छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव 2025 को लेकर तैयारियों में तेजी आ गई है। मंगलवार को रायपुर के साइंस कॉलेज परिसर में स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आरक्षण की प्रक्रिया संपन्न हुई। राज्य में कुल 14 नगर निगम में से 4 निगम ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं, जबकि 2 निगम अनुसूचित जाति (SC) और 1 निगम अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित रखे गए हैं। इसके अतिरिक्त, रायपुर सहित कुल 7 निगम सामान्य श्रेणी के तहत आरक्षित हैं। इसी संदर्भ में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का एक महत्वपूर्ण बयान भी सामने आया है।
उन्होंने कहा कि नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ होंगे। 15 जनवरी तक मतदाता सूची का प्रकाशन हो जाएगा। इस दौरान उन्होंने सरकार की जाहिर की है। उन्होंने कहा कि नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत एक साथ कराने की मंशा जाहिर की है। सरकार पूरी तरह से गंभीर है।
हाल ही में डिप्टी सीएम अरुण साव ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान स्पष्ट किया कि निकाय और पंचायत चुनावों का एक ही समय पर आयोजन संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि इन दोनों चुनावों के लिए मतदान की तिथियाँ भिन्न होंगी। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि दोनों चुनावों के लिए आचार संहिता एक साथ लागू होगी, जबकि मतदान प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से संपन्न होगी।
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कैबिनेट मंत्री का बड़ा बयान, एक साथ होंगे नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव…
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साय मंत्रिमंडल में 2 से अधिक मंत्री ले सकते हैं शपथ…
छत्तीसगढ़ में साय मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच ताजा अपडेट है यह कि शपथ समारोह की तारीख तय कर ली गई है. अर्थात जिसका इंतजार महीनों से हो रहा है, वो खत्म होने वाला है. तारीख के साथ-साथ सूत्रों के मुताबिक खबर यह भी है कि 2 से अधिक मंत्री शपथ ले सकते हैं. शपथ समारोह को लेकर तैयारियां शुरू कर दिए जाने की खबर है.
साय कैबिनेट का विस्तार 12 या 13 जनवरी को तय है. अगर सबकुछ सही समय पर हुआ तो 12 जनवरी शाम साय सरकार में शामिल होने मंत्री शपथ ले सकते हैं. किसी कारण से 12 तारीख को नहीं हो पाया तो, 13 जनवरी सुबह शपथ समारोह तय है.
संभावित नामों में कौन-कौन?
संभावित मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा में आरएसएस बैकग्राउंड से आने वाले दुर्ग शहर से विधायक गजेंद्र यादव को मंत्री बनाया जाना तय है. कहते हैं कि संघ से भी उन्हें मंत्री बनाए जाने का दबाव है. संघ से उनके नाम की पैरवी की खबर है. साथ ही यादव समाज को साधने के लिहाज से भी मंत्रिमंडल में उन्हें जगह दिए जाने की वकालत की गई है. इसके अलावा अमर अग्रवाल का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है. संगठन सूत्र कहते हैं कि उनका नाम लगभग तय है. 14 साल तक मंत्री रह चुके अमर अग्रवाल रिजल्ट ओरिएंटेड काम करने के लिए पहचाने जाते हैं. भीड़ से अलग रहकर काम करने में भरोसा करने वाले अमर अग्रवाल ने पूर्ववर्ती रमन सरकार में आबकारी पॉलिसी बनाई थी. शराब बिक्री का ठेका सिस्टम खत्म किया था. इस फैसले से आबकारी राजस्व में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई थी. अमर अग्रवाल देश में इकलौते चेहरे रहे हैं, जो सर्वाधिक लंबे समय तक जीएसटी काउंसिल में बतौर सदस्य शामिल थे. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव भी मंत्री बनने वाले संभावित चेहरों में मजबूत माने जा रहे हैं.
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खरसिया नगर पालिका अध्यक्षा राधा सुनील शर्मा ने कार्यकाल समाप्ति पर जताया आभार…
भविष्य में भी जनसेवा जारी रखने का लिया संकल्प
खरसिया। खरसिया नगर पालिका परिषद् का गठन 5 जनवरी 2020 को विधायक उमेश पटेल के नेतृत्व में किया गया था। इस परिषद् की अध्यक्ष के रूप में राधा सुनील शर्मा ने अपने दायित्वों का निर्वहन किया। 5 जनवरी 2025 को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है, इस अवसर पर उन्होंने नगर के नागरिकों, समस्त पार्षदों और नगर पालिका परिवार का आभार व्यक्त किया।
राधा सुनील शर्मा ने कहा, “विधायक उमेश पटेल के कुशल नेतृत्व में हमने खरसिया नगर पालिका के माध्यम से आमजन की समस्याओं के समाधान का हरसंभव प्रयास किया। हमारे प्रयासों का उद्देश्य शहर को बेहतर सुविधाएं देना और नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना था। मैं सभी नागरिकों का धन्यवाद करती हूं, जिन्होंने हमें इस कार्य में समर्थन और सहयोग दिया। भविष्य में भी विधायक उमेश पटेल के नेतृत्व में यह जनसेवा निरंतर जारी रहेगी।”
गौरतलब है कि राज्य शासन के नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नगर पालिका में निर्वाचित परिषद का कार्यकाल समाप्त होने के पश्चात अनुविभागीय अधिकारी (रा.) को प्रशासक नियुक्त किया गया है जो परिषद की शक्तियों का उपयोग तथा उनके कर्तव्यों का निष्पादन करेंगे। -

शराब घोटाले में तत्कालीन आबकारी मंत्री लखमा को हर महीने मिलते थे 50 लाख रूपये..? ED ने जांच के बाद ECIR में किया था खुलासा
रायपुर। कवासी लखमा सहित उनके बेटे और समर्थकों के यहां ED के छापे के बाद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार में हुए कथित शराब घोटाले की चर्चा फिर से शुरू हो गई है। दरअसल तब कवासी लखमा आबकारी मंत्री थे और ईडी ने शराब घोटाले की ECIR में उल्लेख किया था कि कवासी लखमा को शराब घोटाले से जुड़े अवैध कमीशन के रूप में हर महीने 50 लाख रुपये मिलते थे, जो कि इस घोटाले के वित्तीय हिस्से का कमीशन था।
शराब घोटाले में मामला दर्ज करने के करीब डेढ़ वर्ष की जांच के बाद ED द्वारा तैयार की गई ECIR याने Enforcement Case Information Report (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) में अनेक खुलासे किये गए थे। बता दें कि इस प्रकरण में CSMCL के तत्कालीन MD अरुणपति त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर और पूर्व IAS अनिल टुटेजा फिलहाल जेल में हैं। ED ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि छत्तीसगढ़ में सरकारी संरक्षण में शराब घोटाला हुआ है। इसमें 2161 करोड़ रुपए का अवैध रूप लेन देन हुआ है। इसमें नेता, और सरकारी अफसर शामिल रहे हैं।70 लोगों के खिलाफ दर्ज है FIR
ईडी ने 70 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है, जिनमें कवासी लखमा भी शामिल हैं। लखमा अशिक्षित हैं और वे हस्ताक्षर भी नहीं कर सकते। ऐसे में राज्य के राजस्व से जुड़ा इतना अहम विभाग उनके जिम्मे देकर सत्ता के प्रमुख लोग उनकी आड़ में आबकारी कारोबार से जुड़े काम करते रहे। ED के बाद इस शराब घोटाले के मामले में ACB ने भी 70 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई। ACB इस मामले में अलग से कार्रवाई कर रही है।
पूर्व आबकारी आयुक्त पर भी लटकी है तलवार
ED के मुताबिक ये पूरा सिंडिकेट सरकार के इशारों पर ही चलता रहा। तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा को भी इसकी जानकारी थी और कथित तौर पर कमीशन का बड़ा हिस्सा आबकारी मंत्री कवासी लखमा के पास भी जाता था। चार्जशीट के मुताबिक मंत्री कवासी लखमा और तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास को 50-50 लाख रूपये हर महीने दिए जाते थे। इस मामले में अब तक पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास बचे हुए हैं और उनके ऊपर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।स्थानीय चुनाव पर पड़ेगा असर..?
छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव से ठीक पहले कवासी लखमा के बेटे और जिला पंचायत महल कवासी तथा नगर पालिका अध्यक्ष राजू साहू सहित अन्य के ठिकानों पर ईडी की रेड से बस्तर की राजनीति में हलचल मची हुई है। इस कार्रवाई न केवल सुकमा बल्कि बस्तर संभाग के निकायों की राजनीति पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। बीते विधानसभा की तरह स्थानीय चुनाव में भी भाजपा इसे कांग्रेस नेताओं के खिलाफ प्रचार में इस्तेमाल करेगी। बहरहाल ED द्वारा की जा रही छापेमारी में और कितने लोग लपेटे में आ रहे हैं, यह देखना अभी बाकी है। -

पूर्व मंत्री कवासी लखमा के बेटे के घर ED की रेड, नगर पालिका अध्यक्ष के यहां भी छापेमारी, सुबह से चल रही कार्रवाई…
Chhattisgarh ED Raid: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है. शनिवार सुबह ईडी ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा (Former Excise Minister Kawasi Lakhma) के बेटे हरीश कवासी के ठिकानों पर छापेमारी की है.
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है. शनिवार सुबह ईडी ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा (Former Excise Minister Kawasi Lakhma) के बेटे हरीश कवासी के ठिकानों पर छापेमारी की है.
जानकारी के मुताबिक़, सुबह 9 बजे ईडी की टीम पूर्व मंत्री और कोंटा विधायक कवासी लखमा के बेटे हरीश कवासी क घर पर पहुंची. हरीश कवासी जिला पंचायत अध्यक्ष है. ईडी की टीम कांग्रेस नेताओं से पूछताछ कर रही है. इसके साथ ही नगर पालिका अध्यक्ष और कांग्रेस नेताराजू साहू के यहाँ ठिकानो पर रेड की है. ईडी की टीम दो गाड़ियों में कांग्रेस नेताओं के घर पहुंची है.एजेंसी सीआरपीएफ के जवानों के साथ पहुंची है. बड़ी संख्या में घर के बाहर घर के बाहर सीआरपीएफ के जवान मौजूद हैं. नगरीय निकाय चुनाव से पहले ED की यह बड़ी कार्रवाई है. फिलाहल दोनों से पूछताछ जा रही है.
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नगरीय और पंचायत चुनाव का ऐलान 30 दिसंबर को? जनवरी अंत तक नगरीय निकाय की वोटिंग, जानिये कब होगा पंचायत चुनाव?…
छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियां तेज हो गई है। 29 तक नगरीय और पंचायत चुनाव के आरक्षण कंप्लीट हो जाएंगे। इसके अगले दिन 30 दिसंबर को राज्य निर्वाचन आयोग दोनों चुनावां का ऐलान कर सकता है। यह डेट इसलिए फायनल समझा जा रहा क्योंकि, अगर दो दिन विलंब हुआ तो फिर नए सिरे से मतदाता सूची तैयार करना पड़ेगा।
1 जनवरी से पहले मजबूरी
राज्य निर्वाचन आयोग की मजबूरी है कि एक जनवरी से पहले चुनाव कार्यक्रम डिक्लेयर कर दे। क्योंकि, हर साल एक जनवरी से नई मतदाता सूची का अपग्रेडेशन होता है। यदि 31 दिसंबर तक घोषणा नहीं हुई तो फिर चुनाव एकाध महीने आगे टल जाएगगा।
क्योंकि, मतदाता सूची के नवीनीकरण में महीने भर का वक्त लग जाता है। इसलिए सरकार भी एक्शन मोड में आते हुए आज पहले पंचायत के आरक्षण के लिए डेट जारी की और शाम होते-होते महापौरों के आरक्षण की भी तारीख तय कर दी।
जानकारों का कहना है कि पिछले हफ्ते सरकार जरूर दोनों चुनावो को लेकर आगे-पीछे दिख रही थी। पंचायत चुनाव का आरक्षण शेड्यूल अचानक निरस्त कर दिए जाने के बाद इस धारणा को और बल मिला था। मगर आज सब कुछ यूटर्न के अंदाज में हुआ। और, अब दोनों चुनाव होना तय हो गया है।
जनवरी लास्ट तक नगरीय निकाय
अफसरों का कहना है कि जनवरी अंत तक नगरीय निकाय चुनाव याने वार्ड पार्षद, निकायों के अध्यक्ष और महापौर का चुनाव हो जाएगा। ज्यादा-से-ज्यादा हुआ तो दो-से-तीन फरवरी तक जाएगा। मगर पांच फरवरी से पहले नगरीय निकाय इलेक्शन कंप्लीट हो जाएगा।
पंचायत चुनाव की वोटिंग
नगरीय निकाय चुनाव का कार्यक्रम जनवरी लास्ट तक निबट गया तो पंचायत चुनाव इसके एक हफ्ते बाद होगा। अफसरों का कहना है कि नगरीय निकाय चुनाव कहीं दो-तीन फरवरी तक चला तो पंचायत चुनाव सात-से-आठ फरवरी तक हो जाएगा। -

महतारी वंदन योजना में गड़बड़ी 1 बर्खास्त 2 सस्पेंड लेकिन अहम सवाल का जवाब अब भी नहीं मिला…
महतारी वंदन की राशि सनी लियोन के नाम से हितग्राही बनकर खाते में राशि भेजने के मसले में प्रशासन ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को बर्खास्त कर दिया है, जबकि परियोजना अधिकारी और आंगनबाड़ी पर्यवेक्षक को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके साथ साथ सरकार ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को शो कॉज जारी कर जवाब तलब किया है। लेकिन इस पूरी कार्रवाई में यह सवाल अब भी अनुत्तरित है कि, आखिर पोर्टल का स्क्रीन शॉट किसने लिया और वायरल किसने किया। महतारी वंदन की राशि को अपने खाते से नियमित रुप से आहरण करने वाले वीरेंद्र जोशी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
सत्यापन में गंभीर चूक पर नपे
महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया अलग अलग मौके पर हुई। इसके लिए प्रथम सत्यापन अधिकारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और द्वितीय सत्यापन अधिकारी का दायित्व सुपरवाइजर का है। विभागीय अधिकारियों को इस सवाल का जवाब नहीं मिल रहा है कि, कई बार की सत्यापन प्रक्रिया के बावजूद यह चूक कैसे हो गई। प्रथम सत्यापन अधिकारी के रुप में यह गंभीरतम चूक मानी गई और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता वेदमती जोशी बर्खास्त हो गई, द्वितीय सत्यापन अधिकारी की भुमिका भी प्रश्नांकित है इसलिए आंगनबाड़ी पर्यवेक्षक प्रभा नेताम और परियोजना अधिकारी ज्योति मथरानी को सस्पेंड किया गया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी सीधे तौर पर दोषी नहीं हैं लेकिन चूंकि प्रमुख हैं इसलिए शो कॉज का कागज उनके नाम का भी जारी हो गया है।
प्रारंभिक तौर पर कुछ यूँ हुआ मामला
प्रारंभिक तौर पर जो मसला सामने आया है उससे यह संकेत मिलते हैं कि आंगनवाड़ी केन्द्र तालूर में वीरेन्द्र कुमार जोशी के द्वारा आंगनवाड़ी केन्द्र तालूर के कार्यकर्ता के माध्यम से सन्नी लिओनी के नाम से आवेदन किया गया, तथा उस आवेदन में अन्य जानकारी के रूप में अपना आधार नंबर तथा अपने बैंक खाते की जानकारी डाली गयी। प्रत्येक आवेदन के परीक्षण एवं सत्यापन का दायित्व ग्राम स्तर पर बनायी गयी समिति, जिसमें ग्राम प्रभारी/वार्ड प्रभारी एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के द्वारा किया जाना था। इसके उपरांत पोर्टल में अंकित दस्तावेज़ो का परीक्षण प्रथम सत्यापन में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के द्वारा तथा द्वितीय सत्यापन पर्यवेक्षक के द्वारा किया जाना था तथा परियोजना अधिकारी के द्वारा अनुमोदित किया जाना था। इस प्रकरण में ऐसा प्रतीत होता है कि, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता वेदमति जोशी, जो की वीरेन्द्र कुमार जोशी की पड़ोसी भी है, के द्वारा बिना तथ्यों की जाँच परख किए ऑनलाईन पोर्टल पर वीरेन्द्र कुमार जोशी के द्वारा सन्नी लिओनी के नाम से किए गए आवेदन को सत्यापित कर दिया गया। इसी प्रकार पर्यवेक्षक के द्वारा भी बिना परीक्षण किए हुए इस आवेदन का सत्यापन कर दिया गया, जिसके कारण इस फर्जी नाम वाले हितग्राही को उनके द्वारा दिए गए आधार नबंर से लिंक स्टेट बैंक के खाते में डीबीटी के रूप में राशि का भुगतान हुआ है।
अहम सवाल के जवाब की तलाश
इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल का जवाब अनुत्तरित है। पूरा तंत्र उसी जवाब की तलाश में है। मसला गंभीर है भी क्योंकि जो स्क्रीन शॉट वायरल हुआ उस तक पहुँच सामान्य तौर पर सबकी नहीं हो सकती। यह आंगनबाडी के पोर्टल का स्क्रीन शॉट है। इसमें हितग्राही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता या सुपरवाइजर की पहुँच होती है। यह पोर्टल केवल यह बताता है कि, हितग्राही की राशि कब जारी हुई और कब खाते में जमा हुई। जाहिर है इस पर किसी और की सहजता से मौजूदगी नहीं हो सकती। वीरेंद्र जोशी ने तो खैर आवेदन किए जाने से ही इंकार कर दिया है। लेकिन नियमित आहरण ने उसे जेल दाखिल करा दिया। अब वो खुद ही स्क्रीन शॉट लेकर वायरल करेगा इसकी संभावना नहीं बनती। पुलिस का ध्यान अब एक एंगल पर गया है। यह मसला वह है कि, आंगनबाडी कार्यकर्ता ऑनलाइन वर्क के लिए सहज नहीं हो पाती क्योंकि कंप्यूटर वर्क होता है। ऐसे में कई बार निजी तौर पर सहायक उपयोग किए जाते हैं। पुलिस अब इस एंगल से स्क्रीन शॉट लिए जाने और वायरल किए जाने की गुत्थी की कोशिश में है। -

सायबर अपराध की सारी शिकायतें नहीं पहुंचती एफआईआर तक…
रायगढ़। सायबर क्राइम के जितने मामलों में आरोपी पकड़े जाते हैं, उसे दस गुना अधिक अपराध होते हैं। रायगढ़ जिले में करीब दस प्रकरणों में एक में पुलिस आरोपी तक पहुंच पाती है। दिसंबर 2023 से दिसंबर 2024 के बीच तकरीबन 1000 मामले सामने आ चुके हैैं। दर्ज अपराधों की संख्या करीब 100 ही है।
आजकल कोई भी पेमेंट हो, शॉपिंग हो, किसी को राशि भेजनी हो, एकाउंट स्टेटमेंट देखना हो, बिजली बिल, फीस चुकानी हो, सारे काम मोबाइल से हो जाते हैं। डिजिटाइजेशन का लाभ यह है कि छोटे-छोटे कामों के लिए बैंक नहीं जाना पड़ता। आपका मोबाइल ही आपका मिनी बैंक बन चुका है। इसका फायदा हुआ है तो नुकसान भी। सायबर अपराधियों के लिए पहले सीमित अवसर थे लेकिन अब उनके पास उतने ही तरीके भी विकसित हो चुके हैं। इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के अलावा कोई उपाय ही नहीं है। पुलिस तक जब मामला पहुंचता है तब तक अपराधी एकाउंट खाली कर चुका होता है। आहरित राशि को वापस लाने के लिए आरोपी का पकड़ा जाना जरूरी है।
लेकिन ऐसा तब होगा जब सारे मामलों में एफआईआर दर्ज होगी। दिसंबर 2023 से दिसंबर 2024 के बीच रायगढ़ जिले में करीब 1000 शिकायतें दर्ज हुई हैं जिसमें से करीब 100 में ही अपराध दर्ज हुए हैं। करोड़ों की ठगी के बदले चंद लाख रुपए ही बरामद हो सके हैं। दरअसल राशि आहरण करते ही रकम को इधर-उधर खर्च कर दिया जाता है। प्रदेश में दस हजार से अधिक शिकायतें हुई हैैं। रायगढ़ जिले में उन्हीं मामलों में अपराध दर्ज होता है जिसमें आरोपी को पकडऩे या कुछ रिकवरी की गुंजाइश बनती है। बाकी आवेदन फाइलों में ही बंद रह जाते हैं। सायबर क्राइम ब्रांच में संसाधनों की कमी भी एक वजह है। जिस तरह से सायबर अपराध बढ़ हैं, उस हिसाब से टीम नहीं बढ़ाई जा रही है। तकनीक के मामले में भी पुलिस पीछे है।
रायपुर से भी ज्यादा मामले रायगढ़ में
प्रदेश में सायबर क्राइम के सबसे ज्यादा मामले दुर्ग में सामने आए थे। इसके बाद कोरबा और रायगढ़ का नाम है। इन जिलों में लोगों को निशाना बनाना ज्यादा आसान है। प्रदेश में करीब दस हजार मामले सामने आ चुके हैं। इतने अपराध दर्ज नहीं हुए हैं। जांच के नाम पर आवेदन लंबित हैं। -

दवा कारोबारी से लाखों की ठगी, फर्जी कंपनी के नाम पर की धोखाधड़ी…
रायपुर। राजधानी में एक दवा कारोबारी को ठगों ने ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार बना लिया। शातिर ठगों ने कारोबारी को हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड कंपनी के नाम पर मेल ऑर्डर भेजकर दवाइयां सप्लाई करने का झांसा दिया। कारोबारी ने इस झांसे में आकर 7.88 लाख रुपये की ऑनलाइन पेमेंट कर दी, लेकिन दवाइयां कभी डिलिवर नहीं हुईं।
खुलासा तब हुआ जब कारोबारी कमलजीत बग्गा ने असल कंपनी से संपर्क किया और पता चला कि वह कंपनी से संबंधित कोई ऑर्डर नहीं था।पीड़ित कारोबारी ने धोखाधड़ी की शिकायत देवेंद्र नगर थाने में दर्ज कराई है। पुलिस ने अज्ञात ठगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।ठगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग
यह घटना दवा कारोबारी समुदाय में चिंता का विषय बन गई है, और अब स्थानीय व्यवसायी ठगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस इस मामले में ठगों की पहचान करने के लिए जांच में जुटी है। -

छत्तीसगढ़ में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियां अंतिम चरण में : उप मुख्यमंत्री अरुण साव
रायपुर। छत्तीसगढ़ में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की तारीखों के ऐलान की तैयारियां जोरों पर हैं। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया कि सरकार की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न एजेंसियां और विभाग चुनाव की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने में जुटे हुए हैं। आरक्षण की प्रक्रिया का एक चरण शेष है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा।
मंत्रिमंडल विस्तार पर बोले उप मुख्यमंत्री
हरियाणा की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। मुख्यमंत्री केंद्रीय मंत्रियों से बातचीत कर निर्णय लेंगे।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के दौरे पर प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के छत्तीसगढ़ दौरे पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मोहन भागवत देशभर में प्रवास करते रहते हैं। वे जिनसे मिलना चाहते हैं, उनसे मिलेंगे।
प्रदीप मिश्रा के बयान पर दी प्रतिक्रिया
पंडित प्रदीप मिश्रा के सांता क्लॉज पर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि धर्माचार्य के बयान पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती पर हमने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। आज छत्तीसगढ़ की जो प्रगति हो रही है, वह अटल जी के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है।”
छत्तीसगढ़ में चुनाव और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर माहौल गर्म है। राज्य की जनता को अब चुनावी कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।