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  • जानिये क्या है डबल मास्किंग? किस तरह करे इसका उपयोग, इन्फेक्शन रोकने में कितना है कारगर…..

    जानिये क्या है डबल मास्किंग? किस तरह करे इसका उपयोग, इन्फेक्शन रोकने में कितना है कारगर…..

    रायपुर। कोरोना से बचाव के लिए मास्क हमेशा से ही कारगर रहा है। सरकारें भी मास्क पहनने को लेकर शुरू से ही सख्ती बरत रही हैं। मास्क के प्रकार और अलग-अलग मास्क के संक्रमण रोकने की क्षमता पर कई रिपोर्ट्स आती रही हैं। इसी बीच अमेरिका के Centers for Disease Control and Prevention (CDC) ने मास्क को लेकर एक नया खुलासा किया है। CDC के विशेषज्ञों का कहना हैं कि एक मास्क की जगह दो मास्क पहनना ज्यादा कारगर है। इसे डबल मास्किंग कहा जाता है। ये शरीर में जाने वाले संक्रमण के ड्रॉपलेट को रोकने में 90 प्रतिशत से भी ज्यादा कारगर है।

  • “हजारों लोगों का रोजगार होगा प्रभावित”, CM भूपेश ने PM मोदी से किया अनुरोध, स्टील उद्योगों में आक्सीजन की आपूर्ति रोकने के फैसले पर हो पुनर्विचार…

    “हजारों लोगों का रोजगार होगा प्रभावित”, CM भूपेश ने PM मोदी से किया अनुरोध, स्टील उद्योगों में आक्सीजन की आपूर्ति रोकने के फैसले पर हो पुनर्विचार…

    रायपुर- ऑक्सीजन के औद्योगिक उपयोग पर लगाई गई पाबंदी के बाद राज्य के स्टील उद्योग संकट में हैं, लिहाजा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया है कि इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए. प्रधानमंत्री के साथ हुई वर्चुअल बैठक में बघेल ने कहा कि स्टील उद्योगों में ऑक्सीजन की आपूर्ति रोकने से हजारों लोगों का रोजगार प्रभावित होगा. प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री के सुझाव पर जल्द निर्णय लिए जाने का आश्वासन दिया है।

    केंद्र सरकार ने राज्यों को भेजे गए गाइडलाइन में यह कहा था कि ऑक्सीजन के औद्योगिक उपयोग पर प्रतिबंध लगाते हुए केवल मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाए. केंद्र की गाइडलाइन के आधार पर राज्य ने आदेश जारी किया था. राज्य के स्टील उद्योगों में ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होने से उत्पादन पर असर पड़ रहा है. स्टील उद्योग बंद होने की कगार पर आ गए हैं. उत्पादन ठप होने से हजारों लोगों का रोजगार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहा है. राज्य सरकार को भी आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी. औद्योगिक संगठनों ने भी सरकार से मांग करते हुए कहा था कि राज्य में सरप्लस ऑक्सीजन है. मेडिकल सप्लाई के लिए इस वक्त राज्य में 140 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है, जबकि उत्पादन 380 मीट्रिक टन से ज्यादा है. राज्य से महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश को दिए जाने के बावजूद राज्य के पास पर्याप्त ऑक्सीजन का उत्पादन है. लिहाजा इसके औद्योगिक उपयोग के लिए लगे प्रतिबंध को हटाया जाए.ऑक्सीजन के औद्योगिक उपयोग पर प्रतिबंध लगने के बाद जिन उद्योगों में ऑक्सीजन का स्टाॅक था, वहां कुछ घंटों तक उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ, लेकिन ऑक्सीजन की कमी आगे के लिए रोड़ा बनकर खड़ी हो गई. जानकार कहते हैं कि उद्योगों का बंद होना सही मायने में बुनियादी विकास को कमजोर करने जैसा है. यह हर किसी को प्रभावित करेगा. जानकारों की दलील है कि छत्तीसगढ़ में उद्योग खासतौर पर स्टील प्लांट राज्य की लाइफ लाइन है. ये प्लांट्स यहां के रिच मिनरल रिसोर्स का उपयोग कर उत्पाद तैयार करते हैं. राज्य की आर्थिक गति को मजबूती देते हैं. अकेले रायपुर के औद्योगिक क्षेत्र उरला और सिलतरा में करीब तीन लाख वर्कर्स को इन प्लांट्स के जरिए रोजगार मिलता है. जाहिर है उत्पादन प्रभावित होने से रोजगार का बड़ा और गहरा संकट खड़ा होगा, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।

    क्या कहा था उद्योगपतियों ने?

    उद्योगपति पंकज सारडा कहते हैं कि मौजूदा हालात देखकर लगता है कि यदि उद्योग प्रभावित होते हैं, तो इससे पैनिक सिचुएशन क्रिएट होगा. काम नहीं होने की स्थिति में वर्कर्स पलायन करेगा. इससे बेरोजगारी बढ़ेगी. राज्य की बिजली कंपनी उद्योगों को 500 से 1000 मेगावाट तक की बिजली देकर बड़ा रेवेन्यू जनरेट करती है. उद्योग उत्पादन बंद करेंगे, तो बिजली की जरूरत नहीं होगी, इससे सरकार को रेवेन्यू की बड़ी क्षति होगी. दूसरी सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि बैंक से कर्ज लेने वाले उद्योगों को रिवाइव कर पाना मुश्किल हो जाएगा. कई उद्योग एनपीए के कगार पर जा पहुंचेंगे. राज्य का जीएसटी लाॅस एक बड़ा फैक्टर होगा. उत्पादन ठप होने से माइनिंग प्रभावित होगी. पंकज सारडा बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर जिलों में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड में जाने वाली राशि कम हो जाएगी, इससे विकास के काम प्रभावित होंगे. उनका कहना है कि एक सेक्टर प्रभावित होगा, तो इससे जुड़े दस और सेक्टर हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे. रियल स्टेट, हाउसिंग, माइनिंग जैसे सेक्टर चरमरा जाएंगे. मेजर चेन इफेक्ट देखने को मिल सकता है. हालांकि पंकज सारडा का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी के मद्देनजर राज्य सरकार ने अभी कई प्लांट्स को ऑक्सीजन बनाने का लाइसेंस दिया है. बीते दो-तीन दिनों में हालात सुधरते दिख रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि राज्य में ऑक्सीजन की क्राइसेस नहीं है, तो सरकार को थोड़ी राहत दी जानी चाहिए, इसे लेकर राज्य सरकार को केंद्र को चिट्ठी लिखने की जरूरत है.स्पंज आयरन एसोसिएशन से जुड़े उद्योगपति मनोज अग्रवाल कहते हैं कि सरकार के अधिकारियों से हमारी बातचीत हुई है. हमें बताया गया है कि राज्य में सरप्लस ऑक्सीजन है. करीब 140 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मेडिकल और 60-70 मीट्रिक टन उद्योगों को जा रहा है. इसके बावजूद राज्य में ऑक्सीजन सरप्लस है, जिसे हम महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश को दे रहे हैं. मनोज अग्रवाल ने कहा कि, हम चाहते हैं कि करीब बीस फीसदी ऑक्सीजन उद्योगों को दिया जाए .यदि ऑक्सीजन नहीं मिलेगा, तो सारे उद्योग बैठ जाएंगे. दो से तीन लाख मजदूरों के सामने पलायन की स्थिति आ जाएगी. सीएसईबी से पांच सौ से सात सौ मेगावाट का लोड विड्रॉ उद्योगों को हो रहा है, यदि यह अचानक से बंद हो गया तो इससे रेवेन्यू में भी प्रभाव पड़ेगा।

  • लॉकडाउन पाँच मई तक बढ़ने के आसार…सरकार ने कलेक्टरों पर छोड़ा फ़ैसला

    लॉकडाउन पाँच मई तक बढ़ने के आसार…सरकार ने कलेक्टरों पर छोड़ा फ़ैसला

    रायपुर। राजधानी समेत सूबे में लॉकडाउन के बावजूद संक्रमण की रफ़्तार कम ना होने और मरीज़ों की संख्या में लगातार वृद्धि ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या लॉकडाउन बढ़ाया जा सकता है ? चिकित्सा विज्ञानी मानते हैं कि न्यूनतम चौदह दिन का लॉकडाउन जरुरी है, और यदि इस बीच संक्रमण की रफ़्तार में कमी ना आए तो उसे और बढ़ाना चाहिए।
    कोरोना के इस स्ट्रेन को लेकर अभी तक जो जानकारी वैज्ञानिक जुटा पाए हैं उनमें यह बेहद अहम है कि यह समुह में फैलते हुए अपने गुणसूत्र बदल रहा है। याने कि यह तब तब और अबूझ पहेली बनेगा जबकि इसे भीड़ वाली या ज़्यादा संख्या का समुह मिलेगा। यह नया स्ट्रेन कैसे थमेगा इसके लिए कोई निश्चित जवाब नहीं है सिवा इसके कि संक्रमण की चेन को ब्रेक किया जाए जो हालिया दौर में लॉकडाउन के अलावा किसी रुप में संभव नहीं है।
    छत्तीसगढ़ में कोरोना की रफ्तार अभी केवल बढ़ते क्रम में है, याने अभी पीक पर आना बचा है और जबकि यह पीक पर आएगा उसके बाद इसके नीचे उतरने का समय आएगा। लगातार खुद को बदलने में सफल हो रहे कोरोना का यही गुण वैज्ञानिकों को बेहतर और रामबाण इलाज खोजने में मुश्किलें खड़ी कर रहा है।
    इन सबकी वजह से कि संक्रमण की रफ़्तार पर ब्रेक नहीं है, या कि कम से कम इतना प्रभावी अंतर नहीं आया है कि संतुष्ट हुआ जा सके, इसलिए यह चर्चाएँ ज़ोरों पर हैं कि राजधानी समेत सूबे में लॉकडाउन में बढ़ोतरी हो सकती है।
    इस मसले पर अब से कुछ देर पहले राज्य सरकार ने कलेक्टरों को अंतिम निर्णय करने का फ़ैसला दे दिया है, याने वे स्वयं समीक्षा करें और यदि उन्हें लगता है कि लॉकडाउन बढ़ाना है तो बढ़ाएँ, कलेक्टर ही दिनों की अवधि भी तय करेंगे, यह भी संभव है कि कड़ाई के साथ छूट दी जाए और लोगों को समुह में मौजुदगी से रोकने की व्यवस्था की जाए।

  • जान जाने पर अपराध माना जाएगा, ऑक्सीजन सप्लाई पर दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला…

    जान जाने पर अपराध माना जाएगा, ऑक्सीजन सप्लाई पर दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला…

     दिल्ली। राजधानी दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी को लेकर मचे हाहाकार के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान कहा कि कोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन हो. साथ ही केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि टैंकरों के लिए अतिरिक्त संरक्षण मुहैया कराई जाए. कोर्ट में सुनवाई के इतर ऑक्सीजन की कमी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुरुवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. उन्होंने बैठक के दौरान कहा कि राज्यों को बिना रुकावट ऑक्सीजन मिलना चाहिए. ऑक्सीजन की आपूर्ति तेज होनी चाहिए. जमाखोरी करने वालों के खिलाफ राज्य एक्शन लें. साथ ही कहा कि ऑक्सीजन सप्लाई के नए तरीके तलाशे जाएं।

    अलग कॉरिडोर तैयार करे केंद्रः HC

    ऑक्सीजन को लेकर हाईकोर्ट ने कहा कि हम सभी अन्य पक्षों को निर्देश देते हैं कि आदेशों का कड़ाई से पालन हो. इस आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लिया जाएगा और इससे बड़ी संख्या में लोगों की मौत की संभावना बनेगी और ऐसा होने गंभीर आपराधिक एक्शन लिया जाएगा. यह अपराध माना जाएगा. हाई कोर्ट ने कहा कि हम सभी अन्य पक्षों को निर्देश देते हैं कि वह अपने आदेशों का पालन करें. साथ ही केंद्र टैंकरों के लिए अतिरिक्त संरक्षण मुहैया कराए. कोर्ट ने केंद्र से कहा कि केंद्र ऑक्सीजन के ट्रांसपोर्ट के लिए एक अलग कॉरिडोर तैयार करे।

    दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार से उन अस्पतालों की लिस्ट मांगी जिसमें ऑक्सीजन की कमी है. केंद्र ने इस दौरान कहा कि लिस्ट अभी देने के बजाय वो कुछ देर बाद भी लिस्ट दे सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार कुछ समय बाद भी रिपोर्ट दाख़िल कर सकती है. साथ ही केंद्र ने दिल्ली सरकार पर मामले को सनसनीखेज बनाने का आरोप लगाया. कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि हमें कल करीब 80-82 मीट्रिक टन ऑक्सीजन प्राप्त हुआ और आज हमें एक मीट्रिक टन भी प्राप्त नहीं हुआ।

    केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दिल्ली सरकार बेवज़ह इस मामले को सनसनीखेज बनाने में लगी है, इस मामले में संवेदनशील होने की जरूरत है,न की ट्वीट करके या सोशल मीडिया पर पैनिक फ़ैलाकर. इस पर दिल्ली सरकार ने कहा कि हरियाणा से न देकर राउलकेला से ऑक्सीजन क्यों दी जा रही है।

    एक और हॉस्पिटल ने खटखटाया हाई कोर्ट का दरवाजा

    दिल्ली में ऑक्सीजन का संकट अभी टला नहीं है. गुरुवार को कुछ अन्य अस्पतालों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, ताकि तुरंत मदद मिल सके. दिल्ली के सरोज सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का कहना है कि उसके अस्पताल में 172 में से 64 मरीजों को ऑक्सीजन की सख्त जरूरत है. बता दें कि बीते दिन ही मैक्स अस्पताल ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

    उधार लीजिए या फिर चोरी करिए, लेकिन ऑक्सीजन लेकर आइए: HC

    इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था, ‘गिड़गिडाइए, उधार लीजिए या फिर चोरी करिए, लेकिन ऑक्सीजन लेकर आइए, हम मरीजों को मरते नहीं देख सकते. बुधवार को दिल्ली के कुछ अस्पतालों में ऑक्सीजन की तत्काल जरूरत के संबंध में सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने ये कड़ी टिप्पणी की थी।

    दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि कोविड-19 के गंभीर रोगियों का इलाज कर रहे दिल्ली के हॉस्पिटल को किसी भी तरीके से ऑक्सीजन मुहैया कराई जाए. हैरानी जताते हुए अदालत ने ये भी कहा कि केंद्र हालात की गंभीरता को क्यों नहीं समझ रहा. अदालत ने नासिक में ऑक्सीजन से हुई मौतों का जिक्र भी किया।

    दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि उद्योग ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए कई दिनों तक इंतजार कर सकते हैं, लेकिन यहां मौजूदा स्थिति बहुत नाजुक और संवेदनशील है. हाईकोर्ट ने कहा कि अगर टाटा कंपनी अपने ऑक्सीजन कोटे को डायवर्ट कर सकती है, तो दूसरे ऐसा क्यों नहीं कर सकते ? क्या इंसानियत की कोई जगह नहीं बची है ? ये हास्यास्पद है।

  • जरा सोचिए क्या आप खुद ही बीमारी के पास जा रहे हैं? कहीं आपकी भी ये बुरी आदत, वायरस को तो नहीं दे रही दावत…

    जरा सोचिए क्या आप खुद ही बीमारी के पास जा रहे हैं? कहीं आपकी भी ये बुरी आदत, वायरस को तो नहीं दे रही दावत…

    हम भारतीयों की कई सारी बुरी आदतें हैं, जो आगे चलकर बीमारियों की वजह बनती हैं। हम ऐसे हैं कि कई बार बीमारी हमारे पास नहीं आती है, बल्कि हम अपनी आदतों की वजह से बीमारियों के पास पहुंच जाते हैं। माना कि हालात खराब हैं, हमारे अपने अस्पतालों में भर्ती हैं।

    डॉक्टर बताते हैं कि सिर्फ 2% लोगों को हॉस्पिटल में रखने, और ऑक्सीजन की जरुरत होती है। वहीं सिर्फ 5% को रेमडेसिविर की जरुरत होती है, लेकिन लक्षण दिखते ही लोग पैनिक हो जाते हैं। कई तो बिना लक्षण वाले भी अस्पताल पहुंच जाते हैं और खुद को भर्ती करने की जिद करने लगते हैं। डॉक्टर का क्या है वो कुछ भी बोले, उनकी सलाह थोड़े ही जरूरी है। क्या पता बाद में बेड मिले ना मिले, ऑक्सीजन मिले ना मिले, अभी से बेड बुक कर लेते हैं। और इनको आसानी से बेड मिल भी जाते हैं, क्योंकि इनके चाचा विधायक जो ठहरे।

    अब देख लीजिए शर्मा जी को ही… ट्रेन पहुंची नहीं कि लंबी लाइन में जाकर खड़े हो गए। पता है कि एक-दूसरे को छूने से बीमार पड़ सकते हैं, लेकिन अगर धक्का-मुक्की नहीं की और कहीं ट्रेन निकल गई, भले ही सामने से उतरने वाले लोग अटके पड़े हैं, लेकिन शर्मा जी जब तक सबको धकेलते हुए अंदर नहीं घुसेंगे तो ट्रेन चलाएगा कौन? अ-हां हो सकता है कि जल्दी से ट्रेन इसलिए पकड़नी है, क्योंकि इन्हें यही लगता है कि सामने से कोई सिमरन आएगी और ये राज बनकर उसका हाथ थाम लेंगे।

    और वो हमारे चंद्राकर भैया, पड़ोस वाले। अरे उनका क्या है सड़क पर थोड़ी भी जगह दिख जाए तो कही भी घुस जायेंगे। गाड़ी थोड़े ना च लाते हैं, सड़क पर हवाई जहाज उड़ाते हैं। पहले खुद टेढ़े-मेढ़े रास्ते लेकर ट्रैफिक जाम करवाएंगे फिर वहां खड़े-खड़े हॉर्न बजाएंगे। सामने वाले को गालियां देने लगेंगे। जल्दी तो इतनी होती है कि जैसे घर पे बम डीफ्यूज करने जाना हो और एक सेकंड की भी देरी हुई तो ब्लास्ट ही हो जाएगा।

    अरे हां भाई, कल तो लॉकडाउन लगने वाला है। आज ही का टाइम है, चलो सारा सामान लेकर आ जाते हैं। हालांकि सरकार ने तो एक हफ्ते पहले से ही अनाउंसमेंट कर दिया था। लेकिन…लेकिन वेकिन क्या आखिरी दिन ही तो सब खरीदते हैं, आज तो शायद सब कुछ सस्ते में मिल जाएगा। लंबी भीड़ दुकानों में, लोग बाजारों में झूमा झपटी कर रहे हैं, लेकिन अपने को क्या है सामान तो आज लेना ही है, कल दुनिया खत्म जो हो जाएगी। मर जाएंगे, मिट जाएंगे, लेकिन राशन और सब्जी तो आज ही लेकर जाएंगे। और क्यों नहीं हम पांडव पुत्र जो हैं, कौरवों की सेना को हराकर देकर रणभूमि भी तो विजय करनी है। फिर भाड़ में जाए मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और ये कोरोना।

    हमारे देश में कुछ अलग सी प्रजाति के भी लोग हैं, जिनको साधारण भाषा में मतलबी कहते हैं। अरिजीत सिंह के गाने का असर इन पर कुछ इस तरह से हुआ होता है कि खुद एक स्वस्थ्य है, लेकिन फिर भी महंगी-महंगी इंजेक्शन खरीद कर रख लेते हैं। हां भई अगर फ्यूचर में बीमार पड़ गए थे, यही रेमडेसिविर इंजेक्शन तो भगवान है, भगवान। जबकि इनको ये भी नहीं पता है कि इस इंजेक्शन का यूज इनको करना चाहिए या नहीं। वर्तमान का क्या है, जो मर रहे हैं इंजेक्शन के आभाव में मरने दो। मेरा क्या लगता है। और अगर लगता भी है तो क्या? रिश्ते तो सब मोह माया हैं।

    और अपनी वाट्सएप यूनिवर्सिटी, उसमें तो आप सब होंगे ना। सारे MBBS वाले तो यहीं पढ़ते हैं। कोरोना से बचने के कैसे-कैसे गजब तरीके ये ढूंढ़कर लाते हैं, जो मेडिकल साइंस में भी मुमकिन नहीं। ऐसे- ऐसे वीडियो शेयर करते हैं, जो लोगों को पैनिक होने पर मजबूर कर दे। लोगों को डराती हुई तस्वीरें भेजते हैं। बाबा से लेकर मुंशी काबा तक का नुस्खा इन ग्रुपों में मिल जाएगा। कोरोना का असर हो ना हो, इनके मैसेज देखकर आदमी का फोन पर ही हाल बेहाल हो जाता है। जबकि सबको पता है कि ये समय डरने, डराने का नहीं, कोरोना से लड़ने का है। तो सकारात्मक मैसेज भेजिए ना, सही खबर दीजिए। लेकिन ये कैसे हो सकता है इन खबरों को कौन लाइक शेयर और सब्सक्राइब करेगा।

    शराब की दुकानें उन्हें भला कैसे भूल सकते हैं, वहां ही तो असली मजमा जमता है सरकार कहती है वहां से बड़ा राजस्व आता है, ठेके खुलते ही सब पहुंच जाते हैं, पारों की याद भुलाने देवदास बनकर… तो कोई मजनू की लैला बनकर. शराब लेने तो ये लोग मास्क लगाकर पहुंचते हैं, लेकिन पीने के बाद तो इन्हें देखकर यही लगता है कि वायरस इन पर नहीं, ये वायरस पर अटैक करने वाले हैं।

    ऐसी कई सारी आदतें हैं। जैसे राशन लेकर आने के बाद हाथ अच्छे से धोना, दूधवाला हो या सब्जी वाला मास्क लेकर सामान लेना और फिर हैंथवॉश करना। भूल जाते हैं ना शायद, क्योंकि ये सब तो घर में ही आ रहा है फिर घर में कैसे खतरा। लेकिन ये लोग से बाहर से आ रहे हैं, ये याद नहीं रहता।

    कचरा वाला, गाड़ीवाला आया कि धुन तो आपको याद हो गई होगी, लेकिन क्या कचरा डालते समय मास्क लगाना याद रहता है? कुछ भी बाहर से खरीदते हैं तो क्या उसे धोकर खाते या बनाते हैं । हमारे दिनचर्या की ऐसी छोटी-छोटी गलतियां ही वायरस को हम तक पहुंचाती हैं। लेकिन हम तो यही सोचकर बैठे हैं, जब किसी को छूएंगे नहीं… हम पॉजिटिव नहीं हो सकते।

    आदत है हमारी दूसरों को सलाह देते हैं, छू देने पर डांटते हैं, फटकारते हैं। लेकिन खुद ही हर दिन छोटी-छोटी गलतियां कर जाते हैं। और ये छोटी से गलती फिर हम पर ही भारी पड़ जाती है। तो भईया कहने का मतलब सिर्फ ये है कि आप अगर समाज का ठेका नहीं ले सकते तो कम से कम अपना ही ले लें। और हां सरकार को भूल ही जाइए, क्योंकि आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरूआत तो इसी समय के लिए ही की गई थी।

    आकड़े बताते हैं कि कोरोना से रोज देश में सिर्फ एक परसेंट लोगों की मौत होती है। इनमें से भी कुछ घबराहट और नकारात्मक रवैए की वजह से जान से हाथ धो बैठते हैं। जबकि 99.4% लोग ठीक हो रहे हैं, उस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। वैक्सीनशन चालू है, जाइए वैक्सीन लगवाइए, लेकिन वहां भी भीड़ मत बढ़ाइए, ये मत भूलिए कि जिस बीमारी से बचने के लिए आप वहां जा रहे हैं, वहीं आपकी गलती भारी पड़ जाए और वायरस आप पर अटैक कर दे। तो बिडू सोच और बिहेवियर पॉजिटिव रखिए, रिपोर्ट खुद ही नेगेटिव आएगी। प्रज्ञा छतीसगढ़ परिवार आपसे यही अपील करता है कि सकारात्मक रहिए, स्वस्थ रहिए, घर पर रहिए और कोरोना गाइडलाइन का पालन कीजिए।

  • पुलिस वाला निकला 2 पेटी फलों का चोर, कैमरे में कैद हुई तस्वीर…

    पुलिस वाला निकला 2 पेटी फलों का चोर, कैमरे में कैद हुई तस्वीर…

    बिजनौर। पुलिस को आम जनता की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाता है. जिससे लोगों की जान-माल की रक्षा कर सके. लेकिन एक पुलिस की नियत खराब हो गई और फल की दुकान में जाकर 2 पेटी फलों को पार कर दिया. चोरी करते हुए पुलिसकर्मी सीसीटीवी में कैद हो गया. एसपी ने मामला को संज्ञान में लेते हुए पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया।

    बिजनौर जनपद के नहटौर में रात्रि गश्त करते समय पुलिसकर्मी ने पीर की चुंगी पर शकील फल वाले के ठेले से 2 पेटी फलों की चोरी कर ली. इसमें चोरी करते पुलिसकर्मी सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया. कैमरे में पुलिसवाला दो पेटी फलों की चोरी करते स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

  • तड़पती माँ ने तोड़ा दम, विधायक और डीन के लिए आरक्षित वेंटिलेटर खाली पड़े रहे, लेकिन कर्मचारी की माँ को नहीं दिया….

    तड़पती माँ ने तोड़ा दम, विधायक और डीन के लिए आरक्षित वेंटिलेटर खाली पड़े रहे, लेकिन कर्मचारी की माँ को नहीं दिया….

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (सिम्स) बिलासपुर के एक कर्मचारी ने स्थानीय विधायक शैलेश पाण्डेय और अपने ही अस्पताल के डीन पर गंभीर आरोप लगाया है। आरोप है कि विधायक और डीन ने अपने लिए आरक्षित वेंटिलेटर खाली पड़ा रहा, लेकिन उसकी माँ को नहीं दिया गया| इसके चलते उसकी माँ की मौत हो गई।

    यह आरोप लगाने वाले जितेन्द्र दुबे बिलासपुर सिम्स में ही हैं| उन्होंने अपनी मृत माँ और तीन खाली बेड की तस्वीर साझा करते हुए फेसबुक में लिखा, ‘माननीय विधायक शैलेष पाण्डेय जी और सिम्स प्रशासन के अधिष्ठाता और अधीक्षक जी के लिए आरक्षित वेंटिलेटर नहीं मिला| वेंटीलेटर के अभाव में आज मेरी माता जी का निधन हो गया, धन्यवाद विधायक जी।

    जितेंद्र की पोस्ट में उनकी मां को अनेक लोगों ने श्रद्धांजलि दी है, जबकि सोनू सिंह होमा नाम के व्यक्ति ने विधायक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की बात लिखी है। इधर इस मामले में विधायक शैलेश पाण्डेय ने तोपचंद से कहा है कि यह आरोप निराधार है। मैं इस संबंध में कुछ नहीं कहूँगा| सिम्स ने भी इस आरोप का खंडन किया है।

    सिम्स द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि जितेंद्र दुबे की माता को डॉक्टर ने वेंटिलेटर की आवश्यकता नहीं बताई थी और न ही विधायक, एमएस और डीन के लिए कोई वेंटिलेटर अरक्षित है। सिम्स ने कहा है कि वेंटिलेटर की किसे जरूरत है और किसे नहीं, ये मरीज के रिश्तेदार या फिर नोडल अधिकारी नहीं डॉक्टर तय करते हैं।

  • तीन लाख श्रमिकों के सामने गहरा सकता है रोजगार का संकट, ऑक्सीजन की किल्लत से वेंटिलेटर पर आए उद्योग, उत्पादन ठप्प होने के हालात….

    तीन लाख श्रमिकों के सामने गहरा सकता है रोजगार का संकट, ऑक्सीजन की किल्लत से वेंटिलेटर पर आए उद्योग, उत्पादन ठप्प होने के हालात….

    रायपुर। राज्य के उद्योगों की ऑक्सीजन लाइन कट गई है. कोरोना संक्रमित मरीजों की तादात और आक्सीजन की बढ़ती जरूरतों के बीच सरकार ने शत-प्रतिशत ऑक्सीजन की मेडिकल सप्लाई किए जाने का आदेश जारी किया है. जाहिर है, मौजूदा वक्त की यह सबसे बड़ी जरूरत है, लेकिन इसकी एक तस्वीर और है, जिस पर चर्चा जरूरी है. ऑक्सीजन की औद्योगिक सप्लाई पर प्रतिबंध लगाने के हालात में संयंत्रों में होने वाले उत्पादन पर बड़ी चोट पड़ने का अंदेशा है. उत्पादन प्रभावित होने से न केवल कई उद्योगों में ताले लटक सकते हैं, बल्कि हजारों की संख्या में लोगों की नौकरी भी जा सकती है. छत्तीसगढ़ में उद्योग आर्थिक मजबूती का बड़ा आधार है, ऐसे में सरकार को इससे मिलने वाली रेवेन्यू में बड़ी गिरावट दर्ज हो सकती है।

    केंद्र की गाइडलाइन के बाद सूबे की भूपेश सरकार ने उद्योगों में सप्लाई होने वाले ऑक्सीजन पर रोक लगाने का फैसला लिया था, जिसके बाद हालात बदलते देरी नहीं हुई, जिन उद्योगों में ऑक्सीजन का स्टाॅक था, वहां कुछ घंटों तक उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ, लेकिन ऑक्सीजन की कमी आगे के लिए रोड़ा बनकर खड़ी हो गई. जानकार कहते हैं कि उद्योगों का बंद होना सही मायने में बुनियादी विकास को कमजोर करने जैसा है. यह हर किसी को प्रभावित करेगा. जानकारों की दलील है कि छत्तीसगढ़ में उद्योग खासतौर पर स्टील प्लांट राज्य की लाइफ लाइन है. ये प्लांट्स यहां के रिच मिनरल रिसोर्स का उपयोग कर उत्पाद तैयार करते हैं. राज्य की आर्थिक गति को मजबूती देते हैं. अकेले रायपुर के औद्योगिक क्षेत्र उरला और सिलतरा में करीब तीन लाख वर्कर्स को इन प्लांट्स के जरिए रोजगार मिलता है. जाहिर है उत्पादन प्रभावित होने से रोजगार का बड़ा और गहरा संकट खड़ा होगा, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा.

    उद्योग एनपीए की कगार पर आ जाएंगे

    उद्योगपति पंकज सारडा कहते हैं कि मौजूदा हालात देखकर लगता है कि यदि उद्योग प्रभावित होते हैं, तो इससे पैनिक सिचुएशन क्रिएट होगा. काम नहीं होने की स्थिति में वर्कर्स पलायन करेगा. इससे बेरोजगारी बढ़ेगी. राज्य की बिजली कंपनी उद्योगों को 500 से 1000 मेगावाट तक की बिजली देकर बड़ा रेवेन्यू जनरेट करती है. उद्योग उत्पादन बंद करेंगे, तो बिजली की जरूरत नहीं होगी, इससे सरकार को रेवेन्यू की बड़ी क्षति होगी. दूसरी सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि बैंक से कर्ज लेने वाले उद्योगों को रिवाइव कर पाना मुश्किल हो जाएगा. कई उद्योग एनपीए के कगार पर जा पहुंचेंगे. राज्य का जीएसटी लाॅस एक बड़ा फैक्टर होगा. उत्पादन ठप होने से माइनिंग प्रभावित होगी.

    रियल स्टेट, हाउसिंग, माइनिंग जैसे कई सेक्टर चरमरा सकते हैं

    पंकज सारडा बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर जिलों में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड में जाने वाली राशि कम हो जाएगी, इससे विकास के काम प्रभावित होंगे. उनका कहना है कि एक सेक्टर प्रभावित होगा, तो इससे जुड़े दस और सेक्टर हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे. रियल स्टेट, हाउसिंग, माइनिंग जैसे सेक्टर चरमरा जाएंगे. मेजर चेन इफेक्ट देखने को मिल सकता है. हालांकि पंकज सारडा का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी के मद्देनजर राज्य सरकार ने अभी कई प्लांट्स को ऑक्सीजन बनाने का लाइसेंस दिया है. बीते दो-तीन दिनों में हालात सुधरते दिख रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि राज्य में ऑक्सीजन की क्राइसेस नहीं है, तो सरकार को थोड़ी राहत दी जानी चाहिए, इसे लेकर राज्य सरकार को केंद्र को चिट्ठी लिखने की जरूरत है।

    राज्य में है सरप्लस आक्सीजन

    स्पंज आयरन एसोसिएशन से जुड़े उद्योगपति मनोज अग्रवाल कहते हैं कि सरकार के अधिकारियों से हमारी बातचीत हुई है. हमें बताया गया है कि राज्य में सरप्लस ऑक्सीजन है. करीब 140 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मेडिकल और 60-70 मीट्रिक टन उद्योगों को जा रहा है. इसके बावजूद राज्य में ऑक्सीजन सरप्लस है, जिसे हम महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश को दे रहे हैं. मनोज अग्रवाल ने कहा कि, हम चाहते हैं कि करीब बीस फीसदी ऑक्सीजन उद्योगों को दिया जाए .यदि ऑक्सीजन नहीं मिलेगा, तो सारे उद्योग बैठ जाएंगे. दो से तीन लाख मजदूरों के सामने पलायन की स्थिति आ जाएगी. सीएसईबी से पांच सौ से सात सौ मेगावाट का लोड विड्रॉ उद्योगों को हो रहा है, यदि यह अचानक से बंद हो गया तो इससे रेवेन्यू में भी प्रभाव पड़ेगा।

  • कोरोना वारियर्स के लिए साईं बाबा आई हॉस्पिटल में निःशुल्क ओपीडी सुविधा…

    कोरोना वारियर्स के लिए साईं बाबा आई हॉस्पिटल में निःशुल्क ओपीडी सुविधा…

    रायपुर-दुर्ग-भिलाई। कोरोना महामारी की विकट परिस्थिति के दौरान जहाँ सभी ओर लोगों के बीच डर तथा निराशा का माहौल है वहीँ साईं बाबा आई हॉस्पिटल ने सकारात्मक पहल करते हुए कोरोना वारियर्स को प्रोत्साहित करने तथा उनके सम्मान के लिए सभी कोरोना वारियर्स के लिए ओपीडी सुविधा लॉक डाउन समय अवधि के दौरान पूर्णतः निःशुल्क कर दी है। यह निःशुल्क सुविधा साईं बाबा आई अस्पताल के रायपुर तथा भिलाई दोनों अस्पतालों में सुबह 11 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक प्रदान की जा रही है।

    इस सुविधा के अंतर्गत कोरोना वारियर्स जैसे की सभी सफाई कर्मी, पुलिस कर्मी, ट्रैफिक पुलिस, डॉक्टर तथा नर्सिंग स्टाफ , निगम अधिकारी तथा एम्बुलेंस चालक अपना विभागीय पहचान पत्र दिखा कर इस निःशुल्क ओ पी डी सुविधा का लाभ ले सकते हैं | साईं बाबा अस्पताल के प्रमुख श्री आशीष महोबिया ने बताया की कोरोना की जंग में कोरोना वारियर्स ने अब तक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और उनके सहयोग के लिए हमारी इस पहल के द्वारा हम उन्हें धन्यवाद कहना चाहते हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में कोरोना वारियर्स के लिए की जाने वाली यह अपने आप में पहली पहल है।

    आज के कठिन और निराशा के दौर में कोरोना वारियर्स की हिम्मत बढ़ाना बहुत ही आवश्यक है क्यूंकि जिस साहस और मनोबल से उन्होंने अब तक यह लड़ाई लड़ी है वह अत्यधिक सराहनीय तथा काबिले तारीफ है। साईं बाबा आई अस्पताल जो की आँखों के इलाज के लिए राज्य में प्रतिष्ठित नाम है उनकी इस विशिष्ठ पहल के लिए आम लोगों ने काफी सराहना की है।

  • संभव हो तो हवाई मार्ग से पहुंचाएं ऑक्सीजन सिलेंडर, उद्योगों की सप्लाई करे बंद…

    संभव हो तो हवाई मार्ग से पहुंचाएं ऑक्सीजन सिलेंडर, उद्योगों की सप्लाई करे बंद…

     दिल्ली। दिल्ली के कई अस्पतालों में ऑक्सीजन कमी की भयावह तस्वीर सामने आई है. मैक्स अस्पताल ने अपने कोटे का आक्सीजन एम्स को देने का आरोप लगाया है. अस्पताल ने ऑक्सीजन की कमी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है. मामले पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि सरकार जरूरत के हिसाब से सभी उद्योगों को ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर देनी चाहिए. यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा हो।

    हाई कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि सरकार स्थिति की गंभीरता को क्यों नहीं समझ पायी? हम चकित हैं कि अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं है लेकिन इस्पात संयंत्र चल रहे हैं. औद्यौगिक घरानों को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर टाटा समूह अपने इस्पात संयंत्रों के लिए उत्पादित ऑक्सीजन चिकित्सीय उपयोग के लिए मुहैया करा सकता है तो अन्य लोग क्यों नहीं ऐसा कर सकते? यह लालच की पराकाष्ठा है.

    हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि आपको डिमांड और सप्लाई का कोई अंदाजा क्यों नहीं है? केंद्र ऑक्सीजन जल्द से जल्द अस्पतालों में भेजने के लिए रोड पर डेडिकेटेड कॉरिडोर बनाए और अगर संभव हो तो ऑक्सीजन को एयरलिफ्ट कराया जाए. हाईकोर्ट ने कहा कि इससे ज्यादा हम क्या आदेश करें।

    सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि ऑक्सीजन की आपूर्ति रास्ते में है और जल्द ही अस्पताल पहुंच जाएगी. उन्होंने बताया कि एक मैक्स अस्पताल में ऑक्सीजन पहुंचाई जा चुकी है. इस पर अदालत ने कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि आप (केंद्र) ऑक्सीजन पहुंचाएंगे. पटपड़गंज अस्पताल को दो घंटे में ऑक्सीजन की आपूर्ति मिल जाएगी. लेकिन कई अन्य अस्पताल भी कमी का सामना कर रहे हैं. आप इसे लेकर एक आदेश जारी कर सकते हैं क्योंकि यह  राष्ट्रीय आपातकाल है, कोई उद्योग इससे इनकार नहीं करेगा।

    मैक्स अस्पताल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने अदालत को बताया कि वैशाली और गुरुग्राम के मैक्स अस्पताल में आठ घंटे की ऑक्सीजन बची है, जो ज्यादा से ज्यादा गुरुवार की सुबह तक चल सकती है।

    भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव और ऑक्सीजन आपूर्ति के इनचार्ज सुमिता दावरा ने अदालत को बताया कि इस समय ऑक्सीजन का उत्पादन आठ हजार मीट्रिक टन है. अदालत ने कहा कि मामले में तथ्य यह है कि ऑक्सीजन की कमी है और हमें इसे पूरा करना है. अदालत ने कहा कि हम ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी की वजह से लोगों को मरते हुए नहीं देख सकते. दिल्ली हाईकोर्ट ने दर्ज किया कि केंद्र ने आश्वासन दिया है कि वह दिल्ली को 480 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।