दंतेवाड़ा। जिला अस्पताल और कुआकोंडा सीएससी के बीच दवाओं व अन्य सामग्री को ड्रोन के माध्यम से पहुंचाने का ट्रायल किया जा रहा है। कुआकोंडा सीएससी से 8 ब्लड सेंपल जांच के लिए जिला अस्पताल भेजकर स्वास्थ्य विभाग को दो ड्रोन का डेमो दिखाया गया, जिसमें आरएफटीएलएफटी, थाइराइड जैसे खून के नमूने कुआकोंडा सीएससी से जिला अस्पताल भेजे गए। जिले में इसकी कितनी जरूरत है अब इसका आंकलन अधिकारी करेंगे। दरअसल जिले में ऐसे कई अस्पताल हैं जहां से मरीज को जिला अस्पताल पहुंचाने में डेढ़ से 2 घंटे लगते हैं, तब तक मरीज की हालत बिगड़ जाती है, कई बार नक्सल क्षेत्र के अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाएं नहीं मिल पाने से भी कई लोगों की जान चली जाती है, खासकर सर्पदंश के मामलों में, ऐसे केस में दवाओं को पहुंचाने में ड्रोन कारगर साबित होगा, अभी हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग ड्रोन का इस्तेमाल करता है, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश जैसे और राज्यों में भी इसका ट्रायल किया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग को दो ड्रोन का डेमो दिखाया गया एक 50 किलोमीटर रेंज और दूसरा 120 किलोमीटर रेंज, 50 किलोमीटर रेंज वाले ड्रोन से पूरे जिले भर के अस्पतालों तक दवा पहुंच सकेगी, जरूरी और एमरजेंसी जांच के लिए मेडिकल कालेज जगदलपुर भी ब्लड सेंपल जांच के लिए जगदलपुर भेजे जा सकेंगे। ड्रोन की 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार है, जमीन से 300 मीटर ऊंचाई तक यह उड़ान भर सकता है।
डॉ देश दीपक ने बताया ड्रोन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में एमरजेंसी में जरूरी दवा भेज सकेंगे, काफी कारगर साबित होगा, ड्रोन का अभी सिर्फ इसका ट्रायल किया जा रहा है। जिला अस्पताल के सामने हाईस्कूल ग्राउंड से कुआकोंडा सीएससी के सामने हाईस्कूल ग्राउंड में ड्रोन दवा लेकर 15 मिनट में 23 किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचा।
ड्रोन ऑपरेट कर रहे मिलन, यूसुफ ने बताया पहली बार यहां इसका डेमो किया जा रहा है, इसलिए कुछ समय ज्यादा लग रहा है। पूरे समय चाहे 10 किलोमीटर हो या 120 किलोमीटर हम ड्रोन पर नजर रखते हैं।
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जिला अस्पताल से कुआकोंडा सीएससी तक दवाओं व अन्य सामग्री को ड्रोन के माध्यम से पहुंचाने का किया गया ट्रायल…
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लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ पटवारियों के ट्रांसफर के आदेश…
रायपुर। मैं साल 1990 में नया-नया विधायक बना, तब साधु की तरह दिखने वाले लंबी कद काठी का एक व्यक्ति मेरे पास आवेदन लेकर आया। वे मेरे जन्म यानी साल से राजस्व के एक मामले को लेकर राजस्व कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। उन्हें अपने मामले की सारी जानकारियां याद थी और कागज पलटने तक की जरूरत नहीं पड़ती थी। मैं उन्हें अपनी गाड़ी से एसडीएम कार्यालय लेकर गया और मामले का निराकरण कराया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज निवास कार्यालय में राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान यह प्रसंग सुनाया और कहा कि हमें राजस्व अमले की पूरी व्यवस्था को दुरुस्त करना है। राजस्व विभाग सीधे आम आदमी से जुड़ा है और हमें इसकी छवि सुधारने के लिए काम करना है। बैठक में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लंबे समय से एक ही जगह पर पर जमे हुए पटवारियों को हटाया जाए और एक ऐसी व्यवस्था तैयार करें जिसमें नियत समय के बाद पटवारी का अनिवार्य रूप से उस हल्के और तहसील क्षेत्र से स्थानांतरण हो जाए। उन्होंने कहा कि आम जनों को दैनिक सरकारी कामकाज में पटवारी के सहयोग की जरूरत पड़ती है। साय ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि पटवारी अपने मुख्यालय में रहकर कार्य करें, यह सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के विभिन्न शासकीय कार्यालयों की भूमि का शासन के पक्ष में नामांतरण का काम अभियान चलाकर पूर्ण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नगरीय क्षेत्रों में शहरी पट्टों के वितरण के लिए आवश्यक कार्यवाही शीघ्र पूर्ण कर ली जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि फौती नामांतरण, बंटवारा, अविवादित नामांतरण सहित राजस्व मामलों के निराकरण में तेजी लाई जाए और इसे समय सीमा में ही पूरा करें। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग नागरिक सुविधाओं को बढ़ाने के लिए डिजिटल नवाचारों पर भी तेजी के साथ काम करें।
राजस्व विभाग के सचिव अविनाश चंपावत ने मुख्यमंत्री को राजस्व विभाग की योजनाओं, गतिविधियों और विभागीय आवश्यकताओं से अवगत कराया। उन्होंने राजस्व विभाग के प्रशासनिक इकाई की मूलभूत जानकारी के साथ ही स्वामित्व योजना, राहत कार्यालय के कार्य, राजस्व न्यायालय, जिओ रिफ्रेंसिंग, डिजिटल क्रॉप सर्वे सहित अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अद्यतन जानकारी साझा की।
बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, राहुल भगत और आयुक्त भू अभिलेख रमेश शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। -

सीएम साय के निर्देश पर सीतापुर पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी की मध्यस्थता के बाद मान गए संदीप के परिजन,25 लाख मुआवजा और कलेक्टर दर पर नौकरी समेत चार वायदों पर माने परिजन
23 दिनों से पोस्टमार्टम कक्ष में रखे संदीप लकड़ा के शव का परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया है। शुक्रवार याने 27 सितंबर को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की मध्यस्थता के बाद परिजनों ने आंदोलन समाप्त कर दिया। संदीप की पत्नी की ओर से आत्मदाह करने की चेतावनी दी गई थी।
कौन था संदीप
नल जल योजना में अभिषेक पांडेय नाम क ठेकेदार के यहाँ संदीप कर्मचारी था। ठेकेदार के छड़ सीमेंट की चोरी हुई थी। सीतापुर पुलिस थाने में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। ठेकेदार और उनके सहयोगियों ने संदीप की पिटाई की थी। सात जून को संदीप की पिटाई से मौत हो गई थी। संदीप का शव मैनपाट के कमलेश्वरपुर थाने से छ किलोमीटर आगे लुरैना तिब्बती कैंप के पास मौजूद बड़कापारा में निर्माणाधीन पानी टंकी के फाउंडेशन (नींव) में संदीप के शव को डाला और नींव को पाटकर उस पर पानी टंकी बना दी गई। पुलिस को भ्रम में डालने संदीप के मोबाइल को मुंबई और गोवा में चालू किया गया और फिर बंद कर दिया गया था। आरोपी ठेकेदार के सहयोगी के बयान से मामले का खुलासा हो गया। पुलिस ने शव बरामद किया लेकिन फिर गतिरोध आ गया।परिजनों ने आंदोलन शुरु किया
मृतक संदीप की हत्या के खुलासे के बाद आक्रोशित संदीप लकड़ा के परिजन धरने पर बैठ गए जिसे सर्व आदिवासी समाज ने समर्थन दे दिया था। संदीप लकड़ा के परिजनों की मांग थी कि, प्रमुख आरोपी के साथ साथ सहयोग करने वालों की सूक्ष्मता से जांच हो। परिजन दो करोड़ मुआवजा और सरकारी नौकरी की माँग कर रहे थे। आंदोलन को कांग्रेस ने भी समर्थन दे दिया था। परिजनों ने मांग पूरी होने तक शव का अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया था।
यूं माने परिजन
संदीप लकड़ा की पत्नी ने मांग पूरी ना होने पर आत्मदाह की धमकी दी थी। आत्मदाह की चेतावनी से मसला और गंभीर हो गया। गंभीर रुख की ओर बदलते घटनाक्रम को देख सीएम साय ने स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल को भेजा। आंदोलन को समाप्त कराने के साथ साथ परिजनों को पूरी तरह संतुष्ट करना जिसमें नियमों की भी अवहेलना ना हो, यह लक्ष्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल को देकर भेजा गया था। करीब तीन घंटे की चर्चा के बाद गतिरोध हटा और मंत्री श्यामबिहारी परिजनों को संतुष्ट करने और आंदोलन ख़त्म करने के लिए सहमत करा गए। सर्व आदिवासी समाज के अकबर राम कोर्राम (रिटायर डीआईजी) की उपस्थिति से सरकार को अपेक्षाकृत सुविधा हुई और यह बेहतर तरीके से समझाया जा सका कि, शासन अपने नियमों में कितनी ढील देकर जिस अधिकतम सीमा तक राहत दे सकता है वह दे रहा है। मौके पर ही मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने मृतक संदीप की पत्नी सलीमा लकड़ा को 8.25 लाख का चेक और छात्रावास में कलेक्टर दर पर नियुक्ति का पत्र सौंपा। मंच से घोषणा की गई कि, मृतक की पत्नी को कुल 25 लाख रुपए दिए जाएँगे, और मृतक के दोनों बच्चों को हायर सेकेंडरी तक मुफ्त शिक्षा दी जाएगी। इसके साथ संदीप हत्याकांड की जांच के लिए राज्य स्तर पर टीम गठित कर पृथक से जांच कराने की घोषणा भी की गई। -

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश, चुनावी बॉन्ड से उगाही करने का आरोप…
बेंगलुरु की एक विशेष लोक अदालत ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया। उनके खिलाफ चुनावी बॉन्ड के जरिए उगाही करने का आरोप लगाया गया है। विशेष लोक अदालत ने इस शिकायत पर सुनवाई करते हुए वित्त मंत्री के अलावा कई दूसरे नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
जनाधिकार संघर्ष परिषद (जेएसपी) के सह-अध्यक्ष आदर्श अय्यर ने बेंगलुरु में जनप्रतिनिधियों की विशेष अदालत में शिकायत दर्ज कर केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की थी।
उन्होंने शिकायत की थी कि चुनावी बॉन्ड के जरिए डरा-धमकाकर जबरन वसूली की गई। याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने बेंगलुरु के तिलक नगर पुलिस स्टेशन को चुनावी बॉन्ड के जरिए जबरन वसूली के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।एसीएमएम कोर्ट ने एक आदेश जारी कर शिकायत की एक प्रति और रिकॉर्ड थाने को भेजने का निर्देश भी दिया है। एफआईआर लंबित होने के कारण सुनवाई 10 तारीख तक के लिए टाल दी गई है।कोर्ट ने तिलकनगर पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ-साथ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपीनड्डा, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र, बीजेपी नेता नलिन कुमार कतील, केंद्रीय और राज्य बीजेपी कार्यालय और ईडी विभाग के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी गई है।
Finance Minister Nirmala Sitharaman: में कहा गया है कि अप्रैल 2019 से अगस्त 2022 तक व्यवसायी अनिल अग्रवाल की फर्म से लगभग 230 करोड़ रुपए और अरबिंदो फार्मेसी से 49 करोड़ रुपये चुनावी बॉन्ड के माध्यम से वसूले गए।जनाधिकार संघर्ष परिषद (JSP) ने वित्त मंत्री के खिलाफ अदालत में जो आरोप लगाए उसमें कहा गया है कि चुनावी बॉन्ड के जरिए देश की वित्त मंत्री ने जबरन पैसे की जबरन वसूली की गई है. हालांकि अभी इस मामले की सुनवाई को 10 अक्टूबर तक के लिए स्थगित किया गया है, लेकिन ये मामला कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले देश की केंद्रीय मंत्री के खिलाफ मुद्दा बन सकता है.
शिकायत में क्या- जानिए पूरा मामला
जेएसपी के सह-अध्यक्ष आदर्श अय्यर ने याचिका में कहा कि वित्त मंत्री ने चुनावी बॉन्ड के माध्यम से डरा-धमकाकर जबरन वसूली की है. अब इसी मामले से जुड़ी एक याचिका के बाद वित्त मंत्री के खिलाफ बेंगलुरू की पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव कोर्ट ने एक्शन ले लिया है. साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट के पास चुनावी बॉन्ड योजना को चुनौती दी गई थी और सुप्रीम कोर्ट ने चार याचिकाकर्ता की बात सुनने और उनका पक्ष जानने के बाद इस पर फैसला दिया. उच्चतम न्यायालय ने चुनावी बॉन्ड योजना को ना सिर्फ असंवैधानिक माना, बल्कि इस पर पूरी तरह से रोक लगा दी. चुनावी बॉन्ड या इलेक्ट्रोरल बॉन्ड की शुरुआत साल 2018 में की गई थी और 2024 में इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया.
कहां दायर होगी वित्त मंत्री के खिलाफ एफआईआर
आदर्श अय्यर की याचिका पर सुनवाई करते हुए बेंगलुरु की पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव कोर्ट ने बेंगलुरू के तिलक नगर पुलिस स्टेशन को वित्त मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. चुनावी बॉन्ड के जरिए जबरन वसूली के मामले में जेएसपी के सह-अध्यक्ष आदर्श अय्यर ने पिछले साल यानी अप्रैल 2023 में 42वें एसीएमएम कोर्ट का रुख किया था.
वित्त मंत्री के साथ और भी नेताओं के खिलाफ की गई थी शिकायत
याचिकाकर्ता ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, बीजेपी के तत्कालीन कर्नाटक अध्यक्ष नलिन कुमार कटील, बी वाई विजयेंद्र के खिलाफ शिकायत की थी. इसके साथ ही उन्होंने ईडी अधिकारियों के खिलाफ भी आरोप लगाए थे. -

इंस्पेक्टर बर्खास्त: दोष सिद्ध होने के बाद IG ने निरीक्षक को किया बर्खास्त, शराब के नशे में धुत होकर गर्ल्स हॉस्टल में घुसकर किया था छेड़छाड़
रायपुर। रक्षित केन्द्र रायपुर में पदस्थ निरीक्षक राकेश चौबे को ’’सेवा से पदच्युत’’ किया गया है। न्यायालय द्वारा निर्णय पारित करते हुए निरीक्षक को दोष सिद्ध पाते हुए कठोर कारावास एवं अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। पुलिस महानिरीक्षक रायपुर क्षेत्र रायपुर अमरेश मिश्रा ने प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए कार्रवाई की। निरीक्षक ने शराब के नशे में धुत होकर महिला हॉस्टल में जबरदस्ती घुसकर छोड़छाड़ की थी।
रक्षित केन्द्र रायपुर में पदस्थ निरीक्षक राकेश चौबे के विरुद्ध थाना अजाक रायपुर में पंजीबद्ध अपराध क्र 04/2023 धारा 451, 294, 323(दो बार), 506 बी, 354 ए भादवि. एवं 3(1)W)(i), 3(1)(r), 3(2)(va) अनुसूचित जाति जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में न्यायालय विशेष न्यायाधीश अंतर्गत एस.सी. एवं एस.टी. (अत्याचार निवारण) अधिनियम रायपुर द्वारा निर्णय पारित करते हुए निरीक्षक को दोष सिद्ध पाते हुए कठोर कारावास एवं अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है।पुलिस महानिरीक्षक रायपुर क्षेत्र रायपुर अमरेश मिश्रा द्वारा प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए निरीक्षक राकेश चौबे, रक्षित केन्द्र रायपुर को न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध पाये जाने से जो उसके नैतिक अधःपन का द्योतक एवं लोकहित मे शासकीय सेवा में रखने योग्य नही पाये जाने पर सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1996 एवं पुलिस रेग्युलेशन के प्रावधान के अंतर्गत ’’सेवा से पदच्युत’’ किया गया है।
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छत्तीसगढ़ के पूर्व नेता प्रतिपक्ष के भाई ने की आत्महत्या,मचा हड़कंप…
छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा से एक बड़ी दुखद खबर सामने आ रही है. बता दें कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के भाई शेखर चंदेल (भाजपा नेता) ने सुसाइड कर लिया है. हालांकि इसके पीछे की क्या वजह थी ये सामने नहीं आ पाई है. उनका शव नैला रेलवे स्टेशन के पास मिला. सूचना के बाद पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया. बीजेपी नेता ने ऐसा कदम क्यों उठाया इसकी जांच की जा रही है.
भाजपा नेता की रेलवे ट्रैक पर लाशः शेखर चंदेल की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ हैं. बताया जा रहा हैं कि शेखर चंदेल अपने राइस मिल से रात साढ़े 08 बजे पैदल निकले थे. मोबाइल में चर्चा करते हुए जा रहे थे. जिसके बाद रात लगभग 10 बजे ट्रेन से युवक के कटने की सूचना मिली. शर्ट से मृतक की पहचान हो सकी. मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने में पुलिस जुट गई हैं.
पूर्व नेता प्रतिपक्ष के छोटे भाई शेखर चंदेल वर्तमान में स्काउट गाइड के जिला मुख्य आयुक्त के पद पर थे. जिला पंचायत सदस्य के लिए भी चुनाव लड़ चुके हैं. शेखर चंदेल की मौत की सूचना मिलने के बाद परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हैं. रात से ही जिला अस्पताल परिसर में लोगो का आना जाना शुरू हो गया हैं.
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छत्तीसगढ़ वाणिज्य व्याख्याता संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने महंगाई भत्ता के लिए सभी शिक्षक साथियों काे फेडरेशन के बैनर तले 27 सितम्बर काे आज एक दिवसीय आंदोलन के लिए किया आव्हान…
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के पदाधिकारियों के आह्नान पर प्रदेश के 100 से अधिक संगठनाे के साथ छत्तीसगढ़ वाणिज्य व्याख्याता संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री विष्णु प्रसाद साहू, प्रदेश उपाध्यक्ष ममता वाडदे , गीता नायर, प्रदेश संचालक खाेमनलाल साहू प्रदेश सचिव विवेक धुर्वे,प्रदेश संरक्षक श्री जगदीश दिल्लीवार ने प्रदेश के व्याख्याता एवं शिक्षक साथियों काे 11 सितम्बर की भांति 27 सितंबर काे महंगाई भत्ता के लिए एक दिवसीय सामुहिक अवकाश लेकर मोदी की गारंटी के तहत केंद्र के समान देय तिथि से 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता,जुलाई 2019 से देय तिथि पर लंबित महंगाई भत्तों के एरियर्स राशि का जी पी एफ खाते में समायोजन करने एवं मध्यप्रदेश की भांति 300 दिवस अर्जित अवकाश नगदीकरण,चार स्तरीय समयमान वेतनमान,केंद्र के समान गृह भाड़ा भत्ता स्वीकृत करने की मांगों को लेकर 27 सितंबर, 2024 दिन शुक्रवार को कलम बन्द- काम बंद हड़ताल किया जा रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: बाल यौन शोषण सामग्री देखने पर भी होगी सख्त सजा, डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा पर कड़ा रुख!
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जो डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि अब केवल बाल यौन शोषण सामग्री को देखना या डाउनलोड करना भी एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा। यह फैसला न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया में स्पष्टता लाता है, बल्कि समाज में बच्चों के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता का भी प्रतीक है।
फैसले की मुख्य बातें
1. बाल यौन शोषण सामग्री देखना या डाउनलोड करना: अब POCSO (बाल यौन शोषण संरक्षण अधिनियम) और IT अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध होगा।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जो डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि अब केवल बाल यौन शोषण सामग्री को देखना या डाउनलोड करना भी एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा। यह फैसला न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया में स्पष्टता लाता है, बल्कि समाज में बच्चों के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता का भी प्रतीक है।
. बाल यौन शोषण सामग्री देखना या डाउनलोड करना: अब POCSO (बाल यौन शोषण संरक्षण अधिनियम) और IT अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध होगा।
2. ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी’ शब्द का स्थान: अब इसे “बाल यौन शोषण और दुरुपयोग सामग्री” (CSEAM) के नाम से संबोधित किया जाएगा।
3. केंद्र सरकार से अध्यादेश की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले में तुरंत अध्यादेश लाने का आग्रह किया है।
4. संसद से POCSO अधिनियम में संशोधन की सिफारिश: अदालत ने संसद से POCSO अधिनियम में आवश्यक बदलाव करने का सुझाव दिया है, ताकि इसे अधिक सख्त और प्रभावी बनाया जा सके।
यह निर्णय मद्रास उच्च न्यायालय के उस पूर्व फैसले को खारिज करता है, जिसमें कहा गया था कि केवल बाल यौन शोषण सामग्री को देखना या डाउनलोड करना अपराध नहीं माना जाएगा, जब तक कि इसे प्रसारित न किया जाए। इस नए फैसले ने अब इसे स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध घोषित कर दिया है, जिससे बाल सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है।
विशेषज्ञों की राय
बाल अधिकार कार्यकर्ता रीना मिश्रा का मानना है, “यह फैसला बच्चों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा, बल्कि समाज में बच्चों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता को भी बढ़ाएगा।”
साइबर कानून विशेषज्ञ अमित शर्मा ने इस फैसले की सराहना करते हुए कहा, “तकनीकी प्रगति के साथ-साथ बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए यह निर्णय आवश्यक था। यह भविष्य में ऑनलाइन बाल शोषण की घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद करेगा।”
अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भी इस मुद्दे पर सख्त कानून बनाए हैं। वहां “प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट” (PECA) 2016 के तहत, बाल यौन शोषण सामग्री के मामलों में 7 साल तक की सजा और 50 लाख पाकिस्तानी रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। यह स्पष्ट करता है कि इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए पड़ोसी देशों ने भी कड़े कदम उठाए हैं।
भारत में मौजूदा कानूनी ढांचा
POCSO अधिनियम: बाल यौन शोषण से संबंधित अपराधों के लिए मुख्य कानून।
IT अधिनियम 2000: इस अधिनियम की धारा 67 और 67A के तहत अश्लील सामग्री का निर्माण, प्रकाशन, या वितरण दंडनीय है।
भारतीय दंड संहिता (IPC): IPC की धारा 292, 293, 500, और 506 इस तरह के अपराधों को नियंत्रित करने में सहायक हैं।
यह सुप्रीम कोर्ट का फैसला डिजिटल युग में बाल सुरक्षा को लेकर एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। बच्चों के खिलाफ हो रहे ऑनलाइन अपराधों पर सख्त कार्रवाई करने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी, और यह निर्णय इस दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल कानूनी प्रावधानों में स्पष्टता आएगी, बल्कि समाज में बाल सुरक्षा को लेकर एक नई जागरूकता भी विकसित होगी।
हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि इस फैसले को जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाए। कानून बनाने भर से समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए सरकार, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, और समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा। बच्चों की सुरक्षा के प्रति एक समर्पित और ठोस प्रयास ही इस कानून को सफल बना सकेगा।
यह निर्णय हमें यह भी याद दिलाता है कि डिजिटल युग में बाल सुरक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें मिलकर एक ऐसा समाज बनाना होगा, जहां हर बच्चा सुरक्षित, खुशहाल और अपने भविष्य के प्रति आश्वस्त हो सके। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है।
चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखना या डाउनलोड करना POCSO के तहत अपराध माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी की जगह ‘चाइल्ड सेक्शुअल एक्सप्लॉइटेटिव एंड एब्यूसिव मटेरियल’ शब्द का इस्तेमाल किया जाए. केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर इसमें बदलाव करे. अदालतें भी चाइल्ड पोर्नोग्राफी शब्द का इस्तेमाल न करें। -

पूर्व पार्षद सुनील अग्रवाल व नगर पालिका सूरजपुर के अधिकारी वासुदेव चौहान एवं उप यंत्री श्रीमती ओटा फफूल्ला के विरुद्ध एफआईआर दर्ज…
सूरजपुर। डॉ डी०के० सोनी अधिवक्ता एवं आईटीआई कार्यकर्ता के द्वारा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सूरजपुर के न्यायालय में सुनील अग्रवाल पूर्व पार्षद के रूप के विरुद्ध धारा 156(3) दंड प्रकरण संहिता के तहत मय दस्तावेजों के आवेदन प्रस्तुत किया गया था जिसमें यह उल्लेख किया गया था कि सुनील अग्रवाल जो वर्ष 2013 में नगर पालिका परिषद सूरजपुर के निर्वाचित पार्षद थे के द्वारा ठेकेदार के रूप में वार्ड क्रमांक 13 बाडका पारा रोड से हार्ट बाजार तक सीसी रोड निर्माण का कार्य कराया गया था जिसकी शिकायत कलेक्टर सूरजपुर से की गई थी
जिसमें जांच में यह पाया गया कि सुनील अग्रवाल के द्वारा निर्माण कार्य में अनियमितता बरती गई है तथा जिस तरह का कार्य कराया थावह नहीं कराया गया एवं बिना कार्य कराए ही 2,27,882/- रुपए का भुगतान प्राप्त कर लिया गया है जिसके संबंध में माननीय कलेक्टर सूरजपुर के न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 01/अ-89/13-14 शासन प्रति सुनील अग्रवाल चला था जिसमें शासकीय राशि का गबन प्रमाणित पाया गया था जिसके आधार पर सुनील अग्रवाल को छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 41(3) के अंतर्गत नगर पालिका परिषद या नगर पंचायत का आगामी अवधि अर्थात आदेश दिनांक से 5 वर्षों के लिए पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए अपात्र कर दिया गया।
कलेक्टर के उपरोक्त आदेश से यह प्रमाणित हो गया कि ठेकेदार सुनील अग्रवाल पार्षद के द्वारा लोक सेवक होने के बाद भी वार्ड क्रमांक 13 में निर्मित सीसी सड़क बड़का पारा रोड से हार्ड बाजार तक के सीसी रोड निर्माण कार्य में कुल 2,27,882/- रुपए को बिना कार्य कराए फर्जी दस्तावेज तैयार कर एवं फर्जी बिल निकाल कर तथा फर्जी मूल्यांकन कराकर पूर्वी राशि सुनील अग्रवाल द्वारा ले लिया गया जो की स्पष्ट रूप से अपराधिक कृत्य में आता है तथा फर्जी दस्तावेज तैयार करने, कूट रचना करने तथा शासकीय राशि आहरण करने के संबंध में अपराधिक कृत्य किया गया है जो धारा 409, 420, 467, 468 भा०द०वि० के तहत दंडनीय अपराध है जिसके कारण सुनील अग्रवाल के विरुद्ध शासकीय राशि का गबन फर्जी दस्तावेज के आधार पर करने के संबंध में प्रथम सूचना पत्र दर्ज कराए जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था।सुनील अग्रवाल के द्वारा नगर पालिका परिषद के निर्वाचित पार्षद पद पर होने के बाद भी ठेकेदार का कार्य किया गया तथा फर्जी दस्तावेज तैयार का शासकीय राशि का आहरण किया उक्त शासकीय राशि आहरण करने के संबंध में तथा अन्य निर्माण कार्यों में गुणवत्ता तथा तकनीकी की जांच रिपोर्ट कलेक्टर सूरजपुर के समक्ष दिनांक 27/9/2013 को प्रस्तुत किया गया था इसमें यह उल्लेख किया गया है कि सुनील अग्रवाल के द्वारा निर्माण कार्यों में काफी गड़बड़ी की है जिसके लिए सुनील अग्रवाल दोषी है।
उपरोक्त जांच प्रतिवेदन एवं दस्तावेज से यह प्रमाणित होता है कि सुनील अग्रवाल के द्वारा फर्जी दस्तावेज के माध्यम से शासकीय राशि का गबन किया है जो की अपराधिक कृत्य है तथा अपराध अंतर्गत धारा 409,420 ,467, 468 भा०द०वि० के तहत दंडनीय है। जिसके लिए प्रथम सूचना पत्र दर्ज कराए जाने हेतु दिनांक 14/2/2024 को थाना प्रभारी सूरजपुर को आवेदन लिखा गया जिसमें किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने के कारण दिनांक 27/3/2024 को पुलिस अधीक्षक सूरजपुर के समक्ष प्रथम सूचना पत्र दर्ज कराए जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया जिसमें किसी भी प्रकार के कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण माननीय मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सूरजपुर के न्यायालय 156(3) दंड प्रकरण संहिता का आवेदन प्रस्तुत किया गया था जिस पर न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सूरजपुर श्री डी.एस. बघेल के द्वारा सुनवाई करने के उपरांत एवं प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद दिनांक 3/9/2024 को आदेश पारित करते हुए सुनील अग्रवाल के विरोध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज का अन्वेषण करते हुए शीघ्र अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया।जिसके आधार पर थाना सूरजपुर के द्वारा अपराध क्रमांक 531/2024 अंतर्गत धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी, 34 भा.द.वि. के तहत सुनील अग्रवाल व नगर पालिका सूरजपुर के अधिकारी वासुदेव चौहान एवं उप यंत्री श्रीमती ओटा फफुल्ला टोप्पों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
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दिल्ली में आर एस एस का आधुनिक भवन तैयार….
देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नया आधुनिक कार्यालय तकरीबन बन कर निर्मित हो गया है। दिल्ली में संघ के पूराने कार्यालय झंडेवालान को गिराकर 2.5 एकड़ भूमि पर बनायेंगे संघ के कैशवकुंज में बहुमंजिला तीन टावर ओर आने-जाने के लिए 12-13- लिफ्ट है। टावर के प्रवेश द्वार पर एक एक्सरे मशीन,स्वागत कक्ष बनाया गया है। अति आधुनिक ओर नागापुर मुख्यालय से काफी बड़े तीन टावर वाले दिल्ली संघ कार्यालय केशव कुंज में,संघ के अनुषांगिक संगठनों के कार्यालय,स्वागत कक्ष के पास हनुमान मंदिर,संघ गणवेश सामग्री वितरण के लिए भंडार केन्द्र,20 बैंड का अस्पताल,सभी सामान्य बीमारियों की जांचो के लिए आधुनिक मंशीनो वाली पैथोलॉजी लेब,अतिथि आवास बनाया गया है। समाचार पत्र ऑर्गनाइजर,पांचजन्य के आफिस सहित प्रकाशन विभाग,एक विश्व संवाद विभाग है। केशव कुंज प्रांगण में एक साथ तकरीबन 200 गाड़ियों के पार्किंग की व्यवस्था की गई है। दिल्ली संघ कार्यालय केशव कुंज की सूरक्षा का जिम्मा सीआईएसएफ के जिम्मे सौंपने के संकेत मिले है।
दिल्ली में संघ के केशव कुंज में 12 मंजिला पहली टावर में 80-90 कमरे,12फ्लोर,प्रत्येक फ्लोर 7-8 कमरों का निर्माण किया गया है। राजस्थानी शैली में निर्मित किए दूसरा टावर 4 मंजिला है। दूसरे टावर के एक फ्लोर में संघ सरसंघचालक मोहन भागवत का आवास,अन्य फ्लोर में संघ के बड़े राष्ट्रीय पदाधिकारियों के। संघ केशव कुंज के दूसरे से तीसरे टावर के बीच एक बड़ा मैदान,उसमें संघ स्थापक केशव बलिराम हेडगेवार की मूर्ति स्थापित की गई है। जिसे संघ स्थान का नामकरण किया गया है।