Category: BIG NEWS

  • ज‍ियो: अब प्रीपेड रिचार्ज पर नहीं मिलेगा फुल टॉक टाइम

    ज‍ियो: अब प्रीपेड रिचार्ज पर नहीं मिलेगा फुल टॉक टाइम

    द‍िल्‍ली। अगर आप भी है र‍िलायंस ज‍ियो के ग्राहक है तो यह खबर जरूर पढ़ लें। बता दें कि जियो ने अपने प्रीपेड रिचार्ज प्लान में मिलने वाले फुल टॉक टाइम बेनिफिट को खत्म कर दिया है। शुरूआत‍ के समय में जियो को कम कीमत में ज्यादा बेनिफिट देने वाली कंपनी के तौर पर जाना जाता रहा है। ऐसे में अचानक फुल टॉक टाइम बेनिफिट को खत्म किया जाना सब्सक्राइबर्स के लिए एक चौंकाने वाली खबर है। हाल ही में जियो ने घोषणा की थी कि अब वह दूसरे नेटवर्क पर किए जाने वाले कॉल के बदले सब्सक्राइबर्स से 6 पैसे प्रति मिनट का इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज लेगा। इसके बाद से ही जियो सब्सक्राइबर्स के साथ ही टेलिकॉम इंडस्ट्री में काफी हलचल देखी जा रही है।

    ज‍ियो के इन प्लान्स पर होगा असर

    बता दें कि जियो के पास 10 रुपये से लेकर 1,000 रुपये के बीच के टॉक टाइम प्लान मौजूद हैं। ये प्लान्स पहले फुल टॉक टाइम के साथ आते थे, लेकिन अब इनमें फुल टॉक टाइम मिलना बंद हो गया है। अब जियो के 10 रुपये वाले टॉक टाइम रिचार्ज में यूजर्स को 7.47 रुपये का टॉक टाइम ऑफर किया जा रहा है। इसी प्रकार 20 रुपये में 14.95 रुपये, 50 रुपये में 39.37 रुपये, 100 रुपये में 81.75 रुपये, 500 रुपये में 420.73 रुपये और 1000 रुपये वाले प्लान में 844.46 रुपये का टॉक टाइम दिया जा रहा है। हालांकि लोगों कि माने तो इसे जियो द्वारा लगाए गए आईयूसी के असर मान रहे हैं।

    सब्सक्राइबर्स को कंपनी के फैसले से लगा झटका

    जियो सब्सक्राइबर्स को कंपनी द्वारा ल‍िया गया फैसला, यानि फुल टॉक टाइम बेनिफिट को खत्म किए जाने से झटका लगा है। जियो शुरुआत से अपने प्रीपेड पोर्टफोलियो में कई सारे प्लान ऑफर करता रहा है। इनमें उन प्लान्स की भी कमी नहीं थी जिनमें सब्सक्राइबर्स को रिचार्ज पर फुल टॉक टाइम ऑफर किया जाता था। फुल टॉक टाइम वाले प्रीपेड प्लान उन यूजर्स को काफी पसंद थे जिन्हें ज्यादा वॉइस कॉलिंग की जरूरत पड़ती थी। इन प्रीपेड टॉक टाइम प्लान्स में किसी किसी प्रकार का डेटा नहीं ऑफर किया जाता था। वहीं जियो के प्लान्स में मजेदार यह है कि अब अलग-अलग डेली डेटा लिमिट वाले पॉप्युलर डेटा प्लान आईयूसी टॉक टाइम वाउचर के साथ आ रहे हैं। इससे यूजर्स को प्रीपेड डेटा रिचार्ज के साथ आईयूसी रिचार्ज के कई ऑप्शन मिल गए है।

    इन कारणों से जियो ने क‍िया बदलाव

    जानकारी दें कि फुल टॉक टाइम बेनिफिट को खत्म किए जाने की वजह जियो और दूसरे टेलिकॉम ऑपरेटर्स के बीच चल रहे टैरिफ वॉर को माना जा सकता है। इसकी शुरुआत तब हुई थी जब एयरटेल ने जियो पर आरोप लगाया कि उसने अपनी रिंग टाइम को घटाकर 25 सेकंड कर दिया है। इस कारण जियो सब्सक्राइबर्स द्वारा दूसरे नेटवर्क पर किए जाने वाले कॉल अक्सर मिस हो जाते थे। इसके बदले जियो के नेटवर्क पर कॉल बैक आने की संख्या बढ़ गई थी। वहीं जियो पर दूसरे नेटवर्क ऑपरेटर द्वारा कॉल आने की स्थिति में जियो को उस ऑपरेटर से आईयूसी का फायदा होता था। दूसरी ओर इसके बाद एयरटेल ने भी अपने रिंग टाइम को 25 सेकंड करने का फैसला किया। इसके बाद जियो को आईयूसी इंट्रोड्यूस करना पड़ा। कंपनी को इससे दूसरे नेटवर्क पर किए जाने वाली कॉल के लिए खुद पैसे नहीं देने पड़ेंगे क्योंकि वह अब इसे सब्सक्राइबर्स से वसूल रही है। आईयूसी चार्ज को लेकर कहा जा रहा है कि ट्राई इसे इस साल के अंत तक खतम कर देगा।

  • सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित जमीन पर अपना दावा छोड़ा, राम मंदिर सुनवाई का आज अंतिम दिन

    सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित जमीन पर अपना दावा छोड़ा, राम मंदिर सुनवाई का आज अंतिम दिन

    दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में हिन्दू महासभा ने जो दस्तावेज पेश किए उनमें बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष रहे किशोर कुणाल की पुस्तक ‘अयोध्या रीविजिटेड’ के कुछ अंश का जिक्र था। इसमें कहा गया है कि विवादित स्थल पर शुरू से ही मंदिर का अस्तित्व था।

    सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन अचानक से उग्र हो उठे। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के 72 वर्षीय वकील राजीव धवन ने हिन्दू महासभा के कुछ कागज़ात फाड़ डाले। हिन्दू महासभा ने उन्हें कुछ कागज़ात और नक़्शे दिए थे। अदालत में ही धवन ने उन्हें एक-एक कर फाड़ना शुरू कर दिया। जब मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने उन्हें टोका तो उन्होंने कुछ और पन्ने फाड़ डाले।

    बता दें कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित जमीन पर अपना दावा छोड़ दिया है। सुन्नी वक्फ बोर्ड इस संबंध में शीर्ष अदालत में हलफनामा दायर कर सकती है। मध्यस्थता पैनल ने इसकी पुष्टि की है। इस ख़बर के बाद अयोध्या मामले का घटनाक्रम तेजी से बदलता नज़र आ रह है।

    बुधवार को राम मंदिर मामले की सुनवाई का 40वाँ और अंतिम दिन है। सीजेआई ने साफ़-साफ़ कह दिया है कि सभी निर्धारित पक्षों को निश्चित समयावधि से अधिक नहीं दी जाएगी और आज शाम 5 बजे तक सुनवाई पूरी कर ली जाएगी। हिन्दू पक्ष की ओर से दलील पेश करते हुए वकील सीएस वैद्यनाथन ने इस तरफ कोर्ट का ध्यान दिलाया कि मुस्लिम पक्ष ने अभी तक ऐसा कोई भी सबूत नहीं दिया है, जिससे पता चले कि विवादित भूमि पर उनका एकाधिकार है। उन्होंने कहा कि 1857 से 1934 के बीच मुस्लिम पक्ष ने वहाँ नमाज़ पढ़ी होगी, लेकिन उसके बाद ऐसा कुछ भी होने का कोई सबूत नहीं है।

    वैद्यनाथन ने ये कहते हुए अपनी दलीलें समाप्त की कि नमाज़ पढ़ने के लिए तो काफी सारी जगहें हो सकती हैं, लेकिन राम जन्मभूमि सिर्फ़ एक ही जगह है और उसे बदला नहीं जा सकता। वहीं राम मंदिर पर पहली याचिका दाखिल करने वाले गोपाल सिंह विशारद के वकील ने इस बात पर जोर दिया कि उस स्थल पर पहले से पूजा होती रही है। वकील रंजीत कुमार ने सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की याचिका खरिज करने की अपील के साथ अपनी बात समाप्त की। वहीं निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बाबा अभिराम दास विवादित स्थल पर स्थित स्ट्रक्चर में मुख्य पुजारी थे।

    हिन्दू महासभा ने जो दस्तावेज पेश किए उनमें बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष रहे किशोर कुणाल की पुस्तक ‘अयोध्या रीविजिटेड’ के कुछ अंश का जिक्र था। इसमें कहा गया है कि विवादित स्थल पर शुरू से ही मंदिर का अस्तित्व था। राजीव धवन ने जब आपत्ति जताई तो सीजेआई राजन गोगोई ने कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो सभी जज उठ कर चले जाएँगे। हिन्दू महासभा के वकील विकास ने जब सीजेआई को पुस्तक देने की बात कही तो उन्होंने कहा कि पुस्तक उन्हें दे दी जाए ताकि वो दिवाली तक पढ़ते रहें और नवम्बर तक पढ़ते रहें। सीजेआई ने उन्हें पुस्तक पर हस्ताक्षर कर के देने को कहा। सीजेआई ने धवन को फटकारते हुए कहा कि चिल्लाना व्यर्थ है।

    वहीं, विवादित ज़मीन पर अपना दावा छोड़ने के एवज में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने विचित्र शर्तें रखते हुए माँग किया कि अयोध्या में 22 मस्जिदों के रख-रखाव की जिम्मेदारी सरकार उठाए। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने अंतिम शर्त रखी है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के नियंत्रण में जितने भी धार्मिक स्थल हैं, उनकी स्थिति की जाँच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट एक समिति बनाए। मुख्य न्यायाधीश आज सुनवाई के दौरान समय को लेकर एकदम सजग दिखे और निर्मोही अखरा के वकील ने जब डेढ़ घण्टे माँगे तो उन्हें समय की कमी का हवाला देकर 1 बजे तक का समय दिया गया।

  • इस मामले में पाकिस्तान से पीछे रह गया भारत…

    इस मामले में पाकिस्तान से पीछे रह गया भारत…

    नई दिल्ली। वैश्विक भूख सूचकांक (ग्लोबल हंगर इंडेक्स) (Global Hunger Index) में भारत 102वें स्थान पर पिछड़ गया है। बता दें कि यह दक्षिण एशियाई देशों का सबसे निचला पायदान है। इस लिस्ट में भारत पाकिस्तान (India Pakistan) से भी पीछे हो गया है।

    पाकिस्तान इस वर्ष भारत से आगे निकलकर 94वां स्थान हासिल किया है। 2015 में भारत की ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआई) रैंकिंग 93 थी। उस वर्ष दक्षिण एशिया में सिर्फ पाकिस्तान ही ऐसा देश था जो इस इंडेक्स में भारत से नीचे आया था।

    2014 से 2018 के बीच जुटाए गए आंकड़ों से तैयार ग्लोबल हंगर इंडेक्स विभिन्न देशों में कुपोषित बच्चों की आबादी, उनमें लंबाई के अनुपात में कम वजन या उम्र के अनुपात में कम लंबाई वाले पांच वर्ष तक के बच्चों का प्रतिशत और पांच वर्ष तक के बच्चे की मृत्यु दर पर आधारित हैं।

    ब्रिक्स देशों में सबसे खराब इस देश का प्रदर्शन
    बाकी दक्षिण एशियाई देश 66वें से 94 स्थान के बीच हैं। भारत ब्रिक्स के बाकी देशों से बहुत पीछे है। (BRICKS- ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन और साउथ अफ्रीका)। इसके अलावा ब्रिक्स देशों में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला देश दक्षिण अफ्रीका है, उसकी 59वीं रैंक है।

    साल 2000 के बाद से नेपाल ने की अच्छी प्रगति
    जीएचआई पर पेश एक रिपोर्ट कहती है कि भारत में 6 से 23 महीनों के सिर्फ 9.6% बच्चों को ही न्यूनतम स्वीकृत भोजन उपलब्ध हो पाता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी हालिया रिपोर्ट में तो यह आंकड़ा 6.4% ही बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2000 के बाद से नेपाल ने इस मामले में सबसे ज्यादा सुधार किया है।

    भूख की स्थिति के आधार पर देशों को 0 से 100 अंक दिए गए और जीएचआई तैयार किया गया। इसमें 0 अंक सर्वोत्तम यानी भूख की स्थिति नहीं होना है। 10 से कम अंक का मतलब है कि देश में भूख की बेहद कम समस्या है।

    इसी तरह, 20 से 34.9 अंक का मतलब भूख का गंभीर संकट, 35 से 49.9 अंक का मतलब हालत चुनौतीपूर्ण है और 50 या इससे ज्यादा अंक का मतलब है कि वहां भूख की बेहद भयावह स्थिति है।

    भारत को 30.3 अंक मिला है जिसका मतलब है कि यहां भूख का गंभीर संकट है। चुनौतीपूर्ण स्थिति वाली श्रेणी में सिर्फ चार देश हैं जबकि सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक बेहद भयावह स्थिति वाली कैटिगरी में है।

    इस वजह से बढ़ रही है भूखमरी
    इस रिपोर्ट में दी गई चेतावनी के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण भूख का संकट उच्च स्थर पर पहुंच गया है। इससे दुनिया के पिछले क्षेत्रों में लोगों के लिए भोजन की उपलब्धता और कठिन हो गया। इतना ही नहीं, जलवायु परिवर्तन से भोजन की गुणवत्ता और साफ-सफाई भी प्रभावित हो रही है।

    फसलों से मिलने वाले भोजन की पोषण क्षमता भी घट रही है। रिपोर्ट कहती है कि दुनिया ने वर्ष 2000 के बाद भूख के संकट को कम तो किया है, लेकिन इस समस्या से पूरी तरह निजात पाने की दिशा में अब भी लंबी दूरी तय करनी होगी।

  • एंकर के कमेंट पर भड़के राज ठाकरे, बोले- माइक फेंक कर मारूं?

    एंकर के कमेंट पर भड़के राज ठाकरे, बोले- माइक फेंक कर मारूं?

    मुंबई. महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे को उनके आक्रामक तेवरों के लिए जाना जाता है. हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने इंटरव्यू कर रहे पत्रकार से ये तक कह दिया कि माइक फेंक कर मारूं तभी राज ठाकरे लगूंगा क्या. दरअसल महाराष्ट्र में 22 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होने हैं. इस चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी बातें पहुंचाने में लगे हैं. इसी सिलसिले में मनसे सुप्रीमो राज ठाकरे एबीपी न्यूज को इंटरव्यू देने पहुंचे. राज का इंटरव्यू ले रहे थे वरिष्ठ पत्रकार दिबांग.दिबांग द्वारा राज ठाकरे का इंटरव्यू तमाम लोगों के बीच हो रहा था. मंच से दिबांग ने राज ठाकरे से पूछ लिया कि, ‘आपको ईडी वाले 8 घंटे तक बैठाए रखे थे. ऐसा क्या हो रहा था अंदर इतनी देर तक.’ इस पर राज ठाकरे ने कहा कि बातचीत सिर्फ डेढ़ घंटे की हुई थी लेकिन किसी को दिखाने के लिए वो लोग मुझे 8 घंटे तक बिठाए रखे थे.

    राज ठाकरे के जवाब पर दिबांग ने कहा कि अब राज ठाकरे वो राज ठाकरे नहीं रह गए जिसके लिए उन्हें जाना जाता था, अब राज ठाकरे बदल गए हैं. दिबांग के इस कमेंट पर राज ठाकरे ने अपने अंदाज में कहा कि किसी के कान के नीचे बजाऊं तभी राज ठाकरे लगूंगा क्या? राज यहीं नहीं रुके. वह आगे कहने लगे कि आप चाहते क्या हैं..ये माइक फेंक कर मारूं तभी राज ठाकरे लगूंगा.


    राज ठाकरे के इस तरह के जवाब से दिबांग शांत हो गए. राज ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सफाई दी कि आपको क्या लगता है कि, ‘मैं घर में भी ऐसा ही रहता हूं. गुस्सा जानबूझकर नहीं लाता. जब आंदोलन करता हूं तो वैसा मूड अपने आप हो जाता है.’

  • लोग कहते थे ‘देख नहीं पाती फिर इतना क्यों पढ़ती हो’ मेहनत के दम पर किया वो मुकाम हासिल जो लोगो ने सोचा भी नही था…

    लोग कहते थे ‘देख नहीं पाती फिर इतना क्यों पढ़ती हो’ मेहनत के दम पर किया वो मुकाम हासिल जो लोगो ने सोचा भी नही था…

    देश की पहली दृष्टिबाधित महिला आईएएस अधिकारी प्रांजल पाटिल ने सोमवार को कहा कि उन्होंने ‘कभी भी हार नहीं मानी.’ पाटिल को तिरुवनंतपुरम की उप-जिलाधिकारी का पद मिला है. केरल कैडर की अधिकारी पाटिल ने कहा, ‘हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए क्योंकि हमारे प्रयासों से हम सभी को वह सफलता मिलेगी जो हम चाहते हैं.’ प्रांजल पाटिल की सक्सेस स्टोरी किसी मिसाल से कम नहीं है.

    महाराष्ट्र के उल्हासनगर की रहने वाली पाटिल (30) ने उस समय अपनी आंख की रोशनी खो दी थी, जब वह मात्र छह साल की थीं. इसके बाद प्रांजल को दृष्टिहीन बच्चों के स्कूल में जाना पड़ा, जो कि मराठी मीडियम में था. प्रांजल शुरू में घबरा गई थीं, लेकिन बाद में उन्होंने पिछली बातों को भुलाना और नया सीखना शुरू कर दिया.

    12वीं में किया था टॉप
    अपनी मेहनत और लगन के दम पर प्रांजल ने 12वीं में टॉप किया. उन्होंने आर्ट स्ट्रीम के साथ अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की. आर्टस में टॉप करने के बाद ही प्राजल के जीवन की असली चुनौती शुरू हुई. उन्होंने घर से दूर एक बड़े कॉलेज में एडमिशन लिया और रोजाना घर से ही अप-डाउन करने का फैसला किया.
    भीड़-भाड़ में अक्सर उनको परेशानी का सामना करना पड़ता था. इस दौरान कई लोगों ने उनकी मदद भी की पर साथ ही यह सवाल भी करते थे कि घर से दूर एडमिशन लेने की क्या जरूरत थी, जिसका मतलब यही होता था कि जब दृष्टिहीन हो तो इतना क्यों पढ़ रही हो।

    भीड़-भाड़ में अक्सर उनको परेशानी का सामना करना पड़ता था. इस दौरान कई लोगों ने उनकी मदद भी की पर साथ ही यह सवाल भी करते थे कि घर से दूर एडमिशन लेने की क्या जरूरत थी, जिसका मतलब यही होता था कि जब दृष्टिहीन हो तो इतना क्यों पढ़ रही हो.

    एमफिल के साथ की UPSC की तैयारी
    प्रांजल ने साल 2015 में दिल्ली से एमफिल करने का निर्णय लिया. इसके साथ ही उन्होंने UPSC की तैयारी भी शुरू कर दी. आमतौर पर लोग इस परीक्षा की तैयारी के लिए ड्राप लेते हैं, पर प्रांजल के पास इतना समय नहीं था. इसलिए उन्होंने साथ में ही दोनो काम करने का निर्णय लिया.

    आसान नहीं था किताबों को सुनना
    प्रांजल आम किताबों को पढ़ नहीं सकती थी, इसलिए पहले वो किताबें कम्प्यूटर में स्कैन करती थीं, फिर कम्प्यूटर उनको सुनाता था. कम्प्यूटर को सुनना कतई आसान काम नहीं था, कई बार वे झुंझला जाती थीं, गुस्सा भी आता था, पर कोई दूसरा जरिया नहीं था. इसलिए वे फिर से जुट जाती थीं.

    राइटर चुनना भी था मुश्किल
    UPSC की परीक्षा में दृष्टिबाधितों को 3 की बजाय 4 घंटे मिलते हैं, पर अपने जवाब को बिना देखे दूसरे के जरिए लिखवाना बिल्कुल भी आसान नहीं था. इसके लिए प्रांजल को तेजी लिखने वाली साथी की जरूरत थी. हालांकि उनकी यह खोज जल्दी ही पूरी हो गई और उनको मनमुताबिक साथी मिल गया.

    773वीं रैंक मिलने पर भी हुई रिजेक्ट
    UPSC में 773वीं रैंक लाने पर आम इंसान बहुत खुश होता है और उसका पूरा परिवार जश्न मनाता है, मगर 2016 में UPSC की परीक्षा में 773वीं रैंक हासिल करने के बावजूद प्रांजल को रिजेक्ट कर दिया गया. दरअसल, उनको इंडियन रेलवे अकाउंट सर्विस का काम दिया गया था और वो कुछ भी देखने में असमर्थ थीं.

    अगले प्रयास में हासिल की सफलता
    773वीं रैंक मिलने के बाद भी रिजेक्ट होने पर उनको दुख तो हुआ पर उन्होंने हार नहीं मानी और अगले साल इसमें सुधार करते हुए 124 वीं रैंक हासिल की. पाटिल को उनकी प्रशिक्षण अवधि के दौरान एर्नाकुलम सहायक कलेक्टर नियुक्त किया गया था.

  • गर्म राख की पाइप फटने से मोनेट के इंजीनियर की मौत

    गर्म राख की पाइप फटने से मोनेट के इंजीनियर की मौत

    पाइप की सफाई करने के दौरान हुआ हादसा

    खरसिया। मोनेट के एक कर्मचारी की काम के दौरान हादसे की वजह से मौत हो गई है। हादसे का वक़्त दोपहर लगभग 12:30 बजे की बताया जा रहा है। हादसा उस समय हुआ जब पावर प्लांट के एक पाइप जाम होने की वजह से मरम्मत किया जा रहा था, बताया जा रहा है कि पावर प्लांट से निकलने वाला गर्म राख की पाइप जाम हो गई थी, जिसे ठीक करने सीनियर इंजीनियर राम चंद्र साहू पाइप को खोलकर कुछ कर रहे थे कि इसी दौरान गर्म राख तेजी से बाहर निकल गया। बताया जा रहा है कि इससे सीनियर इंजीनियर चपेट में आ गया और बुरी तरह से घायल हो गया, पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार जिंदल फोर्टिस में इलाज के दौरान करीब 4:30 बजे रामचंद्र साहू की मौत हो गई। प्रबंध ने बताया कि मृतक के परिजनों को इस घटना की इत्तला दे दी गई है। मोनेट इस्पात अपना पावर प्लांट शुरू करने की तैयारी में है और इसी संबंध में मशीनों की साफ सफाई हो रही थी फ्लाई ऐश की पाइप में फ्लाई ऐश जमा हुआ था, वैक्यूम मिलने पर फ़ोर्स के साथ वह बाहर आ गया और उसके पेट के अंदरूनी भाग को क्षतिग्रस्त कर दिया जिससे उसकी मौत हो गई।

    पहले साधारण घटना बताया

    इस घटना को मोनेट जेएसडब्ल्यू प्रबंधन की ओर से पहले तो साधारण कहा जाता रहा और फिर अब मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की बात भी कही जा रही है।

    क्या है 50 लाख मुआवजे का सच

    पूरे घटनाक्रम के संबंध में चर्चा करने पर प्रबंधन की ओर से यह जानकारी दी गई कि इस ग्रेड के अधिकारी का कंपनी की ओर से जो बीमा कराया जाता है, उसकी राशि लगभग 50 लाख होती है ऐसे में मृतक सीनियर इंजीनियर के परिजनों को भी बीमा की राशि मुआवजे के तौर पर दी जाएगी।

  • 700 पुलिसवाले लगे 200 CCTV खंगाले, 24 -घंटे में PM की भतीजी का बैग छीनने वाले पकड़े, जनता ने पूछा हमारा नंबर कब आएगा

    700 पुलिसवाले लगे 200 CCTV खंगाले, 24 -घंटे में PM की भतीजी का बैग छीनने वाले पकड़े, जनता ने पूछा हमारा नंबर कब आएगा

    दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भतीजी दमयंती बेन मोदी से एलजी हाउस के पास शनिवार सुबह पर्स छीनने वाले दोनों आरोपियों को पुलिस ने अगले ही दिन गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से पूरा सामान भी बरामद कर लिया है। यह मामला महज दो दिनों के भीतर पूरी तरह से सुलझ गया और आरोपी शिकंजे में आ गए। सूत्रों के मुताबिक इस हाईप्रोफाइल केस को सुलझाने में 700 पुलिसकर्मी लगे थे। स्नैचरों की सीसीटीवी फुटेज पुलिस को मिली थी।

    उनके रूट मैप को चेक करने के लिए पुलिस ने 200 CCTV की फुटेज खंगाली। इस तरह पुलिस हरियाणा के सोनीपत पहुंची और वारदात खुली। गिरफ्तार आरोपियों में सदर बाजार निवासी गौरव (21) है, जो सोनीपत में रिश्तेदार के यहां छिपा था। उसने स्नैचिंग में इस्तेमाल स्कूटी सुल्तानपुरी में मौसी के यहां रखी थी। दूसरे आरोपी बादल उर्फ आकाश (22) को सुल्तानपुरी से पकड़ा गया। इसके पास से दमयंती बेन की घड़ी और छिनैती में गए दस्तावेज बरामद हुए हैं।

    इस घटना के बहाने दिल्ली में राजनीति भी शुरू हो गई है। बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने स्नैचिंग के लिए घुसपैठियों को जिम्मेदार ठहराया तो सीएम अरविंद केजरीवाल ने जवाब देते हुए कहा है कि दोषी बाहरी हो या अंदरूनी, सबको सजा मिलनी चाहिए।

    आम लोग बोले, हमारा नंबर कब आएगा

    पीएम की भतीजी संग स्नैचिंग के मामले में पुलिस की तेजी को देखते हुए अब आम लोग अपने मामलों का जिक्र कर रहे हैं। आम लोगों ने सोशल मीडिया पर अपने मामलों का जिक्र करते हुए दिल्ली पुलिस से पूछा कि उनके केस कब सॉल्व होंगे। पिछले महीने कनॉट प्लेस इलाके में बदमाशों ने एक दंपती से गन पॉइंट पर लूट की थी।

  • IPS उदय किरण को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत

    IPS उदय किरण को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत

    रायपुर। महासमुंद पदस्थापना के दौरान तत्कालीन विधायक से विवाद के बाद सुर्ख़ियों में आए IPS उदय किरण को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली हुई है। महासमुंद पदस्थापना के दौरान तत्कालीन विधायक से विवाद के बाद IPS उदय किरण के विरुद्ध हाईकोर्ट में रिट दायर किया गया था, जिसमें हाईकोर्ट ने अपराध दर्ज किए जाने के निर्देश दिए थे। IPS उदय किरण ने इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई करते हुए सुको ने स्टे दे रखा है।

    जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस एम आर शाह की संयुक्त बेंच ने यह स्थगन आदेश बीते 3 जून को दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के द्वारा रिट क्रमांक 480/2019 पर बीते 12 मार्च 2019 के जारी आदेश पर रोक लगा दिया है।

    दरअसल इस आशय की खबरें वायरल की जा रही थीं कि, IPS उदय किरण के विरुद्ध अपराध दर्ज हो गया है, और वे निलंबित भी हो सकते हैं।इन वायरल खबरों का आधार हाईकोर्ट का वही आदेश
    बताया गया था, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय का स्थगन मिला हुआ है।

    यह था पूरा मामला

    आपको बता दें कि गेट तोड़ने के एक विवाद से पूरा प्रकरण शुरू हुआ था। मिनी स्टेडियम के हैण्डबॉल फील्ड के गेट तोड़ने को लेकर कोच अंकित ने कुछ बच्चों को मारा था, जिसके बाद थाने से पहुंचे एसआई ने कोच अंकित की दो थप्पड़ रसीद दिये। बाद में तत्कालीन विधायक भी मौके पर पहुंचे और फिर विरोध प्रदर्शन और पुलिसकर्मियों के साथ वाद-विवाद शुरू हो गया। इस घटना के बाद लाठी चार्ज कर दिया गया, जिसमें विधायक सहित 10 से ज्यादा लोग घायल हुए थे, वहीं कुछ पुलिसकर्मी भी पत्थरबाजी में चोटिल हुए थे।

  • छोटे भूखण्डों की रजिस्ट्री से लोगों को बड़ी राहत, एक जनवरी से अब तक 74,673 छोटे-भूखण्डों का हुआ पंजीयन

    छोटे भूखण्डों की रजिस्ट्री से लोगों को बड़ी राहत, एक जनवरी से अब तक 74,673 छोटे-भूखण्डों का हुआ पंजीयन

    रायपुर। छत्तीसगढ़ में छोटे भूखण्डों के पंजीयन शुरू करने से लोगों को बड़ी राहत मिली है। इस व्यवस्था से भू-खण्ड खरीदने और बेचने वाले दोनो पक्ष बड़ी राहत महसूस कर रहे है। छत्तीसगढ़ सरकार के छोटे भूखण्डों के पंजीयन व्यवस्था के तहत इस साल एक जनवरी से 11 अक्टूबर तक 74 हजार 673 दस्तावेजों का पंजीयन किया जा चुका है। इससे छोटे भूखण्ड धारियों को बहुत लाभ हुआ है।गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा 25 जुलाई 2019 से गाइड-लाइन दर में 30 प्रतिशत की कमी भी की गई। गाइड लाइन में कमी करने से 25 जुलाई से 11 अक्टूबर 2019 तक राज्य में 44 हजार 368 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ है तथा 252.70 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है जबकि पिछले साल इसी अवधि में 29 हजार 744 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ था तथा 155 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था।राज्य सरकार द्वारा मकान के विक्रय पर पंजीयन शुल्क में 2 प्रतिशत की छूट दी गई। जिसके तहत 1 अप्रैल से 11 अक्टूबर 2019 तक एक लाख 26 हजार 639 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ है तथा 621.56 करोड़ रूपए का राजस्व प्राप्त हुआ है जबकि विगत वर्ष इसी अवधि में 96 हजार 193 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ था तथा 427.57 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था। राज्य शासन ने पंजीयन की ऑनलाईन व्यवस्था की भी शुरूआत की है इससे पंजीयन का कार्य पहले की तुलना में बहुत आसान हुआ है साथ ही इससे पारदर्शिता भी बढ़ी है साथ ही पक्षकारों को उसी दिन पंजीयन कर दस्तावेज प्रदाय किया जा रहा है। ऑनलाइन भुगतान प्रक्रिया में ई-स्टाम्प सुविधा का विस्तार किया गया है, इससे आम जनता को सभी मूल्यों के सभी प्रकार के स्टाम्प 1061 केन्द्रों से आसानी से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ई-पंजीयन प्रणाली में नेटवर्क प्रमुख समस्या रही है। इसके निराकरण के लिए बीएसएनएल के नेटवर्क में सुधार किया गया है, इससे अब नेटवर्क स्लो की समस्या दूर हो गई है। बीएसएनएल केबल कट की समस्या के निराकरण के लिए एयरटेल से वैकल्पिक कनेक्शन भी आगामी एक माह में चालू हो जाएगा, इससे यह समस्या भी दूर हो जाएगी। प्री रजिस्ट्रेशन प्रावधान को सॉफ्टवेयर में लागू कर दिया गया है। अक्टूबर माह में सभी उप पंजीयक स्तर पर प्रशिक्षण प्रदान कर इसकी सुविधा सभी आमजन को मिलने लगेगी। इस व्यवस्था के तहत कोई भी पक्षकार घर बैठे अपने दस्तावेज अपलोड कर उप पंजीयक कार्यालय में उपस्थित होने हेतु अपॉइंटमेंट ले सकेगा, जिससे काफी कम समय में दस्तावेज का पंजीयन हो जाएगा। उप पंजीयन कार्यालयों में तथा पक्षकारों के लिए सुविधाओं का विस्तार भी किया जा रहा है। यहां सर्वसुविधायुक्त प्रतीक्षालय, स्वच्छ पेयजल आदि सुविधाएं विकसित की जा रही है।
  • एडिशनल एसपी ऋचा मिश्रा के खिलाफ रायपुर में एफआईआर दर्ज

    एडिशनल एसपी ऋचा मिश्रा के खिलाफ रायपुर में एफआईआर दर्ज

    रायपुर। राजधानी की कोतवाली पुलिस में बिलासपुर की अधिवक्ता और चर्चित एक्टिविस्ट प्रियंका शुक्ला ने दूर्ग रेंज में पदस्थ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऋचा मिश्रा और रायपुर निवासी ममता शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। कोतवाली पुलिस ने एडिशनल एसपी ऋचा मिश्रा और ममता शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।


    कोतवाली में दर्ज प्राथमिकी में उल्लेख है कि, दिनांक12 अक्टूबर की शाम 5 बजे श्रीमती प्रियंका शुक्ला अपने अधिवक्ता साथियों के साथ अपने मुवक्किल अंजलि जैन से मिलने जिला अस्पताल कालीबाड़ी रायपुर स्थित सखी सेंटर गई थी वहां ममता शर्मा एवं ऋचा मिश्रा पहले से ही मौजूद थे, वह मुझे देख कर बाहर आए और पूछने लगे कि तुम कौन हो अंजलि से तुम्हारा क्या काम है तुम शासकीय या प्राइवेट व्यक्ति हो कोर्ट के आदेश अनुसार तुम अंजलि से नहीं मिल सकते हो उसके माता-पिता ही मिल सकते हैं। मेरे द्वारा पूछने पर कि आप लोग कौन हैं क्या आप शासकीय हैं कहने पर ऋचा मिश्रा एवं ममता शर्मा ने मुझे गंदी गंदी गालियां देते हुए हाथ मुक्का से मारपीट करते हुए तुम जबरदस्ती मिलोगे तो जान से मार देंगे कहते हुए धक्का-मुक्की करने लगे तथा मेरे हाथ में रखे मोबाइल को लूटने की कोशिश भी करने लगे। ममता शर्मा बोलने लगी कि इसे अंदर कराओ पुलिस अधिकारी के ऊपर हाथ उठा रही है कहते हुए दोनों बांह को पकड़कर घसीटने लगे, घसीटने एवं मारपीट करने से मेरे बाएं हाथ कलाई कंधे में दर्द हो रहा है।


    पुलिस को दिए आवेदन मे उल्लेख है कि,अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला जिस पीड़िता से मिलने गईं थी, वो लगातार रो रही थी और उसे उक्त दोनों के द्वारा धमकाया जा रहा था।
    अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता प्रियंका शुक्ला ने बताया
    “मैं वहाँ जो कुछ हुआ उससे हतप्रभ हूँ.. मुझे मारते हुए अंदर खींचने और मोबाईल छिनने की कोशिश हुई क्योंकि जो कुछ हुआ उसकी मै रिकॉर्डिंग कर रही थी,मैं उस पीड़िता से मिलने गई थी, उस समय ऐसा करना स्तब्ध करता है”
    कोतवाली पुलिस ने प्रियंका शुक्ला के आवेदन पर 12 अक्टूबर की शाम 7 बजे अतिरिक्त पुलिस अधिक्षक ऋचा मिश्रा और रायपुर निवासी ममता शर्मा के खिलाफ भादवि की धारा 294, 506, 323, 34 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।