कंपनियां भी सेना के कद को भुनाने में खूब लगी रहती हैं. सेना के सम्मान को भुनाने के मकसद से कंपनियां सेना और सैनिकों को लेकर खूब विज्ञापन बनाती हैं लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.
अक्सर विज्ञापनों में एक्टर सेना की वर्दी पहनकर चीजों का विज्ञापन करते हैं. सेना के जवानों को क्रीम, पाउडर और मसाला तक बेचते हुए दिखाया जाता है लेकिन अब विज्ञापनों में सेना की वर्दी का इस्तेमाल नहीं होगा. अब सेना की इजाजत के बिना विज्ञापनों में सेना की वर्दी का इस्तेमाल नहीं हो सकेगा.
एडवरटाइजमेंट स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया की तरफ से जारी नई गाइडलाइंस के मुताबिक, अब विज्ञापनों में सेना की वर्दी इस्तेमाल करने से पहले सेना की इजाजत लेनी होगी. काउंसिल ने सेना की आपत्ति के बाद ये एडवाएजरी जारी की है.