Author: Sunil Agrawal

  • पत्नी की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद पूर्व IAS ओपी चौधरी भी कोरोना पॉज़िटिव,ट्वीट कर दी जानकारी…

    पत्नी की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद पूर्व IAS ओपी चौधरी भी कोरोना पॉज़िटिव,ट्वीट कर दी जानकारी…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है।इसी बीच बड़ी खबर आ रही है कि पूर्व आईएएस ओपी चौधरी को भी कोरोना हो गया है। इससे पहले रविवार को उनकी पत्नी डॉ अदिति की रिपोर्ट पॉजेटिव आयी थी।
    IRS अधिकारी डॉ अदिति के पॉजेटिव की खबर शेयर करते हुए खुद रविवार को ओपी चौधरी ने कहा था कि उनमें भी कोरोना के लक्षण है और वो बुखार और बॉडी पेन महसूस कर रहे हैं। जल्द ही उन्होंने अपना कोरोना टेस्ट कराने की भी बात कही थी।

    आज उन्होंने अपना कोरोना टेस्ट कराया था, जिसमें उनकी रिपोर्ट पॉजेटिव आयी है। उन्होंने ट्वीट कर खुद के पॉजेटिव आने की जानकारी साझा की है।

    ट्वीट कर कहा कि मेरा भी कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है।मैं हॉस्पिटल में रहकर अपना पूरा ध्यान रख रहा हुँ।मेरे संपर्क में आये सभी लोग अपना पूरा ध्यान रखें…

    कल शाम ही उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि ,
    मेरी वाइफ डॉ० अदिति का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है।आज मुझे भी फीवर और बॉडी पेन हो रहा है।मैं भी जल्द टेस्ट करवाऊंगा ।इन परिस्थितियों में मेरे संपर्क में आये सभी साथियों से अपील है कि वे आवश्यक ऐतिहात बरतें।कृपया सभी अपना ध्यान रखें..


  • डीजीपी अवस्थी ने ली आईजी-एसपी की बैठक…बोले,महिलाओं से संबंधित प्रकरणों में “किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी”….

    डीजीपी अवस्थी ने ली आईजी-एसपी की बैठक…बोले,महिलाओं से संबंधित प्रकरणों में “किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी”….

    रायपुर। पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी ने आज पुलिस मुख्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्य के सभी पुलिस महानिरीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों की बैठक ली। उन्होंने महिलाओं से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा की।
            पुलिस महानिदेशक श्री अवस्थी ने सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि महिलाओं से संबंधित अपराधों पर त्वरित कार्रवाई करें, ऐसे प्रकरणों में विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    महिलाओं से संबंधित घटनाओं में विभागीय जांच में उप पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी ही विवेचना करें। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में निरीक्षक, उप निरीक्षक, प्रधान आरक्षक, आरक्षक के भरोसे नहीं रहना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि महिलाओं से संबंधित अपराधों पर नियंत्रण के लिए जिलेवार मेकेनिजम बनाया जाए, ताकि घटनाओं की समीक्षा जल्द हो सके। उन्होंने कहा कि महिलाओं से संबंधित प्रकरणों में कार्रवाई जरूर करें ताकि पुलिस की बेहतर छवि बन सके।

        श्री अवस्थी ने कहा कि राज्य में अवैध शराब, ड्रग्स, सट्टा, हुक्काबार, गांजा से संबंधित अपराधों में कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि डायल 112 और हाईवे पेट्रोलिग के कर्मचारियों की रोटशनवार ड्यूटी लगाई जाए।

    इसके साथ ही ऐसे पुलिस कर्मचारी जिनके विरूद्ध शिकायत मिले, उन्हें तत्काल निलंबित कर उनके विरूद्ध विभागीय जांच कराई जाए।

  • प्रधानमंत्री से कई गुना ज्यादा सेलरी पाते हैं इन राज्यों के मुख्यमंत्री….

    प्रधानमंत्री से कई गुना ज्यादा सेलरी पाते हैं इन राज्यों के मुख्यमंत्री….

    संघीय शासन व्यवस्था में प्रधानमंत्री (Prime Minister) ज्यादा शक्ति संपन्न माना जाता है. वो देश का नेता होता है, वो नेता, जिसकी सरकार देश को चलाती है, नीतियां बनाती है और जरूरत पड़ने पर राज्यों के मामले में सलाह देती है या दखलंदाजी भी कर सकती है. हालांकि अधिकारों के हिसाब से एक मुख्यमंत्री अपने राज्य का सबसे शक्तिसंपन्न नेता होता है, जो राज्य की सरकार का मुखिया होता है. आमतौर पर लोगों का मानना होता है कि देशभर में सबसे ज्यादा सेलरी राष्ट्रपति की होती है. उसके बाद प्रधानमंत्री का नंबर आता है. लेकिन ऐसा नहीं है. कई राज्यों के मुख्यमंत्री की सैलरी पीएम से ज्यादा है. बेशक ये बात हैरान करने वाली हो लेकिन सच है।

    कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री भारत के प्रधानमंत्री से कहीं ज़्यादा वेतन (Salary) पाते हैं, जी हां! ढाई गुने से भी ज़्यादा तक. आइए जानते हैं कि इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों की सेलरी कितनी है और वो कैसे तय होती है. किस वजह से उनका वेतन प्रधानमंत्री से ज्यादा होता है।

    जब देश आजाद हुआ तब प्रधानमंत्री की सेलरी को लेकर तय नहीं था. जब नेहरू देश के प्रधानमंत्री बने तो बड़ा मुद्दा ये था कि उनकी सैलरी क्या होगी. इस बारे में नेहरू ने कभी कोई पहल खुद से नहीं की. हालांकि उनकी कैबिनेट के कई मंत्रियों को लगता था कि जिस तरह ब्रिटेन का प्रधानमंत्री अपने कैबिनेट मंत्रियों की तुलना में दोगुना वेतन और अन्य सुविधाएं पाता है, वैसा ही भारत में भी होना चाहिए।

    नेहरू ने मंत्री के बराबर तनख्वाह ली
    तब देश में कैबिनेट मंत्रियों की सैलरी 3000 रुपए प्रति माह तय की गई. जब नेहरू कैबिनेट के वरिष्ठ सदस्य एन गोपालस्वामी आयंगर ने संसद में पीएम के वेतन को दोगुना करने का सुझाव दिया तो इसका एक ही शख्स ने विरोध किया, वो खुद नेहरू थे, जिन्हें ये कतई मंजूर नहीं था. आखिरकार नेहरू ने सैलरी के रूप में 3000 रुपए लेना स्वीकार किया, जितना वेतन एक कैबिनेट मंत्री का था।

    विज्ञापनहालांकि इसके बाद प्रधानमंत्री की सेलरी को लेकर बार-बार संशोधन होते रहे. ताज़ा आंकड़ों के हिसाब से पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की सैलरी 1 लाख 60 हज़ार रुपये प्रतिमाह है. लेकिन, कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों की सैलरी 4 लाख रुपये तक या उससे भी ज़्यादा है. पहले देश के विभिन्न राज्यों के सीएम की सैलरी जानें और फिर पढ़ें कि ये वेतन कैसे और किन प्रावधानों के तहत तय होता है।

    सबसे ज़्यादा सैलरी इस राज्य के सीएम की
    तेलंगाना राज्य के मुख्यमंत्री की सैलरी 4 लाख 10 हज़ार रुपये प्रतिमाह है. मुख्यमंत्रियों की सैलरी की लिस्ट में ये सबसे बड़ा आंकड़ा है. इसके बाद दिल्ली के सीएम का नंबर है, जिसकी सैलरी 3 लाख 90 हज़ार रुपये है. गुजरात के सीएम का वेतन 3.21 लाख रुपये प्रतिमाह है।

    उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों का वेतन 3 लाख रुपये प्रतिमाह से ज़्यादा है. सीएम की सैलरी के लिहाज़ से इन राज्यों को टॉप 7 कहा जा सकता है।

    इन राज्यों के मुख्यमंत्री भी पाते हैं ज्यादा
    2 लाख रुपये से ज़्यादा और तीन लाख रुपये प्रतिमाह से कम सैलरी पाने वाले मुख्यमंत्रियों की लिस्ट में हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, गोवा, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और कर्नाटक राज्यों के सीएम शामिल हैं।

    सबसे कम सैलरी त्रिपुरा के सीएम को मिलती है, जो एक लाख पांच हज़ार पांच सौ रुपये प्रतिमाह है. सीएम की सैलरी जहां इससे ज़्यादा और दो लाख रुपये से कम है, उनमें ज़्यादातर उत्तर पूर्व के राज्य शामिल हैं. ओडिशा के सीएम का वेतन प्रधानमंत्री के वेतन के बराबर यानी 1.60 लाख रुपये है।

    कैसे तय होती है सीएम की सैलरी
    यह पूरी तरह से राज्य की व्यवस्था और राजस्व की स्थिति से जुड़ा मामला है. देश के संविधान के आर्टिकल 164 में यह विचार है कि मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है. राज्य की विधानसभा के निर्वाचित सदस्य विधायकों और विधायक दल के नेता के वेतन की राशि को लेकर निर्णय ले सकते हैं।

    और क्या कहते हैं वेतन के ये आंकड़े
    अव्वल तो ये कि उत्तर पूर्व के राज्यों की आमदनी या आर्थिक हालात कमज़ोर होने का इशारा मिलता है क्योंकि उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के वेतन की राशि सबसे कम है. दूसरी बात ये कि तेलंगाना, दिल्ली और उत्तर प्रदेश ऐसे राज्य हैं, जहां मुख्यमंत्रियों का वेतन राज्यपालों की तुलना में ज़्यादा है. यह इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि देश के प्रधानमंत्री की तुलना में राष्ट्रपति का वेतन ज़्यादा होता है. वर्तमान में देश के राष्ट्रपति का वेतन 5 लाख प्रतिमाह है और भत्ते अलग हैं।

    प्राइवेट सेक्टर में मिलता है इससे ज्यादा वेतन 
    वैसे देश के प्राइवेट सेक्टर में तमाम पदों पर नियुक्त लोगों की सैलरी इससे कहीं ज्यादा होती है. देश में कई ऐसी कंपनियां हैं, जिनके प्रमुख या चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर को 15 करोड़ से लेकर 165 करोड़ रुपए तक की सेलरी मिलती है. वैसे फिलहाल देश में सबसे ज्यादा सेलरी पाने वालों में सीपी गुरनानी ( CP  Gurnani) का नाम आता है, जो टेक महिंद्रा के सीईओ हैं और उनका सालाना वेतन 165 करोड़ है।

  • अमेरिका में सदियों से एक शहर का नाम है ‘स्वस्तिक’

    अमेरिका में सदियों से एक शहर का नाम है ‘स्वस्तिक’

    अमेरिका में न्यूयॉर्क के एक टाउन का नाम ‘स्वस्तिक’ रखा गया है। हालांकि, यह नाम शहर के संस्थापकों, पुरखों ने संस्कृत शब्द के नाम पर स्वस्तिक रखा था, मगर बाद में इसका विरोध होने लगा। इस नाम को विरोधी खेमे के लोगों ने नाजियों के चिन्ह से जोड़ा। इसके बाद इस शहर के नाम को स्वस्तिक ही रखे जाने को लेकर वोटिंग हुई, जिसमें इस नाम के खिलाफ में एक भी वोट नहीं पड़ा और इस तरह से शहर का नाम फिर स्वस्तिक ही रहा। शहर के लोगों का कहना है कि इसके नाम का नाजी के प्रतीक चिन्ह से कोई लेना देना नहीं है।
    सीएनएन के मुताबिक, शहर के ब्लैक ब्रुक टाउ बोर्ड ने सर्वसम्मति से ‘स्वस्तिक’ नाम नहीं बदलने के लिए वोट दिया। शहर के संचालन का जिम्मा इसी बोर्ड पर है। ब्लैक ब्रुक के पर्यवेक्षक जॉन डगलस ने इस बात की जानकारी दी।

    डगलस के मुताबिक, इस शहर का नाम स्वस्तिक शहर के मूल निवासियों द्वारा 1800 के दशक में रखा गया था और यह संस्कृत के शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ ‘कल्याण’ होता है। उन्होंने कहा कि हमें इस क्षेत्र के बाहर के उन लोगों के पर तरस आता है, जो हमारे समुदाय के इतिहास के बारे में नहीं जानते और यह नाम देखकर ऑफेंड हो जाते हैं और इसका विरोध करते हैं। मगर हमारे समुदाय के सदस्यों के लिए यह वह नाम है जिसे हमारे पूर्वजों ने चुना था।।
    दरअसल, अप्रैल 2019 में डेनवर शहर के बाहर कोलोराडो शहर के लोगों ने इसका नाम स्वस्तिक से ओल्ड चेरी हिल्स में बदलने के लिए मतदान किया था। यह क्षेत्र कभी डेनवर लैंड स्वस्तिक कंपनी का घर था, यह एक कंपनी थी, जिसने नाजियों द्वारा स्वास्तिक चिन्ह को अपनाने से पहले यह नाम चुना था।

    संयुक्त राज्य स्मारक मेमोकॉस्ट संग्रहालय के अनुसार, स्वस्तिक शब्द संस्कृत के शब्द ‘स्वस्तिक’ से लिया गया है, जिसका प्रयोग सौभाग्य या मंगल प्रतीक के संदर्भ में किया जाता है। यह प्रतीक लगभग 7,000 साल पहले दिखाई दिया था और इसे हिंदू, बौद्ध, जैन और अन्य धर्मों में एक पवित्र प्रतीक माना जाता है। यह घरों या मंदिरों की दीवारों को लगा होता है, क्योंकि इसे शुभ माना जाता है।

    यूरोपीय लोगों ने पुरातात्विक खुदाई के काम के माध्यम से प्राचीन सभ्यताओं के बारे में जब सीखना शुरू किया तब 19 वीं शताब्दी के अंत और 20 वीं शताब्दी के प्रारंभ में यूरोप में यह प्रतीक लोकप्रिय हो गया। नाजी पार्टी ने 1920 में इसे अपने प्रतीक के तौर पर अपनाया था। हालांकि, स्वस्तिक के मूल चिन्ह से अलग है।

  • WhatsApp के चैट सिक्योर हैं तो कैसे सामने आ रहे हैं Drugs से जुड़े उनके वॉट्सऐप चैट्स? यहां समझें

    WhatsApp के चैट सिक्योर हैं तो कैसे सामने आ रहे हैं Drugs से जुड़े उनके वॉट्सऐप चैट्स? यहां समझें

    WhatsApp चैट एंड टु एंड एन्क्रिप्टेड होते हैं तो बॉलीवुड स्टार्स के Drugs से जुड़े चैट्स लीक कैसे हो रहे हैं? ये सवाल इन दिनों चर्चा में है. इसी बीच WhatsApp का एक स्टेटमेंट भी आया है।



    WhatsApp ने अपने स्टेटमेंट में कुछ ऐसा नहीं कहा है जो नया हो. पहले भी कंपनी ये बात कहती आई है और ये शायद आप सब को भी पता होगा कि एंड टु एंड एन्क्रिप्टेड है. लेकिन फिर भी आपके लिए ये जानना ज़रूरी है कि डायरेक्ट नहीं, बल्कि इनडायरेक्टली WhatsApp के चैट्स कैसे हासिल किए जा सकते हैं।



    ताज़ा स्टेटमेंट में कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा है, ‘WhatsApp आपके मैसेजों को एंड टु एंड एन्क्रिप्शन से प्रोटेक्ट करता है, ताकि आप और आप जिसे मैसेज सेंड कर रहे हैं वही मैसेज को देखे, इसके अलावा कोई भी मैसेज का ऐक्सेस नहीं कर सकता है, WhatsApp भी नहीं’

    WhatsApp की तरफ़ से ये भी कहा गया है कि ये याद रखना ज़रूरी है कि WhatsApp सिर्फ फ़ोन नंबर से ही साइन अप किया जा सकता है और WhatsApp के पास आपके मैसेज के कॉन्टेंट का ऐक्सेस नहीं होता है।



    WhatsApp चैट तो सिक्योर हैं, लेकिन क्या बैकअप सिक्योर है?
    WhatsApp के मुताबिक़ जो चैट बैकअप क्लाउड स्टोरेज पर बैकअप रखे जाते हैं या सेव किए जाते हैं वो एंड टु एंड एन्क्रिप्टेड नहीं होते हैं. आम तौर पर यूज़र्स अपने WhatsApp चैट का बैकअप गूगल ड्राइव पर रखते है. WhatsApp में चैट के ऑटो बैकअप का भी ऑप्शन है जिसके तहत ख़ुद से ही चैट्स क्लाउड पर स्टोर होते हैं।



    अगर आपका WhatsApp चैट को ऐक्सेस नहीं कर पा रहा है तो अगर वो चाहे तो आपकी जीमेल आईडी के ज़रिए गूगल ड्राइव से आसानी से तामाम पुराने चैट्स निकाल कर पढ़ सकता है. क्योंकि यहां रखा गया WhatsApp चैट का बैकअप एंड टु एंड एन्क्रिप्टेड नहीं होता है।



    सिक्योरिटी या जांच एजेंसी क्लोनिंग करती हैं
    WhatsApp के एन्क्रिप्टेड डेटा को ऐक्सेस करने के लिए सिक्योरिटी और जांच एजंसियां यूज़र्स के फ़ोन को लेकर उसकी क्लोनिंग करती हैं. क्लोनिंग दूसरे डिवाइस पर किया जाता है।

    क्लोनिंग के बाद एजेंसियों को मिरर इमेज के ज़रिए डिलीटेड मैसेज का ऐक्सेस मिलता है. इसके लिए प्रोफेशनल टूल्स यूज किए जाते हैं और ये अलग डिवाइस पर किया जाता है।

    मिरर इमेज

    अब चूँकि फ़ोन की क्लोनिंग कर ली गई तो इससे एजेंसियों को फ़ोन के मैसेज, फ़ोटोज़, कॉल रिकॉर्ड्स और इसके साथ क्लाउड ऐप्स पर रखा डेटा का भी ऐक्सेस मिल जाता है. अब यहां से WhatsApp के चैट्स आसानी से रिकवर किए जा सकेत हैं।

    बैकअप

    कुल मिला कर ये कहा जा सकता है कि WhatsApp पर चैटिंग तो एंड टु एंड एन्क्रिप्टेड है, लेकिन इसका बैकअप सिक्योर नहीं है. अगर बैकअप का ऐक्सेस मिल गया तो फिर चैट रिकवर हो जाएँगे. जांच एजेंसियाँ भी सीधे तौर पर WhatsApp से चैट्स हासिल नहीं कर रही हैं।

  • दीपिका से पूछताछ में हाथ जोड़कर खड़े हो गए NCB के अफसर? जाने क्यों….

    दीपिका से पूछताछ में हाथ जोड़कर खड़े हो गए NCB के अफसर? जाने क्यों….

    शनिवार का दिन बॉलीवुड की तीन अभिनेत्रियों के लिए काफी भारी रहा. एक तरफ एनसीबी ने एक्शन मोड में दीपिका-सारा-श्रद्धा से मैराथन पूछताछ की, वहीं दूसरी तरफ दीपिका-सारा और रकुल के मोबाइल भी जब्त कर लिए गए. इस बीच अब एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. खबरों के मुताबिक पूछताछ के दौरान दीपिका पादुकोण तीन बार रो गई थीं. एक्ट्रेस की आंखों में आंसू आ गए थे।

    जब एनसीबी अफसर ने जोड़े दीपिका के सामने हाथ

    जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक जब एनसीबी दीपिका से सवाल-जवाब कर रही थी, तब दीपिका का तीन बार ब्रेक डाउन हुआ था. वे रोने लगी थीं. अब ये देख एनसीबी अफसरों ने उन्हें इमोशनल कार्ड ना खेलने की नसीहत दी थी. बकायदा हाथ जोड़कर एनसीबी अफसरों ने दीपिका पादुकोण को रोने के बजाय सच बताने के लिए कहा. दीपिका को बताया गया कि अगर वे सबकुछ सच बताएंगी, तो ये उनके लिए बेहतर रहेगा।

    वहीं क्योंकि एनसीबी ने दीपिका पादुकोण का मोबाइल भी जब्त किया है, इसलिए अब एनसीबी की जांच भी उसी दिशा में आगे बढ़ेगी. बताया जा रहा है कि उनके फोन की जांच कर ये समझने की कोशिश होगी कि उनका किसी ड्रग पैडलर संग कोई कनेक्शन था या नहीं. वैसे पूछताछ के दौरान दीपिका ने जरूर ड्रग्स लेने से साफ इनकार कर दिया है. उन्होंने ड्रग सप्लाई वाली बात को भी सिरे से खारिज कर दिया है. ऐसे में अब उनके मोबाइल के जरिए कुछ सुराग निकालने की कवायद होगी. उसी आधार पर ये भी फैसला लिया जाएगा कि दीपिका के खिलाफ क्या कार्रवाई होनी है।

  • मिठाई की दुकानों के लिए सरकार ने जारी किए नए नियम….

    मिठाई की दुकानों के लिए सरकार ने जारी किए नए नियम….

    स्थानीय दुकानों यानी आपके पड़ोस वाली हलवाई की दुकान पर मिलने वाले खाने-पीने के सामान की क्वालिटी में सुधार लाने के लिए सरकार ने नए नियम लागू किया है। 1 अक्तूबर 2020 के बाद से, स्थानीय मिठाई की दुकानों को भी परातों एवं डिब्बों में बिक्री के लिए रखे गए मिठाई के लिए ‘निर्माण की तारीख’ तथा उपयोग की उपयुक्त अवधि’ जैसी जानकारी प्रदर्शित करनी होगी। मौजूदा समय में, इन विवरणों को पहले से बंद डिब्बाबंद मिठाई के डिब्बे पर उल्लेख करना अनिवार्य है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नए नियम जारी किए है।

    मिठाई की दुकान के लिए क्या है नया नियम
    बाजार में बिकने वाली खुली मिठाइयों के इस्तेमाल की समय सीमा अब कारोबारियों को बतानी होगी। कितने समय तक उसका इस्तेमाल ठीक रहेगा उसकी समयसीमा की जानकारी उपभोक्ताओं को देनी होगी। खाद्य नियामक ने इसे अनिवार्य किया है।


    एफएसएसएआई ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्त को लिखे पत्र में कहा, सार्वजनिक हित में और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह तय किया गया है कि खुली मिठाइयों के मामले में बिक्री के लिए आउटलेट पर मिठाई रखने वाली ट्रे के साथ 1  अक्तूबर 2020 से अनिवार्य रूप से उत्पाद की बेस्ट बिफोर डेट प्रदर्शित करनी चाहिए।

    क्यों उठाया ये कदम
    एफएसएसएआई ने आम लोगों के स्वास्थ्य खतरों को देखते हुए यह कदम उठाया है। उपभोक्ताओं को बासी/खाने की अवधि समाप्त होने के बाद भी मिठाइयों की बिक्री की सूचना मिलने के बाद इस संबंध में एक निर्देश जारी किया गया है।

  • कंगना केस में BMC को फटकार, जज ने कहा- पहले की लिस्ट पर क्यों नहीं तोड़े निर्माण?

    कंगना केस में BMC को फटकार, जज ने कहा- पहले की लिस्ट पर क्यों नहीं तोड़े निर्माण?

    कंगना ने बीएमसी से अपने ऑफिस की तोड़फोड़ के लिए 2 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है. वहीं संजय राउत बॉम्बे हाई कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल कर सकते हैं. हाई कोर्ट के आदेश पर संजय राउत को इस केस में मुख्य आरोपी बनाया गया है. कंगना और संजय राउत के बीच ट्विटर वॉर के बाद ही कंगना के ऑफिस के कुछ हिस्सों को ध्वस्त किया गया था।

    कंगना रनौत के मुंबई स्थित दफ्तर में तोड़फोड़ मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट में शुरू हो गई है. आज बीएमसी को कोर्ट को बताना होगा कि उन्होंने जितनी तेजी से कंगना के दफ्तर पर कथित अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की, क्या बाकी मामलों में भी उतनी तेजी से ही कार्रवाई करती है।

    कंगना के केस में कोर्ट में हुई सुनवाई 

    कंगना रनौत बनाम एमबीसी केस की सुनाई जस्टिस एस कथावाला और जस्टिस रियाज चागला ने की. इसमें कथावाला और चागला ने बीएमसी के वकील अस्पी चिनॉय से कंगना के ऑफिस में तोड़फोड़ के बाद फोटो लिए जाने पर सवाल किए. कोर्ट को बताया गया था कि मुकादम ने अपने फोन में फोटो ली थी. जबकि चिनॉय ने कोर्ट को कहा कि एक सब इंजिनियर ने कंगना के टूटे ऑफिस की फोटो अपने फोन में ली थी. जस्टिस कथावाला ने उनसे पूछा कि क्या ये सब इंजिनियर का काम था. इसके जवाब में चिनॉय का कहा कि उन्हें लगता है कि उसी का काम था।

    कोर्ट ने सवाल किया कि मुकादम ने क्यों कहा कि उनसे फोटो अपने फोन में खींची हैं जबकि ऐसा नहीं था. चिनॉय ने इसके जवाब में कहा कि उसने मुकादम से सुनाई के दौरान ही ये बात पूछी थी और उसने यही कहा था कि फोटो उसके पास है. लेकिन सुनवाई के खत्म होने के बाद उसे पता चला कि मुकादम नहीं बल्कि सब इंजिनियर ने फोटो लिए हैं. चिनॉय ने कहा कि इसीलिए उसने सोमवार को कोर्ट को ये बताना सही समझा. कोर्ट ने चिनॉय की इस बात पर तारीफ की।

    ऐसी ही फुर्ती दूसरे केस में दिखाए बीएमसी

    वहीं कंगना के वकील बिरेन्द्र सराफ ने कंगना के ऑफिस में हुई तोड़फोड़ की तस्वीरें दिखाई. उन्होंने पुरानी फोटोज और तोड़फोड़ के बाद ली गई फोटोज में तुलना भी की. इसपर जस्टिस कथावाला ने उनसे कहा, ‘हमारे साथ कई ऐसे केस हुए हैं जब हमने कॉरपोरेशन को किसी जगह को तोड़ने के लिए कहा और उन्होंने नहीं तोड़ा. इसीलिए हमने देखा कि इस केस के हमारे पहले आर्डर पर ही जिस तेजी ने उन्होंने (बीएमसी) काम किया अगर वो शहर के अन्य केस पर भी इतनी तेजी से काम करें तो ये शहर रहने के लिए और बेहतर हो जाएगा.’ उन्होंने ये भी बताया कि कई बार ऐसा भी हुआ है कि बीएमसी को तोड़फोड़ ना करने के लिए फाइन भरना पड़ा।

    कंगना के वकील ने रखा अपना पक्ष

    कंगना की तरफ से उनके वकील बिरेन्द्र सराफ ने उनका पक्ष रखते हुए कहा कि कंगना डेवलपमेंट कंट्रोल रुल की एक्सपर्ट नहीं है. मैं किसी भी प्रकार की परमिशन लेने के बारे में जानने के लिए किसी एक्सपर्ट की राय लेता. पार्टियों के पास नियमितीकरण के लिए जाने का विकल्प होता है, जो कि कंगना को नहीं दिया गया. क्योंकि प्राधिकारियों ने प्रावधानों के हिसाब से कुछ नहीं किया. कंगना को सभी मौकों से वंचित रखा गया, क्योंकि अधिकारियों ने एक प्रावधान लागू किया था जो पहले लागू नहीं था।

    सराफ ने आगे कहा कि ऐसे मामले भी हुए हैं जहां लोगों को नियमितीकरण के बाद भी अपने घर को बनाए रखने की अनुमति दी गई है. सराफ के अनुसार यह उस व्यक्ति के लिए भी एक उपाय है जो बीएमसी से संपर्क कर नियमित जुर्माने के भुगतान के साथ नियमितीकरण की मांग करता है।

    कंगना के दफ्तर में तोड़फोड़ पर बीएमसी देगी जवाब

    कंगना ने बीएमसी से अपने ऑफिस की तोड़फोड़ के लिए 2 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है. संजय राउत बॉम्बे हाई कोर्ट में आज अपना हलफनामा दाखिल कर सकते हैं. हाई कोर्ट के आदेश पर संजय राउत को इस केस में मुख्य आरोपी बनाया गया है. कंगना और संजय राउत के बीच ट्विटर वॉर के बाद ही कंगना के ऑफिस के कुछ हिस्सों को ध्वस्त किया गया था।

    पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट में कंगना के वकील ने संजय राउत के नाम का भी जिक्र किया था. कंगना के वकील ने दलील देते हुए कहा था कि क्योंकि कंगना ने सत्ता में बैठे हुए लोगों को लेकर कुछ ऐसी बातें कही थी जो उनको नागवार गुजरी इस वजह से कंगना के दफ्तर की ये हालत हुई, जबकि कंगना के दफ्तर पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण नहीं चल रहा था।

    गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा था- बीएमसी तो अपने काम में काफी तेज है तो उसे और समय की क्या जरूरत है. वहीं जज की तरफ से ये भी कहा गया था कि कंगना के उस धवस्त किए गए ऑफिस को उस हालत में नहीं छोड़ा जा सकता है. भारी मानसून में खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।

    कोर्ट की इस दलील को ही कंगना रनौत ने अपनी जीत मान लिया था. उन्होंने ट्वीट कर ना सिर्फ कोर्ट का शुक्रिया अदा किया बल्कि ये भी कहा कि बरसात में उनका घर टूट रहा है और कोर्ट का इतना सोचना तारीफ योग्य है।

  • ट्रेन में अनियमित टिकट पर यात्रा करने वाले पढ़ लें ये खबर, जुर्माना भरकर भी नहीं पूरा कर पाएंगे सफर….

    ट्रेन में अनियमित टिकट पर यात्रा करने वाले पढ़ लें ये खबर, जुर्माना भरकर भी नहीं पूरा कर पाएंगे सफर….

    अनियमित टिकट लेकर ट्रेनों में चलने वाले यात्रियों का सफर अब पूरा नहीं हो पाएगा। पकड़े जाने पर जुर्माना देने के साथ ही अगले पड़ाव वाले स्टेशन पर ट्रेन से उतरना भी होगा। दलालों और एजेंटों की साठगांठ को रोकने के लिए रेल प्रशासन ने अनियमित टिकट पर गंतव्य तक यात्रा की अनुमति को कोविड-19 नियमों का उल्लंघन मानते हुए यह निर्देश जारी किए हैं। निर्देश का उल्लंघन करने वाले टीटीई के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
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    दरअसल, स्पेशल ट्रेनों में कई यात्री वरिष्ठ नागरिक का टिकट और काउंटर से तत्काल का कूटरचित ई-टिकट लेकर पहुंच रहे हैं। टिकट पर उम्र भी बदल दी जा रही है। यात्रियों का कहना होता है मोटी रकम देकर उन्होंने एजेंट से टिकट बनवाया है। ट्रेन में चार्ट से मिलान करने पर मामला पकड़ में आ जाता है। अभी तक ऐसे यात्रियों से जुर्माना वसूल कर उन्हें आगे की यात्रा की अनुमति दे दी जा रही थी।
    पिछले दिनों डीआरएम के निर्देश पर गोरखपुर-एलटीटी एक्सप्रेस, बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस और कोचीन एक्सप्रेस में बीच सफर में स्पेशल चेकिंग में भी अनियमित टिकट पर यात्रा करते कई लोगों को पकड़ा गया। इसके बाद पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल के सहायक वाणिज्य प्रबंधक ने 22 सितंबर को आदेश जारी कर गोरखपुर, लखनऊ, बस्ती और गोंडा स्टेशन पर टिकटों की जांच सावधानी से करने का निर्देश दिया है। साथ सीटीटीआई को निर्देशित किया है कि वे पूरे मामले की निगरानी रखें। किसी भी सूरत में अनियमित टिकट पर यात्री सफर न पूरा कर सकें। 

    अगले स्टॉपेज तक का लगेगा जुर्माना
    अगर कोई यात्री अनियमित टिकट पर यात्रा कर रहा है तो उससे जहां वह पकड़ा गया है उससे अगले स्टॉपेज तक का जुर्माना लेकर उतार दिया जाएगा। यदि यात्री जुर्माना देने में आनाकानी करता है तो उसे आरपीएफ को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

    ऐसे ठगे जा रहे हैं यात्री
    इस समय दिल्ली और मुंबई की ट्रेनों में भीड़ ज्यादा है। इसमें ज्यादातर श्रमिक हैं जो कोविड-19 संक्रमण फैलने पर घर आ गए थे। इन यात्रियों को एजेंट कंफर्म टिकट तो मुहैया करा दे रहे हैं, लेकिन उन्हें वरिष्ठ नागरिक बना दे रहे हैं या मुंबई से तत्काल टिकट बनवाकर यहां प्रिंट कराकर दे रहे हैं। उसमें कूटरचित तरीके से उम्र और नाम बदल दिया जा रहा है। यात्री जब स्टेशन पर जा रहा है तो पकड़ा जा रहा है।
     
    सवाल: स्टेशन पर चेकिंग तो ट्रेन में कैसे जा रहे यात्री?
    रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के टिकटों की दो जगहों पर चेकिंग की जा रही है। प्रवेश द्वार पर टीसी टिकट चेक करते हैं और ट्रेन के पास प्लेटफॉर्म पर टीटीई लगे हैं। गोरखपुर जंक्शन पर 50 से 60 टीटीई जांच के लिए लगाए गए हैं। ऐसे में अनियमित टिकट वाले यात्री ट्रेन में कैसे पहुंच जा रहे हैं, यह बड़ा प्रश्न है।  

  • यहां कभी लॉकडाउन हुआ ही नहीं….

    यहां कभी लॉकडाउन हुआ ही नहीं….

    पूरा विश्व कोरोना से डरता रहा लेकिन एक ऐसा देश था जिसने कोरोना को मात दी। वह देश है साउथ कोरिया। कोई देश कोरोना वायरस का सामना किस तरह करे? ऐसा लगता है कि साउथ इस्ट एशिया के एक देश ने इस सवाल का जवाब प्राप्त कर लिया है। साउथ इस्ट एशिया के इस देश में अप्रैल महीने से अभी तक रोज सामने आनेवाले कोरोना के केस औसत 77 हैं। यदि इसी तरह ही अमेरिका भी कोरोना पर नियंत्रण पा लेती तो वहां नए केस की औसत 480 होती, किंतु अमेरिका में नए केस की औसत 38 हजार है। तो जानें साउथ इस्ट एशिया के इस देश ने किस तरह से कोरोना पर नियंत्रण पाया। वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार साउथ एशिया के इस देश ने सीधे, लचिले और तुलनात्मक तौर पर सरल लागू की जा सके ऐसा मोडल अपनाया। इसका लाभ यह हुआ कि न सिर्फ मौतों का आंकड़ा कम हुआ, बल्कि देश की अर्थतंत्र भी मजबूत रही। (इस देश की इकोनॉमी में 1 प्रतिशत से भी कम कमी का अनुमान लगाया गया है।)

    कोई देश कोरोना वायरस का सामना किस तरह करे? ऐसा लगता है कि साउथ इस्ट एशिया के एक देश ने इस सवाल का जवाब प्राप्त कर लिया है। साउथ इस्ट एशिया के इस देश में अप्रैल महीने से अभी तक रोज सामने आनेवाले कोरोना के केस औसत 77 हैं। यदि इसी तरह ही अमेरिका भी कोरोना पर नियंत्रण पा लेती तो वहां नए केस की औसत 480 होती, किंतु अमेरिका में नए केस की औसत 38 हजार है। तो जानें साउथ इस्ट एशिया के इस देश ने किस तरह से कोरोना पर नियंत्रण पाया।

    वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार साउथ एशिया के इस देश ने सीधे, लचिले और तुलनात्मक तौर पर सरल लागू की जा सके ऐसा मोडल अपनाया। इसका लाभ यह हुआ कि न सिर्फ मौतों का आंकड़ा कम हुआ, बल्कि देश की अर्थतंत्र भी मजबूत रही। (इस देश की इकोनॉमी में 1 प्रतिशत से भी कम कमी का अनुमान लगाया गया है।)

    रिपोर्ट के अनुसार चीन के पड़ोसी ऐसे इस देश ने जिस तरह से लोगों का कोरोना टेस्टिंग किया ऐसा अन्य किसी देश ने नहीं किया। यहां टेक्नोलॉजी का भी व्यापक स्तर पर उपयोग किया गया है और सेन्ट्रलाइज्ड कंट्रोल तथा कम्युनिकेशन मोडल को अपनाया गया, किंतु एक जरुरी बात यह रही कि इतना सब कुछ करने के बाद भी साउथ कोरिया लगातार एक डर में रहा। वह डर था-असफल होने का डर। अब ऐसा लग रहा है कि इस डर ने ही साउथ कोरिया को जीत की तरफ आगे ले जाने में मदद की।

    साउथ कोरिया की जनसंख्या 5.16 करोड़ है। अमेरिका की जनसंख्या 32.82 करोड़ है। यानि कि 6 गुणा से थोड़ा अधिक। साउथ कोरिया में कोरोना का कुल केस 23 हजार से जरा अधिक है। अमेरिका में 73 लाख से अधिक, अर्थात कि 309 गुणा, तो साउथ कोरिया में लगभग 400 लोगों की मौत हुई है, किंतु अमेरिका में 2 लाख 9 हजार लोगों की मौत कोरोना से हुई है।

    साउथ कोरिया ने महामारी की शुरुआत में ही बहुत ही तेजी दिखाई। देश में तैयार कोरोना वायरस टेस्टिंग किट को स्वीकृति दी गई और टेक्नोलॉजी का जबरदस्त तौर पर उपयोग करने से आसपास के क्षेत्रों में किसी के भी संक्रमित होने पर तुरंत ही लोगों को मैसेज भेजना शुरु कर दिया गया। जब देश में फेस मास्क की कमी होने लगी तो सरकार ने उत्पादन पर अपना नियंत्रण कर लिया था।

    साउथ कोरिया के स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा कोरोना को पूरी तरह गंभीरता से लिया गया और एक दिन में दो-दो बार ब्रीफिंग करने लगे। लोगों को लगातार महामारी की चेतावनी दी गई। देश में लगभग हरेक व्यक्ति ने मास्क पहना। हरेक संक्रमित, लक्षण वाले और लक्षण बिना के लोगों को अस्पताल या सरकार संचालित अन्य जगहों पर आइसोलेट किया गया। ट्रीटमेन्ट फ्री कर दी गई। यही कारण है कि साउथ कोरिया में कभी भी लॉकडाउन लागू नहीं की गई। रेस्टोरंट और अन्य बिजनेस खुले रहे, जिसके कारण इकोनॉमी भी ध्वस्त नहीं हुई।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी साउथ कोरिया की तारीफ की है। संगठन ने कहा कि जिस तरह साउथ कोरिया ने वायरस को नियंत्रित किया और उसके साथ जीना सीखा ऐसा अन्य किसी देश ने नहीं किया। उन्होंने कहा कि आपको वायरस को पूरी तरह खत्म करने की जरुरत नहीं है, बल्कि जीवन जीने का ढ़ंग बदलने की जरुरत है।