Category: स्वास्थ्य

  • रिपोर्ट में देरी होने पर भी लक्षण नजर आने पर मरीजों को दी जाएंगी ये दवाएं, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की नई गाइडलाइन…

    रिपोर्ट में देरी होने पर भी लक्षण नजर आने पर मरीजों को दी जाएंगी ये दवाएं, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की नई गाइडलाइन…

    रायपुर। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना के बढ़ते कहर को देखते हुए एक नई गाइडलाइन जारी की है। अगर किसी व्यक्ति की कोविड रिपोर्ट आने में देरी हो रही है और उनके लक्षण बढ़ते जा रहे हैं तो ऐसे लोग इन दवाईयों को ले सकते हैं।

    दवाइयों की एक लिस्ट तैयार की गई है। जिसके अनुसार राज्य स्तरीय ट्रीटमेंट समिति को इन दवाइयों को तुरंत ही मरीजों को उपलब्ध कराने को कहा गया है।

  • जानिये क्या है डबल मास्किंग? किस तरह करे इसका उपयोग, इन्फेक्शन रोकने में कितना है कारगर…..

    जानिये क्या है डबल मास्किंग? किस तरह करे इसका उपयोग, इन्फेक्शन रोकने में कितना है कारगर…..

    रायपुर। कोरोना से बचाव के लिए मास्क हमेशा से ही कारगर रहा है। सरकारें भी मास्क पहनने को लेकर शुरू से ही सख्ती बरत रही हैं। मास्क के प्रकार और अलग-अलग मास्क के संक्रमण रोकने की क्षमता पर कई रिपोर्ट्स आती रही हैं। इसी बीच अमेरिका के Centers for Disease Control and Prevention (CDC) ने मास्क को लेकर एक नया खुलासा किया है। CDC के विशेषज्ञों का कहना हैं कि एक मास्क की जगह दो मास्क पहनना ज्यादा कारगर है। इसे डबल मास्किंग कहा जाता है। ये शरीर में जाने वाले संक्रमण के ड्रॉपलेट को रोकने में 90 प्रतिशत से भी ज्यादा कारगर है।

  • जरा सोचिए क्या आप खुद ही बीमारी के पास जा रहे हैं? कहीं आपकी भी ये बुरी आदत, वायरस को तो नहीं दे रही दावत…

    जरा सोचिए क्या आप खुद ही बीमारी के पास जा रहे हैं? कहीं आपकी भी ये बुरी आदत, वायरस को तो नहीं दे रही दावत…

    हम भारतीयों की कई सारी बुरी आदतें हैं, जो आगे चलकर बीमारियों की वजह बनती हैं। हम ऐसे हैं कि कई बार बीमारी हमारे पास नहीं आती है, बल्कि हम अपनी आदतों की वजह से बीमारियों के पास पहुंच जाते हैं। माना कि हालात खराब हैं, हमारे अपने अस्पतालों में भर्ती हैं।

    डॉक्टर बताते हैं कि सिर्फ 2% लोगों को हॉस्पिटल में रखने, और ऑक्सीजन की जरुरत होती है। वहीं सिर्फ 5% को रेमडेसिविर की जरुरत होती है, लेकिन लक्षण दिखते ही लोग पैनिक हो जाते हैं। कई तो बिना लक्षण वाले भी अस्पताल पहुंच जाते हैं और खुद को भर्ती करने की जिद करने लगते हैं। डॉक्टर का क्या है वो कुछ भी बोले, उनकी सलाह थोड़े ही जरूरी है। क्या पता बाद में बेड मिले ना मिले, ऑक्सीजन मिले ना मिले, अभी से बेड बुक कर लेते हैं। और इनको आसानी से बेड मिल भी जाते हैं, क्योंकि इनके चाचा विधायक जो ठहरे।

    अब देख लीजिए शर्मा जी को ही… ट्रेन पहुंची नहीं कि लंबी लाइन में जाकर खड़े हो गए। पता है कि एक-दूसरे को छूने से बीमार पड़ सकते हैं, लेकिन अगर धक्का-मुक्की नहीं की और कहीं ट्रेन निकल गई, भले ही सामने से उतरने वाले लोग अटके पड़े हैं, लेकिन शर्मा जी जब तक सबको धकेलते हुए अंदर नहीं घुसेंगे तो ट्रेन चलाएगा कौन? अ-हां हो सकता है कि जल्दी से ट्रेन इसलिए पकड़नी है, क्योंकि इन्हें यही लगता है कि सामने से कोई सिमरन आएगी और ये राज बनकर उसका हाथ थाम लेंगे।

    और वो हमारे चंद्राकर भैया, पड़ोस वाले। अरे उनका क्या है सड़क पर थोड़ी भी जगह दिख जाए तो कही भी घुस जायेंगे। गाड़ी थोड़े ना च लाते हैं, सड़क पर हवाई जहाज उड़ाते हैं। पहले खुद टेढ़े-मेढ़े रास्ते लेकर ट्रैफिक जाम करवाएंगे फिर वहां खड़े-खड़े हॉर्न बजाएंगे। सामने वाले को गालियां देने लगेंगे। जल्दी तो इतनी होती है कि जैसे घर पे बम डीफ्यूज करने जाना हो और एक सेकंड की भी देरी हुई तो ब्लास्ट ही हो जाएगा।

    अरे हां भाई, कल तो लॉकडाउन लगने वाला है। आज ही का टाइम है, चलो सारा सामान लेकर आ जाते हैं। हालांकि सरकार ने तो एक हफ्ते पहले से ही अनाउंसमेंट कर दिया था। लेकिन…लेकिन वेकिन क्या आखिरी दिन ही तो सब खरीदते हैं, आज तो शायद सब कुछ सस्ते में मिल जाएगा। लंबी भीड़ दुकानों में, लोग बाजारों में झूमा झपटी कर रहे हैं, लेकिन अपने को क्या है सामान तो आज लेना ही है, कल दुनिया खत्म जो हो जाएगी। मर जाएंगे, मिट जाएंगे, लेकिन राशन और सब्जी तो आज ही लेकर जाएंगे। और क्यों नहीं हम पांडव पुत्र जो हैं, कौरवों की सेना को हराकर देकर रणभूमि भी तो विजय करनी है। फिर भाड़ में जाए मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और ये कोरोना।

    हमारे देश में कुछ अलग सी प्रजाति के भी लोग हैं, जिनको साधारण भाषा में मतलबी कहते हैं। अरिजीत सिंह के गाने का असर इन पर कुछ इस तरह से हुआ होता है कि खुद एक स्वस्थ्य है, लेकिन फिर भी महंगी-महंगी इंजेक्शन खरीद कर रख लेते हैं। हां भई अगर फ्यूचर में बीमार पड़ गए थे, यही रेमडेसिविर इंजेक्शन तो भगवान है, भगवान। जबकि इनको ये भी नहीं पता है कि इस इंजेक्शन का यूज इनको करना चाहिए या नहीं। वर्तमान का क्या है, जो मर रहे हैं इंजेक्शन के आभाव में मरने दो। मेरा क्या लगता है। और अगर लगता भी है तो क्या? रिश्ते तो सब मोह माया हैं।

    और अपनी वाट्सएप यूनिवर्सिटी, उसमें तो आप सब होंगे ना। सारे MBBS वाले तो यहीं पढ़ते हैं। कोरोना से बचने के कैसे-कैसे गजब तरीके ये ढूंढ़कर लाते हैं, जो मेडिकल साइंस में भी मुमकिन नहीं। ऐसे- ऐसे वीडियो शेयर करते हैं, जो लोगों को पैनिक होने पर मजबूर कर दे। लोगों को डराती हुई तस्वीरें भेजते हैं। बाबा से लेकर मुंशी काबा तक का नुस्खा इन ग्रुपों में मिल जाएगा। कोरोना का असर हो ना हो, इनके मैसेज देखकर आदमी का फोन पर ही हाल बेहाल हो जाता है। जबकि सबको पता है कि ये समय डरने, डराने का नहीं, कोरोना से लड़ने का है। तो सकारात्मक मैसेज भेजिए ना, सही खबर दीजिए। लेकिन ये कैसे हो सकता है इन खबरों को कौन लाइक शेयर और सब्सक्राइब करेगा।

    शराब की दुकानें उन्हें भला कैसे भूल सकते हैं, वहां ही तो असली मजमा जमता है सरकार कहती है वहां से बड़ा राजस्व आता है, ठेके खुलते ही सब पहुंच जाते हैं, पारों की याद भुलाने देवदास बनकर… तो कोई मजनू की लैला बनकर. शराब लेने तो ये लोग मास्क लगाकर पहुंचते हैं, लेकिन पीने के बाद तो इन्हें देखकर यही लगता है कि वायरस इन पर नहीं, ये वायरस पर अटैक करने वाले हैं।

    ऐसी कई सारी आदतें हैं। जैसे राशन लेकर आने के बाद हाथ अच्छे से धोना, दूधवाला हो या सब्जी वाला मास्क लेकर सामान लेना और फिर हैंथवॉश करना। भूल जाते हैं ना शायद, क्योंकि ये सब तो घर में ही आ रहा है फिर घर में कैसे खतरा। लेकिन ये लोग से बाहर से आ रहे हैं, ये याद नहीं रहता।

    कचरा वाला, गाड़ीवाला आया कि धुन तो आपको याद हो गई होगी, लेकिन क्या कचरा डालते समय मास्क लगाना याद रहता है? कुछ भी बाहर से खरीदते हैं तो क्या उसे धोकर खाते या बनाते हैं । हमारे दिनचर्या की ऐसी छोटी-छोटी गलतियां ही वायरस को हम तक पहुंचाती हैं। लेकिन हम तो यही सोचकर बैठे हैं, जब किसी को छूएंगे नहीं… हम पॉजिटिव नहीं हो सकते।

    आदत है हमारी दूसरों को सलाह देते हैं, छू देने पर डांटते हैं, फटकारते हैं। लेकिन खुद ही हर दिन छोटी-छोटी गलतियां कर जाते हैं। और ये छोटी से गलती फिर हम पर ही भारी पड़ जाती है। तो भईया कहने का मतलब सिर्फ ये है कि आप अगर समाज का ठेका नहीं ले सकते तो कम से कम अपना ही ले लें। और हां सरकार को भूल ही जाइए, क्योंकि आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरूआत तो इसी समय के लिए ही की गई थी।

    आकड़े बताते हैं कि कोरोना से रोज देश में सिर्फ एक परसेंट लोगों की मौत होती है। इनमें से भी कुछ घबराहट और नकारात्मक रवैए की वजह से जान से हाथ धो बैठते हैं। जबकि 99.4% लोग ठीक हो रहे हैं, उस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। वैक्सीनशन चालू है, जाइए वैक्सीन लगवाइए, लेकिन वहां भी भीड़ मत बढ़ाइए, ये मत भूलिए कि जिस बीमारी से बचने के लिए आप वहां जा रहे हैं, वहीं आपकी गलती भारी पड़ जाए और वायरस आप पर अटैक कर दे। तो बिडू सोच और बिहेवियर पॉजिटिव रखिए, रिपोर्ट खुद ही नेगेटिव आएगी। प्रज्ञा छतीसगढ़ परिवार आपसे यही अपील करता है कि सकारात्मक रहिए, स्वस्थ रहिए, घर पर रहिए और कोरोना गाइडलाइन का पालन कीजिए।

  • तड़पती माँ ने तोड़ा दम, विधायक और डीन के लिए आरक्षित वेंटिलेटर खाली पड़े रहे, लेकिन कर्मचारी की माँ को नहीं दिया….

    तड़पती माँ ने तोड़ा दम, विधायक और डीन के लिए आरक्षित वेंटिलेटर खाली पड़े रहे, लेकिन कर्मचारी की माँ को नहीं दिया….

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (सिम्स) बिलासपुर के एक कर्मचारी ने स्थानीय विधायक शैलेश पाण्डेय और अपने ही अस्पताल के डीन पर गंभीर आरोप लगाया है। आरोप है कि विधायक और डीन ने अपने लिए आरक्षित वेंटिलेटर खाली पड़ा रहा, लेकिन उसकी माँ को नहीं दिया गया| इसके चलते उसकी माँ की मौत हो गई।

    यह आरोप लगाने वाले जितेन्द्र दुबे बिलासपुर सिम्स में ही हैं| उन्होंने अपनी मृत माँ और तीन खाली बेड की तस्वीर साझा करते हुए फेसबुक में लिखा, ‘माननीय विधायक शैलेष पाण्डेय जी और सिम्स प्रशासन के अधिष्ठाता और अधीक्षक जी के लिए आरक्षित वेंटिलेटर नहीं मिला| वेंटीलेटर के अभाव में आज मेरी माता जी का निधन हो गया, धन्यवाद विधायक जी।

    जितेंद्र की पोस्ट में उनकी मां को अनेक लोगों ने श्रद्धांजलि दी है, जबकि सोनू सिंह होमा नाम के व्यक्ति ने विधायक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की बात लिखी है। इधर इस मामले में विधायक शैलेश पाण्डेय ने तोपचंद से कहा है कि यह आरोप निराधार है। मैं इस संबंध में कुछ नहीं कहूँगा| सिम्स ने भी इस आरोप का खंडन किया है।

    सिम्स द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि जितेंद्र दुबे की माता को डॉक्टर ने वेंटिलेटर की आवश्यकता नहीं बताई थी और न ही विधायक, एमएस और डीन के लिए कोई वेंटिलेटर अरक्षित है। सिम्स ने कहा है कि वेंटिलेटर की किसे जरूरत है और किसे नहीं, ये मरीज के रिश्तेदार या फिर नोडल अधिकारी नहीं डॉक्टर तय करते हैं।

  • एक रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ रेमडेसिविर ही नहीं, 10 रुपए का ये इंजेक्शन भी है कोरोना में कारगर…

    एक रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ रेमडेसिविर ही नहीं, 10 रुपए का ये इंजेक्शन भी है कोरोना में कारगर…

    बढ़ते कोरोना मरीजों और बेड की मारामारी के बीच सुकून की खबर है. कोरोना की दूसरी लहर के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग काफी बढ़ी है. बाजार में इसकी कमी है. संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल इंस्टीटयूट (एसजीपीजीआइ) के डॉक्टरों ने मरीज की जान बचाने के लिए रेमडेसिविर के विकल्प के रूप में ‘डेक्सामेथासोन’ इंजेक्शन के प्रयोग का सुझाव दिया है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक इसका इंजेक्शन 10 रुपए, जबकि गोली महज दो रुपए में उपलब्ध है. डॉक्टरों ने डेक्सामेथासोन को कोरोना मरीजों के उपचार में उपयोगी बताया है.  एसपीजीआई के आइसीयू एक्सपर्ट प्रोफेसर संदीप साहू का कहना है कि रेमडेसिविर को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मान्यता नहीं दी है. डॉक्टर इस इंजेक्शन की सलाह देकर परेशानी नहीं बढ़ाएं. उन्होंने बताया कि न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में हाल ही प्रकाशित शोध में सामने आया है कि डेक्सामेथासोन सांस संबंधी बीमारियों के उपचार में कारगर है।

    रिपोर्ट के मुताबिक दो हजार से अधिक ऐसे कोरोना रोगी, जिनका ऑक्सीजन लेवल 90 से कम था. डेक्सामेथासोन इन्हें दिया गया तो 28 दिन बाद ऐसे लोगों की मृत्यु दर काफी कम थी. इन्हें वेंटिलेटर की जरुरत भी नहीं पड़ी।

  • AIIMS के डायरेक्टर ने गिनाए देश में लगातार बढ़ रहे कोरोना के कारण…. 

    AIIMS के डायरेक्टर ने गिनाए देश में लगातार बढ़ रहे कोरोना के कारण…. 

    देश में कोरोना के मामलों में बेतहाशा वृद्धि देखी जा रही है। महामारी की दूसरी लहर इतनी खतरनाक है कि मरीजों के सेवा में जुटे डॉक्टर और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ भी कोरोना संक्रमति हो रहे हैं। इस बीच दिल्ली स्थित एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि देश में कई कारणों से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन इनमें दो प्रमुख कारक हैं।
    गुलेरिया न कहा, ”जनवरी/फरवरी में जब टीकाकरण शुरू हुआ और मामलों में कमी आई तो लोगों ने COVID के प्रोटोकॉल का पालन करना बंद कर दिया। आज के समय में यह डबल म्यूटेंट वायरस तेजी से फैल गया।” उन्होंने कहा, ”हम हेल्थकेयर सिस्टम पर भी इसका व्यापक असर देख रहे हैं। हमें मामलों की बढ़ती संख्या के लिए अपने अस्पताल के बेड/संसाधनों को बढ़ाना होगा। हमें तत्काल COVID-19 मामलों की संख्या को नीचे लाना होगा।’

    उन्होंने कहा, ”यह एक ऐसा समय है जब हमारे देश में बहुत सारी धार्मिक गतिविधियां होती हैं और चुनाव भी चल रहे हैं। हमें समझना चाहिए कि जीवन भी महत्वपूर्ण है। हम इसे प्रतिबंधित तरीके से कर सकते हैं ताकि धार्मिक भावना आहत न हो और COVID के उचित व्यवहार का पालन किया जा सके।” उन्होंने कहा, ”6-7 महीने पहले की तुलना में अब हमारे पास दिल्ली में एक बड़ा स्पाइक है। स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे और नियंत्रण के संदर्भ में जो व्यवस्था हमले पहले किए, उसे फिर से करने की जरूरत है।”

  • Corona इलाज में कारगर Remdesivir के लिए इस तरह करें अप्लाई…

    Corona इलाज में कारगर Remdesivir के लिए इस तरह करें अप्लाई…

    कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज में रेमडेसिवीर (Remdesivir) दवा और काफी कारगर साबित हो रही है. अगर आप या आपका कोई रिलेटिव कोरोना से संक्रमित हो गया है तो उनका इलाज भी इससे किया जा सकता है. आइए जानते हैं कि इस दवा और प्लाजमा के लिए कैसे ऑर्डर कर सकते हैं।

    भारत में ये 4 कंपनियां बनाती हैं रेमडेसिवीर

    रेमडेसिवीर का पेटेंट अमेरिका की कंपनी गिलिएड साइंसेस के पास है. उसने चार भारतीय कंपनियों से इस दवा को बनाने का एग्रीमेंट किया है. इन चार कंपनियां में सिप्ला, हेटेरो लैब्स, जुबलिएंट लाइफसाइंसेस और मिलान का नाम शामिल है. ये कंपनी बहुत बड़े पैमाने पर रेमडेसिवीर का प्रोडक्शन करती हैं और दुनिया के तकरीबन 126 देशों में इसे एक्सपोर्ट भी करती हैं.

    इन नंबरों पर कॉल कर मंगाएं रेमडेसिवीर

    इन चार कंपनियों ने अपने नंबर जारी किए हैं, जिसपर कॉल कर आप दवा का ऑर्डर दे सकते हैं. आप Cipla को 8657311088 पर कॉल कर सकते हैं. इसके अलावा Hetero को 040-40473535 पर, Jubiliant को 9819857718 पर और Mylan को 7829980066 पर कॉल कर सकते हैं।

    इबोला के दौरान सुर्खियों में आई रेमडेसिवीर

    बताते चलें कि रेमडेसिवीर (Remdesivir) ड्रग्स का इस्तेमाल पहले हेपेटाइटिस सी (Hepatitis C) के इलाज में होता था. ये ड्रग उस वक्त ज्यादा सुर्खियों में आया जब 2014 में इबोला नाम का वायरस अफ्रीकी देशों में महामारी फैल गया. उस वक्त इलाज के लिए रेमडेसिवीर का इस्तेमाल किया गया क्योंकि ये एक सबसे ज्यादा असरदार एंटीवायरल दवा है।

    कई डॉक्टर्स ने बताया कि रेमडेसिवीर का इंजेक्शन कोरोना का सीधा उपचार या लाइफ सेविंग ड्रग नही है। किन मरीजों को यह इंजेक्शन देना है इसका निर्णय डॉक्टर द्वारा मरीज की स्थिति और ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल को देखकर लिया जाता है। यह गंभीर से अति गंभीर मरीजों में संक्रमण को बढऩे से रोकने के लिए दिया जाता है। हल्के या बिना लक्षणों वाले मरीज को इस इंजेक्शन की जरूरत नही होती है। कई शोध में यह बात भी सामने आयी है कि बिना जरूरत वाले मरीजों को इसे लगाने से उनके लिवर में इसका काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।


    अभी यह देखने को मिल रहा है कि ऐसे मरीज जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है लेकिन उन्हें कोई लक्षण नही है या बेहद हल्के लक्षण हैं तथा सांस लेने में भी कोई तकलीफ नही है वे भी इस इंजेक्शन को खरीदने के लिए प्रयासरत हैं। ऐसे में वास्तविक रूप से जिन मरीजों को अभी तत्काल में इसकी जरूरत है उन्हें यह इंजेक्शन नही मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि कोविड वायरस के उपचार के लिये ऑक्सीजन थेरेपी के साथ अभी जो दवाइयां दी जा रही हैं उसमें स्टीरॉयड व एंटीबायोटिक का कॉम्बिनेशन है जो हल्के या बिना लक्षणों वाले मरीजों में वायरस के खिलाफ पर्याप्त एंटीबॉडी बनाने में सक्षम है। इसके साथ ही जिंक और मल्टी विटामिन और विटामिन सी का सप्लीमेंट दिया जाता है, जो इम्युनिटी बूस्टर का काम करती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।


    ऑक्सीजन लेवल है सबसे महत्वपूर्ण
    विशेषज्ञ डॉक्टर का बताना है कि कोविड में सांस से जुड़ी दिक्कतें होती है। ऐसे में मरीज के शरीर में ऑक्सीजन का सेचुरेशन लेवल सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी से मरीज के स्थिति की गंभीरता तय होती है। उन्होंने बताया कि अभी मुख्यत: दो वजहों से मरीजों में कॉम्प्लिकेशन बढ़ रहे हैं। पहला इंफ्लमेशन की वजह से जिससे फेफड़ों में समस्या आ रही है। दूसरा खून के नसों में थक्के जमने की वजह से दिक्कत हो रही है। इस स्थिति में रुटीन दवाइयों के साथ हेपरिन (ब्लड थिनर) दिया जाता है जिससे मरीजों की स्थिति में सुधार आया है। इन दवाओं की अभी पर्याप्त आपूर्ति है। रेमडेसिवीर ऐसे गंभीर मरीज जिनका ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल 90 से नीचे हो उन्हें ही दिया जाता है। वह भी संक्रमित होने के शुरुआती 7 से 9 दिनों में यह लगे तो ही फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि अभी आम धारणा यह बन गयी है कि पॉजिटिव आते ही रेमडेसिवीर लगाने से ही स्थिति में सुधार होगा। जबकि ऐसा नही है। होम आईसोलेट या अस्पताल में भर्ती मरीज जिनका ऑक्सीजन लेवल 94 से ऊपर है उन्हें इस इंजेक्शन की जरूरत नही है। ऐसे में उन्हें इसको लेकर किसी प्रकार का पैनिक नही करना चाहिए। वे नियमित इलाज लेकर बिल्कुल स्वस्थ हो सकते हैं। जैसा कि हमने पहले देखा है हजारों लोग बिना इस इंजेक्शन के बिल्कुल ठीक हुए हैं।

  • होम आईसोलेशन पूर्णता प्रमाण-पत्र जिले की वेबसाईट से कर सकते है डाउनलोड….

    होम आईसोलेशन पूर्णता प्रमाण-पत्र जिले की वेबसाईट से कर सकते है डाउनलोड….

    रायगढ़। कोविड संक्रमित पाये जाने वाले मऐसे मरीज जिनका होम आईसोलेशन में उपचार चल रहा था, वे 17 दिनों के बाद अपना होम आइसोलेशन पूर्णता प्रमाण-पत्र जिला प्रशासन की वेबसाईट से डाउनलोड कर सकते हैं। प्रमाण पत्र डाउनलोड करने के लिए raigarh.gov.in में जाना होगा। जिसके पश्चात ड्रापडाउन मेनू में क्लिक कर ‘नोटिस ‘ ऑप्शन चुनना होगा। जिससे एक और ड्रॉपडाउन मेनू खुलेगा, उसमें से ‘कोरोना संबंधित आदेश ‘ विकल्प पर क्लिक करना होगा। यहां से एक नया पेज खुलेगा जिसमें ‘होम आइसोलेशन पूर्णता प्रमाण पत्र ‘ शीर्षक के अंतर्गत तिथिवार मरीजों के पूर्णता प्रमाण पत्र अपलोड किए गए हैं। अपनी होम आइसोलेशन में जाने से लेकर 17 दिन बाद की पूर्णता तिथि पर क्लिक करने पर वह फाइल डाउनलोड हो जाएगी। जिसमें से संबंधित व्यक्ति अपना प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकेगा। इसके साथ ही

    https://raigarh.gov.in/notice_category/

    कोरोना/ लिंक में जाकर सीधे पूर्णता प्रमाण पत्र डाउनलोड किया जा सकता है।
    24×7 संचालित है होम आईसोलेशन कंट्रोल रूम
    कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग रायगढ़ ने होम आइसोलेटेड कोविड मरीज और उनके परिजनों के उचित देखभाल हेतु आपातकालीन स्वास्थ्य सहायता व परामर्श के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया है। यह कंट्रोल रूम 24×7 संचालित किया जा रहा है। इसमें 03 पालियों में चिकित्सकों की ड्यूटी लगायी गयी है। जिनके नंबर्स स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए हैं। जिस पर होम आईसोलेशन के दौरान सहायता के लिये काल कर संपर्क किया जा सकता है। होम आईसोलेशन सहायता केन्द्र सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक 7647921193, 7647921146, दोपहर 2 बजे से रात्रि 8 बजे तक 7647921172, 7647921147, रात्रि 8 बजे से सुबह 8 बजे तक 7647921175, 7647921184 एवं 24×7 व्हाट्सअप्प पर परामर्श हेतु 7647921154, 7647921157 नंबर है। आपात काल एम्बुलेंस सेवा 108 एवं छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य हेल्प लाईन नंबर 104 है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में लैंडलाइन नंबर 07762-232668, 07762-228000 संचालित है जिसमें संपर्क कर सकते है।

  • लू को लेकर सरकार अलर्ट ! सभी जिले के कलेक्टरों को गाइडलाइन से संबंधित पत्र जारी..

    लू को लेकर सरकार अलर्ट ! सभी जिले के कलेक्टरों को गाइडलाइन से संबंधित पत्र जारी..

    रायपुर। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव एवं राहत आयुक्त सुश्री रीता शांडिल्य ने राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों को पत्र जारी कर इस साल भीषण गर्मी की संभावना को देखते हुए लू से बचाव एवं प्रबंधन करने आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। राहत आयुक्त ने इस संबंध में सभी कलेक्टर्स को अपने-अपने जिले में एक वरिष्ठ अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त करने तथा प्रतिदिन लू से प्रभावितों की जानकारी राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा कलेक्टरों को अपने जिलों में लू से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए सभी आवश्यक कार्यवाही करने के लिए निर्देश दिए गए हैं।


        प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में गर्मी के इस मौसम में तापमान और बढ़ने की संभावना है। गर्मी के मौसम में लोगों को लू से प्रभावित होने की संभावना रहती है। सूर्य की तेज गर्मी के दुष्प्रभाव से शरीर पर के विपरीत प्रभाव पड़ता है। जिसके कारण शरीर का तापमान अनियंत्रित हो जाता हैं। शरीर की जैविक क्रियाओं को प्रभावित करता हैं। इस स्थिति को लू लगना (हीट स्ट्रोक) के नाम से जाना जाता है। जिसके कारण लू लगने की अधिक संभावना होती है।


        लू के विभिन्न लक्षण जैसे – सिर में भारीपन और दर्द का अनुभव होना, तेज बुखार के साथ मुंह का सूखना, चक्कर और उल्टी का आना, कमजोरी के साथ शरीर में दर्द होना। साथ ही शरीर का तापमान अधिक होने पर पसीना आना एवं भूख कम लगना, बेहोश होना।     

    लू लगने का प्रमुख कारण तेज धूप और गर्मी में ज्यादा देर तक रहने के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती हैं। इससे बचाव के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि अधिक पसीना आने की स्थिति में ओ.आर.एस. घोल पीयें, बहुत अनिवार्य न हो तो घर से बाहर ना जावें, धूप में निकलने से पहले सर व कानो को कपड़ें से अच्छे से बांध ले, पानी अधिक मात्रा में पीयें, अधिक समय तक धूप में न रहें, गर्मी के दौरान नरम, मुलायम सूती के कपड़े पहनने चाहिए ताकि हवा और कपडें पसीने को सोखते रहे। चक्कर आने, मितली आने पर छाया दार स्थान पर आराम करें तथा शीतल पेयजल अथवा उपलब्ध हो तो फल का रस, लस्सी, मठा आदि का सेवन करें। उल्टी, सर दर्द, तेज बुखार की दशा में मरीज को निकट के अस्पताल अथवा स्वास्थ्य केन्द्र में तत्काल लेकर जाना चाहिए।

    लू लगने पर किया जाने वाला प्रारंभिक उपचार:- बुखार पीड़ित व्यक्ति के सर पर ठंडे पानी की पट्टी लगावें। अधिक पानी व पेय पदार्थ पिलावें जैसें कच्चे आम का पन्ना, जलजीरा आदि, पीड़ित व्यक्ति को पंखें के नीचे हवा में लेटा देवें, शरीर पर ठंडे पानी का छिड़काव करते रहे, पीड़ित व्यक्ति को शीघ्र ही किसी नजदीकी चिकित्सक, अस्पताल या स्वास्थ्य केन्द्र में मरीज को पहुंचाना चाहिए, प्रारंभिक सलाह के लिए आरोग्य सेवा केन्द्र दूरभाष नंबर 104 पर तत्काल निःशुल्क परामर्श लिया जा सकता है।

     कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए भी सभी को मास्क लगाना जरूरी है तथा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच दो गज की दूरी बनाए रखें। हाथ बार-बार साबुन से धोते रहे या सेनेटाईजर से हाथों की बार-बार सफाई करते रहना चाहिए।

  • छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री बोले- ट्रायल पूरा होने तक नहीं लगना चाहिए भारत बायोटेक का टीका, केंद्र से नहीं लेंगे वैक्सीन

    छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री बोले- ट्रायल पूरा होने तक नहीं लगना चाहिए भारत बायोटेक का टीका, केंद्र से नहीं लेंगे वैक्सीन

    कोरोना का टीकाकरण की तिथियां नजदीक आने के साथ ही वैक्सीन पर विवाद बढ़ता जा रहा है। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा, को-वैक्सीन ने तीसरे चरण का ट्रायल पूरा नहीं किया है। ऐसे में सामान्य जनों को लगाने के लिए भारत बायोटेक की इस वैक्सीन को अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। सिंहदेव ने कहा, अगर केंद्र सरकार इस वैक्सीन को छत्तीसगढ़ भेजेगी तो हम मना कर देंगे।

    टीएस सिंहदेव ने कहा, भारत में दो वैक्सीन को अनुमति मिली है। इसमें एक ऑक्सफोर्ड में विकसित वैक्सीन कोविशील्ड है। जिसका ट्रायल वहीं हुआ है। उसके ट्रायल के सभी आंकड़े मौजूद हैं। यहां सीरम इंस्टीस्च्यूट इसको बना रहा है। दूसरा भारत बायोटेक की देश में ही विकसित को-वैक्सीन है। इसके दो चरण के ट्रायल हुए हैं। आपातकालीन इस्तेमाल मिलने की तारीख तक इसके ट्रायल का तीसरा चरण पूरा नहीं हुआ था।

    टीएस सिंहदेव ने कहा, अभी सामने आया है कि को-वैक्सीन का ट्रायल डोज लेने वाले एक व्यक्ति की मौत हो गई है। इससे वैक्सीन के सुरक्षित होने के दावों पर सवाल उठ रहे हैं। सिंहदेव ने कहा, केंद्र सरकार को इस मामले में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। देश में कम से कम 500से 700 दिन तक वैक्सीनेशन चलना है। ट्रायल के नतीजों के आधार पर फैसला होगा तो लोगों का भरोसा बढ़ेगा।

    ऐसे अनुमति मिली तो दूसरी कंपनियां भी आ जाएंगी

    टीएस सिंहदेव ने कहा, को-वैक्सीन को तीसरे ट्रायल में 28 हजार सैंपल लेने थे, लेकिन 23 हजार सैंपल ही लिए जा सके थे। ऐसे में उसके परिणाम संदिग्ध हैं। अगर बिना ट्रायल और सुरक्षा मापदंडों को पूरा किए वैक्सीन के इस्तेमाल की अनुमति मिल गई तो दूसरी कंपनियां भी अधूरे ट्रायल के साथ अनुमति लेने आ जाएंगी।

    दाे दिन पहले संसदीय सचिव ने उठाए थे सवाल

    दो दिन पहले छत्तीसगढ़ के संसदीय सचिव और विधायक विकास उपाध्याय ने को-वैक्सीन को अनुमति देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। विकास ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने ड्रग रेग्युलेटर पर दबाव डालकर इस वैक्सीन को अनुमति दिलवाई है। ऐसा इसलिए ताकि खुद को दूसरे देशों की प्रतिस्पर्धा में दिखाया जा सके।