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  • इंदौर हाई कोर्ट ने लगाई कमलनाथ सरकार को लताड़, मामला हनी ट्रेप कांड

    इंदौर हाई कोर्ट ने लगाई कमलनाथ सरकार को लताड़, मामला हनी ट्रेप कांड

    भोपाल। मध्यप्रदेश के हनी ट्रेप मामले में दिवाली से पहले फ़िर से उबाल आ गया । मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार द्वारा भोपाल नगर निगम के विभाजन का शगूफा छोड़कर हनी ट्रेप मामले को दबाने का भरसक प्रयास किया । कुछ हद तक सरकार को इसमे कामयाबी भी हासिल हुई । भोपाल के कॉंग्रेस -भाजपा सहित अन्य नेता पिछ्ले कई दिनों से नगर निगम विभाजन के पक्ष -विपक्ष में उलझ गए और समाचार पत्रो से हनी ट्रेप मामला बख़ूबी गायब होगया । परन्तु कल अचानक इन्दौर उच्च न्यायालय खंड पीठ में लंबित मामले ने दुबारा हनी ट्रेप मामले को गरमी दे दी और न्यायालय की कमलनाथ सरकार को लथाड़ ने सबका ध्यान हनी ट्रेप मामले पर केन्द्रित कर दिया । अदालत की दख़ल ने यह साबित कर दिया है कि हनी ट्रेप में शामिल विष कन्याओं के द्वारा डसे गए राजनेता , अफ़सर , नौकरशाह अब बेनक़ाब ज़रूर हो सकेगे ।
    गौरतलब हो कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कल सोमवार को हनीट्रैप मामले में कमलनाथ सरकार को लताड़ लगाई। हाई कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि अब एसआईटी चीफ को उसकी अनुमति के बिना बदला नहीं जा सकता।
    बता दें कि हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की है जिस पर सुनवाई हो रही थी। याचिका में निवेदन किया गया है कि सरकार एसआईटी में परिवर्तन करके मामले की जांच को प्रभावित कर रही है।

    गृह सचिव की रिपोर्ट से नाराज हाईकोर्ट
    हाईकोर्ट ने हनी ट्रैप मामले की जांच कर रही एसआईटी के चीफ को बार-बार बदले जाने पर गृह सचिव से इस बदलाव का कारण जानने के लिए बंद लिफाफे में रिपोर्ट मांगी थी। सोमवार को एसआईटी चीफ राजेंद्र कुमार ने ये रिपोर्ट पेश किया था लेकिन रिपोर्ट में अधूरी जानकारी और संतोषजनक तथ्य नहीं होने की वजह से हाइकोर्ट ने फटकार लगाई।


    एसआईटी को अब हाईकोर्ट का संरक्षण
    हाईकोर्ट ने दिया कि अब उसकी अनुमति के बिना एसआईटी में शामिल किसी भी अधिकारी का तबादला नहीं किया जा सकता, ना ही एसआईटी की जांच से हटाया जा सकता है। इसके अलावा अभी तक हनी ट्रैप मामले में जितने भी इलेक्ट्रॉनिक सबूत जब्त किए गए हैं, उन्हें जांच के लिए हैदराबाद स्थित आईटी लैब में भेजा जाएगा। हाइकोर्ट ने एसआईटी अधिकारियों को 15 दिन में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई दो दिसंबर को होगी।

    हनी ट्रेप मामले की जांच पर हाईकोर्ट की रहेगी नज़र
    समझा जा रहा है कि हाइकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद अब पूरी जांच कोर्ट की निगरानी में की जाएगी। वरिष्ठ वकील मनोहर दलाल के मुताबिक मामले की अगली सुनवाई दो दिसंबर को होनी तय हुई है, एसआईटी को इन्वेस्टिगेशन स्टेटस रिपोर्ट जमा करनी होगी। साथ ही अब एसआईटी में कोई परिवर्तन नहीं किया जाये, एसआईटी में नियुक्त मौजूदा अधिकारियों का हाईकोर्ट की अनुमति के बिना तबादला नहीं किया जा सकेगा।

    इंदौर के वरिष्ठ वकील मनोहर दलाल ने लगाई है जनहित याचिका 
    बता दें कि हनी ट्रैप मामले का खुलासा होने के बाद इसकी जांच के लिए सरकार ने एसआईटी का गठन किया था लेकिन चंद दिनों में ही एसआईटी में कुछ ही दिनों मेें शीर्ष स्तर के अधिकारियों का तबादला हुआ था, इसी पर सीनियर वकील मनोहर दलाल ने हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में जनहित याचिका दाखिल की थी। याचिका में उन्होंने यह अपील की थी कि बार-बार एसआईटी चीफ बदलने से जांच प्रभावित हो सकती है। साथ ही हनी ट्रैप मामले की जांच हाईकोर्ट के देख-रेख में की जाए। इसी पर सुनवाई करते हुए पिछली तारीख पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश करने का आदेश दिया था।

    क्या है हनी ट्रेप मामला
    पिछले दिनों मध्य प्रदेश पुलिस ने पांच लड़कियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने यह दावा किया था कि यह लड़कियां मध्य प्रदेश के नेताओं और नौकरशाहों से अवैध शारीरिक संबंध बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करती हैं। जांच के दौरान यह भी पता चला कि यह लड़कियां नेताओं और नौकरशाहों को हनीट्रैप का शिकार बनाकर सरकारी कामकाज में दखल देती है। इन्होंने कई कंपनियों को टेंडर दिलाए एवं कई संस्थाओं को काम भी दिलाया। अब यह मामला अवैध संबंधों से बढ़कर भ्रष्टाचार का हो गया है। इस मामले की जद में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सहित पूर्व सांसद , कई आईएएस , आईपीएस अफसरों सहित राजनैतिक दलों के बड़े बड़े नेता और अफ़सर आए हैं । जाँच में जिनकी विडिओ व अन्य सामग्रियाँ आई हैँ । इसी मामले में एक लड़की को 15-16वर्ष की आयु में हनी ट्रेप कांड में शामिल किये जाने के भी प्रमाण मिले हैँ । इस विष कन्या गेंग की मुखिया के पूर्ववर्ती सरकार के मंत्री संतरी से घनिष्ठता के भी पुख्ता प्रमाण मिले हैँ । राजनैतिक संरक्षण में हनी ट्रेप गेंग की मुखिया द्वारा किये गए कांड भी उजागर हुऐ हैं । इसी गेंग में शामिल विष कन्या का पति भी अचानक मीडिया के सामने आकर पत्नि को बेगुनाह साबित कर रहा था , जिसकी विडिओ भी धड़ल्ले से चली परन्तु जिस नाटकीय ढंग से वह सामने आया था , उसी नाटकीय ढंग से वह अब गायब है। गायब हुआ या कराया गया यह भी जाँच का विषय है । परन्तु जाँच एजेंसी द्वारा उसकी और से गफ़लत करना भी संदेह को जन्म देता है 

  • डॉक्टर को ब्लैकमेल करने वाली महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, आरोपी महिला की तलाश जारी

    डॉक्टर को ब्लैकमेल करने वाली महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, आरोपी महिला की तलाश जारी

    रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में डेंटिस्ट डॉक्टर को ब्लैकमेल कर 30 लाख रुपए की मांग करने वाली आरोपी महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है. राजेंद्र नगर थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद महिला फरार चल रही है. उसने अपने वकील की माध्यम से न्यायालय में जमानत याचिका लगाई थी. जिस पर आज सुनवाई हुई और एडीजे सुमीत कपूर की कोर्ट अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। डॉक्टर के वकील संजय शर्मा ने न्यायालय के सामने दलील दी कि महिला ने गलत तरीके से डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज कराया था, इसलिए वह डर कर भाग रही है और अपने वकील के माध्यम से जमानत याचिका लगा रही है. वकील ने यह भी दलील रखी की झूठी केस दर्ज कराने पर महिलाओं के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।जानकारी के अनुसार महिला अपने बहन और परिजनों के साथ घर छोड़कर कही भाग गई है. पुलिस उसकी तलाश कर रही है, लेकिन उनका कहीं कोई सुराग नहीं मिल रहा है. हालांकि पुलिस अभी भी महिला की खोजबीन कर रही है। डेंटल डॉक्टर अरविंद जैन पर महिला ने रेप का आरोप लगाया था. मामले की जांच की गई जिसमें आरोप बेबुनियाद पाए गए. उसके बाद महिला के खिलाफ डॉक्टर ने राजेंद्र नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराया था. जिसके बाद से महिला के परिवार समेत घर छोड़कर फरार चल रही है। बता दें कि डॉक्टर अरविंद जैन के क्लीनिक में आरोपी महिला 28 जुलाई 2015 को दात का इलाज कराने आई थी. कई बार क्लिनिक में इलाज हुआ. इस दौरान उन्होंने गलत इलाज करने का आरोप लगाया और पैसे की मांग करने लगी. जब मांग पूरी नहीं की तो झूठे केस में फंसा देते हुए धमकी देकर ब्लैकमेलिंग कर 30 लाख रुपए की मांग की थी. बाद में डॉक्टर के खिलाफ रेप का केस भी दर्ज करा दिया था. जिसके बाद डॉक्टर अरविंद जैन में महिला के खिलाफ 14 अक्टूबर को ब्लैकमेलिंग का केस दर्ज कराया है।
  • आज व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मनाएंगे दीवाली

    आज व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मनाएंगे दीवाली

    दिल्ली भारतीय पर्वों की धूम पूरी दुनिया में है. अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज यानि 24 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में दिवाली का जश्न मनाएंगे.
    भारत में दीवाली मनाए जाने से तीन दिन पहले व्हाइट हाउस में ये आयोजन किया जा रहा है. खास बात ये है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप व्हाइट हाउस में तीसरी बार दीवाली का जश्न मनाने जा रहे हैं.

    व्हाइट हाउस में दीवाली मनाने की शुरुआत पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2009 में की थी. व्हाइट हाउस के अदिकारियों के मुताबिक ट्रंप ‘दीप जलाने की रस्म के साथ बृहस्पतिवार को दीवाली मनाएंगे. इस बीच अमेरिका में दीवाली का जश्न शुरू हो चुका है. टेक्सास के गवर्नर ग्रेग अबोट ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ शनिवार को दिवाली मनाई।

  • 18 करोड़ के घोटाला की जांच करेंगे आइएएस मुकेश बंसल, 34 भ्रष्ट अधिकारी जांच के घेरे में

    18 करोड़ के घोटाला की जांच करेंगे आइएएस मुकेश बंसल, 34 भ्रष्ट अधिकारी जांच के घेरे में

    रायपुर. राज्य शासन ने विशेष सचिव आइएएस मुकेश बंसल को कृषि विभाग के उन 34 भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जांच अधिकारी नियुक्त किया है जिन पर कृषि उपकरण और खाद बीज खरीदी में 18 करोड़ से ज्यादा का भ्रष्टाचार करने तथा सरकार को आर्थिक चूना लगाने का आरोप है. कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में तेजी आई है अन्यथा लगभग डेढ़ साल से आरोपी ना सिर्फ बचे हुए हैं बल्कि कई तो प्रमोशन भी पा गए.

    कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जीव प्रौद्यौगिकी के उप सचिव जेवियर तिग्गा द्वारा विगत 18 अकटूबर को जारी आदेश में कहा गया है कि जांच अधिकारी 30 दिन के अंदर जांच कर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे. आदेश में कहा गया है कि फरवरी 2018 में आयोजित विधानसभा सत्र में उठे एक सवाल में वर्ष 2016—17—18 तक हुई विभागीय खरीदी में भंडार क्रय नियम के उल्लंघन का मामला सामने आया था, जिसके बाद संचालक कृषि ने एक आदेश जारी करते हुए जांच समिति गठित की थी जिसने अपने प्रतिवेदन में 34 अधिकारियों को जांच के धेरे में पाया था जिन्हें अब कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

    प्रकरण की सम्पूर्ण जांच और आरोपियों को सुनवाई का मौका देने मुकेश बंसल को जांच अधिकारी बनाया गया है जो फिलहाल कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जीव प्रौद्यौगिकी के विशेष सचिव हैं. जांच के घेरे में 34 कृषि अधिकारी हैं, इनमें उपसंचालक कृषि से लेकर संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी शामिल हैं. नियुक्त जांच अधिकारी आइएएस मुकेश बंसल ने इस संवाददाता से चर्चा करते हुए कहा कि ‘सारे प्रकरण को समझने में लगा हूं. आरोपी अधिकारियों को शोकॉज नोटिस जारी हुआ है. उनका जवाब मिलने के बाद हम जांच प्रारंभ करेंगे.’

    आज की जनधारा समाचार—पत्र ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था जिसके बाद संयुक्त संचालक विनोद कुमार वर्मा पर गाज गिरी थी और वे निलंबित हो चुके हैं. इसी तरह तत्कालीन संचालक एम एस केरकेटटा को भी नोटिस मिला है. आश्चर्य कि सी वीड घोटाले का जांच प्रतिवेदन फिलहाल नही आया है अन्यथा 60 से ज्यादा अधिकारी जांच के घेरे में होंगे. अगर ये सभी दोषी पाए गए तो पूरा का पूरा कृषि और उद्यानिकी विभाग ही खाली हो जाएगा. ये पूरा मामला भंडार क्रय नियम के उल्लंघन से संबंधित है. लगभग 18 करोड़ के इस घोटाले के तहत कृषि विभाग में कृषि उपकरण और खाद बीज खरीदी हुई थी जिसमें विभागीय अफसरों ने अलग—अलग जिलों में करोड़ों का वारा न्यारा किया था.

    महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि की है. दोहरा आश्चर्य यह कि करोड़ों का भ्रष्टाचार करने वाले अफसरों को सजा देने के बजाय उलटा मलाईदार पदों पर बिठा दिया गया है. आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार 2015—16 में विभाग के अधिकारियों ने भंडार क्रय नियम का उल्लंघन करते हुए 18 करोड़ की खरीदी की. इसके तहत एनएफएसएम, हरित क्रांति एवं आरकेवीवाय योजना में 50 प्रतिशत अनुदान पर सूक्ष्म तत्व—वीडीसाइड—कीटनाशक रसायन खरीदने के लिए फर्जीवाड़ा किया है.

    इस मामले की फाइल नही है : केडीपी राव, कृषि उत्पादन आयुक्त

    IAS के.डी.पी. राव

    कृषि उत्पादन आयुक्त केडीपी राव से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि आरोपी अफसरों को शोकॉज नोटिस दिया जा चुका है. हालांकि एक जांच समिति पहले ही मामले की जांच कर रही है परंतु सरकार संतुष्ट नही थी और विधानसभा में भी सवाल उठे थे इसलिए नए सिरे से जांच के लिए जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है. उल्लेखनीय है कि केडीपी राव आगामी 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं परंतु अभी तक उन्होंने इस मामले की फाइल नही देखी है.
    राव से जब पूछा गया कि विधानसभा में मामला उठे एक साल से ज्यादा हो गया, इसके बावजूद आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी तो उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारी निलंबित हुए हैं. यह पूछने पर कि क्या इसके पहले के जांच अधिकारियों ने ईमानदारी से जांच नही की तो राव ने कहा कि ये आपकी रॉय हो सकती है, मैंने ऐसा कुछ भी नही कहा.

    वैसे राव के इस बयान का मतलब यही निकाला जा सकता है कि इसके पहले तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त रहे, मुख्य सचिव एस.के.कुजूर या आइएएस भीम सिंह के कार्यकाल में इस मामले की जांच तो हुई परंतु वह किसी अंजाम पर नही पहुंच सकी और ना किसी दोषी अफसर को सजा हो सकी. 

  • जिला विपणन अधिकारी का कारनामा, चहेते ठेकेदार को लाभ दिलाने के लिये करोड़ों के टेण्ड़र में कर दिया गोलमाल

    जिला विपणन अधिकारी का कारनामा, चहेते ठेकेदार को लाभ दिलाने के लिये करोड़ों के टेण्ड़र में कर दिया गोलमाल

    खरसिया। धान परिवहन के लिये निकाली गयी निविदा में रायगढ़ ड़ीएमओ के द्वारा भ्र्रष्टाचार किये जाने का मामला प्रकाश में आया है, जिसमें समस्त प्रक्रिया हो जाने के बाद अपने चहेते ठेकेदार को काम न मिलने पर बिना किसी कारण के टेण्ड़र को निरस्त कर दिया गया है। गौरतलब है कि छ.ग. राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित द्वारा वर्श 2019-20 के लिये ई-निविदा के माध्यम से परिवहन कार्य हेतू निविदा आमंत्रित की गयी थी, जिसके लिये ठेकेदारों ने दिनांक 14.10.2019 को आनलाईन विधिवत टेण्ड़र भरा गया, जिसमें टेक्नीकल बीड़ के परीक्षण उपरांत दिनांक 15.10.2019 को निविदा खोली गयी, जिसमें खरसिया के लिये बजरंगलाल अग्रवाल, बरमकेला के लिये बजरंगलाल अग्रवाल, लोहरसिंह के लिये मेसर्स रामचरण अग्रवाल तथा हरदी सारंगढ़ के लिये बजरंगलाल अग्रवाल की दर न्यूनतम होने पर उन्हे कार्यादेश देने की प्रक्रिया पूरी की जानी थी किंतु जिला विपणन अधिकारी के द्वारा नियम कानून को ताक में रखकर उक्त टेण्ड़र को निरस्त कर दिया गया, जबकि रायगढ़ जिले में खरसिया एवं सारंगढ़ का परिवहन दर पूरे प्रदेष में सबसे कम दर है।

    मजे की बात यह है कि टेण्ड़र किस वजह से निरस्त किया गया इसकी सूचना निविदा में एल वन तथा एल टू आने वालों को देना तक जरूरी नही समझा गया, इस प्रकार रायगढ़ ड़ीएमओ के द्वारा प्रदेष में सबसे कम दर होने के बावजूद बिना किसी कारण के टेण्ड़र को निरस्त कर शासन को करोड़ो का चूना लगाने का कार्य किया जा रहा है जिसकी जांच कर ड़ीएमओ पर विभागीय कार्यवाही करने की आवश्यकता है जिससे भविष्य में कोई अधिकारी टेण्ड़र प्रक्रिया में भ्र्रष्टाचार न कर सके। इस संबंध में रायगढ़ के प्रभारी ड़ीएमओ लोकेश देवांगन से चर्चा किये जाने पर उन्होंने बताया कि ठेकेदारों की टेक्नीकल बीड़़ में कागजात पूरे नहीं थे, किन्तु यहां यह प्रश्न उठता है कि जब ठेकेदारों के दस्तावेज पूर्ण नहीं थे तो फिर उनके टेण्ड़र की प्राईस बीड़ क्यों खोली गयी। प्रभारी ड़ीएमओ के द्वारा इस सवाल का गोलमोल जवाब दिया जा रहा है, जबकि निविदा नियमावली में यह स्प्ष्ट उल्लेखित है कि टेक्नीकल बीड़ सही पाये जाने पर ही प्राईस बीड़ खोली जावेगी, जबकि जिला विपणन कार्यालय में टेक्नीकल बीड़ जांच के उपरांत प्राईस बीड़ खोली गयी एवं एल वन, एल टू का निर्धारण कर आनलाईन निविदाकर्ता को सूचना दी गयी, किंतु उसके तत्काल बाद ठेकेदार के दस्तावेज पूरे नही होने की बात कहते हुये उक्त टेण्ड़र को निरस्त कर आनन फानन में नया टेण्ड़र निकाल दिया गया।

    पूरे प्रदेश में डाले गए टेंडरों में सबसे कम दर थी

    सूत्रों के अनुसार जिला विपणन अधिकारी के एक चहेते ठेकेदार को कार्य दिलाने के लिये यह सारा गोलमाल किया गया है, उक्त ठेकेदार की दर अधिक होने की वजह से उसे कार्य दिलाये जाने समस्त नियम कायदों को ताक पर रखकर हेतू पुनः निविदा आमंत्रित कर दी गयी। दिनांक 14.10.2019 को निकाली गयी निविदा दरें पूरे प्रदेष में सबसे कम थी, जिसका लाभ शासन को मिलना था किंतु जिला विपणन अधिकारी की कारगुजारी से अब शासन को करोड़ों की हानि होनी निश्चित है।

    टेंडर समिति ने ओके कर दिया था निविदा

    यहां यह बताना लाजिमी होगा कि शनिवार को जिला स्तरीय कमेटी जिसमें डिप्टी कलेक्टर जिला खाद्य अधिकारी तथा विपणन विभाग के अधिकारी शामिल थे, की उपस्थिति में टेंडर खोला गया तथा L1, L2 का निर्धारण किया गया उसके बाद अचानक आनन-फानन में उठ पटांग तर्क देते हुए पूरी निविदा निरस्त कर दी गई जो अनेक संदेह को जन्म दे रहा है।

    जिला विपणन कार्यालय में लागू नहीं सूचना का अधिकार

    आश्चर्य की बात यह है कि जिला विपणन कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय में सूचना का अधिकार अधिनियम लागू नहीं होने का बोर्ड लगा दिया है जो संदेह को जन्म देता है, उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व सूचना का अधिकार अधिनियम उपरोक्त कार्यालय में लागू था।

    हमारे द्वारा लाखों रूपयों की ड़ीड़ी जमा कर हजारों रूपये का निविदा शुल्क पटाते हुये निविदा भरा गया था, और निविदा की सभी प्रक्रियाओं को पूर्ण भी किया गया था, किंतु सबसे कम दर होने के बाद भी निविदा निरस्त कर दी गयी, और निरस्त किये जाने के संबंध में कोई सूचना तक नही दी गयी, जिससे हम अपने आप को ठगा महसूस कर रहे है।

    रामचरण अग्रवाल ( ठेकेदार )

  • हाथ में डिग्री लिए भटक रहे लोग 8वीं पास विधायक खा रहे छप्पन भोग

    हाथ में डिग्री लिए भटक रहे लोग 8वीं पास विधायक खा रहे छप्पन भोग

    आम नागरिक के मुकाबले हर साल 22 गुना ज्यादा कमाते हैं माननीय

    4086 में से 3145 विधायकों के हलफनामे के आधार पर रिपोर्ट, सबसे कम कमाई वालों राज्यों में छत्तीसगढ़, आठवीं पास नेताओं की औसत सालाना आय 90 लाख रुपए

    एसोसिएशन आॅफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म ने चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक देश में हर विधायक औसतन 24.59 लाख रुपए सालाना कमाता है। रिपोर्ट के मुताबिक विधायकों की सैलरी और अन्य स्रोतों से आई कमाई को जोड़ दें तो यह देश की प्रति व्यक्ति आय से भी करीब 22 गुना बैठता है। यहां बता दें कि यह रिपोर्ट देश के कुल 4086 में से 3145 विधायकों के हलफनामे के आधार पर है। इसमें सबसे दिलचस्प आंकड़ा यह है कि आठवीं पास नेताओं की औसत सालाना आय करीब 90 लाख रुपये है। इसमें एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। वह यह है कि ज्यादा पढ़े-लिखे विधायकों की तुलना में कम पढ़े-लिखे विधायकों की आय ज्यादा है। स्वघोषित शपथपत्र के मुताबिक, 5वीं से 12वीं क्लास तक पढ़े 33 फीसदी विधायकों की औसत सालाना आय 31.03 लाख रुपए है जबकि 63 फीसदी ग्रेजुएट और उससे ऊपर पढ़े विधायकों की आय 20.87 लाख रुपए है। अनपढ़ विधायकों की औसत सालाना आय 9.3 लाख रुपए है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 941 विधायकों ने अपनी आय का खुलासा नहीं किया, इसलिए उनकी आय का विश्लेषण नहीं हो पाया। -शेष पेज 9 पर

    सिर्फ 50 हजार कैश, फिर भी करोड़पति हैं पीएम मोदी
    प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चल-अचल संपत्ति का ब्योरा जारी किया गया है। पीएम नरेंद्र मोदी के पास लगभग 50 हजार रुपए ही कैश में हैं। पिछले साल पीएम मोदी के पास करीब डेढ़ लाख का कैश मौजूद था, जो अब सिर्फ 48 हजार 944 रुपए ही है। हालांकि, अगर कुल चल-अचल संपत्ति की बात करें तो ये लगभग 2.28 करोड़ है। इसमें एक करोड़ 28 लाख रुपए की चल और गांधीनगर में कुछ अचल संपत्ति है। प्रधानमंत्री ने 2002 में एक लाख रुपए की कीमत से 3531.45 स्क्वायर फीट की संपत्ति भी खरीदी थी। अगर प्रधानमंत्री के बैंक बैलेंस की बात करें तो गुजरात के गांधीनगर में स्थित एसबीआई की ब्रांच में उनका खाता है। जिसमें कुल 11, 29, 690 रुपए जमा हैं। साथ ही पीएम ने कुल 1 करोड़ रुपए से अधिक के फिक्स्ड डिपोजिट करवाए हुए हैं।

    शिवराज सिंह चौहान के पास 6.27 करोड़ की संपत्ति

    एडीआर की रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में 31 मुख्यमंत्रियों में से 25 सीएम करोड़पति बन गए हैं। एडीआर की रिपोर्ट में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बारे में बताया गया है कि उनके पास 6.27 करोड़ की संपत्ति है। और वे करोड़पति मुख्यमंत्रियों में 14वें स्थान पर हैं।
    मप्र में 148 एमएलए स्नातक
    मप्र में 2013 में जीते 230 विधायकों में से 67 प्रतिशत यानी 148 स्नातक या इससे ऊपर थे। 2013 में 2496 प्रत्याशियों में से 879 यानी 35 प्रतिशत स्नातक या इससे ऊपर थे।
    मध्यप्रदेश के 75 विधायक लखपति से बने करोड़पति
    अगर मप्र की बात करें तो यहां 2013 में जीते 230 विधायकों में से 70 फीसदी यानी 155 करोड़पति थे। लेकिन अब वे 75 विधायक भी करोड़ पति बन गए जो चुनाव के समय लखपति थे।
    कर्नाटक टॉप पर
    सबसे अमीर विधायकों की लिस्ट में कर्नाटक टॉप पर

    यहां 203 विधायकों की औसत सालाना आय 1 करोड़ 11 लाख रुपए है। क्षेत्रवार देखें तो पूर्वी क्षेत्र के 614 विधायकों की इनकम सबसे कम 8.5 लाख, जबकि दक्षिणी राज्यों के 711 विधायकों की सालाना कमाई 51.99 लाख रुपए है। यह आंकड़ा देश के किसी भी राज्य के विधायकों से अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक सबसे कम कमाई वालों राज्यों में छत्तीसगढ़ है। यहां विधायकों की औसत आय महज 5.4 लाख रुपए सालाना है।

  • अब व्हाट्सएप पर छुट्टी का निवेदन मान्य नहीं,होगी,कार्यवाई,पढिए कलेक्टर ने जारी किए ये आदेश

    अब व्हाट्सएप पर छुट्टी का निवेदन मान्य नहीं,होगी,कार्यवाई,पढिए कलेक्टर ने जारी किए ये आदेश

    जांजगीर-चांपा।कलेक्टर जनक प्रसाद पाठक ने जिला अधिकारियो को मुख्यालय अवकाश के लिए लिखित में आवेदन प्रस्तुत करने का कड़ा निर्देश दिया है। कलेक्टर ने जारी आदेश में कहा है क्रि व्हाट्सअप ग्रुप पर मुख्यालय अवकाश की सूचना मान्य नहीं किया जाएगा। छत्तीसगढ़़ सिविल सेवाएं अवकाश नियम 2010 के अध्याय -2 नियम -6 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से लिखित में आवेदन प्रस्तुत करना होगा। बिना पूर्व सूचना अथवा सहमति प्राप्त किए मुख्यालय में अनुपस्थित पाए जाने पर संबंधित के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

  • हाईकोर्ट ने पंचायत सचिवो के वेतन कटौती को असंवैधानिक करार दिया

    हाईकोर्ट ने पंचायत सचिवो के वेतन कटौती को असंवैधानिक करार दिया

    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत सचिवो के वेतन से की गई कटौती चार माह मे वापस करने शासन को दिया निर्देश…

    अधिवक्ता रोहित शर्मा के माध्यम से पंचायत सचिवो ने की थी याचिका प्रस्तुत ।छतीसगढ हाई कोर्ट ने पंचायत सचिवो की वेतन कटौती को असंवैधानिक करार देते हुए उनसे की गई वसूली को लौटाने एवं बिना सुनवाई का अवसर दिये वतन पुन निर्धारण को असंगत बताते हुए याचिका स्वीकार करते हुए पंचायत सचिवो के पक्ष मे ऐतिहासिक फैसला दिया।

    जिला जांजगीर-चांपा के पामगढ़ जनपद के 50 से अधिक पंचायत सचिवो ने हाई कोर्ट अधिवक्ता रोहित शर्मा के माध्यम से रिट याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पी सैम कोसी की एकल खण्डपीठ ने यचिकाकर्ता के अधिवक्ता द्वारा दिये गए तर्को को विधि संगत मानते हुए निर्णय दिया ।न्यायमूर्ति पी सैम कोसी ने शासन को चार माह मे यचिकाकर्तओ से की गई कटौती वापस करने का निर्णय दिया। साथ ही स्थानीय निधि सम्परिक्षा द्वारा वेतन निर्धारण मे सचिवो को देय बड़े हुए वेतन को वापस कम करने के निर्णय पर यचिका कर्ता को अपना पक्ष रखने हेतु मौका देते हुए, विधि अनुरुप निर्णय लेने हेतु शासन को निर्देशित भी किया है।याचिकाकर्ता रजनी कुमारी जटाशंकर, के के अनंत वा अन्य 50 यचिककर्ता के द्वारा अधिवक्ता रोहित शर्मा, राहुल शर्मा, वतन साहु के माध्यम से यह याचिका प्रस्तुत की थी ।

  • क्यों ना निकाय चुनाव बिना ओबीसी आरक्षण के करवाने के निर्देश दिए जाएं ?-हाईकोर्ट

    क्यों ना निकाय चुनाव बिना ओबीसी आरक्षण के करवाने के निर्देश दिए जाएं ?-हाईकोर्ट

    हाईकोर्ट (Rajasthan Highcourt) : ने केन्द्र और राज्य सरकार को नोटिस (Notice issued) जारी कर पूछा है कि क्यों ना आगामी नगर निगम, नगर पालिका , नगर पंचायत चुनाव (Nagar palika election) बिना ओबीसी आरक्षण (OBC reservation) के करवाने के निर्देश दिए जाएं ? जयपुर। मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और न्यायाधीश मोहम्मद रफीक ने यह अंतरिम आदेश समता आंदोलन समिति व तीन अन्य की जनहित याचिका पर दिए। कोर्ट ने मुख्य सचिव,सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग,स्वायत्त शासन विभाग,चुनाव आयोग और केन्द्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के वकीलों को नोटिस दिलवाकर अगली सुनवाई 7 नवंबर को तय की है।एडवोकेट शोभित तिवाड़ी ने बताया कि 102 वें संविधान संशोधन के जरिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को परिभाषित कर दिया गया है। इस संशोधन के बाद से ओबीसी जाति वही होगी जिसके लिए केन्द्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग सिफारिश करेगा और सरकार व संसद की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति अधिसूचना जारी करेगें। यह संशोधन 14 अगस्त,2018 से देश में लागू हो चुका है लेकिन,केन्द्र सरकार ने अब तक राष्ट्रपति के जरिए ओबीसी जातियों को कोई भी सूची जारी नहीं की है। वर्तमान में देश और राज्य में कोई भी जाति ओबीसी नहीं है और इसलिए ओबीसी सूची के अभाव में निकाय चुनाव में ओबीसी जाति का आरक्षण देना असंवैधानिक है। राज्य सरकार का निकाय चुनाव में ओबीसी जातियों के लिए सीटों का आरक्षण करना गलत है इसलिए इसे रद्द किया जाए और बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव करवाए जाएं।इसके साथ ही याचिका में राजस्थान नगर पालिका अधिनियम-2009 में दी गई ओबीसी जाति की परिभाषा को भी चुनौती दी गई है। इसके अनुसार राज्य सरकार की ओर से अधिसूचित की गई जातियां ही ओबीसी जातियां मानी जाती हैं। 102 वें संवैधानिक संशोधन के बाद ओबीसी की सूची की केवल राष्ट्रपति ही जारी कर सकते हैं। इसलिए इस परिभाषा को संविधान के विपरीत होने के कारण रद्द किया जाए।
  • तुर्की ने अमेरिका के 50 परमाणु हथियारों पर कब्जा किया

    तुर्की ने अमेरिका के 50 परमाणु हथियारों पर कब्जा किया

    उत्तरी सीरिया में कुर्द लड़कों पर हमला करने वाले तुर्की ने अमेरिका के 50 से अधिक परमाणु हथियारों को अपने कब्जे में ले लिया है। एर्दोगन सरकार ने सीरिया में तुर्की की कार्रवाई के बाद अमेरिका की धमकी मद्देनजर यह कदम उठाया है। अमेरिका के 50 से ज्यादा परमाणु हथियार दक्षिणपूर्व तुर्की के इनसिरलिक एयरबेस पर रखे हैं। यह एयरबेस इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट समूह (आईएस) आतंकियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। यहां से ड्रोन और लड़ाकू विमान उड़ान भरते हैं। तुर्की ने पिछले हफ्ते उत्तरी सीरिया में कुर्द लड़ाकों पर हमला कर दिया था, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की पर कई प्रतिबंध लगाते हुए अर्थव्यवस्था तबाह करने की धमकी दी थी। तुर्की ने यह कदम  ट्रंप के प्रतिबंधों पर जवाबी कार्रवाई के तौर पर उठाया है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयब एर्दोगन इन परमाणु हथियारों को लेकर अमेरिका ब्लैकमेल करना चाहते हैं। हथियार वापसी के लिए योजना बना रहा अमेरिका :- द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग और परमाणु शस्त्रागार का प्रबंधन करने वाले अधिकारी इस बात पर विचार कर रहे है कि तुर्की से ये परमाणु हथियार वापस कैसे लिए जाएं। सीरिया से अमेरिकी सैनिकों की वापसी :अमेरिका युद्ध प्रभावित सीरिया में तैनात अपने करीब एक हजार सैनिकों को आगामी कुछ हफ्तों में वापस बुला लेगा। इन सैनिकों की वापसी उत्तरी सीरिया में कुर्द बलों पर तुर्की के सैन्य अभियान के बीच होने जा रही है। ट्रंप ने पिछले हफ्ते सीरिया से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का ऐलान किया था।
    ट्रंप ने तुर्की को पत्र लिखकर चेताया :- राष्ट्रपति ट्रंप ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयब एर्दोगन को इस बार पत्र लिखकर चेतावनी दी है। इस पत्र में ट्रंप ने लिखा कि मूर्ख मत बनो, होश में आ जाओ। तानाशाह की तरह कठोर बनने की कोशिश मत करो, वरना बर्बाद हो जाओगे। ट्रंप ने आगे लिखा कि आप अपने लक्ष्य को मानवीय तरीके से हासिल करो। वरना यह इतिहास आपको शैतान के रूप में याद करेगा। कठोर और जटिल आदमी मत बनो। उन्होंने पत्र में लिखा कि मैं आपसे फोन पर भी बात करूंगा। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है चलो एक अच्छा सौदा करते हैं। जनरल मजलूम आप से वार्ता करने को राजी है, वह रियायतें देने को भी तैयार हैं। दुनिया को निराश न करें। ट्रंप ने एर्दोगन को यह पत्र उस वक्त खत लिखा है, जब रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने फोन करके एर्दोगन को सीरिया संघर्ष सुलझाने की नसीहत दी है। इस बाबत उन्होंने मॉस्को आने का न्योता भी दिया।बता दें कि ट्रंप के सीरिया से सेना वापसी की घोषणा करने के बाद तुर्की ने सीरिया में कुर्दों पर हमला कर दिया। इसके चलते सैकड़ों आम लोगों की मौत हो गई और 1.60 से अधिक लाख लोग पलायन कर गए।