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  • गृह मंत्रालय ने वीडियो कॉल ऐप जूम के लिए जारी की एडवाइजरी, कहा- ये सुरक्षित नहीं,सावधानी बरतें…

    गृह मंत्रालय ने वीडियो कॉल ऐप जूम के लिए जारी की एडवाइजरी, कहा- ये सुरक्षित नहीं,सावधानी बरतें…

    सुरक्षित नहीं है ऐप, सावधानी बरतें: MHA

    कोरोना वायरस के महासंकट की वजह से देश में लॉकडाउन जारी है. ऐसे में एक दूसरे से जुड़ने के लिए लोग वीडियो कॉल का इस्तेमाल कर रहे हैं. वीडियो कॉलिंग/कॉन्फ्रेंसिंग ऐप ज़ूम के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से एडवाइज़री जारी की गई है, जिसमें कहा गया है कि ये ऐप सुरक्षित नहीं है, ऐसे में लोग इसका सावधानी से इस्तेमाल करें.

    गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि सरकार ने पहले भी 6 फरवरी, 30 मार्च को इसको लेकर जानकारी दी थी, ऐसे में लोग इसपर सतर्कता बरतें।

    सरकार ने कहा है कि लोग अगर इसका इस्तेमाल कर भी रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें. लगातार पासवर्ड बदलते रहें, कॉन्फ्रेंस कॉल में किसी को अनुमति देते हुए सतर्कता बरतें।

    ज़ूम पर बात करने के लिए गृह मंत्रालय ने ये सुझाव दिए हैं, जिनका पालन कर सतर्कता बरती जा सकती है:

     

    • हर मीटिंग के लिए नई यूजर आईडी, पासवर्ड का इस्तेमाल करें।
    • वेटिंग रूम को एनेबल करें, ताकि कोई भी यूजर तभी कॉल में शामिल हो सके जब कॉन्फ्रेंस करने वाला अनुमति दे।
    • ज्वाइन ऑप्शन को डिसऐबल कर दें।
    • स्क्रीन शेयरिंग का ऑप्शन सिर्फ होस्ट के पास रखें।
    • किसी व्यक्ति के लिए रिज्वाइन का ऑप्शन बंद रखें।
    • फाइल ट्रांसफर के ऑप्शन का कम से कम इस्तेमाल करें।

    गौरतलब है कि जब से देश में लॉकडाउन लागू हुआ है, तभी से अधिकतर लोग अपने घरों में बंद हैं. अधिकतर दफ्तरों ने वर्क फ्रॉम होम का सिस्टम भी शुरू किया है, इस बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, वीडियो कॉल का चलन बढ़ा है. कई दफ्तर और लोग जूम ऐप का इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन समय-समय पर इसकी सुरक्षा पर सवाल भी खड़े हुए हैं।

    गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रेस कॉन्फ्रेंस की, तब उन्होंने भी जूम ऐप का ही इस्तेमाल किया था।

  • छत्तीसगढ़ में कोरोनो राहत को लेकर बड़ी खबर, पिछले 24 घन्टो में 10 मरीज हुए ठीक….6 और मरीज एम्स से डिस्चार्ज…बचे 10 मरीजों का उपचार जारी..

    छत्तीसगढ़ में कोरोनो राहत को लेकर बड़ी खबर, पिछले 24 घन्टो में 10 मरीज हुए ठीक….6 और मरीज एम्स से डिस्चार्ज…बचे 10 मरीजों का उपचार जारी..

    रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोरोना के तेजी से बढ़ते संक्रमण के बीच राहत देने वाली खबर सामने आई है. एम्स में भर्ती 6 कोरोना मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है. सभी 6 मरीज कोरबा के कटघोरा इलाके रहने वाले हैं। जिनमें 4 पुरुष और 2 महिला शामिल है. एम्स अधीक्षक करण पिपरे ने इसकी पुष्टि की है।

     

    जानकारी के अनुसार राज्य में अभी तक कुल 33 केस सामने आए थे. जिसमें से 23 मरीज ठीक हो चुके हैं. गुरुवार यानी आज भी 6 मरीजों की जांच में रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद एम्स अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. जिसके बाद प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या घटकर 10 हो गई है. जिनका एम्स अस्पताल में इलाज जारी है।

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट करते हुए कहा कि AIIMS रायपुर में जिन कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज चल रहा है, उनमें से 6 मरीजों का टेस्ट लगातार दो दिन से निगेटिव आने के बाद आज उनको डिस्चार्ज कर दिया गया है. अब केवल 10 कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज चल रहा है. आशा है वो भी जल्द स्वस्थ होंगे।

  • पुलिस चौंकी खरसिया में लगा बॉडी सेनीटाइजर मशीन

    पुलिस चौंकी खरसिया में लगा बॉडी सेनीटाइजर मशीन

    रानी सती ट्रेड़र्स द्वारा होम मेड़ मशीन खरसिया पुलिस को दी गयी

    सुनील अग्रवाल खरसिया। वैष्विक महामारी कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिये पुलिस चौकी  खरसिया में रानी सती ट्रेड़र्स के संचालक द्वारा होम मेड़ बाॅड़ी सेनेटाईजर मशीन गयी, जिसके प्रयोग से खरसिया पुलिस के जवान स्वयं को सेनेटाईज कर सकेंगे।
    नगर की प्रतिश्ठित फर्म रानी सती ट्रेडर्स के संचालक अजय बंसल ने बताया कि महामारी के इस दौर में जब हर किसी को अपनी जान का खतरा है, हमारे पुलिस के जवान हमारी सुरक्षा के लिये हमेषा तत्पर है उन पुलिस के जवानों की सुरक्षा भी बहुत जरूरी है। इसी बात को ध्यान में रखकर अजय बंसल ने अपने भाई मानस बंसल और भतीजे विवेक बंसल के सहयोग से घरेलू सामान का उपयोग कर एक सैनेटाईजर मशीन तैयार किया और उस मशीन को पुलिस चौंकी में लगाया गया जिससे कि पुलिस के जवान स्वयं को सैनेटाईज कर सकें। खरसिया एसड़ीएम और एसड़ीओपी पीतांबर पटेल के द्वारा 15 अपै्रल को इस मशीन का उद्घाटन किया गया इस दौरान थाना प्रभारी सुम्मत राम साहू, चौंकी प्रभारी नंद किशोरे गौतम सहित खरसिया पुलिस के जवान मौजूद थे। खरसिया पत्रकार संघ के सचिव सुनील अग्रवाल ने पत्रकार साथी अजय बंसल के द्वारा किये गये कार्य की सराहना करते हुये कहा कि वैष्विक महामारी के इस दौर में खरसिया पत्रकार संघ खरसिया पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है, कोरोना वायरस के खिलाफ इस युद्ध में पुलिस के जवान, स्वास्थ्य विभाग के साथ साथ मीड़िया जगत भी तन मन धन से जुटा हुआ है। सुनील अग्रवाल ने कहा कि पत्रकार साथी अजय बंसल के द्वारा प्रदत्त इस मशीन से निश्चित तौर पर कोरोना के खिलाफ युद्ध में सहायता मिलेगी। खरसिया पत्रकार संघ ने नगरवासियों से अपील की है कि लाॅकड़ाउन का पालन करें और जब तक बहुत ज्यादा जरूरी न हो, अपने घरों से बाहर न निकलें, कोरोना से लड़ाई में प्रशासन को सहयोग प्रदान करें।

  • दो साल से कम उम्र के बच्चों को मास्क पहनाना खतरनाक है, बड़े बच्चे सार्वजनिक जगहों पर मास्क जरूर पहनें….

    दो साल से कम उम्र के बच्चों को मास्क पहनाना खतरनाक है, बड़े बच्चे सार्वजनिक जगहों पर मास्क जरूर पहनें….

    एक्सपर्ट्स के मुताबिक बच्चों के लिए कपड़े के मास्क ही बेहतर हैं।

    बच्चों में नहीं दिख रहे कोरोना के पूरे लक्षण इसलिए मास्क जरूरी है।

    सीडीसी के अनुसार 25% केस ऐसे हैं, जिनमें कोविड 19 के लक्षण नहीं दिखे।

    कोरोनावायरस बहुत आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। अमेरिका और कुछ अन्य देशों ने अपने सभी नागरिकों को मास्क पहनने का निर्देश दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या छोटे बच्चों को भी मास्क लगाने की जरूरत है? अमेरिकी हेल्थ एजेंसी सीडीसी ने यह साफ कहा है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए भी मास्क खतरनाक है, क्योंकि इससे दम घुटने की आशंका बनी रहती है। वहीं, दो या दो साल से ज्यादा उम्र के बच्चों के लिए मास्क लगाना सुरक्षित है। बशर्ते, उन्हें कोई सांस संबंधी परेशानी न हो।
    6 अप्रैल को जारी सीडीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में 18 साल से कम उम्र के बच्चों में कोरोना संक्रमण के 2572 केस आए थे। ये बच्चे बाकी बड़ी उम्र के लोगों की तरह गंभीर रूप से बीमार भी नहीं थे। कोरोना से संक्रमित इन बच्चों में या तो बेहद मामूली लक्षण दिख रहे हैं या बिल्कुल नहीं। इसके कारण परिवार और समुदाय में वायरस फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
    दूसरों को संक्रमण से बचाने के लिए लगाएं मास्क
    पिडियाट्रिक इंफेक्शियस डिसीज स्पेशलिस्ट डॉक्टर मार्क स्वायर के मुताबिक अपने बच्चे को कपड़े का मास्क पहनाने से आप दूसरों को संक्रमित होने से बचा सकते हैं। क्योंकि कोरोना छींकने, खांसने जैसी आम बीमारियों से फैल रहा है। सीडीसी के एक अनुमान के मुताबिक 25 प्रतिशत कोरोना के केस ऐसे हैं, जहां मरीज में कोई भी लक्षण नहीं दिखे। इतने बड़े पैमाने पर इस वायरस का फैलने का एक यह कारण भी है।
    दूरी बनी हुई है तो बच्चे को मास्क न पहनाएं
    मास्क की मुख्य तौर पर जरूरत सार्वजनिक जगहों पर होती है। अगर आप ऐसी जगह पर हैं, जहां दूसरों से कम से कम 6 फुट की दूरी बना सकते हैं, तो बच्चों को मास्क पहनाने की जरूरत नहीं है। साथ ही अगर बच्चे को कोई बीमारी है या बीमार होने की आशंका है तो उसे बाहर जाने से रोकें।
    छोटे बच्चों को मास्क पहनने के लिए कैसे मनाएं?
    छोटे बच्चों को मास्क पहनाना भी एक जिम्मेदारी का काम है। लेकिन यह जरूरी भी है। ऐसे में आप डॉक्टर्स की सलाह मानकर बच्चों को मास्क के लिए तैयार कर सकते हैं।

    समझाएं – अपने बच्चों को मास्क की उपयोगिता को गंभीरता से समझाएं। उन्हें यह बताएं कि दूसरे लोग मास्क क्यों पहने हुए हैं। इसके फायदे क्या हैं।

    इनाम दें – डॉक्टर मेग फिशर के अनुसार आप बच्चे को मास्क पहनने पर इनाम भी दे सकते हैं। अगर बच्चे ने मास्क पहन लिया तो उसे हेल्दी इनाम दें।

    बच्चों को कौन से मास्क पहनाएं?
    सीडीसी बच्चों को कपड़े का मास्क पहनने की सलाह देते हैं। क्योंकि सर्जिकल और N-95 मास्क की सप्लाई बेहद कम है। जो स्टॉक में हैं वे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए हैं। आप मास्क घर पर भी बना सकते हैं, सीडीसी ने इसका एक ट्यूटोरियल वीडियो भी शेयर किया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक बच्चों के लिए कपड़े के मास्क ही बेहतर हैं।

  • चीन से मिलीभगत करने पर गुस्सा है दुनिया का सबसे ताकतवर शख्स ट्रंप, विश्व स्वास्थ्य संगठन की फंडिंग रोकी….

    चीन से मिलीभगत करने पर गुस्सा है दुनिया का सबसे ताकतवर शख्स ट्रंप, विश्व स्वास्थ्य संगठन की फंडिंग रोकी….

    दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ की फंडिंग को रोक दिया है। ट्रंप ने संगठन पर चीन की तरफदारी करने का आरोप लगाया है।
    अमेरिकी राष्ट्रपति संगठन की भूमिका से बेहद खफा हैं। उनका कहना है कि कोरोना वायरस के प्रसार का कुप्रबंधन करने और उसकी जानकारी छिपाने में संगठन की भूमिका का आकलन किया जाएगा। दरअसल, कोरोना वायरस का पहला मामला पिछले साल नवंबर में चीन के वुहान शहर में सामने आया था। अमेरिका की जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के अनुसार अब तक यह वायरस विश्व में एक लाख 19 हजार लोगों की जान ले चुका है। जिसमें से अमेरिका में 25,000 लोगों की मौत हुई है। अमेरिका चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन दोनों से बेहद खफा है।
    ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों को बताया कि, मैंने अपने प्रशासन को डब्ल्यूएचओ की फंडिंग रोकने का आदेश दे दिया है। कोरोना वायरस के प्रसार की बात छिपाने को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका की भी जांच की जा रही है। हम आगे और भी कड़े कदम उठाने वाले हैं। गौरतलब है कि अमेरिका विश्व स्वास्थ्य संगठन को सबसे ज्यादा फंड देता है।
  • जिनपिंग को जापान ने दिया पहला झटका, कंपनियों से कहा चीन से समेटो बोरिया बिस्‍तर

    जिनपिंग को जापान ने दिया पहला झटका, कंपनियों से कहा चीन से समेटो बोरिया बिस्‍तर

    टोक्‍यो। कोरोना वायरस की मार झेल रही दुनिया बड़े आर्थिक संकट की तरफ बढ़ रही है। लोग चीन को इन हालातों के लिए जिम्‍मेदार ठहरा रहे हैं। इस महामारी का असर चीन की अर्थव्‍यवस्‍था पर पड़ेगा, इस बात की आशंका तो विशेषज्ञों ने जताई थी मगर इतनी जल्दी यह आशंका सच साबित होने लगेगी, कोई नहीं जानता था। जापान शायद दुनिया का पहला देश है जिसने चीन में मौजूद अपनी मैन्‍यूफैक्‍चरिंग कंपनियों को बाहर निकालने के आदेश दे दिए हैं।

    2.2 बिलियन डॉलर के पैकेज की पेशकश

    जापान के प्राइम मिनिस्‍टर शिंजो आबे ने उन कंपनियों को 2.2 बिलियन डॉलर के पैकेज का ऐलान किया है, जिनकी यूनिट चीन में हैं। यह पैकेज उन्‍हें चीन से प्रॉडक्‍शन शिफ्ट करने के लिए दिया जाएगा। ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है। मैगजीन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि चीन में कोरोना वायरस की वजह से सप्‍लाई परद खासा असर पड़ रहा है। ऐसे में जापान की सरकार ने कंपनियों से कहा है कि वह वापस जापान में प्रोडक्‍शन यूनिट लगाएं।

    चीन के लिए नीति बदल रहा है जापान

    कंपनियों को इसके लिए दो बिलियन डॉलर जापान में प्रोडक्‍शन वापस शुरू करने और बाकी रकम दूसरे देशों में मैन्‍यूफैक्‍चरिंग शुरू करने के लिए देने की पेशकश की है। पीएम शिंजो आबे की सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग इस माह जापान के दौरे पर जाने वाले थे। माना जा रहा है कि इसके साथ ही जापान ने चीन के लिए अपनी नीति में परिवर्तन के संकेत दे दिया है। साथ ही इस नए फैसले से चीन और जापान के रिश्‍तों पर भी असर पड़ेगा।

    सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर

    जापान, चीन का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। सात अप्रैल को शिंजो आबे सरकार ने टोक्‍यो के साथ ही सात और जगहों पर आपातकाल की घोषणा की थी। इन सभी जगहों पर शहरी आबादी काफी ज्‍यादा है और यहां पर कोरोना के केसेज में तेजी से इजाफा देखा जा रहा था। शिेंजो आबे की सरकार ने अर्थव्‍यवस्‍था की सुरक्षा करने और लोगों के जीवन-यापन के लिलए 992 बिलियन डॉलर के पैकेज का ऐलान किया था।

    तो क्‍या भारत आएंगी कंपनियां?

    इस खबर के आने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी पीएम आबे से फोन पर बात की थी। जापान और भारत के बीच पिछले कुछ वर्षों में रिश्‍ते बेहतर हुए हैं। माना जा रहा है कि जापान की कुछ कंपनियां भारत में निवेश कर सकती हैं। पीएम मोदी ने जापान के पीएम आबे से फोन पर बात करने के बाद बताया था कि भारत और जापान के खास रणनीतिक रिश्‍ते और वैश्विक साझेदारी कोविड-19 के बाद की दुनिया में नई टेक्‍नोलॉजी और सोल्‍यूशंस को विकसित करने में मदद कर सकते हैं।

  • कोरोना से कितना बचाएगी मास्क, क्या कहता है मास्क पर विज्ञान ?

    कोरोना से कितना बचाएगी मास्क, क्या कहता है मास्क पर विज्ञान ?

    जैसा कि आप जानते हैं कि सरकार ने सभी लोगों को राष्ट्रीय आपदा अधिनियम के तहत मास्क, गमछा या कुछ कपड़ा पहनने का आदेश दिया है। सवाल यह है कि यह कितना वैज्ञानिक है ? आइए जांच करते हैं, भारत या दुनिया में अनुसंधान का कोई वैज्ञानिक डेटा नहीं है जो यह साबित करता है कि किसी भी विधि में किसी भी चीज को पहनने से संक्रमण दर कम हो सकती है।

    डॉक्टर बिप्लव बंधोपाध्याय से जानते हैं कितना कारगर है मास्क…

    पहला- हम मानते हैं कि सभी मास्क समान हैं ?

    नहीं. सरकार द्वारा सुझाया गया तीन स्तर का मास्क कुछ बैक्टीरिया को कुछ हद तक रोक सकती है. लेकिन वायरस को नहीं। यदि हम इसे ठीक से नहीं पहनते हैं तो हवा लीक हो सकती है और अधिकांश लोग इसे सही तरीके से नहीं पहन रहे हैं।

    दूसरा- एक तीन स्तरित मास्क एक रूमाल या गमछा के बराबर है?

    नहीं. क्योंकि तीन स्तरित मास्क में बैक्टीरिया और कुछ बूंदों के खिलाफ अधिक सुरक्षात्मक शक्ति होती है. आम जनता में इसे लेकर कोई समझ नहीं है न ही उन्हें प्रशिक्षित किया गया है कि कैसे इसका उपयोग करें।

    तीसरा- लोग भ्रमित हो सकते हैं कि वे जिस तरह से भी कपड़ा बंधेंगे, उससे उनकी और दूसरों की रक्षा होगी, ये भ्रामक सोच इस संक्रमण में अधिक खतरनाक है.

    चौथा- इस बात का खतरा ज़्यादा है कि लोग कपड़े बांधकर अन्य प्रभावी तरीकों के पालन में लापरवाही करे। क्योंकि वे सोच रहे होंगे कि कपड़ा बंधने के बाद अब कुछ कुछ नहीं होगा। इसलिए इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि वे केवल अपने चेहरे पर एक कपड़ा पहनकर, ठीक से हाथ न धोएं और एक मीटर की दूरी रखना बंद कर दें। कपड़े पहनकर सर्वथा सुरक्षित मानने की भावना सोशल डिस्टेंसिंग और हाथ धोने के तरीके के अनुपालन न करने को प्रेरित कर सकती है जो घातक है।

    चूंकि यह सरकार का आदेश है इसलिए आपको राष्ट्रीय आपदा अधिनियम के तहत इस आदेश का पालन करना है। लेकिन आपको खुद से और अधिकारियों से ये सवाल पूछने चाहिए। ताकि हम अपने लोकतंत्र को प्रोत्साहित और समृद्ध कर सकें।

  • 3 मई तक देश बंद, लॉकडाउन पर नई गाइडलाइन जारी,सिर्फ इन्हें मिली है छूट….

    3 मई तक देश बंद, लॉकडाउन पर नई गाइडलाइन जारी,सिर्फ इन्हें मिली है छूट….

    दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में कोरोना की वजह से लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ा दिया है. बुधवार को गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन बढ़ाने को लेकर नई विस्तृत गाइडलाइन जारी की है. इसमें सभी मंत्रालयों/ विभागों, भारत सरकार, राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश सरकारों और राज्य/केन्द्रशासित प्रदेशों के अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले उपायों पर समेकित संशोधित दिशानिर्देश जारी किया गया है.

    3 मई तक बंद

    जारी गाइडलाइन के अनुसार बस, रेल, हवाई सफर पर रोक जारी रहेगी. स्कूल, कॉलेज, कोचिंग, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, व्यायामशाला, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, स्विमिंग पूल, फैक्ट्रियां और मॉल सभी बंद रहेंगे. सभी मंदिर और पूजा स्थल और सार्वजनिक धार्मिक स्तल भी बंद कर दिए गए हैं. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी रोक लगा दी गई है. औद्योगिक गतिविधियों पर रोक जारी रहेगी. हॉटस्पॉट वाले इलाकों में कोई छूट नहीं मिलेगी. सभी तरह के परिवहन पर रोक जारी रहेगी. जरूरी सेवाओं को छोड़कर यातायात पर रोक लगा दी गई है. एक राज्य से दूसरे राज्य और एक जिले से दूसरे जिले में लोगों के आने-जाने पर भी रोक लगा दी गई है. सभी सामाजिक, राजनीतिक, खेल, धार्मिक कार्य, धार्मिक स्थल, पूजा स्थल 3 मई तक बंद रहेंगे.

    इन्हें मिली है छूट

    गाइडलाइन के अनुसार खाने-पीने और दवा बनाने वाली तमाम इंडस्ट्रीज़ खुली रहेंगी. इसके साथ ही ग्रामीण भारत में सारे कल-कारखाने खोलने का निर्देश दिया गया है. कृषि, मनरेगा और खेती किसानी से जुड़े कामों को इजाजत दी गई है. जिसके तहत सिंचाई और जल संरक्षण को प्राथमिकता दें. आवश्यक सेवाओं के लिए वाहनों के आने-जाने की इजाजत दी गई है. 20 अप्रैल के बाद ग्रामीण इलाकों में सड़क और मकान बनाने में छूट, वो भी जहां कोरोना का केस न हो.

    थूकने पर जुर्माना

    गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक जगहों में पान और गुटका खाकर थूकने पर जुर्माना लगाया जाएगा. इसके साथ ही लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर सजा भी दी जाएगी. मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया गया है यानी अब सभी को मास्क लगाना जरूरी है.

  • CM से लेकर डिप्टी CM और मंत्रियों से घूम घूमकर मिलते रहे कोरोना से संक्रमित विधायक….

    CM से लेकर डिप्टी CM और मंत्रियों से घूम घूमकर मिलते रहे कोरोना से संक्रमित विधायक….

    दिल्ली। गुजरात में एक विधायक जी का कारनामा सबपर भारी पड़ गया है। कोरोना से संक्रमित होने के बाद विधायक जी घूम घूमकर सीएम और मंत्रियों से मिलते रहे। अब खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है।

    अहमदाबाद के खाड़िया जमालपुर से कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला कोरोना संक्रमित पाए गए। उन्होंने इसके बाद भी इसका खुलासा नहीं किया और लापरवाही के साथ राज्य के सीएम समेत कई मंंत्रियों से मिलते रहे। अब खुलासे के बाद हड़कंप मचा गया है। खास बात ये है कि मंगलवार को ही उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी, उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल और राज्य के गृह मंत्री से मुलाकात की थी।

    विधायक इमरान खेड़ावाल को कोरोना के बाद भी उन्होंने सीएम विजय रुपाणी से मुलाकात की। जिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस बात पर नाराजगी जाहिर की गई है कि जब उनमें लक्षण दिख रहे थे तो वह सीएम से मिलने क्यों आ गए। उधर, जिले के सीएमओ ने कहा है कि इमरान इस बैठक में जब पहुंचे थे तो उससे पहले अपना कोरोना टेस्ट करवाया था। ऐसे में उन्हें बाहर नहीं निकलना चाहिए था। अब विधायक की हरकत के बाद सूबे की राजनीति में हड़कंप मच गया है।

  • लॉकडाउन की अवधि के दौरान घरेलू हिंसा के मामलों में तेजी से इजाफा, परेशान CM ने अधिकारियों को दिया ये आदेश….

    लॉकडाउन की अवधि के दौरान घरेलू हिंसा के मामलों में तेजी से इजाफा, परेशान CM ने अधिकारियों को दिया ये आदेश….

     दिल्ली। लॉकडाउन में एकसाथ रहते रहते मियां बीवी के बीच मारपीट की घटनाओं में खूब इजाफा हुआ है। इसको देखते हुए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पुलिस अधिकारियों को बुलाकर विशेष आदेश दिये।
    दरअसल, पूरे देश के साथ साथ ओडिशा में भी लॉकडाउन की अवधि के दौरान घरेलू हिंसा के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। मियां बीवी के बीच बढ़ती मारपीट की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पुलिस अधिकारियों से इन घटनाओं से सख्ती से निपटने को कहा। उन्होंने कहाकि पुलिस हर हाल में इन घटनाओं को सख्ती से रोके।
    मुख्यमंत्री ने डीजीपी को घरेलू हिंसा में लिप्त अपराधियों पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ओडिशा पुलिस को ऐसे अपराधियों की पहचान करनी चाहिए और फोन पर ही शिकायत दर्ज करने की सुविधा का विस्तार करना चाहिए। उन्होंने आदेश दिया कि पुलिस घरेलू हिंसा की शिकायत फोन पर ही दर्ज करे और ऐसा करने वालों को दंडित करे ताकि लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा के मामलों में कमी आ सके।