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  • पति के साथ मिलकर स्कैम करती थी रानू…

    पति के साथ मिलकर स्कैम करती थी रानू…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला मामले में ईडी ने 9 आरोपियों के खिलाफ पूरक चालान पेश किया है। इनमें रानू साहू के पति आईएएस जयप्रकाश मौर्य समेत 9 लोगों को आरोपी बनाया गया है। पेश किए गए चालान में बताया गया है कि आईएएस जयप्रकाश मौर्य रानू साहू के साथ मिलकर काम करते थे। निलंबित आईएएस रानू साहू पहले ही जेल में बंद है। इसके अलावा, सौम्या चौरसिया, सूर्यकांत तिवारी भी इस केस में जेल में बंद हैं। हेमंत और वीरेंद्र अवैध कोल लेवी वसूली में सक्रिय रहे हैं। इसके अलावा पारिख और राहुल पर आरोप है कि दोनों कोल घोटाले मामले के किंग पिन सूर्यकांत तिवारी के साथ मिलकर काम करते थे।

    इन सभी पर आरोप है कि कोयला लेवी के पैसों का कलेक्शन करते थे। उसे सिंडिकेट से जुड़े लोगों और अधिकारियों तक पहुंचाते थे। साथ ही जोगिंदर सिंह, रामगोपाल व पीयूष भाटिया की भी घोटाले में विशेष भूमिका बताई गई है।
    सिंडिकेट बनाकर हुई 570 करोड़ की वसूली
    इसके लिए सिंडिकेट बनाकर वसूली की जाती थी, जो व्यापारी 25 रुपए प्रति टन के हिसाब से अवैध रकम सूर्यकांत के कर्मचारियों के पास जमा करता था। उसे ही खनिज विभाग पीट पास और परिवहन पास जारी करता था। इस तरह से स्कैम कर कुल 570 करोड़ रुपए की वसूली की गई।

  • छत्तीसगढ़ के इस जिले का नाम बदला…

    छत्तीसगढ़ के इस जिले का नाम बदला…

    छत्तीसगढ़ सरकार ने बलौदाबाजार जिले का नाम बदलने का फैसला लिया है। अब यह जिला संत शिरोमणि गुरु घासीदास बाबा जी के नाम पर “गुरु घासीदास धाम” कहलाएगा। इसके साथ ही, इसे राष्ट्रीय तीर्थस्थल भी घोषित किया जाएगा। इसके साथ ही, छत्तीसगढ़ सरकार इस क्षेत्र को राष्ट्रीय तीर्थस्थल के रूप में भी घोषित कर सकती है। अपर कलेक्टर को जारी आदेश में अधिकारियों से इस फैसले पर स्पष्ट राय देने को कहा गया है। प्रशासन से जल्द से जल्द आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • आग लगने से करोड़ों रुपए के समान का नुकसान ™️ कार्यपालन यंत्री गुंजन शर्मा को हटाया गया…

    आग लगने से करोड़ों रुपए के समान का नुकसान ™️ कार्यपालन यंत्री गुंजन शर्मा को हटाया गया…

    छत्तीसगढ़ राज्य पावर वितरण कंपनी के रायगढ़ स्थित स्टोर में आग लगने से 400 पुराने ट्रांसफॉर्मर आग में भस्म हो गए थे। घटना के बाद स्टोर के कार्यपालन यंत्री को हटाने के साथ घटना की जांच शुरू कर दी गई है। बड़ी बात यह है कि ट्रांसफॉर्मर एवं अन्य विद्युत उपकरणों का बीमा नहीं कराया गया था।

    रायगढ़ के स्टोर में लगी आग से पावर कंपनी को एक बार फिर लाखों रुपए की क्षति हुई है। गुढ़ियारी में आगजनी की वजह से 50 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। गुढ़ियारी में घटना की जांच तत्कालीन कार्यपालक निदेशक ओएंडएम एवं वर्तमान में वितरण कंपनी के एमडी भीम सिंह की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय कमेटी ने की थी। कमेटी ने भविष्य में होने वाली घटना को रोकने के लिए सुझाव भी दिए हैं, परंतु सुझाव केवल फाइल तक सीमित रह गए हैं। सूत्रों की मानें तो गुढ़ियारी में घटना के बाद शुरुआत के दो-तीन माह तो स्टोर की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया परंतु अब फिर पुराने ढर्रे पर स्टोर संचालित हो
    रहे हैं।

    रायगढ़ स्टोर इसका ताजा उदाहरण है। स्टोर के आसपास काफी संख्या में सूखी घास व छोटे-छोटे पेड़ थे। जिसकी सफाई नहीं कराई गई। रायगढ़ स्टोर में आगजनी से 400 पुराने ट्रांसफॉर्मर जल गए। इससे कंपनी को फिर लाखों की चपत लगी है। ज्यादातर ट्रांसफॉर्मर रिपेयर के लिए रखे गए थे। जिसका पुनः उपयोग किया जा सकता था। पुराने ट्रांसफॉर्मर के जलने को लेकर भी पावर कंपनी के गलियारे में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। बताते हैं कि स्टोरों में फायर ऑडिट के निर्देशों का भी पालन नहीं किया जा रहा है।

    आगजनी के बाद कंपनी प्रबंधन ने बिलासपुर के मुख्य अभियंता आलोक अम्बष्ट की जांच का जिम्मा सौंपा है। वहीं स्टोर के कार्यपालन यंत्री गुंजन शर्मा को तत्काल हटा दिया गया है। इधर, सीन ऑफ क्राइम मोबाइल यूनिट के वरिष्ठ वैज्ञानिक पीएस भगत ने भी पुलिस को अपनी रिपोर्ट दे दी है।

    रिपोर्ट के अनुसार स्टोर के बाहर किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा आते-जाते समय बीड़ी अथवा सिगरेट पीकर बचे हुए टुकड़े को बिना बुझाए फेंक दिया गया होगा। जिससे सूखी घास में आग लगी और उसकी चिंगारी स्टोर के भीतर केबल में गिरी। प्लास्टिक एवं ट्रांसफॉर्मर के ऑयल होने की वजह से आग तेजी से फैल गई। वहीं स्टोर से हटाए गए कार्यपालन यंत्री गुंजन शर्मा ने कहा कि आगजनी जहां हुई, वहां रिपेयर के लिए आए ट्रांसफॉर्मर ही रखे हुए थे। नए ट्रांसफॉर्मर सुरक्षित हैं। स्टोर में फायर सिस्टम लगा था, लेकिन तेज हवा की वजह से आग तेजी से फैल गई।

  • किसानों के मोबाईल नंबर तक फर्जी, अपेक्स बैंक में आरबीआई के नियम फेल

    किसानों के मोबाईल नंबर तक फर्जी, अपेक्स बैंक में आरबीआई के नियम फेल

    अपेक्स बैंक ने रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में गड़बड़ी के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बरमकेला ब्रांच में तो रोज नए खुलासे हो रहे हैं। पूर्व ब्रांच मैनेजर डीआर वाघमारे और उनके मातहतों ने जो कमाल किए हैं, उससे आरबीआई की गाइडलाइन भी तार-तार हो गई है। सामान्यत: बैंक खातों से आधार नंबर, पैन नंबर और मोबाइल नंबर लिंक होने हैं। बरमकेला ब्रांच में सैकड़ों किसानों के मोबाइन नंबर ही फर्जी हैं। अपेक्स बैंक बरमकेला ब्रांच में सोसायटी के ऋण लिमिट से कई गुना ज्यादा फर्जी ऋण निकालकर गबन कर लिया गया है। यह रकम करीब 14 करोड़ है। प्रारंभ में पता चला कि करीब 4 करोड़ का गबन हुआ है, लेकिन यह आंकड़ा 15 करोड़ से अधिक है।

    छह समितियों बड़े नावापारा, बोंदा, लोधिया, साल्हेओना, पंचधार और कंठीपाली में ब्याज अनुदान के अनुसार कुल 1.97 करोड़ का लोन स्वीकृत था। समिति के अल्पकालीन ऋण खाते से 15.63 करोड़ रुपए निकाल लिए गए। मतलब कुल 13.67 करोड़ रुपए का फर्जी आहरण कर लिया गया। अब जानकारी मिली है कि किसानों के मोबाइल नंबर की जगह फर्जी नंबर डाल दिया गया। पहले ऋण की राशि किसानों के एकाउंट में डाली गई, अगले ही दिन इस राशि को निकाल लिया गया। किसान को लगा कि बैंक से गलती से राशि डाल दी गई होगी जिसे वापस लिया गया है। यह राशि अब समिति का किसान पर लोन के रूप में दिख रही है। कई किसानों के नंबर ही गलत डाले गए हैं। लोन एकाउंट में राशि डालने के बजाय फर्टिलाइजर एकाउंट में भी डाले गए।


    दो अधिकारियों के हाथों में बागडोर
    अपेक्स बैंक मुख्यालय में एमडी केएन कांडे और भूपेश चंद्रवंशी की जानकारी में गबन किया गया। इसके बाद जांच शुरू हुई तो गबन का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। रायगढ़ के नोडल पंकज सोढ़ी और सारंगढ़ ब्रांच मैनेजर संजय साहू को भी इसकी जानकारी थी। पहले एबीआर इंफ्रा और अब सीडीओ सिक्योरिटीज के प्राइवेट कर्मचारियों के भरोसे चल रहे दोनों जिले वित्तीय अनियमितताओं का गढ़ बन चुके हैं।

  • कोरबा के पाली में, प्रति टन तीस से पचास रुपए की वसूली पर कब्जे को लेकर गहराया विवाद ?

    कोरबा के पाली में, प्रति टन तीस से पचास रुपए की वसूली पर कब्जे को लेकर गहराया विवाद ?

    कोरबा जिले के पाली इलाक़े में सरायपाली बुडबुड खदान में बीते छ महीने से चले आ रहे वर्चस्व के संघर्ष में एक गुट के युवक की हत्या कर दी गई। मृतक और हत्यारोपी समूह लिफ्टर/ट्रासंपोर्टर हैं, और खदान की लिफ्टिंग पर एकाधिकार चाहते थे। इस मामले में शुरु से सवालों के घेरे में रही कोरबा पुलिस ने हत्या होने के बाद एफ़आइआर दर्ज की है। आरोपियों में सुशासन सरकार के दल याने भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष, सब एरिया मैनेजर सहित सोलह लोग नामजद हैं। इस प्रकरण को लेकर कोरबा एसपी सिद्धार्थ तिवारी से दूरभाष पर संपर्क कर जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने इसी घटनाक्रम के जांच में व्यस्तता की बात कहते हुए फोन काट दिया।

    प्रति टन पचास रुपए का क़िस्सा

    कोयला खदानों में लोडिंग प्वाइंट होता है। यहां ट्रांसपोर्टर बेहतर कोयला और जल्दी लोडिंग कराने के लिए लिफ्टर तय करते हैं। कहीं कहीं पर लिफ्टर खुद ट्रांसपोर्टर भी होते हैं। विवाद या कि प्रतिस्पर्धा तब होती है जब एक लोडिंग प्वाइंट पर अलग अलग लिफ्टर तैनात हो जाते हैं। चर्चाएँ हैं कि, इसी लोडिंग प्वाइंट पर प्रति टन तीस रुपए से पचास रुपए तक की वसूली होती है, जो कि ट्रांसपोर्टर अदा करता है। जनचर्चा है कि इस सुविधा शुल्क का वितरण आदर्श सहकारिता की तरह होता है और इस सुविधा शुल्क का हिस्सा हर उस जवाबदेह व्यक्ति/तंत्र तक जाता है, जिसकी जवाबदेही है कि, कोई अवैध वसुली ना हो, गैंगस्टर ना पनपे, समाज भयमुक्त हो। इस का शेयर उस वर्ग तक भी जाता है जिसे “नेता नगरी” कहा जाता है। हिस्सा उस वर्ग तक भी पूरी गरिमा से पहुंचता है जिसकी जवाबदेही है कि, यदि ऐसा संगठित भ्रष्टाचार या कि संगठित अपराध हो रहा है तो उसे प्रसारित प्रचारित करें। नाम जाहिर ना करने की शर्त पर दावा किया गया है कि भ्रष्टाचार और दबंगई की राशि का बंटवारा सहकारिता के आदर्श मानक को सुनिश्चित करते हुए गोपनीयता के उच्च स्तर को बनाए रखते हुए होता है कि, सभी लाभार्थी मौन रहते हैं। सूत्र कहते हैं कि, जब तक इस सुविधा शुल्क का भुगतान नहीं होता तब तक कोयले से भरी ट्रक लोडिंग प्वाइंट से बाहर गंतव्य के लिए नहीं जा सकती।

    घटनाक्रम क्या है

    पाली के बुडबुड खदान में लोडिंग प्वाइंट है। इस लोडिंग प्वाइंट में लिफ्टर/ट्रांसपोर्टर के रूप में दो गुटों के बीच वर्चस्व को लेकर विवाद चल रहा था। एक गुट अनिल जायसवाल का है तो एक दूसरा गुट रोशन सिंह का है। सूत्र बताते हैं कि, वर्चस्व की लड़ाई का मामला उसी पचास रुपए टन की अवैध वसूली पर एकाधिकार से जुड़ा है। इस मामले में दर्ज एफआईआर को पढ़ने से अंदाज लगता है कि 28 मार्च को रात करीब साढ़े दस बजे विवाद तब गहरा गया जबकि रोशन सिंह गुट ने लोडिंग प्वाइंट में घुसने की कोशिश की और अनिल जायसवाल के चचेरे भाई अनूप ऊर्फ रोहित ने रोका और प्रतिरोध किया। यह प्रतिरोध हिंसक संघर्ष में बदल गया और रोशन सिंह गुट ने लामबंद होकर अनूप पर हमला किया और उसकी खदान में ही हत्या कर दी। एफ़आइआर में जिन लोगों के नाम रोशन सिंह गुट के हमलावरों के रूप में दर्ज हैं उनमें सब एरिया मैनेजर सुरेंद्र सिंह चौहान का नाम भी शामिल है।

    काबिल ईमानदार कोरबा पुलिस की सजग कार्यवाही

    कोरबा के स्थानीय मीडिया साथियों ने बताया है कि, छ महीने से लगातार हो रहे टकराव के बाद जबकि हत्या हो गई, बेहद सक्रिय बेहद काबिल और ईमानदारी के क्षेत्र में राज्य में अनुकरणीय स्थान रखने वाली कोरबा पुलिस सक्रिय हुई। रात साढ़े दस बजे की इस घटना की एफआईआर अभूतपूर्व तेजी के साथ सुबह तीन बजे तक दर्ज कर ली गई। मामले में आरोपी के रुप में दर्ज आठ आरोपियों ने कोरबा पुलिस की कार्यशैली को देखते हुए तत्काल सरेंडर कर दिया जबकि बीजेपी के पाली मंडल अध्यक्ष रोशन सिंह ठाकुर, उनके भाई तथा भांजे को कोरबा पुलिस ने आठों दिशाओं से घेरा और जिले की सीमा पार करने के पहले छलांग मार कर बेहद साहसिक तरीके से पकड़ने में अद्वितीय अभूतपूर्व सफलता पाई। खबरें इस आशय कि भी हैं कि पाली थाना प्रभारी विनोद सिंह को लाइन अटैच कर दिया गया है।

    एसपी साहब जांच में व्यस्त

    इस घटनाक्रम को लेकर पुलिस कप्तान सिद्धार्थ तिवारी से विस्तृत और तथ्यात्मक जानकारी लेने हेतु संपर्क किया गया। दूरभाष पर उन्होंने बताया कि, वे इसी घटनाक्रम में व्यस्त हैं। चूंकि एसपी सिद्धार्थ तिवारी फिलहाल व्यस्त हैं तो प्रति टन तीस रुपये से पचास रुपये वसूली जैसी चर्चा की पुष्टि या खंडन नहीं मिल पाया, साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं हुआ कि, जब विवाद छ महीने से हो रहा था तो विवाद के गंभीर रुप लेने से रोकने के लिए जो ठोस कार्यवाहियाँ की गई आखिर उनका ब्यौरा क्या है। जब भी उनसे संवाद होगा इस मसले पर उनके द्वारा दी गई जानकारी को अक्षरशः प्रकाशित किया जाएगा।

    स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है

    खबर लिखे जाने तक यह सूचना है कि, मृतक के परिजनों ने सभी आरोपियों के पकड़ाए जाने तक अंतिम संस्कार से इंकार कर दिया है। मृतक रोहित के भाई अनिल जायसवाल ने हत्या के इस मामले में पाली थानेदार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। पाली में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। मृतक रोहित के भाई अनिल जायसवाल का मीडिया को दिया बयान वायरल हो रहा है, जिसमें वे यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं-“यह हत्या टीआई विनोद सिंह की मौजूदगी और उसकी शह पर हुई। उसकी गिरफ़्तारी होनी चाहिए। इस आग में कोरबा भी जलेगा।”

  • बहुचर्चित कोयला घोटाला मामले में ईडी ने IAS जे पी मौर्या, वकील पीयूष भाटिया और रामगोपाल अग्रवाल समेत 9 को भी आरोपी बनाया है…

    बहुचर्चित कोयला घोटाला मामले में ईडी ने IAS जे पी मौर्या, वकील पीयूष भाटिया और रामगोपाल अग्रवाल समेत 9 को भी आरोपी बनाया है…

    बहुचर्चित कोयला घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पूरक अपराधिक परिवाद पेश कर 9 अन्य को भी आरोपी बना दिया है। इस पूरक परिवाद में एक IAS, एक अधिवक्ता, कांग्रेस नेता सहित 9 लोग शामिल हैं।

    इनके हैं नाम

    कोयला लेव्ही घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से जो पूर्व अपराधिक परिवाद पेश किया गया है, उस परिवाद में बतौर आरोपी आईएएस जय प्रकाश मौर्या, अधिवक्ता पीयूष भाटिया, पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, शेख मोईनुद्दीन कुरैशी, पारख कुर्रे, राहुल सिंह, हेमंत जायसवाल और वीरेंद्र जायसवाल के नाम मौजूद हैं।

    क्या होगा आगे

    ईडी के प्रकरणों में सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय है कि जब किसी प्रकरण में ईडी विवेचना के दौरान गिरफ्तार ना करे और परिवाद में बतौर आरोपी नाम दर्ज करे तो आरोपी को अदालत में उपस्थिति पर सहजता से जमानत मिलती है। लेकिन कतिपय विधि विशेषज्ञों के अभिमत यह भी है कि, सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय हर प्रकरण पर लागू नहीं होगा क्योंकि हर प्रकरण की प्रकृति अलग अलग होती है।

  • महिला डॉक्टर ने हॉस्टल में फांसी लगाकर की आत्महत्या, MBBS & MD के बाद कर रही थी DM की तैयारी…

    महिला डॉक्टर ने हॉस्टल में फांसी लगाकर की आत्महत्या, MBBS & MD के बाद कर रही थी DM की तैयारी…

    ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में महिला डॉक्टर द्वारा हॉस्टल में फांसी लगाकर आत्महत्या करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। महिला डॉ. रेखा रघुवंशी ने अज्ञात कारणों के चलते अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपनी निगरानी में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

    दरअसल घटना कम्पू थाना क्षेत्र के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज के जमुना गर्ल्स हॉस्टल की है, जहां महिला डॉक्टर रेखा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। फांसी लगाकर आत्महत्या की खबर से पूरे हॉस्टल में हड़कंप मच गया। हर कोई आत्महत्या की ही चर्चा कर रहा था। बताया जाता है कि गजरा राजा मेडिकल कॉलेज से डॉ रेखा MBBS & MD के उपरांत DM की तैयारी कर रही थी। उनके द्वारा आत्मघाती कदम उठाने से न सिर्फ मेडिकल कॉलेज स्टाफ बल्कि परिजन भी स्तब्ध है। उसने किस कारण से फांसी लगाई है इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। मृतका ने कोई सुसाइड नोट भी नहीं छोड़ा है।

  • रायपुर में लुटेरी दुल्हन: महिला ने 4 शादियां कर पतियों को किया ब्लैकमेल, पैसे न देने पर झूठे केस की दी धमकी…

    रायपुर में लुटेरी दुल्हन: महिला ने 4 शादियां कर पतियों को किया ब्लैकमेल, पैसे न देने पर झूठे केस की दी धमकी…

    रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में लुटेरी दुल्हन का मामला सामने आया है. यहां रहनेवाली एक महिला ने एक के बाद एक 4 शादियां की और सभी शादियों में वह अपने पतियों को झूठे केस की धमकी देकर रकम लूटते रही. उसके नए शिकार बने पति ने प्रताड़ित होकर आज मामले की शिकायत मुजगहन पुलिस थाने में की है.

    जानकारी के अनुसार, आरोपी महिला पूजा ने अपने पति डाकेश्वर देवांगन से बैंक के लॉकर में रखे जेवरात निकालकर अपनी मां गायत्री को दे दिए. इसके बाद उसने पैसों की लगातार मांग शुरू कर दी और पैसे न देने पर झूठे केस में फंसाने की धमकी दी. जब डाकेश्वर को अपनी पत्नी पूजा की सच्चाई का पता चला, तो उन्होंने कोर्ट में परिवाद दायर किया. कोर्ट के आदेश पर मुजगहन थाना में महिला और उसकी मां के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. मुजगहन पुलिस मामले की जांच में जुटी है.

  • 10 करोड़ की कर चोरी में भिलाई का कारोबारी गिरफ्तार, खुद पर करोड़ रुपए बकाया होने के बाद पत्नी के नाम से फर्म का पंजीयन कर फर्जीवाड़े को दे रहा था अंजाम…

    10 करोड़ की कर चोरी में भिलाई का कारोबारी गिरफ्तार, खुद पर करोड़ रुपए बकाया होने के बाद पत्नी के नाम से फर्म का पंजीयन कर फर्जीवाड़े को दे रहा था अंजाम…

    रायपुर। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) विभाग ने 10 करोड़ 38 लाख 83 हजार 84 रुपए की कर चोरी के आरोप में मेसर्स ओविया ट्रेडर्स नामक फर्म की संचालिका के पति विनय कुमार टंडन को भिलाई से गिरफ्तार किया है. आरोपी को बिना माल या सेवाओं की आपूर्ति के फर्जी चालान के माध्यम से धोखाधड़ी से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ उठाते हुए और उसे पास करते हुए पाया गया, जिससे सरकारी खजाने को काफी नुकसान हुआ.

    विश्वसनीय खुफिया जानकारी और डेटा एनालिटिक्स के आधार पर सीजीएसटी रायपुर प्रधान आयुक्त राकेश गोयल के नेतृत्व में अधिकारियों ने एक विस्तृत जांच की, जिसमें आपूर्तिकर्ताओं के बैंक स्टेटमेंट और करदाता के ई-वे बिल डेटा और अन्य वित्तीय लेन-देन की जांच करने के बाद पाया कि आरोपी फर्जी बिल के आधार पर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने और उसे पास करने में लिप्त था.

    जांच से यह भी पता चला कि आरोपी के पास पहले से ही अपने नाम पर जीएसटी पंजीकरण था, जहां उसे 1 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान करना था, जिसका कभी भुगतान नहीं किया गया और बकाया राशि का भुगतान करने के बजाय, आरोपी ने धोखाधड़ी करने के लिए अपनी पत्नी के नाम पर एक और GST पंजीकरण ले लिया.

    पर्याप्त सबूत इकट्ठा करने के बाद, चूंकि इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि 5 करोड़ से अधिक है, इसलिए आरोपी को सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 69 के प्रावधानों के तहत अधिनियम की धारा 132 के तहत दंडनीय अपराध करने के लिए गिरफ्तार किया गया. व्यक्ति को दुर्ग जिला न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और गिरफ्तार व्यक्ति को 28 मार्च की शाम को दुर्ग की सेंट्रल जेल ले जाया गया.

  • राशन घोटाला को दबाने एक और जांच…

    राशन घोटाला को दबाने एक और जांच…

    विष्णु देव साय की सरकार में एक बात तो तय है कि घोटाले को दबाने के लिए अधिकारी कितनी भी जुगत लगा ले बचने वाले नहीं है।कांग्रेस शासनकाल में चार विभागों के बड़े घोटाले सुर्खियों में है। ये है आबकारी, राजस्व, खनिज और खाद्य। खाद्य विभाग के घोटाले में लिप्त अधिकारियों पर अभी केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी, ने जांच जारी रखी है, सीबीआई जल्दी ही हाथ डालने की तैयारी में है। ईओडब्ल्यू और एसीबी का छापा कभी भी पड़ सकता है।

    खाद्य संचालनालय के अधिकारियों ने कांग्रेस शासनकाल में जमकर राशन दुकानों के जरिए अरबों का चांवल खुले बाजार में बेच कर भारी पैमाने में भ्रष्ट्राचार किया है। पूर्व मुख्यमंत्री डा रमन सिंह ने विधानसभा में छह सौ करोड़ रुपए के घोटाले का मामला उठाया था। तकनीकी त्रुटि का मामला बता कर खाद्य संचालनालय का एक अधिकारी जो टुटेजा एंड कंपनी का साझेदार रहा है, एनआईसी में दखल देकर विभाग के पोर्टल में मनमानी करवाया। घोषणा पत्र के बचत में हेराफेरी करवाई।

    अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया का डर दिखा कर मैदानी अमले से गलत काम करने का दबाव जूम कांफ्रेंस से दिया।
    राशन घोटाले की गंभीरता को देखते हुए विधान सभा जांच समिति भी गठित हो गई है। इस जांच समिति के सामने घोटाले को दबाने के लिए नई नई तरकीब निकाली जा रही है। हाल ही प्रदेश की तेरह हजार राशन दुकानों में 31 मार्च की स्थिति में बचे राशन बचत की जांच का फरमान निकाला गया है।

    इस जांच में मैदानी अमले पर
    दबाव डाला जा रहा है कि दस दिन के भीतर विभाग के सारे काम छोड़कर राशन दुकान में जाकर बचे राशन बचत की जांच करे। इस काम के लिए राजस्व और सहकारिता विभाग के अधिकारियों की मदद लेने के लिखित निर्देश दिए गए है। मौखिक रूप से ये भी कहा गया है कि इन दोनों विभागों के अधिकारियों को उन्हीं राशन दुकानों की जांच करवाई जाए जो ठीक हो।


    ये भी निर्देश दिए गए है कि जिन राशन दुकानों के लिए राजस्व वसूली के आदेश हो चुके है उनकी जांच नहीं किया जाए। बता दे कि राजस्व वसूली का आदेश भी नियम विपरीत है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश में राशन दुकानों में गड़बड़ी पाई जाने जांच प्रतिवेदन, कारण बताओ नोटिस, जवाब के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में अनुविभागीय अधिकारियों के निर्णय के बाद राशन दुकान के द्वारा पालन न किए जाने के बाद राजस्व वसूली का प्रावधान है। खाद्य विभाग के मैदानी अमले पर कार्यवाही का डर बना कर बिना अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से निर्णय के बगैर राजस्व वसूली के आदेश जारी करवा दिया गया है।

    माना जा रहा है कि प्रदेश के पांच हजार राशन दुकान के लिए राजस्व वसूली के आदेश जारी किए गए है। इस कारण पांच हजार राशन दुकानों की जांच नहीं होगी। खाद्य संचालनालय के अधिकारी ने राशन घोटाले को दबाने के लिए खुले बाजार से घटिया चांवल खरीद कर रखने का भी जूम कांफ्रेंस में निर्देश दिया है। इस मामले में पुख्ता प्रमाण एनआईसी से भौतिक सत्यापन के लिए जारी पोर्टल में एंट्री करवाई गई है जिसमें सामान्य और फोर्टीफाइड चांवल की एंट्री का प्रावधान था। जब तक संचालनालय में एक अपर संचालक का दखल था, बिना राशन दुकान जाए सब दुकानों में बचत को ठीक बता दिया गया।


    इस अधिकारी के हटने के बाद संचालक ने ऐसी व्यवस्था की है कि बिना राशन दुकान जाए भौतिक सत्यापन नहीं होगा। इस बार तकनीकी त्रुटि का प्रावधान भी हटा दिया गया है जिसके आड़ में पूर्व अपर संचालक ने अरबों के घोटाले को तकनीकी त्रुटि बताकर घालमेल करवाया गया है। मैदानी अमले का कहना है कि खाद्य संचालनालय ने सितंबर 2022 के बचत स्टॉक के बाद आबंटन संचालनालय ने जारी किया है। संचालनालय के ही विवादास्पद अधिकारी न तेरह हजार राशन दुकानों का घोषणा पत्र गायब करवा दिया है।

    सितंबर 2022से सौ फीसदी आबंटन जारी किया गया है। इस कारण ये बताया जाना चाहिए कि किस राशन दुकान में कितना बचत है, ताकि जांच हो सके। राशन दुकानदारो ने मांग किया है कि चार साल में दस बार जांच कराई जा चुकी है। संचालनालय के अधिकारी एनआईसी में गड़बड़ी कर हर बार बचत की मात्रा को बदल रहे है। राशन दुकान संघ के पदाधिकारी मंत्री, सचिव, संचालक से मिलकर जांच से पहले दोषी अधिकारी को निलंबित करने और जांच एजेंसी से उसके क्रिया कलाप की जांच का ज्ञापन देने जा रहे है