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अयोध्या फैसला: रुद्रपुर में आपत्तिजनक पोस्ट पर भाजपा पार्षद गिरफ्तार
राम मंदिर मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आपत्तिजनक पोस्ट करने पर पुलिस ने उत्तराखंड में रुदुपुर के भाजपा पार्षद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपी को देर शाम गिरफ्तार कर लिया गया। देर रात तक पार्षद से पूछताछ जारी थी। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार सुबह अयोध्या पर अपना फैसला जारी किया। जानकारी के अनुसार रुद्रपुर के भाजपा से जुड़े ट्रांजिट कैंप निवासी नगर निगम रुद्रपुर के पार्षद शिवकुमार गंगवार ने फैसला आने के बाद सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक पोस्ट डाल दी। खुफिया विभाग को इसकी जानकारी मिली तो टीम ने गोपनीय तरीके से इसकी जांच की। जांच के बाद खुफिया टीम ने एसएसपी बरिंदरजीत सिंह को जानकारी दी। एसएसपी के निर्देश पर एक बार फिर पुलिस के स्तर पर जांच करायी गयी।जांच में पुष्टि होने के बाद देर शाम ट्रांजिट कैंप थाना पुलिस ने पार्षद गंगवार को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। थाना प्रभारी वीडी जोशी ने बताया कि पार्षद गंगवार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बताया कि उनसे पूछताछ की जा रही है। काशीपुर में भी एक युवक पर मुकदमाकाशीपुर। सोशल मीडिया पर गलत पोस्ट डालने पर पुलिस ने एक युवक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। कोतवाल चंद्रमोहन सिंह ने बताया कि आईटीआई थाना क्षेत्र के ग्राम गिन्नी खेड़ा निवासी पुष्प कुमार ने फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट की थी। बताया कि पुलिस की खुफिया टीम सोशल मीडिया पर लगातार नजर रखे हुये है। टीम की ओर से मामले की जांच की गयी, जिसके बाद आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। उसकी तलाश की जा रही है। -

व्हाट्सएप से जासूसी की जांच के लिए भूपेश सरकार ने बनाई कमेटी, CM बोले- ‘नागरिकों की निजता को सुरक्षित रखना मेरी जिम्मेदारी
रायपुर। इजराइली खुफिया साइबर कंपनी एनएसओ के बनाए पेगासस साफ्टवयेर के जरिए राज्य के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी कराए जाने के मामले को सरकार ने गंभीरता से लिया है. भूपेश सरकार ने इसकी जांच के लिए कमेटी का गठन किया है. चर्चा यह भी है कि रमन सरकार के दौरान इजराइली कंपनी एनएसओ ने राज्य के आला अधिकारियों के सामने साॅफ्टवेयर के जरिए जासूसी कराए जाने को लेकर प्रेजेंटेशन दिया था. कमेटी इस दिशा में भी जांच करेगी कि क्या पिछली सरकार में इस तरह से जासूसी कराई गई थी या नहीं?
गृह सचिव सुब्रत साहू के नेतृत्व में बनाई गई जांच कमेटी में रायपुर रेंज के आईजी आनंद छाबड़ा और जनसंपर्क आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा शामिल हैं. यह कमेटी एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी. बता दें कि छत्तीसगढ़ के चार मानवाधिकार-सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया, शालिनी गेरा, डिग्री प्रसाद चौहान तथा आलोक शुक्ला के व्हाट्स एप के जरिए जासूसी कराए जाने की खबरें सामने आई थी. सरकार ने अब इसकी जांच कराए जाने का फैसला लिया है. जांच के लिए कमेटी गठित किए जाने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर कहा है कि-

गौरतलब है कि पिछले महीने ही यह खबर सामने आई थी कि व्हाट्स एप के जरिए कई भारतीय पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की जासूसी कराई गई. यह जासूसी इजराइल की साइबर फर्म एनएसओ के बनाए साॅफ्टवेयर पेगासस के जरिए की गई. यह जासूसी लोकसभा चुनाव के दौरान हुई थी. इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया था. व्हाट्स एप ने भी बयान जारी कर यह कहा था कि 29 अप्रैल से 10 मई के बीच यह जासूसी की गई थी.
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महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश पर कैबिनेट की मुहर..! सुप्रीम कोर्ट गई शिवसेना
महाराष्ट्र का राजनीतिक संकट सुलझता नहीं दिख रहा। यहां गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी ने NCP को सरकार बनाने का न्योता दिया है। पार्टी के पास मंगलवार शाम साढ़े आठ बजे तक का वक्त दिया है लेकिन अब खबर आ रही है कि गवर्नर ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की है। 20 दिनों से यहां सरकार बनाने की कोशिश चल रही है लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट हल नहीं दिख रहा, ऐसे में क्या सच में इस अहम राज्य के सामने राष्ट्रपति शासन का ही रास्ता बच गया है?
खबर के मुताबिक, गवर्नर ने केंद्र सरकार को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने का सुझाव भेज दिया है। गवर्नर ने अपने रेकेमेंडेशन में कहा है कि राज्य में कोई भी पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है, ऐसे में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना ही एक विकल्प है। सिफारिश भेजने के बाद गवर्नर आज शाम तक का इंतजार करेंगे, अगर एनसीपी तब तक बहुमत साबित नहीं कर पाती है तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाएगा। इसे लेकर प्रधानमंत्री के निवास पर कैबिनेट की इमरजेंसी मीटिंग हुई है, जिसमें सिफारिश को अप्रूव कर दिया गया है।
शिवसेना ने इस सिफारिश पर आपत्ति जताई है। पार्टी की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्विटर पर सवाल किया है कि जब एनसीपी को अभी वक्त दिया गया है, तो ऐसे में गवर्नर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश केंद्र के पास कैसे भेज सकते हैं?शिवसेना इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। पार्टी ने सिफारिश के खिलाफ एक याचिका दाखिल की है। शिवसेना ने याचिका में दलील दी है कि उसे समर्थन पत्र पेश करने के लिए 72 घंटों का वक्त नहीं दिया गया है, उसके पास बस 24 घंटों का वक्त था।
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जिला अस्पताल के डॉक्टर पर रेप का आरोप
जांजगीर-चांपा। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. पीएस कुर्रे पर अनाचार का सनसनीखेज आरोप लगा है। जिसने यह आरोप लगाया है वह कोई और नहीं, बल्कि डॉक्टर की एक रिश्तेदार महिला है। मामले में सारागांव पुलिस ने आरोपी डॉक्टर को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
पीडि़ता ने पुलिस को बताया कि आरोपी डॉक्टर ने उसके घर आकर उसके साथ जबरदस्ती करते हुए शारीरिक संबंध स्थापित किया, जबकि साल भर पहले भी उसी चिकित्सक ने रिश्तेदार महिला के साथ रेप किया था। पीडि़ता ने मामले की जानकारी अपने परिजनों को दी और उसने थाना पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी चिकित्सक के खिलाफ धारा 450, 376 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।
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DSP पुष्पेंद्र बघेल का आदेश संशोधित……रायगढ़ ट्रैफ़िक डीएसपी होंगे
रायपुर। बीजापुर में स्थानांतरित किए गए डीएसपी पुष्पेंद्र बघेल का आदेश संशोधित हो गया है। पुष्पेंद्र बघेल को रायगढ़ ट्रेफिक डीएसपी के पद पर भेजा गया है।
पुष्पेंद्र इसके पहले अंबिकापुर और कोरबा में पदस्थ रह चुके हैं।हालिया हुए डीएसपी स्थानांतरण में पुष्पेंद्र बघेल को बीजापुर भेजा गया था।
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लाउडस्पीकर और DJ को लेकर सरकार सख्त, वॉल्यूम लिमिट उपकरण लगाना अनिवार्य
रायपुर। लाउडस्पीकर, डीजे और दूसरे ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर अब वॉल्यूम लिमिट उपकरण (ध्वनि नियंत्रक) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। वॉल्यूम लिमिट यंत्र के बिना किसी भी तरह के ध्वनि विस्तारक यंत्र न बेचे जा सकेंगे और न ही किराए पर दिए जा सकेंगे। इसके लिए प्रदेश सरकार के पर्यावरण विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है।
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 के अंतर्गत ध्वनि प्रदूषण के प्रभावी नियंत्रण के लिए सभी ध्वनि प्रणाली या लोक संबोधन प्रणाली में ध्वनि सीमक का उपयोग तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इस नियम का पालन ध्वनि विस्तारक यंत्र बनाने वाली कंपनियों, बेचने वाली एजेंसियों और दुकानदारों को करना है। उन्हें ध्वनि सीमक उपकरण का उपयोग किए बिना किसी भी तरह के ध्वनि विस्तारक यंत्र को बेचना, खरीदना, किराए पर देना या खुद उपयोग में नहीं लाना है। ध्वनि सीमक को लगाने से ध्वनि विस्तारक यंत्रों की आवाज एक निर्धारित डेसिबल में बंध जाएगी। उससे ज्यादा ध्वनि नहीं बढ़ाई जा सकेगी।
सरकारी एजेंसियों को मिली जिम्मेदारीध्वनि विस्तारक यंत्रों में ध्वनि सीमक उपकरणों का उपयोग सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पुलिस प्राधिकारी, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और पंचायतों को जिम्मेदारी दी गई है। इन्हें यह भी सुनिश्चित करना है कि सरकारी और गैर सरकारी कार्यक्रमों में बिना ध्वनि सीमक उपकरण लगे ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग न हो पाए।

90 डेसिबल से ज्यादा नुकसानदायक
मानव जाति के लिए 90 डेसिबल से ज्यादा ध्वनि नुकसानदायक होती है। आठ घंटे से ज्यादा इतनी ध्वनि पर भी शोर सुनना घातक होता है।
ज्यादा ध्वनि से पड़ता है प्रतिकूल प्रभाव
कई शोधों से पता चला है कि ध्वनि प्रदूषण के कारण श्रवण क्षमता कम हो रही है। इसके अलावा अनिंद्रा, उच्च रक्तचाप, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव की शिकायतें भी बढ़ी हैं।
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ढाई साल में पूरा हो सकता है राम मंदिर का निर्माण हो चुकी है आधी तैयारी
दिल्ली। राम मंदिर निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अब इसके स्थापत्य को लेकर उत्सुकता जागी हैं।
इसकी तैयारियां 90 के दशक यानी करीब 30 साल पहले से ही आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई ने शुरू कर दी थी। उन्होंने ऐसा विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंघल के साथ किया उनका दावा है कि, निर्माण के लिए अगर दो हजार कारीगर लगाए जाते हैं तो इसे ढाई साल में पूरा बनाया जा सकता है। निर्माण के लिए करीब 100 करोड रुपए के खर्च का आकलन किया गया है। गुजरात के रहने वाले चंद्रकांत सोमपुरा का परिवार पीढ़ियों से मंदिर ड्राइंग कर रहा है, उन्हीं के परिवार ने सोमनाथ मंदिर डिजाइन किया था, वहीं लंदन में स्वामीनारायण मंदिर केवल 2 साल में तैयार करवाया था। चंद्रकांत के मुताबिक उन्होंने 6 महीने में 6 किस्म के डिजाइन पर काम करते हुए राम मंदिर का नागर शैली मॉडल तैयार किया था। भारत में नागर, द्रविड़ और बेसर शैली में मंदिर का निर्माण होता है। उत्तर भारत में नागर शैली प्रसिद्ध है। मंदिर के लिए 50 फीसदी काम पूरा हो चुका है,इसके गुंबद को अभी डिजाइन किया जा रहा है।

निर्माण में नहीं होगा लोहे का इस्तेमाल
राम मंदिर के निर्माण में लोहे का इस्तेमाल नहीं होगा इसकी वजह स्थापत्य को पत्थरों के जरिए मंदिरों को मजबूती देना बताई जाती है। वही भगवान राम की प्रतिमा और राम दरबार का निर्माण होगा मुख्य मंदिर में सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और भगवान गणेश की प्रतिमाएं भी उनके इर्द-गिर्द होंगी।
स्थापत्य की खासियत कुछ ऐसी होंगी
इसे डेढ़ सौ फुट चौड़ा, 270 फुट लंबा, और 270 फुट, ऊंचा गुंबद आकार में रचा जाएगा
इसमें सिंहद्वार नृत्य मंडप रंग मंडप कोली गर्भगृह के सुंदर प्रवेश द्वार होंगे
फर्श पर संगमरमर का इस्तेमाल होगा बाकी निर्माण पत्थर भरतपुर से लाए जाएंगे
मंदिर आधार से शिखर तक चार कोण का, और गर्भगृह आठ कोण का होगा,परिक्रमा वृत्ताकार होगी।
मॉडल दो मंजिला है, भूतल पर मंदिर और ऊपरी मंजिल पर राम दरबार होगा।
मंदिर में 221 स्तम्भ होंगे हर एक पर देवी-देवताओं की बारह आकृतियां बनी होंगी।
मंदिर में ही संत निवास, शोध केंद्र, कर्मचारी आवास, भोजनालय, आदि भी होगा।
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अब कृति सेनन की बहन नूपूर के साथ रोमांस करेंगे सुशांत सिंह राजपूत?
एक लेटेस्ट रिपोर्ट की मानें तो सुशांत सिंह राजपूत अपनी अगली फिल्म में एक्स-गर्लफ्रेंड कृति सेनन की बहन नूपुर सेनन के साथ नजर आने वाले हैं। ऐसा कहा जा रहा है सुशांत सिंह राजपूत और नूपुर सेनन ने एक फिल्म पर चर्चा करने के लिए साजिद नाडियावाला से मुलाकात की है। अगर सबकुछ सही रहा तो जल्द फिल्ममेकर दोनों को लेकर एक लव स्टोरी पर बेस्ड फिल्म बनाएंगे। हालांकि फिल्म से जुड़ी जानकारी शुरुआती स्टेज पर है लेकिन इन दोनों ऐक्टर्स फिल्म में एक साथ आना तय है।जहां एक तरफ सुशांत सिंह राजपूत अपनी दमदार ऐक्टिंग से लोगों को प्रभावित किया है, वहीं दूसरी तरफ नूपुर सेनन फिल्मी दुनिया में नई हैं। नूपुर सेनन अक्षय कुमार के साथ एक म्यूजिक विडियो में नजर आएंगी। बता दें कि फिल्म राब्ता की शूटिंग के दौरान सुशांत सिंह राजपूत और कृति सेनन एक दूसरे के साथ सीरियस रिलेशनशिप में रहे हैं। हालांकि जल्द ही कुछ मतभेदों के कारण उनका ब्रेकअप हो गया था।दोनों ऐक्टर्स के वर्कफ्रंट की बात करें तो सुशांत सिंह राजपूत आखिरी बार श्रद्धा कपूर के साथ फिल्म छिछोरे में नजर आए थे। वहीं, कृति सेनन मल्टीस्टारर फिल्म हाऊसफुल 4 में दिखाई दी थीं। -

मोबाइल नंबर पोर्टिबिलिटी के नए नियमों पर 11 नवंबर से नहीं होगा अमल, ट्राई ने फैसला टाला
दिल्ली। मोबाइल नंबर पोर्टिबिलिटी (एमएनपी) के संशोधित नियम फिलहाल 11 नवंबर से प्रभावी होने नहीं जा रहे हैं। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने तकनीकी दिक्कतों के चलते इस समयसीमा को आगे के लिए टाल दिया है। ट्राई ने कहा कि नयी तारीख जल्द अधिसूचित की जाएगी। ऐसे में मोबाइल नंबर पोर्टिबिलिटी अभी मौजूदा नियमों के अनुसार ही होगी। साथ ही इसमें चार से 10 नवंबर के दौरान कोई व्यवधान भी नहीं होगा। ट्राई ने कहा कि नयी प्रक्रिया को इस्तेमाल में लाने से पहले ठीक तरह से पड़ताल करना अपरिहार्य है ताकि ग्राहकों को बाद में प्रक्रिया से जुड़ी कोई दिक्कत नहीं हो। एमएनपी के नियम संशोधित करने का मकसद पूरी प्रक्रिया को आसान और तेज करना है। नए नियमों के तहत एक ही सर्किल में नंबर एमएनपी कराने के लिए दो दिन की समयसीमा तय की गयी है। पहले यह समय सीमा सात दिन थी।
नियामक ने मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी नियमनों में इन ताजा बदलावों को दिसंबर 2018 में जारी किया था। इन नियमनों और उसके बाद जारी अधिसूचनाओं के मुताबिक एमएनपी की संशोधित प्रक्रिया को 11 नवंबर से अमल में आना था।बहरहाल, ट्राई ने कहा, ‘यह महसूस किया गया कि जो समयसीमा बताई गई है दूरसंचार आपरेटरों और एमएनपी सेवा प्रदाताओं के स्तर पर कुछ तकनीकी मुद्दों को देखते हुये उसका पालन नहीं किया जा सकता है।’ इस लिहाज से दूरसंचार मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (सातवां संशोधन) नियमन 2018 के क्रियान्वयन को आगे के लिए टालने की जरूरत है।
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क्षेत्र में पनप रहा है प्रतिबंधित दवा कोरेक्स का कारोबार
₹800 में बिक रही प्रतिबंधित सिरप
कोटरीमाल बना नशे के सौदागरों का गढ़
घरघोड़ा। जिलेभर में हो रही नशीली प्रतिबंधित दवाइयों के सौदागरो के ऊपर कार्यवाही से जहां एक ओर पुलिस शहरी क्षेत्र में नशीली दवाओं पर कार्यवाही कर अपनी पीठ थपथपाने में लगी है वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में नशे के सौदागरों में भय व्याप्त होने के बजाय वह ज्यादा से ज्यादा नशीली दवाएं बेच कर लाभ कमाने की जुगत में लगे हुए हैं । जैसा की सर्वविदित है की घरघोड़ा एवं आसपास के क्षेत्र में नशीली दवाओं के जकड़ में कुछ युवा पीढ़ी हैं इसलिए शहरी क्षेत्रों में नशीली दवाओं के सौदागरों पर कार्यवाही के बाद शहरी क्षेत्रों में अवैध नशीली दवाइयों की उपलब्धता समाप्त होने से इन ग्रामीण क्षेत्रों में नशीली दवाओं के कारोबार को और बल मिल गया है।
सूत्रों से पता चला है कि कोटरी माल ग्राम के आसपास क्षेत्रों में नशीली सिरप एवं दवाइयों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है बताया जाता है कि नशे वाली कोडीनयुक्त सिरप ₹800 से ₹1000 तक में बिक रही है इससे समझा जा सकता है कि नशे के मकड़जाल में उलझे लोगों से किस कदर मोटी कमाई का नया रास्ता लोगों ने निकाल लिया है बहरहाल शहरी क्षेत्रों में कार्यवाही कर अपनी पीठ थपथपा रही पुलिस को इन ग्रामीण क्षेत्रों कि और भी अपनी नजरें इनायत करनी चाहिए ताकि नशे के कारोबार के समूल को नष्ट किया जा सके ।
नशा देता है अपराध को जन्म
यह सोचने वाली बात है प्रतिबंधित सिरप यदि 800 से ₹1000 तक में बिक रही है तो इसके सेवन के आदी बेरोजगार युवाओं में अपराध की प्रवृत्ति पनपने का यह सुअवसर होगा ।
निश्चित तौर पर हजार रुपए तक के महंगे नशे को करने के लिए शॉर्टकट रास्ते के चक्कर में अपराध की ओर नशे के आदी लोगो के बढ़ने की संभावना बलवती हो जाती है । जरूरत है कि कानून शहर से ग्रामीण क्षेत्रों तक फैले इस नशे के मकड़जाल को पूरी तरह ध्वस्त करें ताकि क्षेत्र के वर्तमान और भविष्य में नशे का बदनुमा दाग ना लगे।