रायपुर। भिलाईनगर के सुपेला ने छालीवुड अभिनेत्री माया साहू पर हुए हमले को छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री एसोसिएशन ने बड़ी गंभीरता से लिया है और शासन प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की अपनी मांग दोहराई है. घटना के बाद एसोसिएशन के सदस्यों ने कल ही सुपेला थाने में उपस्थित होकर अपनी इरादा जता दी थी तथा छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश अग्रवाल और महासचिव अरुण बंछोर ने एसपी प्रखर पांडे से अलग अलग बात कर अपनी मांगों से उन्हें अवगत करा दिया था. एसोसिएशन की संयुक्त सचिव उपासना वैष्णव और संरक्षक छालीवुड के भीष्म पितामह मोहन सुंदरानी ने दुर्ग जिला चिकित्सालय जाकर माया साहू का हालचाल जाना। माया के स्वास्थ्य में लगातार सुधार है. माया को लगता है कि हमलावर हमारी फिल्म इंडस्ट्री के ही हो सकते हैं। उन्हें मोबाइल पर लगातार धमकियां दी जा रही थीं कि ‘लव दीवाना’ का प्रमोशन नहीं करें। छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश अग्रवाल ने कहा है कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री माया के साथ है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए उचित कदम उठाएगी।वहीं छत्तीसगढ़ी फिल्म के हीरो एवं बिलासपुर के अमित चक्रवर्ती (बहुत जल्द रिलीज़ होने वाली फिल्म “ये वादा हे”) ने भी माया साहू के ऊपर हुए एसिड अटैक की घोर निंदा करते हुए सलंग्न लोगों को पुलिस गिरफ्तार करे।
रायपुर। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ एस भारती दासन ने सखी वन स्टॉप सेंटर बैरन बाजार रायपुर के 200 मीटर की परिधि में भारतीय दंड संहिता की धारा 144 लागू करने का आदेश जारी किया है।
बता दें कि उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ द्वारा रिट पिटिशन नंबर 20 /2019 में आदेशित किया गया है कि अंजली जैन जो कि वर्तमान में सखी वन स्टॉप सेंटर बैरन बाजार रायपुर में है. स्वतंत्र रूप से उसकी इच्छा पर रहने देने के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर से छोड़ने आदेशित किया गया है. सखी वन स्टॉप सेंटर के अधिकारियों द्वारा अंजली जैन को छोड़ने 17 नवंबर की तिथि नियत की गई है.अंजलि जैन की अभिरक्षा को लेकर पूर्व में विवाद होता रहा है तथा कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित हुई है. उसके पिता एवं पति पक्ष में विवाद होने की संभावना है. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की अनुशंसा पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की दृष्टि से 200 मीटर की परिधि में धारा 144 लागू किया गया है।
रायपुर। मोटरयान अधिनियम के विरुद्ध निजी वाहनों में हूटर का उपयोग हो रहा है। राजीव भवन में परिवहन मंत्री अकबर ने मीडिया के सवालों ने ज़रूर उलझा दिया और नाहक ही सफाई भी देनी पड़ रही। अपनी ही पार्टी के छुटभैये नेताओं द्वारा अपने वाहनों में खुलेआम हूटर लगाने से बेचारे परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर फंस गए, समझ नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दें क्योंकि हूटर के दुरुपयोग की बात की जाए, तो राजधानी में ही वार्ड स्तर के नेताओं तक ने अपने निजी वाहनों पर हूटर लगा रखा है। फिलहाल मंत्री ने बीच का रास्ता निकालते हुए सॉलिड जवाब देकर स्वयं को किसी तरह बचा ले गए। मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा है कि “इस पर कार्रवाई के लिए पुलिस विभाग से चर्चा की जाएगी”। राजीव भवन में परिवहन मंत्री अकबर ने मीडिया से चर्चा के दौरान यह बात मानी कि हूटर का दुरुपयोग बढ़ा है। उन्होंने कहा कि हूटर के उपयोग के लिए नियम है। फायर ब्रिगेड के वाहन या एम्बुलेंस में हूट लगाने का नियम है, लेकिन उसके उपयोग को लेकर भी नियम बना हुआ है। जब फायर ब्रिगेड का वाहन आग बुझाने जा रहा हो या एम्बुलेंस में मरीज हो, तभी हूटर बजाया जा सकता है।
इसके अलावा राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति, विधानसभा अध्यक्ष की पायलटिंग में लगे वाहन, कार्यपालिक दंडाधिकारी के वाहन और उनकी अधिकारिता में कानून व्यवस्था बनाने वाले अधिकारियों के वाहनों पर भी हूटर लग सकता है।
सबरीमला मामले को उच्चतम न्यायालय के वृहद पीठ में भेजे जाने के शीर्ष अदालत के फैसले की पृष्ठभूमि में, भगवान अयप्पा मंदिर शनिवार को खुलेगा और केरल सरकार ने कहा है कि जो महिलायें मंदिर में प्रवेश करना चाहती है उन्हें ‘अदालती आदेश’ लेकर आना होगा। शीर्ष अदालत ने इस धार्मिक मामले को बृहद पीठ में भेजने का निर्णय किया था। शीर्ष अदालत ने पहले पिछले साल रजस्वला उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी।
17 नवंबर से शुरू होने वाले दो महीने की लंबी वार्षिक तीर्थयात्रा सत्र के लिए शनिवार को मंदिर खुल रहा है। केरल के देवस्वओम मंत्री के सुरेंद्रन ने शुक्रवार को कहा कि सबरीमला आंदोलन करने का स्थान नहीं है और राज्य की एलडीएफ सरकार उनलोगों का समर्थन नहीं करेगी जिन लोगों ने प्रचार पाने के लिए मंदिर में प्रवेश करने का ऐलान किया है।भगवान अयप्पा मंदिर में प्रवेश करने वाली महिला कार्यकर्ताओं को पुलिस सुरक्षा प्रदान किये जाने संबंधी खबरों को खारिज करते हुए सुरेंद्रन ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले को ले कर ”कुछ भ्रम है और सबरीमला मंदिर जाने की इच्छुक महिलाओं को ‘अदालत का आदेश’ लेकर आना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने गुरूवार को इस मामले पर फैसला देते हुए इसे वृहद पीठ को सौंपने का निर्णय किया है, इसी परिप्रेक्ष्य में संवाददाताओं के पूछे गए सवाल का जवाब सुरेंद्रन दे रहे थे।
मंत्री ने कहा, ”सबरीमला आंदोलन करने वालों के लिए स्थान नहीं है। कुछ लोगों ने संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर मंदिर में प्रवेश करने की घोषणा की है। वे लोग केवल प्रचार के लिए ऐसा कर रहे हैं। सरकार इस तरह की चीजों का समर्थन नही करेगी।” कुछ कार्यकर्ताओं के इस कथन के बारे में पूछे जाने पर कि शीर्ष अदालत ने 28 सितंबर 2018 के फैसले पर रोक नहीं लगायी है, मंत्री ने कहा, ”वे लोग शीर्ष अदालत का रुख कर सकते हैं और वहां से आदेश लेकर आयें और मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं।”उन्होंने कहा, ”आदेश में अब भी कुछ भ्रम है। सरकार कानूनी विशेषज्ञों की राय लेगी।” राज्य माकपा नेतृत्व के करीबी ने प्रेट्र को बताया कि माकपा राज्य सचिवालय की शुक्रवार (15 नवंबर) को यहां बैठक हुई जिसमें अदालत के फैसले पर चर्चा हुई।
उन्होंने बताया कि सचिवालय की आम भावना यह थी कि शीर्ष अदालत अपने फैसले को जबतक अंतिम रूप न हीं दे देती है तबतक महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देने की है। उन्होंने कहा कि जो मंदिर में प्रवेश करना चाहती हैं वह अदालत जायें और अपने पक्ष वहां से फैसला लेकर आयें।कानून मंत्री ए के बाला ने कहा कि सरकार उच्चतम न्यायालय के फैसले में मौजूद ‘भ्रम पर सक्षम कानूनी विशेषज्ञों की राय लेगी। उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन ने शुक्रवार को कहा कि सरकार को सबरीमला मामले में 3:2 के बहुमत से दिये गए फैसले में “असहमति का बेहद महत्वपूर्ण आदेश” पढ़ना चाहिए। न्यायमूर्ति नरिमन ने अपनी और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की ओर से गुरुवार (14 नवंबर) को दिये गए फैसले में असहमति का आदेश लिखा था।न्यायमूर्ति नरिमन ने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ”कृपया अपनी सरकार को सबरीमला मामले में कल सुनाये गये असहमति के फैसले को पढ़ने के लिये कहें, जो बेहद महत्वपूर्ण है…अपने प्राधिकारी और सरकार को इसे पढ़ने के लिये कहिये।
न्यायमूर्ति नरिमन और न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ सबरीमला मामले की सुनवाई करने वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के सदस्य थे ओर उन्होंने सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने संबंधी सितंबर, 2018 के शीर्ष अदालत के फैसले पर पुनर्विचार की याचिकाओं को खारिज करते हुये बृहस्पतिवार को बहुमत के फैसले से असहमति व्यक्त की थी।न्यायमूर्ति नरिमन ने मेहता से यह उस वक्त कहा जब न्यायालय धन शोधन के एक मामले में कर्नाटक के कांग्रेस नेता डी के शिवकुमार को जमानत देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली प्रवर्तन निदेशालय की अपील पर सुनवाई कर रहा था। उच्चतम न्यायालय ने ईडी की अर्जी को खारिज कर दिया।सबरीमला मंदिर में ‘निहत्थी महिलाओं को प्रवेश से रोके जाने को ‘दुखद’ स्थिति करार देते हुए उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार (14 नवंबर) को अपने अल्पमत के फैसले में कहा कि 2018 की व्यवस्था पर अमल को लेकर कोई बातचीत नहीं हो सकती है और कोई भी व्यक्ति अथवा अधिकारी इसकी अवज्ञा नहीं कर सकता है।
इसमें कहा गया कि शीर्ष अदालत के फैसले को लागू करने वाले अधिकारियों को संविधान ने बिना किसी ना नुकुर के व्यवस्था दी है क्योंकि यह कानून के शासन को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। शीर्ष अदालत के सितंबर 2018 के फैसले का कड़ाई से अनुपालन करने का आदेश दिया गया है जिसमें सभी आयु वर्ग की लड़कियों और महिलाओं को केरल के इस मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी।फैसले में कहा गया, “…फैसले का अनुपालन वैकल्पिक मामला नहीं है। अगर ऐसा होता, तो अदालत का प्राधिकार उन लोगों द्वारा वैकल्पिक तौर पर कम किया जा सकता था जो उसके फैसलों के अनुपालन के लिये बाध्य हैं।” फैसले में कहा गया, “आज कोई व्यक्ति या प्राधिकार खुले तौर पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों या आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता, जैसा की संविधान की व्यवस्था है।”हालांकि, प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा के बहुमत के फैसले ने इस मामले को सात न्यायाधीशों की वृहद पीठ को भेजने का निर्णय किया जिसमें सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति से संबंधित शीर्ष अदालत के 2018 के फैसले की पुनर्विचार की मांग की गयी थी। सबरीमला मंदिर 17 नवंबर को खुल रहा है।
चूंकि, बहुमत के फैसले ने समीक्षा याचिका को सात न्यायाधीशों की वृहद पीठ के लिए लंबित रखा है और 28 सितंबर 2018 के फैसले पर रोक नहीं लगायी है इसलिए सभी आयु वर्ग की लड़कियां और महिलायें मंदिर में जाने की पात्र हैं। न्यायमूर्ति नरिमन ने कहा कि दस वर्ष से 50 वर्ष की आयु के बीच की निहत्थी महिलाओं को मंदिर में पूजा करने के उनके मौलिक अधिकार से वंचित रखने की दुखद स्थिति के आलोक में यह संवैधानिक कर्त्तव्य को फिर से रेखांकित कर रहा है। इसमें आगे कहा गया कि जो भी शीर्ष अदालत के निर्णयों का अनुपालन नहीं करता है, ”वह अपने जोखिम पर ऐसा करता है।”
रायपुर। केंद्रीय उपभोक्ता मामले में खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने शनिवार को दिल्ली समेत देशभर में 20 राज्यों से लिए गए पीने के पानी के नमूने की बहुप्रतीक्षित जांच रिपोर्ट जारी कर दी। राम विलास ने कहा कि यह सिर्फ दिल्ली के लिए पूरे देश में सर्वे किया। भारतीय मानक ब्यूरो (बीएसआई) के साथ बैठक बुलाई और सर्वे किया।
उन्होंने कहा कि दो समस्या सबसे बड़ी है एक पीने का पानी और प्रदूषण। हमारा मकसद किसी सरकार को दोष देना है और ना राजनीति करना है। जब तक हमारे पास मंत्रालय है तब तक लोगों को स्वच्छ पानी पीने की व्यवस्था हो जाए। जो भी राज्य सरकार हमसे मदद चाहती है वो हमसे ले सकती है।उन्होंने कहा कि पीने के पानी की जांच तीन चरणों में की जाएगी। पहले चरण में सभी राजधानियों के पानी की जांच की जाएगी। दूसरे चरण में स्मार्ट सिटी के पानी की जांच की जाएगी। तीसरे चरण में सभी जिलों में पीने के पानी की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने कहा था कि हम 2024 तक हर घर में साफ पानी पहुंचाएंगे।
हमारी सरकार इस दिशा में काम कर रही है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि गुणवत्ता रिपोर्ट में बात सामने आई है कि दिल्ली का पानी खराब है। हम किसी सरकार को दोष नहीं दे रहे हैं लेकिन दिल्ली सरकार यह समझे कि हम इस मुद्दे पर राजनीति नहीं कर रहे हैं, बल्कि हमारा मकसद लोगों तक साफ पानी पहुंचाना है।गौरतलब है कि दिल्ली में पिछले महीने पीने के पानी के नमूने बीएसआई की आरंभिक जांच में विफल पाए जाने के बाद पासवान ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 तक देश में हर घर में नल लगाने और स्वच्छ व शुद्ध पानी मुहैया करवाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा, इसी के मद्देजनर देश के सभी राज्यों की राजधानी समेत 100 स्मार्ट सिटी की योजना के अंतर्गत आने वाले शहरों में पीने के पानी की शुद्धता की जांच की जा रही है।
दिल्ली में 11 जगहों से लिए गए पानी के नमूने की जांच बीएसआई के लैब में किए जाने पर आरंभिक जांच में कुछ जगहों का पानी 42 मानकों में से 12, 13 व 14 मानकों पर विफल पाए गए थे। उस समय केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पानी के इन नमूने की अंतिम जांच रिपोर्ट एक महीने के भीतर आएगी।
अंबिकापुर। राज्य सूचना आयोग द्वारा सरगुजा विश्वविद्यालय अंबिकापुर जिला सरगुजा को 2 प्रकरण में 500-500 रुपए का क्षतिपूर्ति देने का आदेश तथा जानकारी देने में जितनी राशि लागत लगी उसकी वसूली जोन तिग्गा एवं शोभना सिंह से करने का आदेश दिया है।
जनसूचना अधिकारी सरगुजा विश्वविद्यालय अंबिकापुर जिला सरगुजा से श्री डी.के.सोनी अधिवक्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा सूचना के अधिकार के तहत जानकारी प्रदान करने का आवेदन दिनांक 24.10.2017 प्रस्तुत कर सरगुजा विश्वविद्यालय के अधीन श्री डी.पी.एस. तिवारी के पदस्थापना के संबंध में जानकारी की मांग किया गया था।
जिसमें समयावधि में वांछित जानकारी प्राप्त न होने पर डी.के. सोनी द्वारा प्रथम अपील दिनाक 29.11.2017 को प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया था जिसमें प्रथम अपीलीय अधिकारी ने कोई आदेश पारित नहीं किया गया जिसके कारण धारा 18 के तहत राज्य सूचना आयोग में शिकायत प्रकरण क्रमांक सी/734/2018 प्रस्तुत किया गया था।
उक्त शिकायत प्रकरण को माननीय राज्य सूचना आयोग ने पंजीबद्ध करते हुए जनसूचना अधिकारी को नोटिस जारी किया गया तथा विधिवत सुनवाई करते हुए दिनांक 27.08.2019 को जनसूचना अधिकारी शोभना सिंह सहायक कुलसचिव को दोषी मानते हुए ₹500 क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया गया ₹10 जो शासन को क्षति हुई उसे शासकीय कोष में संबंधित जनसूचना अधिकारी से वसूली कर जमा करने का आदेश दिया गया था।
इसी प्रकार से राज्य सूचना आयोग के शिकायत प्रकरण क्रमांक 929/2018 में भी दिनांक 29.08.2019 को आदेश पारित करते हुए माननीय राज्य सूचना आयोग ने सरगुजा विश्वविद्यालय के जनसूचना अधिकारी वित्त विभाग जोन तिग्गा को भी जानकारी काफी विलंब से देने के कारण ₹500 की क्षतिपूर्ति धारा 19(8)(ख) के तहत शिकायतकर्ता को देने का आदेश दिया गया इसके अलावा जानकारी देने में जितनी राशि लागत लगी उसकी ₹534 को भी जोन तिग्गा के वेतन से काटकर शासकीय कोष में जमा करने हेतु आदेश दिया गया।
जिस पर दोनों जनसूचना अधिकारी ने माननीय राज्य सूचना आयोग के आदेश का पालन करते हुए 500-500 रुपए शिकायतकर्ता को बैंक ड्राफ्ट एवं बैंकर्स चेक के माध्यम से भुगतान कर अपनी गलती को स्वीकार किया।
मध्यप्रदेश के बैतूल जिले का धनोरा ऐसा गांव है जहां की जनसंख्या वर्ष 1922 में 1700 थी और आज भी इतनी ही है. यहां किसी भी परिवार में दो से ज्यादा बच्चे नहीं हैं. ऐसा यहां बेटा-बेटी में भेदभाव न होने के कारण है.बैतूल का धनोरा गांव इन स्थितियों में दुनिया के लिए परिवार नियोजन के क्षेत्र में ब्रांड एंबेसडर है, क्योंकि यहां जनसंख्या बढ़ नहीं रही है.धनोरा वह गांव है जहां की जनसंख्या पिछले 97 सालों से स्थिर बनी हुई है. यानी इन सालों में गांव की जनसंख्या 1,700 से आगे नहीं बढ़ी. यह कैसे हुआ? इसकी भी एक रोचक कहानी है।
सन् 1922 में यहां कांग्रेस का एक सम्मेलन हुआ था जिसमें शामिल होने कस्तूरबा गांधी आई थीं. उन्होंने ग्रामीणों को खुशहाल जीवन के लिए ‘छोटा परिवार, सुखी परिवार’ का नारा दिया था. कस्तूरबा गांधी की बात को ग्रामीणों ने पत्थर की लकीर माना और फिर गांव में परिवार नियोजन का सिलसिला शुरू हो गया।बुजुर्गो का कहना है कि कस्तूरबा गांधी का संदेश यहां के लोगों के दिल और दिमाग पर ऐसा बैठा कि सन 1922 के बाद गांव में परिवार नियोजन के लिए ग्रामीणों में जबरदस्त जागरूकता आई. लगभग हर परिवार ने एक या दो बच्चों पर परिवार नियोजन करवाया।
जांजगीर-चाम्पा। सालों बाद कांग्रेस का शासन आया तो लोगों ने सोचा कि अब कुछ भ्रष्टाचार कम होगा। भाजपा शासन में हालत यह थी कि सरकारी दफ्तर में कोई भी काम बिना रिश्वत नहीं होता था। अब कांग्रेस शासन में हालत यह है कि रिश्वत तो ली ही जा रही है, लेकिन कोई यदि इसकी शिकायत करता है तो उसे जान से मरवा देने तक की दमकी दी जा रही है। ऐसी ही घटना एक पत्रकार के साथ हुई। आप धमकी का आडियो और रिश्वत का वीडियो सुन और देख सकते हैं।जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह विकासखंड में रहने वाले एक पत्रकार ने थाने में इसकी लिखित शिकायत की है। शिकायतकर्ता पत्रकार आजम खान ने शिकायत मे बताया की वह 15 नवम्बर को दोपहर 12 बजे एसडीएम कार्यालय चांपा गया हुआ था। उसे शिकायत मिली थी कि वहां पदस्थ बाबू चेतेश्वर साहू बिना रिश्वत के कोई काम नहीं करता है और रिश्वत न मिलने के कारण काफी समय से उसके रिश्तेदार और दोस्त का फटाका लाईसेंस नहीं दे रहा है।
आजम पीड़ित बनकर बाबू चेतेश्वर के पास गया और फटाका लाईसेंस का कागज मांगा। चेतेश्वर ने दीवाली का खर्च मांगा तो उसने उसे 500 रुपए बतौर रिश्वत दी। दूसरा लाइसेंस मांगने पर बाबू ने फिर रिश्वत की मांग की। यह सब आजम ने अपने फोन में रिकार्ड कर लिया। इसका वीडियो भी खबर के साथ है। जब बाबू को इसकी जानकारी हुई तो उसने आजम को फोन करके धमकी दी कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उसकी पहुंच काफी ऊपर तक है। आजम ने कहा कि वह खबर प्रकाशित करेगा, बाकी क्या होगा यह शासन प्रशासन तय करेगा। इस पर बाबू ने उसे साफ कहा कि उसे कुछ हुआ तो वह उसे गोली से मरवा देगा। इससे आजम और उसके परिवार वाले काफी डरे हुए हैं। उसने बम्हनीडीह थाने में लिखित शिकायत करके अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है।
वर्जन
एसडीएम चांपा के बाबू चेतेश्वर साहू ने मुझे गोली से उड़वा देने की धमकी दी है। मैं और मेरा परिवार काफी डरे हुए हैं। मैं शासन प्रशासन से मांग करता हूं कि इस मामले की जांच कर ऐसे भ्रष्ट बाबू के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करें, नहीं तो पूरा शासकीय तंत्र भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा। मुझे यदि कुछ हो भी गया तो मुझे लगेगा कि मैं छत्तीसगढ़ की जनता के हक की इस लड़ाई में कुछ तो काम आया।
भिलाई। सोशल मीडिया पर एक अंजान युवक से दोस्ती करने वाली भिलाई के एक महिला न केवल शारीरिक शोषण का शिकार हुई बल्कि लगातार ब्लैकमेल होती रही ! भिलाई भट्टी पुलिस थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा के युवक ने बीएसपी कर्मी की पत्नी का एमएमएस बनाकर वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करता रहा ! उस फेसबुक ब्लैकमेलर दोस्त का नाम मनीष उसरेटे है ! जिसने फेसबुक पर महिला को अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों में फंसाकर महिला का मोबाइल नंबर ले लिया ! फिर इसके बाद वाट्सऐप पर चेटिंग शुरू कर दी ! इसके बाद वह युवक भिलाई भी आया और महिला से शारीरिक संबंध बनाकर धोखे से वीडियो भी बना लिया !आरोपी युवक द्वारा MMS को वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय से महिला को ब्लैकमेल करता था. अब तक आरोपी पेटीएम, नगद व सोने के जेवरात समेत करीब 4.5 लाख रुपये महिला से ऐंठ चुका था. लगातार पैसों की मांग से तंग आकर पीड़ित महिला ने यह बात अपने पति को बताई जिसके बाद इस मामले की शिकायत भिलाई के भट्टी थाने में की गई है ! खबर लिखे जाने तक आरोपी पुलिस के गिरफ्त से बाहर था ! भट्टी थाने के टीआई भूषण एक्का ने बताया कि,’लोकेशन’ ट्रेस की जा रही है, जल्द ही आरोपी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
रायपुर। दिल्ली से सबक लेते हुए छत्तीसगढ़ में दो महीनों तक पटाखे फोड़ने, पराली और लकड़ी जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। पर्यावरण संरक्षण मंडल दिल्ली में वायू प्रदूषण से सबक लेते हुए ये फरमान जारी किया है।न्यू ईयर हो या शादी, या फिर कोई जीत का जश्न पर्यावरण ने सख्त चेतावनी के मुताबिक आप पटाखे नहीं जला पाएंगे। इस पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया गया है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की भी बात कही गई है।
ठंड से बनने वाले प्रदूषण को देखते हुए ये निर्णय लिया गया है। 1 दिसंबर से 31 जनवरी तक ये प्रतिबंध लागू रहेगा। नगरीय निकाय चुनाव जीतने वाले प्रत्याशी भी पटाखे नहीं जला पाएंगे।