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  • एथेनॉल पेट्रोल पर बयान देकर बुरे फंसे यूट्यूबर सौरभ जोशी, करोड़ों की संपत्ति पर भी उठे सवाल….

    एथेनॉल पेट्रोल पर बयान देकर बुरे फंसे यूट्यूबर सौरभ जोशी, करोड़ों की संपत्ति पर भी उठे सवाल….

    देश के सबसे लोकप्रिय व्लॉगर्स में शामिल सौरव जोशी इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त विवादों में घिरे हुए हैं। उनके हालिया व्लॉग में की गई कुछ टिप्पणियों के बाद इंटरनेट पर बहस तेज हो गई है। एथेनॉल के साथ मिक्स किए हुए पेट्रोल को लेकर दिया गया उनका बयान, उनकी लग्जरी कार की माइलेज से जुड़ा दावा और फिर उनकी कुल संपत्ति को लेकर सामने आई चर्चाओं ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।

    एथेनॉल पर बयान से शुरू हुआ विवाद

    पूरा मामला उस समय शुरू हुआ जब सौरव जोशी ने अपने व्लॉग में अपनी मर्सिडीज कार की परफॉर्मेंस का जिक्र करते हुए कहा कि एथेनॉल पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद उनकी कार की माइलेज पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने दावा किया कि पहले कार 17 की एवरेज देती थी, लेकिन अब माइलेज सिर्फ 5 रह गई है जिससे भारी गिरावट देखने को मिली है।

    उनके इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने उनकी बात का समर्थन किया, जबकि बड़ी संख्या में यूजर्स ने उनके दावे पर सवाल खड़े कर दिए।

    कार की स्पेसिफिकेशन को लेकर उठे सवाल

    सोशल मीडिया पर कई ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स और यूजर्स ने दावा किया कि जिस मॉडल की मर्सिडीज कार का जिक्र किया गया, उसके लिए कंपनी प्रीमियम पेट्रोल की सलाह देती है। ऐसे में अगर अनुशंसित ईंधन का उपयोग नहीं किया गया हो तो माइलेज और इंजन की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है। कुछ लोगों का कहना है कि एथेनॉल को दोष देने से पहले वाहन की तकनीकी जरूरतों को भी समझना जरूरी है। हालांकि, सौरव जोशी या उनकी टीम की ओर से इन दावों पर कोई विस्तृत तकनीकी स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

    इलेक्ट्रिक G-Wagon की चर्चा भी बनी बहस का हिस्सा

    विवाद के दौरान सौरव जोशी ने अपनी इलेक्ट्रिक G-Wagon का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन होने की वजह से भविष्य में ऐसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे पहले दिए गए बयान से ध्यान हटाने की कोशिश बताया, जबकि कई यूजर्स ने इसे सामान्य बातचीत का हिस्सा माना।

    संपत्ति को लेकर भी शुरू हुई चर्चा

    विवाद यहीं नहीं रुका। सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि पहले सौरव जोशी की कुल संपत्ति करीब 50 करोड़ रुपये बताई जाती थी, जबकि हालिया व्लॉग में उन्होंने लगभग 100 करोड़ रुपये की संपत्ति होने का जिक्र किया। इसके बाद इंटरनेट पर तरह-तरह की अटकलें लगनी शुरू हो गईं।

    कुछ वायरल पोस्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई तक की बातें कही जा रही हैं। हालांकि, अब तक किसी सरकारी एजेंसी ने सौरव जोशी के खिलाफ किसी जांच या छापेमारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए ऐसे दावों को फिलहाल केवल सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

  • अस्पताल में दारू-मुर्गा की पार्टी, फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय निलंबित, सफाई कर्मी की सेवा समाप्त…

    अस्पताल में दारू-मुर्गा की पार्टी, फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय निलंबित, सफाई कर्मी की सेवा समाप्त…

    विश्रामपुर। सूरजपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लटोरी में अस्पताल परिसर के भीतर कर्मचारियों द्वारा चिकन और शराब पार्टी (Chicken-Liquor party in Hospital) किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। सूरजपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कपिल देव पैकरा ने मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए 2 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं एक संविदा सफाई कर्मी की सेवा समाप्त कर दी गई है। इस कार्रवाई से स्वास्थ्य कर्मियों में हडक़ंप मचा हुआ है।

    बता दें कि अनुशासन को ताक पर रखकर कुछ शासकीय कर्मचारी सरकारी दफ्तरों में मुर्गा-दारू की पार्टी समेत अन्य संदिग्ध गतिविधियां करते हैं। इनके वीडियो भी कई बार वायरल हो चुके हैं। इसी कड़ी में कुछ दिन पूर्व सूरजपुर जिले के लटोरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वॉय व सफाईकर्मी का चिकन व शराब की पार्टी करते वीडियो किसी ने बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था।

    इस मामले में स्वास्थ्य विभाग (Surajpur CMHO) ने कड़ी कार्रवाई की है। सूरजपुर सीएमएचओ द्वारा जारी आदेश के अनुसार अस्पताल में पदस्थ वार्ड ब्वॉय प्रेम कुशवाहा तथा फार्मासिस्ट ग्रेड-2 रंजीत जायसवाल को कार्य में लापरवाही बरतने और अस्पताल परिसर में मांस एवं मदिरा सेवन से जुड़ी घटना का वीडियो सोशल मीडिया में प्रसारित होने के मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया।

    इस आधार पर दोनों के निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि के दौरान दोनों कर्मचारियों का मुख्यालय खंड चिकित्सा अधिकारी कार्यालय ओडग़ी निर्धारित किया गया है। वहीं मामले में शामिल जीवनदीप समिति के अंतर्गत सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत चंद्रदीप राजवाड़े की सेवाएं समाप्त करने का आदेश भी जारी कर दिया गया है।

    स्वास्थ्य विभाग ने की कार्रवाई

    गौरतलब है कि अस्पताल परिसर में शराबखोरी और अनुशासनहीनता से जुड़े मामलों की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी ऐसे मामलों की शिकायतें सामने आती रही हैं। वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे। इसके बाद विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाए हैं। अब मामले की विस्तृत जांच भी की जा रही है।

  • रनिंग बिल पर नहीं होगा भुगतान, एक साल से सरकार ने नहीं दिया फंड…

    रनिंग बिल पर नहीं होगा भुगतान, एक साल से सरकार ने नहीं दिया फंड…

    रायगढ़ गांवों में हर घर को नल से पानी पहुंचाने की योजना जल जीवन मिशन पटरी से उतरती नजर आ रही है। अब सरकार ने रनिंग बिल पर भुगतान को रोकने का आदेश दिया है जिसकी वजह से सारे काम रुक गए हैं। जिले में एक भी काम नहीं चल रहा है। एक साल से भी ज्यादा समय से सरकार ने कोई भुगतान नहीं किया है केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 लॉन्च करने के साथ कई नए नियम लागू कर दिए हैं। मॉनिटरिंग और ऑनलाइन डाटा एंट्री को सख्त कर दिया है। सिंगल विलेज हो या मल्टी विलेज स्कीम, किसी को भी रनिंग बिल में भुगतान करने पर रोक लगा दी है।

    अब केवल वही बिल पास होंगे, जो काम पूरे हो चुके हों। कार्य पूर्णता भी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के निरीक्षण और प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के बाद ही माना जाएगा। भुगतान के पूर्व यह देखा जा रहा है कि संबंधित कार्य पूरा हुआ है अथवा नहीं। रायगढ़ जिले में 1345 सिंगल विलेज स्कीम और 3 मल्टी विलेज स्कीम हैं। इनमें से तीनों मल्टी विलेज स्कीम तो अधूरी पड़ी हैं। करीब एक साल से ठेकेदार ने काम बंद कर दिया है क्योंकि भुगतान बंद कर दिया गया। 1354 सिंगल विलेज योजना में 671 पूरी हो चुकी हैं और 674 अधूरी हैं। करीब 450 योजनाएं संबंधित ग्राम पंचायतों को हैंड ओवर भी हो चुकी हैं। अरबों की इस योजना में करीब डेढ़ साल से एक भी बिल प्रोसेस नहीं हो पाया है।

    मंत्री से बातचीत भी रही बेनतीजा
    प्रदेश भर के ठेकेदारों ने जेजेएम 2.0 का काम बंद कर दिया है। उनका कहना है कि रनिंग बिल में भुगतान हो ही नहीं रहा है। सभी ने मार्केट से सामग्री और राशि भी उधार में ली है। किसी ने 40 प्रश तो किसी ने 50 प्रश काम पूरा किया है। लेकिन भुगतान नहीं होने से उनकी माली हालत खराब होने लगी है। पिछले दिनों कलेक्टर के आदेश पर छह ऐसे ठेकेदारों का एग्रीमेंट निरस्त करने का आदेश दिया था जिन्होंने डेढ़ साल से काम बंद कर दिया है। ठेकेदार संतोष तिवारी, आशीष ट्रेडर्स एंड कंस्ट्रक्शन, मालामोहन बिल्डर्स, महामाया कंस्ट्रक्शन, आदिशक्ति इंटरप्राइजेस और ध्रुवा इंटरप्राइजेस पर कार्रवाई की गई है।
    फेल हो गया पेमेंट प्रोसेस सिस्टम
    जल जीवन मिशन में भुगतान का पूरा अधिकार केंद्र सरकार ने अपने हाथ में ले लिया है। पेमेंट के नए सिस्टम को आजमाने के लिए कवर्धा और रायगढ़ जिले को चुना गया है। स्कीम पूरी होने के बाद उसके सारे दस्तावेज अपलोड किए जाने हैं। इसके बाद आरबीआई की गाइडलाइन के मुताबिक भुगतान किया जाना है। दोनों ही जिलों में पूर्ण योजनाओं के भुगतान के लिए दस्तावेज अपलोड किए गए थे, लेकिन सरकार ने सारे बिल निरस्त कर दिए। एक भी पेमेंट नहीं हो सका।
  • रात के अंधेरे में डभरा कॉलेज के पास स्कॉर्पियो में ₹1 लाख की घूस ले रहे थे ‘सक्ती के प्रभारी सिविल सर्जन’, ACB ने रंगे हाथ दबोचा…

    रात के अंधेरे में डभरा कॉलेज के पास स्कॉर्पियो में ₹1 लाख की घूस ले रहे थे ‘सक्ती के प्रभारी सिविल सर्जन’, ACB ने रंगे हाथ दबोचा…

    सक्ती। एंटी करप्शन ब्यूरो बिलासपुर ने सक्ती जिले में गुरुवार रात ट्रैप कार्रवाई करते हुए जिला अस्पताल सक्ती के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. संतोष कुमार पटेल को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी पर अपने अधीनस्थ कर्मचारी का पे-डेटा सीएमएचओ कार्यालय भेजने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। एसीबी ने आरोपी के कब्जे से रिश्वत की राशि बरामद कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल सक्ती में फार्मासिस्ट ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत गंगा प्रसाद रत्नाकर ने एसीबी यूनिट बिलासपुर में शिकायत दर्ज कराई थी।

    शिकायत में बताया गया कि उनकी मूल पदस्थापना सीएमएचओ कार्यालय पोरथा, जिला सक्ती में है तथा फरवरी 2026 से उनका अटैचमेंट जिला अस्पताल सक्ती में किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल सक्ती के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. संतोष कुमार पटेल मई और जून 2026 का पे-डेटा तैयार कर सीएमएचओ कार्यालय नहीं भेज रहे थे। इस संबंध में चर्चा होने पर आरोपी ने कहा कि फरवरी 2026 से जून 2026 तक पांच माह के लिए प्रति माह 20 हजार रुपये के हिसाब से कुल एक लाख रुपये देने होंगे, तभी पे-डेटा सीएमएचओ कार्यालय भेजा जाएगा।

    शिकायत मिलने के बाद एसीबी बिलासपुर ने मामले का सत्यापन कराया। सत्यापन में शिकायत सही पाए जाने पर ट्रैप की योजना बनाई गई। कार्रवाई के दौरान आरोपी ने शिकायतकर्ता को रिश्वत की राशि लेकर अपने अस्थायी निवास डभरा बुलाया। बाद में शिकायतकर्ता को डभरा कॉलेज मोड़ के पास मिलने के लिए कहा गया। गुरुवार रात करीब नौ बजे शिकायतकर्ता एसीबी टीम की निगरानी में निर्धारित स्थान पर पहुंचा। आरोपी डॉ. संतोष कुमार पटेल वहां पहुंचे और शिकायतकर्ता की स्कॉर्पियो में बैठकर एक लाख रुपये की रिश्वत की राशि अपने कब्जे में ली।

    इसी दौरान आसपास मौजूद एसीबी बिलासपुर की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। एसीबी ने आरोपी के कब्जे से एक लाख रुपये की रिश्वत की राशि बरामद की है। आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित) की धारा 7 के तहत अपराध दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

  • छत्तीसगढ़ में 10 में से 3 युवा ब्रेन संबंधी बीमारी की चपेट में, रिपोर्ट में खुलासा, सामने आई ये वजह…

    छत्तीसगढ़ में 10 में से 3 युवा ब्रेन संबंधी बीमारी की चपेट में, रिपोर्ट में खुलासा, सामने आई ये वजह…

    प्रदेश में युवाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। 22 जुलाई को मनाए जाने वाले ‘विश्व ब्रेन दिवस’ के अवसर पर न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरो सर्जनों से बातचीत में खुलासा हुआ कि राज्य के 20 से 40 वर्ष के लगभग 30% (10 में से 3) युवा किसी न किसी प्रकार की ब्रेन संबंधी बीमारी से जूझ रहे हैं। पहले जहां स्ट्रोक, माइग्रेन और ब्रेन फॉगिंग जैसी समस्याएं बुजुर्गों या अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थीं, वहीं अब 30 से 45 वर्ष की आयु के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल समेत अन्य निजी अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

     ये 5 मुख्य कारण

    अत्यधिक स्क्रीन टाइम: रोजाना 8 से 10 घंटे मोबाइल या लैपटॉप पर बिताना

    अधूरी नींद: देर रात तक रील्स देखना और 6 घंटे से कम सोना

    लाइफस्टाइल का तनाव: नौकरी, ईएमआई और सोशल मीडिया

    असंतुलित खानपान: जंक फूड का अत्यधिक सेवन, पानी कम पीना

    नशे की लत: कैफीन, सिगरेट, एनर्जी ड्रिंक्स और शराब का सेवन

    स्वस्थ रखने के 5 आसान उपाय

    20-20-20 नियम अपनाएं: हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें।
    नींद का समय तय करें: रात 11 बजे से सुबह 7 बजे तक की नियमित नींद लें।

    भरपूर पानी और सही डाइट: कम से कम 3 लीटर पानी पिएं और नाश्ता न छोड़ें।
    तनाव प्रबंधन: सप्ताह में 3 दिन 30 मिनट व्यायाम, मेडिटेशन या दोस्तों से बात करें।

    खुद से दवा न लें: डॉक्टर की सलाह के बिना मेडिकल स्टोर से दवा लेने से बचें।

    टॉपिक एक्सपर्ट

    सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट, डॉ. अभिजीत कोहट ने बताया कि युवाओं में स्ट्रोक और ब्रेन फॉगिंग के मामले तेजी से बढ़ना एक बड़ा अलर्ट है। इसका सबसे बड़ा कारण खराब जीवनशैली, तनाव और नशा है। अगर समय रहते आदतों में सुधार नहीं किया गया तो यह समस्या और अधिक गंभीर रूप ले सकती है।

    सीनियर न्यूरो सर्जन, डॉ. लवलेश राठौर ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में सिर की गंभीर चोट (हेड इंजुरी) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। शराब पीकर गाड़ी चलाने से ब्रेन का फोकस घटता है। बिना हेलमेट बाइक चलाने से होने वाली ब्रेन इंजुरी को ठीक होने में काफी लंबा समय लगता है।

  • नकली नोट लेकर शराब खरीदने पहुंचा युवक: पुलिस ने किया गिरफ्तार, एक ही सीरियल नंबर वाले 500 के 4 नोट जब्त…

    नकली नोट लेकर शराब खरीदने पहुंचा युवक: पुलिस ने किया गिरफ्तार, एक ही सीरियल नंबर वाले 500 के 4 नोट जब्त…

    जांजगीर चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक आरोपी नकली नोट से शराब खरीदने की कोशिश कर रहा था, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। साथ ही आगे की कार्रवाई भी शुरु कर दी है।

    यह पूरा मामला अकलतरा थाना क्षेत्र का है। 20 जुलाई को पुलिस को सूचना मिली थी कि एक युवक देशी मदिरा दुकान अकलतरा में 500 रुपए का नकली नोट देकर शराब खरीदने का प्रयास कर रहा है। सूचना पर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और उसे हिरासत में ले लिया।

    पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम सत्येन्द्र कुमार कुर्रे उर्फ सत्यम कुर्रे बताया, जो कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के दोमुहानी गांव का रहने वाला है। पुलिस ने तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से 500 के चार नोट बरामद किए।

    सीरियल नंबर भी निकले एक

    बरामद नोटों का तत्काल स्टेट बैंक, अकलतरा में परीक्षण कराया गया, जहां सभी नोट नकली पाए गए। साथ ही चारों नोटों का सीरियल नंबर भी एक ही मिला। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह नकली नोट रायपुर से लेकर आया था।

    फिलहाल पुलिस ने मामले में आरोपी के खिलाफ धारा 180 बीएनएस के तहत अपराध क्रमांक 423/2026 दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश कर न्यायिक रिमांड में ले लिया।

  • जाति प्रमाण पत्र हाईकोर्ट : परिवार में वैध प्रमाण पत्र होने पर 1950 के दस्तावेज जरूरी नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम आदेश….

    जाति प्रमाण पत्र हाईकोर्ट : परिवार में वैध प्रमाण पत्र होने पर 1950 के दस्तावेज जरूरी नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम आदेश….

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी परिवार के सदस्य के पास पहले से वैध जाति प्रमाण पत्र मौजूद है, तो केवल वर्ष 1950 के दस्तावेजों के अभाव में उसी परिवार के अन्य पात्र सदस्यों को जाति प्रमाण पत्र देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

    हाईकोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण निर्देश

    जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि परिवार के किसी सदस्य का वैध जाति प्रमाण पत्र उपलब्ध है और ग्राम सभा या ग्राम स्तरीय समिति यह प्रमाणित करती है कि आवेदक उसी परिवार और उसी जाति से संबंधित है, तो संबंधित अधिकारी विधि अनुसार त्वरित कार्रवाई करते हुए जाति प्रमाण पत्र जारी करें।

    1950 के दस्तावेजों की अनिवार्यता पर राहत

    याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डॉ. प्राची दीवान ने न्यायालय को बताया कि प्रदेश में कई भूमिहीन और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के पास वर्ष 1950 के राजस्व या अन्य अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उनके बच्चों को शिक्षा, छात्रवृत्ति, प्रवेश और रोजगार के लिए आवश्यक जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

    60 दिनों के भीतर जारी करें प्रमाण पत्र

    हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवेदन के साथ प्रस्तुत आवश्यक दस्तावेजों की समयबद्ध जांच कर निर्धारित प्रक्रिया पूरी की जाए और 60 दिनों के भीतर जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि पात्र आवेदकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगवाए जाएं।

    कई परिवारों को मिलेगा लाभ

    इस आदेश से उन हजारों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके परिवार के किसी सदस्य के पास पहले से वैध जाति प्रमाण पत्र है, लेकिन अन्य सदस्यों को 1950 के दस्तावेजों के अभाव में प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा था।

  • 53 करोड़ की फर्जी बिलिंग का खुलासा, 9.54 करोड़ की टैक्स चोरी के आरोप में कारोबारी गिरफ्तार…

    53 करोड़ की फर्जी बिलिंग का खुलासा, 9.54 करोड़ की टैक्स चोरी के आरोप में कारोबारी गिरफ्तार…

    रायपुर। स्टेट जीएसटी विभाग ने फर्जी बिलिंग और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 53 करोड़ रुपये की कथित फर्जी बिलिंग के मामले में मुख्य आरोपी विजय कुमार यादव को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर 9.54 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी करने का आरोप है। न्यायालय के आदेश पर उसे 3 अगस्त तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

    दो फर्मों के जरिए किया फर्जी बिलिंग का कारोबार

    प्रारंभिक जांच में सामने आया कि विजय कुमार यादव मेसर्स माया स्टील एंड एंटरप्राइज और मेसर्स मायरा स्टील एंटरप्राइजेज के नाम से दो फर्मों का संचालन कर रहा था। आरोप है कि इन फर्मों के माध्यम से करीब 53 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग कर 9.54 करोड़ रुपये का बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) विभिन्न फर्मों को ट्रांसफर किया गया।

    बंद और फर्जी फर्मों से लिया बोगस ITC का लाभ

    स्टेट जीएसटी के अनुसार आरोपी ने बंद और फर्जी फर्मों के माध्यम से प्राप्त फर्जी आईटीसी का दावा कर अपनी टैक्स देनदारी का भुगतान किया। जांच में यह भी सामने आया कि उसने बिना वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के केवल बिलों के आधार पर लेन-देन दिखाकर बोगस आईटीसी का लाभ लिया, जिससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

    जांच जारी, नेटवर्क की हो रही पड़ताल

    स्टेट जीएसटी विभाग फर्जी बिलिंग और बोगस आईटीसी के खिलाफ विशेष अभियान चला रहा है। विभाग का कहना है कि मामले की जांच जारी है और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • रायगढ़ IPL सट्टा केस: 1 करोड़ की जब्ती वाले मामले में आरोपी करण चौधरी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, जमानत याचिका खारिज…

    रायगढ़ IPL सट्टा केस: 1 करोड़ की जब्ती वाले मामले में आरोपी करण चौधरी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, जमानत याचिका खारिज…

    रायगढ़। ऑनलाइन सट्टे के बड़े नेटवर्क का संचालन करने के मामले में गिरफ्तार आरोपी करण चौधरी उर्फ करण अग्रवाल को बिलासपुर हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। माननीय न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने मामले की गंभीरता और पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों को देखते हुए आरोपी की पहली जमानत याचिका खारिज कर दी है।

    इस पूरे मामले की शुरुआत 26 अप्रैल 2026 को हुई थी, जब सिटी कोतवाली पुलिस ने गद्दी चौक स्थित A-1 कैफे के संचालक हर्षित देवांगन को “लाइन गुरु” (Line Guru) सट्टा ऐप के जरिए चेन्नई सुपर किंग्स, गुजरात टाइटंस जैसी टीमों के मैचों पर ऑनलाइन सट्टा खिलाते पकड़ा था।

    पुलिस पूछताछ में हर्षित ने खुलासा किया था कि वह जसमीत बग्गा उर्फ गुड्डा सरदार और करण चौधरी के इशारे पर सट्टेबाजी के इस नेटवर्क में शामिल हुआ था। इस बड़े खुलासे के बाद पुलिस ने 12 मई 2026 को करण चौधरी को गिरफ्तार किया था। मामले में पुलिस ने छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 की धारा 4 और 7, भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 और आईटी एक्ट (IT Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।

    पुलिस की केस डायरी और जांच के दौरान दर्ज किए गए 7 प्रमुख गवाहों के बयानों के अनुसार, आरोपी करण चौधरी सीधे अपने बैंक खाते से लेन-देन करने के बजाय दूसरों के खातों (जैसे दुर्गा फ्यूल्स और एम.डी. फ्यूल्स) का इस्तेमाल कर सट्टे का पैसा कलेक्ट करता था। पुलिस जांच में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब करण चौधरी के मेमोरेंडम (बयान) के आधार पर ही सह-आरोपी पुष्कर अग्रवाल और सुनील अग्रवाल के ठिकाने से पुलिस ने 1 करोड़ 2 लाख 60 हजार 300 रुपये (1,02,60,300 रुपये) की भारी-भरकम नकदी और नोट गिनने की मशीन जब्त की थी। इसके अलावा करण के पास से 21 हजार रुपये नकद और मोबाइल भी बरामद हुआ था, जिसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) में उसकी गुड्डा सरदार से लगातार बातचीत की पुष्टि हुई है।

    आरोपी जसमीत बग्गा उर्फ गुड्डा सरदार

    दलीले..

    जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि मोबाइल या नकदी की जब्ती मात्र से यह साबित नहीं होता कि आवेदक सट्टेबाजी में शामिल है। हालांकि, राज्य शासन के अधिवक्ता ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि आरोपी करण चौधरी के खिलाफ पूर्व में भी जुआ एक्ट सहित कुल 19 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

    छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

    दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया आरोपी की संगठित ऑनलाइन सट्टेबाजी के नेटवर्क में सक्रिय भूमिका नजर आती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले में अभी पुलिस की जांच जारी है, मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन) खंगाले जा रहे हैं और चार्जशीट भी पेश नहीं की गई है, इसलिए आरोपी को फिलहाल जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

  • बिलासपुर में जलभराव और बिजली कटौती पर High Court’ सख्त, कहा- सिर्फ योजना नहीं, जनता को दिखना चाहिए परिणाम…

    बिलासपुर में जलभराव और बिजली कटौती पर High Court’ सख्त, कहा- सिर्फ योजना नहीं, जनता को दिखना चाहिए परिणाम…

     आंधी-तूफान और भारी बारिश के दौरान बिलासपुर शहर में होने वाले जलभराव और लगातार बिजली कटौती के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि केवल कार्ययोजना तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका असर आम नागरिकों को जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए।

    मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नगर निगम, बिजली वितरण कंपनी और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है।

    बारिश में शहर की व्यवस्था फिर हुई बेपटरी

    हाल के दिनों में हुई तेज बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में घंटों पानी भरा रहा। सड़कों, कॉलोनियों और बाजार क्षेत्रों में जलभराव के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं तेज हवा और बारिश के दौरान कई इलाकों में बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें भी सामने आईं।

     

    याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि हर साल मानसून में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी काम नहीं हो रहा है।

    कोर्ट ने अधिकारियों से मांगा जवाब

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और बिजली लाइनों के रखरखाव को लेकर क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि जिन क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित किया गया था, वहां अब तक क्या सुधार कार्य पूरे हुए हैं।

    कोर्ट ने कहा कि अगर योजनाएं केवल फाइलों तक सीमित रहें और जनता को राहत न मिले, तो ऐसी योजनाओं का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

    “जमीनी असर दिखना चाहिए”

    न्यायालय की टिप्पणी काफी सख्त रही। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन बार-बार कार्ययोजना और बैठकों का हवाला देता है, लेकिन नागरिकों को न तो जलभराव से राहत मिल रही है और न ही निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो पा रही है।

    अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही तय होना जरूरी है और यह सुनिश्चित किया जाए कि मानसून के दौरान नागरिकों को न्यूनतम असुविधा हो।

    हाईकोर्ट ने नगर निगम को जल निकासी व्यवस्था की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बिजली विभाग से कहा गया है कि बार-बार होने वाली कटौती के कारणों और उन्हें रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी शपथपत्र के साथ प्रस्तुत की जाए।