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  • डॉ रमन ने 3 पेज मे दिया लिखित जवाब और पुलिस के कामकाज पर ही उठा दिए सवाल…

    डॉ रमन ने 3 पेज मे दिया लिखित जवाब और पुलिस के कामकाज पर ही उठा दिए सवाल…

    रायपुर। पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने सिविल लाइन पुलिस की नोटिस का तीन पेज में लिखित जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि मैं एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी का उपाध्यक्ष हूं एवं 15 वर्षों तक छत्तीसगढ़ प्रदेश का मुख्यमंत्री रहा हूं, इस दौरान मैंने छत्तीसगढ़ पुलिस को बहुत ही सजगता एवं स्वच्छ छवि के साथ काम करते देखा है परंतु विगत 2 वर्षों से यह छवि धूमिल होती जा रही है। छत्तीसगढ़ पुलिस विगत वर्षों में अपने राजनीतिक आकाओं को प्रसन्न करने के लिए एक के बाद एक झूठी, राजनीतिक एवं व्यक्तिगत विद्वेष पूर्ण एफआईआर दर्ज कर रही है। जिस पर विभिन्न न्यायालयों द्वारा समय-समय पर हस्तक्षेप कर रोक लगाई गई है।

    मैं एक जिम्मेदार नागरिक हूं एवं राजनीतिक जीवन निर्वहन करने के कारण भी मेरा यह दायित्व है कि राष्ट्रहित एवं जन सामान्य के हितों की रक्षा करूं। वर्तमान समय में जब देश कोविड-19 जैसी आपदा से जूझ रहा है तब कांग्रेस पार्टी ऐसी विपदा को भी अपने स्वार्थ एवं राजनीतिक हित के अवसर के रूप में प्रयोग करते हुए आम जनता को विभिन्न प्रकार से दिग्भ्रमित कर रही है। ऐसी राजनीतिक पार्टी जो 70 वर्षों तक राष्ट्र में सरकार चला रही थी का दायित्व है कि वह राजनीति से ऊपर उठकर जनसामान्य को आपदा से राहत दिलाने के लिए कार्य करें किन्तु इसके सर्वथा विपरीत कांग्रेस पार्टी लोगों को दिग्भ्रमित करने के लिए सुनियोजित षडय़ंत्र कर अपने कार्यकर्ताओं को केन्द्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे योजनाओं एवं कार्यक्रमों को बाधित एवं बदनाम करने के लिए निर्देशित कर रही है।

    उपरोक्त कृत्य अत्यंत दुखी एवं व्यथित होकर मेरे द्वारा आम जनता को सही तथ्य बताने के उद्देश्य से मेरा ट्वीटर मैसेज 18 मई 2021 प्रसारित किया गया। संदेश का उद्देश्य सत्य को सामने लाना एवं जन सामान्य में उत्पन्न भ्रांति को दूर करना था। मेरे द्वारा किया गया ट्वीट राष्ट्र हित को ध्यान रखकर एवं जनता में जागरूकता कराने के उद्देश्य किया गया था जिस पर छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा एक बार फिर से सरकार के दबाव में आधारहीन एफआईआर लिखा गया है। पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर से प्रथम दृष्टिया कोई अपराधिक मामला प्रदर्शित नहीं होता है परंतु क्योंकि हम एक विधि को मानने वाले नागरिक हैं, अत: उपरोक्त संदर्भित नोटिस के माध्यम से आपके द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर निम्नानुसार है।

    उत्तर 1-मेरा ऑफिशियल ट्वीटर अकाउंट या हैंडल @drramansingh है।
    उत्तर 2-मेरा ट्वीटर पेट एवं उसमें पोस्ट किए गए मैसेज एवं कमैंट्स सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है एवं उसको आपके द्वारा कहीं से भी पढ़ा एवं देखा जा सकता है।

    मेरा ट्वीटर अकाउंट में व्यक्तिगत जानकारियां हैं, अत: आपके द्वारा मेरे ट्वीटर अकाउंट की चाही गई एक्सेस विधिक एवं संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन में हैं एवं उससे मेरे निजता के मौलिक अधिकारों का हनन होगा।

    उत्तर 3- मेरे ट्वीटर संदेश 18 मई 2021 मेें मेरे व्यक्तिगत विचारों के साथ संलग्र दस्तावेज ट्वीट करने के पूर्व से हैं, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होकर प्रसारित हो रहे थे।
    उत्तर 4- मेरे ट्वीटर संदेश से जुड़े जो भी संचार-संवाद हुए हैं वो सभी मेरे ट्वीटर पेज पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।

    मेरे द्वारा 18 मई 21 को किया गया संदर्भित ट्वीट मेरे विचारों की अभिव्यक्ति है। ऐसे समय में जब राष्ट्र कोविड-19 जैसे गंभीर महामारी से जूझ रहा है तब कांग्रेस पार्टी के माध्यम से सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान चलाकर, जनता को दिग्भ्रमित कर अराजकता फैलाने का दुष्कृत्य कर रही है। आधारहीन एफआईआर के माध्यम से मेरे अभिव्यक्ति के अधिकार और मेरी आवाज को दबाने का जो प्रयास किया जा रहा है वह निहायत ही असंवैधानिक एवं निंदनीय है। पुलिस द्वारा जल्दबाजी में दबाववश शिकायतकर्ता का कथन दर्ज किए बिना एवं उसके शिकायत की सत्यता को परखे बिना ही प्राथमिकी दर्ज कर लिया गया है एवं जिस प्रकार के प्रश्न मुझसे पूछे गए, उससे प्रदर्शित होता है कि यह पूरी कार्यवाही कांग्रेस पार्टी के झूठे साख को बचाने के लिए पुलिस के शक्तियों का दुरूपयोग करके किया गया है। यह एफआईआर मुझे व्यक्तिगत रूप से प्रताडि़त कर डराने एवं मेरी आवाज को दबाकर राजनीतिक द्वेष से मेरी छवि को धूमिल करने के लिए की गई है।

  • थप्पड़कांड पर बिफरा विपक्ष: पूर्व मंत्री अजय चंद्रकर ने CM से कहा- मैं अधिकारियों से मार खाना चाहता हूं

    थप्पड़कांड पर बिफरा विपक्ष: पूर्व मंत्री अजय चंद्रकर ने CM से कहा- मैं अधिकारियों से मार खाना चाहता हूं

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में हुए थप्पड़कांड़ की गूंज देशभर में सुनाई दी है. अब इस थप्पड़कांड़ को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में सियासी पारा तेज हो गया है. पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने सरकार की कार्रवाई को लेकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी मैं अधिकारियों से मार खाना चाहता हूं, आप उनका ट्रांसफर तत्काल करेंगे क्या?

    पूर्व मंत्री अजय चंद्रकर ने CM से किया सवाल

    अजय चंद्राकर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके सीएम भूपेश बघेल से सवाल किया है. उन्होंने लिखा कि मैं अधिकारियों से मार खाना चाहता हूं, आप उनका ट्रांसफर तत्काल करेंगे क्या? छत्तीसगढ़ के निवासियों को ट्रांसफर करवाने के लिए सिर्फ मार खाने की जरूरत पड़ेगी. सारे प्रशासनिक झंझट लेन-देन से मुक्ति. नई प्रशासनिक शैली के लिए आपको बधाई।

    कलेक्टर रणबीर शर्मा पर हुई कार्रवाई

    बता दें कि सूरजपुर कलेक्टर रणबीर शर्मा को युवक को बीच सड़क पर थप्पड़ जड़ने के आरोप में हटा दिया गया है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घटना के बाद कलेक्टर को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए थे. सीएम ने ट्वीट कर बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से सूरजपुर कलेक्टर रणबीर शर्मा द्वारा एक नवयुवक से दुर्व्यवहार का मामला मेरे संज्ञान में आया है. यह बेहद दुखद और निंदनीय है. छत्तीसगढ़ में इस तरह का कोई कृत्य कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. कलेक्टर रणबीर शर्मा को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए हैं।

    सूरजपुर कलेक्टर रणबीर शर्मा को सयुंक्त सचिव मंत्रालय में नियुक्त किया गया है. इसी को लेकर पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाया है।

  • विवादों में घिरे बाबा रामदेव,योग गुरु के सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस बयान से मचा बवाल…

    विवादों में घिरे बाबा रामदेव,योग गुरु के सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस बयान से मचा बवाल…

    क्या कहा था बाबा रामदेव ने….“एलोपैथी ऐसी बेकार साइंस है कि पहले इनकी हाईड्रोऑक्सीक्लोरोक्विन फेल हो गई, फिर रेमडेसिविर फेल हो गई। फिर एंटीबायोटिक्स इनके फेल हो गए, स्टेरॉयड फेल हो गए। प्लाज्मा थेरेपी के ऊपर भी कल बैन लग गया। आइवरमेक्टिन भी फेल हो गई। बुखार के लिए फैबिफ्लू दे रहे हैं, वो भी फेल है।”

    एलोपैथी दवाओ को लेकर हुआ विवाद…

    भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने शनिवार को केन्द्र सरकार से मांग किया कि ‘अज्ञानता भरी’ टिप्पणी करके कथित रूप से लोगों को भ्रमित करने और एलोपैथी दवाओं को ‘मूर्खतापूर्ण विज्ञान’ बताने के लिए योग गुरु बाबा रामदेव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, वहीं हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट ने इस टिप्पणी से इंकार करते हुए इसे ‘गलत’ बताया।

    आईएमए ने आरोप लगाया कि रामदेव स्थिति का फायदा उठाने और व्यापक पैमाने पर लोगों के बीच डर तथा आक्रोश पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। आईएमए ने कहा कि वह ऐसा इसलिए कर रहे हैं। ‘ताकि वह अपनी गैरकानूनी और गैर मान्यता प्राप्त तथाकथित दवाएं बेच सकें और लोगों की जान की कीमत पर पैसा कमा सकें।’

    स्वास्थ्य मंत्री से कही ये बात

    उसने कहा, ‘आईएमए मांग करती है और यह संकल्प लेती है कि अगर मंत्री हर्षवर्धन स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई नहीं कर रहे हैं तो हमें आम आदमी के समक्ष सच्चाई लाने के लिए लोकतांत्रिक माध्यमों का सहारा लेना पड़ेगा और न्याय पाने के लिए न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।’

    वहीं दूसरी ओर बाबा रामदेव के बयान पर दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने शनिवार को पुलिस में शिकायत दर्ज करायी है।  पुलिस को दी गई शिकायत के साथ सौंपे गए बयान में डीएमए ने आरोप लगाया है, ‘संकट की इस घड़ी में पूरा देश महामारी के खिलाफ लड़ रहा है, अपना और अपने परिवार की जान जोखिम में डाल रहा है, जो संसाधन हैं, उन्हीं के बल पर मुकाबला कर रहा है। बाबा रामदेव ने निजी हित के लिए मेडिकल साइंस और मेडिकल पेशे की धज्जियां उड़ायी हैं।

    इस act के तहत हो कार्रवाई…

    रामदेव ने आगे कहा, “लोग कह रहे हैं कि यह क्या तमाशा हो रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आप बॉडी का तापमान उतार देते हो, लेकिन शरीर के अंदर उस वायरस को खत्म नहीं कर रहे हो। जिस कारण बुखार हो रहा है उसका तो निवारण तुम्हारे पास है नहीं। इसलिए मैं जो बात कह रहा हूं, उस पर हो सकता है कि कुछ लोग इस पर बड़ा विवाद करें। लाखों लोगों की मौत एलोपैथी की दवा खाने से हुई है। जितने लोगों की मौत हॉस्पिटल न जाने और ऑक्सीजन न मिलने से हुई है, उससे ज्यादा मौतें एलोपैथी की वजह से हुई है। स्टेरॉयड की वजह से हुई है।”

    एसोसिएशन ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि झूठी जानकारी फैला रहे इस तरह की वीडियो पर लगाम लगाई जाए। एसोसिएशन ने कहा, ‘रामदेव के खिलाफ महामारी अधिनियम, 1987 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए। हम उनसे बिना शर्त माफी मांगने की मांग करते हैं. ऐसा न होने पर हम विरोध प्रदर्शन का आह्वान करेंगे।’

    बाबा रामदेव ने एलोपैथी पर दिए विवादित बयान लिया वापस, वाट्सएप मैसेज को दिया दोष…


    योग गुरु बाबा रामदेव ने डॉ. हर्षवर्धन कोगू पत्र लिखकर कहा, ”हम आधुनिक चिकित्सा विज्ञान तथा एलोपैथी के विरोधी नहीं हैं. हम यह मानते हैं कि जीवन रक्षा प्रणाली तथा शल्य चिकित्सा के विज्ञान में एलोपैथी ने बहुत प्रगति की है और मानवता की सेवा की है. मेरा जो बयान कोट किया गया है, वह एक कार्यकर्ता बैठक का है, जिसमें मैंने आए हुए वॉट्सऐप मैसेज को पढ़कर सुनाया था. उससे अगर किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मुझे खेद है.”

    रामदेव ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को लिखे पत्र को ट्वीट करते हुए कहा, ”माननीय  डॉ. हर्षवर्धन जी, आपका पत्र प्राप्त हुआ. उसके संदर्भ में चिकित्सा पद्दतियों के संघर्ष के इस पूरे विवाद को खेदपूर्वक विराम देते हुए मैं अपना वक्तव्य वापस लेता हूं और यह पत्र आपको संप्रेषित कर रहा हूं.” योग गुरु ने पत्र में आगे कहा है कि यदि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने चेचक, पोलियो एवं टीबी आदि गंभीर रोगों का इलाज खोजा है तो योग, आयुर्वेद आदि द्वारा हमने बीपी, शुगर, थायराइड, अर्थराइटिस, लिवर आदि का स्थाई समाधान दिया है. हमने भी आयुर्वेद एवं योग के प्रयोग से करोड़ों लोगों की जान बचाई है, जिसका सम्मान होना चाहिए.”

    रामदेव ने आखिर में लेटर में लिखा है कि आगे भी कोरोना और कोरोना के कॉम्प्लिकेशंस से लड़ने के लिए तथा पूरी मानवता को रोक मुक्ति करने के लिए सब पद्धतियों के समन्वय से मानवता की सेवा करने के हम पक्षधर हैं और हमेशा रहेंगे।

  • जिला पंचायत CEO की गर्भवती पत्नी का कोरोना से निधन, कलेक्ट्रेट में थी पदस्थ, एम्स में ली अंतिम सांस…

    जिला पंचायत CEO की गर्भवती पत्नी का कोरोना से निधन, कलेक्ट्रेट में थी पदस्थ, एम्स में ली अंतिम सांस…

    गरियाबंद। जिला पंचायत सीईओ (CEO) की गर्भवती पत्नी करिश्मा दुबे वर्मा का आज सुबह कोरोना से निधन हो गया. वे जिला कलेक्ट्रेट भू-अभिलेख शाखा में पदस्थ थी. जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी एनआर नवरत्न ने उनके निधन की पुष्टि की है।

    सीएचएमओ नवरत्न ने बताया कि करिश्मा कोरोना से संक्रमित थी और पिछले कई दिनों से रायपुर एम्स में भर्ती थी. आज सुबह उनका निधन हो गया।

    जानकारी के मुताबिक, तहसीलदार करिश्मा दुबे वर्मा चार माह की गर्भवती थी. एक मई को वे कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी. वहीं 6 मई को तबीयत ज्यादा बिगड़ने के बाद उन्हें एम्स में भर्ती किया गया था. वे लगातार डॉक्टरों की निगरानी में थी और आज सुबह साढ़े 6 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. उनका अंतिम संस्कार सारागांव के पास निलजा गांव में किया जाएगा।


    बता दें कि तहसीलदार करिश्मा दुबे वर्मा जिला पंचायत CEO चंद्रकांत वर्मा की पत्नी थी. शिक्षाकर्मी नेता वीरेंद्र दुबे की सगी साली थी. उनके निधन पर कलेक्टर निलेशकुमार क्षीरसागर सहित कलेक्ट्रेट के अधिकारियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

  • पाकिस्तान के लिए जासूसी करती पकड़ाई दो बहनें,सबसे करती थी राम राम पूछताछ जारी, जांच एजेंसियों का बढ़ता जा रहा है शक…

    पाकिस्तान के लिए जासूसी करती पकड़ाई दो बहनें,सबसे करती थी राम राम पूछताछ जारी, जांच एजेंसियों का बढ़ता जा रहा है शक…

    मध्य प्रदेश में इंदौर के समीप स्थित महू सैन्य छावनी में जासूसी के शक में नजरबंद की गई दो लड़कियों हिना और यास्मीन ने पकड़े जाने के पूर्व ही अपनी वह फेसबुक आइडी डिलीट कर दी थी, जिनसे वह पाकिस्तानियों से चैटिंग करती थीं। दोनों ने पाकिस्तानियों के मोबाइल नंबर लड़कियों के नाम से सेव कर रखे थे। जांच एजेंसियां इस बिंदु पर पड़ताल कर रही हैं। डाटा रिकवर करने के लिए जब्त गैजेट्स को साइबर विशेषज्ञों के पास भोपाल भेजा गया है।


    मध्य प्रदेश के महू सैन्य छावनी से पकड़ी गई दोनों बहनों से आइबी और क्राइम ब्रांच ने की पूछताछ
    चैट करने वाले पाकिस्तानियों की लोकेशन भी ट्रेस की जा रही है। उनकी आइडी कोडवर्ड में बनी थी। आइबी, क्राइम ब्रांच और मिलिट्री इंटेलीजेंस इन्हें डिकोड करने का प्रयास कर रही हैं। हिना और यास्मीन उच्च शिक्षित हैं। सैन्य विज्ञान में पढ़ाई के अलावा दोनों ने हिंदी साहित्य में एमए भी किया है। जांच में शामिल अधिकारी के मुताबिक प्रारंभिक पूछताछ में यास्मीन की भूमिका संदिग्ध मिली है।

    उसका ही संपर्क पाकिस्तानी आइडी पर अधिक बार हुआ है। यास्मीन ने बताया कि करीब डेढ़ वर्ष पूर्व उसकी एक पाकिस्तानी से दोस्ती हुई थी। फेसबुक आइडी अंग्रेजी के दो शब्दों में बनी थी। कुछ महीनों चैटिंग के बाद वह अचानक गायब हो गया और थोड़े दिनों बाद एक अन्य व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। फिर वह भी चला गया और इस तरह तीन-चार पाकिस्तानियों से दोस्ती करती गई।


    लड़कियों के नाम से सेव किए थे पाकिस्तानियों के नंबर, कई सैनिक भी जांच की जद में

    इसके बाद से इन पर लगातार नजर रखी जाने लगी। चार दिन पहले भोपाल से इंटेलिजेंस ब्यूरो, एटीएस तथा स्थानीय आर्मी इंटेलिजेंस की टीम ने इनके घर पर गोपनीय तरीके से दबिश दी थी। इसके बाद यहां लगातार कई गाड़ियां आती रहीं और लोगों को शक हुआ। इसके बाद खबर उजागर हुई। अब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआइए) भी इनसे पूछताछ कर सकती है।
    जानकारी के मुताबिक इन बहनों के नाम यास्मीन कौसर और हिना हैं। दोनों से लगातार पूछताछ की जा रही है। इनके पास से मिले लैपटाप और मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं। बताया जाता है कि इन्हें मारीशस से फंडिंग हो रही थी। इनके पिता सेना में नौकरी कर चुके थे और बाद में इंदौर में एसबीआइ की एक शाखा में सुरक्षाकर्मी भी रहे। उनकी मृत्यु हो चुकी है।

    विभिन्न जगह पर काम कर जुटाती थीं जानकारी

    दोनों बहनें कई जगह नौकरी कर चुकी हैं। वे कहीं भी ज्यादा दिनों तक नहीं रहतीं थीं। हिना महू में बिजली कंपनी में कांट्रेक्ट पर काम करती रही। बिजली कंपनी से मिली सूचना के मुताबिक हिना पिछले छह महीनों से कंप्यूटर आपरेटर के तौर पर प्राइम वन एजेंसी के जरिए काम कर रही थी। बाद में उसे हटा दिया गया। ऐसा बताया जाता है कि ये कई जगहों पर काम करके अलग-अलग जानकारियां एकत्रित करती थीं।

    दरअसल, दोनों बहनों का कहना है कि वो पाकिस्तान में जिन युवकों से बातचीत करती थीं उनसे वो शादी करना चाहती थी. इसके बाद संभावना जताई जा रही है कि दोनों बहनें कहीं आईएसआई की किसी साजिश का शिकार तो नहीं? हालांकि इसके बारे में अबतक कोई खास सबूत सुरक्षा एजेंसियों के हाथ नहीं आए हैं।

    दोनों युवतियों से अबतक पूछताछ में जो तथ्य सामने आए हैं, उसके मुताबिक उनके कॉल रिकार्ड्स से इस बात की पुष्टि तो हो चुकी है कि युवतियां पाकिस्तान के युवकों से बातचीत और चैटिंग करती रहती थीं. एजेंसियां की जांच में फिलहाल ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि इन्होंने गोपनीय दसतावेज या सैन्य ठिकानों की जानकारी पाकिस्तान में बैठे युवकों को भेजे हों. जो सबसे बड़ा सवाल है वो यह कि इनमें से एक युवती ने फेसबुक पर फेक प्रोफाइल क्यों बनाया था और बाद में उसे डिलीट क्यों किया?

    बहरहाल, फिलहाल दोनों बहनों पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है और उनसे घर पर ही पूछताछ की जा रही है. हालांकि जिन पाकिस्तानी युवकों से वो बात करती थीं, पुलिस के मुताबिक उनकी गतिविधियां ज़रूर संदिग्ध रही हैं. इसलिए मामला संजीदा हो जाता है. बता दें कि महू सैन्य छावनी पहले भी आईएसआई के निशाने पर रह चुका है. इससे पहले यहां 2019 में एक जवान को गिरफ्तार किया गया था जो आईएसआई के हनीट्रैप जाल में फंसा हुआ था।

  • न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त….

    न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त….

    रायपुर। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा को 1 जून 2021 से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है. इसकी अधिसूचना 24 मई को जारी की गई है. दरअसल, मुख्य न्यायाधीश पीआर रामचंद्र मेनन 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, इसलिए न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी दी गई है. इससे पहले भी न्यायमूर्ति मिश्रा यह जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

    बता दें कि पिछली बार मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी को लोकपाल समिति का सदस्य बनाया गया था. उस दौरान उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हुआ था. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वरिष्ठता के आधार पर जस्टिस प्रशांत मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया था।


    जस्टिस प्रशांत मिश्रा वर्ष 1964 में रायगढ़ में जन्मे थे. उन्होंने बीएससी और एलएलबी की उपाधि गुरू घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर से प्राप्त की. वे 1987 में अधिवक्ता बने. उन्होंने जिला न्यायालय रायगढ़, जबलपुर स्थित उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश और बिलासपुर स्थित उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ में वकालत की।

    उन्हें जनवरी 2005 को उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता मनोनित किया गया. वे 2 वर्षों तक छत्तीसगढ़ राज्य विधि परिषद के अध्यक्ष रहे. जस्टिस मिश्रा उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के नियमकारी समिति के सदस्य रहे. वे गुरू घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कार्यकारी परिषद के कुलाधिपति भी नामित किये गए।

    जस्टिस मिश्रा हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, रायपुर के कार्यकारी परिषद में पदेन सदस्य के तौर पर सम्बद्ध रहे. उन्होंने 2004 से 2007 तक छत्तीसगढ़ राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता के तौर पर कार्य किया. 1 सितम्बर 2007 से अपने उन्न्यन तक उन्होंने राज्य के महाधिवक्ता के तौर पर कार्य किया. 2009 को वे बिलासपुर उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदस्थ हुए।

  • योगगुरु रामदेव के डेयरी कारोबार के सीईओ सुनील बंसल का निधन, अस्पताल में थे भर्ती…

    योगगुरु रामदेव के डेयरी कारोबार के सीईओ सुनील बंसल का निधन, अस्पताल में थे भर्ती…

    कोरोना से मौत के लिए एलोपैथी दवाओं को जिम्मेदार मानने वाले बाबा रामदेव के कंपनी के सीईओ सुनील बंसल की कोरोना से मौत हो गई। वे 57 वर्ष के थे। बताया जाता है कि उनके फेफड़े बुरी तरह संक्रमित हो गए थे जिस कारण उन्हें नहीं बचाया जा सका। अब बाबा रामदेव के उस दावे पर फिर से सवाल उठ रहे हैं जिसमें उन्होंने कोरोनिल लांच करते समय की थी।

    बाबा रामदेव द्वारा कोरोनिल लांच करते समय जो कहा था, दावे किए थे उसमें से कई उसी समय झूठे साबित हो गए थे, लेकिन दवा के असर संबंधी दावे की भी हवा निकल गई है। बाबा रामदेव और उनकी टीम ने यह दावा किया था कि कोरोनिल के सेवन से फेफड़े में इन्फेक्शन नहीं होगा, यह दवा कोरोना को रोकने में काफी मददगार साबित होगा।

    साथ में उन्होंने उस समय WHO से प्रमाणित भी बताया था, जिसका खंडन तत्काल WHO ने कर दिया था।
    सुनील बंसल बाबा रामदेव के डेयरी प्रोडक्ट के विभाग को देखते थे। सुनील को डेयरी साइंस में एक महत्वपूर्ण स्थान मिला हुआ था। वे 2018 में बाबा रामदेव से जुड़े थे। पतंजलि से जुड़ने के बाद उन्होने इस क्षेत्र में बड़ा काम किया था यही कारण है कि पतंजलि का डेयरी प्रोडक्ट की मांग बढ़ गई थी। बताया जाता है कि बंसल को कुछ दिन पहले ECMO या एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन मशीन पर रखा गया था। क्योंकि उनके दिल और फेफड़े न के बराबर काम कर रहे थे।
    फिलहाल बाबा रामदेव लोगों के निशाने पर हैं। उनका कहना है कि कोरोनिल यदि संक्रमण रोकने में प्रभावी होता तो क्या सुनील बंसल की मौत कोरोना से होती ?

    अभी कुछ दिन पहले ही बाबा रामदेव ने यह कहकर विवाद पैदा कर दिया था कि कोरोना से मौत एलोपैथी दवाओं की वजह से हो रही है। हालांकि बाद में उन्होंने माफी भी मांग ली थी।

  • पूर्व सी एम डॉ रमन सिंह टूल किट मामले में गिरफ्तारी देने पहुँचे सिविल लाइन थाना, पुलिस ने बाहर ही रोका…

    पूर्व सी एम डॉ रमन सिंह टूल किट मामले में गिरफ्तारी देने पहुँचे सिविल लाइन थाना, पुलिस ने बाहर ही रोका…

    रायपुर। टूलकिट मामले में एफआईआर दर्ज करने के विरोध में छत्‍तीसगढ़ के पूर्व मुख्‍यमंत्री डॉक्‍टर रमन सिंह के अपनी गिरफ्तारी देने के लिए सोमवार को सिविल लाइन थाने पहुंचे. यहां पुलिस ने उन्‍हें पुलिस स्‍टेशन के बाहर ही रोक दिया. इस पर रमन सिंह थाने के बाहर ही धरने पर बैठ गए हैं. वह अपनी गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं. उनके साथ विष्‍णुदेव साय, धरमलाल कौशिक, बृजमोहन अग्रवाल और राजेश मूणत जैसे वरिष्‍ठ नेता भी धरने पर बैठ गए हैं. वहीं, मौके पर भाजपा कार्यकर्ता लगातार नारे लगा रहे हैं।

    इस मामले में राजनीतिक सरगर्मियां अचानक बढ़ गई हैं. छत्तीसगढ़ बीजेपी ने प्रदेश व्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया है. प्रदेश के सभी थानों में रमनसिंह के समर्थन में भाजपा कार्यकर्ता 05-05 की संख्या में सभी थानों पर आज 3 बजे से प्रदर्शन कर गिरफ्तारी देंगे. बता दें कि टूलकिट FIR के विरोध में सरकार के खिलाफ भाजपा का प्रदर्शन जारी है।

    टूलकिट विवाद का सबसे ज्यादा असर छत्तीसगढ़ में देखने को मिल रहा है. छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी दल कांग्रेस पहले बीजेपी पर हमलावर हुई तो इससे एक कदम आगे बढ़कर पुलिस प्रशासन ने बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सहित बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पूछताछ का नोटिस भेज दिया।

    सिविल लाइन पुलिस द्वारा भेजे गए नोटिस के अनुसार राजधानी रायपुर की सिविल लाइन पुलिस 24 मई को दोपहर 12:30 बजे रमन सिंह के निवास स्थान जाकर उनसे पूछताछ करने वाली थी. इस पर बड़ा दांव चलते हुए रमन सिंह सहित कुल 5 नेता आज सुबह 10:00 बजे सिविल लाइन थाने पहुंचकर अपनी गिरफ्तारी की मांग करने लगे।

    अब रायपुर के सिविल लाइन पुलिस ने जिस टूलकिट मामले में एफआईआर दर्ज कर सिंह को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए समय तय किया है, उससे पहले ही डॉ. सिंह द्वारा थाने पहुंचकर गिरफ्तारी देने की मांग के तहत पुलिस के सामने उलझन पैदा हो गई है. पुलिस ने जिन्हें आरोपी बनाया है, वही जब खुद गिरफ्तारी देने थाने पहुंचे तो पुलिस की परेशानी बढ़ गई।

  • रायगढ़ कलेक्टर ने लगाया जिंदल और संजीवनी हॉस्पिटल पर 50-50 हजार का जुर्माना, जानिए पूरा मामला…

    रायगढ़ कलेक्टर ने लगाया जिंदल और संजीवनी हॉस्पिटल पर 50-50 हजार का जुर्माना, जानिए पूरा मामला…

    रायगढ़। छत्तीगढ़ में कोरोना वायरस ने हर तबके पर अपना कहर बरपाया है. इस बीच मौके का फायदा उठाकर बचा-कुचा असर अस्पताल निकाल रहे हैं. कई अस्पताल ऐसे हैं, जो अपने स्वार्थ के लिए कोरोना मरीजों को स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ नहीं देने रहे हैं. इनमें से जिंदल और संजीवनी अस्पताल का नाम शामिल है. ऐसे में रायगढ़ कलेक्टर ने कार्रवाई की है. कलेक्टर भीम सिंह ने जिंदल और संजीवनी अस्पताल पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

    जिंदल और संजीवनी हॉस्पिटल पर जुर्माना

    सरकार के निर्देशानुसार पंजीकृत निजी कोविड चिकित्सालयों में भर्ती होने वाले कोविड मरीजों को डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजनांतर्गत नि:शुल्क स्वास्थ्य लाभ प्रदाय किया जाना है, लेकिन जिंदल हॉस्पिटल और संजीवनी नर्सिंग होम रायगढ़ ने शासन के निर्देशों का पालन नहीं किया।

    अस्पतालों पर लगा 50-50 हजार रुपये का जुर्माना

    कलेक्टर भीम सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लिया. दोनों अस्पतालों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. कलेक्टर ने कोविड प्रबंधन के लिए आयोजित बैठकों में सभी निजी कोविड अस्पताल संचालकों को डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को इसका लाभ देने के निर्देश दिए थे. लाभ नहीं देने की स्थिति में कार्रवाई की बात कही थी।

    इसलिए लगा जुर्माना

    बता दें कि बीते दिनों आयोजित बैठक में उन्होंने CMHO को अस्पतालों की जानकारी वेरीफाई करने और जिन अस्पतालों में शासन के निर्देशों के अनुरूप हितग्राहियों को लाभ नहीं दिया जा रहा है, उन पर 50 हजार का जुर्माना लगाने के निर्देश दिए थे. स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में योजना अंतर्गत लाभान्वित मरीजों की जानकारी तैयार की, जिसमें पाया गया कि जिंदल हॉस्पिटल और संजीवनी नर्सिंग होम में निर्देशानुसार पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ नहीं दिया गया, जिसके लिए उन पर यह जुर्माना लगाया गया है।

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    मुख्यमंत्री को धमकी, चार द‍िन में जो करना है कर लो, मचा हड़कंप,आलाधिकारियों ने जारी किया अलर्ट…

    यूपी 112 कंट्रोल रूम के वाट्सएप नंबर पर मैसेज कर उत्‍तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी दी गई। मैसेज मिलते ही आलाधिकारियों ने अलर्ट जारी कर दिया। कंट्रोल रूम मुख्यालय 112 के ऑपरेशन कमांडर अंजुल कुमार की तहरीर पर सुशांत गोल्फ सिटी थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। सर्विलांस समेत पुलिस की कई टीमें संदिग्ध नंबर की पड़ताल करने के साथ ही उसकी लोकेशन ट्रेस करने में लग गईं हैं। 

    जानकारी के मुताबिक बीते 29 अप्रैल को देर शाम 7ः58 बजे यूपी पुलिस कंट्रोल रूम 112 के वाट्सएप नंबर पर एक अंजान नंबर से मैसेज आया था। मैसेज में सीएम योगी को पांचवे दिन जान से मार देने की धमकी दी गई थी। मैसेज में धमकी देने वाले ने कहा कि चार दिन के अंदर मेरा जो कुछ कर सकते हो कर लो। मैसेज की जानकारी पुलिस कर्मियों ने कंट्रोल रूम के आपरेशन कमांडर मुख्यालय अंजुल कुमार को दी। अंजुल कुमार ने आलाधिकारियों को बताया। इसके बाद एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने एडीसी सुरक्षा मुख्यालय समेत अन्य जानकारी दी।

    पुलिस अधिकारियों ने आनन फानन अलर्ट जारी किया। इसके बाद आपरेशन कमांडर कंट्रोल रूम अंजुल कुमार की तहरीर पर सुशांत गोल्फ सिटी थाने में धमकी देने वाले नंबर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस अधिकारियों ने नंबर की लोकेशन ट्रेस करने एवं धमकी देने वाले की गिरफ्तारी के लिए सर्विलांस समेत पुलिस की कई टीमें लगी हैं। टीमें आरोपित की तलाश में दबिश दे रही हैं।

    पहले भी मिल चुकी है धमकी
    ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि उत्‍तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को जान से मारने की धमकी दी गई हो। पिछले साल दिसंबर, सितंबर और मई में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी का फोन डायल-112 पर क‍िया गया है।