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  • अधिकतर लड़कियाँ सहमति से संबंध बनाती हैं, बाद में रेप का आरोप लगाती हैं…छत्तीसगढ़ महिला आयोग अध्यक्ष का बड़ा स्टेटमेंट….

    अधिकतर लड़कियाँ सहमति से संबंध बनाती हैं, बाद में रेप का आरोप लगाती हैं…छत्तीसगढ़ महिला आयोग अध्यक्ष का बड़ा स्टेटमेंट….

    छत्तीसगढ़ महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक. इनका एक स्टेटमेंट आया है. इसमें ये कह रही हैं कि महिलाएं अपनी मर्जी से संबंध बनाती हैं और फिर रेप का आरोप लगा देती हैं. पुलिस में केस दर्ज करा देती हैं. उनके मुताबिक,

    अगर एक विवाहित व्यक्ति उनके साथ अफेयर करेगा, तो लड़कियां ये जरूर देखेंगी कि वो आदमी उन्हें सर्वाइव करने में हेल्प करेगा या नहीं, फिर वो पुलिस के पास जाएंगी. ज्यादातर मामलों में लिव-इन में रहने और सहमति के साथ रिलेशन बनाने के बावजूद वो रेप की FIR दर्ज करवाती हैं. मैं आपसे निवेदन करती हूं कि आप पहले अपने रिश्ते को समझें. अगर आप किसी ऐसे रिलेशन में हैं, तो इसका परिणाम हमेशा बुरा होगा

    ये एक नया चलन है. जैसे ही लड़की 18 साल की होती हैं. वो शादी कर लेती हैं और फिर एक बच्चे के साथ हमारे पास आती हैं. मैं उनसे अपील करना चाहती हूं कि वो पहले एजुकेटेड हों, जिम्मेदार बनें और ये सुनिश्चित करें कि जिससे उनकी शादी हो रही है, वो भी जिम्मेदार हो।

    डॉ. किरणमयी ने कहा कि दुनिया फिल्मी कहानी की तरह नहीं होती है. बच्चियों और महिलाओं को अपने अधिकार पता होने चाहिए. अगर लड़की नाबालिग है तो वो प्यार-मोहब्बत के चक्कर में न आएं।

    अब इन्हीं बातों के बीच पूर्व अध्यक्ष हर्षिता पांडेय ने मौजूदा अध्यक्ष को गैर-जिम्मेदाराना बताया है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का स्टेट वुमन कमीशन इस समय एंटी वुमन कमीशन की तरह काम कर रहा है. ज्यादातर महिलाएं सहमति से रिलेशन बनाती हैं और बाद में रेप का आरोप लगाती है, ये बयान सरासर गलत है।

    दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, हर्षिता पांडेय ने कहा कि मौजूदा अध्यक्ष के मुताबिक, अधिकांश मामलों में महिलाएं गलत होती हैं. पर धोखे से या गलत जानकारी के आधार पर मिली सहमति को सहमति नहीं माना जा सकता है. आगे उन्होंने कहा कि जिनके कंधों पर इतनी जिम्मेदारी है, जब वो ऐसी सोच रखने लगें तो राज्य में महिला आयोग को एंटी वुमन कमीशन कहना ज़्यादा सही होगा।

  • अपने बच्चों को दिलवाएं ‘दो बूंद जिंदगी की’

    अपने बच्चों को दिलवाएं ‘दो बूंद जिंदगी की’

    रायपुर। पोलियो की बीमारी से बच्चों को बचाने पल्स पोलियो अभियान 17 जनवरी से 19 जनवरी तक चलेगा। इस बार साढ़े तीन लाख बच्चों को दवा पिलाई जाएगी। इसके लिए जिले में 1,370 बूथ बनाए जाएंगे, प्रत्येक बूथ पर 4 सदस्यों की टीम मौजूद होगी। इसके साथ ही आंगनबाड़ी केन्द्रों में भी पल्स पोलिया अभियान संचालित किया जाएगा। जिसे लेकर अधिकारियों ने निर्देश जारी किये हैं।

    महिला बाल विकास विभाग अधिकारी अशोक पाण्डेय ने बताया कि पोलियो अभियान में हमेशा से ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के माध्यम से मदद की जाती है, जितने बूथ होते हैं वो सामान्यतः आंगनबाड़ी केन्द्रों में बनाए जाते है। प्रारंभ में बच्चों को केन्द्र में ही पोलियों की दवा पिलाई जाती है जो बच्चे केन्द्रों में नहीं आ सकते उन्हे घर-घर जाकर पोलियों की दवा पिलाई जाती है।

  • किसान आंदोलन को लेकर SC की तीखी प्रतिक्रिया, सरकार को दी नसीहत, कहा- राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा बन जाएगा अगर…

    किसान आंदोलन को लेकर SC की तीखी प्रतिक्रिया, सरकार को दी नसीहत, कहा- राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा बन जाएगा अगर…

    दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अगर अभी जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो किसानों का चल रहा विरोध राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा बन जाएगा और यह मामला फिर सरकार के हाथ से निकल सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने आठ किसान यूनियनों को पक्ष (पार्टी) बनाने का भी आदेश दिया. तीन किसान अधिनियमों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को हटाने की मांग वाली जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया और मामले की आगे की सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी।


    न्यायाधीश ए. एस. बोपन्ना और वी. रामसुब्रमण्यम के साथ प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे ने कुछ स्वीकार्य समाधान पर पहुंचने के लिए केंद्र, किसान यूनियनों और अन्य संबंधित हितधारकों के प्रतिनिधियों सहित एक समिति बनाने का प्रस्ताव रखा।
    प्रधान न्यायाधीश ने केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि सरकार की बातचीत काम नहीं आ रही है. प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “आपको बातचीत करने के लिए तैयार होना चाहिए और हमारे सामने किसान यूनियन होनी चाहिए।


    देश से किसान यूनियनों को मिलाकर एक समिति बनाने पर जोर देते हुए, प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “यह जल्द ही एक राष्ट्रीय मुद्दा बन जाएगा. ऐसा लगता है कि सरकार इसे सुलझा नहीं पा रही है।”
    उन्होंने सुझाव दिया कि वार्ता तभी सफल होगी, जब दोनों पक्ष ऐसे लोगों का प्रतिनिधित्व करेंगे, जो वास्तव में बातचीत के लिए तैयार हैं. सीजेआई ने इसलिए सॉलिसिटर जनरल को ऐसे संगठन के नाम के साथ आने के लिए कहा जो बातचीत के लिए तैयार है. उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि अधिकारी बातचीत के लिए तैयार हों।
    याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली-एनसीआर के सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों को इस आधार पर तत्काल हटाने की मांग की कि वे दिल्ली में कोविड-19 के फैलने का खतरा बढ़ा रहे हैं. मुख्य न्यायाधीश ने मेहता से कहा कि सरकार की वार्ता विफल हो सकती है, इसलिए, मामले को समझाने के लिए कुछ किसान यूनियनों का अदालत के सामने आना आवश्यक है।
    मेहता ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि सरकार किसानों के हित के खिलाफ कुछ भी नहीं करेगी और वह कानूनों में खंडों पर चर्चा करके चल रहे गतिरोध को दूर करने के लिए तैयार है. हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि खुले विचारों वाली चर्चा होनी चाहिए, और किसान यूनियन को कृषि कानूनों को रद्द करने पर जोर नहीं देना चाहिए।
    शीर्ष अदालत ने उन जनहित याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया, जिनमें दिल्ली की विभिन्न सीमाओं को अवरुद्ध करने वाले किसानों को हटाने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान शाहीन बाग मामले में शीर्ष अदालत के आदेश का हवाला दिया, जहां उसने कहा था कि प्रदर्शनकारी सार्वजनिक सड़कों को अवरुद्ध नहीं कर सकते।

  • 267 अफसर-कर्मियों के जाति प्रमाण पत्र फर्जी….सूची में डिप्टी कलेक्टर, उप पुलिस अधीक्षक, डॉक्टर, इंजी, शिक्षक से लेकर बड़े अधिकारी…

    267 अफसर-कर्मियों के जाति प्रमाण पत्र फर्जी….सूची में डिप्टी कलेक्टर, उप पुलिस अधीक्षक, डॉक्टर, इंजी, शिक्षक से लेकर बड़े अधिकारी…

    रायपुर। छानबीन समिति ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र प्रकरणों की जांच की है और करीब साढ़े 7 सौ प्रकरणों में 267 अफसर-कर्मियों के जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। इसमें भूतपूर्व मुख्यमंत्री स्व अजीत जोगी, पूर्व विधायक अमित जोगी समेत 18 जनप्रतिनिधियों के प्रमाण पत्र भी शािमल हैं।
    सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव डीडी सिंह ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र वालों की सूची सभी संबंधित विभागों को भेजी है और कार्रवाई की अनुशंसा की है। जानकारी के मुताबिक उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति रायपुर को 2000 से लेकर 2020 तक 758 प्रकरण मिले हैं, जिसमें से 659 प्रकरणों की जांच के बाद उसका निराकरण किया गया। 267 प्रकरणों में जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए है, जिसे संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए भेजा गया है। इसमें अधिकांश प्रकरण उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

    उल्लेखनीय है कि पिछले 2 साल में 75 प्रकरण फर्जी/गलत पाए गए है। इन प्रकरणों में हाईकोर्ट से स्थगन आदेश मिलने के बाद कई अधिकारी-कर्मचारी अपने पद पर बने हुए है।

    जिन अफसर-कर्मियों के जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं, उसकी सूची निम्नानुसार है-
    स्कूल शिक्षा विभाग

    व्याख्याता महिपाल प्रसाद, होशराम पटेल, शंभूप्रसाद निषाद, सेवाराम धनकर, हर्षित दास, कृष्ण कुमार कोटेन्द्र, सुरेन्द्र कुमार कोटेन्द्र, सहा.शिक्षिका प्रभारानी नायडू, सहा.शिक्षक जनकराम, गसतराम, हीरालाल कश्यप, टेकराम, अतुल अनुराग अर्थर, सुरेश कुमार कोष्टि, तुलसीराम धनकर, सहायक शिक्षिका उर्मिला, मंजू टूडू, जैसलीना मसीह, विमला बाई धनकर, सलीना लिव्हिंगस्टन, उ.श्रे.शि.नारायण प्रसाद साहू, प्राचार्य मदनावती सोनवानी, प्रधान अध्यापक मिठाई लाल धु्रव, प्राचार्य भरत नाग, कमला नाग, रोहित कुमार पाटकर, शत्रुघन लाल पटेल, आशा नायडू, सहायक शिक्षक-कन्हैया लाल बरेठ, घनश्याम नगारची, ज्योत्सना गोखे, महेश राम बघेल, सहायक ग्रेड-2-बृजेश कुमार गोन्नाडे, ट्रेजामेरी अन्थोनी, चन्द्रकला डेकाटे, प्रधानाध्यापक शिवानंद प्रसाद कश्यप, उ.व.शिक्षिका सुनिता लाल, भृत्य कस्तुर राम रावटे, वरिष्ठ अंकेक्षक विजय प्रकाश मेश्राम, लेखापाल (संविदा बर्खास्त) सुनीता मण्डावी। लेखापाल कमलेश कुमार हेड़ाऊ, उच्च श्रेणी शिक्षिका पुष्पा कुम्भारे, सुकदेव प्रसाद, प्रधान अध्यापिका शांति प्रधान, सहायक शिक्षक पंचायत घनश्याम नगारची।

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय-सहायक ग्रेड-2 विनोद कुमार सोनकेशरिया,

    जनसंपर्क विभाग– सहायक संचालक अटल बिहारी काशी,

    आवास एवं पर्यावरण विभाग-सहायक ग्रेड-3 पुनित कुमार कश्यप,

    महाधिवक्ता कार्यालय बिलासपुर-भृत्य हरिहर प्रसाद पराते, गीता मेश्राम।

    सामान्य प्रशासन विभाग

    स्टेनोटायपिस्ट पुरूषोत्तम पतवार, भुवन डेकाटे, सहायक ग्रेड-2 प्रवीण कुमार निमजे, डिप्टी कलेक्ट आनंद मसीह, सहायक ग्रेड-1 राजेंद्र कुमार सोनकुसले, राजेश लिव्हिंगस्टन, हेमलता एक्का, डिप्टी कलेक्टर अनुराग लाल, संयुक्त कलेक्टर/पेट्रोल पंप डीलर शंकर डगला एवं पुत्र सुरेश कुमार डगला, शीघ्रलेखक डीडी बुरडे, निज सचिव जगदीश नारायण कोष्टा, भुवाल सिंह संयुक्त आयुक्त, अनुविभाग अधिकारी सुनील मैत्री।

    आदिम जाति-अनुसूचित जाति विकास विभाग

    उपायुक्त सीएस कोट्रीवार, शिक्षिका गंगा गोयल, सहायक ग्रेड-3 अनीमा विश्वास, सहायक ग्रेड-2 संतोष कुमार चौरसिया, संध्या कोट्रीवार, अधीक्षक एसएन राम, अनुभाग अधिकारी देवकीनंद रायकवार, सेल्सगर्ल रंजीता सिंह।

    राजस्व विभाग

    सहायक ग्रेड-2 जीवन लिव्हिंगस्टन, देवेंद्र कुमार कोल्हे, पटवारी मनीराम बैगा, किशोर कुमार निनावे, प्रवीण कुमार प्रधान, अधीक्षक रामाशीष सिंह, ऑडिटर रामाश्रय सिंह।
    स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग

    डॉक्टर कृष्ण कुमार हर्जपाल, असिस्टेंट सर्जन आर के सिंह, नर्स गीता राय, बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता भुलेश्वरी मंडावी, आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी बहादुर सिंह मार्को, सहायक शल्य चिकित्सक अमृत लाल रोहलेडर, सहायक प्राध्यापक उल्हास गोन्नाडे, औषधि संयोजक काशीराम, मथुरा प्रसाद बैगा।

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग

    सहायक यंत्री वीरबहादुर सिंह, सेवानिवृत्त कार्यपालन अभियंता राम प्रसाद बांगरे, सहायक मानचित्रकार (सेवानिवृत्त) नंदलाल साव, उप अभियंता बलराज दरवाड़े, निज सहायक विजय कुमार पराते, मैकेनिक अरविंद विलियम, श्यामराव सोनकुसरे सहायक अभियंता, अनिल बच्चन।

    महिला बाल विकास विभाग

    पर्यवेक्षक रीता सिंह, रेखा खाण्डे, पर्यवेक्षिका लक्ष्मी ठाकुर, संयुक्त संचालक क्रिस्टीना सीएस लाल।
    जल संसाधन विभाग

    निम्न श्रेणी लिपिक संध्यारानी सिंह, उपयंत्री रूपराम, अनुविभागीय अधिकारी दिनेश कुमार भगोरिया, अनुसंधान सहायक कैलाश धकाते, उपयंत्री टीकम साय, सहायक ग्रेड-3 सुनीता लिमजे, बाल मुकुन्द नामदेव, उप अभियंता जीपी कोष्टी, स्टेनोटायपिस्ट सुनील कुमार नायडु, सहायक अभियंता भगवती प्रसाद वर्मा, सहायक ग्रेड-2 जितेंद्र प्रसाद, कार्यपालन अभियंता मधुकर कुम्भारे, महेश हेड़ाऊ, लाल बहादुर शाह।

    समाज कल्याण विभाग

    सेवानिवृत्त प्रस्तुतीकरण सहाकय केडी कुलदीप

    पंचायत विभाग

    शिक्षाकर्मी वर्ग-1 अनिता सोम, शिक्षाकर्मी वर्ग-3 अनीता राय, आभा गंधर्व, सुचिता सिंह, इन्द्रपाल भास्कर शिल्की नंद, शिक्षाकर्मी वर्ग-2 सुनीता रेनाल्ड, अलका रंगा, सहायक ग्रेड-3 शेखर डेकाटे, शिक्षाकर्मी संगीता पासवान, सहायक शिक्षिका सविता भास्कर, सहायक शिक्षक अघनू राम कोटेन्द्र, सहायक ग्रेड-1 राजेश पातरे, पंचायत सचिव ध्रुव कुमार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी राधेश्याम मेहरा।

    वाणित्यिक कर विभाग

    जे के गायकवाड़ वाणिज्यिक कर अधिकारी
    गृह विभाग

    महिला आरक्षक स्नेहलता भगत, उप पुलिस अधीक्षक दशरथ डेकाटे, आरक्षक राजनारायण धकेता, सहा.जिला लोक अभि.अधिकारी नरेश कुमार ध्रुवंशी, अतिरिकत संचालक जेपी पड़वार, सहायक अभियंता डीएन धकाते, प्लाटून कमाण्डर जितेंद्र कुमार सोनकेसरी।

    ग्रामोद्योग विभाग

    सुपरवाईजर उमेश रायकवार, उप संचालक (रेशम) गोविंद नारायण अण्डेवार, उपसंचालक प्रेमलदास बघेल, सहा.संचालक डीएस धकाते, सहायक निरीक्षक गजांनद गोखे, सहायक निरीक्षक तकनीकी रोहित पातरे, कनिष्ठ रेशम निरीक्षक श्रवण कुमार नंदनवार, प्रबंधक दिलीप हेड़ाऊ, सहायक ग्रेड-2 सुनील कुमार, सहायक निरीक्षक तकनीकी नरेश कुम्भारे, निरीक्षक रामेश्वर बोकड़े।

    ऊर्जा विभाग

    सहायक श्रेणी-2 निशिबाला मसीह, कनिष्ठ अभियंता गीतांजली मानेकर, कार्यालय अधीक्षक डीएस कोल्हटकर, अतिरिक्त मुख्य अभियंता एन डब्ल्यू हेनरी, सहा. अभियंता, मदन मोहन खरवार, प्रशासनिक अधिकारी प्रकाश तललवार, सहायक अभियंता तृप्ती नागवंशी।

    वाणिज्य-उद्योग विभाग

    महाप्रबंधक राजेन्द्र कुमार जपथापी, उप संचालक हीरामन निमजे, भृत्य संतज्ञानी।
    तकनीकी शिक्षा विभाग

    विनय प्रकाश एक्का ग्रंथालय सहायक, प्रयोगशाला तकनीशियन ज्योति मेश्राम, सहायक ग्रेड-3 दामोदर सहारे, व्याख्याता संजय डेकाटे।

    उच्च शिक्षा विभाग

    व्याख्याता श्री अरविंद वर्मा, प्राचार्य डॉ. मधुलिका लाल, शिखा शर्मा

    कृषि विभाग

    सहायक मत्स्य अधिकारी पुष्पलता डेकाटे, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी प्रमिला वस्त्रकार, उपसंचालक (कृषि) राजकुमार गोनेकर, सहायक ग्रेड-3 (सेवानिवृत्त) गणपति कुम्भारे, वरिष्ठ कृषि विकास बलराम प्रसाद, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी रामदीन चंद्रा, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी पुष्कर लाल चन्द्रा, ललिता वर्मा, नमिता दास, कुन्ती देवी बैगा, सहायक ग्रेड-3 स्व. सुरेश कुमार नंदनवार, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अजय कुमार गोखले, विषय वस्तु विशेषज्ञ राजकुमार गड़पायले, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अनिल कुमार पराते
    नगरीय प्रशासन विभाग

    संयुक्त संचालक पद्मभूषण काशी, जोन कमिश्नर वासुदेव चौहान, सहायक संचालक प्रकाश चंद्र रायकवार, अधीक्षक भोलाराम कीर, जगदीश प्रसाद मीना

    वन विभाग

    उपवन क्षेत्रपाल सहा.परिक्षेत्र अधिकारी मोहनदास मानिकपुरी, वनमंडल अधिकारी एसपी रजक, वन परिक्षेत्र अधिकारी रमन बी सोमावार, उपवन क्षेत्रपाल सुखदास नाग, सहायक वन संरक्षक दिव्या गौतम

    सहकारिता विभाग

    सहायक विस्तार अधिकारी अनिता नन्दे, गोपाल प्रसाद बिन्द, अंकेक्षण अधिकारी सुभाष कोल्हे

    लोक निर्माण विभाग

    कार्यपालन अभियंता राकेश कुमार, उप अभियंता संजय जेम्स
    योजना, आर्थिक-सांख्यिकी विभाग

    एएसओ विष्णुदास मानिकपुरी, अन्वेषक कमल कुमार माहौर

    पशुधन विकास विभाग

    संयुक्त संचालक अंजना नायडू, सहायक ग्रेड-3 गिरजा प्रसाद, सहा.पशु चिकि.क्षेत्र अधिकारी पल्लवी मेश्राम, सहायक ग्रेड-1 कपना लिखार, सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्राधिकारी बाबूराव पातरे, सहायक ग्रेड-3 पार्वती राय उर्फ प्रीति जेम्स

    खेल-युवा कल्याण विभाग

    वरिष्ठ खेल अधिकारी राजेंद्र डेकाटे
    केन्द्र सरकार/बैंक/जीवन बीमा निगम में भी फर्जी प्रमाण पत्र
    बैंक

    लिपिक, ग्रामीण बैंक, कैशियर कम क्लर्क, भारतीय स्टेट बैंक राजेन्द्र कुमार गोन्नाडे, लिपिक सह रोकडिय़ा, भारतीय स्टेट बैंक सुलोचना सूरज, लिपिक भारतीय स्टेट बैंक सुश्री विद्या वरूडक़र
    केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग
    स्टाफ नर्स रीना मसीह
    इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड, नई दिल्ली
    उप प्रबंधक, इंजीनियर्स इण्डिया लिमिटेड, नई दिल्ली (प्रायवेट) निलेश कुमार भगोरिया
    केन्द्रीय विद्यालय संगठन, मुंबई
    प्राचार्य केपी मण्डल
    भारतीय जीवन बीमा निगम
    सहायक अमृतनंद, लिपिक शशि प्रसाद साहू, विद्या गोन्नाडे (डेकाटे)
    राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर
    तकनीकी सहायक अविनाश सेंदूर
    भारतीय रेलवे
    टीसी कृष्णा राव, सहायक मंडल रणजीत सिंह, वर्कशॉप सहायक रवि कुमार डोंगरे
    भिलाई इस्पात संयंत्र
    प्रबंधक रमेशचंद्र डेकाटे, वरिष्ठ प्रबंधक दीपक खापेकर, ऑपरेटर गणपति, हॉस्पिटल अटेन्डेन्ट दुर्योधन, तकनीशियन पी.इलाराज, अटेन्डेन्ट जी गिरीश, जी राजेश, संतोष भास्कर, भू.पू.सीनियर टी.ओ.टी जी संतोष, प्लांट अन्टेंडेंट महेन्द्र कुमार डेकाटे, सीनियर मैनेजर महेश कुमार गोन्नाडे, वरिष्ठ प्रबंधक राजेन्द्र कु. डेकाटे, क्रेन ऑपरेटर अनिल कुमार पराते, सीनियर ऑपरेटिव दीपक कुमार लोधी, तकनीशियन चन्द्रकुमार बारापात्रे, विद्युत कुमार दास, महेश सहारे, प्लांट अटेंडेंट नारदराम पारकर
    रविवि रायपुर
    रीडर डॉ. मनीष कुमार राय, सहायक कुल सचिव डीडी सरोदे
    केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल
    सब इंस्पेक्टर शारदा मारोति, कॉन्सटेबल के एल फ्रांसिस
    डाक-तार विभाग
    निरीक्षक लक्ष्मी नारायण महतो, डाकिया भुवन शांडिल
    केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क विभाग
    निरीक्षक राजकुमार बोकाडे
    दूरदर्शन केंद्र रायपुर
    तकनीशियन रोशन दास मसीह
    कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय
    हिन्दी अनुवादक ग्रेड-2 अरूण कुमार कुम्भारे, वरिष्ठ सामाजिक सुरक्षा सहायक राजू निनावे
    छग राज्य इंडस्ट्रीयल डेव्ह.कार्पो.लिमि.
    प्रबंधक शंकर कुमार सोनवानी

    इन जनप्रतिनिधियों के प्रमाण पत्र फर्जी

    अध्यक्ष नगर पंचायत नवागढ़ सीताराम, पार्षद पूर्णिमा नाग, सरपंच सावित्री बाई, पार्षद नगर निगम राजेन्द्र सिंह अरोरा, अध्यक्ष जनपद पंचायत फिंगेश्वर राघोबा महाडिक़, अध्यक्ष नगर पंचायत सतनाम सिंह खनूजा, पार्षद नगर निगम अफरोज अंजूम, सरपंच शोभराज दावड़ा, जनपद सदस्य सेराज खान, जिला सदस्य विरेन्द्र सूर्यवंशी, पार्षद नगर पालिका बीरगांव अशोक कुमार बघेल, सरपंच महेश कुमार बया, चतुर राम मेश्राम, आशा लता, कनक नागे, महेश प्रसाद, विधायक स्व अजीत प्रमोद कुमार जोगी, पूर्व विधायक अमित जोगी।

  • हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए राज्य के डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश जारी किया…

    हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए राज्य के डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश जारी किया…

    बिलासपुर। अग्रिम जमानत के लिए दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान लगातार केस डायरियों के माननीय उच्च न्यायालय में पेश ना करने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए राज्य के डीजीपी डी एम अवस्थी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश जारी कर दिया है। बता दें कि, अभी बिलासपुर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिकाओं पर जस्टिस प्रशांत मिश्रा व जस्टिस एम.एम. श्रीवास्तव की सिंगल बेंच सुनवाई कर रही हैं। पिछले कई दिनों से जस्टिस प्रशांत मिश्रा की सिंगल बेंच में लगातार अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान केस डायरिया पेश नहीं हो रही थी। ऐसा ही एक मामला आज भी कोर्ट में लगा था जिसमें भाटापारा निवासी अनुसूईया बाई ने अपने खिलाफ दर्ज एफआइआर को लेकर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी.. अनुसूईया बाई की याचिका पर सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने शासन से पूछा कि मामले में केस डायरी कहां है तब शासन ने केस डायरी ना होने की बात कही….शासन की ओर से दिए गए इस जवाब के बाद कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए डीजीपी डी एम अवस्थी को अब गुरुवार की सुबह 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश जारी कर दिया है। इससे पहले भी इसी तरह के एक मामले में थाना प्रभारी भटगांव सरजू प्रसाद धृतलहरे को डीजीपी डी एम अवस्थी ने निलंबित किया है ।

  • 1 रुपया ट्रांसफर करते ही खाता हो गया खाली…

    1 रुपया ट्रांसफर करते ही खाता हो गया खाली…

    नोएडा नोएडा में जालसाजों ने अलग-अलग तरह से ठगी करते हुए दो लोगों के अकाउंट से 76 हजार रुपये निकाल लिए। दोनों ही पीड़ितों ने थाना सेक्टर 20 में शिकायत दी है। दोनों ने इंटरनेट से कस्टमर केयर का नंबर निकाला था लेकिन वही फर्जी निकला। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और मामले की जांच कर रही है।‌

    हेडफोन किया था ऑनलाइन ऑर्डर
    पहली घटना सेक्टर 18 के रहने वाले खुर्शीद आलम के साथ हुई। उन्होंने बीते दिनों ई-कॉमर्स वेबसाइट से एक ब्लूटूथ हेडफोन ऑर्डर किया था। समय से डिलिवरी नहीं मिली तो उन्होंने इंटरनेट से कंपनी के कस्टमर केयर कर्मचारी का नंबर ढूंढा। इंटरनेट पर दिए गए नंबर पर उन्होंने फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठा।

    कुछ देर बाद उन्हें एक फोन आया जिसमें आरोपी ने खुद को कंपनी का कर्मचारी बताया। उसने कहा कि वह अगर सामान की डिलिवरी चाहते हैं तो उनके अकाउंट में एक रुपया ट्रांसफर करना होगा। आरोपी के कहने पर उन्होंने उसके अकाउंट में एक रुपया ट्रांसफर कर दिया। कुछ देर बात उनके अकाउंट से करीब 50 हजार 698 निकल गए। अब आरोपी उनका फोन नहीं उठा रहा है।

    पूछ ली ATM की गोपनीय जानकारी
    वहीं सेक्टर 15 में रहने वाले राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि बीते दिनों उन्होंने एक शख्स को ई वॉलेट के जरिये 300 रुपये ट्रांसफर किए थे। जब अकाउंट में रुपये नहीं पहुंचे तो उन्होंने गूगल के जरिये कस्टमर केयर कर्मचारी का नंबर निकाला। उक्त नंबर पर उन्होंने फोन किया। इस दौरान आरोपी ने उनसे एटीएम संबंधित गोपनीय जानकारी मांग ली।

    कुछ देर बाद उनके अकाउंट से पांच बार में 25 हजार 552 निकल गए। थाना सेक्टर-20 पुलिस का कहना है कि दोनों पीड़ित की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।

    ऑनलाइन शॉपिंग के वक्त ये सावधानियां बरतें

    -अगर शॉपिंग करते हैं और रिटर्न व रिफंड से जुड़ी समस्या है तो ऐप पर जाकर ही अप्लाई करें। ऐप पर दिए गए कस्टमर केयर नंबर या ईमेल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

    – गूगल से सर्च करके कभी भी किसी कंपनी का नंबर न लें।

    अगर आपने कंपनी के ऐप या वेबसाइट पर रिफंड के लिए अप्लाई किया है और इसके बाद कोई कॉल इसके संबंध में आए और जानकारी मांगे तो बिना पड़ताल किए न दें। पहले कंपनी के कस्टमर केयर पर कॉल करके इस संबंध में पता कर लें।

    – रिफंड के लिए आपको बैंक से जुड़ी जानकारी देनी नहीं होती। आपने जिस मोड में पेमेंट किया है, पैसा उसी में अपने आप आ जाएगा।

    – गूगल प्ले स्टोर से ही ऐप इंस्टॉल करें। इंस्टॉल करने के दौरान इसकी सिक्युरिटी को जरूर देखें।

    – किसी भी लिंक पर क्लिक करके ऐप इंस्टॉल न करें। अगर कोई ऐप जरूरी है और डाउनलोड किया है तो कोशिश करें कि जरूरी चीजों का एक्सेस न दें।

  •  फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे अधिकारी-कर्मचारी…गिरने लगी बर्खास्तगी की गाज…

     फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे अधिकारी-कर्मचारी…गिरने लगी बर्खास्तगी की गाज…

    रायपुर। फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे अधिकारी-कर्मचारियों पर बर्खास्तगी की गाज गिरने लगी है। मुख्यमंत्री के निर्देश और सामान्य प्रशासन की सख्ती के बाद फर्जी जाति के आधार पर नौकरी कर रहे हैं अधिकारी-कर्मचारी की छुट्टी होनी शुरू हो गयी है। सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से उन फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी कर रहे कर्मचारी अधिकारी की लिस्ट भी जारी की गयी है। माना जा रहा है कि इसी सप्ताह से अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ बर्खास्तगी के आर्डर जारी होने शुरू हो जायेंगे। राज्य सरकार ने जो लिस्ट जारी की है, उसके मुताबिक प्रदेश में अभी 267 वैसे अधिकारी-कर्मचारी हैं, जो फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी कर रहे हैं।

    उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति द्वारा जिन विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों के जाति प्रमाण पत्र फर्जी, गलत पाए गए हैं उनमें सामान्य प्रशासन विभाग के 14, आदिमजाति तथा अनुसूचित जाति विभाग के 8, राजस्व विभाग के 7, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के 9, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के 8, महिला एवं बाल विकास विभाग के 4, जल संसाधन विभाग के 14, समाज कल्याण विभाग के 1, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 15, वाणिज्यकर विभाग के 1, गृह विभाग के 7, ग्रामोद्योग विभाग के 12, उर्जा विभाग के 7, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग 4, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के 5, उच्च शिक्षा विभाग 3, कृषि विभाग के 14, नगरीय प्रशासन विभाग और वन विभाग के 5-5, सहकारिता विभाग के 3, लोक निर्माण विभाग एवं योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के 2-2, पशुधन विभाग एवं मछलीपालन विभाग 6, खेल एवं युवा कल्याण विभाग 1, स्कूल शिक्षा विभाग 44, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, जनसम्पर्क विभाग, आवास एवं पर्यावरण विभाग में एक-एक प्रकरण शामिल हैं।

  • पुरानी गाड़ियों के लिए नहीं चाहिए होगी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट, आए नए आदेश….

    पुरानी गाड़ियों के लिए नहीं चाहिए होगी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट, आए नए आदेश….

    अगर आपने अपनी गाड़ी में नई हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लगवाई है और चालान होने की चिंता सता रही है तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. दो और चार पहिया समेत सभी तरह के गाड़ी मालिकों के लिए राहत की खबर है. यूपी में एक अप्रैल 2019 के पहले की गाड़ियों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाना अब जरूरी नहीं होगा. क्योंकि परिवहन विभाग ने एचएसआरपी लगवाने की अनिवार्यता को अगले आदेश तक रोक लगा दी है. ऐसे में 22 अक्टूबर 2020 को परिवहन विभाग की ओर से जारी दिशा निर्देश को वापस ले लिया गया है।


    गाड़ी मालिकों को आ रही थी दिक्कत
    दरअसल, पुराने वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने की अनिवार्यता ने गाड़ी मालिकों को परेशान कर दिया था. कहीं ऑनलाइन आवेदन में दिक्कतें सामने आ रही थी तो कहीं नंबर प्लेट के बदले मनमानी पैसा लिया जा रहा था. गाड़ी मालिकों की इस समस्या को देखते हुए परिवहन विभाग के अपर परिवहन आयुक्त एके पांडेय के मुताबिक अब पुराने वाहनों में एचएसआरपी लगवाना जरूरी नहीं है. इसके के लिए बाद में नए आदेश दिया जाएगा।

    बनाई जाएगी नई वेबसाइट
    हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट की बुकिंग को आसान बनाने के लिए परिवहन विभाग खुद वेबसाइट बनाएगा. इसके लिए विभाग सोसाइटी ऑफ ऑटोमोबाइल्स मैन्युफैक्चर्स से मिलकर पोर्टल तैयार करेगा. इसके बाद ही एचएसआरपी लगवाने की अनिवार्यता की तारीख तक की जाएगी।

    रोक हटाई गई
    एचएसआरपी (HSRP) की अनिवार्यता खत्म होने पर आरटीओ (RTO) में गाड़ी से जुड़े कई कामों पर लगी रोक को हटा लिया गया है. इनमें फिटनेस प्रमाण पत्र (fitness certificate), पंजीयन, transfer of ownership, पता परिवर्तन,रजिस्ट्रेशन का रिन्यूवल (renewal of registration) , अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) , नया परमिट, परमिट की डुप्लीकेट कॉपी, परमिट रीन्यूवल, अस्थाई परमिट, नेशनल परमिट सहित बाकी काम अब बिना एचएसआरपी रसीद के हो सकेंगे।

  • नहीं किया PAN-Aadhaar लिंक तो लग सकता है दस हजार रुपये का जुर्माना, ये है आखिरी डेट….

    नहीं किया PAN-Aadhaar लिंक तो लग सकता है दस हजार रुपये का जुर्माना, ये है आखिरी डेट….

     दिल्ली। जैसा की सभी जानते हैं आधार कार्ड (Aadhar Card) एक बेहद जरूरी सरकारी डाक्यूमेंट है. वहीं पैन कार्ड की भी काफी महत्ता है. बता दें कि सरकार के निर्देश के अनुसार पैन कार्ड को आधार से लिंक (Pan-Aadhaar link) करना अनिवार्य कर दिया है. मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक अब 31 मार्च 2021 तक इस काम को करने के लिए समय दिया गया है. अगर लिंकिंग का काम 31 मार्च 2021 तक पूरा नहीं होता तो इनकम टैक्स एक्ट के तहत गंभीर नतीजे के तहत आप पर 10000 रुपए का जुर्माना भी लग सकता है।

    टैक्स विभाग के मुताबिक अगर 31 मार्च 2021 के बाद कोई निष्क्रिय या कैंसिल्ड PAN का इस्तेमाल करता पाया जाता है तो उस पर इनकम टैक्स ऐक्ट के सेक्शन 272B के तहत 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है. एक नोटिफिकेशन में टैक्स विभाग ने कहा था कि 31 मार्च तक टैक्सपेयर्स अगर पैन और आधार कार्ड को लिंक नहीं करवाते तो पैन कार्ड निष्क्रिय हो जाएगा।

    लिंक नहीं होने पर पैन कार्ड होगा इनवैलिड
    पैन आधार (Pan Aadhaar link) को आपस में लिंक करना अनिवार्य है. ऐसा नहीं होने पर पैन कार्ड को इनवैलिड कर दिया जाएगा. पैन कार्ड रद्द होने पर कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं. मतलब पैन होते हुए भी आप वे काम नहीं कर पाएंगे, जहां पैन की जरूरत होती है. सीबीडीटी ने कहा है कि जो लोग इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल कर रहे हैं उनके लिए पैन कार्ड को आधार से जोड़ना अनिवार्य है. पिछले साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की आधार योजना को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया था।

  • किसानों के समर्थन में पंजाब जेल के डीआईजी ने किसानों के समर्थन में अपने पद से दिया इस्तीफा….

    किसानों के समर्थन में पंजाब जेल के डीआईजी ने किसानों के समर्थन में अपने पद से दिया इस्तीफा….

    दिल्ली। कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों को चौतरफा समर्थन मिल रहा है. इसके बावजूद केंद्र सरकार कानून को वापस लेने के मूड में नहीं है. इसी बीच रविवार को पंजाब के जेल उप महानिरीक्षक (डीआईजी) लखविंदर सिंह जाखड़ ने किसानों के समर्थन में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

    जेल डीआईजी लखविंदर सिंह जाखड़ का कहना है कि नियमों के अनुसार उन्हें तीन महीने का नोटिस देना होगा. अगर मैं आज इस्तीफा देना चाहता हूं, तो मुझे उस अवधि के भुगतान भत्ते को जमा करना होगा. मैं राशि जमा करने को तैयार हूं, क्योंकि मुझे अभी जाना है. मैं एक किसान का बेटा हूं और मुझे इस पर गर्व है।

    इससे पहले किसान आंदोलन के समर्थन में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पद्म विभूषण और राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने पद्मभूषण पुरस्कार लौटाने की घोषणा कर चुके हैं. पंजाबी में साहित्य अकादमी पुरस्कार के विजेता पंजाब के प्रसिद्ध शायर डॉ. मोहनजीत, प्रख्यात विचारक डॉ. जसविंदर सिंह और पंजाबी नाटककार व एक अखबार के संपादक ने किसानों के समर्थन में अपने पुरस्कार लौटाने का एलान पहले ही कर चुके हैं. इसके अलावा पंजाब के 27 खिलाड़ियों ने पुरस्कार लौटाने की घोषणा की थी।

    बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा पारित तीनों कृषि कानून के विरोध में हरियाणा, पंजाब समेत कई राज्यों के किसान संगठन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. किसानों के आंदोलन को बड़ी संख्या में लोगों को समर्थन मिल रहा है।