Blog

  • अब ‘गाय’ पहनेगी ‘कोट’…

    अब ‘गाय’ पहनेगी ‘कोट’…

    दिल्ली। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या के नगर निगम ने एक नई पहल की है. जिसका स्वागत और विरोध दोनों किया जा रहा है. ये पहल गायों को ठंड से बचाने को लेकर है.नगर निगम गायों को ठंड और शीतलहर से बचाने के लिए काऊ कोट पहनाएगी. जिसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है. नगर आयुक्त ने बताया कि गायों को ठंड से बचाने के लिए गोशाला को ‘काऊ कोट’  दिये जा रहे हैं।

    एक कोट की कीमत 300 रुपए के आसपास होगी

     तीन लेयर वाला ये कोट तीन परतों से बना होगा. पहले मुलायम कपड़ा होगा, उसके बाद फोम होगा फिर जूट लगाकर इसे बनाया जाएगा. पहले 100 गायों के लिए इसे लाया जाएगा. फिर धीरे धीरे सभी गायों को ये पहनाया जाएगा. अयोध्या के महापौर ऋषिकेष उपाध्याय ने कहा कि, गो माता की सेवा को लेकर हम कटिबद्ध हैं. उसके लिए हर मुमकिन कदम हम उठाएंगे।

  • केन्द्र सरकार ने कहा आधार और सोशल मीडिया प्रोफाइल को जोडऩे का कोई प्रस्ताव नहीं…सुप्रीम कोर्ट पहले ही कर चुकी है खारिज…आईटी डिपार्टमेंट तलाशेंगे समस्या का हल…

    केन्द्र सरकार ने कहा आधार और सोशल मीडिया प्रोफाइल को जोडऩे का कोई प्रस्ताव नहीं…सुप्रीम कोर्ट पहले ही कर चुकी है खारिज…आईटी डिपार्टमेंट तलाशेंगे समस्या का हल…

    दिल्ली। लोकसभा में केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधार और सोशल मीडिया प्रोफाइल को जोडऩे का कोई प्रस्ताव नहीं है। इससे पहले बीते अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया अकाउंट को आधार कार्ड से लिंक करने की याचिका को खारिज कर दिया था।दरअसल सोशल मीडिया से आधार को लिंक करने का मामला लंबे वक्त से चर्चा में हैं। इसके पीछे दावा किया जाता रहा है कि इससे फेक न्यूज और पेड न्यूज पर लगाम लगेगी।

    लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस संबंध में पड़ी एक याचिका को खारिज कर दिया था।बीजेपी नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि आधार से सोशल मीडिया अकाउंट्स जोड़े जाने से डुप्लीकेट, फेक और घोस्ट अकाउंट पर लगाम कसा जा सकेगा।

    इससे पहले फेसबुक, ट्विटर समेत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को आधार से लिंक मामले को लेकर हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि हमने सुना है कि सरकार सोशल मीडिया लिंकिंग को लेकर गाइडलाइन लेकर आ रही है।यह बहुत जरूरी है, लेकिन निजता का भी ख्याल रखा जाना चाहिए। जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच मामले की सुनवाई की थी। जस्टिस गुप्ता ने कहा था कि कोर्ट के साथ सरकार और आईटी डिपार्टमेंट भी इसे देखे और समस्या का हल तलाशे।

  • CM के निज सचिव अजीत मढ़रिया की छु्ट्टी…भेजा मूल विभाग में…जारी हुआ आदेश

    CM के निज सचिव अजीत मढ़रिया की छु्ट्टी…भेजा मूल विभाग में…जारी हुआ आदेश

    रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निज सचिव अजीत मढ़रिया (बजरंगी) को हटा दिया गया हैं। निजी स्थापना में पदस्थ मढ़रिया को उनकी सेवाएं मूल विभाग पीडब्ल्यूडी को लौटा दी गई हैं, जहां वह सहायक ग्रेड तीन के पद पर कार्यरत थे। सीएम के करीबी माने जाने वाले अजीत को हटाए जाने के बाद कई तरह की चर्चाएं होने लगी हैं।
  • अब कलेक्टर देंगे 7500 वर्गफुट कब्जे वाली भूमि का पट्टा,छत्तीसगढ़ में 30 वर्षीय पट्टा देने के नियम में हुआ संसोधन….

    अब कलेक्टर देंगे 7500 वर्गफुट कब्जे वाली भूमि का पट्टा,छत्तीसगढ़ में 30 वर्षीय पट्टा देने के नियम में हुआ संसोधन….

    रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ राजस्व पुस्तक परिपत्र के खण्ड-4 (1) एवं 4(2) में उल्लेखित प्रावधानों में आंशिक संशोधन किया है। संशोधन में नगरीय क्षेत्रों में अतिक्रमित शासकीय भूमि के व्यवस्थापन और वार्षिक भू-भाटक निर्धारण/वसूली के संबंध में निर्देश जारी किया गया है। जिले में शासकीय भूमि का आबंटन व नियमितीकरण के 3 हजार 240 प्रकरण संभावित है। जिसका कुल रकबा 136.46 हेक्टेयर एवं बाजार मूल्य लगभग 99.66 करोड़ है। जारी संशोधन के अनुसार केन्द्र व राज्य सरकार के विभागों, निगम, मण्डल, आयोग को भू आंबटन का अधिकार कलेक्टर को होगा। इसके अलावा साढ़े सात हजार वर्गफुट तक 30 वर्षीय पट्टा आबंटन तथा अतिक्रमित शासकीय भूमि के व्यवस्थापन भी कलेक्टर कर सकेगें। साढ़े सात हजार वर्गफुट से अधिक भूमि का पट्टा देने या व्यवस्थापन का अधिकार राज्य सरकार को होगा। अन्य परिस्थितियों में भी व्यवस्थापन एवं पट्टे का अधिकार राज्य सरकार को होगा। लोकबाधा, स्वास्थ्य सुरक्षा, लोक प्रयोजन, पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से सुरक्षित रखने की आवश्यकता न होने पर पट्टा आंबटन अथवा व्यवस्थापन किया जा सकेगा। इसके अलावा नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा अधिसूचित विकास प्रयोजन के अनुरूप होने पर ही व्यवस्थापन अथवा पट्टा आंबटन की जा सकेगी। राज्य शासन के क्षेत्राधिकार के मामले में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री की अध्यक्षता में गठित अंतर्विभागीय समिति की अनुशंसा पर यह आदेश राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी किया जाएगा। आंबटन अथवा पट्टा आबंटन में नोइयत में परिवर्तन की आवश्यकता होने पर छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 237 के प्रावधान के अनुसार नोइयत में परिवर्तन पहले किया जाएगा। भूमि आबंटन एवं व्यवस्थापन के समय प्रब्याजी एवं वार्षिक भू-भाटक के निर्धारण के संबंध में भी निर्देश जारी किया गया है। जारी निर्देश के अनुसार अतिक्रमित शासकीय भूमि के व्यवस्थापन के समय प्रचलित गाइड लाइन की 150 प्रतिशत प्रब्याजी की गणना की जाएगी। इसी प्रकार नगरीय क्षेत्रों में व्यवसायिक प्रयोजन के भूखण्ड आंबटन प्रचलित गाइड लाइन की दर से 25 प्रतिशत किया जाएगा। व्यवसायिक भू आंबटन में दो से अधिक आवेदन मिलने पर नीलामी के माध्यम से अधिक बोली वाली संस्था या व्यक्ति को आबंटित होगा। अन्य परिस्थितियों में राजस्व पुस्तक परिपत्र के खण्ड-4 (1) एवं 4(2) के प्रचलित प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा। भूमि स्वामी और पट्टेदार द्वारा निर्धारित 15 वर्ष का भू-भाटक एक मुश्त जमा करता है तो, उसे 15 वर्ष (16 वें वर्ष से 30वें वर्ष तक) तक के भू-भाटक में छूट दी जाएगी। निर्देश के अनुसार 20 अगस्त 2017 के पूर्व अतिक्रमित शासकीय भूमि का व्यवस्थापन कलेक्टर द्वारा किया जा सकेगा। इसके लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है। इसमे नगर तथा ग्राम निवेश के सहायक संचालक एवं नगरीय निकाय के अधिकारी का सदस्य बनाया गया है।
  • भ्रष्टाचार के 9 बड़े मामलों में बंद हुई जांच,BJP के साथ आते ही अजित पवार हो गये पाक साफ? सिंचाई घोटाले में मिली बड़ी राहत

    भ्रष्टाचार के 9 बड़े मामलों में बंद हुई जांच,BJP के साथ आते ही अजित पवार हो गये पाक साफ? सिंचाई घोटाले में मिली बड़ी राहत

    मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को सिंचाई घोटाले में बड़ी राहत मिली है. अजित पवार के खिलाफ सिंचाई घोटाले के 9 मामलों को बंद कर दिया गया है. एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) सूत्रों के मुताबिक, सिंचाई घोटाले से संबंधित 3000 प्रोजेक्ट्स जांच के घेरे में हैं और इनमें से 9 मामलों को सबूतों के अभाव में बंद कर दिया गया है. अभी तक जिन टेंडर की जांच की गई है, उनमें एसीबी को अजित पवार के खिलाफ कुछ भी नहीं मिला है।
    महाराष्ट्र ऐंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक परमबीर सिंह ने बताया कि जिन भी मामलों को आज बंद किया गया है उनमें से कोई भी महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार से संबंधित नहीं है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने अजित पवार के खिलाफ दर्ज 70 हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले में 9 केस बंद कर दिए हैं. हालांकि सिंचाई घोटाले में अभी भी 11 केस दर्ज हैं. महाराष्ट्र में करीब 70 हज़ार करोड़ के सिंचाई घोटाले में अजित पवार आरोपी थे. उपमुख्यमंत्री बनने के 48 घंटों के भीतर ही अजित पवार से जुड़े कुछ मामले बंद हुए हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले मामलों की सूची में कोई भी मामला महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पवार के खिलाफ कथित रूप से सिंचाई भ्रष्टाचार के मामले से संबंधित नहीं है. ब्यूरो के सूत्रों का कहना है कि जो मामले बंद थे वे सशर्त थे. यदि मामले में अधिक जानकारी प्रकाश में आती है या अदालतें आगे की जांच का आदेश देती हैं. ब्यूरो के महानिदेशक, परमबीर सिंह ने कहा कि हम सिंचाई संबंधी शिकायतों में लगभग 3000 निविदाओं की जांच कर रहे हैं. ये नियमित पूछताछ हैं जो बंद हैं और सभी चल रही जांच जारी है।
  • SC से बड़ा झटका, फडणवीस सरकार को 30 घंटे में साबित करना होगा बहुमत…

    SC से बड़ा झटका, फडणवीस सरकार को 30 घंटे में साबित करना होगा बहुमत…

    दिल्ली। महाराष्ट्र में जारी सियासी संकट पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना अहम फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की एक संयुक्त याचिका पर आदेश दिया है कि कल (बुधवार) शाम 5 बजे से पहले विधानसभा में फ्लोर टेस्ट हो। सुप्रीम कोर्ट ने प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति करने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि फ्लोर टेस्ट का लाइव प्रसारण भी हो।जस्टिस रमना ने आज मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि कोर्ट और विधायिका के अधिकार पर लंबे समय से बहस चली आ रही है। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा होनी चाहिए और लोगों को अच्छे शासन का अधिकार है। इस मामले ने राज्यपाल की शक्तियों को लेकर बहुत अहम संवैधानिक मुद्दे को उठाया है।कोर्ट ने अपने फैसले में कर्नाटक और उत्तराखंड के मामलों को भी जिक्र किया। कल सुबह 11 बजे विधायकों का शपथ ग्रहण हो, शाम 5 बजे तक बहुमत परीक्षण हो। कोर्ट ने कहा कि विधायकों को शपथ प्रोटेम स्पीकर करवाएंगे।एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि यह आदेश मील का पत्थर साबित होगा। कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि आज संविधान दिवस के मौके पर संविधान की जीत हुई है। मैं मांग करता हूं कि देवेंद्र फडणवीस तुरंत अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपे।शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस द्वारा लगाई गई याचिका में राज्यपाल द्वारा अचानक से राष्ट्रपति शासन हटाए जाने और आनन फानन में देवेंद्र फडणवीस को शपथ दिलवाने के खिलाफ कोर्ट का रुख किया था।इसके साथ ही इन तीनों पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट करवाने की भी अपील की थी। रविवार और सोमवार को सभी पक्षों की दलीले सुनने के बाद कोर्ट ने फैसले के लिए आज का दिन निर्धारित किया था। अजित पवार ने 54 विधायकों की चिट्ठी सौंपी थी तुषार मेहता ने कहा कि क्या आर्टिकल 32 की याचिका में राज्यपाल के आदेश को इस तरह से चुनौती दी जा सकती है या नहीं? राज्यपाल को पता था कि चुनाव पूर्व का एक गठबंधन जीता है। राज्यपाल की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को अजित पवार की चिट्ठी सौंपी जिसमें 54 विधायकों के नाम थे।उन्होंने बताया कि 21 अक्टूबर को चुनाव हुआ, 24 को नतीजा घोषित हुआ, BJP के 105 सदस्य है शिवशेना के 56 सदस्य NCP के 54 सदस्य है। शिवसेना और BJP का प्री पोल अलाइंस था। सबसे पहले BJP को बुलाया गया वह बहुमत नही साबित कर पाए उसके बाद शिवसेना को बुलाया गया वह भी बहुमत नही साबित कर पाए उसकके बाद NCP को बुलाया गया था। अजित पवार की चिट्ठी के बाद ही राज्यपाल ने हटाया राष्ट्रपति शासन तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के पत्र के आधार पर राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश की थी। गवर्नर के वकील तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि देवेंद्र फडणवीस की चिट्ठी में लिखा गया है कि उनके साथ NCP के 54 विधायकों के साथ 11 निर्दलीय का समर्थन है।अजित पवार विधायक दल के नेता हैं।उन्होंने चिट्ठी पढ़ी। जिसमें कहा है कि मुझे सभी एनसीपी विधायकों का समर्थन है। हमने तय किया है कि फडणवीस को समर्थन दें। चिट्ठी में कहा गया है कि राष्ट्रपति शासन ज्यादा नहीं चलने चाहिए, इसलिए उन्हें सरकार बनाने का न्यौता दिया जाए।तुषार मेहता ने कहा कि राज्यपाल ने अपने विवेक से सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाया है, उसका पर्याप्त आधार है। राज्यपाल की तरफ से पेश हुए तुषार मेहता ने कहा कि मुझे दो से तीन दिन का वक्त दिया जाए, ताकि रिप्लाई फाइल किया जा सके।तुषार मेहता ने कहा कि इनको चिंता है कि विधायक भाग जाएंगे। अभी इन्होंने किसी तरह से उनको पकड़ा हुआ है। विधानसभा की कार्रवाई कैसे चले? इसमें दखल से भी कोर्ट को परहेज करना चाहिए। मामले पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है, इसे हड़बड़ी में नहीं निपटाया जा सकता देवेंद्र फडणवीस के वकील मुकुल रोहतगी ने दलील देते हुए कहा कि अजित पवार ने कहा कि हमारा समर्थन आपके साथ है। वे लोग हॉर्स ट्रेडिंग कर रहे हैं, और हम पर आरोप लगा रहे हैं। हमारे चुनाव पूर्व साथी शिवसेना ने चुनाव के बाद हमारा साथ छोड़ दिया।फिर एनसीपी आई और हमारे सदस्य 170 हो गए। राज्यपाल ने हमें आमंत्रण दिया। अजित पवार हमारे साथ हैं। एक पवार दूसरी तरफ बैठे हैं। जिनके पारिवारिक झगड़े से हमे कोई लेना देना नहीं है। ये केस येदुरप्पा मामले से अलग है। मामले पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है, इसे हड़बड़ी में नहीं निपटाया जा सकता।रोहतगी ने कहा कि अब जो होगा विधानसभा के फ्लोर पर होगा। लेकिन राज्यपाल पर आरोप क्यों? उन्होंने भी तो फ्लोर टेस्ट के लिए ही बोला है। फ्लोर टेस्ट कब होगा ये तय करने का अधिकार राज्यपाल का है। इसे कोर्ट को तय नहीं करना चाहिए।राज्यपाल पर आरोप लगाना गलत है। फ्लोर टेस्ट के लिए राज्यपाल को नहीं कहा जा सकता कि कितने दिन में कराना है। यह राज्यपाल का विवेकाधिकार है। राज्यपाल के कदम को दुर्भावना से प्रेरित नहीं कहा जा सकता।जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली 3 जजों की पीठ के समक्ष शिवसेना की तरफ से वकील कपिल सिब्बल, एनसीपी की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी, देवेंद्र फडणवीस की तरफ से मुकुल रोहतगी पेश हुए थे और अजित पवार की तरफ से वरिष्ठ वकील और पूर्व सॉलिसिटर जनरल मनिन्दर सिंह पेश हुए थे।केंद्र यानि राज्यपाल की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील रखी थी। कोर्ट ने रविवार और सोमवार को इस मामले में सभी पक्षों की दलीले सुनीं और अपना फैसला आज (मंगलवार) तक के लिए सुरक्षित रख लिया था।सोमवार को कोर्ट में राज्यपाल की तरफ से पेश हुए वकील तुषार मेहता ने अजित पवार के समर्थन की वह चिट्ठी भी पेश की जिसमें 54 विधायकों के समर्थन की बात कही गई थी।कोर्ट को बताया कब-कब क्या क्या हुआसोमवार को केन्द्र के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता चुनाव परिणाम से अब तक का घटनाक्रम कोर्ट को बताया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्यपाल ने कब-कब क्या किया। तुषार मेहता ने कहा कि राज्यपाल ने 9 नवंबर तक इंतजार किया। BJP ने मना कर दिया।10 तारीख को शिवसेना से पूछा तो उसने भी मना कर दिया। 11 को एनसीपी ने भी मना किया तो राष्ट्रपति शासन लगाया गया। उसके बाद से किसी ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया। अजित पवार का समर्थन पत्र पेश हुए, NCP के विधायक दल के नेता के तौर पर जिसमें 54 विधायक का नाम है। ‘मैं ही एनसीपी हूं’ अजित पवार के वकील पूर्व सॉलिसिटर जनरल मनिन्दर सिंह ने कहा, ‘मैंने 22 नवंबर को एनसीपी विधायक दल के नेता के रूप में काम किया। उस दिन अन्यथा दिखाने के लिए कुछ भी नहीं था। राज्यपाल ने अपने विवेक से कार्य किया।अजित पवार की ओर से मनिंदर सिंह ने कहा, ‘जो चिट्ठी राज्यपाल को दी गई वो कानूनी रूप से सही। फिर विवाद क्यों?अजित पवार ने कहा था कि मैं एनसीपी हूं। विधायक दल का नेता हूं। यही सही है, कोर्ट को आर्टिकल 32 के तहत इस याचिका को नहीं सुनना चाहिए। इन्हें हाईकोर्ट जाने को कहना चाहिए। अगर बाद में कोई स्थिति बनी है इसे राज्यपाल देखेंगे। उनके ऊपर छोड़ा जाए। कोर्ट इसमें दखल क्यों दें?’ जस्टिस रमना ने कहा, क्या आदेश देना है, ये हम पर छोड़ दें जस्टिस रमना ने कहा, क्या आदेश देना है, ये हम पर छोड़ दें। सुप्रीम कोर्ट ने सिंघवी को कहा कि अपनी दलीलों को याचिका कि मांगों तक सीमित रखिए। इस पर सिंघवी ने कहा, ‘Mylord आपका कहना सही है। मगर वे बातें अंतरात्मा को धक्का पहुंचती है, जब कोई कोर्ट में खड़ा होकर कहता है कि मैं एनसीपी हूं।’सिंघवी ने कहा कि अजित पवार को विधायक दल का नेता चुनने के लिए किए गए विधायकों के हस्ताक्षर राज्यपाल को दिए गए पत्र में लगा दिए गए हैं। सिंघवी ने कहा कि मैं इन बातों पर जोर नहीं देना चाहता, मगर ये बातें अपने आप में आधार हैं। फ्लोर टेस्ट आज ही हो जाना चाहिए। सिंघवी और रोहतगी में बहस होने पर जस्टिस रमना ने दोनों को शांत होने के लिए कहा।रोहतगी ने कहा कि राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट के लिए कोई महीनों का समय नहीं दिया है। उन्होंने 30 नवंबर को फ्लोर टेस्ट कराने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट राज्यपाल को 24 घंटे के भीतर फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश नहीं दे सकता।ये कह रहे हैं कि कोर्ट सत्र बुलाये और ये भी तय करे कि को कब नाश्ता करेगा और कब लंच करेगा। मुकुल रोहतगी ने कहा कि पूर्व में कोर्ट ने संसद की कार्रवाई में दखल देने से मना किया था। इनका केस यह है कि आज ही फ्लोर टेस्ट हो।एनसीपी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि दोनों पक्ष फ्लोर टेस्ट को सही कह रहे हैं तो फिर इसमें देर क्यों? इसी तर्क के केस में कोर्ट के पुराने आदेश हमारे सामने हैं, उनकी उपेक्षा नहीं कि जा सकती। अनकवरिंग लेटर और अनएड्रेस लेटर को राज्यपाल ने कैसे स्वीकार किया। जब कोर्ट में सब हंसने लगे तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा, ‘आपके आदेश का दूरगामी असर होगा। विस्तृत सुनवाई के बाद ही आदेश जारी करें। जो चिट्ठी राज्यपाल को दी गई वो कानूनी रूप से सही है। इस मामले में पूर्व के कुछ आदेशों के आधार पर अंतरिम आदेश न दें।इस मामले में हमें विस्तृत जवाब दायर करने दीजिए।’तुषार मेहता ने कहा कि ये लोग एक याचिका दायर कर यहां आए हैं और एक वकील पर तो सहमत नहीं हो पाए। गठबंधन में सहमत कैसे हो पाएंगे।कोर्ट में सब हंसने लगे।तुषार मेहता ने कहा कि जो नई चिट्ठी ये कोर्ट को दे रहे हैं, उसमें भी कई विधायकों के नाम पते नहीं है। आपके अनुसार हम फ्लोर टेस्ट हारने को तैयार हैं। तो फ्लोर टेस्ट तय समय पर होने दो। जस्टिस खन्ना ने कहा कि यह बात आपकी याचिका में नहीं है, इसे न बोलें। शिवसेना के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि 22 नवंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। ऐलान किया कि एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस मिलकर सरकार बना रही हैं। ये शाम को 7 बजे हुआ। सुबह 5 बजे तक राष्ट्रपति शासन हटाने का फैसला क्यों लिया गया?ऐसा राष्ट्रीय आपातकाल क्या था। यह दुर्भाग्यपूर्ण था। देश मे ऐसी क्या राष्ट्रीय विपदा आ गई थी कि सुबह 5 बजे राष्ट्रपति शासन हटा और 8 बजे मुख्यमंत्री की शपथ भी दिलवा दी गई। जिस तरह पीएम के कहने पर बिना कैबिनेट मीटिंग के फैसले हुआ, वह आपातकालीन प्रावधान है। जस्टिस खन्ना ने कहा कि यह बात आपकी याचिका में नहीं है, इसे न बोलें। शिवसेना के वकील सिब्बल ने कहा कि कोर्ट को तत्काल फ्लोर टेस्ट का आदेश देना चाहिए। 24 घंटे के अंदर फ्लोर टेस्ट होना चाहिए। कोर्ट ने पहले भी किया है, आज भी करना चाहिए। सबसे सीनियर मेंबर प्रोटेम स्पीकर होता है, वीडियो रिकॉर्डिंग होती है। कोर्ट को आदेश देना चाहिए। बता दें कि इससे पहले रविवार को अहम सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र के राज्यपाल, सीएम और डिप्टी सीएम को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने इस मामले में गवर्नर (केंद्र), सीएम और डिप्टी सीएम को राज्यपाल को सौंपे गए दस्तावेज आज कोर्ट में पेश करने को कहा था।
  • घूस देने वालों से परेशान बिजली विभाग का अफसर, दफ्तर में लिखवाया- मैं ईमानदार हूं….

    घूस देने वालों से परेशान बिजली विभाग का अफसर, दफ्तर में लिखवाया- मैं ईमानदार हूं….

    करीमनगर। तेलंगाना के सरकारी दफ्तर में प्रवेश करते ही सामने लिखा मिलता है ‘आई एम अनकरप्टेड’ यानी ‘मैं ईमानदार हूं।’ आगे कुर्सी पर बैठे हैं एडिशनल डिवीजनल इंजीनियर (एडीई) पोदेती अशोक। दरअसल, दरअसल, बिजली विभाग में अपना काम करवाने के लिए आने वाले लोगों और ठेकेदारों के ऑफर से परेशान होकर करीमनगर में पदस्थ अशोक ने यह अनूठा तरीका अपनाया है।

    उन्होंने कॉन्ट्रेक्टरों और आम लोगों को समझाया कि वे न घूस लेते हैं, न देते हैं। जब लोग उन्हें घूस देने में असफल रहे तो परेशान करने लगे। तंग होकर उन्हें दफ्तर में ही 40 दिन पहले दीवार पर यह लिखवाना पड़ा। इसके बाद से साथी अफसर भी उन्हें यह कहकर परेशान कर रहे हैं कि वे पूरे विभाग पर आरोप लगा रहे हैं।

    ‘बिजली विभाग में खूब भ्रष्टाचार है’


    अशोक के इस कदम से विभाग के करप्ट अफसरों में हड़कंप है। उन्होंने कहा- “मैं बचपन से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ रहा हूं। यदि मैं घूस लूंगा तो मुझे देनी भी पड़ेगी। यहां बिजली विभाग में खूब भ्रष्टाचार है। मैं लोगों से कहना चाहूंगा कि अफसरों को घूस न दें। उन्हें उनके काम के लिए तनख्वाह दी जाती है। यदि आपका काम नहीं होता तो उच्चाधिकारियों से संपर्क करें या मीडिया में जाएं, लेकिन घूस न दें।’ अशोक ने 2005 में असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में नौकरी ज्वाइन की थी। पिछले साढ़े तीन सालों में वे एडीई बने। इसके बाद से उनके पास फाइलें और अन्य बिलपास करने के लिए घूसखोरी के ऑफर आने लगे।

  • प्रधानमंत्री मोदी से मिले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने प्रोफाइल से हटा दिया कांग्रेस….भोपाल से दिल्ली तक मचा हड़कंप तो दी सफाई…

    प्रधानमंत्री मोदी से मिले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने प्रोफाइल से हटा दिया कांग्रेस….भोपाल से दिल्ली तक मचा हड़कंप तो दी सफाई…

    मध्यप्रदेश। पहले कर्नाटक में सत्ता गंवाई, फिर महाराष्ट्र में सरकार बनते-बनते रह गई और मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस की मुश्किल बढ़ने को लेकर फिर से कयासों का दौर शुरू हो गया। दरअसल विधानसभा चुनाव 2018 में काफी जद्दोजहद के बावजूद मुख्यमंत्री नहीं बन पाए ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर अचानक अटकलों का बाजार गर्म हो गया। काफी समय से सिंधिया के बीजेपी से संपर्क में होने की खबरें सामने आ रही थीं। ऐसे में अचानक सिंधिया के ट्विटर प्रोफाइल से ‘कांग्रेस’ का गायब हो जाना भोपाल से दिल्ली तक हड़कंप का कारण बन गया। आखिरकार सिंधिया ने खुद सफाई देकर कयासों पर लगाम लगा दी।

    पहले शिवराज, फिर मोदी से मुलाकात

    मध्य प्रदेश में कमल नाथ (Kamal Nath) और सिंधिया में से मुख्यमंत्री का नाम फाइनल करने के लिए राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को अच्छी खासी जद्दोजहद करनी पड़ी थी। तब जाकर कमल नाथ का नाम फाइनल हुआ तो सिंधिया खेमे ने विरोध भी किया था। सरकार बनने के ठीक बाद शिवराज सिंह से सिंधिया की मुलाकात की खबर सामने आई थी। इसके बाद लगातार सिंधिया खेमे के माने जाने वाले मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री दिग्विजय सिंह और कमल नाथ के खिलाफ बयान देते रहे। कुछ दिनों पहले सिंधिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) से भी मुलाकात की थी। हालांकि मुलाकात के बाद उनकी तरफ से कहा गया कि बाढ़ग्रस्त मध्य प्रदेश के संदर्भ में बातचीत करने गए थे।

    यूं चला कयासों का दौर

    तमाम घटनाक्रमों के चलते कयास लगाए जाने लगे कि कांग्रेस से नाराज सिंधिया बीजेपी जॉइन कर सकते हैं। चंद सीटों के फासले से सरकार बनाने से चूकी बीजेपी से सिंधिया के संपर्क में होने की खबरों ने कमल नाथ सरकार के लिए मुश्किल के संकेत दे दिए। इसके चलते ट्विटर प्रोफाइल में बदलाव से मामला गर्मा गया, लेकिन सिंधिया ने खुद एएनआई से बातचीत में मामला स्पष्ट कर दिया।
  • मंतुराम, डॉ पुनीत और जोगी को नोटिस, हाईकोर्ट ने तीन हफ्ते में मांगा जवाब

    मंतुराम, डॉ पुनीत और जोगी को नोटिस, हाईकोर्ट ने तीन हफ्ते में मांगा जवाब

    बिलासपुर। याचिका में जस्टिस गौतम भादुड़ी ने आदेश दिया है कि एसआईटी ऐसा कोई कार्य ना करें जिससे व्यक्तियों के हित प्रभावित हों। अंतागढ़ टेप कांड में अभियुक्त बनाए गए डॉ पुनीत गुप्ता मंतुराम पवार और अजित जोगी अमित जोगी की वॉयस सेंपल लिए जाने का एसआईटी का आवेदन रायपुर कोर्ट ने पूर्व में खारिज किया था। राज्य सरकार ने इस मसले को लेकर हाईकोर्ट में रिविजन पिटिशन दायर किया है, जिस पर हाईकोर्ट ने आज सुनवाई करते हुए तीन हफ्ते में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस शरद गुप्ता की कोर्ट में पेश रिवीजन पिटिशन में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि, अभियुक्तों को आदेशित करें कि वह वॉयस सेंपल दें।विदित हो कि,इस मामले को लेकर पूर्व में दायर याचिका में 21 फरवरी 2019 में जस्टिस गौतम भादुड़ी ने आदेश दिया है कि एसआईटी ऐसा कोई कार्य ना करें जिससे व्यक्तियों के हित प्रभावित हों। इसके अलावा एसआईटी के विधि सम्मत होने को लेकर प्रश्न उठाती याचिका भी हाईकोर्ट में अभी लंबित है।
  • बस्तर के दो डिप्टी कलेक्टर को मोबाइल पर धमकी, आरोपियों के खिलाफ थाने में FIR दर्ज

    बस्तर के दो डिप्टी कलेक्टर को मोबाइल पर धमकी, आरोपियों के खिलाफ थाने में FIR दर्ज

    जगदलपुर बस्तर जिले के दो डिप्टी कलेक्टर गोकुल रावटे और माधुरी सोम को उनके मोबाइल फोन पर धमकी देने का मामला सामने आया है. जिले में इस तरह का यह पहला मामला है जब प्रशासनिक अधिकारियों को धमकी भरे फोन और मैसेजस आये है. दोनों ही डिप्टी कलेक्टर ने इसकी शिकायत बोधघाट थाने में दर्ज कराई है। बोधघाट थाना प्रभारी सुरेन्द्र बघेल के मुताबिक दोनों के फोन पर एक ही मोबाइल नबंर से धमकी दी गई है. इसके अलावा मोबाइल पर धमकी भरा मैसेज भी अज्ञात व्यक्ति ने भेजा है. इधर शिकायतकर्ताओं से मिले मोबाईल नम्बर को पुलिस साइबर सेल की मदद से ट्रेस कर रही है. चूंकि यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़ा है इसलिए पुलिस इसे गम्भीरता से ले रही है. प्रथम दृष्टय़ा दोनों ही अधिकारी धान तस्करी पर लगातार कर रहे कार्रवाई की वजह से बिचौलियों द्वारा धमकी देने का अंदेशा जता रहे हैं।दरअसल पिछले दिनों प्रशासन ने कई जगह छापेमारी की कार्रवाई कर कई हजार क्विंटल अवैध धान की बोरी जब्त किया था. ऐसे मे दोनो ही अधिकारी किसी धान तस्करी द्वारा इस तरह की धमकी देने की बात कह रहे है. फिलहाल पुलिस मामले की तफ्तीश मे लगी हुई है, और साईबर सेल की मदद से नंबर को ट्रेस किया जा रहा है। इधर इस मामले में जब दोनों ही अधिकारी से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने आधिकारिक तौर पर मीडिया के सामने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।